🧲 अध्याय 13: विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव
1. चुंबक एवं चुंबकत्व
चुंबक वह पदार्थ है जो लोहे के टुकड़ों को आकर्षित करता है। प्रत्येक चुंबक के दो ध्रुव होते हैं - उत्तरी ध्रुव (N) और दक्षिणी ध्रुव (S)। समान ध्रुवों में प्रतिकर्षण तथा विपरीत ध्रुवों में आकर्षण होता है।
चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुण:
- चुंबक के बाहर N से S तथा अंदर S से N की ओर जाती हैं
- बंद वक्र बनाती हैं और एक-दूसरे को कभी नहीं काटतीं
- जहाँ रेखाएं घनी होती हैं, वहाँ क्षेत्र प्रबल होता है
2. ऑर्स्टेड का प्रयोग (1820)
3. चुंबकीय क्षेत्र के पैटर्न
| चालक का प्रकार | क्षेत्र रेखाओं का पैटर्न | विशेषता |
|---|---|---|
| सीधा तार | संकेंद्रीय वृत्ताकार | दूरी बढ़ने पर क्षेत्र घटता है |
| वृत्ताकार कुंडली | केंद्र पर सीधी समांतर | फेरे बढ़ाने पर क्षेत्र बढ़ता है |
| परिनालिका | छड़ चुंबक जैसा | अंदर एकसमान क्षेत्र |
4. महत्वपूर्ण नियम
👍 दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम (सीधे तार के लिए):
यदि दाहिने हाथ में तार इस प्रकार पकड़ें कि अंगूठा धारा की दिशा में हो, तो मुड़ी हुई अंगुलियाँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बताती हैं।
✊ दक्षिण-हस्त नियम (परिनालिका के लिए):
यदि दाहिने हाथ की मुड़ी अंगुलियाँ धारा की दिशा में हों, तो अंगूठा उत्तरी ध्रुव (N) की दिशा बताता है।
5. विद्युत चुंबक
विद्युत चुंबक नर्म लोहे की छड़ पर तांबे के तार की कुंडली लपेटकर बनाया जाता है। धारा प्रवाहित करने पर यह चुंबक बन जाता है और धारा बंद करने पर चुंबकत्व समाप्त हो जाता है।
| विद्युत चुंबक | स्थायी चुंबक |
|---|---|
| अस्थायी चुंबकत्व | स्थायी चुंबकत्व |
| शक्ति नियंत्रित की जा सकती है | शक्ति स्थिर रहती है |
| ध्रुवता बदली जा सकती है | ध्रुवता स्थिर रहती है |
| नर्म लोहा प्रयुक्त | इस्पात/अलनिको प्रयुक्त |
| उपयोग: क्रेन, घंटी, रिले | उपयोग: कम्पास, स्पीकर |
6. चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल
जब कोई धारावाही चालक चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो उस पर बल लगता है। यह बल धारा और क्षेत्र दोनों के लंबवत होता है।
- θ = 90° (चालक ⊥ क्षेत्र): F = BIL (अधिकतम बल)
- θ = 0° या 180° (चालक ∥ क्षेत्र): F = 0 (शून्य बल)
🤚 फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम (Left Hand Rule):
बाएं हाथ की तीन अंगुलियों को परस्पर लंबवत फैलाएं:
- तर्जनी (F): चुंबकीय क्षेत्र (B) की दिशा
- मध्यमा (B): धारा (I) की दिशा
- अंगूठा (I): बल/गति (F) की दिशा
याद रखें: FBI (Force, B-field, Current)
7. विद्युत मोटर
सिद्धांत: जब धारावाही कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो उस पर बल युग्म लगता है जो कुंडली को घुमाता है।
मुख्य भाग:
- आर्मेचर (ABCD): तांबे के तार की आयताकार कुंडली
- क्षेत्र चुंबक: स्थायी चुंबक (N-S ध्रुव)
- विभक्त वलय (C₁, C₂): दो अर्ध-वलय - दिक्परिवर्तक का काम करते हैं
- ब्रश (B₁, B₂): कार्बन के - विभक्त वलयों से संपर्क
कार्यविधि:
फ्लेमिंग वाम-हस्त नियम से AB भुजा पर नीचे और CD भुजा पर ऊपर बल लगता है। यह बल युग्म कुंडली को घुमाता है। आधे चक्कर बाद विभक्त वलय धारा की दिशा बदल देते हैं जिससे कुंडली लगातार एक ही दिशा में घूमती रहती है।
8. विद्युत चुंबकीय प्रेरण (EMI)
खोज: माइकल फैराडे (1831)
फैराडे के प्रयोग:
- चुंबक को कुंडली में आगे-पीछे करने पर धारा उत्पन्न होती है
