मुद्रा और साख (Money and Credit) – कक्षा 10 अर्थशास्त्र अध्याय 3
NCERT Classes | Marwari Mission 100™ | अंतिम अपडेट: जनवरी 2025
| मुद्रा और साख (Money & Credit) | |
|---|---|
| 💰🏦💳 मुद्रा, बैंकिंग और ऋण व्यवस्था | |
| पाठ्यपुस्तक | आर्थिक विकास की समझ |
| कक्षा | 10वीं |
| विषय | सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) |
| अध्याय संख्या | 3 |
| बोर्ड | RBSE / CBSE / सभी राज्य बोर्ड |
| माध्यम | हिंदी |
| सत्र | 2025-26 |
| मुख्य विषय | मुद्रा, साख, बैंक, RBI, SHG |
मुद्रा और साख (अंग्रेजी: Money and Credit) कक्षा 10 की NCERT अर्थशास्त्र पाठ्यपुस्तक "आर्थिक विकास की समझ" का तीसरा अध्याय है। इस अध्याय में हम मुद्रा के इतिहास और विकास, साख की अवधारणा, बैंकिंग प्रणाली, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और स्वयं सहायता समूहों (SHG) के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे।
आधुनिक अर्थव्यवस्था में मुद्रा और साख अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुद्रा विनिमय का माध्यम है जबकि साख उत्पादन और व्यापार को बढ़ावा देती है। इस अध्याय में हम समझेंगे कि कैसे बैंक जमाकर्ताओं की राशि से ऋण देते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में साख की क्या स्थिति है।
विषय सूची
मुद्रा क्या है?
📘 परिभाषा
मुद्रा (Money) विनिमय का वह माध्यम है जिसे सरकार द्वारा कानूनी मान्यता प्राप्त होती है और जिसका उपयोग वस्तुओं और सेवाओं के क्रय-विक्रय में किया जाता है। भारत में मुद्रा रुपया (₹) है।
मुद्रा को "विधिग्राह्य मुद्रा" (Legal Tender) भी कहते हैं क्योंकि कोई भी व्यक्ति इसे भुगतान के रूप में स्वीकार करने से इनकार नहीं कर सकता। भारत में मुद्रा जारी करने का अधिकार केवल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को है।
आधुनिक मुद्रा के प्रकार
| मुद्रा का प्रकार | विवरण | जारीकर्ता |
|---|---|---|
| करेंसी नोट | ₹10, ₹20, ₹50, ₹100, ₹200, ₹500, ₹2000 के नोट | भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) |
| सिक्के | ₹1, ₹2, ₹5, ₹10, ₹20 के सिक्के | भारत सरकार (वित्त मंत्रालय) |
| जमा मुद्रा | बैंक खातों में जमा राशि (चेक, डेबिट कार्ड से निकासी) | वाणिज्यिक बैंक |
मुद्रा का इतिहास और विकास
मुद्रा का विकास एक लंबी प्रक्रिया रही है। प्राचीन काल में लोग वस्तु विनिमय प्रणाली (Barter System) का उपयोग करते थे जिसमें एक वस्तु के बदले दूसरी वस्तु दी जाती थी।
वस्तु विनिमय प्रणाली (Barter System)
📘 परिभाषा
वस्तु विनिमय प्रणाली वह व्यवस्था है जिसमें एक वस्तु के बदले दूसरी वस्तु का आदान-प्रदान किया जाता है, बिना मुद्रा के प्रयोग के।
📌 उदाहरण
एक किसान के पास गेहूं है और उसे कपड़े चाहिए। वह किसी बुनकर को ढूंढेगा जिसे गेहूं चाहिए और बदले में कपड़े मिलेंगे।
वस्तु विनिमय की समस्याएँ (आवश्यकताओं का दोहरा संयोग)
वस्तु विनिमय की सबसे बड़ी समस्या "आवश्यकताओं का दोहरा संयोग" (Double Coincidence of Wants) है। इसका अर्थ है कि विनिमय तभी संभव है जब:
• दोनों पक्षों को एक-दूसरे की वस्तु की आवश्यकता हो
• वस्तुओं का मूल्य समान हो या विभाज्य हो
• दोनों पक्ष एक ही समय और स्थान पर मिलें
⚠️ समस्या
यदि जूता बनाने वाले को गेहूं चाहिए, लेकिन किसान को जूते नहीं चाहिए तो विनिमय संभव नहीं है। यही आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की समस्या है।
मुद्रा का विकास क्रम
(अनाज, पशु, सीप)
(सोना, चाँदी, ताँबा)
(नोट)
(कार्ड, UPI)
मुद्रा के कार्य
मुद्रा अर्थव्यवस्था में अनेक महत्वपूर्ण कार्य करती है:
| कार्य | विवरण |
|---|---|
| विनिमय का माध्यम | मुद्रा से वस्तुओं और सेवाओं का क्रय-विक्रय आसान होता है |
| मूल्य का मापक | सभी वस्तुओं का मूल्य मुद्रा में व्यक्त किया जाता है |
| मूल्य का संचय | धन को भविष्य के लिए बचाकर रखा जा सकता है |
| स्थगित भुगतान का मानक | उधार लेन-देन में भविष्य के भुगतान का आधार |
साख क्या है?
