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भूमंडलीकृत विश्व का बनना
The Making of a Global World — RBSE Class 10 History Chapter 3
भूमंडलीकृत विश्व का बनना (The Making of a Global World) अध्याय में हम अध्ययन करते हैं कि किस प्रकार विश्व के विभिन्न देश व्यापार, प्रवास, और पूँजी के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े। यह अध्याय वैश्वीकरण (Globalization) के इतिहास का वर्णन करता है।
वैश्वीकरण एक आर्थिक प्रणाली है जिसमें व्यक्तियों, वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी और विचारों का एक देश से दूसरे देश में स्थानांतरण होता है।
1. आधुनिक युग से पहले
आधुनिक युग से पहले भी इतिहास के प्रत्येक दौर में विश्व के मानव समाज एक-दूसरे के नजदीक आते गए हैं। यात्री, व्यापारी, पुजारी और तीर्थयात्री ज्ञान, अवसर और आध्यात्मिक पूर्ति के लिए विशाल दूरियाँ तय करते थे।
2. रेशम मार्ग (Silk Route)
रेशम मार्ग एक ऐतिहासिक व्यापार मार्ग था जो दूसरी शताब्दी ई.पू. से 15वीं शताब्दी तक अस्तित्व में रहा। यह मार्ग चीन, भारत, फारस, अरब, ग्रीस और इटली को जोड़ता था।
2.1 रेशम मार्ग की विशेषताएं
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| नाम का कारण | चीन से रेशम (Silk) का व्यापार होता था |
| समय काल | दूसरी शताब्दी ई.पू. से 15वीं शताब्दी तक |
| क्षेत्र | एशिया, यूरोप, उत्तरी अफ्रीका |
| जमीनी और समुद्री | दोनों प्रकार के मार्ग थे |
2.2 रेशम मार्ग से होने वाला व्यापार
| दिशा | वस्तुएं |
|---|---|
| चीन से पश्चिम | रेशम, चीनी मिट्टी (पोटरी), कागज |
| भारत से पश्चिम | मसाले, कपड़े, हीरे |
| पश्चिम से पूर्व | सोना, चाँदी, कीमती धातुएं |
3. भोजन की यात्रा
आज हम जो खाद्य पदार्थ खाते हैं, उनमें से कई हजारों साल पहले भारत में नहीं थे। ये खाद्य पदार्थ विभिन्न देशों से आए।
4. विजय, बीमारी और व्यापार
सोलहवीं शताब्दी में पुर्तगाली और स्पेनिश सेनाओं ने अमेरिका को उपनिवेश बनाना शुरू किया।
4.1 बीमारी से विजय
स्पेन के सैनिकों के साथ चेचक (Smallpox) के कीटाणु अमेरिका पहुंचे। अमेरिका के मूल निवासियों में इस बीमारी से लड़ने की क्षमता नहीं थी, जिससे बड़ी संख्या में लोग मारे गए। इससे यूरोपीय उपनिवेशकारों को अमेरिका पर प्रभुत्व स्थापित करने में आसानी हुई।
5. उन्नीसवीं सदी (1815-1914)
19वीं सदी में विश्व अर्थव्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन आए।
5.1 कॉर्न लॉ (Corn Laws)
18वीं सदी के अंत में ब्रिटेन की आबादी तेजी से बढ़ी। खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने से कीमतें बढ़ीं। सरकार ने कॉर्न लॉ के तहत मक्के के आयात पर पाबंदी लगा दी ताकि स्थानीय किसानों को संरक्षण मिले।
1846 में कॉर्न लॉ समाप्त कर दिए गए। इसके बाद ब्रिटेन में सस्ता अनाज आयात होने लगा।
5.2 विश्व अर्थव्यवस्था का उदय
5.3 भारत से अनुबंधित श्रमिक (Indentured Labour)
19वीं सदी में भारत, चीन और अन्य देशों से लाखों मजदूर अनुबंधित श्रमिक (Indentured Labour) के रूप में कैरेबियन द्वीपों, मॉरीशस, फिजी और मलाया गए। उन्हें गिरमिटिया कहा जाता था।
| गंतव्य | कार्य |
|---|---|
| कैरेबियन द्वीप (त्रिनिदाद, गुयाना) | गन्ने की खेती |
| मॉरीशस | चीनी उत्पादन |
