भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक – कक्षा 10 अर्थशास्त्र अध्याय 2
NCERT Classes | Marwari Mission 100™ | अंतिम अपडेट: जनवरी 2025
| भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक | |
|---|---|
| 🏭🌾🏦 प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक क्षेत्रक | |
| पाठ्यपुस्तक | आर्थिक विकास की समझ |
| कक्षा | 10वीं |
| विषय | सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) |
| अध्याय संख्या | 2 |
| बोर्ड | RBSE / CBSE / सभी राज्य बोर्ड |
| माध्यम | हिंदी |
| सत्र | 2025-26 |
| मुख्य विषय | GDP, क्षेत्रक, रोजगार, MGNREGA |
भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक (अंग्रेजी: Sectors of the Indian Economy) कक्षा 10 की NCERT अर्थशास्त्र पाठ्यपुस्तक "आर्थिक विकास की समझ" का दूसरा अध्याय है। इस अध्याय में हम आर्थिक गतिविधियों के विभिन्न क्षेत्रकों, सकल घरेलू उत्पाद (GDP), रोजगार, तथा संगठित और असंगठित क्षेत्रकों के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे।
आर्थिक गतिविधियों को उनकी प्रकृति के आधार पर तीन क्षेत्रकों में वर्गीकृत किया जाता है - प्राथमिक क्षेत्रक, द्वितीयक क्षेत्रक और तृतीयक क्षेत्रक। यह वर्गीकरण अर्थव्यवस्था की संरचना को समझने में सहायक है।
विषय सूची
आर्थिक गतिविधियों का वर्गीकरण
किसी भी अर्थव्यवस्था में अनेक प्रकार की आर्थिक गतिविधियाँ होती हैं। इन गतिविधियों को उनकी प्रकृति के आधार पर विभिन्न समूहों या क्षेत्रकों (Sectors) में वर्गीकृत किया जाता है। यह वर्गीकरण हमें अर्थव्यवस्था की संरचना को समझने में मदद करता है।
📘 परिभाषा
क्षेत्रक (Sector) अर्थव्यवस्था का वह भाग है जिसमें समान प्रकृति की आर्थिक गतिविधियाँ की जाती हैं। आर्थिक गतिविधियों को मुख्यतः तीन क्षेत्रकों में बाँटा जाता है।
वर्गीकरण के आधार
आर्थिक गतिविधियों को निम्नलिखित आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है:
• गतिविधि की प्रकृति के आधार पर - प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक क्षेत्रक
• स्वामित्व के आधार पर - सार्वजनिक क्षेत्रक और निजी क्षेत्रक
• रोजगार की स्थिति के आधार पर - संगठित क्षेत्रक और असंगठित क्षेत्रक
तीन क्षेत्रक - प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक
आर्थिक गतिविधियों की प्रकृति के आधार पर अर्थव्यवस्था को तीन क्षेत्रकों में विभाजित किया जाता है:
| क्षेत्रक | अन्य नाम | गतिविधि की प्रकृति | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| प्राथमिक क्षेत्रक | कृषि और संबद्ध क्षेत्रक | प्राकृतिक उत्पादों का निष्कर्षण | कृषि, मछली पालन, खनन, वानिकी, पशुपालन, डेयरी |
| द्वितीयक क्षेत्रक | औद्योगिक क्षेत्रक | विनिर्माण और प्रसंस्करण | कारखाने, निर्माण, कपड़ा उद्योग, इस्पात, ऑटोमोबाइल |
| तृतीयक क्षेत्रक | सेवा क्षेत्रक | सेवाएँ प्रदान करना | बैंकिंग, परिवहन, शिक्षा, IT, स्वास्थ्य, बीमा, होटल |
1. प्राथमिक क्षेत्रक (Primary Sector)
इस क्षेत्रक में वे गतिविधियाँ शामिल हैं जो सीधे प्रकृति से जुड़ी होती हैं। इसमें प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके उत्पादन किया जाता है। इसे कृषि और संबद्ध क्षेत्रक भी कहते हैं क्योंकि कृषि इसकी प्रमुख गतिविधि है।
ℹ️ उदाहरण
कृषि, पशुपालन, मछली पालन, वानिकी, खनन, डेयरी, मुर्गी पालन, बागवानी
2. द्वितीयक क्षेत्रक (Secondary Sector)
इस क्षेत्रक में प्राथमिक क्षेत्रक से प्राप्त कच्चे माल को विनिर्माण प्रक्रिया द्वारा तैयार माल में बदला जाता है। चूँकि यह क्षेत्रक उद्योगों से संबंधित है, इसलिए इसे औद्योगिक क्षेत्रक भी कहते हैं।