📘 परिभाषा
साख (Credit) वह व्यवस्था है जिसमें ऋणदाता (जैसे बैंक, महाजन) उधारकर्ता को एक निश्चित राशि उपलब्ध कराता है जिसे एक निश्चित समय में ब्याज सहित वापस करना होता है।
साख की शर्तें (Terms of Credit)
जब कोई व्यक्ति ऋण लेता है तो उसे कुछ शर्तों का पालन करना होता है:
| शर्त | विवरण |
|---|---|
| ब्याज दर (Interest Rate) | मूलधन पर लगने वाला प्रतिशत शुल्क (जैसे 10% वार्षिक) |
| समर्थक ऋणाधार (Collateral) | ऋण के बदले गिरवी रखी जाने वाली संपत्ति (जमीन, मकान, सोना, FD) |
| दस्तावेजीकरण | आवश्यक कागजात और औपचारिकताएँ |
| भुगतान विधि | EMI, एकमुश्त या किस्तों में भुगतान |
साख के दो पहलू
साख के दो पहलू होते हैं - यह लाभकारी भी हो सकती है और हानिकारक भी।
| ✅ सकारात्मक पहलू (साख लाभकारी) | ❌ नकारात्मक पहलू (कर्ज जाल) |
|---|---|
|
उदाहरण: एक किसान ने ₹50,000 का ऋण लिया, फसल अच्छी हुई, ऋण चुका दिया और लाभ भी कमाया।
परिणाम: आय में वृद्धि, जीवन स्तर में सुधार, व्यापार विस्तार |
उदाहरण: एक किसान ने ₹50,000 का ऋण लिया, फसल खराब हो गई, ऋण नहीं चुका पाया, और अधिक ऋण लेना पड़ा।
परिणाम: कर्ज का जाल, संपत्ति बिक्री, गरीबी |
⚡ महत्वपूर्ण
कर्ज जाल (Debt Trap) वह स्थिति है जब उधारकर्ता पुराने ऋण को चुकाने के लिए नया ऋण लेता रहता है और कभी कर्जमुक्त नहीं हो पाता। यह विशेषकर अनौपचारिक स्रोतों से लिए गए ऊँची ब्याज दर वाले ऋणों में होता है।
बैंक और ऋण व्यवस्था
बैंक वित्तीय संस्थान हैं जो जमाकर्ताओं से धन स्वीकार करते हैं और ऋणकर्ताओं को ऋण देते हैं। बैंकों की आय का मुख्य स्रोत जमा पर दिए जाने वाले ब्याज और ऋण पर लिए जाने वाले ब्याज का अंतर है।
बैंक कैसे कार्य करते हैं?