- कुंडली को चुंबक के पास लाने/दूर करने पर धारा उत्पन्न होती है
- एक कुंडली में धारा बदलने पर पास की दूसरी कुंडली में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है
✋ फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम (Right Hand Rule):
दाहिने हाथ की तीन अंगुलियों को परस्पर लंबवत फैलाएं:
- तर्जनी: चुंबकीय क्षेत्र (B) की दिशा
- अंगूठा: चालक की गति (v) की दिशा
- मध्यमा: प्रेरित धारा (I) की दिशा
उपयोग: जनरेटर में प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करना
9. विद्युत जनरेटर
सिद्धांत: विद्युत चुंबकीय प्रेरण (EMI) - जब कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है तो प्रेरित धारा उत्पन्न होती है।
| विशेषता | AC जनरेटर | DC जनरेटर |
|---|---|---|
| वलय | सर्पी वलय (Slip Rings) | विभक्त वलय (Split Rings) |
| आउटपुट | प्रत्यावर्ती धारा (AC) | दिष्ट धारा (DC) |
| धारा दिशा | हर आधे चक्कर में बदलती है | एक ही दिशा में रहती है |
| उपयोग | पावर प्लांट, घरेलू सप्लाई | बैटरी चार्जिंग, DC मोटर |
मोटर vs जनरेटर:
| विशेषता | विद्युत मोटर | विद्युत जनरेटर |
|---|---|---|
| सिद्धांत | चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही चालक पर बल | विद्युत चुंबकीय प्रेरण (EMI) |
| ऊर्जा रूपांतरण | विद्युत → यांत्रिक | यांत्रिक → विद्युत |
| नियम | फ्लेमिंग वाम-हस्त | फ्लेमिंग दक्षिण-हस्त |
| इनपुट | विद्युत धारा | यांत्रिक ऊर्जा (घूर्णन) |
| आउटपुट | घूर्णन गति | विद्युत धारा |
10. घरेलू विद्युत परिपथ
AC vs DC:
- AC (प्रत्यावर्ती धारा): दिशा बदलती रहती है | भारत: 220V, 50 Hz
- DC (दिष्ट धारा): एक ही दिशा में बहती है | बैटरी से प्राप्त
- 50 Hz का अर्थ: 1 सेकंड में 50 बार पूर्ण चक्र = 100 बार दिशा बदलना
सुरक्षा उपकरण:
| उपकरण | कार्य | विशेषता |
|---|---|---|
| फ्यूज | अधिक धारा पर पिघलकर परिपथ तोड़ता है | Live तार में लगाया जाता है |
| MCB | स्वचालित रूप से परिपथ तोड़ता है | पुनः उपयोग योग्य |
| अर्थिंग | लीकेज करंट को भूमि में भेजता है | धातु बॉडी से जुड़ा |
ओवरलोडिंग: एक ही परिपथ में बहुत सारे उपकरण → अधिक धारा → तार गर्म
11. संख्यात्मक प्रश्न (Numericals)
हल: F = BIL sinθ = 0.4 × 2 × 0.5 × sin90° = 0.4 × 2 × 0.5 × 1 = 0.4 N
हल: F = BIL sinθ = 0.2 × 5 × 1 × sin30° = 0.2 × 5 × 1 × 0.5 = 0.5 N
हल: n = N/L = 500/0.5 = 1000 फेरे/m
B = μ₀nI = 4π×10⁻⁷ × 1000 × 2 = 2.51 × 10⁻³ T
हल: 1 cycle में 2 बार दिशा बदलती है
50 Hz = 50 cycles/sec
दिशा बदलाव = 50 × 2 = 100 बार/सेकंड
12. महत्वपूर्ण MCQs
📋 Quick Revision
दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ: सीधे तार में B की दिशा | दक्षिण-हस्त: परिनालिका के ध्रुव
फ्लेमिंग वाम-हस्त (FBI): मोटर में बल की दिशा | फ्लेमिंग दक्षिण-हस्त: जनरेटर में धारा की दिशा
F = BIL sinθ | B = μ₀nI | e = -N(dΦ/dt)
मोटर: विद्युत→यांत्रिक | जनरेटर: यांत्रिक→विद्युत | भारत: 220V, 50Hz AC
महत्वपूर्ण राशियाँ और मात्रक:
| राशि | प्रतीक | SI मात्रक | सूत्र/मान |
|---|---|---|---|
| चुंबकीय क्षेत्र | B | टेस्ला (T) | B = F/(IL) |
| चुंबकीय फ्लक्स | Φ | वेबर (Wb) | Φ = BA |
| बल | F | न्यूटन (N) | F = BIL sinθ |
| प्रेरित EMF | e | वोल्ट (V) | e = -N(dΦ/dt) |
| पारगम्यता | μ₀ | T·m/A | 4π × 10⁻⁷ |
| आवृत्ति | f | हर्ट्ज (Hz) | भारत: 50 Hz |


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