विकास कक्षा 10 अर्थशास्त्र | अध्याय 1 NCERT

📅 Monday, 29 December 2025 📖 3-5 min read
विकास कक्षा 10 अर्थशास्त्र | अध्याय 1 नोट्स NCERT RBSE | Marwari Mission 100

विकास (Development) – कक्षा 10 अर्थशास्त्र अध्याय 1

NCERT Classes | Marwari Mission 100™ | अंतिम अपडेट: जनवरी 2025

विकास (Development)
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आर्थिक विकास की अवधारणा
पाठ्यपुस्तकआर्थिक विकास की समझ
कक्षा10वीं
विषयसामाजिक विज्ञान (अर्थशास्त्र)
अध्याय संख्या1
बोर्डRBSE / CBSE / सभी राज्य बोर्ड
माध्यमहिंदी
सत्र2025-26
मुख्य विषयप्रति व्यक्ति आय, HDI, सतत विकास

विकास (अंग्रेजी: Development) कक्षा 10 की NCERT अर्थशास्त्र पाठ्यपुस्तक "आर्थिक विकास की समझ" का पहला अध्याय है। यह अध्याय विकास की अवधारणा, विभिन्न लोगों के विभिन्न विकास लक्ष्य, आय और अन्य मापदंड, मानव विकास सूचकांक तथा सतत विकास की अवधारणाओं को समझाता है।

इस अध्याय में हम जानेंगे कि विकास का अर्थ केवल आर्थिक वृद्धि नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक अवधारणा है जिसमें जीवन की गुणवत्ता, सामाजिक न्याय, स्वतंत्रता और पर्यावरण संरक्षण जैसे पहलू भी शामिल हैं। विभिन्न व्यक्तियों और समूहों के लिए विकास के अलग-अलग अर्थ हो सकते हैं।

विकास क्या है?

विकास एक व्यापक और बहुआयामी अवधारणा है जो किसी देश या क्षेत्र की आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और पर्यावरणीय स्थितियों में सकारात्मक परिवर्तन को दर्शाती है। विकास का अर्थ केवल आर्थिक संवृद्धि (Economic Growth) नहीं है, बल्कि इसमें जीवन स्तर में सुधार, गरीबी में कमी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में वृद्धि तथा नागरिकों के समग्र कल्याण में वृद्धि शामिल है।

📘 परिभाषा

विकास का अर्थ है किसी देश या क्षेत्र की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्थितियों में प्रगति या सुधार, जिससे वहाँ के लोगों के जीवन स्तर में वृद्धि हो।

जब हम विकास की बात करते हैं तो हमें यह समझना चाहिए कि अलग-अलग लोगों के लिए विकास के अलग-अलग मायने हो सकते हैं। जो बात एक व्यक्ति के लिए विकास हो सकती है, वही दूसरे व्यक्ति के लिए विकास नहीं भी हो सकती। उदाहरण के लिए, एक औद्योगिक परियोजना के कारण कुछ लोगों को रोजगार मिल सकता है, लेकिन वही परियोजना दूसरे लोगों के लिए विस्थापन और पर्यावरण प्रदूषण का कारण बन सकती है।

विकास की प्रमुख विशेषताएँ

विकास की निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएँ हैं:

• विकास एक निरंतर प्रक्रिया है, यह कोई अंतिम लक्ष्य नहीं है

• विकास के अलग-अलग पहलू होते हैं - आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, पर्यावरणीय

• विकास का अर्थ सभी के लिए समान नहीं होता

• विकास में भौतिक और अभौतिक दोनों पक्ष शामिल हैं

• वास्तविक विकास समावेशी होना चाहिए जो सभी वर्गों को लाभ पहुँचाए

विभिन्न लोग, विभिन्न लक्ष्य

विभिन्न व्यक्तियों की अलग-अलग परिस्थितियाँ, आवश्यकताएँ और आकांक्षाएँ होती हैं, इसलिए उनके विकास के लक्ष्य भी भिन्न-भिन्न होते हैं। एक भूमिहीन ग्रामीण मजदूर के लिए विकास का अर्थ अधिक काम के दिन और बेहतर मजदूरी हो सकता है, जबकि एक संपन्न किसान के लिए विकास का अर्थ फसलों के बेहतर दाम और सिंचाई की सुविधा हो सकता है।

