RBSE Class 10 Hindi Chapter 5: Yeh Danturit Muskan & Fasal (Nagarjun) Mega Guide 2026

📅 Tuesday, 6 January 2026 📖 3-5 min read
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यह दंतुरित मुसकान
और फसल

जनकवि 'नागार्जुन' (बाबा यात्री)

कवि परिचय: नागार्जुन को 'जनकवि' कहा जाता है। वे मैथिली में 'यात्री' नाम से लिखते थे। उनकी भाषा में ग्रामीण संस्कृति की महक और संस्कृत (तत्सम) की गरिमा दोनों का मिश्रण है।

1. यह दंतुरित मुसकान (मनोवैज्ञानिक विश्लेषण)

इस कविता में कवि एक छोटे बच्चे की मुसकान का वर्णन कर रहा है जिसके अभी-अभी नए दाँत निकले हैं। यह मुसकान इतनी शक्तिशाली है कि मरे हुए व्यक्ति में भी जान डाल सकती है।

"तुम्हारी यह दंतुरित मुसकान
मृतक में भी डाल देगी जान
धूलि-धूसर तुम्हारे ये गात...
छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजात
परस पाकर तुम्हारा ही प्राण,
पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण।"

🔍 विस्तृत व्याख्या (Deep Dive):

1. जीवन का संचार: कवि कहता है कि बच्चे की यह 'दंतुरित' (नए दाँतों वाली) मुसकान इतनी प्रभावशाली है कि यह 'मृतक' (निराश और उदास व्यक्ति) में भी प्राण डाल सकती है। अर्थात, जीवन से हार चुके व्यक्ति को भी जीने की प्रेरणा दे सकती है।

2. कमल का रूपक (Visual Imagery): बच्चे का शरीर धूल से सना हुआ है (धूलि-धूसर)। कवि को लगता है कि कमल का फूल (जलजात) तालाब छोड़कर उसकी गरीब झोंपड़ी में खिल उठा है। (यहाँ 'कमल' बच्चे के लिए प्रयुक्त हुआ है)।

3. पत्थर का पिघलना (Metaphor): "पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण" — इसका अर्थ है कि बच्चे का स्पर्श (परस) पाकर कठोर से कठोर हृदय वाला व्यक्ति (पाषाण) भी भावुक हो जाता है और सहृदय (जल जैसा तरल) बन जाता है।

"छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल
बाँस था कि बबूल
तुम मुझे पाए नहीं पहचान?
देखते ही रहोगे अनिमेष!"

🔍 विस्तृत व्याख्या:

जादुई स्पर्श: कवि कहता है कि तुम्हारा स्पर्श इतना कोमल है कि बांस या बबूल (सूखे और कांटेदार पेड़ - अर्थात नीरस जीवन) से भी शेफालिका के कोमल फूल झरने लगते हैं। अर्थात, तुम्हारे संपर्क में आकर रूड और गुस्सैल आदमी भी कोमल हो जाता है।

परिचय का अभाव: चूँकि कवि 'घुमक्कड़' प्रवृत्ति का है और बहुत दिनों बाद घर लौटा है, इसलिए बच्चा उसे पहचान नहीं पा रहा है। बच्चा उसे 'अनिमेष' (बिना पलक झपकाए) देख रहा है, जैसे पूछ रहा हो- "तुम कौन हो?"

👩‍👦 माँ की भूमिका (Crucial Point):
कविता की अंतिम पंक्तियों में कवि कहता है- "धन्य तुम, माँ भी तुम्हारी धन्य!"
कवि स्वीकार करता है कि यदि बच्चे की माँ माध्यम न बनी होती, तो आज वह इस मुसकान के दर्शन नहीं कर पाता। बच्चे और पिता के बीच का सेतु (Bridge) 'माँ' ही है।

2. फसल (कृषि का विज्ञान)

नागार्जुन ने इस कविता में बताया है कि 'फसल' केवल एक पौधा नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और मनुष्य के सहयोग का परिणाम है।

"एक के नहीं, दो के नहीं...
ढेर सारी नदियों के पानी का जादू
लाख-लाख कोटि-कोटि हाथों के स्पर्श की गरिमा
हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म"

