विद्युतचुम्बकीय तरंगों की प्रकृति
विद्युतचुम्बकीय तरंगें विद्युत क्षेत्र और चुम्बकीय क्षेत्र के परस्पर परिवर्तित होते रूपों से निर्मित होती हैं। ये तरंगें किसी माध्यम की आवश्यकता के बिना अंतरिक्ष में संचरित होने में सक्षम होती हैं। यही गुण इन्हें यांत्रिक तरंगों से मौलिक रूप से भिन्न बनाता है।
जब विद्युत क्षेत्र में समय के साथ परिवर्तन होता है, तो उसके कारण चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। इसी प्रकार, परिवर्तित चुम्बकीय क्षेत्र विद्युत क्षेत्र को जन्म देता है। इन दोनों क्षेत्रों की यह सतत परस्पर उत्पत्ति एक आत्मनिर्भर तरंग संरचना का निर्माण करती है, जिसे विद्युतचुम्बकीय तरंग कहा जाता है।
विद्युतचुम्बकीय तरंगों में विद्युत क्षेत्र और चुम्बकीय क्षेत्र एक-दूसरे के लंबवत होते हैं तथा दोनों ही तरंग के संचरण की दिशा के भी लंबवत होते हैं। यह त्रि-लंबवत व्यवस्था इन तरंगों की पहचान है।
चित्र में स्पष्ट है कि विद्युत क्षेत्र और चुम्बकीय क्षेत्र एक-दूसरे के साथ समकालिक रूप से दोलन करते हैं। इन दोनों क्षेत्रों का अधिकतम और न्यूनतम मान एक ही समय पर प्राप्त होता है, अर्थात् इनके बीच कोई चरणांतर नहीं होता।
विस्थापन धारा की अवधारणा
विद्युतचुम्बकीय तरंगों की सैद्धांतिक व्याख्या में विस्थापन धारा की अवधारणा एक निर्णायक भूमिका निभाती है। यह अवधारणा परंपरागत धारा की सीमाओं को विस्तार देती है।
जहाँ चालक में वास्तविक आवेश प्रवाह धारा उत्पन्न करता है, वहीं परिवर्तित विद्युत क्षेत्र बिना आवेश प्रवाह के भी चुम्बकीय प्रभाव उत्पन्न कर सकता है। इसी प्रभाव को विस्थापन धारा के रूप में अभिव्यक्त किया जाता है।
विस्थापन धारा ने विद्युत और चुम्बकीय घटनाओं को एकीकृत गणितीय संरचना प्रदान की, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि परिवर्तित विद्युत क्षेत्र भी चुम्बकीय क्षेत्र का स्रोत हो सकता है।
विद्युतचुम्बकीय तरंगों का वेग
विद्युतचुम्बकीय तरंगें निर्वात में एक निश्चित वेग से संचरित होती हैं। यह वेग प्रकृति का एक मौलिक नियतांक है और सभी विद्युतचुम्बकीय तरंगों के लिए समान होता है।
निर्वात में इन तरंगों का वेग प्रकाश के वेग के बराबर होता है। यही तथ्य यह स्थापित करता है कि प्रकाश स्वयं एक विद्युतचुम्बकीय तरंग है।
माध्यम में प्रवेश करने पर इन तरंगों का वेग माध्यम के विद्युत एवं चुम्बकीय गुणों पर निर्भर करता है, परंतु तरंग की मूल प्रकृति अपरिवर्तित रहती है।
विद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम
विद्युतचुम्बकीय तरंगें विभिन्न आवृत्तियों और तरंगदैर्घ्यों में पाई जाती हैं। इन सभी तरंगों का क्रमबद्ध संकलन विद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम कहलाता है। यह स्पेक्ट्रम कम आवृत्ति से अधिक आवृत्ति तथा अधिक तरंगदैर्घ्य से कम तरंगदैर्घ्य की दिशा में विस्तृत होता है।
स्पेक्ट्रम के विभिन्न भाग भौतिक गुणों में भिन्न होते हुए भी मूलतः समान प्रकृति की तरंगों से बने होते हैं। इनका अंतर केवल तरंगदैर्घ्य, आवृत्ति और ऊर्जा के कारण होता है।
स्पेक्ट्रम के बाएँ सिरे पर तरंगदैर्घ्य अधिक तथा आवृत्ति कम होती है, जबकि दाएँ सिरे पर आवृत्ति अधिक और तरंगदैर्घ्य कम हो जाता है। इसी क्रम में तरंगों की ऊर्जा भी बढ़ती जाती है।
रेडियो तरंगें
रेडियो तरंगें विद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम की सबसे लंबी तरंगदैर्घ्य वाली तरंगें होती हैं। इनका उपयोग रेडियो प्रसारण, टेलीविजन संचार और दूरसंचार प्रणालियों में किया जाता है। ये तरंगें वायुमंडल में लंबी दूरी तक कम ऊर्जा हानि के साथ संचरित हो सकती हैं।
सूक्ष्म तरंगें (Microwaves)
सूक्ष्म तरंगों की तरंगदैर्घ्य रेडियो तरंगों से कम होती है। इनका उपयोग रडार प्रणालियों, उपग्रह संचार और माइक्रोवेव ओवन में किया जाता है। इन तरंगों का पदार्थ के साथ विशिष्ट ऊष्मीय प्रभाव होता है।
