★ MARWARI MISSION 100 ★ by Shala Saral™
भारत में राष्ट्रवाद
Nationalism in India
अध्याय की जानकारी
1. अध्याय परिचय (Introduction)
भारत में राष्ट्रवाद का उदय उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन से जुड़ा हुआ था। औपनिवेशिक शासकों के विरुद्ध संघर्ष के दौरान लोगों में आपसी एकता की भावना जागृत हुई। यह अध्याय 1920 से 1947 तक के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का विस्तृत वर्णन करता है।
- भारत में राष्ट्रवाद की भावना उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन से जुड़ी थी।
- 1920 के बाद महात्मा गांधी ने राष्ट्रीय आंदोलन का नेतृत्व किया।
- 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना बम्बई में हुई।
- 1870 में बंकिमचंद्र चटर्जी ने 'वंदे मातरम्' गीत लिखा।
2. प्रथम विश्व युद्ध और भारत (1914-1918)
प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) ने भारत में एक नई राजनीतिक और आर्थिक स्थिति पैदा कर दी। युद्ध के कारण भारतीयों पर अनेक कठिनाइयाँ आईं जिससे राष्ट्रवाद को बल मिला।
2.1 प्रथम विश्व युद्ध के प्रभाव
| समस्या | विवरण |
|---|---|
| रक्षा खर्च में वृद्धि | युद्ध के लिए भारी खर्च, नए कर लगाए गए |
| कीमतों में वृद्धि | 1913-18 के बीच कीमतें दोगुनी हो गईं |
| जबरन भर्ती | गाँवों से सिपाहियों की जबरदस्ती भर्ती |
| अकाल और महामारी | 1918-19 में फ्लू महामारी से 12-13 लाख मौतें |
| आयकर | आय कर (Income Tax) नामक नया कर लगाया गया |
3. महात्मा गांधी का भारत आगमन
- जन्म: 2 अक्टूबर 1869, पोरबंदर, गुजरात
- भारत आगमन: जनवरी 1915 (दक्षिण अफ्रीका से)
- उपाधि: राष्ट्रपिता, बापू, महात्मा
- सिद्धांत: सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह
- दक्षिण अफ्रीका में: नस्लभेदी सरकार के विरुद्ध सत्याग्रह किया
3.1 सत्याग्रह का अर्थ
सत्याग्रह = सत्य + आग्रह (सत्य के लिए आग्रह)
- यह शारीरिक बल नहीं बल्कि आत्मबल पर आधारित था।
- इसमें उत्पीड़क की अंतरात्मा को जगाना था, न कि उसे हिंसा से हराना।
- यदि आपका उद्देश्य सत्य और न्यायपूर्ण है तो संघर्ष में हिंसा की जरूरत नहीं।
4. गांधीजी के प्रारंभिक सत्याग्रह (1916-1918)
| सत्याग्रह | वर्ष | स्थान | कारण |
|---|---|---|---|
| चंपारण सत्याग्रह | 1917 | बिहार | नील की खेती करने वाले किसानों का शोषण |
| खेड़ा सत्याग्रह | 1917 | गुजरात | फसल खराब होने पर भी लगान वसूली |
| अहमदाबाद मिल मजदूर | 1918 | गुजरात | कपड़ा मिल मजदूरों के वेतन वृद्धि हेतु |
5. रॉलेट एक्ट 1919
ब्रिटिश सरकार ने 1919 में यह अन्यायपूर्ण कानून पारित किया।
- बिना मुकदमा चलाए 2 वर्ष तक जेल में रखने का अधिकार
- राजनीतिक गतिविधियों को कुचलने की शक्ति
- अपील, दलील और वकील का कोई अधिकार नहीं
- इसे "No Vakil, No Dalil, No Appeal" कानून भी कहा गया
गांधीजी की प्रतिक्रिया: 6 अप्रैल 1919 को देशव्यापी हड़ताल (हरताल) का आह्वान किया गया। रैलियाँ निकाली गईं और कई शहरों में दुकानें बंद रहीं।
6. जलियाँवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919)
| तिथि: | 13 अप्रैल 1919 (बैसाखी का दिन) |
| स्थान: | जलियाँवाला बाग, अमृतसर (पंजाब) |
| जिम्मेदार: | जनरल डायर (General Dyer) |
| कारण: | शांतिपूर्ण सभा पर बिना चेतावनी गोलीबारी |
| मृतक: | सैकड़ों निहत्थे लोग (आधिकारिक: 379) |
6.1 हत्याकांड के परिणाम
- सारे देश में रोष की लहर फैल गई
- रवींद्रनाथ टैगोर ने 'नाइटहुड' (Sir) की उपाधि लौटा दी
- राष्ट्रीय आंदोलन और तीव्र हो गया
- गांधीजी ने 'केसर-ए-हिंद' पदक वापस किया
- आंदोलन में जनता की भागीदारी बढ़ी
7. खिलाफत आंदोलन (1919-1924)