व्यक्ति/वर्ग विकास के लक्ष्य कारण
भूमिहीन ग्रामीण मजदूर अधिक काम के दिन, बेहतर मजदूरी, बच्चों के लिए स्थानीय स्कूल नियमित आय की आवश्यकता, बच्चों की शिक्षा
संपन्न किसान फसलों के उच्च समर्थन मूल्य, सस्ती सिंचाई सुविधा खेती से अधिक आय प्राप्त करना
शहरी बेरोजगार युवा रोजगार के अवसर, कौशल प्रशिक्षण, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ आजीविका और करियर विकास
धनी परिवार की लड़की समान व्यवहार, करियर चुनने की स्वतंत्रता, सुरक्षा सम्मान और समान अवसरों की चाह
औद्योगिक श्रमिक नौकरी की सुरक्षा, बेहतर वेतन, कार्यस्थल पर सुरक्षा स्थायी आय और बेहतर कार्य परिस्थितियाँ
छोटे व्यापारी आसान ऋण, कम कर, बड़े व्यापारियों से संरक्षण व्यापार विस्तार और प्रतिस्पर्धा में टिके रहना

⚡ महत्वपूर्ण बिंदु

विकास के लक्ष्य केवल भौतिक वस्तुओं (आय, मकान, गाड़ी) तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें अभौतिक पहलू भी शामिल हैं जैसे - सुरक्षा, स्वतंत्रता, सम्मान, समान व्यवहार और प्रदूषण-मुक्त वातावरण।

विकास लक्ष्यों में टकराव

कभी-कभी एक समूह के विकास लक्ष्य दूसरे समूह के विकास लक्ष्यों से टकरा सकते हैं। उदाहरण के लिए:

• एक बाँध परियोजना शहरी क्षेत्रों में बिजली और पानी की आपूर्ति कर सकती है, लेकिन यह ग्रामीण लोगों के विस्थापन का कारण बन सकती है

• एक फैक्ट्री रोजगार दे सकती है, लेकिन पर्यावरण प्रदूषण भी फैला सकती है

खनन गतिविधियाँ आर्थिक विकास में योगदान दे सकती हैं, लेकिन स्थानीय आदिवासियों की आजीविका और संस्कृति को नुकसान पहुँचा सकती हैं

आय और अन्य मापदंड

लोगों की आय उनके विकास लक्ष्यों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि अधिक आय का अर्थ है अधिक वस्तुओं और सेवाओं को खरीदने की क्षमता। हालाँकि, आय ही एकमात्र मापदंड नहीं है जिससे विकास को मापा जा सके।

आय के अतिरिक्त अन्य महत्वपूर्ण मापदंड

मापदंड विवरण महत्व
समान व्यवहार जाति, धर्म, लिंग के आधार पर भेदभाव न होना सामाजिक न्याय और समानता
स्वतंत्रता अपने जीवन के बारे में निर्णय लेने की आजादी व्यक्तिगत विकास और गरिमा
सुरक्षा अपराध, हिंसा और शोषण से सुरक्षा शांतिपूर्ण जीवन
सम्मान समाज और कार्यस्थल पर आदर आत्मसम्मान और मानसिक स्वास्थ्य
स्वच्छ वातावरण प्रदूषण-मुक्त हवा, पानी और परिवेश स्वस्थ जीवन
सार्वजनिक सुविधाएँ अच्छे स्कूल, अस्पताल, सड़कें बेहतर जीवन गुणवत्ता

प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income)

विभिन्न देशों के विकास की तुलना करने के लिए अर्थशास्त्री प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) का उपयोग करते हैं। यह किसी देश की औसत आय को दर्शाती है।

📐 सूत्र

प्रति व्यक्ति आय = कुल राष्ट्रीय आय ÷ कुल जनसंख्या

विश्व बैंक का वर्गीकरण (2019)

विश्व बैंक प्रति व्यक्ति आय के आधार पर देशों को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत करता है:

