Class 10 Hindi Kshitij Chapter 2: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद तुलसीदास रामचरितमानस Notes 2026 | भावार्थ शब्दार्थ Character Analysis | NCERT

📅 Saturday, 10 January 2026 📖 3-5 min read

🏹 Class 10 Hindi Kshitij Chapter 2
राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
तुलसीदास

Complete Notes 2026 | भावार्थ + Character Analysis

NCERT Hindi Kshitij | CBSE Board Exam 2026

📚 Marwari Mission 100 Series

📚 इस पाठ में क्या है?

  • कवि: गोस्वामी तुलसीदास
  • रचना: रामचरितमानस (बालकाण्ड)
  • भाषा: अवधी
  • विषय: राम-विवाह के समय धनुष भंग की घटना
  • पात्र: परशुराम, लक्ष्मण, राम
  • मुख्य विषय: क्रोध vs विनम्रता, अहंकार vs विनय

🔗 Related: Chapter 1: सूरदास के पद - भक्तिकाल की कविता

1. कवि परिचय - गोस्वामी तुलसीदास

📜 महाकवि तुलसीदास

जीवन परिचय:

विवरण जानकारी
जन्म 1532 ई. (राजापुर, उत्तर प्रदेश)
मृत्यु 1623 ई. (काशी)
काल भक्तिकाल (रामभक्ति शाखा)
मुख्य रचना रामचरितमानस
भाषा अवधी, ब्रज

प्रमुख रचनाएं:

  • रामचरितमानस - सबसे प्रसिद्ध
  • विनयपत्रिका
  • कवितावली
  • दोहावली
  • गीतावली
  • हनुमान चालीसा

2. पाठ का सारांश

📖 कथा का संक्षिप्त रूप

📌 घटना:

राजा जनक ने सीता के स्वयंवर में शर्त रखी थी कि जो शिवजी का धनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ा देगा, उसी से सीता का विवाह होगा।

श्रीराम ने यह धनुष तोड़ दिया। परशुराम को जब यह पता चला, तो वे क्रोधित होकर आए।

⚡ संवाद का क्रम:

  1. परशुराम का क्रोध: धनुष तोड़ने पर रोष प्रकट करते हैं
  2. लक्ष्मण की वीरता: परशुराम को उत्तर देते हैं
  3. परशुराम का आवेश: लक्ष्मण के वचनों पर और क्रोधित होते हैं
  4. राम की विनम्रता: परशुराम को शांत करने का प्रयास
  5. लक्ष्मण का तर्क: धनुष टूटने का कारण बताते हैं
  6. अंत में शांति: परशुराम शांत होते हैं

3. पात्र परिचय

👥 मुख्य पात्र

⚔️ परशुराम

विष्णु के छठे अवतार

स्वभाव:
  • क्रोधी स्वभाव
  • अहंकारी योद्धा
  • धनुष-विद्या के गुरु
  • क्षत्रियों का नाश करने वाले
  • शिवभक्त

🏹 लक्ष्मण

राम के छोटे भाई

स्वभाव:
  • वीर और साहसी
  • सत्यवादी
  • तीक्ष्ण बुद्धि
  • बड़ों का सम्मान करने वाले
  • राम के प्रति समर्पित

🙏 राम

मर्यादा पुरुषोत्तम

स्वभाव:
  • अत्यंत विनम्र
  • शांत और धैर्यवान
  • बड़ों का आदर करने वाले
  • मर्यादा का पालन
  • सभी को शांत करने वाले

4. संपूर्ण पाठ (काव्यांश)

📜 रामचरितमानस से

नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥
आयेसु काह कहिअ का ऊना। कीन्हेसु कँह सुधार कस भूना॥

सुनि लघुलष्मण के बचन कृपाला। परसु सुधारि धरेउ कर भाला॥
अब जनि देइ दो ष मोहि लोगू। कटुबादी बालक बध जोगू॥

मिले न कबहूँ सुभट रन गाढ़े। द्विजदेवता घरन्ह के बाढ़े॥
तुम्ह तौं कालहु हाँक न सोहाई। देखा राम नयन के गोहाई॥

बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्वामित्र संग कैं होही॥
बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी॥

पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू॥
इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं॥

देखिअत हियँ हँस लखनु कहा। कछु न रीस रिसाइ रघुनाथा॥
रे रे कुठार मोहि करु दरसा। सबै सोह कर कैसे परसा॥

5. शब्दार्थ (कठिन शब्द)