खलीफा: ऑटोमन (तुर्की) सम्राट को इस्लामिक विश्व का आध्यात्मिक नेता माना जाता था।
- प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की की हार के बाद खलीफा की शक्ति छीनने की आशंका
- नेता: मोहम्मद अली और शौकत अली (अली बंधु)
- उद्देश्य: खलीफा की शक्ति बनाए रखना
- गांधीजी ने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए इसका समर्थन किया
- सितंबर 1920: कांग्रेस ने खिलाफत के साथ असहयोग आंदोलन शुरू किया
8. असहयोग आंदोलन (1920-1922)
प्रारंभ: अगस्त 1920 में खिलाफत आंदोलन के साथ
कारण: रॉलेट एक्ट, जलियाँवाला बाग हत्याकांड, खिलाफत का मुद्दा
8.1 असहयोग आंदोलन के चरण
| चरण | कार्यवाही |
|---|---|
| प्रथम चरण (त्याग) |
• सरकारी उपाधियों का त्याग • सरकारी नौकरियों का बहिष्कार • विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार • सरकारी स्कूल-कॉलेजों का बहिष्कार |
| द्वितीय चरण (सविनय अवज्ञा) |
• करों का भुगतान न करना • कानूनों की अवज्ञा |
- विद्यार्थी: स्कूल-कॉलेज छोड़े, जामिया मिलिया इस्लामिया की स्थापना
- वकील: कचहरियों का बहिष्कार (मोतीलाल नेहरू, सी.आर. दास)
- किसान: अवध में किसान आंदोलन
- आदिवासी: आंध्र प्रदेश में अल्लूरी सीताराम राजू का विद्रोह
- बागान मजदूर: असम में हड़ताल
8.2 चौरी-चौरा कांड (5 फरवरी 1922)
- तिथि: 5 फरवरी 1922
- स्थान: चौरी-चौरा, गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)
- घटना: उत्तेजित भीड़ ने पुलिस थाने में आग लगा दी, 22 पुलिसकर्मी मारे गए
- परिणाम: गांधीजी ने आंदोलन वापस ले लिया
- कारण: हिंसा सत्याग्रह के सिद्धांतों के विरुद्ध थी
9. साइमन कमीशन (1928)
- गठन: 1927 में ब्रिटेन की टोरी सरकार द्वारा
- अध्यक्ष: सर जॉन साइमन
- सदस्य: 7 सदस्य (सभी अंग्रेज, एक भी भारतीय नहीं)
- उद्देश्य: भारत की संवैधानिक व्यवस्था का अध्ययन
- भारत आगमन: 1928
- विरोध का नारा: "साइमन गो बैक" (Simon Go Back)
लाला लाजपत राय: लाहौर में साइमन कमीशन के विरोध के दौरान पुलिस की लाठियों से घायल हुए और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने कहा था - "मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत में कील साबित होगी।"
10. पूर्ण स्वराज की घोषणा (दिसंबर 1929)
- अध्यक्ष: पंडित जवाहरलाल नेहरू
- निर्णय: पूर्ण स्वराज (Complete Independence) की मांग
- 26 जनवरी 1930: पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया गया
- इसके बाद सविनय अवज्ञा आंदोलन की योजना बनी
11. नमक सत्याग्रह / दांडी मार्च (1930)
| प्रारंभ: | 12 मार्च 1930 |
| समाप्ति: | 6 अप्रैल 1930 |
| प्रारंभ स्थान: | साबरमती आश्रम, अहमदाबाद |
| समाप्ति स्थान: | दांडी (गुजरात का समुद्री तट) |
| दूरी: | 240 मील (लगभग 390 किमी) |
| अवधि: | 24 दिन |
| साथी: | 78 अनुयायी |
6 अप्रैल 1930: गांधीजी ने समुद्र के पानी से नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा और कहा - "इसके साथ मैं ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला रहा हूँ।"
- नमक हर भारतीय के लिए जरूरी था (गरीब से गरीब भी)
- नमक पर कर अन्यायपूर्ण था
- यह सबको एकजुट कर सकता था
- अहिंसक तरीके से कानून तोड़ने का प्रतीक
12. सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-1934)
12.1 आंदोलन का विस्तार
| क्षेत्र | गतिविधि |
|---|---|
| तटीय क्षेत्र | नमक बनाना और बेचना |
| शहरों में | विदेशी वस्त्रों की होली, शराब की दुकानों पर धरना |
| ग्रामीण क्षेत्र | लगान और कर न देना |
| वन क्षेत्र | वन कानूनों का उल्लंघन |
गिरफ्तारी: 60,000 से अधिक लोगों को जेल में डाला गया। गांधीजी को 5 मई 1930 को गिरफ्तार किया गया।
