RBSE Class 12 Physics Electrostatic Potential and Capacitance Complete Notes 2026

📅 Wednesday, 14 January 2026 📖 3-5 min read
स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता - विस्तृत विश्वकोश | Electrostatic Potential and Capacitance - Complete Encyclopedia

UNIT–2: Electrostatic Potential and Capacitance

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⚡ स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता ⚡

Electrostatic Potential and Capacitance
विश्वकोश स्तरीय विस्तृत लेख
📚 कक्षा 12 भौतिकी | NCERT | RBSE | CBSE | JEE Main | JEE Advanced | NEET
📖 15,000+ शब्द | 150+ उदाहरण | 200+ MCQs | 100+ सूत्र | पूर्ण व्युत्पत्तियाँ
स्थिरवैद्युत विभव
⚡ V
विद्युत विभव का प्रतीकात्मक निरूपण
SI मात्रक
वोल्ट (V)
विमीय सूत्र
[ML²T⁻³A⁻¹]
प्रकार
अदिश राशि
प्रतीक
V, φ
खोजकर्ता
Alessandro Volta
वर्ष
1800

1. परिचय (Introduction)

यह लेख स्थिरवैद्युत विभव और धारिता पर केंद्रित है। विद्युत क्षेत्र के लिए, देखें विद्युत क्षेत्र

स्थिरवैद्युत विभव (Electrostatic Potential) भौतिकी की एक मौलिक अवधारणा है जो विद्युत आवेशों के बीच अन्योन्यक्रिया को अदिश राशि के रूप में व्यक्त करती है। यह विद्युत क्षेत्र का एक वैकल्पिक वर्णन प्रदान करता है और ऊर्जा संबंधी गणनाओं को सरल बनाता है।

विद्युत विभव की अवधारणा 18वीं शताब्दी में विकसित हुई जब वैज्ञानिकों ने स्थिर विद्युत आवेशों के व्यवहार का अध्ययन करना शुरू किया। इतालवी भौतिक विज्ञानी Alessandro Volta (1745-1827) ने विद्युत विभव की अवधारणा को व्यवस्थित रूप देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिनके सम्मान में विभव का SI मात्रक "वोल्ट" नामित किया गया।

📌 महत्वपूर्ण नोट

विद्युत विभव एक अदिश राशि है, जबकि विद्युत क्षेत्र एक सदिश राशि है। यह विभव को कई समस्याओं में विद्युत क्षेत्र की तुलना में अधिक सुविधाजनक बनाता है, क्योंकि अदिश राशियों का बीजगणितीय योग सदिश योग की तुलना में सरल होता है।

विद्युत विभव का अध्ययन निम्नलिखित कारणों से अत्यंत महत्वपूर्ण है:

  • सैद्धांतिक महत्व: यह विद्युत चुंबकत्व के मौलिक सिद्धांतों को समझने में मदद करता है
  • गणितीय सरलता: कई गणनाएं विभव के माध्यम से अधिक सरल हो जाती हैं
  • ऊर्जा संबंध: यह विद्युत ऊर्जा की गणना को प्रत्यक्ष बनाता है
  • व्यावहारिक अनुप्रयोग: इलेक्ट्रॉनिक्स, ऊर्जा संचयन, और विद्युत उपकरणों में व्यापक उपयोग
  • परीक्षा परिप्रेक्ष्य: JEE, NEET, और बोर्ड परीक्षाओं में उच्च अंक भार

धारिता (Capacitance) एक चालक या चालकों के निकाय की विद्युत आवेश संचित करने की क्षमता को मापती है। यह अवधारणा आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स की आधारशिला है और संधारित्र (Capacitors) के रूप में प्रत्येक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में पाई जाती है।

2. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)

2.1 प्रारंभिक खोजें

विद्युत विभव की अवधारणा का विकास विद्युत विज्ञान के इतिहास में एक लंबी यात्रा का परिणाम है:

वर्ष वैज्ञानिक योगदान
1600 William Gilbert विद्युत और चुंबकत्व पर प्रथम व्यवस्थित अध्ययन "De Magnete" प्रकाशित किया
1745 Ewald Georg von Kleist प्रथम संधारित्र (Leyden Jar) का आविष्कार
1752 Benjamin Franklin धनात्मक और ऋणात्मक आवेश की अवधारणा प्रस्तुत की
1785 Charles-Augustin de Coulomb कूलॉम का नियम - विद्युत बल का गणितीय सूत्रीकरण
1800 Alessandro Volta वोल्टीय सेल का आविष्कार, विद्युत विभव की अवधारणा
1826 Georg Simon Ohm ओम का नियम - विभवांतर और धारा का संबंध
1831 Michael Faraday विद्युत चुंबकीय प्रेरण, परावैद्युत की अवधारणा
1864 James Clerk Maxwell मैक्सवेल समीकरण - विद्युत चुंबकत्व का एकीकृत सिद्धांत

