उपभोक्ता अधिकार (Consumer Rights) – कक्षा 10 अर्थशास्त्र अध्याय 5
NCERT Classes | Marwari Mission 100™ | अंतिम अपडेट: जनवरी 2025
| उपभोक्ता अधिकार (Consumer Rights) | |
|---|---|
| ⚖️🛒🛡️ उपभोक्ता संरक्षण और अधिकार | |
| पाठ्यपुस्तक | आर्थिक विकास की समझ |
| कक्षा | 10वीं |
| विषय | सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) |
| अध्याय संख्या | 5 |
| बोर्ड | RBSE / CBSE / सभी राज्य बोर्ड |
| माध्यम | हिंदी |
| सत्र | 2025-26 |
| मुख्य विषय | उपभोक्ता अधिकार, COPRA, ISI, AGMARK |
उपभोक्ता अधिकार (अंग्रेजी: Consumer Rights) कक्षा 10 की NCERT अर्थशास्त्र पाठ्यपुस्तक "आर्थिक विकास की समझ" का पाँचवाँ और अंतिम अध्याय है। इस अध्याय में हम उपभोक्ता के अधिकारों, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, उपभोक्ता आंदोलन, मानक चिह्नों (ISI, AGMARK, हॉलमार्क) और उपभोक्ता निवारण प्रणाली के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे।
बाजार में उपभोक्ता अक्सर शोषण का शिकार होता है - मिलावट, कम तौल, ऊँची कीमत, घटिया गुणवत्ता, भ्रामक विज्ञापन आदि। उपभोक्ताओं को इन समस्याओं से बचाने के लिए सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम बनाया है जो उपभोक्ताओं को कानूनी अधिकार प्रदान करता है।
विषय सूची
उपभोक्ता कौन है?
📘 परिभाषा
उपभोक्ता (Consumer) वह व्यक्ति है जो अपने उपयोग के लिए वस्तुएँ खरीदता है या सेवाएँ प्राप्त करता है। उपभोक्ता में वह व्यक्ति भी शामिल है जो खरीदार की सहमति से वस्तुओं या सेवाओं का उपयोग करता है।
हम सभी किसी न किसी रूप में उपभोक्ता हैं। जब हम बाजार से सब्जी खरीदते हैं, बिजली का उपयोग करते हैं, बस में यात्रा करते हैं, या डॉक्टर से इलाज कराते हैं - तो हम उपभोक्ता होते हैं।
⚡ महत्वपूर्ण
पुनर्विक्रय के लिए खरीदने वाला उपभोक्ता नहीं है। उदाहरण: यदि कोई दुकानदार थोक में सामान खरीदता है बेचने के लिए, तो वह उपभोक्ता नहीं है। लेकिन यदि वही व्यक्ति अपने घर के लिए कुछ खरीदता है, तो वह उपभोक्ता है।
उपभोक्ता शोषण के प्रकार
बाजार में उपभोक्ताओं का विभिन्न तरीकों से शोषण किया जाता है:
| शोषण का प्रकार | विवरण | उदाहरण |
|---|---|---|
| मिलावट | खाद्य पदार्थों में घटिया या हानिकारक पदार्थ मिलाना | दूध में पानी, मसालों में रंग, घी में डालडा |
| कम तौल/माप | वजन या माप में धोखाधड़ी | 1 किलो की जगह 900 ग्राम देना |
| अधिक मूल्य वसूलना | MRP से अधिक कीमत लेना | ₹10 की चीज ₹12 में बेचना |
| नकली/घटिया सामान | ब्रांडेड के नाम पर नकली उत्पाद बेचना | नकली दवाइयाँ, डुप्लीकेट इलेक्ट्रॉनिक्स |
| भ्रामक विज्ञापन | झूठे दावों वाले विज्ञापन | "7 दिन में गोरापन", "100% गारंटी" |
| एक्सपायरी उत्पाद | समय सीमा समाप्त उत्पाद बेचना | पुरानी दवाइयाँ, बासी खाद्य पदार्थ |
| खराब सेवाएँ | वादे के अनुसार सेवा न देना | बिजली कटौती, देरी से ट्रेन |
उपभोक्ता आंदोलन का इतिहास
उपभोक्ता आंदोलन उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए चलाया गया एक सामाजिक आंदोलन है। इसकी शुरुआत अमेरिका में हुई और धीरे-धीरे यह विश्वभर में फैला।
विश्व में उपभोक्ता आंदोलन
• 1960 के दशक में अमेरिका में उपभोक्ता आंदोलन तेज हुआ
• राल्फ नाडर (Ralph Nader) को "उपभोक्ता आंदोलन का जनक" माना जाता है
• 15 मार्च 1962 को अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने उपभोक्ता अधिकारों की घोषणा की
• इसीलिए 15 मार्च को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया जाता है
भारत में उपभोक्ता आंदोलन
• 1960-70 के दशक में भारत में उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत
• जमाखोरी, कालाबाजारी, मिलावट के विरुद्ध आवाज उठी
• 1986 में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (COPRA) पारित
• 24 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है
📅 महत्वपूर्ण तिथियाँ
15 मार्च - विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस (World Consumer Rights Day)
24 दिसंबर - राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस (National Consumer Day, India)
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (Consumer Protection Act - COPRA)
📘 परिभाषा
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (COPRA) भारत सरकार द्वारा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया कानून है। यह उपभोक्ताओं को कानूनी अधिकार प्रदान करता है और शिकायत निवारण का तंत्र स्थापित करता है।
