| अभ्यास क्षेत्र | अंक |
|---|---|
| 1. गद्य खंड (ससंदर्भ व्याख्या + लघूउत्तरात्मक + निबन्धात्मक) | 34 |
| 2. पद्य खंड (ससंदर्भ व्याख्या + लघूउत्तरात्मक + सारांश) | 26 |
| 3. अपठित गद्यांश (शीर्षक + प्रश्न + सारांश) | 05 |
| 4. व्याकरण एवं रचना (निबन्ध + पत्र + ग्राल्हाइण + इस्तलाह) | 30 |
| 5. अनुवाद (हिन्दी से सिंधी भाषा में) | 05 |
| कुल अंक | 100 |
- यह प्रश्नपत्र पाँच खण्डों में विभाजित है।
- सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न के अंक उसके सामने दर्शाए गए हैं।
- उत्तर सुपाठ्य एवं स्पष्ट लिखें।
- निर्धारित पुस्तक: सिंधी सुरहाणि — माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर
नीचे दिया गया गद्यांश ध्यानपूर्वक पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर दें।
हिकु वखत हो जड्हाँ माणहु पाणि जे किनारे वसंदा हुआ। उन्हन जी जिंदगी सादी हई। उहे खेती करंदा, मछियूँ पड़कंदा, ऐं पाणिजे नियामतन सां खुश रहंदा हुआ। हर रोज सूरज उगंदो ऐं लहंदो हो, पर उन्हन जे दिलन में संतोख हो।
पर जड्हाँ इन्सान लालची थियो, तड्हाँ ओ पाणि जो कद्र वसारियाँइस। धरती जो नुकसान करण लगो। दरखत वढ़ण लगो, नदियूँ गंदियूँ करण लगो। नतीजो इहो निकतो जे पाणि घटण लगो, फसलूँ बरबाद थियूँ लगियूँ।
हिकड़े डींहुँ गाँव जे बुजुर्गन इकट्ठा थी फैसलो कयो — "असाँ जो पाणि बचाइणो आहे, दरखत लगाइणा आहन, धरती जी रखवाली करणी आहे।" उन्हन जे हन फैसले सां गाँव में हरियाली वापस आई। नदी वरी खुशी सां वहण लगी।
| प्र.क्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| प्र. 1 | ससंदर्भ व्याख्या — निम्नलिखित में से दो गद्यांशों की ससंदर्भ व्याख्या कीजिए: (तीन में से दो) | 10 |
| (क) "हर रोज सूरज उगंदो ऐं लहंदो हो, पर उन्हन जे दिलन में संतोख हो।" — (पाठ: कुल्हिनि जी तलाश में) | 5 | |
| (ख) "असाँ जो पाणि बचाइणो आहे, दरखत लगाइणा आहन, धरती जी रखवाली करणी आहे।" — (पाठ: उमर मारुई) | 5 | |
| (ग) "सिन्धु जो विवेकानन्द साधू हीरानन्द — सेवा ऐं ज्ञान जो मेल।" — (पाठ: जीवनी) | 5 | |
| प्र. 2 | लघूउत्तरात्मक प्रश्न — निम्नलिखित पाँच प्रश्नों के उत्तर 15 से 20 शब्दों में दीजिए: (प्रत्येक 2 अंक × 7 प्रश्न) | 14 |
| (क) "उमर मारुई" लोककथा में उमर के चरित्र की विशेषताएँ क्या हैं? | 2 | |
| (ख) "कुल्हिनि जी तलाश में" कहानी का मुख्य संदेश क्या है? | 2 | |
| (ग) साधू हीरानन्द ने समाज-सेवा में क्या योगदान दिया? | 2 | |
| (घ) आज़ादी आंदोलन में सिंधी भेनरुनि का क्या योगदान रहा? | 2 | |
| (ङ) "सिन्धु जो विवेकानन्द" पाठ से आपको क्या प्रेरणा मिलती है? | 2 | |
| (च) "उमर मारुई" लोककथा में प्रकृति का वर्णन किस प्रकार हुआ है? | 2 | |
