RBSE Class 12 Physics – Moving Charges and Magnetism | गतिमान आवेश और चुंबकत्व 2026

📅 Tuesday, 13 January 2026 📖 3-5 min read

UNIT–4 : गतिमान आवेश और चुंबकत्व
(Moving Charges and Magnetism)

भौतिक विज्ञान में विद्युत और चुंबकत्व का अध्ययन मानव सभ्यता के वैज्ञानिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। स्थिर आवेशों के अध्ययन से आगे बढ़ते हुए, जब यह समझ विकसित हुई कि गतिमान आवेश चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न करते हैं, तब विद्युत और चुंबकत्व को एक संयुक्त रूप में समझने की दिशा खुली।

यह अध्याय विद्युत धाराओं, चुंबकीय क्षेत्रों तथा उनके पारस्परिक प्रभाव का सैद्धांतिक एवं गणितीय अध्ययन प्रस्तुत करता है। यही सिद्धांत आधुनिक तकनीक में प्रयुक्त मोटर, जनरेटर, ट्रांसफॉर्मर, गैल्वेनोमीटर तथा अनेक इलेक्ट्रॉनिक यंत्रों की नींव बनाते हैं।


भूमिका (Introduction)

प्राचीन काल से ही चुंबकीय पदार्थों के गुण मानव के लिए जिज्ञासा का विषय रहे हैं। प्राकृतिक चुंबक (Lodestone) का उपयोग दिशा ज्ञान के लिए बहुत पहले प्रारंभ हो चुका था।

उन्नीसवीं शताब्दी में, जब यह स्पष्ट हुआ कि विद्युत धारा प्रवाहित करने वाले चालक के आसपास चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है, तब विद्युत एवं चुंबकत्व दो पृथक शाखाएँ न रहकर एक संयुक्त भौतिक सिद्धांत के रूप में विकसित हुए।

गतिमान आवेश और चुंबकत्व का अध्ययन मुख्यतः निम्न प्रश्नों के उत्तर देता है:

  • गतिमान आवेश पर चुंबकीय बल कैसे कार्य करता है?
  • विद्युत धारा चुंबकीय क्षेत्र कैसे उत्पन्न करती है?
  • चुंबकीय क्षेत्र में आवेश की गति कैसी होती है?
  • धारावाही चालक और पाश पर बल एवं आघूर्ण क्यों लगता है?

चुंबकीय बल और चुंबकीय क्षेत्र
(Magnetic Force and Magnetic Field)

जब कोई आवेश चुंबकीय क्षेत्र में गति करता है, तो उस पर एक बल कार्य करता है जिसे चुंबकीय बल कहते हैं। यह बल आवेश की गति, चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता तथा दोनों के आपसी अभिविन्यास पर निर्भर करता है।

चुंबकीय क्षेत्र को उस क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया जाता है जहाँ किसी गतिमान आवेश या धारावाही चालक पर चुंबकीय बल का अनुभव होता है।

चुंबकीय क्षेत्र एक सदिश राशि (Vector Quantity) है, जिसे प्रायः B से दर्शाया जाता है। इसका SI मात्रक टेस्ला (Tesla) है।


चुंबकीय क्षेत्र के स्रोत (Sources of Magnetic Field)

चुंबकीय क्षेत्र के प्रमुख स्रोत निम्न हैं:

  • स्थायी चुंबक (Permanent Magnets)
  • विद्युत धारा प्रवाहित करने वाले चालक
  • गतिमान विद्युत आवेश

इस अध्याय में स्थायी चुंबकों की अपेक्षा विद्युत धारा एवं गतिमान आवेशों द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र पर अधिक बल दिया गया है, क्योंकि यही आधुनिक विद्युत-चुंबकीय सिद्धांत का आधार है।


लॉरेंट्ज़ बल
(Lorentz Force)

गतिमान आवेश पर विद्युत एवं चुंबकीय क्षेत्र दोनों के संयुक्त प्रभाव से जो कुल बल कार्य करता है, उसे लॉरेंट्ज़ बल कहते हैं।

यदि कोई आवेश q वेग v से विद्युत क्षेत्र E और चुंबकीय क्षेत्र B में गति कर रहा है, तो उस पर कार्य करने वाला कुल बल:

F = q ( E + v × B )

यह समीकरण दर्शाता है कि:

  • विद्युत क्षेत्र बल गति पर निर्भर नहीं करता
  • चुंबकीय बल केवल तभी कार्य करता है जब आवेश गतिमान हो
  • चुंबकीय बल वेग और क्षेत्र दोनों के लम्बवत होता है

इसी कारण चुंबकीय बल आवेश की गति की दिशा बदल सकता है, लेकिन उसकी चाल (speed) नहीं बदलता।


धारावाही चालक पर चुंबकीय बल
(Magnetic Force on a Current Carrying Conductor)

विद्युत धारा वास्तव में गतिमान आवेशों का प्रवाह है। अतः जब कोई चालक चुंबकीय क्षेत्र में धारा वहन करता है, तो उस पर चुंबकीय बल कार्य करता है।

यदि लंबाई L का चालक धारा I वहन कर रहा है और वह एकसमान चुंबकीय क्षेत्र B में स्थित है, तो उस पर लगने वाला बल:

F = B I L sinθ

यहाँ θ धारा की दिशा एवं चुंबकीय क्षेत्र के बीच का कोण है।

यह सिद्धांत विद्युत मोटर के कार्य का मूल आधार है, जहाँ धारावाही कुंडली पर लगने वाला बल घूर्णन उत्पन्न करता है।


