मातृभूमि Notes Class 6 Hindi Malhar Chapter 1 | कक्षा 6 हिन्दी मल्हार अध्याय 1 मातृभूमि नोट्स

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मातृभूमि – NCERT Class 6 Hindi Malhar Chapter 1 Notes | कक्षा 6 हिन्दी मल्हार अध्याय 1 नोट्स | NCERTclasses.com
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HomeClass 6HindiMalharमातृभूमि
पाठ परिचय
कक्षा6
विषयहिन्दी
पुस्तकमल्हार
अध्याय1
पाठमातृभूमि
विधाकविता
कविसोहनलाल द्विवेदी
जन्म-मृत्यु1906–1988
प्रकाशकNCERT
भाषाहिन्दी
उपयोगनोट्स, पुनरावृत्ति, परीक्षा तैयारी

मातृभूमि

NCERT कक्षा 6 हिन्दी · मल्हार · अध्याय 1 · सम्पूर्ण नोट्स (हिन्दी माध्यम) · NCERT Official PDF

अध्याय कवरेज — 100% सम्पूर्ण

मातृभूमि हिन्दी के प्रसिद्ध देशभक्त कवि सोहनलाल द्विवेदी द्वारा रचित एक ओजपूर्ण देशभक्ति कविता है। यह NCERT कक्षा 6 की हिन्दी पाठ्यपुस्तक मल्हार का प्रथम अध्याय है। कविता में भारत की प्राकृतिक सुन्दरता, सांस्कृतिक विरासत, महत्त्वपूर्ण आदर्श व्यक्तित्वों का स्मरण और मातृभूमि के प्रति गहरे प्रेम का वर्णन किया गया है।

परीक्षा हेतु: इस कविता से शब्दार्थ, भावार्थ, प्रश्नोत्तर, अलंकार, काव्य-सौंदर्य और MCQ पूछे जा सकते हैं।

1. कवि परिचय

सोहनलाल द्विवेदी
जन्म: 1906 · मृत्यु: 1988 · देशभक्त कवि
सोहनलाल द्विवेदी हिन्दी के प्रसिद्ध देशभक्त कवि थे। उनका जन्म उस समय हुआ जब भारत अंग्रेज़ी शासन के अधीन था। उन्होंने अपनी कविताओं द्वारा राष्ट्रीय चेतना जगाई और अंग्रेज़ी शासन का विरोध किया। उनकी लेखनी का सबसे प्रिय विषय देशभक्ति था। भारत के गौरव का गान करना उन्हें अत्यन्त प्रिय था।

प्रमुख रचनाएँ

रचनाविशेषता
मातृभूमिभारत की महिमा का गान — कक्षा 6 पाठ्यपुस्तक में संकलित
बढ़े चलो, बढ़े चलोप्रेरणादायक देशभक्ति कविता
कोशिश करने वालों की हार नहीं होतीअत्यन्त लोकप्रिय प्रेरक कविता
भैरवीकाव्य-संग्रह
चेतनाराष्ट्रीय भावना से जुड़ी रचनाएँ

2. मूल कविता

ऊँचा खड़ा हिमालय आकाश चूमता है, नीचे चरण तले झुक, नित सिंधु झूमता है।
गंगा यमुन त्रिवेणी नदियाँ लहर रही हैं, जगमग छटा निराली, पग पग छहर रही हैं।
वह पुण्य-भूमि मेरी, वह स्वर्ण-भूमि मेरी।
वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।
झरने अनेक झरते जिसकी पहाड़ियों में, चिड़ियाँ चहक रही हैं, हो मस्त झाड़ियों में।
अमराइयाँ घनी हैं कोयल पुकारती है, बहती मलय पवन है, तन-मन सँवारती है।
वह धर्मभूमि मेरी, वह कर्मभूमि मेरी।
वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।
जन्मे जहाँ थे रघुपति, जन्मी जहाँ थी सीता, श्रीकृष्ण ने सुनाई, वंशी पुनीत गीता।
गौतम ने जन्म लेकर, जिसका सुयश बढ़ाया, जग को दया सिखाई, जग को दिया दिखाया।
वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी।
वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी।
— सोहनलाल द्विवेदी