ℹ️ उदाहरण
कपड़ा मिलें, चीनी उद्योग, इस्पात कारखाने, ऑटोमोबाइल, भवन निर्माण, विद्युत उपकरण
3. तृतीयक क्षेत्रक (Tertiary Sector)
इस क्षेत्रक में वे गतिविधियाँ आती हैं जो सेवाएँ प्रदान करती हैं न कि वस्तुओं का उत्पादन करती हैं। ये सेवाएँ प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रकों के विकास में सहायक होती हैं। इसे सेवा क्षेत्रक भी कहते हैं।
ℹ️ उदाहरण
बैंकिंग, बीमा, परिवहन, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, IT सेवाएँ, पर्यटन, होटल, व्यापार
क्षेत्रकों की परस्पर निर्भरता
तीनों क्षेत्रक एक-दूसरे पर निर्भर हैं। प्राथमिक क्षेत्रक द्वितीयक क्षेत्रक को कच्चा माल प्रदान करता है। द्वितीयक क्षेत्रक वस्तुओं का निर्माण करता है। तृतीयक क्षेत्रक दोनों को सेवाएँ प्रदान करता है।
किसान कपास उगाता है
कारखाना कपड़ा बनाता है
परिवहन बाजार तक पहुँचाता है
सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product - GDP)
📘 परिभाषा
सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी देश में एक विशेष वर्ष के दौरान उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य है। यह अर्थव्यवस्था के आकार को मापता है।
GDP की गणना में केवल अंतिम वस्तुओं और सेवाओं को शामिल किया जाता है, मध्यवर्ती वस्तुओं को नहीं। ऐसा दोहरी गणना से बचने के लिए किया जाता है।
⚡ महत्वपूर्ण
अंतिम वस्तुएँ: जो उपभोग के लिए तैयार हों (जैसे ब्रेड, कार)
मध्यवर्ती वस्तुएँ: जो अन्य वस्तुओं के उत्पादन में प्रयुक्त हों (जैसे आटा, इस्पात)
GDP की गणना कौन करता है?
भारत में GDP की गणना केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) द्वारा की जाती है जो सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। प्रत्येक क्षेत्रक द्वारा उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को जोड़कर GDP निकाली जाती है।
क्षेत्रकों का GDP में योगदान
समय के साथ विभिन्न क्षेत्रकों का GDP में योगदान बदलता रहा है। स्वतंत्रता के समय प्राथमिक क्षेत्रक का योगदान सबसे अधिक था, परंतु अब तृतीयक क्षेत्रक सबसे बड़ा योगदानकर्ता है।
| वर्ष | प्राथमिक क्षेत्रक | द्वितीयक क्षेत्रक | तृतीयक क्षेत्रक |
|---|---|---|---|
| 1950-51 | 55% | 15% | 30% |
| 2000-01 | 26% | 24% | 50% |
| 2016-17 | 15% | 23% | 62% |
📈 प्रमुख प्रवृत्ति
समय के साथ प्राथमिक क्षेत्रक का GDP में योगदान घटा है (55% से 15%) जबकि तृतीयक क्षेत्रक का योगदान बढ़ा है (30% से 62%)। यह आर्थिक विकास का संकेत है और विकसित देशों में भी यही प्रवृत्ति देखी गई है।
क्षेत्रकों में रोजगार
जबकि तृतीयक क्षेत्रक GDP का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है, प्राथमिक क्षेत्रक अभी भी सबसे अधिक लोगों को रोजगार देता है। यह असंतुलन चिंता का विषय है।
| क्षेत्रक | GDP में हिस्सा (2017-18) | रोजगार में हिस्सा |
|---|---|---|
| प्राथमिक | 15% | 43% |
| द्वितीयक | 23% | 25% |
| तृतीयक | 62% | 32% |
⚠️ समस्या
प्राथमिक क्षेत्रक GDP में केवल 15% योगदान देता है, परंतु 43% श्रमिक इसी क्षेत्रक में कार्यरत हैं। इसका अर्थ है कि कृषि क्षेत्र में अधिक श्रमिक हैं और उत्पादकता कम है।
प्रच्छन्न बेरोजगारी (Disguised Unemployment)
📘 परिभाषा
प्रच्छन्न बेरोजगारी (छिपी हुई बेरोजगारी) वह स्थिति है जब किसी कार्य में आवश्यकता से अधिक लोग लगे हों। यदि कुछ लोगों को हटा दिया जाए तो उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