चुंबकीय क्षेत्र में आवेश की गति
(Motion of a Charged Particle in a Magnetic Field)

जब कोई विद्युत आवेश चुंबकीय क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो उस पर लगने वाला चुंबकीय बल उसकी गति की दिशा को प्रभावित करता है। यह प्रभाव आवेश के वेग, चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता तथा दोनों के आपसी अभिविन्यास पर निर्भर करता है।

चुंबकीय क्षेत्र में आवेश की गति का अध्ययन यह स्पष्ट करता है कि चुंबकीय बल ऊर्जा में परिवर्तन न करके केवल गति की दिशा पर प्रभाव डालता है।


चुंबकीय बल की प्रकृति

यदि आवेश q वेग v से एकसमान चुंबकीय क्षेत्र B में गति कर रहा है, तो उस पर लगने वाला चुंबकीय बल:

F = q v B sinθ

यहाँ θ वेग वेक्टर और चुंबकीय क्षेत्र वेक्टर के बीच का कोण है।

  • यदि θ = 0° या 180°, तो बल शून्य होगा
  • यदि θ = 90°, तो बल अधिकतम होगा
  • बल सदैव वेग की दिशा के लम्बवत होता है

इस कारण चुंबकीय बल आवेश की चाल को नहीं बदलता, केवल उसकी दिशा को परिवर्तित करता है।


समकोणीय प्रवेश : वृत्तीय गति

जब कोई आवेश एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में अपने वेग के साथ लम्बवत दिशा में प्रवेश करता है, तो उस पर लगने वाला बल सदैव केंद्र की ओर होता है।

अतः आवेश वृत्तीय पथ में गति करता है। यह स्थिति चुंबकीय क्षेत्र में आवेश की गति का सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण है।

केंद्राभिमुख बल:

F = m v² / r

और चुंबकीय बल:

F = q v B

दोनों को बराबर करने पर:

r = m v / ( q B )

यह समीकरण दर्शाता है कि वृत्तीय पथ की त्रिज्या आवेश के द्रव्यमान, वेग तथा चुंबकीय क्षेत्र पर निर्भर करती है।


आवर्तकाल (Time Period)

वृत्तीय गति का आवर्तकाल:

T = 2πm / ( qB )

ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि आवर्तकाल आवेश के वेग पर निर्भर नहीं करता।

इसी सिद्धांत का उपयोग साइक्लोट्रॉन जैसे यंत्रों में किया जाता है।


तिर्यक प्रवेश : हेलिकल गति

यदि कोई आवेश चुंबकीय क्षेत्र में ऐसे वेग से प्रवेश करता है जिसका एक घटक चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर और दूसरा घटक लम्बवत हो, तो उसकी गति हेलिकल (सर्पिल) हो जाती है।

वेग का:

  • लम्बवत घटक → वृत्तीय गति उत्पन्न करता है
  • समानांतर घटक → समान वेग से सीधी गति देता है

दोनों के संयुक्त प्रभाव से आवेश चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के चारों ओर सर्पिल पथ में गति करता है।

यह गति कॉस्मिक किरणों, प्लाज़्मा भौतिकी और मैग्नेटिक कंफाइनमेंट में अत्यंत महत्वपूर्ण है।


चुंबकीय क्षेत्र में आवेश की गति से जुड़े महत्वपूर्ण निष्कर्ष

  • चुंबकीय बल कार्य नहीं करता
  • गतिज ऊर्जा अपरिवर्तित रहती है
  • गति की दिशा बदलती है, चाल नहीं
  • गति वृत्तीय या हेलिकल हो सकती है

ये निष्कर्ष इस अध्याय के कई आगे आने वाले सिद्धांतों की नींव बनाते हैं, जैसे: धारावाही चालक पर बल, धारा पाश पर आघूर्ण और गैल्वेनोमीटर का कार्य।


धारा अवयव के कारण चुंबकीय क्षेत्र
(Magnetic Field Due to a Current Element)

जब किसी चालक में विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो चालक के चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। इस क्षेत्र की तीव्रता एवं दिशा धारा के परिमाण, धारा अवयव की स्थिति तथा अवलोकन बिंदु से दूरी पर निर्भर करती है।

धारा के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र का सूक्ष्म एवं गणितीय अध्ययन बायोट–सावर्त नियम द्वारा किया जाता है।


बायोट–सावर्त नियम
(Biot–Savart Law)

बायोट–सावर्त नियम के अनुसार, किसी चालक के अत्यल्प धारा अवयव I dℓ के कारण किसी बिंदु पर उत्पन्न अत्यल्प चुंबकीय क्षेत्र dB:

dB ∝ ( I dℓ sinθ ) / r²

जहाँ:

  • I = धारा
  • dℓ = धारा अवयव की लंबाई
  • r = अवलोकन बिंदु की दूरी
  • θ = dℓ और r के बीच का कोण

समप्रमाणता को हटाने पर:

dB = ( μ₀ / 4π ) · ( I dℓ sinθ / r² )

यहाँ μ₀ मुक्त अंतरिक्ष की पारगम्यता है।


दिशा निर्धारण

बायोट–सावर्त नियम से प्राप्त चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दाएँ हाथ के अंगूठा नियम या क्रॉस उत्पाद नियम से निर्धारित की जाती है।

इस नियम के अनुसार, यदि दाएँ हाथ की उँगलियाँ धारा की दिशा में मोड़ी जाएँ, तो फैला हुआ अंगूठा चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दर्शाता है।