| (छ) प्रो. राम पंजवाणी की लेखनशैली की कोई दो विशेषताएँ लिखिए। | 2 | |
| प्र. 3 | निबन्धात्मक प्रश्न — निम्नलिखित में से दो प्रश्नों के उत्तर विस्तार से दीजिए: (तीन में से दो) | 10 |
| (क) "कुल्हिनि जी तलाश में" कहानी की कथावस्तु एवं उसका संदेश विस्तार से लिखिए। | 5 | |
| (ख) "उमर मारुई" लोककथा की नायिका उमर के जीवन-संघर्ष का वर्णन कीजिए। | 5 | |
| (ग) साधू हीरानन्द की जीवनी के आधार पर उनके व्यक्तित्व एवं कार्यों की समीक्षा कीजिए। | 5 |
नीचे दी गई कविता ध्यानपूर्वक पढ़ें और प्रश्नों के उत्तर दें।
महिनत कंदड़ मानहु,
मिटी में सोनु लड्डे।
जीत हमेशा उन्हन जी,
जे हिम्मत सां अड्डे।।
हिकु डींहुँ न हारिजे,
मेहनत जो फल मिले।
धरती माँ जे कोखी मां,
सोनो अनाज निकले।।
आलस छड्डि उठु वेला,
सूरज पहरे चढ़े।
काम करण वारे जी,
दुनिया नजर चढ़े।।
— किशनचन्द 'बेवसि' (सिंधी सुरहाणि, कक्षा 9)
| प्र.क्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| प्र. 4 | ससंदर्भ व्याख्या — निम्नलिखित में से दो काव्य-पंक्तियों की ससंदर्भ व्याख्या कीजिए: (तीन में से दो) | 10 |
| (क) "महिनत कंदड़ मानहु, मिटी में सोनु लड्डे।" — (कवि: किशनचन्द 'बेवसि') | 5 | |
| (ख) "वण पोखियूं — ओ इन्सान, धरती जी रखवाली कर।" — (कवि: हुंदराज 'दुखायल') | 5 | |
| (ग) "कौमी निशान असाँ जो गौरव, इन्हेन जो मान रखियाँ।" — (कवि: कमला गोकलाणी) | 5 | |
| प्र. 5 | लघूउत्तरात्मक प्रश्न — निम्नलिखित पाँच प्रश्नों के उत्तर 15 से 20 शब्दों में दीजिए: (प्रत्येक 2×3 = 6 अंक) | 6 |
| (क) "महिनत" कविता में कवि ने मेहनत का क्या महत्व बताया है? | 2 | |
| (ख) "नेत्र दान" कविता में कवि वासदेव 'निर्मल' का मुख्य संदेश क्या है? | 2 | |
| (ग) "वण पोखियूं" कविता में प्रकृति प्रेम किस प्रकार व्यक्त हुआ है? | 2 | |
| प्र. 6 | कविता का सारांश — निम्नलिखित में से किसी एक कविता का सारांश लगभग 100 शब्दों में लिखिए: (दो में से एक) | 10 |
| (क) "महिनत" — किशनचन्द 'बेवसि' | ||
| (ख) "कौमी निशान" — कमला गोकलाणी |
नीचे दिया गया सिंधी गद्यांश ध्यान से पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
पाणी इन्सान जी जिंदगी आहे। पाणी बिना न खेती थी सगड़े, न माणहु जिई सगड़े। दुनिया में घणन जागहन पाणी जी तकलीफ आहे। साईन्सदान चवंदा आहन त अगर असाँ पाणी बचाइणो नाहियाँ पयो, तां ताइंधे ज़माने में वड्डा संकट ओ।
असाँ खां हर रोज पाणी जो वधु उपयोग थियो। नल खुल्हे छडि डिजन, वासण धोअण में वधु पाणी वापरजे। खेती में पण पाणी बचाइण लाइं नवियूँ तरकीबूँ सिखणियूँ आहन। वॄक्ष लगाइण सां वर्षा थिंदी आहे ऐं पाणी बचंदो आहे।