बचत जमा करते हैं
(ब्याज: 3-4%)
जमा का 15% CRR के रूप में रखते हैं
85% ऋण के लिए उपलब्ध
ऋण लेते हैं
(ब्याज: 8-15%)
📊 बैंक का लाभ
ब्याज अंतर = ऋण पर ब्याज - जमा पर ब्याज
उदाहरण: यदि बैंक जमा पर 4% ब्याज देता है और ऋण पर 10% लेता है, तो उसका लाभ 6% है।
भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India - RBI)
📘 परिभाषा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भारत का केंद्रीय बैंक है जो 1 अप्रैल 1935 को स्थापित हुआ। इसका मुख्यालय मुंबई में है। RBI को "बैंकों का बैंक" भी कहा जाता है।
RBI के प्रमुख कार्य
| कार्य | विवरण |
|---|---|
| मुद्रा जारी करना | केवल RBI को भारत में करेंसी नोट जारी करने का अधिकार है |
| बैंकों का नियामक | सभी वाणिज्यिक बैंकों की निगरानी और नियंत्रण |
| सरकार का बैंकर | केंद्र और राज्य सरकारों के खाते संभालता है |
| मौद्रिक नीति | ब्याज दरें, CRR, रेपो रेट आदि निर्धारित करना |
| विदेशी मुद्रा प्रबंधन | विदेशी मुद्रा भंडार का प्रबंधन और विनिमय दर नियंत्रण |
औपचारिक और अनौपचारिक साख
भारत में साख के स्रोतों को दो भागों में बाँटा जा सकता है:
| औपचारिक साख स्रोत (Formal Sector) | अनौपचारिक साख स्रोत (Informal Sector) |
|---|---|
|
स्रोत:
• बैंक (SBI, PNB, HDFC आदि) • सहकारी समितियाँ • क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक • NABARD विशेषताएँ: ✓ कम ब्याज दर (8-12%) ✓ RBI द्वारा नियंत्रित ✓ पारदर्शी प्रक्रिया ✓ कानूनी सुरक्षा |
स्रोत:
• साहूकार/महाजन • व्यापारी • जमींदार • रिश्तेदार, मित्र विशेषताएँ: ✗ ऊँची ब्याज दर (24-60%) ✗ कोई नियंत्रण नहीं ✗ शोषण की संभावना ✗ कर्ज जाल का खतरा |
⚠️ चिंता का विषय
भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी लगभग 50% परिवार अनौपचारिक स्रोतों से ऋण लेते हैं जहाँ ब्याज दर बहुत ऊँची होती है (कभी-कभी 36-48% वार्षिक या उससे भी अधिक)।
स्वयं सहायता समूह (Self Help Groups - SHG)
📘 परिभाषा
स्वयं सहायता समूह (SHG) 15-20 लोगों (मुख्यतः महिलाओं) का एक छोटा समूह है जो नियमित रूप से मिलकर अपनी बचत एकत्र करते हैं और सदस्यों को कम ब्याज पर ऋण देते हैं। यह ग्रामीण क्षेत्रों में अनौपचारिक साख का एक सशक्त विकल्प है।
SHG की विशेषताएँ
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| सदस्य संख्या | 15-20 सदस्य (अधिकांशतः महिलाएँ) |
| बचत | सदस्य नियमित रूप से छोटी राशि (₹25-100) जमा करते हैं |
| ऋण | एकत्रित राशि से सदस्यों को कम ब्याज पर ऋण |
| समर्थक ऋणाधार | कोई संपत्ति गिरवी रखने की आवश्यकता नहीं |
| निर्णय प्रक्रिया | समूह की बैठक में सामूहिक निर्णय |
| बैंक लिंकेज | नियमित बचत के बाद बैंक से ऋण प्राप्त कर सकते हैं |
SHG के लाभ
• बिना समर्थक ऋणाधार के ऋण उपलब्ध
• कम ब्याज दर पर ऋण (महाजनों से कम)
• महिला सशक्तिकरण - आर्थिक स्वतंत्रता और आत्मविश्वास
• बचत की आदत का विकास
• सामाजिक मुद्दों पर चर्चा का मंच (स्वास्थ्य, शिक्षा, घरेलू हिंसा)
• बैंकिंग प्रणाली से जुड़ाव
✅ सफलता की कहानी
ग्रामीण बैंक (Grameen Bank) बांग्लादेश में मुहम्मद युनुस द्वारा स्थापित किया गया जो SHG मॉडल पर आधारित है। इसकी सफलता के लिए मुहम्मद युनुस को 2006 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला।
महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर
प्रश्न 1: मुद्रा क्या है? वस्तु विनिमय प्रणाली की मुख्य समस्या क्या थी?