सीधे लंबे धारावाही चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्र

एक लंबे सीधे चालक में धारा I प्रवाहित होने पर उसके चारों ओर समानांतर वृत्ताकार चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बनती हैं।

बायोट–सावर्त नियम के समाकलन से:

B = μ₀ I / ( 2π r )

यहाँ r चालक से अवलोकन बिंदु की दूरी है।

यह समीकरण दर्शाता है कि:

  • चुंबकीय क्षेत्र धारा के समानुपाती है
  • दूरी बढ़ने पर क्षेत्र घटता है
  • क्षेत्र चालक के चारों ओर वृत्ताकार होता है

वृत्ताकार धारा पाश के अक्ष पर चुंबकीय क्षेत्र

यदि त्रिज्या R का एक वृत्ताकार चालक धारा I वहन कर रहा है, तो उसके अक्ष पर किसी बिंदु पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र:

B = ( μ₀ I R² ) / ( 2 ( R² + x² )3/2 )

जहाँ x केंद्र से अक्षीय दूरी है।

विशेष स्थिति में, यदि बिंदु केंद्र पर हो (x = 0), तो:

B = μ₀ I / ( 2R )

यह परिणाम धारा पाश को चुंबकीय द्विध्रुव के रूप में समझने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


बायोट–सावर्त नियम की सीमाएँ

  • यह केवल स्थिर धाराओं के लिए मान्य है
  • समाकलन जटिल हो सकता है
  • उच्च सममिति वाली प्रणालियों में अधिक उपयोगी है

इन्हीं सीमाओं के कारण एक अधिक सामान्य नियम की आवश्यकता पड़ी, जिसे आगे ऐम्पियर का परिधीय नियम के रूप में विकसित किया गया।


ऐम्पियर का परिधीय नियम
(Ampere’s Circuital Law)

बायोट–सावर्त नियम चुंबकीय क्षेत्र की गणना के लिए एक मौलिक सिद्धांत प्रदान करता है, परंतु उच्च सममिति वाली प्रणालियों में उसका प्रत्यक्ष उपयोग कठिन हो जाता है।

ऐसी परिस्थितियों में ऐम्पियर का परिधीय नियम चुंबकीय क्षेत्र की गणना को सरल एवं व्यवस्थित बनाता है।


नियम का कथन

ऐम्पियर के परिधीय नियम के अनुसार, किसी बंद पथ (closed loop) के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र B और पथ तत्व dℓ का रेखा समाकलन उस पथ द्वारा घिरी हुई कुल धारा के अनुपाती होता है।

∮ B · dℓ = μ₀ Ienc

जहाँ Ienc उस बंद पथ द्वारा घिरी गई कुल धारा है।

यह नियम चुंबकीय क्षेत्र की स्थिर धाराओं के लिए सार्वत्रिक रूप से मान्य है।


लंबे सीधे धारावाही चालक के लिए ऐम्पियर नियम

एक लंबे सीधे चालक में धारा I प्रवाहित होने पर उसके चारों ओर वृत्ताकार चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ बनती हैं।

यदि चालक के चारों ओर त्रिज्या r का एक वृत्ताकार ऐम्पेरियन पथ लिया जाए, तो चुंबकीय क्षेत्र हर बिंदु पर समान होगा।

ऐम्पियर नियम लगाने पर:

B ( 2πr ) = μ₀ I

अतः:

B = μ₀ I / ( 2πr )

यह परिणाम बायोट–सावर्त नियम से प्राप्त परिणाम के समान है, परंतु यहाँ गणना अधिक सरल है।


परिनालिका (Solenoid)

परिनालिका एक लंबी कुंडली होती है जिसमें सघन रूप से अनेक वृत्ताकार पाश लिपटे होते हैं।

जब परिनालिका में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो उसके अंदर लगभग एकसमान चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है, जबकि बाहर का क्षेत्र अत्यल्प होता है।

यदि परिनालिका में प्रति इकाई लंबाई n कुंडलियाँ हों और धारा I प्रवाहित हो, तो अंदर का चुंबकीय क्षेत्र:

B = μ₀ n I

यह परिणाम इलेक्ट्रोमैग्नेट, रिले और चुंबकीय कुंडलियों के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है।


टोरोइड (Toroid)

टोरोइड एक परिनालिका है जिसे वृत्ताकार रूप में मोड़ दिया गया हो।

टोरोइड में चुंबकीय क्षेत्र केवल उसके अंदर सीमित रहता है और बाहर लगभग शून्य होता है।

यदि टोरोइड में N कुल कुंडलियाँ हों और धारा I प्रवाहित हो, तो त्रिज्या r पर चुंबकीय क्षेत्र:

B = μ₀ N I / ( 2πr )

इस विशेषता के कारण टोरोइड का उपयोग चुंबकीय फ्लक्स को सीमित रखने वाले यंत्रों में किया जाता है।


ऐम्पियर नियम की सीमाएँ

  • केवल स्थिर धाराओं के लिए मान्य
  • सममित प्रणालियों में अधिक उपयोगी
  • परिवर्ती विद्युत क्षेत्रों को नहीं दर्शाता

इन सीमाओं को दूर करने के लिए आगे चलकर मैक्सवेल ने ऐम्पियर नियम में विस्थापन धारा का संशोधन किया, जो विद्युत-चुंबकीय तरंगों की अवधारणा तक ले गया।


दो समांतर विद्युत धाराओं के बीच बल
(Force Between Two Parallel Currents)

जब दो लंबे, सीधे तथा समांतर चालक एक-दूसरे के समीप रखे जाते हैं और दोनों में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो वे एक-दूसरे पर चुंबकीय बल का प्रभाव डालते हैं।

