RBSE Class 10 Hindi Kritika Chapter 3: Main Kyon Likhta Hoon (Agyeya) Summary 2026

📅 Tuesday, 6 January 2026 📖 3-5 min read
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✨ Marwari Mission 100 ✨

मैं क्यों लिखता हूँ?

लेखक: अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन)

"विज्ञान का ज्ञान vs हिरोशिमा की पीड़ा"

लेखक: अज्ञेय (प्रयोगवाद के जनक)
विषय: लेखन का मनोविज्ञान और विज्ञान का दुरूपयोग

पाठ का सार: यह पाठ एक निबंध है जिसमें लेखक ने लेखन प्रक्रिया की गुत्थियों को सुलझाया है। वे बताते हैं कि एक लेखक केवल पैसों या प्रसिद्धि के लिए नहीं लिखता, बल्कि एक 'आंतरिक विवशता' (Inner Compulsion) उसे लिखने पर मजबूर करती है।

1. लेखन के दो कारण (Why do we write?) ✍️

लेखक के अनुसार लिखने के दो प्रमुख कारण होते हैं:

  1. आंतरिक विवशता (Internal): जब लेखक के मन में कोई बात इतनी बेचैनी पैदा कर दे कि उसे लिखे बिना चैन न मिले। यह सच्चा लेखन है।
  2. बाहरी दबाव (External): संपादकों का आग्रह, प्रकाशकों का तकाजा, या आर्थिक आवश्यकता (पैसा)।

सच्चा लेखक बाहरी दबावों को भी अपनी 'आंतरिक विवशता' का बहाना बना लेता है। वह इसलिए लिखता है ताकि जान सके कि वह "क्या" लिख रहा है।

🧠 अनुभव बनाम अनुभूति (The Difference)

यह इस पाठ का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है। इसे याद रखें:

प्रत्यक्ष अनुभव (Experience) अनुभूति (Feeling/Empathy)
जो घटना हमारे सामने घटी हो और जिसे हमने अपनी आँखों से देखा हो। संवेदना और कल्पना के सहारे उस घटना के दर्द को अपने अंदर महसूस कर लेना।
यह केवल तथ्यों (Facts) तक सीमित हो सकता है। यह आत्मा को झकझोर देती है और सृजन (Creation) का कारण बनती है।
हर अनुभव से कविता नहीं बनती। सच्ची कविता/कहानी 'अनुभूति' से ही पैदा होती है।
3. हिरोशिमा का पत्थर और परमाणु बम 💣

लेखक विज्ञान के छात्र थे। वे रेडियोधर्मिता (Radioactivity) के बारे में सब जानते थे। जब वे जापान गए और हिरोशिमा के अस्पताल में घायलों को देखा, तो उन्हें 'अनुभव' हुआ, लेकिन 'अनुभूति' नहीं हुई।

निर्णायक क्षण (The Turning Point): एक दिन सड़क पर घूमते हुए उन्होंने एक बड़ा सा जला हुआ पत्थर देखा। उस पत्थर पर एक आदमी की लंबी, काली छाया (Shadow) छपी हुई थी।

कल्पना का विस्फोट:
लेखक ने सोचा— "जरूर उस समय कोई आदमी यहाँ खड़ा होगा। अचानक परमाणु बम फटा होगा। उससे निकली हजारों डिग्री की गर्मी ने उस आदमी को पल भर में 'भाप' (Vapor) बनाकर उड़ा दिया होगा। लेकिन उसकी छाया उस पत्थर पर झुलसकर छप गई।"

इस दृश्य ने लेखक को ऐसा थप्पड़ मारा कि उन्हें लगा मानो वे खुद उस विस्फोट के बीच खड़े हों। यह 'अनुभूति' थी। इसी दर्द ने उनसे 'हिरोशिमा' कविता लिखवाई।

📝 विस्तृत प्रश्नोत्तरी (Mega Question Bank)

प्रश्न 1: लेखक के अनुसार 'प्रत्यक्ष अनुभव' की अपेक्षा 'अनुभूति' उनके लेखन में कहीं अधिक मदद करती है, क्यों?
उत्तर: 'प्रत्यक्ष अनुभव' केवल बाहरी घटित घटना है, जो जरूरी नहीं कि मन को गहराई तक छुए। लेकिन 'अनुभूति' संवेदना और कल्पना के सहारे उस सत्य को आत्मसात (Internalize) कर लेती है। जब तक हृदय में वह दर्द न जागे, तब तक लेखन नहीं हो सकता। हिरोशिमा का पत्थर देखने पर लेखक को वही 'अनुभूति' हुई, जिसने उन्हें लिखने पर विवश किया।

प्रश्न 2: लेखक ने अपने आपको 'हिरोशिमा के विस्फोट' का भोक्ता कब और किस तरह महसूस किया?
उत्तर: जब लेखक ने हिरोशिमा की सड़क पर एक पत्थर देखा जिस पर मानव की काली छाया छपी थी, तो उन्हें अचानक एक थप्पड़ सा लगा। उन्हें अनुभूति हुई कि कैसे रेडियोधर्मी किरणों ने उस इंसान को भाप बना दिया होगा। उस क्षण वे इतिहास से निकलकर उस भयानक वर्तमान में पहुँच गए और खुद को उस विस्फोट की पीड़ा का भोक्ता महसूस किया।

प्रश्न 3 (HOTS): "विज्ञान का दुरुपयोग" विषय पर लेखक के क्या विचार हैं?
उत्तर: लेखक विज्ञान के विद्यार्थी रहे हैं, इसलिए वे जानते हैं कि विज्ञान का उद्देश्य मानव कल्याण है। लेकिन जब उसी विज्ञान (रेडियम/अणु शक्ति) का उपयोग मानव संहार (Human Destruction) के लिए किया जाता है, तो यह मानवता के लिए कलंक है। हिरोशिमा की घटना विज्ञान के भयानक दुरुपयोग का जीता-जागता उदाहरण है, जिसने लेखक को अंदर तक व्यथित कर दिया।

प्रश्न 4: लेखक के अनुसार, एक लेखक को कौन-सी बातें लिखने के लिए प्रेरित करती हैं?
उत्तर: 1. आंतरिक विवशता: जब मन के अंदर कोई बात बाहर आने के लिए बेचैन हो। 2. प्रसिद्धि की चाह: नाम कमाने की इच्छा। 3. आर्थिक लाभ: पैसा कमाने की जरूरत। 4. संपादकों/प्रकाशकों का दबाव: समय पर काम देने की मजबूरी।
लेकिन सबसे श्रेष्ठ कारण 'आंतरिक विवशता' ही है।

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