RBSE Class 10 Hindi Chapter 4: Utsah & Att Nahi Rahi Hai (Nirala) Full Explanation 2026

📅 Monday, 5 January 2026 📖 3-5 min read
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✨ Marwari Mission 100 ✨

उत्साह और अट नहीं रही है

महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

विद्रोह (Revolution) और सौंदर्य (Beauty) का अद्भुत संगम

कवि: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
युग: छायावाद और प्रगतिवाद

परिचय: यह पाठ दो अलग-अलग भावों को समेटे हुए है। पहली कविता 'उत्साह' एक आह्वान गीत (Calling Song) है, जो बादलों के माध्यम से समाज में क्रांति लाना चाहती है। दूसरी कविता 'अट नहीं रही है' फागुन महीने (वसंत) की मादक सुंदरता का वर्णन है।

⛈️ कविता 1: उत्साह (Utsah)

काव्यांश 1: बादल, गरजो!
"बादल, गरजो!
घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ!
ललित ललित, काले घुंघराले,
बाल कल्पना के-से पाले,
विद्युत-छवि उर में, कवि नवजीवन वाले!
वज्र छिपा, नूतन कविता
फिर भर दो, बादल गरजो!"
📚 शब्द-ज्ञान (Vocabulary):
धाराधर = बादल (धारा को धारण करने वाला) ललित = सुंदर/मनमोहक विद्युत-छवि = बिजली की चमक उर = हृदय (Heart) वज्र = कठोर शक्ति/हथियार

🔍 विस्तृत व्याख्या (Deep Analysis):

कवि बादलों को 'बरसने' के लिए नहीं, बल्कि 'गरजने' (Roar) के लिए कह रहा है। क्योंकि गर्जना विद्रोह और क्रांति का प्रतीक है।

1. बादलों का रूप: कवि कहता है- "हे बादल! तुम पूरे आकाश को घेर लो। तुम बहुत सुंदर (ललित) हो और तुम्हारे काले-घुंघराले बाल ऐसे लगते हैं जैसे किसी छोटे बच्चे की कल्पना (Baal-Kalpana) हो।"

2. बादलों की शक्ति: कवि बादलों को एक 'नया जीवन देने वाला कवि' मानता है। वह कहता है- "तुम्हारे हृदय में बिजली (Electricity) जैसी ऊर्जा छिपी है। तुम अपने अंदर वज्र (Thunderbolt) जैसी कठोर शक्ति छिपाकर समाज में नई चेतना भर दो। एक नई कविता का निर्माण करो।"

काव्यांश 2: विकल विकल, उन्मन थे... 🌧️
"विकल विकल, उन्मन थे उन्मन,
विश्व के निदाघ के सकल जन,
आए अज्ञात दिशा से अनंत के घन!
तप्त धरा, जल से फिर
शीतल कर दो, बादल गरजो!"
विकल = बेचैन/व्याकुल उन्मन = अनमनापन (Sadness) निदाघ = भीषण गर्मी सकल जन = सारे लोग अनंत के घन = जिसका अंत न हो (ईश्वर/आकाश)

🔍 विस्तृत व्याख्या:

समस्या: दुनिया के सारे लोग गर्मी (निदाघ) से बहुत बेचैन (विकल) और उदास थे। यह गर्मी केवल मौसम की नहीं, बल्कि 'दुखों और शोषण की गर्मी' है।

समाधान: तभी न जाने किस अनजान दिशा से आकाश में बादल (घन) आ गए। कवि प्रार्थना करता है- "हे बादल! तुम बरसकर इस तपती हुई धरती को फिर से शीतल (ठंडा) कर दो। लोगों के दुखों को दूर कर दो।"

🧩 प्रतीकों का रहस्य (Symbolism Decoder)

परीक्षा में यह टेबल आपको पूरे नंबर दिलाएगी। कवि ने 'बादल' को तीन रूपों में देखा है:

1. प्यास बुझाने वाला: तप्ती धरती और प्यासे लोगों को शीतलता देने वाला।
2. क्रांतिकारी नायक: जो अपनी गर्जना से सोए हुए समाज को जगाता है।
3. नया कवि: जो अपनी 'नई कविता' से समाज में बदलाव लाता है।

