NCERT Classes — Marwari Mission 100 by Shala Saral™
मुद्रण संस्कृति और आधुनिक दुनिया
Print Culture and the Modern World — RBSE Class 10 History Chapter 5
मुद्रण संस्कृति और आधुनिक दुनिया (Print Culture and the Modern World) अध्याय में हम मुद्रण (छपाई) के इतिहास, इसके विकास और समाज पर इसके प्रभाव का अध्ययन करते हैं। मुद्रण क्रांति ने ज्ञान के प्रसार, साक्षरता और विचारों के आदान-प्रदान को नई दिशा दी।
मुद्रण क्रांति का अर्थ है छपाई तकनीक के विकास से पुस्तकों और सूचनाओं का व्यापक प्रसार। 1440 में जर्मनी के योहान गुटेनबर्ग ने प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार किया जिसने पूरी दुनिया को बदल दिया।
1. चीन, जापान और कोरिया में मुद्रण
मुद्रण तकनीक का विकास सबसे पहले एशिया में हुआ। चीन, जापान और कोरिया में यूरोप से बहुत पहले मुद्रण की शुरुआत हो चुकी थी।
1.1 चीन में मुद्रण
- 594 ईस्वी: चीन में लकड़ी के ब्लॉक से छपाई शुरू
- 868 ईस्वी: डायमंड सूत्र — विश्व की सबसे पुरानी मुद्रित पुस्तक
- 11वीं सदी: बी शेंग ने चल टाइप (Movable Type) का आविष्कार किया
| देश | योगदान | समय |
|---|---|---|
| चीन | ब्लॉक प्रिंटिंग, चल टाइप | 6वीं-11वीं सदी |
| कोरिया | धातु के चल टाइप | 13वीं सदी (जिक्जी 1377) |
| जापान | बौद्ध ग्रंथों की छपाई | 8वीं सदी |
2. गुटेनबर्ग और प्रिंटिंग प्रेस
योहान गुटेनबर्ग (Johannes Gutenberg) जर्मनी के मेंज शहर के एक सुनार थे। उन्होंने 1440 के आसपास धातु के चल टाइप (Movable Metal Type) वाले प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार किया।
2.1 गुटेनबर्ग बाइबल (1455)
- पहली बड़ी मुद्रित पुस्तक
- 180 प्रतियां छापी गईं
- प्रत्येक पृष्ठ पर 42 पंक्तियां
- कुछ प्रतियां वेलम (बछड़े की खाल) पर छपीं
2.2 मुद्रण का प्रसार
गुटेनबर्ग के आविष्कार के बाद मुद्रण तेजी से फैला:
| वर्ष | उपलब्धि |
|---|---|
| 1440 | गुटेनबर्ग ने प्रिंटिंग प्रेस बनाया (मेंज, जर्मनी) |
| 1455 | गुटेनबर्ग बाइबल छपी |
| 1476 | विलियम कैक्सटन ने इंग्लैंड में प्रेस लाया |
| 1500 | यूरोप में 200+ शहरों में प्रेस; 2 करोड़ पुस्तकें छपीं |
3. मुद्रण क्रांति और उसके प्रभाव
मुद्रण क्रांति ने समाज के हर पहलू को प्रभावित किया। पुस्तकें सस्ती हुईं और आम लोगों तक पहुंचीं।
3.1 मार्टिन लूथर और धर्म सुधार
1517 में मार्टिन लूथर ने रोमन कैथोलिक चर्च की कुरीतियों की आलोचना करते हुए अपनी 95 थीसिस लिखीं। मुद्रण की मदद से ये विचार तेजी से फैले और प्रोटेस्टेंट आंदोलन की शुरुआत हुई।
4. पढ़ने का जुनून
17वीं और 18वीं सदी में यूरोप में साक्षरता बढ़ी। नए प्रकार का साहित्य छपने लगा:
- पंचांग (Almanac): दैनिक जानकारी वाली छोटी पुस्तकें
- चैपबुक: सस्ती, छोटी किताबें (1 पैसे की)
- बिलियोथेक ब्ल्यू: फ्रांस में नीले कवर की सस्ती किताबें
- पत्रिकाएं: 18वीं सदी से साप्ताहिक/मासिक पत्रिकाएं
5. मुद्रण और फ्रांसीसी क्रांति
कई इतिहासकारों का मानना है कि मुद्रण संस्कृति ने 1789 की फ्रांसीसी क्रांति की जमीन तैयार की।
5.1 मुद्रण ने क्रांति में कैसे मदद की?
