RBSE Class 10 Hindi Chapter 2: Ram-Lakshman-Parashuram Samvad (Tulsidas) Mega Notes 2026

📅 Monday, 5 January 2026 📖 3-5 min read
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राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

गोस्वामी तुलसीदास | रामचरितमानस (बालकाण्ड) से उद्धृत

🔥 सबसे महत्वपूर्ण अध्याय (Most Important Chapter)
लेखक: गोस्वामी तुलसीदास
स्रोत: रामचरितमानस (बालकाण्ड)

पृष्ठभूमि (Context): राजा जनक के दरबार में सीता स्वयंवर हो रहा था। श्रीराम ने जैसे ही शिवजी का धनुष उठाया, वह टूट गया। धनुष टूटने की प्रचंड ध्वनि सुनकर परशुराम जी क्रोधित होकर वहां आ पहुंचे। उन्हें लगा कि उनके गुरु (शिव) का अपमान हुआ है। यह पाठ राम की मर्यादा, लक्ष्मण के व्यंग्य और परशुराम के क्रोध का संवाद है।

1. प्रथम काव्यांश: "नाथ संभुधनु भंजनिहारा..."

श्रीराम (Polite)
"नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥
आयेसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही॥"
अर्थ: परशुराम के क्रोध को देखकर श्रीराम विनम्रता से बोले— "हे नाथ! शिवजी के धनुष को तोड़ने वाला (भंजनिहारा) आपका ही कोई एक दास होगा। मेरे लिए क्या आज्ञा (आयेसु) है? आप मुझसे क्यों नहीं कहते?"
परशुराम (Angry)
"सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरिकरनी करि करिअ लराई॥
सुनहु राम जेहि सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा॥"
अर्थ: यह सुनकर क्रोधी मुनि बोले— "सेवक वह होता है जो सेवा (सेवकाई) करे। शत्रु का काम (अरिकरनी) करके तो लड़ाई ही की जाती है। हे राम! सुनो, जिसने भी यह शिवधनुष तोड़ा है, वह सहस्रबाहु के समान मेरा शत्रु (रिपु) है।"
लक्ष्मण (Sarcastic)
"बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं॥
येहि धनु पर ममता केहि हेतू? सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू॥"
अर्थ: लक्ष्मण जी ने मुस्कुराकर व्यंग्य किया— "हे गोसाईं! बचपन (लरिकाईं) में तो हमने ऐसी बहुत सी धनुहियाँ (छोटे धनुष) तोड़ी थीं, तब तो आपने कभी ऐसा क्रोध (रिस) नहीं किया। इसी धनुष पर आपकी इतनी ममता क्यों है?"

2. लक्ष्मण के तीखे बाण और परशुराम का अहंकार

लक्ष्मण जी रुकते नहीं हैं, वे परशुराम जी के अहंकार पर चोट करते हैं।

लक्ष्मण (Mocking)
"पुनि-पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू॥
इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तर्जनी देखि मरि जाहीं॥"
अर्थ: लक्ष्मण कहते हैं— "आप मुझे बार-बार अपना कुल्हाड़ा (कुठारू) दिखा रहे हैं। ऐसा लगता है आप फूँक मारकर पहाड़ उड़ाना चाहते हैं। यहाँ कोई 'कुम्हड़े की बतिया' (बहुत नाजुक फल/छुईमुई) नहीं है, जो आपकी तर्जनी (अंगुली) देखते ही मर जाएगा (डर जाएगा)।"
💡 मुहावरा अलर्ट: 'कुम्हड़बतिया' का अर्थ यहाँ 'कमजोर व्यक्ति' से है। लक्ष्मण कहना चाहते हैं कि वे कोई कमजोर बालक नहीं हैं।
परशुराम (Threatening)
"कौसिक सुनहु मंद येहु बालकु। कुटिल काल बस निज कुल घालकु॥"
अर्थ: परशुराम जी विश्वामित्र (कौसिक) से कहते हैं— "हे विश्वामित्र सुनो! यह बालक बहुत मंदबुद्धि और कुटिल है। यह काल के वश में होकर अपने ही कुल का नाश करने वाला (घालकु) बन रहा है।"

💎 काव्य-सौंदर्य और व्याकरण (Topper's Choice)

परीक्षा में 'व्याख्या' के साथ-साथ 'विशेष' लिखना बहुत जरूरी होता है। यहाँ इस पाठ के प्रमुख अलंकार दिए गए हैं:

पंक्ति (Line) अलंकार (Figure of Speech) कारण (Reason)
सहसबाहु सम सो रिपु मोरा उपमा अलंकार 'सम' (समान) शब्द का प्रयोग हुआ है।
बालकु बोलि बधौं नहिं तोही अनुप्रास अलंकार 'ब' वर्ण की आवृत्ति (Repetition) बार-बार हुई है।
तुम तो कालु हाँक जनु लावा उत्प्रेक्षा अलंकार 'जनु' (मानो) शब्द का प्रयोग हुआ है।
लखन उतर आहुति सरिस... उपमा अलंकार लक्ष्मण के उत्तरों को 'आहुति' के समान बताया है।

3. पात्र परिचय (Character Sketch)

श्रीराम (Ram)

  • विनम्र और शांत स्वभाव।
  • बड़ों का आदर करने वाले।
  • क्रोध को शांत करने वाले (जल के समान शीतल)।

लक्ष्मण (Lakshman)

  • उग्र और क्रोधी स्वभाव।
  • व्यंग्य करने में निपुण (Sarcastic)।
  • अन्याय के विरोधी और निडर।
  • तर्कशील (Logical)।

परशुराम (Parashuram)

  • अत्यधिक क्रोधी और आक्रामक।
  • आत्म-प्रशंसा करने वाले (Self-praise)।
  • ब्राह्मण कुल के अभिमानी।

📝 महत्वपूर्ण प्रश्न (Board Exam 2026)

प्रश्न 1: परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए?
उत्तर: लक्ष्मण ने कहा: 1. यह धनुष बहुत पुराना और कमजोर था। 2. राम ने इसे नया समझकर छुआ था, पर यह छूते ही टूट गया। 3. बचपन में हमने ऐसे कई धनुष तोड़े थे, तब आपने क्रोध नहीं किया।

प्रश्न 2: "इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं" – इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: लक्ष्मण परशुराम को चेतावनी देते हैं कि हम कोई कुम्हड़े के छोटे फल (छुईमुई) की तरह कमजोर नहीं हैं जो आपकी तर्जनी अंगुली (धमकी) देखकर मुरझा (डर) जाएंगे। हम क्षत्रिय हैं और डटकर मुकाबला करना जानते हैं।

प्रश्न 3: लक्ष्मण और परशुराम के संवाद में कौन सा 'रस' प्रधान है?
उत्तर: इस संवाद में मुख्य रूप से 'वीर रस' (Heroism) और 'रौद्र रस' (Anger) की प्रधानता है।

अध्याय 2 पूरा हुआ! 🚀

अब हमारे पास 'देव' (सवैया) और 'जयशंकर प्रसाद' (आत्मकथ्य) बचे हैं।

अगला लेख: 'आत्मकथ्य' - जयशंकर प्रसाद (छायावादी कविता का मास्टरपीस)

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