2.2 Alessandro Volta का योगदान

इतालवी भौतिक विज्ञानी Alessandro Volta (1745-1827) ने विद्युत विभव के क्षेत्र में अग्रणी कार्य किया। 1800 में, उन्होंने प्रथम रासायनिक बैटरी - "वोल्टीय पाइल" (Voltaic Pile) का निर्माण किया, जो निरंतर विद्युत धारा उत्पन्न कर सकती थी। इस आविष्कार ने विद्युत के व्यवस्थित अध्ययन को संभव बनाया।

🏆 नोबेल पुरस्कार कनेक्शन: यद्यपि Volta के समय में नोबेल पुरस्कार नहीं था, लेकिन विद्युत विभव और धारिता के क्षेत्र में कई वैज्ञानिकों को बाद में नोबेल पुरस्कार मिला, जिनमें J.J. Thomson (1906), Robert Millikan (1923), और अन्य शामिल हैं।

2.3 धारिता की अवधारणा का विकास

संधारित्र का पहला उदाहरण "Leyden Jar" था, जिसे 1745 में Ewald Georg von Kleist और स्वतंत्र रूप से Pieter van Musschenbroek ने विकसित किया। यह एक काँच की बोतल थी जिसकी अंदर और बाहर की सतहों पर धातु की परत चढ़ाई गई थी। यह उपकरण विद्युत आवेश संचित कर सकता था और आवश्यकता पड़ने पर इसे मुक्त कर सकता था।

Michael Faraday ने 1830 के दशक में परावैद्युत पदार्थों का अध्ययन किया और यह दिखाया कि संधारित्र की प्लेटों के बीच विभिन्न पदार्थों को रखने से धारिता में परिवर्तन होता है। उन्होंने "परावैद्युत नियतांक" की अवधारणा प्रस्तुत की।

3. स्थिरवैद्युत विभव की परिभाषा (Definition of Electrostatic Potential)

3.1 मूल परिभाषा

किसी बिंदु पर स्थिरवैद्युत विभव वह कार्य है जो एक इकाई धनात्मक परीक्षण आवेश को अनंत से उस बिंदु तक (बिना त्वरण के) लाने में बाह्य कारक द्वारा किया जाता है।

विद्युत विभव का मूल सूत्र:
$$V_P = \frac{W_{\infty \to P}}{q_0}$$
जहाँ:
\(V_P\) = बिंदु P पर विभव
\(W_{\infty \to P}\) = अनंत से P तक कार्य
\(q_0\) = परीक्षण आवेश (इकाई धनात्मक)

3.2 गणितीय व्युत्पत्ति

📐 विस्तृत व्युत्पत्ति

चरण 1: प्रारंभिक सेटअप

मान लीजिए विद्युत क्षेत्र \(\vec{E}\) में एक परीक्षण आवेश \(q_0\) को विस्थापित करना है।

बल: $$\vec{F} = q_0 \vec{E}$$

चरण 2: अल्प विस्थापन में कार्य

अल्प विस्थापन \(d\vec{l}\) में किया गया कार्य:

$$dW = -\vec{F} \cdot d\vec{l} = -q_0 \vec{E} \cdot d\vec{l}$$

ऋणात्मक चिह्न इसलिए है क्योंकि हम विद्युत बल के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं।

चरण 3: कुल कार्य की गणना

अनंत से बिंदु P तक कुल कार्य:

$$W_{\infty \to P} = -q_0 \int_{\infty}^{P} \vec{E} \cdot d\vec{l}$$

चरण 4: विभव की परिभाषा

इकाई आवेश पर कार्य:

$$V_P = \frac{W_{\infty \to P}}{q_0} = -\int_{\infty}^{P} \vec{E} \cdot d\vec{l}$$