3. कठिन शब्दार्थ

शब्द अर्थ
हिमालयभारत की उत्तरी सीमा पर फैली विशाल पर्वत-माला; हिम का घर
चरण तलेपैरों के नीचे; यहाँ — हिमालय के पदतल में
नितनित्य, प्रतिदिन, हमेशा
सिंधुसमुद्र; यहाँ हिन्द महासागर के लिए प्रयुक्त
झूमताआनन्द में डोलना, लहराना
त्रिवेणीतीन नदियों का संगम; गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम
जगमग छटाचमकती हुई अनुपम सुन्दरता
पग पगहर कदम पर, हर स्थान पर
छहर रही हैंफैल रही हैं, बिखर रही हैं, छिटक रही हैं
पुण्य-भूमिपावन और पुण्यकारी भूमि
स्वर्ण-भूमिबहुत मूल्यवान और श्रेष्ठ भूमि
अमराइयाँआम के घने बगीचे
मलय पवनमलय पर्वत से आने वाली सुगन्धित शीतल वायु
सँवारतीनिखारती, सुन्दर बनाती
धर्मभूमिधर्म की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण भूमि
कर्मभूमिमहान कर्मों की भूमि
रघुपतिश्री राम का एक नाम
वंशीबाँसुरी
पुनीतपवित्र, पावन
गीताश्रीमद्भगवद्गीता — पवित्र उपदेश-ग्रन्थ
गौतमगौतम बुद्ध
सुयशअच्छी कीर्ति, उत्तम यश
दयाकरुणा, सहानुभूति
युद्ध-भूमिवीरों की रणभूमि
बुद्ध-भूमिबुद्ध की करुणा और ज्ञान से गौरवान्वित भूमि
विशेष ध्यान दें: यमुन शब्द यहाँ यमुना नदी के लिए आया है। कवि ने कविता की लय बनाए रखने के लिए यमुना को संक्षेप में यमुन लिखा है। कविता में ऐसे शब्द-परिवर्तन को काव्य-छूट कहते हैं।

4. पद्यांश-वार भावार्थ

परीक्षा टिप: भावार्थ लिखते समय पहले पंक्तियाँ लिखें, फिर सरल भाषा में उनका अर्थ स्पष्ट करें।

पद्यांश 1 — हिमालय और सिंधु

ऊँचा खड़ा हिमालय आकाश चूमता है,
नीचे चरण तले झुक, नित सिंधु झूमता है।
भावार्थ
कवि कहते हैं कि हमारी मातृभूमि भारत अत्यन्त महान है। उत्तर दिशा में ऊँचा हिमालय मानो आकाश को छू रहा है और उसके चरणों के पास समुद्र आदरपूर्वक झूमता हुआ दिखाई देता है। यह चित्र भारत की भव्यता, गरिमा और प्राकृतिक महिमा का प्रतीक है।

पद्यांश 2 — गंगा-यमुना त्रिवेणी

गंगा यमुन त्रिवेणी नदियाँ लहर रही हैं,
जगमग छटा निराली, पग पग छहर रही हैं।
भावार्थ
भारत की पवित्र नदियाँ गंगा, यमुना और त्रिवेणी उमंग के साथ बह रही हैं। उनकी निराली और चमकती हुई सुन्दरता देश के प्रत्येक स्थान पर बिखरी हुई प्रतीत होती है। कवि भारत की पवित्रता और प्राकृतिक सौन्दर्य को उभारते हैं।

टेक (Refrain) 1

वह पुण्य-भूमि मेरी, वह स्वर्ण-भूमि मेरी।
वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।
भावार्थ
कवि अपनी धरती को पुण्यकारी, अत्यन्त मूल्यवान, जन्म देने वाली और माँ के समान मानते हैं। यहाँ मातृभूमि के प्रति श्रद्धा, प्रेम और आत्मीयता का अत्यन्त प्रभावशाली भाव प्रकट हुआ है।