यह प्रभाव विद्युत-चुंबकत्व के सबसे महत्वपूर्ण प्रयोगात्मक निष्कर्षों में से एक है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि विद्युत धाराएँ परस्पर बल उत्पन्न करती हैं।


बल की प्रकृति

यदि दोनों चालकों में धाराएँ I1 और I2 एक ही दिशा में प्रवाहित हो रही हों, तो चालक एक-दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं।

यदि धाराएँ विपरीत दिशाओं में प्रवाहित हों, तो चालक एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।

इस व्यवहार को चुंबकीय क्षेत्र एवं धारावाही चालक पर बल की अवधारणा से समझा जा सकता है।


गणितीय व्युत्पत्ति

मान लें कि दो लंबे समांतर चालक एक-दूसरे से दूरी r पर स्थित हैं और उनमें क्रमशः धाराएँ I1 और I2 प्रवाहित हो रही हैं।

पहले चालक के कारण दूसरे चालक के स्थान पर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र:

B = μ₀ I1 / ( 2πr )

इस क्षेत्र में स्थित दूसरे चालक की लंबाई पर लगने वाला बल:

F = B I2

मान रखने पर:

F = ( μ₀ I1 I2 ℓ ) / ( 2πr )

अतः प्रति इकाई लंबाई पर बल:

F / ℓ = ( μ₀ I1 I2 ) / ( 2πr )


ऐम्पियर की परिभाषा
(Definition of Ampere)

दो समांतर विद्युत धाराओं के बीच लगने वाले बल के आधार पर विद्युत धारा की SI इकाई ऐम्पियर को परिभाषित किया गया है।

परिभाषा:
यदि निर्वात में दो अनंत लंबे, सीधे तथा समांतर चालक एक-दूसरे से 1 मीटर की दूरी पर रखे हों और उनमें समान विद्युत धारा प्रवाहित हो, जिससे उनके बीच प्रति मीटर लंबाई पर 2 × 10−7 न्यूटन का बल उत्पन्न हो, तो उस धारा को 1 ऐम्पियर कहते हैं।

यह परिभाषा विद्युत धारा को यांत्रिक मात्रकों से जोड़ती है और विद्युत-चुंबकीय मात्रक प्रणाली की नींव रखती है।


महत्वपूर्ण निष्कर्ष

  • समांतर धाराएँ एक-दूसरे पर बल लगाती हैं
  • समान दिशा की धाराएँ आकर्षित होती हैं
  • विपरीत दिशा की धाराएँ प्रतिकर्षित होती हैं
  • ऐम्पियर की परिभाषा इसी सिद्धांत पर आधारित है

यह अवधारणा विद्युत मापन प्रणालियों, धारा माप यंत्रों और आधुनिक विद्युत तकनीक का मूल आधार है।


चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही पाश
(Current Loop in a Magnetic Field)

जब किसी चालक को बंद आकृति (पाश) के रूप में मोड़कर उसमें विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है और उसे किसी बाह्य चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो पाश पर बल तथा आघूर्ण का प्रभाव दिखाई देता है।

यह प्रभाव विद्युत मोटर, गैल्वेनोमीटर, एमीटर तथा वोल्टमीटर जैसे उपकरणों के कार्य सिद्धांत का मूल आधार है।


आयताकार धारावाही पाश पर बल

मान लें कि एक आयताकार पाश एकसमान चुंबकीय क्षेत्र B में रखा गया है और उसमें धारा I प्रवाहित हो रही है।

पाश की विपरीत भुजाओं पर लगने वाले बल परिमाण में समान किन्तु दिशा में विपरीत होते हैं, अतः कुल बल शून्य होता है।

हालाँकि, ये बल एक युग्म (couple) बनाते हैं, जो पाश को घुमाने का प्रयास करता है।


धारावाही पाश पर आघूर्ण
(Torque on a Current Loop)

धारावाही पाश पर लगने वाला आघूर्ण निम्न कारकों पर निर्भर करता है:

  • धारा का परिमाण (I)
  • पाश का क्षेत्रफल (A)
  • चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता (B)
  • पाश के अभिलंब और चुंबकीय क्षेत्र के बीच कोण (θ)

आघूर्ण का परिमाण:

τ = N I A B sinθ

जहाँ N = पाश में कुंडलियों की संख्या।

अधिकतम आघूर्ण तब प्राप्त होता है जब θ = 90° हो।


चुंबकीय द्विध्रुव
(Magnetic Dipole)

धारावाही वृत्ताकार या आयताकार पाश चुंबकीय दृष्टि से एक चुंबकीय द्विध्रुव के समान व्यवहार करता है।

इसका चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण:

μ = N I A

यह सदिश राशि है और इसकी दिशा दाहिने हाथ के अंगूठा नियम से निर्धारित की जाती है।


एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में चुंबकीय द्विध्रुव

जब चुंबकीय द्विध्रुव को एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर कोई शुद्ध बल नहीं लगता, परंतु घुमाने वाला आघूर्ण अवश्य कार्य करता है।

यह आघूर्ण द्विध्रुव को चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में संरेखित करने का प्रयास करता है।

यह व्यवहार बार चुंबक के चुंबकीय क्षेत्र में घूमने के समान होता है।


महत्वपूर्ण बिंदु

  • धारावाही पाश पर कुल बल शून्य हो सकता है
  • आघूर्ण पाश को घुमाने का प्रयास करता है
  • धारावाही पाश चुंबकीय द्विध्रुव की तरह व्यवहार करता है
  • यही सिद्धांत विद्युत मोटर का आधार है