यह भारतीय कृषि क्षेत्र में बहुत आम है जहाँ परिवार के सभी सदस्य खेत पर काम करते हैं, भले ही सभी की आवश्यकता न हो।
📌 उदाहरण
एक छोटे खेत पर परिवार के 5 सदस्य काम करते हैं, जबकि वास्तव में 3 व्यक्ति ही काफी हैं। तो 2 व्यक्ति प्रच्छन्न बेरोजगार हैं। यदि इन्हें हटा दिया जाए तो भी उत्पादन वही रहेगा।
प्रच्छन्न बेरोजगारी के कारण
• कृषि में मौसमी प्रकृति के कारण वर्ष भर काम नहीं मिलता
• छोटी जोतें - जमीन कम, परिवार के सदस्य अधिक
• वैकल्पिक रोजगार का अभाव - गाँवों में अन्य कार्य नहीं
• परंपरागत कृषि पद्धतियाँ - कम उत्पादकता
संगठित और असंगठित क्षेत्रक
रोजगार की स्थिति के आधार पर अर्थव्यवस्था को संगठित क्षेत्रक और असंगठित क्षेत्रक में विभाजित किया जाता है।
| पहलू | संगठित क्षेत्रक | असंगठित क्षेत्रक |
|---|---|---|
| पंजीकरण | सरकार के पास पंजीकृत | छोटी, अपंजीकृत इकाइयाँ |
| नियम | श्रम कानूनों का पालन, निश्चित कार्य समय | कोई निश्चित नियम या समय नहीं |
| नौकरी सुरक्षा | सुरक्षित नौकरी, पेंशन, भविष्य निधि | कोई नौकरी सुरक्षा या लाभ नहीं |
| वेतन | नियमित वेतन, सवेतन छुट्टी | कम, अनियमित मजदूरी |
| उदाहरण | सरकारी कार्यालय, बड़ी कंपनियाँ, बैंक | छोटी दुकानें, निर्माण मजदूर, रेहड़ी-पटरी |
⚠️ चिंता का विषय
भारत में लगभग 80% से अधिक श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में कार्यरत हैं जहाँ उन्हें कोई सामाजिक सुरक्षा, नियमित वेतन या नौकरी की सुरक्षा नहीं मिलती।
सार्वजनिक और निजी क्षेत्रक
स्वामित्व के आधार पर अर्थव्यवस्था को सार्वजनिक क्षेत्रक और निजी क्षेत्रक में विभाजित किया जाता है।
| पहलू | सार्वजनिक क्षेत्रक | निजी क्षेत्रक |
|---|---|---|
| स्वामित्व | सरकार का स्वामित्व और नियंत्रण | निजी व्यक्तियों/कंपनियों का स्वामित्व |
| उद्देश्य | सार्वजनिक कल्याण | लाभ कमाना |
| उदाहरण | भारतीय रेलवे, BSNL, SBI, ONGC, भेल | रिलायंस, टाटा, HDFC, इन्फोसिस, विप्रो |
MGNREGA 2005 (मनरेगा)
📘 पूरा नाम
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम
(Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act)
MGNREGA 2005 में लागू हुआ और यह ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। इसे पहले NREGA कहा जाता था, बाद में महात्मा गांधी का नाम जोड़ा गया।
MGNREGA की प्रमुख विशेषताएँ
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| रोजगार गारंटी | प्रत्येक ग्रामीण परिवार को वर्ष में 100 दिन के रोजगार की गारंटी |
| समय सीमा | माँग के 15 दिनों के भीतर काम देना अनिवार्य |
| महिला आरक्षण | कुल रोजगार का एक-तिहाई (33%) महिलाओं के लिए आरक्षित |
| कार्यस्थल | निवास स्थान से 5 किमी के भीतर काम दिया जाना चाहिए |
| बेरोजगारी भत्ता | यदि काम नहीं दिया जाए तो बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य |
| कार्य का प्रकार | सड़क निर्माण, तालाब खुदाई, वृक्षारोपण, सिंचाई कार्य |
महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर
प्रश्न 1: अर्थव्यवस्था के तीन क्षेत्रक कौन से हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: अर्थव्यवस्था के तीन क्षेत्रक हैं:
(1) प्राथमिक क्षेत्रक: प्राकृतिक उत्पादों का निष्कर्षण (कृषि, खनन, मछली पालन)
(2) द्वितीयक क्षेत्रक: विनिर्माण और प्रसंस्करण (कारखाने, निर्माण)
(3) तृतीयक क्षेत्रक: सेवाएँ प्रदान करना (बैंकिंग, परिवहन, शिक्षा)
प्रश्न 2: GDP क्या है? इसकी गणना में केवल अंतिम वस्तुओं को क्यों शामिल किया जाता है?