🌾 फसल का समीकरण (Equation of Crop)

कवि ने फसल की परिभाषा बहुत ही वैज्ञानिक ढंग से दी है। आइये इसे एक टेबल से समझते हैं:

तत्व (Element) योगदान (Contribution)
1. नदियों का पानी कवि इसे 'पानी का जादू' कहता है। जल ही जीवन है जिससे फसल बढ़ती है।
2. मनुष्य के हाथ 'लाखों-करोड़ों हाथों का स्पर्श'। यह किसान और मजदूरों का कठोर परिश्रम (Labor) है।
3. मिट्टी (Soil) 'मिट्टी का गुण-धर्म'। अलग-अलग मिट्टी (भूरी, काली, संदली) में अलग-अलग पोषक तत्व होते हैं जो फसल को स्वाद देते हैं।
4. सूरज (Sun) 'सूरज की किरणों का रूपांतरण'। यह विज्ञान का प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) है।
5. हवा (Air) 'हवा की थिरकन'। हवा पौधों को साँस लेने और बढ़ने में मदद करती है।
निष्कर्ष: फसल = प्रकृति (नदी, मिट्टी, सूरज, हवा) + मनुष्य (मेहनत)। इनमें से एक भी गायब हो, तो फसल नहीं उग सकती।

3. व्याकरण और शब्दार्थ कोना

प्रमुख शब्दार्थ

  • दंतुरित: नए-नए निकले दाँत।
  • धूलि-धूसर: धूल से सना हुआ।
  • जलजात: कमल (जल में उत्पन्न)।
  • अनिमेष: अपलक (बिना पलक झपकाए)।
  • मधुपर्क: दही, घी, शहद, जल और दूध का मिश्रण (पंचामृत)।

अलंकार व संधि

  • अनुप्रास: 'धूलि-धूसर', 'परस पाकर'।
  • अतिशयोक्ति: 'मृतक में भी डाल देगी जान'।
  • मानवीकरण: 'हवा की थिरकन', 'सूरज की किरणों का सिमटा हुआ संकोच'।

4. बोर्ड परीक्षा प्रश्न बैंक (Detailed)

प्रश्न 1: "धूलि-धूसर तुम्हारे ये गात, छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजात" — भाव स्पष्ट करें।
उत्तर: कवि बच्चे के धूल से सने शरीर की सुंदरता का वर्णन कर रहा है। वह कहता है कि बच्चे का धूल से भरा शरीर देखकर ऐसा लगता है मानो सुंदर कमल का फूल तालाब छोड़कर कवि की गरीब झोंपड़ी में खिल गया हो। यहाँ 'धूल' गरीबी और संघर्ष का प्रतीक है, लेकिन बच्चे की मुसकान उसमें भी सुंदरता (कमल) पैदा कर देती है।

प्रश्न 2: कवि के अनुसार फसल क्या है? (Most Important)
उत्तर: कवि के अनुसार फसल कोई अकेली वस्तु नहीं है। यह सामूहिक योगदान का फल है। यह: 1. ढेर सारी नदियों के पानी का जादू है। 2. लाखों इंसानों के हाथों के श्रम की गरिमा है। 3. भूरी-काली-संदली मिट्टी का गुणधर्म है। 4. सूरज की किरणों का बदला हुआ रूप है। 5. हवा की थिरकन का सिमटा हुआ संकोच है।

प्रश्न 3: बच्चे की मुसकान और एक बड़े व्यक्ति की मुसकान में क्या अंतर है?
उत्तर: बच्चे की मुसकान 'दंतुरित' और निश्छल (Innocent) होती है। उसमें कोई स्वार्थ या बनावटीपन नहीं होता। वह अजनबियों को देखकर भी मुस्कुरा देता है। जबकि बड़ों की मुसकान अक्सर औपचारिक, बनावटी या स्वार्थ से प्रेरित होती है।

पाठ 5 सम्पूर्ण! 🎉

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उस पाठ में हम 'मुख्य गायक' के पीछे छिपे उस 'हीरो' की बात करेंगे जिसे कोई नहीं जानता।
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