संसाधन एवं विकास कक्षा 10 भूगोल नोट्स | मृदा के प्रकार | RBSE/CBSE 2026

📅 Saturday, 27 December 2025 📖 3-5 min read
संसाधन एवं विकास | कक्षा 10 भूगोल | RBSE/CBSE Notes

संसाधन एवं विकास (Resources and Development)

अध्याय सूचना
संसाधनों का वितरण: कोयला लोहा जल वन खनिज
भारत में प्रमुख संसाधनों का वितरण
विषयभूगोल (समकालीन भारत-II)
कक्षा10वीं (RBSE/CBSE)
अध्याय1
बोर्ड परीक्षा भार5-7 अंक
महत्वपूर्ण विषयमृदा के प्रकार, भूमि उपयोग, संसाधन नियोजन

संसाधन एवं विकास कक्षा 10 भूगोल का प्रथम एवं अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है। इस अध्याय में हम संसाधनों के प्रकार, भूमि उपयोग प्रारूप, मृदा के प्रकार और मृदा संरक्षण का विस्तृत अध्ययन करेंगे।

हमारे पर्यावरण में उपलब्ध वे सभी वस्तुएं जो हमारी आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम हैं, संसाधन कहलाती हैं। संसाधन तकनीकी रूप से सुलभ, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य होते हैं।

बोर्ड परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण

इस अध्याय से 5-7 अंकों के प्रश्न आते हैं। मृदा के प्रकार, भूमि उपयोग आंकड़े और संसाधन नियोजन पर विशेष ध्यान दें।

परिचय - संसाधन क्या है?

प्रकृति में उपलब्ध प्रत्येक वस्तु संसाधन नहीं होती। कोई वस्तु तभी संसाधन बनती है जब:

  • वह मानवीय आवश्यकताओं को पूर्ण करने में सक्षम हो
  • उसका उपयोग करने की तकनीक उपलब्ध हो
  • उसका उपयोग आर्थिक रूप से लाभदायक हो
  • वह सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य हो
महत्वपूर्ण अवधारणा

मनुष्य स्वयं भी संसाधन है। मानव अपनी बुद्धि, ज्ञान और तकनीक से प्रकृति की वस्तुओं को संसाधनों में परिवर्तित करता है।

संसाधनों के प्रकार

1. उत्पत्ति के आधार पर

प्रकारपरिभाषाउदाहरण
जैव संसाधनजीवित जीवों से प्राप्तवन, पशु, मछलियां
अजैव संसाधननिर्जीव वस्तुओं सेखनिज, धातुएं, मिट्टी

2. समाप्यता के आधार पर

प्रकारपरिभाषाउदाहरण
नवीकरणीयपुनः प्राप्त हो सकते हैंसौर ऊर्जा, जल, वन
अनवीकरणीयसमाप्त होने पर पुनः नहीं बनतेकोयला, पेट्रोलियम, खनिज

3. स्वामित्व के आधार पर

प्रकारविवरणउदाहरण
व्यक्तिगतनिजी स्वामित्व मेंभूखंड, मकान, बगीचा
सामुदायिकसभी के लिए सुलभचरागाह, तालाब, पार्क
राष्ट्रीयदेश की सीमा में सरकार के अधीनखनिज, वन, जल संसाधन
अंतर्राष्ट्रीय200 समुद्री मील (EEZ) के बादमहासागरीय संसाधन

4. विकास की स्थिति के आधार पर

प्रकारपरिभाषाउदाहरण
संभाव्यपाए जाते हैं पर उपयोग नहींराजस्थान में सौर/पवन ऊर्जा
विकसितसर्वेक्षण हो चुका, उपयोग मेंकार्यरत खदानें
भंडारवर्तमान तकनीक से उपयोग असंभवजल से हाइड्रोजन
आरक्षितभविष्य हेतु रखे गएअप्रयुक्त जलविद्युत क्षमता

संसाधन नियोजन

संसाधन नियोजन का अर्थ है संसाधनों का इस प्रकार प्रबंधन करना कि वे वर्तमान और भविष्य दोनों की आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।

संसाधन नियोजन के चरण

चरण 1
संसाधनों की पहचान
चरण 2
तकनीक और कौशल विकास
चरण 3
राष्ट्रीय योजनाओं से समन्वय
ऐतिहासिक संदर्भ