इस प्रकार, धारावाही पाश का अध्ययन स्थिर चुंबकत्व और गतिमान आवेशों के बीच गहन संबंध स्थापित करता है।


मूविंग कॉइल गैल्वेनोमीटर
(Moving Coil Galvanometer)

मूविंग कॉइल गैल्वेनोमीटर एक अत्यंत संवेदनशील विद्युत उपकरण है जिसका उपयोग बहुत छोटी विद्युत धाराओं की उपस्थिति, दिशा तथा परिमाण का पता लगाने के लिए किया जाता है।

यह उपकरण धारावाही पाश पर चुंबकीय क्षेत्र में लगने वाले आघूर्ण के सिद्धांत पर आधारित है।


गैल्वेनोमीटर का सिद्धांत

जब किसी कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है और उसे एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो कुंडली पर एक आघूर्ण उत्पन्न होता है, जो उसे घुमाने का प्रयास करता है।

यह आघूर्ण कुंडली में प्रवाहित धारा के अनुपाती होता है, इसी कारण कुंडली का विचलन धारा के परिमाण का मापक बन जाता है।


संरचना
(Construction)

मूविंग कॉइल गैल्वेनोमीटर के मुख्य अवयव निम्नलिखित हैं:

  • कुंडली (Coil): अत्यंत पतले तांबे के तार से बनी आयताकार कुंडली, जिसमें कई कुंडलियाँ होती हैं।
  • चुंबक: एक शक्तिशाली घोड़े की नाल के आकार का स्थायी चुंबक, जो एकसमान रेडियल चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है।
  • कोर: मुलायम लोहे का बेलनाकार कोर, जो चुंबकीय क्षेत्र को एकसमान बनाता है।
  • निलंबन तंतु: कुंडली को ऊपर से पतले फॉस्फर-ब्रॉन्ज तार द्वारा लटकाया जाता है, जो धारा भी प्रवाहित करता है।
  • स्प्रिंग: कुंडली को वापस प्रारंभिक स्थिति में लाने के लिए प्रतिरोधी आघूर्ण प्रदान करता है।
  • दर्पण या सूचक: विचलन को पढ़ने के लिए दर्पण या सूचक का उपयोग किया जाता है।

कार्यविधि
(Working)

जब कुंडली में धारा प्रवाहित होती है, तो चुंबकीय क्षेत्र के कारण कुंडली पर घुमाने वाला आघूर्ण कार्य करता है।

यह आघूर्ण:

τ = N I A B

स्प्रिंग द्वारा उत्पन्न प्रतिरोधी आघूर्ण:

τ = k θ

संतुलन की अवस्था में:

N I A B = k θ

अतः:

θ ∝ I

इस प्रकार, कुंडली का विचलन धारा के सीधे अनुपाती होता है।


संवेदनशीलता
(Sensitivity of Galvanometer)

गैल्वेनोमीटर की संवेदनशीलता से तात्पर्य है — धारा के प्रति उसकी प्रतिक्रिया।

धारा संवेदनशीलता

इसे परिभाषित किया जाता है:

Current Sensitivity = θ / I

संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए:

  • कुंडलियों की संख्या बढ़ाई जाती है
  • कुंडली का क्षेत्रफल बढ़ाया जाता है
  • मजबूत चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग किया जाता है
  • स्प्रिंग का नियतांक कम रखा जाता है

महत्व एवं उपयोग

  • बहुत सूक्ष्म धाराओं का पता लगाने में
  • एमीटर एवं वोल्टमीटर के निर्माण में
  • प्रयोगशालाओं में विद्युत मापन हेतु

इस प्रकार, मूविंग कॉइल गैल्वेनोमीटर गतिमान आवेशों और चुंबकीय क्षेत्र के पारस्परिक प्रभाव का एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रायोगिक अनुप्रयोग है।


बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ)
Moving Charges and Magnetism