📖 शब्दों के अर्थ

शब्द अर्थ
नाथ हे स्वामी
संभुधनु शिव का धनुष
भंजनिहारा तोड़ने वाला
होइहि केउ कोई होगा
आयेसु आज्ञा
काह क्यों
ऊना कमी
परसु फरसा, कुल्हाड़ी
भाला भाला (हथियार)
जनि मत
कटुबादी कड़वी बातें करने वाला
बध जोगू मारे जाने योग्य
सुभट महान योद्धा
रन गाढ़े युद्ध के मैदान में
द्विजदेवता ब्राह्मण और देवता
कुठारू कुल्हाड़ी
कुम्हड़बतिया कद्दू की बेल (कमजोर)
तरजनी तर्जनी अंगुली (धमकी)
रीस क्रोध
परसा स्पर्श किया, छुआ

6. भावार्थ (Explanation)

💭 पद्यांशों का भावार्थ

पद्यांश 1:

"नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥
आयेसु काह कहिअ का ऊना। कीन्हेसु कँह सुधार कस भूना॥"

भावार्थ:

परशुराम कहते हैं - हे राजन! शिवजी के धनुष को तोड़ने वाला कोई एक आपका दास ही होगा। आज्ञा देने में क्या कमी रह गई जो धनुष को सुधारने के बजाय उसे भून दिया गया (तोड़ दिया गया)?

संदर्भ: परशुराम क्रोधित होकर पूछ रहे हैं कि शिव के धनुष को किसने तोड़ा है।

पद्यांश 2:

"सुनि लघुलष्मण के बचन कृपाला। परसु सुधारि धरेउ कर भाला॥
अब जनि देइ दोष मोहि लोगू। कटुबादी बालक बध जोगू॥"

भावार्थ:

लक्ष्मण के वचन सुनकर कृपालु परशुराम ने अपने परशु को संभाला और हाथ में भाला धारण कर लिया। वे कहते हैं - अब लोग मुझे दोष न दें। यह कड़वी बातें करने वाला बालक मारे जाने योग्य है।

संदर्भ: परशुराम लक्ष्मण के तीखे वचनों से और क्रोधित हो जाते हैं।

पद्यांश 3:

"बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी॥
पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू॥"

भावार्थ:

लक्ष्मण मुस्कुराते हुए विनम्र स्वर में बोले - हे मुनिश्रेष्ठ! आप महान योद्धा माने जाते हैं। आप बार-बार मुझे अपनी कुल्हाड़ी दिखा रहे हैं। क्या आप फूँक मारकर पहाड़ उड़ाना चाहते हैं?

संदर्भ: लक्ष्मण व्यंग्य से परशुराम को उत्तर दे रहे हैं।

पद्यांश 4:

"इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं॥"

भावार्थ:

यहाँ कोई कद्दू की बेल जैसा कमजोर नहीं है जो तर्जनी (धमकी वाली अंगुली) देखकर ही मर जाए।

संदर्भ: लक्ष्मण स्पष्ट कर रहे हैं कि वे धमकियों से नहीं डरते।

7. चरित्र विश्लेषण (Character Analysis)

👥 पात्रों का विस्तृत विश्लेषण

⚔️ परशुराम का चरित्र

गुण:
  • ✅ महान योद्धा
  • ✅ धनुर्विद्या में पारंगत
  • ✅ शिवभक्त
  • ✅ क्षत्रियों का नाश करने वाले
दोष:
  • ❌ अत्यधिक क्रोधी
  • ❌ अहंकारी
  • ❌ जल्दबाज
  • ❌ धैर्य की कमी

🏹 लक्ष्मण का चरित्र

गुण:
  • ✅ अत्यंत वीर और साहसी
  • ✅ तीक्ष्ण बुद्धि
  • ✅ व्यंग्य में निपुण
  • ✅ भाई के प्रति समर्पित
दोष:
  • ❌ कभी-कभी तीखी बातें करते हैं
  • ❌ बड़ों के प्रति अधिक मुखरता

🙏 राम का चरित्र

गुण:
  • ✅ अत्यंत विनम्र और शांत
  • ✅ बड़ों का सम्मान करने वाले
  • ✅ मर्यादा पुरुषोत्तम
  • ✅ सबको शांत करने वाले
  • ✅ धैर्यवान

विशेष: राम पूरी घटना में शांत और विनम्र बने रहते हैं।

8. पाठ का मुख्य संदेश

💡 प्रमुख शिक्षाएं

1️⃣ क्रोध का परिणाम:

अत्यधिक क्रोध मनुष्य को अंधा बना देता है। परशुराम का क्रोध उन्हें राम की दिव्यता नहीं देखने देता।

2️⃣ विनम्रता की शक्ति:

राम की विनम्रता अंततः परशुराम को शांत कर देती है। विनम्रता सबसे बड़ा गुण है।

3️⃣ वीरता और साहस:

लक्ष्मण अपने भाई की रक्षा के लिए निडर होकर खड़े होते हैं। सच्चा साहस यही है।

4️⃣ अहंकार vs विनय:

परशुराम का अहंकार और राम की विनम्रता का अंतर स्पष्ट है। विनय सदैव विजयी होती है।

5️⃣ बड़ों का सम्मान:

लक्ष्मण तीखी बातें करते हैं, लेकिन राम बड़ों का सम्मान करते हुए स्थिति को संभालते हैं।

9. महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

Q1. परशुराम के क्रोध करने का क्या कारण था?