पद्यांश 3 — प्राकृतिक सुन्दरता

झरने अनेक झरते जिसकी पहाड़ियों में,
चिड़ियाँ चहक रही हैं, हो मस्त झाड़ियों में।
भावार्थ
भारत की पहाड़ियों में अनेक झरने बहते हैं और झाड़ियों में पक्षी आनन्दपूर्वक चहकते रहते हैं। कवि यहाँ देश की हरियाली, जीवन्तता और प्रकृति-सम्पन्नता का वर्णन करते हैं।

पद्यांश 4 — अमराइयाँ और मलय पवन

अमराइयाँ घनी हैं कोयल पुकारती है,
बहती मलय पवन है, तन-मन सँवारती है।
भावार्थ
भारत में घने आम्र-वृक्षों के बाग हैं जहाँ कोयल मधुर स्वर में गाती है। सुगन्धित और शीतल मलय पवन शरीर और मन को प्रसन्न तथा ताज़गीपूर्ण बना देती है। यह भारत की सजीव और रमणीय प्रकृति का चित्र है।

पद्यांश 5 — आदर्श व्यक्तित्वों की भूमि

जन्मे जहाँ थे रघुपति, जन्मी जहाँ थी सीता,
श्रीकृष्ण ने सुनाई, वंशी पुनीत गीता।
भावार्थ
यह वही धरती है जहाँ श्री राम और सीता का स्मरण होता है तथा जहाँ श्रीकृष्ण की पवित्र वंशी और गीता का अमर संदेश गूँजता है। कवि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महानता को रेखांकित करते हैं।

पद्यांश 6 — गौतम बुद्ध

गौतम ने जन्म लेकर, जिसका सुयश बढ़ाया,
जग को दया सिखाई, जग को दिया दिखाया।
भावार्थ
कवि कहते हैं कि गौतम बुद्ध ने इस पुण्यभूमि का गौरव बढ़ाया। उन्होंने संसार को दया, करुणा और ज्ञान का संदेश दिया। यहाँ भारत को बुद्ध की करुणा और प्रकाशमय विचारधारा से गौरवान्वित भूमि के रूप में चित्रित किया गया है।

अन्तिम टेक — युद्ध-भूमि और बुद्ध-भूमि

वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी।
वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी।
भावार्थ
भारत वीरता की भूमि भी है और शान्ति-करुणा की भूमि भी। यहाँ शौर्य और अध्यात्म, दोनों का संगम दिखाई देता है। यही इस कविता का सार है।

5. कविता का सारांश

मातृभूमि कविता में कवि सोहनलाल द्विवेदी ने भारत की महिमा का बहुआयामी गान किया है। कविता के मुख्य भाव निम्नलिखित हैं:

क्रमभावसंबंधित भाग
1. प्राकृतिक सौन्दर्य — हिमालय, नदियाँ, झरने, वन, पक्षी, मलय पवन प्रारम्भिक पद्यांश
2. सांस्कृतिक-आध्यात्मिक गौरव — राम, सीता, कृष्ण, गीता, बुद्ध अन्तिम पद्यांश
3. देशभक्ति की भावना — पुण्य-भूमि, स्वर्ण-भूमि, मातृभूमि टेक पंक्तियाँ

कवि ने भारत को ऐसी भूमि के रूप में प्रस्तुत किया है जो प्राकृतिक सुषमा से भरपूर है, सांस्कृतिक दृष्टि से महान है और मातृभूमि के रूप में हृदय में गहरी श्रद्धा जगाती है।

6. काव्य-सौन्दर्य एवं भाषा-शैली

छन्द
गेय छन्द
भाषा
सरल, प्रवाहमय खड़ी बोली हिन्दी
टेक
मुख्य पंक्तियों की पुनरावृत्ति
रस
वीर रस, शान्त रस, प्रकृति-वर्णन का माधुर्य
अलंकार
अनुप्रास, मानवीकरण, पुनरावृत्ति
विषय
मातृभूमि का गौरव

प्रमुख अलंकार

अलंकारपंक्तिस्पष्टीकरण
मानवीकरणआकाश चूमता है / सिंधु झूमता हैनिर्जीव या प्रकृति तत्वों को मानवीय क्रिया दी गई है
अनुप्रासपग पग / जगमगध्वनि-सौन्दर्य बढ़ता है
पुनरावृत्तिवह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरीभाव को गहरा करने हेतु