1992 - रियो डी जनेरियो पृथ्वी सम्मेलन: ब्राज़ील में आयोजित इस सम्मेलन में 'सतत् विकास' की अवधारणा को वैश्विक मान्यता मिली।

भूमि उपयोग प्रारूप

भारत का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 32.8 लाख वर्ग किमी है।

याद करने की Trick
43 - 23 - 14
43%
शुद्ध बोया क्षेत्र
23%
वन क्षेत्र
14%
कृषि अयोग्य भूमि

बाकी 20% = परती (8%) + अन्य (6%) + चरागाह (4%) + बंजर (2%)

भूमि उपयोग श्रेणीप्रतिशतविवरण
शुद्ध बोया गया क्षेत्र43%जहां फसल बोई गई
वन23%राष्ट्रीय नीति में 33% लक्ष्य
कृषि अनुपलब्ध14%बंजर, पर्वतीय, शहरी
परती भूमि8%उपजाऊ पर वर्तमान में खेती नहीं
अन्य अकृषित6%घास भूमि
चरागाह4%पशुओं हेतु
कृषि योग्य बंजर2%5 वर्षों से अधिक परती

भारत में मृदा के प्रकार

याद करने की Trick - मृदा के प्रकार
A B R A L F
A
Alluvial (जलोढ़)
B
Black (काली)
R
Red (लाल)
A
Arid (मरुस्थली)
L
Laterite (लैटेराइट)
F
Forest (वनीय)

1. जलोढ़ मृदा (Alluvial Soil)

जलोढ़ मृदा - सबसे महत्वपूर्ण
विस्तारउत्तरी मैदान, तटीय मैदान (40% भूभाग)
प्रकारखादर: नई, उपजाऊ | बांगर: पुरानी, कंकड़युक्त
गुणपोटाश समृद्ध, फॉस्फोरस की कमी
फसलेंगेहूं, चावल, गन्ना, दलहन
राज्यपंजाब, UP, बिहार, पश्चिम बंगाल

2. काली मृदा (Black Soil / Regur)

काली मृदा - कपास की मृदा
अन्य नामरेगुर, कपास मृदा, स्वयं जुताई मृदा
विस्तारदक्कन पठार - महाराष्ट्र, गुजरात, MP
विशेषतासूखने पर दरारें पड़ती हैं (स्वयं जुताई)
फसलेंकपास, गन्ना, सोयाबीन, मूंगफली

3. लाल एवं पीली मृदा

लाल मृदा
विस्तारओडिशा, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, दक्षिणी गंगा मैदान
रंग का कारणलौह ऑक्साइड (Fe2O3) की उपस्थिति
फसलेंचावल, गेहूं, दलहन, मोटे अनाज

4. लैटेराइट मृदा

लैटेराइट मृदा
विस्तारकर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, ओडिशा
विशेषतासूखने पर ईंट जैसी कठोर हो जाती है
फसलेंचाय, कॉफी, काजू, रबड़ (बागवानी)

5. मरुस्थलीय मृदा

मरुस्थलीय मृदा
विस्तारपश्चिमी राजस्थान, गुजरात का कच्छ
विशेषताकंकड़ (Kankar) की परत - कैल्शियम कार्बोनेट
फसलेंबाजरा, ज्वार, मूंगफली

6. वनीय/पर्वतीय मृदा

वनीय मृदा
विस्तारहिमालय, पश्चिमी और पूर्वी घाट
गुणअम्लीय प्रकृति, कम ह्यूमस
फसलेंचाय, कॉफी, फल, मसाले

मृदा अपरदन (Soil Erosion)

मृदा अपरदन = मृदा की ऊपरी उपजाऊ परत का जल, पवन या मानवीय गतिविधियों द्वारा हटना।

प्रकारकारकपरिणामक्षेत्र
चादर अपरदन (Sheet)जल की पतली परतऊपरी परत का समान रूप से हटनाढालू भूमि
अवनालिका अपरदन (Gully)तेज बहता जलखड्ड/बीहड़ (Badlands)चंबल, यमुना घाटी
पवन अपरदन (Wind)तेज हवाएंबालू के टीले, मरुस्थलीकरणराजस्थान, गुजरात

मृदा अपरदन के कारण

  • प्राकृतिक: भारी वर्षा, तेज हवाएं, ढालू भूमि
  • मानवीय: वनों की कटाई, अति चराई, खनन, निर्माण कार्य