12.2 गांधी-इरविन समझौता (5 मार्च 1931)
- गांधीजी को जनवरी 1931 में जेल से रिहा किया गया
- वायसराय लॉर्ड इरविन से वार्ता
- शर्तें:
- सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित
- राजनीतिक कैदियों की रिहाई
- समुद्र तट पर नमक बनाने की अनुमति
- गांधीजी दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेंगे
13. राष्ट्रवाद के प्रतीक और चिह्न
राष्ट्रवादी नेताओं ने लोगों को एकजुट करने के लिए विभिन्न प्रतीकों और चिह्नों का प्रयोग किया।
13.1 भारत माता की छवि
- 1870 के दशक: बंकिमचंद्र चटर्जी ने 'वंदे मातरम्' गीत लिखा (आनंदमठ उपन्यास में)
- अबनींद्रनाथ टैगोर: भारत माता की प्रसिद्ध तस्वीर बनाई
- भारत माता को संन्यासिनी के रूप में दिखाया - शांत, संयमित, दैवी
13.2 राष्ट्रीय ध्वज
- 1921: गांधीजी ने स्वराज ध्वज का प्रस्ताव दिया
- केंद्र में चरखा (स्वदेशी का प्रतीक)
- लाल: हिंदू, हरा: मुस्लिम, सफेद: अन्य समुदाय
- ध्वज को फहराना स्वाभिमान और राष्ट्रवाद का प्रतीक बना
14. महत्वपूर्ण तिथियां (Timeline)
15. महत्वपूर्ण व्यक्तित्व
| व्यक्ति | योगदान |
|---|---|
| महात्मा गांधी | राष्ट्रपिता, सत्याग्रह, अहिंसा, दांडी मार्च |
| जवाहरलाल नेहरू | लाहौर अधिवेशन के अध्यक्ष, प्रथम प्रधानमंत्री |
| सरदार पटेल | बारदोली सत्याग्रह का नेतृत्व |
| अली बंधु | खिलाफत आंदोलन के नेता |
| लाला लाजपत राय | साइमन कमीशन विरोध में शहीद |
| बंकिमचंद्र चटर्जी | वंदे मातरम् के रचयिता |
| रवींद्रनाथ टैगोर | जन गण मन, नोबेल पुरस्कार विजेता |
| अल्लूरी सीताराम राजू | आंध्र प्रदेश में आदिवासी विद्रोह का नेतृत्व |
16. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ) - 1 अंक
17. लघु उत्तरीय प्रश्न (2-3 अंक)
18. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4-5 अंक)
1. विद्यार्थी: सरकारी स्कूल-कॉलेज छोड़े, जामिया मिलिया इस्लामिया जैसे राष्ट्रीय संस्थान स्थापित हुए।
2. वकील: मोतीलाल नेहरू, सी.आर. दास जैसे प्रसिद्ध वकीलों ने कचहरियों का बहिष्कार किया।
3. किसान: अवध में किसानों ने जमींदारों के विरुद्ध आंदोलन किया।
4. आदिवासी: आंध्र प्रदेश में अल्लूरी सीताराम राजू के नेतृत्व में विद्रोह किया।
5. बागान मजदूर: असम में चाय बागान मजदूरों ने हड़ताल की।
परिचय: गांधीजी ने 78 अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से दांडी तक 240 मील (390 किमी) की पदयात्रा की।
उद्देश्य: ब्रिटिश नमक कानून को तोड़ना और सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करना।
महत्व:
1. यह अहिंसक प्रतिरोध का सबसे प्रभावशाली उदाहरण था।
2. पूरे देश को एकजुट किया - हर वर्ग ने भाग लिया।
3. अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने इसे कवर किया।
4. 60,000 से अधिक लोगों को जेल में डाला गया।
5. इसने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी।
त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision)
- 1915: गांधीजी का भारत आगमन
- 1919: रॉलेट एक्ट, जलियाँवाला बाग (13 अप्रैल)
- 1920: असहयोग + खिलाफत आंदोलन
- 1922: चौरी-चौरा (5 फरवरी), आंदोलन वापस
- 1928: साइमन कमीशन, "साइमन गो बैक"
- 1929: लाहौर अधिवेशन, पूर्ण स्वराज
- 1930: दांडी मार्च (12 मार्च - 6 अप्रैल)
- 1931: गांधी-इरविन समझौता (5 मार्च)
- 1942: भारत छोड़ो आंदोलन
याद रखने की ट्रिक:
- "CKA" = चंपारण, खेड़ा, अहमदाबाद (गांधीजी के प्रारंभिक सत्याग्रह)
- "13-4-19" = 13 अप्रैल 1919 = जलियाँवाला बाग
- "78 साथी, 24 दिन, 240 मील" = दांडी मार्च
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