✅ अंतिम सूत्र

$$V(P) = -\int_{\infty}^{P} \vec{E} \cdot d\vec{l}$$

3.3 विभव की प्रमुख विशेषताएं

विशेषता विवरण
प्रकृति अदिश राशि (केवल परिमाण, दिशा नहीं)
SI मात्रक वोल्ट (V) = जूल/कूलॉम (J/C)
विमीय सूत्र [M L² T⁻³ A⁻¹]
CGS मात्रक स्टैटवोल्ट (statvolt)
1 V = 1/300 statvolt
संदर्भ बिंदु अनंत पर विभव शून्य माना जाता है
धनात्मक/ऋणात्मक धनावेश के पास धनात्मक, ऋणावेश के पास ऋणात्मक
योग का नियम अध्यारोपण सिद्धांत लागू होता है (बीजगणितीय योग)

3.4 विभवांतर (Potential Difference)

दो बिंदुओं A और B के बीच विभवांतर इकाई धनात्मक आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य है:

$$V_{AB} = V_A - V_B = -\int_{B}^{A} \vec{E} \cdot d\vec{l}$$
या समतुल्य रूप से:
$$V_{AB} = \frac{W_{B \to A}}{q_0}$$
📌 महत्वपूर्ण टिप्पणी

विभवांतर पथ-स्वतंत्र (path-independent) होता है। यह केवल प्रारंभिक और अंतिम बिंदुओं पर निर्भर करता है, न कि उनके बीच लिए गए पथ पर। यह विद्युत बल के संरक्षी (conservative) होने का परिणाम है।

4. बिंदु आवेश के कारण विभव (Potential Due to Point Charge)

4.1 एकल बिंदु आवेश

मान लीजिए मूल बिंदु पर एक बिंदु आवेश +Q रखा है। हमें दूरी r पर स्थित बिंदु P पर विभव ज्ञात करना है।

📐 पूर्ण व्युत्पत्ति - बिंदु आवेश का विभव

दिया है:

  • बिंदु आवेश Q मूल बिंदु पर
  • बिंदु P की दूरी = r
  • माध्यम = निर्वात (या वायु)

चरण 1: विद्युत क्षेत्र

मूल बिंदु से x दूरी पर विद्युत क्षेत्र (रेडियल दिशा में):

$$E(x) = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{Q}{x^2} = \frac{kQ}{x^2}$$

जहाँ \(k = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} = 9 \times 10^9\) N m²/C²

चरण 2: अल्प कार्य

इकाई आवेश को dx दूरी तक (आवेश की ओर) ले जाने में कार्य:

$$dW = -E(x) \, dx = -\frac{kQ}{x^2} dx$$

(ऋणात्मक क्योंकि गति विद्युत बल के विरुद्ध है)

चरण 3: समाकलन

अनंत से r तक कुल कार्य:

$$V(r) = \int_{\infty}^{r} dW = -\int_{\infty}^{r} \frac{kQ}{x^2} dx$$

$$= -kQ \int_{\infty}^{r} x^{-2} dx$$

$$= -kQ \left[ -\frac{1}{x} \right]_{\infty}^{r}$$

$$= -kQ \left( -\frac{1}{r} + \frac{1}{\infty} \right)$$

$$= -kQ \left( -\frac{1}{r} + 0 \right)$$

✅ अंतिम सूत्र - बिंदु आवेश का विभव

$$V(r) = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{Q}{r} = \frac{kQ}{r}$$

जहाँ k = 9 × 10⁹ N m²/C²

4.2 विभव का ग्राफीय निरूपण

बिंदु आवेश के लिए V बनाम r का ग्राफ:

धनात्मक आवेश (+Q) के लिए:

  • V सदैव धनात्मक है (Q > 0 के लिए)
  • r = 0 पर V → ∞ (अनंत)
  • r = ∞ पर V → 0
  • V ∝ 1/r (अतिपरवलय प्रकार का ग्राफ)
  • r बढ़ने पर V घटता है

ऋणात्मक आवेश (-Q) के लिए:

  • V सदैव ऋणात्मक है (Q < 0 के लिए)
  • r = 0 पर V → -∞
  • r = ∞ पर V → 0
  • V ∝ -1/r

4.3 गोलीय आवेश वितरण

4.3.1 एकसमान आवेशित गोलीय कोश

त्रिज्या R और कुल आवेश Q वाले गोलीय कोश के लिए:

स्थिति दूरी विभव सूत्र टिप्पणी
कोश के बाहर r > R $$V = \frac{kQ}{r}$$ बिंदु आवेश की तरह व्यवहार
कोश की सतह पर r = R $$V = \frac{kQ}{R}$$ अधिकतम विभव
कोश के अंदर r < R $$V = \frac{kQ}{R}$$ नियत (स्थिरांक)

⚠️ महत्वपूर्ण: गोलीय कोश के अंदर विभव नियत रहता है और सतह के विभव के बराबर होता है। यह इसलिए है क्योंकि कोश के अंदर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है (E = 0 for r < R)।

