🌍 अध्याय 15: हमारा पर्यावरण (Our Environment)
1. पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem)
पारिस्थितिक तंत्र किसी क्षेत्र के सभी जीवों (जैविक घटक) और उनके भौतिक वातावरण (अजैविक घटक) का एक परस्पर क्रियाशील तंत्र है। यह शब्द A.G. Tansley (1935) ने दिया।
- प्राकृतिक: वन, तालाब, झील, समुद्र, घास का मैदान, मरुस्थल
- कृत्रिम: बगीचा, खेत, एक्वेरियम, फसल क्षेत्र
1.1 जैविक घटकों का वर्गीकरण
| घटक | पोषण प्रकार | उदाहरण | कार्य |
|---|---|---|---|
| उत्पादक (Producers) | स्वपोषी (Autotrophs) | हरे पौधे, शैवाल, नीले-हरे जीवाणु | प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन निर्माण |
| प्राथमिक उपभोक्ता (T₂) | परपोषी - शाकाहारी | गाय, हिरण, खरगोश, टिड्डा | पौधों को खाते हैं |
| द्वितीयक उपभोक्ता (T₃) | परपोषी - मांसाहारी | मेंढक, छोटी मछली, छिपकली | शाकाहारियों को खाते हैं |
| तृतीयक उपभोक्ता (T₄) | परपोषी - उच्च मांसाहारी | साँप, बड़ी मछली, बाज | द्वितीयक को खाते हैं |
| अपघटक (Decomposers) | मृतजीवी (Saprotrophs) | जीवाणु, कवक (फफूंद) | मृत जीवों का अपघटन, पोषक पुनर्चक्रण |
2. खाद्य श्रृंखला (Food Chain)
खाद्य श्रृंखला जीवों की वह श्रृंखला है जिसमें एक जीव दूसरे को खाता है और स्वयं तीसरे का भोजन बनता है। इसमें ऊर्जा का प्रवाह एकदिशीय होता है।
एक पोषी स्तर से दूसरे पोषी स्तर में केवल 10% ऊर्जा स्थानांतरित होती है। शेष 90% ऊर्जा जीवन क्रियाओं (श्वसन, गति, उत्सर्जन) में खर्च हो जाती है।
उदाहरण: यदि उत्पादक में 10,000 J ऊर्जा है, तो:
- T₁ (उत्पादक) = 10,000 J
- T₂ (शाकाहारी) = 1,000 J (10%)
- T₃ (मांसाहारी) = 100 J (1%)
- T₄ (उच्च मांसाहारी) = 10 J (0.1%)
2.1 खाद्य श्रृंखला के प्रकार
| प्रकार | आरंभ | उदाहरण |
|---|---|---|
| चराई खाद्य श्रृंखला | हरे पौधों से | घास → हिरण → शेर |
| अपरद खाद्य श्रृंखला | मृत पदार्थों से | पत्ती (मृत) → केंचुआ → मुर्गी → बिल्ली |
3. खाद्य जाल (Food Web)
प्रकृति में एक जीव कई खाद्य श्रृंखलाओं का भाग होता है। इन परस्पर जुड़ी खाद्य श्रृंखलाओं के जाल को खाद्य जाल कहते हैं। यह पारिस्थितिक तंत्र को स्थायित्व प्रदान करता है।
4. जैव संकेंद्रण / जैव आवर्धन (Biomagnification)
जैव संकेंद्रण वह प्रक्रिया है जिसमें हानिकारक रसायन (जैसे DDT, पारा) खाद्य श्रृंखला के प्रत्येक उच्च स्तर पर बढ़ती सांद्रता में एकत्रित होते जाते हैं।
- शीर्ष उपभोक्ताओं (मनुष्य, पक्षी) में सर्वाधिक हानि
- DDT से पक्षियों के अंडों का खोल पतला → प्रजनन क्षमता कम
- कैंसर, तंत्रिका तंत्र विकार, जन्म दोष
- बाज, गिद्ध जैसी प्रजातियों की संख्या में कमी
5. अपशिष्ट पदार्थों का वर्गीकरण
| विशेषता | जैव निम्नीकरणीय (Biodegradable) | अजैव निम्नीकरणीय (Non-biodegradable) |
|---|---|---|
| परिभाषा | जीवाणुओं द्वारा अपघटित होने वाले | जीवाणुओं द्वारा अपघटित न होने वाले |
| उदाहरण | सब्जी, फल, कागज, लकड़ी, गोबर, पत्ते | प्लास्टिक, कांच, धातु, DDT, पॉलिथीन |