  1. किस बल के कारण गतिमान आवेश चुंबकीय क्षेत्र में विचलित होता है?
    उत्तर: लॉरेंज बल
  2. चुंबकीय क्षेत्र में स्थिर आवेश पर लगने वाला बल होता है—
    उत्तर: शून्य
  3. लॉरेंज बल का सूत्र है—
    उत्तर: F = q(v × B)
  4. बायोट–सावार्ट नियम संबंधित है—
    उत्तर: धारावाही चालक द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र
  5. एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में वृत्तीय गति का कारण है—
    उत्तर: अभिकेन्द्रीय बल
  6. चुंबकीय बल सदैव वेग के किस दिशा में होता है?
    उत्तर: लम्बवत
  7. सोलनॉइड के भीतर चुंबकीय क्षेत्र होता है—
    उत्तर: लगभग एकसमान
  8. ऐम्पियर का परिपथीय नियम लागू होता है—
    उत्तर: स्थिर धाराओं पर
  9. दो समांतर धारावाही चालकों में समान दिशा की धाराएँ—
    उत्तर: आकर्षण करती हैं
  10. धारावाही आयताकार पाश एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में कार्य करता है—
    उत्तर: चुंबकीय द्विध्रुव की तरह
  11. चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण का SI मात्रक है—
    उत्तर: A·m²
  12. चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने का नियम है—
    उत्तर: दाहिने हाथ का अंगूठा नियम
  13. गैल्वेनोमीटर का सिद्धांत आधारित है—
    उत्तर: धारावाही कुंडली पर आघूर्ण
  14. गैल्वेनोमीटर की संवेदनशीलता बढ़ाई जा सकती है—
    उत्तर: कुंडलियों की संख्या बढ़ाकर
  15. गैल्वेनोमीटर को एमीटर बनाने हेतु जोड़ा जाता है—
    उत्तर: कम प्रतिरोध शंट
  16. एमीटर का प्रतिरोध होता है—
    उत्तर: अत्यंत कम
  17. वोल्टमीटर का प्रतिरोध होता है—
    उत्तर: अत्यंत अधिक
  18. वृत्तीय गति में कण की चाल—
    उत्तर: स्थिर रहती है
  19. चुंबकीय क्षेत्र की इकाई है—
    उत्तर: टेस्ला
  20. गतिमान आवेश पर चुंबकीय बल अधिकतम होगा जब—
    उत्तर: वेग ⟂ चुंबकीय क्षेत्र
  21. बायोट–सावार्ट नियम में दूरी बढ़ाने पर क्षेत्र—
    उत्तर: घटता है
  22. सोलनॉइड का चुंबकीय क्षेत्र निर्भर करता है—
    उत्तर: धारा एवं कुंडल घनत्व पर
  23. चुंबकीय क्षेत्र में गति कर रहे आवेश की ऊर्जा—
    उत्तर: अपरिवर्तित रहती है
  24. चुंबकीय क्षेत्र कार्य करता है—
    उत्तर: नहीं
  25. मूविंग कॉइल गैल्वेनोमीटर में प्रयुक्त चुंबक होता है—
    उत्तर: स्थायी चुंबक

अति लघु उत्तरीय प्रश्न
(Very Short Answer Questions – Moving Charges and Magnetism)

  1. चुंबकीय क्षेत्र का SI मात्रक क्या है?
    उत्तर: टेस्ला (T)
  2. स्थिर आवेश पर चुंबकीय बल कितना होता है?
    उत्तर: शून्य
  3. लॉरेंज बल किस पर कार्य करता है?
    उत्तर: गतिमान आवेश पर
  4. चुंबकीय बल वेग के किस दिशा में होता है?
    उत्तर: वेग के लम्बवत
  5. बायोट–सावार्ट नियम किससे संबंधित है?
    उत्तर: धारावाही चालक से उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र
  6. चुंबकीय क्षेत्र में वृत्तीय गति का कारण क्या है?
    उत्तर: अभिकेन्द्रीय बल
  7. सोलनॉइड के भीतर क्षेत्र कैसा होता है?
    उत्तर: लगभग एकसमान
  8. ऐम्पियर का परिपथीय नियम किस सिद्धांत पर आधारित है?
    उत्तर: विद्युत धारा संरक्षण
  9. दो समांतर धारावाही चालक समान दिशा में हों तो क्या होगा?
    उत्तर: आकर्षण
  10. चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण का सूत्र क्या है?
    उत्तर: m = I A
  11. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कैसी होती हैं?
    उत्तर: बंद वक्र
  12. चुंबकीय क्षेत्र कार्य क्यों नहीं करता?
    उत्तर: क्योंकि बल वेग के लम्बवत होता है
  13. गैल्वेनोमीटर का उपयोग किस लिए होता है?
    उत्तर: सूक्ष्म धाराओं के मापन हेतु
  14. मूविंग कॉइल गैल्वेनोमीटर में कुंडली किससे बनी होती है?
    उत्तर: तांबे के पतले तार से
  15. गैल्वेनोमीटर का विचलन किसके अनुपाती होता है?
    उत्तर: धारा के
  16. गैल्वेनोमीटर को एमीटर बनाने हेतु क्या जोड़ा जाता है?
    उत्तर: शंट प्रतिरोध
  17. एमीटर का प्रतिरोध कैसा होता है?
    उत्तर: बहुत कम
  18. वोल्टमीटर का प्रतिरोध कैसा होता है?
    उत्तर: बहुत अधिक
  19. चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने का नियम क्या है?
    उत्तर: दाहिने हाथ का अंगूठा नियम
  20. कुंडली पर आघूर्ण किस कारण लगता है?
    उत्तर: चुंबकीय बल के कारण
  21. चुंबकीय द्विध्रुव का उदाहरण क्या है?
    उत्तर: धारावाही पाश
  22. चुंबकीय क्षेत्र में आवेश की चाल बदलती है या नहीं?
    उत्तर: नहीं
  23. बायोट–सावार्ट नियम में दूरी बढ़ने पर क्षेत्र का मान?
    उत्तर: घटता है
  24. सोलनॉइड का क्षेत्र किस पर निर्भर करता है?
    उत्तर: धारा और कुंडल घनत्व
  25. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कहाँ से निकलती हैं?
    उत्तर: उत्तर ध्रुव से
  26. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कहाँ प्रवेश करती हैं?
    उत्तर: दक्षिण ध्रुव में
  27. गतिमान आवेश की ऊर्जा चुंबकीय क्षेत्र में कैसी रहती है?
    उत्तर: अपरिवर्तित
  28. वृत्तीय गति में आवेश का पथ कैसा होता है?
    उत्तर: वृत्ताकार
  29. कुंडली का क्षेत्रफल बढ़ाने से क्या बढ़ेगा?
    उत्तर: संवेदनशीलता
  30. मूविंग कॉइल गैल्वेनोमीटर में चुंबक कैसा होता है?
    उत्तर: स्थायी
  31. गैल्वेनोमीटर में प्रयुक्त कोर किस धातु का होता है?
    उत्तर: मुलायम लोहा
  32. ऐम्पियर किसका SI मात्रक है?
    उत्तर: विद्युत धारा
  33. चुंबकीय क्षेत्र की दिशा किसके लम्बवत होती है?
    उत्तर: विद्युत धारा के
  34. लॉरेंज बल में कौन-कौन से क्षेत्र आते हैं?
    उत्तर: विद्युत एवं चुंबकीय
  35. चुंबकीय क्षेत्र का प्रतीक क्या है?
    उत्तर: B
  36. गैल्वेनोमीटर की संवेदनशीलता बढ़ाने का एक उपाय?
    उत्तर: स्प्रिंग नियतांक घटाना
  37. धारावाही पाश पर अधिकतम आघूर्ण कब लगता है?
    उत्तर: जब पाश क्षेत्र के लम्बवत हो
  38. चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण की दिशा किस ओर होती है?
    उत्तर: दक्षिण से उत्तर
  39. सोलनॉइड के बाहर क्षेत्र कैसा होता है?
    उत्तर: बहुत कमजोर
  40. किस उपकरण से धारा की दिशा ज्ञात होती है?
    उत्तर: गैल्वेनोमीटर
  41. चुंबकीय क्षेत्र में कण की गति कैसी होती है?
    उत्तर: वृत्तीय/हेलिकल
  42. हेलिकल पथ कब बनता है?
    उत्तर: जब वेग का एक घटक समानांतर हो
  43. चुंबकीय क्षेत्र किस प्रकार का क्षेत्र है?
    उत्तर: सदिश क्षेत्र
  44. गैल्वेनोमीटर का विचलन कोण किससे दर्शाया जाता है?
    उत्तर: θ
  45. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को काटती हैं या नहीं?
    उत्तर: नहीं
  46. चुंबकीय क्षेत्र का स्रोत क्या है?
    उत्तर: गतिमान आवेश
  47. चुंबकीय क्षेत्र का अध्ययन किस इकाई में होता है?
    उत्तर: टेस्ला