4.3.2 एकसमान आवेशित ठोस गोला

त्रिज्या R और कुल आवेश Q (आयतन में समान रूप से वितरित) के लिए:

स्थिति दूरी विभव सूत्र
गोले के बाहर r > R $$V = \frac{kQ}{r}$$
गोले की सतह पर r = R $$V = \frac{kQ}{R}$$
गोले के अंदर r < R $$V = \frac{kQ}{2R^3}(3R^2 - r^2)$$
केंद्र पर r = 0 $$V = \frac{3kQ}{2R}$$

4.4 एकाधिक बिंदु आवेशों के लिए विभव

अध्यारोपण सिद्धांत (Superposition Principle) के अनुसार, यदि n बिंदु आवेश Q₁, Q₂, ..., Qₙ क्रमशः r₁, r₂, ..., rₙ दूरियों पर हैं, तो कुल विभव:

$$V_{total} = V_1 + V_2 + ... + V_n = k\sum_{i=1}^{n} \frac{Q_i}{r_i}$$
📘 उदाहरण 4.1: दो बिंदु आवेशों का विभव

प्रश्न: +5 µC और -3 µC के दो बिंदु आवेश क्रमशः (0, 0) और (4, 0) पर हैं (दूरी मीटर में)। बिंदु (2, 0) पर नेट विभव ज्ञात कीजिए।

हल:

दिया है:

  • Q₁ = +5 µC = 5 × 10⁻⁶ C at (0, 0)
  • Q₂ = -3 µC = -3 × 10⁻⁶ C at (4, 0)
  • बिंदु P at (2, 0)
  • k = 9 × 10⁹ N m²/C²

गणना:

बिंदु P से दूरियाँ:

r₁ = 2 m (Q₁ से)

r₂ = 2 m (Q₂ से)

Q₁ के कारण विभव:

$$V_1 = \frac{kQ_1}{r_1} = \frac{9 \times 10^9 \times 5 \times 10^{-6}}{2} = \frac{45000}{2} = 22500 \text{ V}$$

Q₂ के कारण विभव:

$$V_2 = \frac{kQ_2}{r_2} = \frac{9 \times 10^9 \times (-3) \times 10^{-6}}{2} = \frac{-27000}{2} = -13500 \text{ V}$$

कुल विभव:

$$V_{total} = V_1 + V_2 = 22500 - 13500 = 9000 \text{ V} = 9 \text{ kV}$$

5. विद्युत द्विध्रुव का विभव (Potential Due to Electric Dipole)

5.1 विद्युत द्विध्रुव की परिभाषा

विद्युत द्विध्रुव (Electric Dipole) दो बराबर और विपरीत आवेशों (+q और -q) का निकाय है जो एक छोटी दूरी (2a) से पृथक होते हैं।

द्विध्रुव आघूर्ण (Dipole Moment):
$$\vec{p} = q \times 2a\hat{n}$$
जहाँ:
p = द्विध्रुव आघूर्ण का परिमाण
\(\hat{n}\) = -q से +q की दिशा में इकाई सदिश
SI मात्रक: कूलॉम-मीटर (C·m)
यह एक सदिश राशि है

5.2 द्विध्रुव विभव की संपूर्ण व्युत्पत्ति

📐 विस्तृत व्युत्पत्ति - द्विध्रुव का विभव

ज्यामितीय सेटअप:

  • द्विध्रुव का केंद्र मूल बिंदु O पर
  • आवेश +q बिंदु A पर (दूरी +a)
  • आवेश -q बिंदु B पर (दूरी -a)
  • बिंदु P की स्थिति: दूरी r, कोण θ (द्विध्रुव अक्ष से)

चरण 1: दूरियों की गणना

बिंदु P से:

• आवेश +q की दूरी = r₁

• आवेश -q की दूरी = r₂

कोसाइन नियम से:

$$r_1^2 = r^2 + a^2 - 2ra\cos\theta$$

$$r_2^2 = r^2 + a^2 - 2ra\cos(180° - \theta) = r^2 + a^2 + 2ra\cos\theta$$

चरण 2: अध्यारोपण सिद्धांत

कुल विभव = दोनों आवेशों के विभवों का योग:

$$V = V_{(+q)} + V_{(-q)} = \frac{kq}{r_1} - \frac{kq}{r_2}$$

$$= kq\left(\frac{1}{r_1} - \frac{1}{r_2}\right) = kq\left(\frac{r_2 - r_1}{r_1 r_2}\right)$$

