शीर्षक का अर्थ: "साना-साना हाथ जोड़ि..." एक नेपाली प्रार्थना है जिसका अर्थ है— "मैं छोटे-छोटे हाथ जोड़कर प्रार्थना करती हूँ कि मेरा सारा जीवन अच्छाइयों को समर्पित हो।"
लेखिका रात में गंगटोक पहुँचती हैं। ढलान पर बसे इस शहर की रोशनी ऐसी लग रही थी मानो आसमान उल्टा हो गया हो और सारे तारे नीचे बिखर गए हों।
रहस्यमयी रात: सितारों से जगमगाती रात लेखिका के मन में सम्मोहन (Hypnotism) जगा रही थी।
गंगटोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ के लोगों ने अपनी कड़ी मेहनत से पहाड़ों पर भी एक सुंदर और व्यवस्थित शहर बसाया है।
🗺️ यात्रा मानचित्र (Travel Map)
गाइड जितेंन नार्गे ने लेखिका को स्थानीय मान्यताओं के बारे में बताया:
जब किसी बुद्धिस्ट (बौद्ध भिक्षु) की मृत्यु होती है, तो उसकी आत्मा की शांति के लिए शहर से दूर 108 श्वेत पताकाएँ फहराई जाती हैं। इन्हें उतारा नहीं जाता, ये खुद नष्ट हो जाती हैं।
किसी नए शुभ कार्य की शुरुआत में रंगीन पताकाएँ लगाई जाती हैं।
एक कुटिया में घूमता हुआ चक्र देखकर नारगे ने बताया— "मैडम, यह धर्मचक्र है। इसे घुमाने से सारे पाप धुल जाते हैं।" लेखिका को लगा कि पूरे भारत की आत्मा एक जैसी है—पाप-पुण्य की अवधारणा हर जगह समान है।
लेखिका हिमालय के अद्भुत सौंदर्य (सेवन सिस्टर्स वॉटरफॉल, तीस्ता नदी) में खोई थीं, तभी उन्हें एक झकझोर देने वाला दृश्य दिखा।
पत्थर तोड़ती महिलाएँ: कुछ पहाड़ी औरतें कुदाल और हथौड़े से पत्थर तोड़ रही थीं। उनकी पीठ पर बँधी टोकरी (डोको) में उनके बच्चे सो रहे थे।
चिंतन: लेखिका सोचती हैं— "स्वर्ग जैसे सौंदर्य के बीच यह भूख, मौत और जिंदा रहने की जंग!" ये महिलाएँ पर्यटकों के लिए रास्ता बनाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालती हैं। यह मातृत्व (Motherhood) और श्रम (Labor) का अद्भुत दृश्य था।
युमथांग में बर्फ नहीं मिली, तो वे 'कटाओ' गए। कटाओ अभी तक टूरिस्ट स्पॉट नहीं बना था, इसलिए वहां की प्राकृतिक सुंदरता (Virgin Beauty) बची हुई थी।
वहां चारों तरफ ताजी बर्फ (Snow) थी। लेखिका को लगा जैसे वे किसी आध्यात्मिक शांति में डूब गई हों। उन्हें लगा कि शायद ऐसी ही विभोर कर देने वाली दिव्यता के बीच हमारे ऋषियों ने वेदों की रचना की होगी।
फौजी छावनी: लौटते समय उन्हें चीन सीमा के पास फौजी छावनी दिखी। एक फौजी ने कहा— "हम कड़कड़ाती ठंड में इसलिए पहरा देते हैं ताकि आप लोग चैन की नींद सो सकें।" यह सुनकर लेखिका का मन श्रद्धा से भर गया।
📝 विस्तृत प्रश्नोत्तरी (Mega Question Bank)
प्रश्न 1: 'गंतोक' को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' क्यों कहा गया है?
उत्तर: गंतोक एक ऐसा पर्वतीय शहर है जिसे वहां के निवासियों ने अपनी कड़ी मेहनत से बेहद खूबसूरत बना दिया है। वहां की विषम परिस्थितियों (पहाड़, ढलान) के बावजूद लोगों ने हार नहीं मानी और एक व्यवस्थित शहर बसाया। वहां के लोग बादशाहों जैसी शान और मस्ती में जीते हैं, इसलिए इसे 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' कहा गया है।
प्रश्न 2: लेखिका ने 'कटाओ' को 'भारत का स्विट्जरलैंड' क्यों कहा?
उत्तर: कटाओ सिक्किम का एक ऐसा स्थान है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और बर्फ से ढकी चोटियों के कारण स्विट्जरलैंड जैसा लगता है। लेखिका की सहेली (मणि) ने तो यहाँ तक कहा कि "स्विट्जरलैंड भी इतना सुंदर नहीं है।" खास बात यह है कि यह स्थान अभी तक व्यावसायिक (Commercial) नहीं हुआ है, इसलिए इसकी पवित्रता बची हुई है।
प्रश्न 3 (HOTS): प्रकृति के सौंदर्य के साथ-साथ लेखिका ने वहाँ की गरीबी और संघर्ष को कैसे चित्रित किया है?
उत्तर: लेखिका ने केवल हिमालय की सुंदरता नहीं देखी, बल्कि वहां के कठोर जीवन को भी महसूस किया। उन्होंने देखा कि कोमल काया वाली औरतें भारी हथौड़ों से पत्थर तोड़ रही हैं। बच्चे स्कूल जाने के लिए रोज 3-4 किलोमीटर पहाड़ी चढ़ाई चढ़ते हैं और लौटते समय मवेशी चराते हैं और लकड़ियां ढोते हैं। यह दिखाता है कि पहाड़ों पर जीवन जितना सुंदर है, उतना ही कठिन भी है।
प्रश्न 4: जितेन नार्गे ने गुरु नानक देव जी से जुड़ी क्या कहानी बताई?
उत्तर: जितेन ने बताया कि एक पत्थर पर गुरु नानक देव जी के पैरों के निशान हैं। मान्यता है कि यहां गुरु नानक देव जी की थाली से थोड़े से चावल छिटक कर बाहर गिर गए थे। जिस जगह चावल गिरे थे, वहां आज भी चावल की खेती होती है।
कृतिका पाठ 2 समाप्त! 🏔️
यात्राएँ हमें केवल दुनिया नहीं दिखातीं, हमें खुद से भी मिलवाती हैं।
अंतिम पाठ: "मैं क्यों लिखता हूँ" (अज्ञेय)
हिरोशिमा की त्रासदी और विज्ञान का दुरुपयोग। 💣✍️


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