लघु उत्तरीय प्रश्न
(Short Answer Questions – Moving Charges and Magnetism)

  1. लॉरेंज बल क्या है?
    उत्तर: विद्युत एवं चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान आवेश पर लगने वाला कुल बल लॉरेंज बल कहलाता है।
  2. चुंबकीय क्षेत्र में आवेश की चाल क्यों अपरिवर्तित रहती है?
    उत्तर: क्योंकि चुंबकीय बल वेग के लम्बवत होता है और कार्य नहीं करता।
  3. बायोट–सावार्ट नियम का कथन लिखिए।
    उत्तर: धारावाही चालक के किसी सूक्ष्म तत्व द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र धारा, तत्व की लंबाई तथा दूरी पर निर्भर करता है।
  4. ऐम्पियर का परिपथीय नियम लिखिए।
    उत्तर: किसी बंद पथ के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र का रेखा समाकल उस पथ से गुजरने वाली कुल धारा के समानुपाती होता है।
  5. सोलनॉइड के भीतर चुंबकीय क्षेत्र क्यों एकसमान होता है?
    उत्तर: क्योंकि धाराएँ निकट-निकट स्थित होती हैं और क्षेत्र रेखाएँ समानांतर होती हैं।
  6. दो समांतर धारावाही चालकों के बीच बल का कारण क्या है?
    उत्तर: एक चालक द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र दूसरे चालक की धारा पर बल लगाता है।
  7. चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण क्या है?
    उत्तर: धारा एवं पाश के क्षेत्रफल का गुणनफल चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण कहलाता है।
  8. एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में आयताकार पाश पर आघूर्ण कब शून्य होगा?
    उत्तर: जब पाश का तल चुंबकीय क्षेत्र के लम्बवत हो।
  9. मूविंग कॉइल गैल्वेनोमीटर का सिद्धांत स्पष्ट कीजिए।
    उत्तर: धारावाही कुंडली पर चुंबकीय क्षेत्र में आघूर्ण उत्पन्न होता है, जो धारा के अनुपाती होता है।
  10. गैल्वेनोमीटर की धारा संवेदनशीलता से क्या अभिप्राय है?
    उत्तर: प्रति इकाई धारा पर उत्पन्न विचलन को धारा संवेदनशीलता कहते हैं।
  11. गैल्वेनोमीटर को एमीटर में कैसे बदला जाता है?
    उत्तर: गैल्वेनोमीटर के साथ समानांतर में कम प्रतिरोध (शंट) जोड़कर।
  12. गैल्वेनोमीटर को वोल्टमीटर में कैसे बदला जाता है?
    उत्तर: गैल्वेनोमीटर के साथ श्रेणी में अधिक प्रतिरोध जोड़कर।
  13. चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के दो गुण लिखिए।
    उत्तर: ये बंद वक्र होती हैं तथा कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
  14. वृत्तीय गति में आवेश का पथ वृत्ताकार क्यों होता है?
    उत्तर: क्योंकि चुंबकीय बल अभिकेन्द्रीय बल का कार्य करता है।
  15. हेलिकल पथ कैसे बनता है?
    उत्तर: जब आवेश का वेग चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर एवं लम्बवत दोनों घटक रखता है।
  16. सोलनॉइड को विद्युत चुंबक क्यों कहा जाता है?
    उत्तर: क्योंकि उसमें धारा प्रवाहित करने पर चुंबकीय गुण उत्पन्न होते हैं।
  17. चुंबकीय क्षेत्र का स्रोत क्या है?
    उत्तर: गतिमान विद्युत आवेश।
  18. ऐम्पियर का SI मात्रक कैसे परिभाषित है?
    उत्तर: दो समांतर चालकों के बीच बल के आधार पर।
  19. चुंबकीय क्षेत्र में कण की गतिज ऊर्जा क्यों नहीं बदलती?
    उत्तर: क्योंकि चुंबकीय बल कार्य नहीं करता।
  20. चुंबकीय द्विध्रुव की दिशा कैसे निर्धारित की जाती है?
    उत्तर: दक्षिण ध्रुव से उत्तर ध्रुव की दिशा में।
  21. मूविंग कॉइल गैल्वेनोमीटर में मुलायम लोहे का कोर क्यों प्रयोग किया जाता है?
    उत्तर: चुंबकीय क्षेत्र को एकसमान एवं मजबूत बनाने हेतु।
  22. धारावाही पाश को चुंबकीय द्विध्रुव क्यों कहते हैं?
    उत्तर: क्योंकि उसका व्यवहार दंड चुंबक के समान होता है।
  23. चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का घनत्व किसे दर्शाता है?
    उत्तर: चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता को।
  24. गैल्वेनोमीटर का विचलन कोण किसके समानुपाती होता है?
    उत्तर: प्रवाहित धारा के।
  25. चुंबकीय क्षेत्र का सदिश स्वरूप क्या दर्शाता है?
    उत्तर: दिशा एवं परिमाण दोनों।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
(Long Answer Questions – Moving Charges and Magnetism)