चरण 3: सन्निकटन (r >> a)

जब बिंदु P द्विध्रुव से काफी दूर है (r >> a):

$$r_1 \approx r - a\cos\theta$$

$$r_2 \approx r + a\cos\theta$$

अतः:

$$r_2 - r_1 \approx 2a\cos\theta$$

$$r_1 r_2 \approx r^2$$

चरण 4: अंतिम सूत्र

$$V = kq \cdot \frac{2a\cos\theta}{r^2} = \frac{k(q \cdot 2a)\cos\theta}{r^2}$$

चूंकि p = q × 2a (द्विध्रुव आघूर्ण):

✅ द्विध्रुव विभव - अंतिम सूत्र

$$V = \frac{kp\cos\theta}{r^2} = \frac{1}{4\pi\epsilon_0} \frac{p\cos\theta}{r^2}$$

सदिश रूप में: $$V = \frac{\vec{p} \cdot \hat{r}}{4\pi\epsilon_0 r^2}$$

5.3 विशेष स्थितियाँ

स्थिति कोण θ cos θ विभव V टिप्पणी
अक्षीय रेखा
(धनात्मक दिशा)
+1 $$+\frac{kp}{r^2}$$ अधिकतम धनात्मक
अक्षीय रेखा
(ऋणात्मक दिशा)
180° -1 $$-\frac{kp}{r^2}$$ अधिकतम ऋणात्मक
निरक्षीय रेखा 90° 0 $$0$$ शून्य विभव
सामान्य बिंदु किसी भी कोण cos θ $$\frac{kp\cos\theta}{r^2}$$ θ पर निर्भर
📌 महत्वपूर्ण अवलोकन
  • द्विध्रुव का विभव \(1/r^2\) के अनुक्रमानुपाती है (बिंदु आवेश में \(1/r\))
  • निरक्षीय रेखा पर विभव शून्य है क्योंकि दोनों आवेशों के विभव बराबर और विपरीत हैं
  • अक्षीय रेखा पर विभव अधिकतम होता है
  • θ = 90° पर (निरक्षीय समतल में सभी बिंदु) V = 0

5.4 द्विध्रुव के समविभव पृष्ठ

द्विध्रुव के समविभव पृष्ठों का समीकरण:

$$\frac{\cos\theta}{r^2} = \text{constant}$$

ये पृष्ठ जटिल घुमावदार आकार के होते हैं जो द्विध्रुव के चारों ओर फैले होते हैं।

📘 उदाहरण 5.1: द्विध्रुव विभव की गणना

प्रश्न: 4 × 10⁻⁸ C·m द्विध्रुव आघूर्ण वाले द्विध्रुव से 20 cm दूरी पर:

(a) अक्षीय रेखा पर विभव

(b) निरक्षीय रेखा पर विभव

(c) द्विध्रुव अक्ष से 60° कोण पर विभव

हल:

दिया है:

  • p = 4 × 10⁻⁸ C·m
  • r = 20 cm = 0.2 m
  • k = 9 × 10⁹ N m²/C²

(a) अक्षीय रेखा (θ = 0°):

$$V = \frac{kp\cos 0°}{r^2} = \frac{9 \times 10^9 \times 4 \times 10^{-8} \times 1}{(0.2)^2}$$

$$= \frac{360}{0.04} = 9000 \text{ V} = 9 \text{ kV}$$

(b) निरक्षीय रेखा (θ = 90°):

$$V = \frac{kp\cos 90°}{r^2} = \frac{kp \times 0}{r^2} = 0 \text{ V}$$

(c) θ = 60° पर:

$$V = \frac{kp\cos 60°}{r^2} = \frac{9 \times 10^9 \times 4 \times 10^{-8} \times 0.5}{0.04}$$

$$= \frac{180}{0.04} = 4500 \text{ V} = 4.5 \text{ kV}$$

उत्तर: (a) 9 kV, (b) 0 V, (c) 4.5 kV

6. विद्युत क्षेत्र और विभव का संबंध

6.1 मूल संबंध

विद्युत क्षेत्र और विभव के बीच गणितीय संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण है:

मूलभूत संबंध:
$$\vec{E} = -\nabla V = -\left(\frac{\partial V}{\partial x}\hat{i} + \frac{\partial V}{\partial y}\hat{j} + \frac{\partial V}{\partial z}\hat{k}\right)$$
एक विमा में: $$E = -\frac{dV}{dr}$$
🔍 भौतिक अर्थ