| अपघटन समय | कुछ दिनों से महीनों में | सैकड़ों-हजारों वर्ष या कभी नहीं |
| पर्यावरण प्रभाव | कम हानिकारक, पोषक चक्र में सहायक | अत्यधिक हानिकारक, प्रदूषण कारक |
| निपटान | कम्पोस्ट, बायोगैस | पुनर्चक्रण, भूमि भराव |
| जैव आवर्धन | नहीं होता | होता है (DDT, पारा) |
6. ओजोन परत (Ozone Layer)
ओजोन (O₃) ऑक्सीजन का एक अपररूप है जो समताप मंडल (15-35 km ऊँचाई) में पाया जाता है। यह सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों (UV) को अवशोषित करता है।
- UV-B और UV-C किरणों को रोकती है
- त्वचा कैंसर से सुरक्षा
- मोतियाबिंद से बचाव
- पौधों और प्लवकों की सुरक्षा
- पारिस्थितिक संतुलन
- CFC (क्लोरोफ्लोरोकार्बन) - AC, रेफ्रिजरेटर
- हैलोन - अग्निशामक
- कार्बन टेट्राक्लोराइड
- मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड
- ओजोन छिद्र: अंटार्कटिका में
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पारित किया जिसमें CFC के उत्पादन और उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया। भारत ने 1992 में इस पर हस्ताक्षर किए। 16 सितंबर को विश्व ओजोन दिवस मनाया जाता है।
7. पारिस्थितिक पिरामिड (Ecological Pyramid)
पोषी स्तरों के क्रमबद्ध चित्रण को पारिस्थितिक पिरामिड कहते हैं। ये तीन प्रकार के होते हैं।
| पिरामिड | आधार | सीधा/उल्टा | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| ऊर्जा का पिरामिड | ऊर्जा (J/kJ) | सदैव सीधा | 10% नियम के कारण |
| संख्या का पिरामिड | जीवों की संख्या | सीधा या उल्टा | वृक्ष पारितंत्र में उल्टा |
| जैवभार का पिरामिड | शुष्क भार (kg) | सीधा या उल्टा | जलीय पारितंत्र में उल्टा |
8. संख्यात्मक प्रश्न
हल: 10% नियम से:
T₁ (उत्पादक) = 20,000 J
T₂ (प्राथमिक उपभोक्ता) = 20,000 × 10% = 2,000 J
T₃ (द्वितीयक उपभोक्ता) = 2,000 × 10% = 200 J
हल: उल्टे क्रम में:
T₄ = 100 J
T₃ = 100 × 10 = 1,000 J
T₂ = 1,000 × 10 = 10,000 J
T₁ = 10,000 × 10 = 1,00,000 J = 100 kJ
हल: T₁ = 50,000 J → T₂ = 5,000 J → T₃ = 500 J → T₄ = 50 J
या सूत्र से: 50,000 × (10%)³ = 50,000 × 0.001 = 50 J
9. महत्वपूर्ण MCQs
📋 Quick Revision
पारिस्थितिक तंत्र: जैविक (उत्पादक, उपभोक्ता, अपघटक) + अजैविक (जलवायु, मृदा)
खाद्य श्रृंखला: उत्पादक → शाकाहारी → मांसाहारी → उच्च मांसाहारी | ऊर्जा प्रवाह = एकदिशीय
10% नियम (Lindeman): प्रत्येक स्तर पर केवल 10% ऊर्जा स्थानांतरित
जैव आवर्धन: DDT, पारा जैसे रसायन खाद्य श्रृंखला में ऊपर जाने पर बढ़ते हैं
ओजोन (O₃): समताप मंडल (15-35 km) | UV किरणों को रोकती है | CFC से क्षरण
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल: 1987 | CFC पर प्रतिबंध | 16 सितंबर = ओजोन दिवस
पारिस्थितिक पिरामिड: ऊर्जा = सदैव सीधा | संख्या/जैवभार = उल्टा भी हो सकता
🌍 Marwari Mission 100™ | पढ़ेगा राजस्थान, बढ़ेगा राजस्थान 🚀
मार्गदर्शक: श्री सुरेन्द्र सिंह चौहान | © ncertclasses.com
📘 Facebook | 📱 WhatsApp | ✈️ Telegram: @testseries4u


No comments:
Post a Comment