  1. लॉरेंज बल का व्युत्पादन कीजिए एवं इसके भौतिक महत्व को समझाइए।

    उत्तर: जब कोई आवेश q वेग v से विद्युत क्षेत्र E तथा चुंबकीय क्षेत्र B में गति करता है, तो उस पर लगने वाला कुल बल लॉरेंज बल कहलाता है।

    गणितीय रूप में:
    F = q(E + v × B)
    यह बल विद्युत क्षेत्र के कारण आवेश को त्वरित करता है, जबकि चुंबकीय घटक वेग के लम्बवत होने के कारण कण की दिशा बदलता है, चाल नहीं। यह सिद्धांत कण त्वरक, साइक्लोट्रॉन तथा द्रव्यमान स्पेक्ट्रोमीटर का आधार है।
  2. बायोट–सावार्ट नियम का कथन एवं अनुप्रयोग लिखिए।

    उत्तर: बायोट–सावार्ट नियम के अनुसार, धारावाही चालक के किसी सूक्ष्म तत्व dl द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र dB धारा I के समानुपाती, दूरी r के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती तथा sinθ के समानुपाती होता है।

    सूत्र:
    dB = (μ₀ / 4π) · (I dl sinθ / r²)
    इस नियम का उपयोग सीधे चालक, वृत्तीय पाश तथा सोलनॉइड के चुंबकीय क्षेत्र के निर्धारण में किया जाता है।
  3. ऐम्पियर के परिपथीय नियम को समझाइए तथा इसके उपयोग बताइए।

    उत्तर: किसी बंद पथ के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र का रेखा समाकल उस पथ से गुजरने वाली कुल धारा के μ₀ गुना के बराबर होता है।

    सूत्र:
    ∮ B · dl = μ₀ I
    यह नियम अनंत सीधे चालक, सोलनॉइड तथा टॉरॉइड के चुंबकीय क्षेत्र के निर्धारण में अत्यंत उपयोगी है।
  4. धारावाही पाश को चुंबकीय द्विध्रुव सिद्ध कीजिए।

    उत्तर: जब कोई आयताकार या वृत्ताकार पाश एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर आघूर्ण कार्य करता है। यह आघूर्ण:
    τ = mB sinθ
    जहाँ m = IA चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण है। यह समीकरण दंड चुंबक के आघूर्ण के समान है, अतः धारावाही पाश चुंबकीय द्विध्रुव की भाँति व्यवहार करता है।
  5. मूविंग कॉइल गैल्वेनोमीटर की संरचना, सिद्धांत एवं उपयोग लिखिए।

    उत्तर: यह उपकरण धारावाही कुंडली पर चुंबकीय क्षेत्र में उत्पन्न आघूर्ण के सिद्धांत पर आधारित है।

    संतुलन अवस्था में:
    N I A B = kθ
    अतः विचलन θ धारा I के अनुपाती होता है। इसका उपयोग सूक्ष्म धाराओं के मापन, एमीटर एवं वोल्टमीटर के निर्माण में किया जाता है।

SVG आरेख खंड
(Diagrams with Conceptual Analysis)

SVG–1: गतिमान आवेश पर लॉरेंज बल की दिशा
v q B F

यह आरेख दर्शाता है कि चुंबकीय बल वेग एवं क्षेत्र दोनों के लम्बवत होता है।

SVG–2: मूविंग कॉइल गैल्वेनोमीटर
Coil

यह संरचना दिखाती है कि कुंडली चुंबकीय क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से घूम सकती है, जिससे धारा का मापन संभव होता है।


सरकारी / प्रामाणिक संदर्भ
(Official References)

  • NCERT Physics Class XII – Part I
  • RBSE Physics Textbook (Class 12)
  • NCERT Exemplar Problems – Physics
  • Rajeduboard Official Publications

यह सामग्री NCERT एवं RBSE पाठ्यक्रम के पूर्ण अनुपालन में तैयार की गई है ताकि इसे शैक्षणिक एवं पुस्तकालयीय संदर्भ के रूप में उपयोग किया जा सके।

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