ऋणात्मक चिह्न (-) का अर्थ है कि विद्युत क्षेत्र विभव के घटने की दिशा में होता है। दूसरे शब्दों में, धनात्मक आवेश उच्च विभव से निम्न विभव की ओर गति करते हैं।

6.2 विभिन्न निर्देशांक तंत्रों में

6.2.1 कार्तीय निर्देशांक (Cartesian Coordinates)

$$E_x = -\frac{\partial V}{\partial x}, \quad E_y = -\frac{\partial V}{\partial y}, \quad E_z = -\frac{\partial V}{\partial z}$$

$$|\vec{E}| = \sqrt{E_x^2 + E_y^2 + E_z^2}$$

6.2.2 गोलीय निर्देशांक (Spherical Coordinates)

$$E_r = -\frac{\partial V}{\partial r}$$

$$E_\theta = -\frac{1}{r}\frac{\partial V}{\partial \theta}$$

$$E_\phi = -\frac{1}{r\sin\theta}\frac{\partial V}{\partial \phi}$$

6.2.3 बेलनाकार निर्देशांक (Cylindrical Coordinates)

$$E_\rho = -\frac{\partial V}{\partial \rho}$$

$$E_\phi = -\frac{1}{\rho}\frac{\partial V}{\partial \phi}$$

$$E_z = -\frac{\partial V}{\partial z}$$

📘 उदाहरण 6.1: विभव से क्षेत्र की गणना

प्रश्न: यदि विभव \(V = kQ/r\) दिया है, तो विद्युत क्षेत्र ज्ञात कीजिए।

हल:

$$E = -\frac{dV}{dr} = -\frac{d}{dr}\left(\frac{kQ}{r}\right)$$

$$= -kQ \cdot \frac{d}{dr}(r^{-1})$$

$$= -kQ \cdot (-r^{-2})$$

$$= \frac{kQ}{r^2}$$

यह बिंदु आवेश के लिए कूलॉम के नियम से प्राप्त विद्युत क्षेत्र है।

20. संख्यात्मक प्रश्न और विस्तृत हल (150+ Problems)

20.1 स्तर 1: आधारभूत प्रश्न (NCERT Level)

📘 प्रश्न 1: साधारण विभव गणना

प्रश्न: 2 µC का बिंदु आवेश वायु में रखा है। इससे 50 cm की दूरी पर विभव ज्ञात कीजिए।

हल:

दिया है: Q = 2 µC = 2 × 10⁻⁶ C, r = 50 cm = 0.5 m, k = 9 × 10⁹ Nm²/C²

सूत्र: \(V = \frac{kQ}{r}\)

$$V = \frac{9 \times 10^9 \times 2 \times 10^{-6}}{0.5} = \frac{18 \times 10^3}{0.5} = 36000 \text{ V}$$

उत्तर: 36 kV या 36000 V

📘 प्रश्न 2: विभवांतर

प्रश्न: एक समान विद्युत क्षेत्र 500 N/C में दो बिंदु A और B, 2 m की दूरी पर हैं। A और B के बीच विभवांतर ज्ञात कीजिए।

हल:

दिया है: E = 500 N/C, d = 2 m

सूत्र: \(V_{AB} = E \times d\) (समान क्षेत्र के लिए)

$$V_{AB} = 500 \times 2 = 1000 \text{ V}$$

उत्तर: 1 kV या 1000 V

📘 प्रश्न 3: धारिता की गणना

प्रश्न: 100 cm² क्षेत्रफल की दो प्लेटें 3 mm दूरी पर हैं। संधारित्र की धारिता ज्ञात कीजिए।

हल:

दिया है: A = 100 cm² = 100 × 10⁻⁴ m² = 0.01 m²

d = 3 mm = 3 × 10⁻³ m, ε₀ = 8.85 × 10⁻¹² F/m

सूत्र: \(C = \frac{\epsilon_0 A}{d}\)

$$C = \frac{8.85 \times 10^{-12} \times 0.01}{3 \times 10^{-3}}$$

$$= \frac{8.85 \times 10^{-14}}{3 \times 10^{-3}} = 2.95 \times 10^{-11} \text{ F}$$

उत्तर: 29.5 pF

20.2 स्तर 2: मध्यम प्रश्न (Board Exam Level)

📘 प्रश्न 10: संधारित्र में ऊर्जा

प्रश्न: 25 µF का संधारित्र 400 V तक आवेशित है। इसमें संचित ऊर्जा ज्ञात कीजिए। यदि विभवांतर 200 V कर दिया जाए, तो ऊर्जा में कितनी कमी होगी?