| फिजी | गन्ने की खेती |
| मलाया (मलेशिया) | रबर बागान |
6. महामंदी (The Great Depression, 1929-1934)
महामंदी 20वीं सदी की सबसे बड़ी आर्थिक मंदी थी जो 1929 में शुरू हुई और लगभग 1934 तक चली। इसकी शुरुआत अमेरिका से हुई और पूरी दुनिया प्रभावित हुई।
6.1 महामंदी के कारण
- प्रथम विश्व युद्ध के बाद अमेरिका विश्व का सबसे बड़ा ऋणदाता बन गया
- अमेरिका में अति-उत्पादन (Overproduction) की समस्या
- कृषि उत्पादों की कीमतों में भारी गिरावट
- 24 अक्टूबर 1929 को अमेरिकी शेयर बाजार धराशायी (Black Thursday)
6.2 महामंदी के प्रभाव
| क्षेत्र | प्रभाव |
|---|---|
| अमेरिका | बेरोजगारी 25% तक पहुंची, बैंक बंद हुए |
| जर्मनी | औद्योगिक उत्पादन 40% गिरा, हिटलर का उदय |
| भारत | कृषि उत्पादों की कीमतें 50% गिरीं |
| विश्व व्यापार | 1929-1932 में 65% तक गिरा |
6.3 भारत और महामंदी
1928 से 1934 के बीच भारत में गेहूं की कीमतें 50% तक गिर गईं। किसानों को भारी नुकसान हुआ। हालांकि, शहरी क्षेत्रों में कीमतें गिरने से कुछ लाभ भी हुआ।
7. ब्रेटन वुड्स व्यवस्था (Bretton Woods System)
द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) के बाद जुलाई 1944 में अमेरिका के ब्रेटन वुड्स, न्यू हैम्पशायर में एक सम्मेलन हुआ जिसमें 44 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
7.1 ब्रेटन वुड्स की प्रमुख विशेषताएं
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| स्थिर विनिमय दर | सभी मुद्राएं अमेरिकी डॉलर से जुड़ी, डॉलर सोने से जुड़ा |
| सोने की कीमत | 35 डॉलर = 1 औंस सोना |
| IMF का कार्य | विनिमय दर स्थिरता, अल्पकालिक ऋण |
| विश्व बैंक का कार्य | युद्धोत्तर पुनर्निर्माण, विकास सहायता |
| समाप्ति | 1971 में अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन ने डॉलर-सोना संबंध समाप्त किया |
7.2 ब्रेटन वुड्स के बाद
1971 में ब्रेटन वुड्स व्यवस्था समाप्त होने के बाद अस्थिर विनिमय दर (Floating Exchange Rate) की व्यवस्था शुरू हुई। पिछले दशकों में भारत, चीन और ब्राजील जैसी अर्थव्यवस्थाओं के उदय से विश्व का आर्थिक भूगोल बदल गया है।
8. महत्वपूर्ण तिथियां (Timeline)
9. वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ)
10. प्रश्नोत्तर
10.1 लघु उत्तरीय प्रश्न (2-3 अंक)
10.2 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4-5 अंक)
1. व्यापार: रेशम मार्ग से लेकर आधुनिक व्यापार तक, वस्तुओं का आदान-प्रदान होता रहा।
2. प्रवास: काम की तलाश में लोग एक देश से दूसरे देश गए (जैसे गिरमिटिया मजदूर)।
3. पूँजी की आवाजाही: एक देश से दूसरे देश में निवेश और ऋण का प्रवाह।
4. तकनीक: जहाज, रेलवे, टेलीग्राफ ने दूरियां कम कीं।
5. उपनिवेशवाद: यूरोपीय देशों ने एशिया, अफ्रीका और अमेरिका में उपनिवेश बनाए।
1. कृषि क्षेत्र: 1928-1934 के बीच गेहूं की कीमतें 50% गिर गईं। किसानों की आय घटी।
2. निर्यात: भारतीय कृषि उत्पादों की अंतर्राष्ट्रीय मांग घटी।
3. ग्रामीण ऋणग्रस्तता: कीमतें गिरने से किसान कर्ज चुकाने में असमर्थ हुए।
4. शहरी क्षेत्र: कीमतें गिरने से शहरी उपभोक्ताओं को कुछ लाभ हुआ।
5. राजनीतिक प्रभाव: आर्थिक संकट ने स्वतंत्रता आंदोलन को बल दिया।


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