राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की कक्षा 10 की हिन्दी परीक्षा में व्याकरण के ठोस अंक प्राप्त करने के लिए 'संधि' और 'समास' का गहरा ज्ञान होना आवश्यक है। पाठ्यक्रम के अनुसार इसका अंक भार 2 अंक है, लेकिन इसका महत्व इससे कहीं अधिक है। यदि आप संधि और समास को समझ लेते हैं, तो आपकी वर्तनी (Spelling) की अशुद्धियाँ समाप्त हो जाएंगी और आप पाठ्यपुस्तक के कठिन शब्दों का अर्थ भी आसानी से निकाल पाएंगे।
विषय सूची (Table of Contents)
1. संधि (Sandhi)
दो समीपवर्ती वर्णों (Letters) के मेल से जो विकार (परिवर्तन) होता है, उसे संधि कहते हैं। ध्यान रहे, यदि वर्णों के मिलने से कोई बदलाव नहीं होता, तो उसे 'संयोग' कहते हैं, संधि नहीं।
संधि के तीन मुख्य भेद हैं:
- स्वर संधि (Vowel Sandhi): स्वर + स्वर
- व्यंजन संधि (Consonant Sandhi): व्यंजन + स्वर/व्यंजन
- विसर्ग संधि (Visarga Sandhi): विसर्ग (:) + स्वर/व्यंजन
(क) स्वर संधि (सबसे महत्वपूर्ण)
कक्षा 10 के स्तर पर सबसे ज्यादा प्रश्न यहीं से पूछे जाते हैं। इसे पहचानने की 5 निंजा ट्रिक्स यहाँ दी गई हैं:
| संधि का नाम | पहचान (Trick) | उदाहरण (Examples) |
|---|---|---|
| 1. दीर्घ संधि | शब्द के बीच में बड़ी मात्रा (ा, ी, ू) दिखाई दे। | विद्या + आलय = विद्यालय कवि + ईश = कवीश भानु + उदय = भानूदय |
| 2. गुण संधि | शब्द के ऊपर एक मात्रा (े, ो) या अंतिम 'र्' (अर) हो। | नर + ईश = नरेश पर + उपकार = परोपकार महा + ऋषि = महर्षि |
| 3. वृद्धि संधि | शब्द के ऊपर दो मात्राएँ (ै, ौ) दिखाई दें। (बूढ़ी संधि - चश्मा लगा हुआ) | सदा + एव = सदैव महा + औषध = महौषध |
| 4. यण संधि | 'य, व, र' से पहले आधा अक्षर जुड़ा हो। | इति + आदि = इत्यादि सु + आगत = स्वागत |
| 5. अयादि संधि | उच्चारण में 'अय, आय, अव, आव' की ध्वनि आए। (अधिकतर 3 अक्षर वाले शब्द) | ने + अन = नयन पौ + अक = पावक |
(ख) व्यंजन और विसर्ग संधि की पहचान
🔹 व्यंजन संधि (Consonant)
जब व्यंजन का मेल स्वर या व्यंजन से हो।
महत्वपूर्ण नियम:
- 'क्' का 'ग्' होना: दिक् + गज = दिग्गज
- 'त्' का 'द्' होना: जगत + ईश = जगदीश
- 'म्' का अनुस्वार (.) होना: सम् + तोष = संतोष
🔹 विसर्ग संधि (Visarga)
विसर्ग (:) के बाद स्वर/व्यंजन आने पर बदलाव।
शॉर्ट ट्रिक: शब्द तोड़ते समय जहाँ ओ, श, ष, स, र् आए, वहाँ विसर्ग लगाओ।
- ओ → : तपोबल → तप: + बल
- श् → : निश्चय → नि: + चय
- र् → : निर्धन → नि: + धन
2. समास (Samas)
दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर संक्षिप्त करने की प्रक्रिया को समास कहते हैं। समास के 6 मुख्य भेद होते हैं। आइये, इन्हें विस्तार से समझते हैं:
1. अव्ययीभाव समास (Avyayibhav)
पहचान: पहला पद प्रधान और उपसर्ग होता है। (यथा, आ, भर, अनु, प्रति)
उदा: यथाशक्ति (शक्ति के अनुसार), प्रतिदिन (हर दिन)।
2. तत्पुरुष समास (Tatpurush)
पहचान: दूसरा पद प्रधान। विग्रह करने पर कारक चिह्न (का, के, की, में, पर) आते हैं।
उदा: विद्यालय (विद्या का आलय), वनवास (वन में वास)।
3. कर्मधारय समास (Karmadharaya)
पहचान: विशेषण-विशेष्य संबंध। 'कैसा है?' पूछने पर उत्तर मिले। (है जो, के समान)
उदा: नीलकमल (नीला है जो कमल), महापुरुष (महान है जो पुरुष)।
4. द्विगु समास (Dwigu)
पहचान: पहला पद संख्यावाची (Number) होता है। समूह का बोध होता है।
उदा: चौराहा (4 राहों का समूह), नवरत्न (9 रत्न), सप्ताह।
5. द्वंद्व समास (Dwandva)
पहचान: दोनों पद प्रधान। बीच में 'और' या 'योजक चिह्न (-)' आता है।
उदा: माता-पिता, सुख-दुख, पाप-पुण्य।
6. बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi)
पहचान: कोई भी पद प्रधान नहीं, बल्कि तीसरा अर्थ निकलता है। (अक्सर देवताओं के नाम)
उदा: लंबोदर (गणेश), दशानन (रावण), वीणापाणि (सरस्वती)।
3. संधि और समास में अंतर (Difference)
अक्सर छात्र इन दोनों में भ्रमित हो जाते हैं। यह तालिका आपके संदेह दूर करेगी:
| आधार | संधि (Sandhi) | समास (Samas) |
|---|---|---|
| मेल किसका? | दो वर्णों (Sounds) का मेल। | दो शब्दों (Words) का मेल। |
| प्रक्रिया | तोड़ने को विच्छेद कहते हैं। | तोड़ने को विग्रह कहते हैं। |
| विभक्ति चिह्न | नहीं होते। | कारक चिह्नों का लोप हो जाता है। |
🚀 अभ्यास का समय!
क्या आप अगले टॉपिक "उपसर्ग और प्रत्यय" (Prefix & Suffix) के लिए तैयार हैं? ये 2 अंक आपकी मुट्ठी में होंगे।
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