7. पाठ के प्रश्नोत्तर

(क) मेरी समझ से

प्र. 1 — हिन्द महासागर के लिए कविता में कौन-सा शब्द आया है?
उत्तर: सिंधु
कविता में "नित सिंधु झूमता है" पंक्ति में सिंधु शब्द समुद्र के लिए प्रयुक्त हुआ है।
प्र. 2 — मातृभूमि कविता में मुख्य रूप से क्या किया गया है?
उत्तर: भारत की प्रशंसा की गई है।
कविता में भारत की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महिमा का वर्णन किया गया है।

(ख) सोच-विचार के लिए

प्र. 3 — कोयल कहाँ रहती है?
कोयल अमराइयों में रहती है।
प्र. 4 — तन-मन कौन सँवारती है?
मलय पवन तन-मन सँवारती है।
प्र. 5 — झरने कहाँ से झरते हैं?
झरने पहाड़ियों से झरते हैं।
प्र. 6 — श्रीकृष्ण ने क्या सुनाया था?
श्रीकृष्ण से जुड़ी पंक्ति में वंशी और पुनीत गीता का उल्लेख है।
प्र. 7 — गौतम ने किसका यश बढ़ाया?
गौतम ने इस पुण्यभूमि का सुयश बढ़ाया।
प्र. 8 — "दया" और "दिया" में क्या अन्तर है?
दया = करुणा, सहानुभूति
दिया = दीपक, प्रकाश का स्रोत
दोनों शब्दों में ध्वनि-समानता है लेकिन अर्थ भिन्न हैं।

(ग) मिलकर करें मिलान — उत्तर

शब्द
1. हिमालय
2. त्रिवेणी
3. मलय पवन
4. सिंधु
5. गंगा-यमुना
6. रघुपति
7. श्रीकृष्ण
8. सीता
9. गीता
10. गौतम बुद्ध
अर्थ / संदर्भ
10. भारत की उत्तरी सीमा पर फैली पर्वत-माला
4. तीन नदियों का संगम
6. मलय पर्वत से आने वाली सुगन्धित वायु
8. समुद्र
3. भारत की प्रसिद्ध नदियाँ
5. श्री राम
2. वंशी और गीता से जुड़े श्रीकृष्ण
9. जनक की पुत्री जानकी
7. पवित्र ग्रन्थ
1. करुणा और ज्ञान के संदेशदाता
स्तम्भ मिलान उत्तर: 1-10 · 2-4 · 3-6 · 4-8 · 5-3 · 6-5 · 7-2 · 8-9 · 9-7 · 10-1

(घ) पंक्तियों का अर्थ — "वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी"

इन पंक्तियों का अर्थ स्पष्ट करिए।
भारत ऐसी भूमि है जहाँ वीरता और शान्ति दोनों के आदर्श मिलते हैं। एक ओर यहाँ युद्ध और शौर्य की परम्परा है, दूसरी ओर बुद्ध की करुणा, दया और ज्ञान का संदेश भी है। इस प्रकार भारत शक्ति और शान्ति का संगम है।

(च) शब्दों के जोड़े — अर्थ

शब्द-जोड़ाअर्थ
घर-घरहर घर में
बाल-बालबहुत थोड़े अन्तर से बचना
साँस-साँसहर साँस में
देश-देशहर देश में
पर्वत-पर्वतहर पर्वत पर

(छ) भूमि शब्द से बने नए शब्द

नया शब्दअर्थ
तपोभूमितपस्या की भूमि
देवभूमिदेवताओं की भूमि
भारतभूमिभारत की धरती
कर्मभूमिकर्म करने की भूमि
रणभूमियुद्ध की भूमि
सिद्धभूमिसिद्धि प्राप्त करने की भूमि