| विवरण | COPRA 1986 | COPRA 2019 (नया) |
|---|---|---|
| पारित | 24 दिसंबर 1986 | 9 अगस्त 2019 |
| लागू | 1986 | 20 जुलाई 2020 |
| ई-कॉमर्स | कवर नहीं | ✅ कवर किया गया |
| केंद्रीय प्राधिकरण | नहीं था | ✅ CCPA स्थापित |
| मध्यस्थता | नहीं थी | ✅ मध्यस्थता का प्रावधान |
⚡ COPRA 2019 की नई विशेषताएँ
• CCPA (केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण) की स्थापना
• ई-कॉमर्स लेनदेन को कवर किया गया
• उत्पाद दायित्व (Product Liability) का प्रावधान
• भ्रामक विज्ञापनों पर कड़ी कार्रवाई
• ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा
उपभोक्ता के 6 अधिकार
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत उपभोक्ताओं को 6 मूलभूत अधिकार प्रदान किए गए हैं:
| क्र. | अधिकार | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | 🛡️ सुरक्षा का अधिकार (Right to Safety) |
जीवन और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वस्तुओं और सेवाओं से सुरक्षा का अधिकार। उदाहरण: ISI मार्क वाले बिजली उपकरण |
| 2 | ℹ️ सूचना का अधिकार (Right to be Informed) |
वस्तु की गुणवत्ता, मात्रा, शुद्धता, मूल्य, मानक आदि की जानकारी पाने का अधिकार। उदाहरण: MRP, निर्माण तिथि, एक्सपायरी तिथि |
| 3 | 🛒 चुनने का अधिकार (Right to Choose) |
विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं में से अपनी पसंद का चुनाव करने का अधिकार। किसी को जबरदस्ती कुछ खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता |
| 4 | 🗣️ सुनवाई का अधिकार (Right to be Heard) |
उपभोक्ता की शिकायत सुनी जाए और उचित मंच पर प्रस्तुत की जाए। उपभोक्ता फोरम में शिकायत का अधिकार |
| 5 | ⚖️ निवारण का अधिकार (Right to Seek Redressal) |
शोषण के विरुद्ध निवारण पाने का अधिकार। मुआवजा, बदला हुआ सामान, धनवापसी प्राप्त करने का अधिकार |
| 6 | 📚 उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार (Right to Consumer Education) |
अपने अधिकारों और उपभोक्ता संरक्षण के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अधिकार |
💡 याद रखने का तरीका
स सू चु सु नि शि = सुरक्षा, सूचना, चुनने, सुनवाई, निवारण, शिक्षा
त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र (Three-Tier Judicial System)
उपभोक्ता शिकायतों के निवारण के लिए त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र स्थापित किया गया है:
| स्तर | नाम | मामले की राशि (COPRA 2019) | अपील कहाँ |
|---|---|---|---|
| 1. जिला स्तर | जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (District Consumer Forum) |
₹1 करोड़ तक | राज्य आयोग में |
| 2. राज्य स्तर | राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (State Consumer Commission) |
₹1 करोड़ से ₹10 करोड़ | राष्ट्रीय आयोग में |
| 3. राष्ट्रीय स्तर | राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (National Consumer Commission) |
₹10 करोड़ से अधिक | सर्वोच्च न्यायालय में |
₹1 करोड़ तक
₹1-10 करोड़
₹10 करोड़ से अधिक
मानक चिह्न (Standard Marks)
सरकार ने उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न मानक चिह्न निर्धारित किए हैं। इन चिह्नों वाले उत्पाद गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हैं:
| चिह्न | पूरा नाम | जारीकर्ता | उत्पाद |
|---|---|---|---|
| ISI | Indian Standards Institute (अब BIS - Bureau of Indian Standards) |
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) | औद्योगिक उत्पाद - बिजली उपकरण, सीमेंट, LPG सिलेंडर |
| AGMARK | Agricultural Marketing (कृषि विपणन) |
विपणन निदेशालय, कृषि मंत्रालय | कृषि उत्पाद - घी, मसाले, शहद, दालें, तेल |
| हॉलमार्क | Hallmark (शुद्धता का प्रमाण) |
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) | सोने और चाँदी के आभूषण |
| FPO | Fruit Products Order (फल उत्पाद आदेश) |
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय | फल उत्पाद - जैम, जेली, स्क्वैश, जूस |
| FSSAI | Food Safety and Standards Authority of India | भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण | सभी खाद्य पदार्थ |
| Woolmark | Woolmark (ऊन का प्रमाण) |
अंतर्राष्ट्रीय ऊन सचिवालय | ऊनी वस्त्र |
⚡ महत्वपूर्ण जानकारी
MRP (Maximum Retail Price) = अधिकतम खुदरा मूल्य। इससे अधिक कीमत लेना गैरकानूनी है।