उत्तर: GDP (सकल घरेलू उत्पाद) किसी देश में एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य है। GDP की गणना में केवल अंतिम वस्तुओं को शामिल किया जाता है ताकि दोहरी गणना से बचा जा सके। यदि मध्यवर्ती वस्तुओं को भी गिना जाए तो एक ही वस्तु का मूल्य कई बार गिना जाएगा।
प्रश्न 3: प्रच्छन्न बेरोजगारी क्या है? उदाहरण दीजिए।
उत्तर: प्रच्छन्न बेरोजगारी वह स्थिति है जब किसी कार्य में आवश्यकता से अधिक लोग लगे हों और कुछ को हटाने पर भी उत्पादन प्रभावित न हो।
उदाहरण: एक छोटे खेत पर 5 परिवार के सदस्य काम करते हैं जबकि 3 व्यक्ति ही काफी हैं। 2 व्यक्ति प्रच्छन्न बेरोजगार हैं।
प्रश्न 4: संगठित और असंगठित क्षेत्रक में अंतर बताइए।
उत्तर:
संगठित क्षेत्रक: सरकार के पास पंजीकृत, श्रम कानूनों का पालन, नियमित वेतन, पेंशन, भविष्य निधि जैसी सुविधाएँ। उदाहरण: सरकारी कार्यालय, बड़ी कंपनियाँ।
असंगठित क्षेत्रक: छोटी अपंजीकृत इकाइयाँ, कोई नियम नहीं, कम व अनियमित वेतन, कोई सुविधाएँ नहीं। उदाहरण: छोटी दुकानें, निर्माण मजदूर।
प्रश्न 5: MGNREGA की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर: MGNREGA (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) 2005 की प्रमुख विशेषताएँ:
• प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 100 दिन के रोजगार की गारंटी
• माँग के 15 दिनों के भीतर काम देना अनिवार्य
• एक-तिहाई रोजगार महिलाओं के लिए आरक्षित
• निवास से 5 किमी के भीतर काम
• काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता
मुख्य शब्दावली
| शब्द | परिभाषा |
|---|---|
| प्राथमिक क्षेत्रक | प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित गतिविधियाँ (कृषि, खनन) |
| द्वितीयक क्षेत्रक | विनिर्माण और प्रसंस्करण गतिविधियाँ (कारखाने) |
| तृतीयक क्षेत्रक | सेवा प्रदान करने वाली गतिविधियाँ (बैंकिंग, परिवहन) |
| GDP | सकल घरेलू उत्पाद - देश में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं का मूल्य |
| प्रच्छन्न बेरोजगारी | आवश्यकता से अधिक श्रमिकों का किसी कार्य में लगा होना |
| संगठित क्षेत्रक | पंजीकृत उद्यम जहाँ श्रम कानून लागू होते हैं |
| असंगठित क्षेत्रक | छोटी अपंजीकृत इकाइयाँ जहाँ कोई नियम नहीं |
| MGNREGA | महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 |
यह भी देखें
• अध्याय 4: वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था
• कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान - सभी विषय
संदर्भ
1. NCERT पाठ्यपुस्तक - आर्थिक विकास की समझ, कक्षा 10
2. भारत सरकार - आर्थिक सर्वेक्षण
3. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO)
4. ग्रामीण विकास मंत्रालय - MGNREGA


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