8. MCQ — परीक्षा उपयोगी प्रश्न

1. 'मातृभूमि' कविता के कवि कौन हैं?
विकल्प देखें व उत्तर जाँचें
माखनलाल चतुर्वेदी
सोहनलाल द्विवेदी
सुमित्रानन्दन पन्त
रामधारी सिंह दिनकर
सही उत्तर: (ब) सोहनलाल द्विवेदी
2. 'मलय पवन' कहाँ से चलती है?
विकल्प देखें व उत्तर जाँचें
हिमालय से
विन्ध्याचल से
मलय पर्वत से
अरावली से
सही उत्तर: (स) मलय पर्वत से
3. "जग को दया सिखाई, जग को दिया दिखाया" — यह किसके बारे में कहा गया है?
विकल्प देखें व उत्तर जाँचें
श्रीकृष्ण
श्री राम
गौतम बुद्ध
महावीर
सही उत्तर: (स) गौतम बुद्ध
4. 'त्रिवेणी' किसके लिए आया है?
विकल्प देखें व उत्तर जाँचें
तीन पर्वतों का संगम
तीन नदियों का संगम
तीन धर्मों का मेल
तीन महापुरुष
सही उत्तर: (ब) तीन नदियों का संगम
5. "पग पग छहर रही हैं" में 'छहर' का अर्थ क्या है?
विकल्प देखें व उत्तर जाँचें
गहराना
तेज़ बहना
फैलना, बिखरना
शान्त होना
सही उत्तर: (स) फैलना, बिखरना
6. यह कविता किस पुस्तक में है?
विकल्प देखें व उत्तर जाँचें
वसन्त
मल्हार
दूर्वा
रिमझिम
सही उत्तर: (ब) मल्हार
7. 'रघुपति' किसका नाम है?
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श्रीकृष्ण
श्री राम
गौतम बुद्ध
महावीर
सही उत्तर: (ब) श्री राम
8. 'वंशी' किसे कहते हैं?
विकल्प देखें व उत्तर जाँचें
तबला
शहनाई
बाँसुरी
सितार
सही उत्तर: (स) बाँसुरी

9. पढ़ने के लिए — पुष्प की अभिलाषा

कवि — माखनलाल चतुर्वेदी

चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ, चाह नहीं, प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ, चाह नहीं, सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊँ, चाह नहीं, देवों के सिर पर चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ,
मुझे तोड़ देना वनमाली! उस पथ में देना तुम फेंक। मातृभूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पथ जावें वीर अनेक।
— माखनलाल चतुर्वेदी

सारांश एवं तुलना

बिन्दुमातृभूमिपुष्प की अभिलाषा
कविसोहनलाल द्विवेदीमाखनलाल चतुर्वेदी
मुख्य भावभारत की महिमादेश के लिए बलिदान
समानतादोनों में मातृभूमि के प्रति प्रेम और समर्पण है
भिन्नताप्रकृति और सांस्कृतिक गौरवत्याग और बलिदान की भावना

10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

'मातृभूमि' किस कक्षा और पुस्तक में है? +
यह NCERT कक्षा 6 हिन्दी पाठ्यपुस्तक मल्हार का अध्याय 1 है।
सोहनलाल द्विवेदी कौन थे? +
वे हिन्दी के प्रसिद्ध देशभक्त कवि थे। उनका जन्म 1906 में और निधन 1988 में हुआ।
कविता में 'सिंधु' किसके लिए आया है? +
समुद्र के लिए, विशेष रूप से हिन्द महासागर के अर्थ में।
'यमुन' शब्द का क्या अर्थ है? +
'यमुन' का अर्थ यमुना है। यह काव्य-छूट का उदाहरण है।
कविता में किन-किन महान व्यक्तित्वों का उल्लेख है? +
श्री राम, सीता, श्रीकृष्ण और गौतम बुद्ध का उल्लेख मिलता है।
'भूमि' शब्द के कितने प्रमुख रूप आए हैं? +
8 प्रमुख रूप — पुण्य-भूमि, स्वर्ण-भूमि, जन्मभूमि, मातृभूमि, धर्मभूमि, कर्मभूमि, युद्ध-भूमि और बुद्ध-भूमि।

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अस्वीकरण: यह नोट्स केवल शैक्षिक उद्देश्य के लिए तैयार किए गए हैं। सामग्री NCERT पाठ्यपुस्तक पर आधारित व्याख्यात्मक अध्ययन-सामग्री है। मूल पाठ का अध्ययन अवश्य करें। स्रोत: NCERT Official PDF | ncert.nic.in

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