इसलाइं असाँ सभनी जी जिम्मेवारी आहे जे पाणी जो कद्र करियाँ ऐं बचाइयाँ। "पाणी बचायाँ — जिंदगी बचायाँ।"
| प्र.क्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| प्र. 7 | उपर्युक्त गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए: | 5 |
| (क) उपर्युक्त गद्यांश को उचित शीर्षक दीजिए। | 1 | |
| (ख) पाणी बचाइण खां असाँ खां कहिड़ी-कहिड़ी गलतियूँ थिंदियूँ आहन? (गद्यांश के आधार पर दो प्रश्नों के उत्तर) | 2 | |
| (ग) गद्यांश का सारांश अपने शब्दों में लिखिए। | 2 |
| प्र.क्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| प्र. 8 | निबन्ध — निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 150-200 शब्दों में निबन्ध लिखिए: | 6 |
| (क) मेरो देश भारत (मेरा देश भारत) | ||
| (ख) मेहनत जो महत्व (मेहनत का महत्व) | ||
| (ग) पाणी — जिंदगी जो आधार (पानी — जीवन का आधार) | ||
| प्र. 9 | पत्र एवं प्रार्थना पत्र — निम्नलिखित में से किसी एक पर पत्र लिखिए: | 5 |
| (क) अपने मित्र को सिंधी भाषा के महत्व के बारे में पत्र लिखिए। (अनौपचारिक पत्र) | ||
| (ख) विद्यालय के प्रधानाचार्य को पुस्तकालय में सिंधी पुस्तकें मँगवाने हेतु प्रार्थना पत्र लिखिए। | ||
| प्र. 10 | ग्राल्हाइण जा लफ्ज़ — निम्नलिखित के उत्तर दीजिए: (जमान + अदद + ज़िद + जिंस) | 14 |
| (क) जमान (काल) — नीचे दिए गए वाक्यों का काल बदलिए: (हाल, भूत, मुस्तकबिल) (3 अंक) | 3 | |
| (ख) अदद (वचन) — नीचे दिए गए शब्दों का वचन बदलिए: (हिकवचन ↔ गहरवचन) (3 अंक) | 3 | |
| (ग) ज़िद (विलोम) — नीचे दिए गए शब्दों के विलोम लिखिए: (4 अंक) उदा.: चंगो ↔ मंदो, रात ↔ डींहुँ, खुशी ↔ ग़मी, उच्चो ↔ नीवाँ | 4 | |
| (घ) जिंस (लिंग) — नीचे दिए गए शब्दों का लिंग परिवर्तन कीजिए: (4 अंक) उदा.: मुंड ↔ डियाणि, वीर ↔ वीरांगना, माँ ↔ पिताँ, राजा ↔ राणी | 4 | |
| प्र. 11 | इस्तलाह ऐं पहाका (मुहावरे एवं लोकोक्तियाँ) — निम्नलिखित में से किन्हीं पाँच के अर्थ लिखकर वाक्य बनाइए: | 5 |
| (क) हथ हलाइणु (ख) मुँह मिठो करणु (ग) अखियूँ खुल्हियूँ रखणु | ||
| (घ) पाणी जो पाणी थियणु (ङ) दिल जो दिल थियणु (च) खुशी जा गीत ड़िणु |
| प्र.क्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| प्र. 12 | निम्नलिखित हिन्दी वाक्यों का सिंधी भाषा में अनुवाद कीजिए: | 5 |
| (क) हमारा देश भारत महान है। | 1 | |
| (ख) मेहनत करने वाले हमेशा जीतते हैं। | 1 | |
| (ग) पानी बचाना हमारा कर्तव्य है। | 1 | |
| (घ) विद्यार्थी प्रतिदिन विद्यालय जाते हैं। | 1 | |
| (ङ) माँ का प्यार दुनिया में सबसे बड़ा होता है। | 1 |


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