वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था – कक्षा 10 अर्थशास्त्र अध्याय 4
NCERT Classes | Marwari Mission 100™ | अंतिम अपडेट: जनवरी 2025
| वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था | |
|---|---|
| 🌍🏢✈️ वैश्वीकरण, MNC और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार | |
| पाठ्यपुस्तक | आर्थिक विकास की समझ |
| कक्षा | 10वीं |
| विषय | सामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र) |
| अध्याय संख्या | 4 |
| बोर्ड | RBSE / CBSE / सभी राज्य बोर्ड |
| माध्यम | हिंदी |
| सत्र | 2025-26 |
| मुख्य विषय | वैश्वीकरण, MNC, WTO, उदारीकरण |
वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था (अंग्रेजी: Globalisation and the Indian Economy) कक्षा 10 की NCERT अर्थशास्त्र पाठ्यपुस्तक "आर्थिक विकास की समझ" का चौथा अध्याय है। इस अध्याय में हम वैश्वीकरण की अवधारणा, बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs), विदेशी व्यापार, उदारीकरण और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे।
वैश्वीकरण ने पिछले तीन दशकों में भारतीय अर्थव्यवस्था को गहराई से प्रभावित किया है। 1991 में भारत ने नई आर्थिक नीति अपनाई जिसके तहत उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) की प्रक्रिया शुरू हुई।
विषय सूची
वैश्वीकरण क्या है?
📘 परिभाषा
वैश्वीकरण (Globalisation) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा विश्व के विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाएँ आपस में जुड़ती और एकीकृत होती हैं। इसमें वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी, प्रौद्योगिकी और लोगों का सीमाओं के पार तीव्र आदान-प्रदान होता है।
वैश्वीकरण ने विश्व को एक "वैश्विक गाँव" (Global Village) में बदल दिया है। आज हम भारत में बैठे अमेरिकी कंपनी के उत्पाद खरीद सकते हैं, चीनी मोबाइल इस्तेमाल कर सकते हैं, और जापानी गाड़ियों में सवारी कर सकते हैं।
वैश्वीकरण के प्रमुख पहलू
| पहलू | विवरण | उदाहरण |
|---|---|---|
| वस्तुओं का प्रवाह | देशों के बीच उत्पादों का आयात-निर्यात | चीनी इलेक्ट्रॉनिक्स, अमेरिकी कारें |
| सेवाओं का प्रवाह | IT, BPO, बैंकिंग सेवाओं का विस्तार | भारतीय IT कंपनियाँ अमेरिका में सेवाएँ |
| पूँजी का प्रवाह | विदेशी निवेश (FDI और FPI) | वॉलमार्ट का भारत में निवेश |
| प्रौद्योगिकी का प्रवाह | तकनीक और नवाचार का हस्तांतरण | स्मार्टफोन तकनीक, इंटरनेट |
| श्रम का प्रवाह | लोगों का रोजगार हेतु प्रवास | भारतीय IT पेशेवर अमेरिका में |
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (Multinational Corporations - MNCs)
📘 परिभाषा
बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) वह कंपनी है जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण या स्वामित्व रखती है। ये कंपनियाँ जहाँ सस्ता श्रम, कच्चा माल और अनुकूल सरकारी नीतियाँ मिलती हैं, वहाँ अपनी इकाइयाँ स्थापित करती हैं।
MNCs के उदाहरण
| कंपनी | मूल देश | क्षेत्र |
|---|---|---|
| कोका-कोला, पेप्सी | अमेरिका 🇺🇸 | पेय पदार्थ |
| सैमसंग, LG | दक्षिण कोरिया 🇰🇷 | इलेक्ट्रॉनिक्स |
| टोयोटा, होंडा | जापान 🇯🇵 | ऑटोमोबाइल |
| माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एप्पल | अमेरिका 🇺🇸 | प्रौद्योगिकी |
| नेस्ले, यूनिलीवर | स्विट्जरलैंड/ब्रिटेन 🇨🇭🇬🇧 | FMCG |
MNCs उत्पादन फैलाने के तरीके
• संयुक्त उपक्रम (Joint Venture) - स्थानीय कंपनी के साथ साझेदारी (जैसे मारुति-सुजुकी)