अवरक्त तरंगें (Infrared)
अवरक्त तरंगें ऊष्मीय विकिरण से संबंधित होती हैं। गर्म वस्तुएँ इन तरंगों का उत्सर्जन करती हैं। इनका उपयोग रात-दृष्टि उपकरण, तापीय कैमरे और रिमोट कंट्रोल प्रणालियों में होता है।
दृश्य प्रकाश
दृश्य प्रकाश विद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम का वह संकीर्ण भाग है जिसे मानव नेत्र देख सकता है। इसमें बैंगनी से लेकर लाल तक विभिन्न रंग सम्मिलित होते हैं। प्रकाशीय घटनाओं का अध्ययन इसी क्षेत्र पर आधारित है।
पराबैंगनी किरणें (Ultraviolet)
पराबैंगनी किरणों की ऊर्जा दृश्य प्रकाश से अधिक होती है। इनका उपयोग जीवाणु नाश, फॉरेंसिक परीक्षण और चिकित्सीय अनुप्रयोगों में किया जाता है। अत्यधिक संपर्क मानव त्वचा के लिए हानिकारक हो सकता है।
एक्स-किरणें (X-rays)
एक्स-किरणों की तरंगदैर्घ्य अत्यंत छोटी होती है। इनका उपयोग चिकित्सीय इमेजिंग, सामग्री परीक्षण और क्रिस्टल संरचना के अध्ययन में किया जाता है।
गामा किरणें
गामा किरणें विद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम की सबसे अधिक ऊर्जा वाली तरंगें हैं। ये रेडियोधर्मी प्रक्रियाओं और नाभिकीय अभिक्रियाओं में उत्पन्न होती हैं। इनका उपयोग कैंसर चिकित्सा और नाभिकीय अनुसंधान में किया जाता है।
स्पेक्ट्रम का समेकित दृष्टिकोण
विद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम एक सतत व्यवस्था है, जिसमें सभी तरंगें एक ही मूल प्रकृति साझा करती हैं। आवृत्ति बढ़ने के साथ तरंगदैर्घ्य घटता है और तरंगों की ऊर्जा बढ़ती जाती है। यह क्रम रेडियो तरंगों से आरंभ होकर गामा किरणों तक विस्तृत होता है।
यद्यपि इन तरंगों के उपयोग भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में होते हैं, परंतु सभी का संचरण निर्वात में समान वेग से होता है। यही तथ्य प्रकाश और अन्य विद्युतचुम्बकीय तरंगों के एकीकृत स्वरूप को स्थापित करता है।
एक नज़र में – विद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम
| तरंग का प्रकार | मुख्य विशेषता | सामान्य उपयोग |
|---|---|---|
| रेडियो तरंगें | लंबी तरंगदैर्घ्य, कम ऊर्जा | प्रसारण, दूरसंचार |
| सूक्ष्म तरंगें | उच्च आवृत्ति | रडार, उपग्रह संचार |
| अवरक्त | ऊष्मीय प्रभाव | थर्मल इमेजिंग |
| दृश्य प्रकाश | मानव नेत्र द्वारा दृश्य | दृष्टि, प्रकाशिकी |
| पराबैंगनी | अधिक ऊर्जा | कीटाणुनाश |
| एक्स-किरणें | अत्यंत छोटी तरंगदैर्घ्य | चिकित्सीय परीक्षण |
| गामा किरणें | सर्वाधिक ऊर्जा | कैंसर चिकित्सा |
संक्षिप्त नोट्स
- विद्युतचुम्बकीय तरंगें माध्यम की आवश्यकता के बिना संचरित होती हैं।
- विद्युत और चुम्बकीय क्षेत्र परस्पर तथा संचरण दिशा के लंबवत होते हैं।
- निर्वात में सभी विद्युतचुम्बकीय तरंगों का वेग समान होता है।
- विस्थापन धारा परिवर्तित विद्युत क्षेत्र से संबंधित है।
- स्पेक्ट्रम में ऊर्जा आवृत्ति के साथ बढ़ती है।
संबंधित वैज्ञानिक योगदान
- जेम्स क्लर्क मैक्सवेल: विद्युत और चुम्बकीय घटनाओं का एकीकृत सिद्धांत, जिससे विद्युतचुम्बकीय तरंगों की भविष्यवाणी संभव हुई।
- हाइनरिख हर्ट्ज़: प्रयोगात्मक रूप से विद्युतचुम्बकीय तरंगों के अस्तित्व की पुष्टि।
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शैक्षणिक मार्गदर्शन
- सुरेंद्र सिंह चौहान
- कार्तिकेय खत्री
अस्वीकरण
यह अध्ययन सामग्री राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) के निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुरूप शैक्षणिक उद्देश्य से तैयार की गई है। परीक्षा में अंतिम उत्तर लेखन हेतु आधिकारिक पाठ्यपुस्तकों का अध्ययन अनिवार्य है।


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