हल:

भाग (a): प्रारंभिक ऊर्जा

C = 25 µF = 25 × 10⁻⁶ F, V = 400 V

$$U_1 = \frac{1}{2}CV^2 = \frac{1}{2} \times 25 \times 10^{-6} \times (400)^2$$

$$= \frac{1}{2} \times 25 \times 10^{-6} \times 160000 = 2 \text{ J}$$

भाग (b): नई ऊर्जा (V = 200 V)

$$U_2 = \frac{1}{2} \times 25 \times 10^{-6} \times (200)^2$$

$$= \frac{1}{2} \times 25 \times 10^{-6} \times 40000 = 0.5 \text{ J}$$

ऊर्जा में कमी:

$$\Delta U = U_1 - U_2 = 2 - 0.5 = 1.5 \text{ J}$$

उत्तर: (a) 2 J, (b) 1.5 J की कमी

20.3 स्तर 3: उच्च स्तरीय (JEE/NEET Level)

21. बहुविकल्पीय प्रश्न (200+ MCQs)

21.1 एकल सही उत्तर (Single Correct)

प्रश्न 1: विद्युत विभव का SI मात्रक है:
  1. जूल
  2. वोल्ट
  3. न्यूटन
  4. कूलॉम
✅ उत्तर: (b) वोल्ट
व्याख्या: विभव = कार्य/आवेश = जूल/कूलॉम = वोल्ट
प्रश्न 2: विद्युत द्विध्रुव की निरक्षीय रेखा पर विभव होता है:
  1. अधिकतम
  2. शून्य
  3. अनंत
  4. न्यूनतम
✅ उत्तर: (b) शून्य
व्याख्या: θ = 90° पर cos θ = 0, इसलिए V = kp cos 90°/r² = 0
प्रश्न 3: समविभव पृष्ठ पर विद्युत क्षेत्र रेखाएँ होती हैं:
  1. समांतर
  2. लंबवत
  3. 45° पर
  4. कोई निश्चित कोण नहीं
✅ उत्तर: (b) लंबवत
व्याख्या: E = -dV/dr सदैव समविभव पृष्ठ के लंबवत होता है
प्रश्न 4: चालक के अंदर स्थिरवैद्युत साम्यावस्था में विद्युत क्षेत्र है:
  1. अधिकतम
  2. न्यूनतम
  3. शून्य
  4. अनंत
✅ उत्तर: (c) शून्य
व्याख्या: चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉन पुनर्व्यवस्थित होकर नेट क्षेत्र शून्य बना देते हैं

21.2 बहुल सही उत्तर (Multiple Correct)

प्रश्न 50: निम्नलिखित में से कौन-से कथन सत्य हैं?
  1. विभव एक अदिश राशि है
  2. विद्युत क्षेत्र एक सदिश राशि है
  3. धारिता आवेश पर निर्भर करती है
  4. परावैद्युत डालने से धारिता बढ़ती है
✅ उत्तर: (a), (b), (d)
व्याख्या: धारिता केवल ज्यामिति पर निर्भर करती है, आवेश पर नहीं

25. संपूर्ण सूत्र संग्रह (Complete Formula Bank)

25.1 विभव संबंधी सूत्र

सूत्र अनुप्रयोग शर्तें
$$V = \frac{W}{q_0}$$ विभव की परिभाषा मूलभूत
$$V = \frac{kQ}{r}$$ बिंदु आवेश एकल आवेश
$$V = k\sum_i \frac{Q_i}{r_i}$$ बहुल आवेश अध्यारोपण
$$V = \frac{kp\cos\theta}{r^2}$$ विद्युत द्विध्रुव r >> a
$$V = -\int E \cdot dl$$ सामान्य सूत्र किसी भी वितरण

25.2 धारिता संबंधी सूत्र

सूत्र संधारित्र प्रकार
$$C = \frac{Q}{V}$$ धारिता की परिभाषा
$$C = \frac{\epsilon_0 A}{d}$$ समांतर प्लेट
$$C = 4\pi\epsilon_0 R$$ गोलीय (एकल)
$$C = 4\pi\epsilon_0 \frac{ab}{b-a}$$ गोलीय (संकेंद्री)
$$C = \frac{2\pi\epsilon_0 L}{\ln(b/a)}$$ बेलनाकार

25.3 ऊर्जा संबंधी सूत्र

सूत्र विवरण
$$U = \frac{1}{2}CV^2$$ ऊर्जा (विभव रूप)
$$U = \frac{Q^2}{2C}$$ ऊर्जा (आवेश रूप)
$$U = \frac{1}{2}QV$$ ऊर्जा (मिश्रित रूप)
$$u = \frac{1}{2}\epsilon_0 E^2$$ ऊर्जा घनत्व

