जलाते चलो – कक्षा 6 हिन्दी (NCERT)
पाठ: कविता अध्ययन | कक्षा: 6 | विषय: हिन्दी | आधार: NCERT पाठ्यक्रम
1. कविता का परिचय
‘जलाते चलो’ एक प्रेरणादायक कविता है, जो विद्यार्थियों को आशा, परिश्रम और मानवता के मूल्यों से परिचित कराती है। यह कविता यह संदेश देती है कि मनुष्य को जीवन में निरंतर ज्ञान का प्रकाश फैलाते रहना चाहिए और अज्ञान तथा निराशा के अंधकार को दूर करना चाहिए।
कविता में ‘दीप’ और ‘प्रकाश’ का प्रयोग प्रतीकात्मक रूप में किया गया है। यह प्रतीक ज्ञान, सद्भाव और सकारात्मक सोच को दर्शाते हैं। कविता विद्यार्थियों को कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देती है।
2. कवि का परिचय
कवि ने इस कविता के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन का संदेश दिया है। कवि का मानना है कि साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानव को सही दिशा प्रदान करना भी है। इस कविता में शिक्षा, परिश्रम और सेवा को जीवन का आधार बताया गया है।
3. कविता का पाठ
दीप जलाते चलो, अंधकार को दूर भगाते चलो। जीवन में उजियारा लाते चलो, आशा की किरण बिखराते चलो। मुश्किलों से न घबराना, हार नहीं कभी मान जाना। संघर्ष का मार्ग अपनाना, सफलता का दीप जलाना। ज्ञान का प्रकाश फैलाते चलो, अज्ञान के अंधेरे मिटाते चलो। मानवता की सेवा करते चलो, दीप जलाते चलो, जलाते चलो।
4. कविता का भावार्थ
प्रथम पद्यांश
कवि कहता है कि मनुष्य को निरंतर दीप जलाते रहना चाहिए। यहाँ दीप से आशय ज्ञान और आशा से है। व्यक्ति को अज्ञान और निराशा के अंधकार को दूर करके जीवन में उजाला फैलाना चाहिए।
द्वितीय पद्यांश
इस पद्यांश में कवि कठिनाइयों से न डरने की शिक्षा देता है। वह कहता है कि जीवन में संघर्ष आवश्यक है और परिश्रम से ही सफलता का दीप जलता है।
तृतीय पद्यांश
कवि ज्ञान को सबसे बड़ा प्रकाश मानता है। ज्ञान के द्वारा अज्ञान को मिटाया जा सकता है। साथ ही, मानवता की सेवा करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।
5. कविता का मूल भाव
इस कविता का मूल भाव यह है कि मनुष्य को निरंतर अच्छे कार्य करते रहना चाहिए। ज्ञान, आशा और सेवा के माध्यम से समाज को बेहतर बनाया जा सकता है। कठिनाइयों से घबराने के बजाय उनका साहसपूर्वक सामना करना चाहिए।
6. काव्य में प्रयुक्त अलंकार
- रूपक अलंकार: दीप को ज्ञान और आशा का प्रतीक बताया गया है।
- पुनरुक्ति अलंकार: ‘जलाते चलो’ शब्द की पुनरावृत्ति।
- प्रतीकात्मकता: अंधकार = अज्ञान, प्रकाश = ज्ञान।
7. शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| दीप | प्रकाश, ज्ञान |
| अंधकार | अज्ञान |
| संघर्ष | कठिन परिश्रम |
| मानवता | मनुष्यता |
8. कविता का सार
‘जलाते चलो’ कविता हमें यह सिखाती है कि जीवन में ज्ञान और आशा का दीप जलाए रखना चाहिए। कठिनाइयाँ आने पर भी हार नहीं माननी चाहिए। निरंतर प्रयास और मानवता की सेवा से ही जीवन सफल बनता है।
9. शिक्षा / संदेश
- ज्ञान ही अज्ञान को दूर करता है।
- परिश्रम से सफलता मिलती है।
- मानवता की सेवा आवश्यक है।
- सकारात्मक सोच से जीवन उज्ज्वल बनता है।
Disclaimer: यह सामग्री NCERT पाठ्यक्रम के अध्ययन हेतु तैयार की गई है। किसी भी परीक्षा में अंतिम संदर्भ के रूप में NCERT पुस्तक को ही मान्य माना जाए।
जलाते चलो – MCQ ऑनलाइन टेस्ट (कक्षा 6 हिन्दी)
निर्देश: प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्प दिए गए हैं। सही उत्तर चुनिए।
MCQ (प्रश्न 11 से 30)
11. कविता में ‘आशा की किरण’ से क्या तात्पर्य है?
12. कवि किसे निरंतर करते रहने की प्रेरणा देता है?
13. कविता का भाव कौन-सा है?
14. ‘संघर्ष का मार्ग अपनाना’ का सही अर्थ है—
15. कविता में किसका विरोध किया गया है?
16. ‘हार नहीं कभी मान जाना’ पंक्ति किस गुण को दर्शाती है?
17. कविता किस प्रकार के कार्यों की प्रेरणा देती है?
18. ‘ज्ञान का प्रकाश’ किससे जुड़ा है?
19. कविता में बार-बार ‘चलो’ शब्द का प्रयोग क्यों हुआ है?
20. कविता के अनुसार सच्ची सफलता कैसे मिलती है?
21. ‘मानवता की सेवा’ से क्या अभिप्राय है?
22. कविता किस कक्षा के विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त है?
23. कविता का उद्देश्य क्या है?
24. ‘अज्ञान के अंधेरे’ का सही विपरीत है—
25. कविता का संदेश किसके लिए है?
26. ‘दीप जलाना’ किस प्रकार का कार्य है?
27. कविता में किस भाव की प्रधानता है?
28. कवि किसे मिटाने की बात करता है?
29. कविता में दीप जलाने का कार्य कब तक करना चाहिए?
30. ‘जलाते चलो’ कविता हमें क्या बनने की प्रेरणा देती है?


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