| तरीका | विवरण |
|---|---|
| विचारों का प्रसार | वोल्तेयर, रूसो के विचार आम लोगों तक पहुंचे |
| निरंकुशवाद की आलोचना | राजा और चर्च की आलोचना वाले पर्चे छपे |
| बहस का माहौल | लोग सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करने लगे |
| जनमत निर्माण | समाचार पत्रों और पैम्फलेटों से जनमत बना |
6. भारत में मुद्रण का आगमन
भारत में प्रिंटिंग प्रेस 16वीं सदी में पुर्तगाली धर्म प्रचारकों के साथ गोवा में आया।
6.1 भारत में मुद्रण की शुरुआत
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1556 | पुर्तगाली धर्म प्रचारकों के साथ गोवा में पहला प्रेस |
| 1579 | कोचीन में पहली तमिल किताब छपी |
| 1674 | कोंकणी और कन्नड़ में लगभग 50 पुस्तकें छपीं |
| 1713 | पहली मलयालम पुस्तक छपी |
| 1778 | जेम्स ऑगस्टस हिक्की ने कोलकाता में प्रेस स्थापित किया |
7. भारत में समाचार पत्र
1780 में जेम्स ऑगस्टस हिक्की ने बंगाल गजट नामक साप्ताहिक समाचार पत्र निकाला। यह भारत का पहला समाचार पत्र था।
7.1 प्रमुख समाचार पत्र और पत्रिकाएं
| वर्ष | समाचार पत्र | भाषा |
|---|---|---|
| 1780 | बंगाल गजट (जेम्स हिक्की) | अंग्रेजी |
| 1821 | संवाद कौमुदी (राजा राममोहन राय) | बंगाली |
| 1822 | बम्बई समाचार | गुजराती |
| 1822 | जाम-ए-जहाँ नामा | फारसी |
| 1826 | उदंत मार्तण्ड (जुगल किशोर शुक्ल) | हिंदी |
8. प्रिंट और महिलाएं
19वीं सदी में मुद्रण के प्रसार से महिलाओं की स्थिति में सुधार आया:
- महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा मिला
- महिलाओं ने अपनी आत्मकथाएं और लेख लिखे
- राशसुंदरी देवी की आत्मकथा "आमार जीबन" (1876) — बंगाली में पहली आत्मकथा
- ताराबाई शिंदे ने "स्त्री पुरुष तुलना" लिखी
- पंडिता रमाबाई ने महिला शिक्षा पर लिखा
9. प्रिंट और प्रतिबंध
ब्रिटिश सरकार ने भारतीय प्रेस पर कई प्रतिबंध लगाए:
9.1 वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट (1878)
9.2 अन्य प्रतिबंध
| वर्ष | कानून/घटना |
|---|---|
| 1835 | मेटकाफ ने प्रेस पर से प्रतिबंध हटाए |
| 1878 | वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट |
| 1907 | तिलक को राजद्रोह के लिए जेल |
10. महत्वपूर्ण तिथियां
11. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ)
12. प्रश्नोत्तर
12.1 लघु उत्तरीय प्रश्न (2-3 अंक)
12.2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4-5 अंक)
1. विचारों का प्रसार: वोल्तेयर, रूसो जैसे दार्शनिकों के विचार मुद्रित पुस्तकों द्वारा आम लोगों तक पहुंचे।
2. निरंकुशवाद की आलोचना: राजा और चर्च की आलोचना वाले पर्चे और पुस्तिकाएं छपीं।
3. बहस का माहौल: कॉफी हाउसों में लोग छपी सामग्री पर चर्चा करते थे।
4. जनमत निर्माण: समाचार पत्रों और पैम्फलेटों ने क्रांतिकारी जनमत बनाया।
5. साक्षरता में वृद्धि: पढ़े-लिखे लोगों की संख्या बढ़ी जो राजनीतिक बदलाव चाहते थे।
1. शिक्षा में वृद्धि: उदारवादी पिताओं और पतियों ने महिलाओं को पढ़ना-लिखना सिखाया।
2. लेखन का अवसर: महिलाओं ने अपनी आत्मकथाएं और लेख लिखे। राशसुंदरी देवी की "आमार जीबन" (1876) बंगाली में पहली आत्मकथा थी।
3. सामाजिक जागरूकता: महिलाओं ने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लिखा। ताराबाई शिंदे ने "स्त्री पुरुष तुलना" लिखी।
4. सशक्तिकरण: मुद्रित साहित्य ने महिलाओं में आत्म-जागरूकता और स्वतंत्रता की भावना जगाई।


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