🌸 कविता 2: अट नहीं रही है (Att Nahi Rahi Hai)

फागुन की मादकता 🌺
"अट नहीं रही है
आभा फागुन की तन सट नहीं रही है।
कहीं साँस लेते हो,
घर-घर भर देते हो,
उड़ने को नभ में तुम,
पर-पर कर देते हो।"
अट = समाना (Fitting in) आभा = चमक/सुंदरता पर-पर करना = पंख लगाना/उड़ने को तैयार करना

🔍 विस्तृत व्याख्या:

कवि फागुन (फरवरी-मार्च) महीने की सुंदरता को देखकर मंत्रमुग्ध है।

1. सुंदरता का विस्फोट: फागुन की सुंदरता इतनी ज्यादा है कि वह प्रकृति के शरीर (तन) में समा नहीं पा रही है (अट नहीं रही है)। वह बाहर छलक रही है।

2. मानवीकरण (Personification): कवि फागुन से बात करते हुए कहता है- "जब तुम सांस लेते हो, तो अपनी सुगंध से हर घर को भर देते हो।" (अर्थात फूलों की खुशबू हवा में घुली है)।

3. मन की उड़ान: यह वातावरण इतना मादक है कि मन प्रसन्न होकर आकाश में उड़ने को बेचैन हो जाता है। प्रकृति ने मन को पंख (पर-पर) लगा दिए हैं।

प्रकृति का सौंदर्य 🍃
"आँख हटाता हूँ तो हट नहीं रही है।
पत्तों से लदी डाल,
कहीं हरी, कहीं लाल,
कहीं पड़ी है उर में मंद-गंध-पुष्प-माल,
पाट-पाट शोभा-श्री पट नहीं रही है।"
उर = हृदय/गला पुष्प-माल = फूलों की माला पाट-पाट = जगह-जगह शोभा-श्री = सौंदर्य से भरपूर पट नहीं रही = समा नहीं रही

🔍 विस्तृत व्याख्या:

कवि कहते हैं कि दृश्य इतना सुंदर है कि मैं चाहकर भी अपनी आँखें हटा नहीं पा रहा हूँ।

पेड़ों की डालियाँ नए पत्तों से लद गई हैं—कहीं हरे पत्ते हैं तो कहीं कोमल लाल पत्ते (कोपलें)।

गले का हार: रंग-बिरंगे फूलों को देखकर ऐसा लगता है मानो प्रकृति ने अपने गले (उर) में भीनी-भीनी सुगंध वाली फूलों की माला (पुष्प-माल) पहन रखी हो। जगह-जगह (पाट-पाट) इतनी सुंदरता बिखरी है कि वह धरती पर समा नहीं रही है।

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प्रश्न 1: 'उत्साह' कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है?

उत्तर: 'उत्साह' कविता में बादल तीन प्रमुख प्रतीकों के रूप में आया है: 1. पीड़ित और प्यासे लोगों की प्यास बुझाने वाली 'जीवनदायी शक्ति' के रूप में। 2. समाज में क्रांति और बदलाव लाने वाले 'विद्रोही नायक' के रूप में। 3. नई कविता रचने वाले 'उत्साही कवि' के रूप में।

प्रश्न 2: कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है?

उत्तर: फागुन (वसंत) का सौंदर्य अत्यंत व्यापक और मनमोहक है। चारों ओर हरियाली, रंग-बिरंगे फूल और सुगंधित हवा है। प्रकृति का यह रूप इतना आकर्षक है कि कवि विवश होकर उसे एकटक देखता ही रहता है।

प्रश्न 3 (HOTS): 'ललित ललित, काले घुंघराले' में किसका चित्रण है?

उत्तर: इसमें बादलों के बाल-रूप (Child form) का चित्रण है। काले और घने बादलों को एक छोटे बच्चे के काले-घुंघराले बालों के समान सुंदर बताया गया है।

पाठ 4 समाप्त! 🚩

हमने बादलों की गर्जना और फूलों की खुशबू, दोनों को महसूस किया।

अगला पाठ: "यह दंतुरित मुसकान" और "फसल" (नागार्जुन)

(बच्चों की प्यारी मुस्कान और फसलों के विज्ञान को समझने के लिए तैयार रहें!)

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