Expiry Date = समाप्ति तिथि। इसके बाद उत्पाद का उपयोग नहीं करना चाहिए।
Manufacturing Date = निर्माण तिथि
सूचना का अधिकार (Right to Information - RTI) 2005
📘 परिभाषा
सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) 2005 नागरिकों को सरकारी विभागों से सूचना प्राप्त करने का कानूनी अधिकार देता है। यह पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| लागू | 12 अक्टूबर 2005 |
| आवेदन शुल्क | ₹10 (BPL के लिए मुफ्त) |
| उत्तर की समय सीमा | 30 दिन (जीवन-मृत्यु के मामले में 48 घंटे) |
| अपील | प्रथम अपील - 30 दिन में, द्वितीय अपील - 90 दिन में |
उपभोक्ता के कर्तव्य
अधिकारों के साथ-साथ उपभोक्ताओं के कुछ कर्तव्य भी हैं:
• जागरूक रहना - अपने अधिकारों और उत्पादों की जानकारी रखना
• बिल/रसीद लेना - खरीदारी का प्रमाण रखना
• मानक चिह्न देखना - ISI, AGMARK, हॉलमार्क आदि की जाँच करना
• MRP और एक्सपायरी देखना - अधिक कीमत न देना
• शिकायत दर्ज करना - शोषण होने पर चुप न रहना
• गारंटी/वारंटी कार्ड सँभालना
महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर
प्रश्न 1: उपभोक्ता के 6 अधिकार कौन से हैं?
उत्तर: उपभोक्ता के 6 अधिकार हैं:
(1) सुरक्षा का अधिकार - हानिकारक उत्पादों से सुरक्षा
(2) सूचना का अधिकार - उत्पाद की जानकारी पाने का अधिकार
(3) चुनने का अधिकार - स्वतंत्र चयन का अधिकार
(4) सुनवाई का अधिकार - शिकायत सुने जाने का अधिकार
(5) निवारण का अधिकार - मुआवजा पाने का अधिकार
(6) उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार
प्रश्न 2: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (COPRA) क्या है? यह कब लागू हुआ?
उत्तर: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (COPRA) उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया कानून है।
COPRA 1986: 24 दिसंबर 1986 को लागू
COPRA 2019: 20 जुलाई 2020 से प्रभावी (नया कानून)
यह उपभोक्ताओं को कानूनी अधिकार देता है और त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र स्थापित करता है।
प्रश्न 3: त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र क्या है? इसमें कितनी राशि तक के मामले कहाँ सुने जाते हैं?
उत्तर: उपभोक्ता शिकायतों के निवारण के लिए त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र है:
(1) जिला फोरम: ₹1 करोड़ तक के मामले
(2) राज्य आयोग: ₹1 करोड़ से ₹10 करोड़ तक
(3) राष्ट्रीय आयोग: ₹10 करोड़ से अधिक
अंतिम अपील सर्वोच्च न्यायालय में की जा सकती है।
प्रश्न 4: ISI, AGMARK और हॉलमार्क क्या हैं?
उत्तर: ये गुणवत्ता के मानक चिह्न हैं:
ISI: Indian Standards Institute - औद्योगिक उत्पादों (बिजली उपकरण, सीमेंट) के लिए - BIS द्वारा जारी
AGMARK: Agricultural Marketing - कृषि उत्पादों (घी, मसाले, शहद) के लिए - कृषि मंत्रालय द्वारा जारी
हॉलमार्क: सोने-चाँदी के आभूषणों की शुद्धता के लिए - BIS द्वारा जारी
प्रश्न 5: राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस और विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस कब मनाए जाते हैं?
उत्तर:
राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस: 24 दिसंबर (भारत में) - इसी दिन 1986 में COPRA लागू हुआ था
विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस: 15 मार्च - इसी दिन 1962 में अमेरिकी राष्ट्रपति कैनेडी ने उपभोक्ता अधिकारों की घोषणा की थी
मुख्य शब्दावली
| शब्द | परिभाषा |
|---|---|
| उपभोक्ता | वह व्यक्ति जो अपने उपयोग के लिए वस्तु या सेवा खरीदता है |
| COPRA | उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (1986/2019) |
| ISI | औद्योगिक उत्पादों के लिए मानक चिह्न |
| AGMARK | कृषि उत्पादों के लिए मानक चिह्न |
| हॉलमार्क | सोने-चाँदी की शुद्धता का प्रमाण |
| RTI | सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 |
| MRP | अधिकतम खुदरा मूल्य |
| CCPA | केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (COPRA 2019) |
यह भी देखें
• अध्याय 2: भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक
• अध्याय 4: वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था
• कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान - सभी विषय
संदर्भ
1. NCERT पाठ्यपुस्तक - आर्थिक विकास की समझ, कक्षा 10
2. उपभोक्ता मामले विभाग, भारत सरकार
3. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019
4. भारतीय मानक ब्यूरो (BIS)


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