श्रेणी प्रति व्यक्ति आय (US$ में)
समृद्ध/विकसित देश 12,056 डॉलर प्रति वर्ष या अधिक
निम्न आय वाले देश 1,005 डॉलर प्रति वर्ष या कम
भारत निम्न मध्यम आय वाले देशों की श्रेणी में

प्रति व्यक्ति आय की सीमाएँ

प्रति व्यक्ति आय विकास का एक महत्वपूर्ण सूचक है, परंतु यह पर्याप्त सूचक नहीं है। इसकी निम्नलिखित सीमाएँ हैं:

आय वितरण नहीं दर्शाती - यह असमानता को नहीं दिखाती। एक देश में कुछ लोग बहुत अमीर और बहुत से लोग गरीब हो सकते हैं

जीवन की गुणवत्ता नहीं दर्शाती - अधिक आय का अर्थ बेहतर जीवन नहीं है

सार्वजनिक सुविधाओं की अनदेखी - शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सेवाओं को शामिल नहीं करती

अभौतिक पहलुओं की उपेक्षा - सुरक्षा, स्वतंत्रता, सम्मान आदि को नहीं मापती

पर्यावरणीय पहलू शामिल नहीं - प्रदूषण, संसाधनों की कमी को नहीं दर्शाती

भारतीय राज्यों की तुलना

भारत के विभिन्न राज्यों की तुलना से यह स्पष्ट होता है कि प्रति व्यक्ति आय ही विकास का एकमात्र मापदंड नहीं है। नीचे दी गई तालिका केरल, पंजाब और बिहार की तुलना प्रस्तुत करती है:

सूचक केरल पंजाब बिहार
प्रति व्यक्ति आय (₹) 1,15,000 1,19,000 34,000
शिशु मृत्यु दर (प्रति 1000) 10 25 38
साक्षरता दर (%) 94% 82% 70%
शुद्ध उपस्थिति अनुपात (%) 98% 81% 56%

📊 विश्लेषण

केरल की प्रति व्यक्ति आय पंजाब से कम होने के बावजूद, केरल मानव विकास सूचकांकों जैसे साक्षरता दर और शिशु मृत्यु दर में पंजाब से काफी बेहतर है। यह सिद्ध करता है कि केवल आय से विकास नहीं मापा जा सकता।

मानव विकास सूचकांक (Human Development Index - HDI)

मानव विकास सूचकांक (HDI) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रकाशित एक समग्र सूचकांक है जो विकास को तीन आधारभूत मापदंडों पर मापता है। UNDP प्रत्येक वर्ष मानव विकास रिपोर्ट प्रकाशित करता है जिसमें विश्व के सभी देशों की HDI रैंकिंग दी जाती है।

HDI के तीन मापदंड

मापदंड सूचक विवरण
स्वास्थ्य जन्म के समय जीवन प्रत्याशा एक व्यक्ति औसतन कितने वर्ष जीवित रहेगा
शिक्षा औसत स्कूली वर्ष एवं अपेक्षित स्कूली वर्ष शिक्षा का औसत और अपेक्षित स्तर
जीवन स्तर प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI) प्रति व्यक्ति औसत आय

HDI मान का वर्गीकरण

श्रेणी HDI मान
अति उच्च मानव विकास 0.800 और अधिक
उच्च मानव विकास 0.700 - 0.799
मध्यम मानव विकास 0.550 - 0.699
निम्न मानव विकास 0.550 से कम

सतत विकास (Sustainable Development)

📘 परिभाषा

सतत विकास (Sustainable Development) वह विकास है जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों की अपनी आवश्यकताएँ पूरी करने की क्षमता से समझौता नहीं करता।

सतत विकास की अवधारणा इस विचार पर आधारित है कि प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं और यदि हम इनका अंधाधुंध उपयोग करते रहे तो भविष्य की पीढ़ियाँ इनसे वंचित हो जाएँगी।

संसाधनों के प्रकार

नवीकरणीय संसाधन (Renewable) गैर-नवीकरणीय संसाधन (Non-Renewable)
भूजल (यदि पुनर्भरण हो), वन (यदि पुनर्रोपण हो), सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, वन्य जीवन (यदि संरक्षित हो), मछली (यदि नियंत्रित मत्स्यन हो) कच्चा तेल (पेट्रोलियम), कोयला, प्राकृतिक गैस, खनिज पदार्थ, जीवाश्म ईंधन, परमाणु ईंधन (यूरेनियम)