उत्तर: परशुराम शिवभक्त थे। शिव का धनुष उनके लिए अत्यंत पूजनीय था। जब उन्हें पता चला कि किसी ने शिव के धनुष को तोड़ दिया है, तो वे अत्यंत क्रोधित हो गए। उनका क्रोध इसलिए भी था क्योंकि उन्हें लगा कि उनके आराध्य का अपमान हुआ है।

Q2. लक्ष्मण ने परशुराम को क्या उत्तर दिया?

उत्तर: लक्ष्मण ने परशुराम को व्यंग्यपूर्ण उत्तर दिया। उन्होंने कहा:

  • आप बार-बार अपनी कुल्हाड़ी दिखा रहे हैं
  • क्या आप फूँक मारकर पहाड़ उड़ाना चाहते हैं?
  • यहाँ कोई कद्दू की बेल नहीं है जो धमकी से डर जाए
  • धनुष पुराना था, इसलिए टूट गया

Q3. राम का चरित्र कैसा है?

उत्तर: राम का चरित्र अत्यंत आदर्श है:

  • विनम्र: परशुराम के क्रोध के बावजूद शांत रहे
  • मर्यादित: बड़ों का सम्मान किया
  • धैर्यवान: स्थिति को संभालने का प्रयास किया
  • समझदार: लक्ष्मण को भी समझाया
  • शांतिप्रिय: झगड़े को टालने का प्रयास किया

Q4. इस संवाद से क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर: इस संवाद से निम्न शिक्षाएं मिलती हैं:

  1. क्रोध मनुष्य को अंधा बना देता है
  2. विनम्रता सबसे बड़ा गुण है
  3. अहंकार का नाश होता है
  4. बड़ों का सम्मान करना चाहिए
  5. धैर्य से हर समस्या का समाधान होता है

Q5. "कुम्हड़बतिया" से क्या आशय है?

उत्तर: "कुम्हड़बतिया" का अर्थ है - कद्दू की बेल। लक्ष्मण ने यह शब्द उन कमजोर लोगों के लिए प्रयोग किया जो थोड़ी सी धमकी से डर जाते हैं। लक्ष्मण कह रहे हैं कि हम कमजोर नहीं हैं जो तुम्हारी धमकी से डर जाएं।

Q6. परशुराम किसके भक्त थे?

उत्तर: परशुराम शिवजी के परम भक्त थे। यही कारण था कि शिव के धनुष के टूटने पर वे अत्यंत क्रोधित हो गए। वे इसे अपने आराध्य का अपमान मानते थे।

10. बोर्ड परीक्षा प्रश्न

📝 दीर्घ उत्तरीय (5 अंक)

Q1. राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद का सारांश अपने शब्दों में लिखें।

Q2. परशुराम और लक्ष्मण के चरित्र की तुलना करें।

Q3. इस संवाद से क्या शिक्षा मिलती है? विस्तार से समझाएं।

Q4. राम के चरित्र की विशेषताएं इस संवाद के आधार पर बताएं।

📝 लघु उत्तरीय (3 अंक)

Q1. परशुराम के क्रोध का कारण बताएं।

Q2. लक्ष्मण ने परशुराम को क्या उत्तर दिया?

Q3. "कुम्हड़बतिया" से क्या तात्पर्य है?

Q4. तुलसीदास का संक्षिप्त परिचय दें।

📝 संदर्भ-प्रसंग (5 अंक)

Q1. "पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू॥"
संदर्भ, प्रसंग, व्याख्या लिखें।

Q2. "इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं॥"
संदर्भ, प्रसंग, व्याख्या लिखें।

💡 परीक्षा Tips:

  • शब्दार्थ याद रखें: कठिन शब्दों के अर्थ जरूर याद करें
  • भावार्थ अपने शब्दों में: रटने की बजाय समझें
  • चरित्र विश्लेषण: तीनों पात्रों की विशेषताएं याद रखें
  • संदर्भ-प्रसंग: Format अच्छे से समझें
  • शिक्षा/संदेश: 5-6 points ready रखें
  • तुलसीदास का जीवन परिचय: संक्षिप्त में याद रखें

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