• स्थानीय कंपनी का अधिग्रहण (Acquisition) - मौजूदा कंपनी को खरीदना
• स्थानीय उत्पादकों को ऑर्डर देना (Outsourcing) - अपने ब्रांड नाम से उत्पाद बनवाना
• पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी - अपनी नई इकाई स्थापित करना
विदेशी व्यापार और बाजारों का एकीकरण
📘 परिभाषा
विदेशी व्यापार (Foreign Trade) विभिन्न देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान है। इसमें आयात (Import) - विदेश से माल मँगाना और निर्यात (Export) - विदेश को माल भेजना शामिल है।
विदेशी व्यापार के माध्यम से विभिन्न देशों के बाजार एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं। इससे उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलते हैं और उत्पादकों को बड़ा बाजार मिलता है।
बाजारों के एकीकरण का उदाहरण
📌 उदाहरण: चीनी खिलौने
चीन में खिलौने सस्ते में बनते हैं (सस्ता श्रम और कच्चा माल)। जब ये खिलौने भारतीय बाजार में आए तो भारतीय खिलौना निर्माताओं को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा क्योंकि चीनी खिलौने सस्ते थे।
वैश्वीकरण को संभव बनाने वाले कारक
वैश्वीकरण की तीव्र गति को कई कारकों ने संभव बनाया है:
| कारक | विवरण |
|---|---|
| 🚢 परिवहन में सुधार | कंटेनर शिप, हवाई जहाज से माल की तेज और सस्ती ढुलाई |
| 📱 सूचना और संचार प्रौद्योगिकी | इंटरनेट, मोबाइल, ईमेल से तत्काल संपर्क |
| 💻 IT क्रांति | BPO, कॉल सेंटर, सॉफ्टवेयर सेवाएँ |
| 📜 व्यापार उदारीकरण | व्यापार अवरोधों में कमी, आयात शुल्क में कटौती |
| 🏛️ WTO जैसे संगठन | अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों का निर्माण |
⚡ महत्वपूर्ण
सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) वैश्वीकरण का सबसे महत्वपूर्ण कारक है। इंटरनेट और दूरसंचार क्रांति ने दूरियों को समाप्त कर दिया है।
उदारीकरण और नई आर्थिक नीति 1991
📘 परिभाषा
उदारीकरण (Liberalisation) का अर्थ है सरकार द्वारा व्यापार और उद्योग पर लगाए गए प्रतिबंधों और नियंत्रणों को हटाना या कम करना। इसमें लाइसेंस राज समाप्त करना, आयात शुल्क कम करना और विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करना शामिल है।
1991 से पहले भारतीय अर्थव्यवस्था
1991 से पहले भारत में लाइसेंस-परमिट राज था। सरकार अर्थव्यवस्था पर कड़ा नियंत्रण रखती थी:
• उच्च आयात शुल्क - विदेशी वस्तुओं पर भारी कर
• आयात कोटा - आयात की मात्रा पर सीमा
• लाइसेंस आवश्यक - उद्योग लगाने के लिए सरकारी अनुमति
• विदेशी निवेश पर प्रतिबंध
नई आर्थिक नीति 1991 (LPG सुधार)
1991 में भारत गंभीर आर्थिक संकट में था (विदेशी मुद्रा भंडार समाप्त होने की कगार पर)। तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने नई आर्थिक नीति लागू की जिसे LPG (उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण) कहा जाता है।
| घटक | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| L - उदारीकरण | प्रतिबंधों में कमी, लाइसेंस राज समाप्त | आयात शुल्क में कमी |
| P - निजीकरण | सरकारी कंपनियों का निजी हाथों में हस्तांतरण | BALCO, VSNL का विनिवेश |
| G - वैश्वीकरण | विश्व अर्थव्यवस्था से एकीकरण | विदेशी निवेश को आमंत्रित करना |
📐 व्यापार अवरोध
व्यापार अवरोध (Trade Barriers) सरकार द्वारा विदेशी व्यापार पर लगाए गए प्रतिबंध हैं जैसे - आयात शुल्क (Import Tax), आयात कोटा, आयात प्रतिबंध। इन्हें हटाना या कम करना ही उदारीकरण है।
विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization - WTO)