⚠️ चिंताजनक तथ्य

वर्तमान में विश्व में जीवाश्म ईंधनों का भंडार तेजी से घट रहा है। यदि उपभोग की वर्तमान दर जारी रही तो कच्चे तेल का भंडार अगले 40-50 वर्षों में समाप्त हो सकता है।

महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

प्रश्न 1: विकास से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: विकास का अर्थ है किसी देश या क्षेत्र की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्थितियों में प्रगति जिससे लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो। विभिन्न लोगों के विकास के लक्ष्य भिन्न होते हैं क्योंकि उनकी परिस्थितियाँ, आवश्यकताएँ और आकांक्षाएँ अलग-अलग होती हैं।

प्रश्न 2: प्रति व्यक्ति आय विकास का पर्याप्त सूचक क्यों नहीं है?

उत्तर: प्रति व्यक्ति आय विकास का पर्याप्त सूचक नहीं है क्योंकि यह आय वितरण (असमानता) नहीं दर्शाती, जीवन की गुणवत्ता नहीं बताती, सार्वजनिक सुविधाओं (शिक्षा, स्वास्थ्य) को शामिल नहीं करती, और अभौतिक पहलुओं (सुरक्षा, स्वतंत्रता) को नहीं मापती।

प्रश्न 3: मानव विकास सूचकांक (HDI) क्या है?

उत्तर: मानव विकास सूचकांक (HDI) UNDP द्वारा प्रकाशित एक समग्र सूचकांक है। इसके तीन घटक हैं: (1) स्वास्थ्य - जन्म के समय जीवन प्रत्याशा (2) शिक्षा - औसत स्कूली वर्ष और अपेक्षित स्कूली वर्ष (3) जीवन स्तर - प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय। HDI का मान 0 से 1 के बीच होता है।

प्रश्न 4: सतत विकास से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: सतत विकास वह विकास है जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों की क्षमता से समझौता नहीं करता। इसकी आवश्यकता है क्योंकि प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं, जीवाश्म ईंधन तेजी से समाप्त हो रहे हैं, और पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है।

प्रश्न 5: नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनों में अंतर बताइए।

उत्तर: नवीकरणीय संसाधन वे हैं जो प्रकृति द्वारा पुनः उत्पन्न किए जा सकते हैं जैसे - सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल, वन। गैर-नवीकरणीय संसाधन वे हैं जो एक बार उपयोग के बाद समाप्त हो जाते हैं जैसे - कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, खनिज।

मुख्य शब्दावली

शब्द परिभाषा
विकास आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्थितियों में प्रगति
प्रति व्यक्ति आय कुल राष्ट्रीय आय को कुल जनसंख्या से भाग देने पर प्राप्त औसत आय
मानव विकास सूचकांक UNDP द्वारा स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर पर आधारित समग्र सूचकांक
सतत विकास भविष्य की पीढ़ियों की क्षमता से समझौता किए बिना वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति
जीवन प्रत्याशा जन्म के समय एक व्यक्ति के औसतन कितने वर्ष जीवित रहने की संभावना
शिशु मृत्यु दर प्रति 1000 जीवित जन्मों पर एक वर्ष से कम आयु के शिशुओं की मृत्यु
साक्षरता दर 7 वर्ष और उससे अधिक आयु में साक्षर लोगों का प्रतिशत
UNDP संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम - मानव विकास रिपोर्ट प्रकाशित करता है

यह भी देखें

अध्याय 2: भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक

अध्याय 3: मुद्रा और साख

अध्याय 4: वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था

अध्याय 5: उपभोक्ता अधिकार

कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान - सभी विषय

संदर्भ

1. NCERT पाठ्यपुस्तक - आर्थिक विकास की समझ, कक्षा 10

2. UNDP मानव विकास रिपोर्ट 2020

3. विश्व बैंक - विश्व विकास संकेतक

4. भारत सरकार - आर्थिक सर्वेक्षण

यह लेख Marwari Mission 100™ द्वारा NCERTClasses.com के लिए तैयार किया गया है।

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