असली नाम: अमीरुद्दीन (बचपन का नाम)।
जन्म: डुमराँव, बिहार (संगीत प्रेमी परिवार में)।
संबंध: शहनाई और डुमराँव का गहरा रिश्ता है। शहनाई बजाने के लिए जिस 'रीड' (Narkat) का प्रयोग होता है, वह डुमराँव में सोन नदी के किनारे पाई जाने वाली नरकट घास से बनती है।
गुरु: उनके मामा सादिक हुसैन और अलीबख्श (जो काशी विश्वनाथ मंदिर में शहनाई बजाते थे)।
शहनाई शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: 'शाह' + 'नाई'।
- नाई: अरब देश में फूँककर बजाए जाने वाले वाद्य यंत्रों को 'नाई' कहा जाता है।
- शाह: यह वाद्य यंत्र 'शाह' (राजाओं) के दरबार में बजाया जाता था और सभी सुषिर वाद्यों (Wind Instruments) में श्रेष्ठ (शाह) माना जाता है।
इसीलिए इसे 'सुषिर वाद्यों में शाह' यानी शहनाई कहा गया। यह मंगल ध्वनि का प्रतीक है।
बिस्मिल्ला खां सच्चे मुसलमान थे, पांचों वक्त की नमाज पढ़ते थे, लेकिन:
- उनकी सुबह काशी विश्वनाथ और बालाजी मंदिर की ड्योढ़ी पर शहनाई बजाकर शुरू होती थी।
- वे गंगा मैया को बहुत मानते थे।
- वे कहते थे: "मैं काशी छोड़कर कहाँ जाऊँ? यहाँ गंगा मैया है, यहाँ बाबा विश्वनाथ हैं।"
उनका व्यक्तित्व भारत की मिली-जुली संस्कृति (Composite Culture) का प्रतीक है।
📝 विस्तृत प्रश्नोत्तरी (Mega Question Bank)
पाठ 15 समाप्त! 🎺
भारत रत्न बिस्मिल्ला खां को हमारा नमन।
अगला पाठ: "संस्कृति" (भदंत आनंद कौसल्यायन)
सभ्यता और संस्कृति में क्या अंतर है? आइये जानें अंतिम पाठ में। 🏛️


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