📘 परिभाषा
विश्व व्यापार संगठन (WTO) एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के नियम बनाता है और व्यापार विवादों का निपटारा करता है। इसका उद्देश्य मुक्त और निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देना है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| स्थापना | 1 जनवरी 1995 |
| मुख्यालय | जिनेवा, स्विट्जरलैंड 🇨🇭 |
| सदस्य देश | 164 देश (2024) |
| पूर्ववर्ती संगठन | GATT (General Agreement on Tariffs and Trade) |
| भारत का सदस्यता वर्ष | 1995 (संस्थापक सदस्य) |
⚠️ विकासशील देशों की चिंता
हालांकि WTO का उद्देश्य सभी देशों के लिए समान नियम बनाना है, परंतु व्यवहार में विकसित देश अक्सर अपने हितों को प्राथमिकता देते हैं। वे कृषि को सब्सिडी देते हैं जबकि विकासशील देशों पर व्यापार उदारीकरण का दबाव डालते हैं।
वैश्वीकरण का भारत पर प्रभाव
वैश्वीकरण के भारत पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभाव पड़े हैं:
| ✅ सकारात्मक प्रभाव (लाभ) | ❌ नकारात्मक प्रभाव (हानि) |
|---|---|
|
✓ उपभोक्ताओं को लाभ - अधिक विकल्प, बेहतर गुणवत्ता, कम कीमत ✓ IT सेक्टर में उछाल - भारत विश्व का IT हब बना ✓ रोजगार के नए अवसर - BPO, कॉल सेंटर ✓ विदेशी निवेश में वृद्धि ✓ निर्यात में वृद्धि ✓ नई तकनीक का आगमन |
✗ छोटे उद्योगों को नुकसान - MNCs से प्रतिस्पर्धा ✗ किसानों की समस्याएँ - आयातित सस्ते उत्पादों से मुकाबला ✗ श्रमिकों का शोषण - अनियमित रोजगार ✗ असमान लाभ - सभी को समान लाभ नहीं ✗ पर्यावरण पर दबाव ✗ सांस्कृतिक प्रभाव |
किसे लाभ, किसे हानि?
| वर्ग | प्रभाव |
|---|---|
| धनी उपभोक्ता | ✅ लाभ - विदेशी ब्रांड, बेहतर उत्पाद |
| IT पेशेवर | ✅ लाभ - अच्छा वेतन, विदेश में अवसर |
| बड़े उद्योगपति | ✅ लाभ - विदेशी बाजार, साझेदारी |
| छोटे उद्योग | ❌ हानि - MNCs से प्रतिस्पर्धा |
| कृषि मजदूर | ❌ हानि - कम रोजगार, कम मजदूरी |
| असंगठित क्षेत्र के श्रमिक | ❌ हानि - अनिश्चित रोजगार, शोषण |
न्यायोचित वैश्वीकरण का संघर्ष
वैश्वीकरण से सभी को समान लाभ नहीं मिला है। इसलिए "न्यायोचित वैश्वीकरण" (Fair Globalisation) की माँग उठी है जो सभी के लिए लाभकारी हो।
न्यायोचित वैश्वीकरण के उपाय
• सरकार की भूमिका - श्रमिकों के हितों की रक्षा, न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करना
• श्रम कानूनों का पालन - MNCs को भी श्रम कानूनों का पालन करना चाहिए
• छोटे उद्योगों को संरक्षण - विशेष सहायता और प्रोत्साहन
• WTO में सुधार - विकासशील देशों की आवाज को महत्व
• पर्यावरण मानकों का पालन
📌 SEZ (विशेष आर्थिक क्षेत्र)
विशेष आर्थिक क्षेत्र (Special Economic Zones) सरकार द्वारा निर्धारित क्षेत्र हैं जहाँ कंपनियों को विशेष सुविधाएँ मिलती हैं - कर छूट, सरल नियम, बेहतर बुनियादी ढाँचा। उद्देश्य: विदेशी निवेश आकर्षित करना और निर्यात बढ़ाना।
महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर
प्रश्न 1: वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: वैश्वीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा विश्व के विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाएँ आपस में जुड़ती और एकीकृत होती हैं। इसमें वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी, प्रौद्योगिकी और लोगों का सीमाओं के पार तीव्र आदान-प्रदान होता है।
प्रश्न 2: बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) क्या है? MNCs उत्पादन कैसे फैलाती हैं?