मृदा संरक्षण (Soil Conservation)

विधिविवरणउपयुक्त क्षेत्र
समोच्च जुताई (Contour Ploughing)समोच्च रेखाओं के अनुसार जुताईपहाड़ी/ढालू क्षेत्र
सीढ़ीदार खेती (Terrace Farming)ढालों पर सीढ़ीनुमा खेतपर्वतीय क्षेत्र
पट्टी कृषि (Strip Cropping)फसलों के बीच घास की पट्टियांमैदानी क्षेत्र
रक्षक मेखला (Shelter Belts)खेतों के किनारे पेड़ों की कतारेंशुष्क क्षेत्र (पवन अपरदन रोकने)
वनारोपण (Afforestation)वृक्षारोपण, वन क्षेत्र बढ़ानासभी क्षेत्रों में उपयोगी

अभ्यास प्रश्न (MCQs)

बहुविकल्पीय प्रश्न - बोर्ड परीक्षा पैटर्न
1. कपास की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मृदा कौन सी है?
a) जलोढ़ मृदा
b) काली मृदा
c) लाल मृदा
d) लैटेराइट मृदा
उत्तर: b) काली मृदा (रेगुर)
2. खादर और बांगर किस मृदा के प्रकार हैं?
a) काली मृदा
b) जलोढ़ मृदा
c) लाल मृदा
d) लैटेराइट
उत्तर: b) जलोढ़ मृदा
3. भारत में शुद्ध बोया गया क्षेत्र लगभग कितना है?
a) 23%
b) 33%
c) 43%
d) 53%
उत्तर: c) 43%
4. लैटेराइट मृदा किन फसलों के लिए उपयुक्त है?
a) गेहूं और चावल
b) कपास और गन्ना
c) चाय और कॉफी
d) दलहन और तिलहन
उत्तर: c) चाय और कॉफी
5. कौन सी मृदा सूखने पर दरारें पड़ जाती हैं?
a) जलोढ़
b) लाल
c) काली
d) मरुस्थलीय
उत्तर: c) काली मृदा (स्वयं जुताई)
6. अवनालिका अपरदन से क्या बनता है?
a) उपजाऊ भूमि
b) खड्ड/बीहड़ (Badlands)
c) वन क्षेत्र
d) झील
उत्तर: b) खड्ड/बीहड़ (Badlands)
7. रक्षक मेखला (Shelter Belts) किस प्रकार के अपरदन को रोकती है?
a) जल अपरदन
b) पवन अपरदन
c) अवनालिका अपरदन
d) चादर अपरदन
उत्तर: b) पवन अपरदन
8. तट से 200 समुद्री मील के बाद के संसाधन कहलाते हैं:
a) राष्ट्रीय संसाधन
b) सामुदायिक संसाधन
c) अंतर्राष्ट्रीय संसाधन
d) व्यक्तिगत संसाधन
उत्तर: c) अंतर्राष्ट्रीय संसाधन
9. मरुस्थलीय मृदा में क्या पाया जाता है?
a) अधिक ह्यूमस
b) कंकड़ (Kankar)
c) अधिक नमी
d) लोहा
उत्तर: b) कंकड़ (Kankar)
10. रियो पृथ्वी सम्मेलन कब हुआ था?
a) 1987
b) 1992
c) 1997
d) 2002
उत्तर: b) 1992
त्वरित पुनरावलोकन (Quick Revision)
भूमि उपयोग: 43% बोया, 23% वन, 14% बंजर (43-23-14)
मृदा के प्रकार: ABRALF (जलोढ़, काली, लाल, मरुस्थली, लैटेराइट, वनीय)
जलोढ़: सबसे महत्वपूर्ण, खादर (नई) + बांगर (पुरानी), उत्तर भारत
काली: कपास की मृदा, स्वयं जुताई, दक्कन पठार (महाराष्ट्र, गुजरात)
लैटेराइट: चाय-कॉफी के लिए उपयुक्त, केरल-कर्नाटक
मरुस्थली: कंकड़ की परत, राजस्थान में
अपरदन: चादर, अवनालिका (बीहड़), पवन
संरक्षण: समोच्च जुताई, सीढ़ीदार खेती, रक्षक मेखला, वनारोपण
महत्वपूर्ण: रियो सम्मेलन 1992, EEZ 200 समुद्री मील

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