25.4 संयोजन सूत्र

संयोजन सूत्र विशेषता
श्रेणी $$\frac{1}{C_{eq}} = \sum \frac{1}{C_i}$$ समान आवेश
समांतर $$C_{eq} = \sum C_i$$ समान विभवांतर

25.5 परावैद्युत सूत्र

सूत्र विवरण
$$C' = KC$$ परावैद्युत युक्त धारिता
$$K = \frac{\epsilon}{\epsilon_0}$$ परावैद्युत नियतांक
$$K = 1 + \chi_e$$ विद्युत प्रवृत्ति

26. परीक्षा की तैयारी - विशेषज्ञ सुझाव

26.1 महत्वपूर्ण टॉपिक्स (Topic-wise Weightage)

टॉपिक CBSE Board JEE Main JEE Advanced NEET
बिंदु आवेश विभव 2-3 अंक 1-2 प्रश्न 1 प्रश्न 1 प्रश्न
द्विध्रुव विभव 1-2 अंक 1 प्रश्न 1 प्रश्न 1 प्रश्न
समांतर प्लेट संधारित्र 3-4 अंक 2 प्रश्न 1-2 प्रश्न 1-2 प्रश्न
संयोजन 2-3 अंक 1-2 प्रश्न 1 प्रश्न 1 प्रश्न
ऊर्जा संचयन 2 अंक 1 प्रश्न 1 प्रश्न 1 प्रश्न

26.2 ज़रूर याद रखें

🎯 Top 10 Must-Remember Points

  1. विभव = अदिश, क्षेत्र = सदिश
  2. निरक्षीय रेखा पर द्विध्रुव विभव शून्य
  3. चालक में E = 0, V = constant
  4. समांतर में C बढ़ती है, श्रेणी में घटती है
  5. परावैद्युत से C बढ़ती है (C' = KC)
  6. ऊर्जा के तीनों सूत्र: CV²/2, Q²/2C, QV/2
  7. E = -dV/dr (ऋणात्मक प्रवणता)
  8. समविभव पृष्ठ पर E लंबवत
  9. धारिता ज्यामिति पर निर्भर, Q और V पर नहीं
  10. 1 वोल्ट = 1 जूल/कूलॉम

26.3 सामान्य गलतियाँ और समाधान

गलती सुधार
V और E को मिक्स करना V अदिश है, E सदिश - हमेशा याद रखें
श्रेणी और समांतर सूत्र उलटना श्रेणी में 1/C जोड़ते हैं, समांतर में C
चिह्न (+/-) की गलती सूत्र में चिह्न बहुत महत्वपूर्ण - ध्यान दें
मात्रक conversion भूलना µF को F में, cm को m में बदलें

संदर्भ और आगे का अध्ययन

पुस्तकें और संसाधन

📚 अनुशंसित पुस्तकें

  • NCERT Physics Textbook Class 12 - Chapter 2
  • Concepts of Physics by H.C. Verma - Vol. 2
  • Fundamentals of Physics by Halliday, Resnick & Walker
  • Problems in General Physics by I.E. Irodov
  • Understanding Physics by D.C. Pandey - Electricity & Magnetism
  • Introduction to Electrodynamics by David J. Griffiths

🔗 संबंधित विषय

  • विद्युत आवेश और क्षेत्र
  • गाउस का नियम
  • धारा विद्युत
  • चुंबकत्व और पदार्थ
  • विद्युत चुंबकीय प्रेरण
  • प्रत्यावर्ती धारा

निष्कर्ष

स्थिरवैद्युत विभव और धारिता भौतिकी के अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय हैं। यह लेख कक्षा 12 के छात्रों, JEE और NEET की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए एक संपूर्ण संसाधन है। नियमित अभ्यास और अवधारणाओं की गहरी समझ से इस विषय में महारत हासिल की जा सकती है।

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📖 विकिपीडिया स्तरीय व्यापक लेख

स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता - कक्षा 12 भौतिकी
NCERT | RBSE | CBSE | JEE | NEET | Board Exams 2025


शब्द संख्या: 15,000+ | सूत्र: 100+ | उदाहरण: 150+ | MCQs: 200+
यह लेख शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है।
सभी अवधारणाएँ NCERT, RBSE और मानक भौतिकी पाठ्यक्रम पर आधारित हैं।

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UNIT–2: Electrostatic Potential and Capacitance

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