RBSE Class 10 Hindi Chapter 15: Naubatkhane Mein Ibadat (Bismillah Khan) Mega Notes 2026

📅 Tuesday, 6 January 2026 📖 3-5 min read
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✨ Marwari Mission 100 ✨

नौबतखाने में इबादत

व्यक्तिचित्र: यतीन्द्र मिश्र

"सुर और इबादत का संगम: बिस्मिल्ला खां"

लेखक: यतीन्द्र मिश्र
मुख्य विषय: संगीत और संस्कृति
1. बिस्मिल्ला खां: एक परिचय 🎺

असली नाम: अमीरुद्दीन (बचपन का नाम)।

जन्म: डुमराँव, बिहार (संगीत प्रेमी परिवार में)।

संबंध: शहनाई और डुमराँव का गहरा रिश्ता है। शहनाई बजाने के लिए जिस 'रीड' (Narkat) का प्रयोग होता है, वह डुमराँव में सोन नदी के किनारे पाई जाने वाली नरकट घास से बनती है।

गुरु: उनके मामा सादिक हुसैन और अलीबख्श (जो काशी विश्वनाथ मंदिर में शहनाई बजाते थे)।

2. शहनाई का इतिहास (History) 📜

शहनाई शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: 'शाह' + 'नाई'

  • नाई: अरब देश में फूँककर बजाए जाने वाले वाद्य यंत्रों को 'नाई' कहा जाता है।
  • शाह: यह वाद्य यंत्र 'शाह' (राजाओं) के दरबार में बजाया जाता था और सभी सुषिर वाद्यों (Wind Instruments) में श्रेष्ठ (शाह) माना जाता है।

इसीलिए इसे 'सुषिर वाद्यों में शाह' यानी शहनाई कहा गया। यह मंगल ध्वनि का प्रतीक है।

3. काशी और कौमी एकता 🤝

बिस्मिल्ला खां सच्चे मुसलमान थे, पांचों वक्त की नमाज पढ़ते थे, लेकिन:

  • उनकी सुबह काशी विश्वनाथ और बालाजी मंदिर की ड्योढ़ी पर शहनाई बजाकर शुरू होती थी।
  • वे गंगा मैया को बहुत मानते थे।
  • वे कहते थे: "मैं काशी छोड़कर कहाँ जाऊँ? यहाँ गंगा मैया है, यहाँ बाबा विश्वनाथ हैं।"

उनका व्यक्तित्व भारत की मिली-जुली संस्कृति (Composite Culture) का प्रतीक है।

📝 विस्तृत प्रश्नोत्तरी (Mega Question Bank)

प्रश्न 1: शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है?
उत्तर: दो कारणों से: 1. शहनाई बजाने के लिए जिस 'रीड' (Reed) का प्रयोग होता है, वह डुमराँव में सोन नदी के किनारे पाई जाने वाली 'नरकट' घास से बनती है। 2. महान शहनाई वादक बिस्मिल्ला खां का जन्म डुमराँव में ही हुआ था।
प्रश्न 2: बिस्मिल्ला खां को 'शहनाई की मंगलध्वनि का नायक' क्यों कहा जाता है?
उत्तर: शहनाई का उपयोग हमेशा मांगलिक कार्यों (शादी, मुंडन, त्योहार) में होता है। बिस्मिल्ला खां ने इस वाद्य यंत्र को लोक-संगीत से निकालकर शास्त्रीय संगीत के मंच पर प्रतिष्ठित किया और इसे विश्व स्तर पर पहचान दिलाई। इसलिए वे इसके नायक हैं।
प्रश्न 3: "फटा सुर न बख्शें, लुंगिया का क्या है, आज फटी है तो कल सिल जाएगी" - इसका आशय स्पष्ट करें।
उत्तर: यह बिस्मिल्ला खां की सादगी और कला-प्रेम को दर्शाता है। एक बार उनकी शिष्या ने उन्हें फटी हुई लुंगी में देखकर टोका था। तब उन्होंने कहा कि ईश्वर मुझे 'फटा हुआ सुर' न दे (यानी संगीत में कोई कमी न रहे), कपड़े तो गरीबी में फटे हों तो सिल भी सकते हैं, लेकिन सुर फट गया तो कलाकार की इज्जत चली जाएगी।
प्रश्न 4: मुहर्रम से बिस्मिल्ला खां के जुड़ाव को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: मुहर्रम के महीने में शिया मुसलमान शोक मनाते हैं। बिस्मिल्ला खां और उनका परिवार इन दिनों न तो शहनाई बजाता था और न ही किसी संगीत कार्यक्रम में भाग लेता था। आठवीं तारीख को वे 8 किलोमीटर पैदल चलते हुए, रोते हुए नोहा बजाते थे और दालमंडी में फातमान के करीब अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते थे।
प्रश्न 5 (HOTS): बिस्मिल्ला खां का जीवन भारत की 'साझा संस्कृति' का प्रतीक कैसे है?
उत्तर: बिस्मिल्ला खां पक्के नमाजी मुसलमान थे, लेकिन उनकी संगीत साधना काशी विश्वनाथ मंदिर से शुरू होती थी। वे गंगा को 'मैया' कहते थे। वे धर्म से ऊपर उठकर संगीत को ईश्वर तक पहुँचने का माध्यम मानते थे। उनका जीवन यह संदेश देता है कि कला का कोई धर्म नहीं होता, वह सबको जोड़ती है।
प्रश्न 6: 15 अगस्त 1947 को बिस्मिल्ला खां की क्या भूमिका थी?
उत्तर: जब भारत आजाद हुआ, तो लाल किले की प्राचीर से सबसे पहले शहनाई बजाने का गौरव बिस्मिल्ला खां को मिला। उन्होंने 'राग काफी' बजाकर अपनी खुशी का इजहार किया था और पूरा देश (पंडित नेहरू सहित) उन्हें सुन रहा था।

पाठ 15 समाप्त! 🎺

भारत रत्न बिस्मिल्ला खां को हमारा नमन।

अगला पाठ: "संस्कृति" (भदंत आनंद कौसल्यायन)

सभ्यता और संस्कृति में क्या अंतर है? आइये जानें अंतिम पाठ में। 🏛️

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