उत्तर: मुद्रा विनिमय का वह माध्यम है जिसे सरकार द्वारा कानूनी मान्यता प्राप्त होती है और जिसका उपयोग वस्तुओं और सेवाओं के क्रय-विक्रय में होता है।
वस्तु विनिमय की मुख्य समस्या "आवश्यकताओं का दोहरा संयोग" थी - विनिमय तभी संभव था जब दोनों पक्षों को एक-दूसरे की वस्तु की आवश्यकता हो।
प्रश्न 2: साख की शर्तें क्या हैं? समर्थक ऋणाधार (Collateral) क्या है?
उत्तर: साख की शर्तों में शामिल हैं: ब्याज दर, समर्थक ऋणाधार, दस्तावेजीकरण और भुगतान विधि।
समर्थक ऋणाधार (Collateral) वह संपत्ति है जो उधारकर्ता ऋणदाता के पास ऋण की गारंटी के रूप में गिरवी रखता है। जैसे - जमीन, मकान, सोना, FD आदि। यदि ऋण नहीं चुकाया जाए तो ऋणदाता इस संपत्ति को बेच सकता है।
प्रश्न 3: औपचारिक और अनौपचारिक साख स्रोतों में अंतर बताइए।
उत्तर:
औपचारिक साख: बैंक, सहकारी समितियाँ - RBI द्वारा नियंत्रित, कम ब्याज दर (8-12%), पारदर्शी प्रक्रिया।
अनौपचारिक साख: महाजन, साहूकार, व्यापारी - कोई नियंत्रण नहीं, ऊँची ब्याज दर (24-60%), शोषण की संभावना, कर्ज जाल का खतरा।
प्रश्न 4: RBI के प्रमुख कार्य क्या हैं?
उत्तर: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भारत का केंद्रीय बैंक है। इसके प्रमुख कार्य हैं:
• मुद्रा जारी करना - केवल RBI को नोट छापने का अधिकार
• बैंकों का नियामक - सभी बैंकों की निगरानी
• सरकार का बैंकर - सरकारी खातों का प्रबंधन
• मौद्रिक नीति - ब्याज दरें निर्धारित करना
• विदेशी मुद्रा प्रबंधन
प्रश्न 5: स्वयं सहायता समूह (SHG) क्या है? इसके लाभ बताइए।
उत्तर: स्वयं सहायता समूह (SHG) 15-20 लोगों (मुख्यतः महिलाओं) का समूह है जो अपनी बचत एकत्र करके सदस्यों को कम ब्याज पर ऋण देता है।
लाभ:
• बिना समर्थक ऋणाधार के ऋण
• कम ब्याज दर
• महिला सशक्तिकरण
• बचत की आदत का विकास
• सामाजिक मुद्दों पर चर्चा का मंच
• बैंकिंग प्रणाली से जुड़ाव
मुख्य शब्दावली
| शब्द | परिभाषा |
|---|---|
| मुद्रा | विनिमय का कानूनी माध्यम जिसका उपयोग क्रय-विक्रय में होता है |
| साख/ऋण | ऋणदाता द्वारा उधारकर्ता को दी गई राशि जो ब्याज सहित वापस होती है |
| वस्तु विनिमय | एक वस्तु के बदले दूसरी वस्तु का आदान-प्रदान |
| समर्थक ऋणाधार | ऋण की गारंटी के रूप में गिरवी रखी गई संपत्ति |
| RBI | भारतीय रिजर्व बैंक - भारत का केंद्रीय बैंक (स्थापना 1935) |
| SHG | स्वयं सहायता समूह - 15-20 लोगों का समूह जो बचत कर ऋण देता है |
| कर्ज जाल | जब पुराना ऋण चुकाने के लिए नया ऋण लेना पड़े |
| ब्याज दर | मूलधन पर लगने वाला प्रतिशत शुल्क |
यह भी देखें
• अध्याय 2: भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक
• अध्याय 4: वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था
• कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान - सभी विषय
संदर्भ
1. NCERT पाठ्यपुस्तक - आर्थिक विकास की समझ, कक्षा 10
2. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) - आधिकारिक वेबसाइट
3. NABARD - स्वयं सहायता समूह दिशानिर्देश
4. भारत सरकार - आर्थिक सर्वेक्षण


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