उत्तर: बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) वह कंपनी है जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण रखती है।
उत्पादन फैलाने के तरीके:
(1) स्थानीय कंपनी के साथ संयुक्त उपक्रम
(2) स्थानीय कंपनी का अधिग्रहण
(3) स्थानीय उत्पादकों को ऑर्डर देना
(4) पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी स्थापित करना
प्रश्न 3: उदारीकरण क्या है? 1991 की नई आर्थिक नीति के मुख्य घटक बताइए।
उत्तर: उदारीकरण का अर्थ है सरकार द्वारा व्यापार और उद्योग पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाना या कम करना।
1991 की नई आर्थिक नीति (LPG):
L - उदारीकरण: लाइसेंस राज समाप्त, आयात शुल्क में कमी
P - निजीकरण: सरकारी कंपनियों का विनिवेश
G - वैश्वीकरण: विश्व अर्थव्यवस्था से एकीकरण
प्रश्न 4: WTO क्या है? इसकी स्थापना कब और कहाँ हुई?
उत्तर: विश्व व्यापार संगठन (WTO) एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के नियम बनाता है।
स्थापना: 1 जनवरी 1995
मुख्यालय: जिनेवा, स्विट्जरलैंड
सदस्य: 164 देश
उद्देश्य: मुक्त और निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देना
प्रश्न 5: वैश्वीकरण के भारत पर क्या प्रभाव पड़े हैं?
उत्तर:
सकारात्मक प्रभाव: उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प, IT सेक्टर में उछाल, नए रोजगार के अवसर, विदेशी निवेश में वृद्धि, नई तकनीक का आगमन।
नकारात्मक प्रभाव: छोटे उद्योगों को नुकसान, किसानों की समस्याएँ, श्रमिकों का शोषण, असमान लाभ वितरण, पर्यावरण पर दबाव।
मुख्य शब्दावली
| शब्द | परिभाषा |
|---|---|
| वैश्वीकरण | विश्व की अर्थव्यवस्थाओं का आपसी एकीकरण |
| MNC | बहुराष्ट्रीय कंपनी - एक से अधिक देशों में उत्पादन करने वाली कंपनी |
| उदारीकरण | व्यापार प्रतिबंधों को हटाना या कम करना |
| WTO | विश्व व्यापार संगठन - अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियामक (1995) |
| व्यापार अवरोध | आयात शुल्क, कोटा जैसे व्यापार पर प्रतिबंध |
| SEZ | विशेष आर्थिक क्षेत्र - कर छूट वाले औद्योगिक क्षेत्र |
| FDI | प्रत्यक्ष विदेशी निवेश |
| निजीकरण | सरकारी कंपनियों का निजी हाथों में हस्तांतरण |
यह भी देखें
• अध्याय 2: भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक
• कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान - सभी विषय
संदर्भ
1. NCERT पाठ्यपुस्तक - आर्थिक विकास की समझ, कक्षा 10
2. विश्व व्यापार संगठन (WTO) - आधिकारिक वेबसाइट
3. भारत सरकार - आर्थिक सर्वेक्षण
4. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत


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