| कक्षा | 6 |
| पुस्तक | मल्हार |
| अध्याय | 9 |
| पाठ | मैया मैं नहिं माखन खायो |
| विधा | पद (Devotional Verse) |
| कवि | सूरदास |
| जन्म | 15वीं शताब्दी |
| मृत्यु | 16वीं शताब्दी |
| भाषा | ब्रजभाषा |
| रस | वात्सल्य रस |
| स्रोत | सूरसागर |
| विषय | कृष्ण-यशोदा संवाद |
| NCERT PDF | fhml109.pdf |
मैया मैं नहिं माखन खायो
NCERT कक्षा 6 हिन्दी · मल्हार · अध्याय 9 · सम्पूर्ण नोट्स · सूरदास · ब्रजभाषा पद
- 1. कवि से परिचय — सूरदास
- 2. मूल पद (NCERT)
- 3. कठिन शब्दार्थ
- 4. पंक्ति-वार भावार्थ
- 5. पद का सारांश
- 6. मेरी समझ से (NCERT MCQ)
- 7. मिलकर करें मिलान (8 items)
- 8. पंक्तियों पर चर्चा
- 9. सोच-विचार के लिए
- 10. कविता की रचना — तुक
- 11. अनुमान या कल्पना से
- 12. शब्दों के रूप
- 13. वर्ण-परिवर्तन
- 14. पंक्ति से पंक्ति (6 items)
- 15. आपकी बात
- 16. घर की वस्तुएँ — छीका
- 17. समय का माप
- 18. हम सब विशेष हैं
- 19. आज की पहेली
- 20. खोजबीन के लिए
- 21. MCQ (8 प्रश्न)
- 22. FAQ
मैया मैं नहिं माखन खायो NCERT कक्षा 6 हिन्दी मल्हार का नौवाँ अध्याय है। यह सूरदास (15वीं–16वीं शताब्दी) का प्रसिद्ध पद है जो सूरसागर से लिया गया है। ब्रजभाषा में रचित इस पद में बालकृष्ण चार चतुर तर्क देकर माखन चुराने से इनकार करते हैं। अंत में माँ यशोदा मुस्कुराकर कृष्ण को हृदय से लगा लेती हैं — यही वात्सल्य रस की पराकाष्ठा है।
1. कवि से परिचय — सूरदास
2. मूल पद — जैसा NCERT में है
मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो। ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो॥
तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो। जिय तेरे कछु भेद उपजि हैं, जानि परायो जायो॥
ये ले अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो। सूरदास तब बिहसिँ जसोदा, लै उर कंठ लगायो॥
3. कठिन शब्दार्थ — ब्रजभाषा → हिन्दी
| ब्रज शब्द | खड़ी बोली | विस्तृत अर्थ |
|---|---|---|
| मैया | माँ | माता के लिए प्यार का संबोधन |
| नहिं / नहि | नहीं | इनकार; 'नहिं' = ब्रज, 'नहीं' = खड़ी बोली |
| माखन | मक्खन | दूध-दही मथने से निकला मक्खन (Butter) |
| भोर भयो | सुबह हुई | प्रातःकाल हुआ, सवेरा हुआ |
| गैयन के पाछे | गायों के पीछे | गाएँ चराने साथ |
| मधुबन / मधबन | मधुबन | मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन |
| मोहि पठायो | मुझे भेजा | मुझे भेज दिया गया |
| पहर | पहर | समय की इकाई — एक पहर = 3 घंटे। एक दिन = 8 पहर |
| बंसीवट | बंसीवट | एक वट वृक्ष — कृष्ण इसी पर चढ़कर बाँसुरी से गायों को बुलाते थे |
| भटक्यो | भटका | इधर-उधर घूमा, भ्रमण किया |
| साँझ परे | शाम होने पर | संध्याकाल में, शाम को |
| बहियन | बाँहों से | भुजाएँ, हाथ-बाँह |
| छोटो | छोटा | ब्रज में 'ओ' प्रत्यय — 'छोटा' का रूप |
| छीको / छीके | छींका | गोल पात्र के आकार का रस्सियों का जाल जो छत से लटकाया जाता है ताकि दूध-दही को जानवर न पा सकें |
| केहि बिधि | किस प्रकार | कैसे, किस तरह |
| पायो | पाया | प्राप्त किया, पहुँचा |
| ग्वाल-बाल | ग्वाल-बाल | गाय पालने वालों के बच्चे, श्रीकृष्ण के संगी साथी |
| बैर परे | शत्रु बने हैं | ईर्ष्या करते हैं, दुश्मन बन गए हैं |
| बरबस | जबरदस्ती | हठपूर्वक, बिना कारण |
| मुख लपटायो | मुँह पर लगाया | मला, लगाया, पोता (झूठा फँसाने के लिए) |
| भोरी | भोली | सरल मन की; 'ल'→'र' वर्ण-परिवर्तन — 'भोली'→'भोरी' |
| पतियायो | विश्वास किया | सच मान लिया, भरोसा कर लिया |
| जिय | मन में | हृदय में, जी में |
| कछु भेद उपजि | कुछ शंका उत्पन्न हुई | संदेह पैदा हुआ, भेद-भाव जागा |
| परायो / परायो जायो | पराया | अपना न समझना; 'पराया' का ब्रज रूप |
| लकुटि कमरिया | लाठी और कंबल | लाठी और छोटा कंबल (कमली) — मान्यता है कृष्ण इन्हें लेकर गाय चराने जाते थे |
| बहुतहिं नाच नचायो | बहुत नचाया | बहुत परेशान किया, ताने मारे |
| तब बिहसिँ | तब मुस्कुराईं | उस समय हँसीं — 'बिहसि' = मुसकाई, हँसी |
| जसोदा | यशोदा | श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था |
| लै उर कंठ लगायो | हृदय से लगाया | गले लगाया, छाती से भींच लिया |
4. पंक्ति-वार भावार्थ
मुख्य पंक्ति (टेक)
तर्क 1 — मैं मधुबन में था
चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥
तर्क 2 — हाथ छोटे हैं, ग्वालों ने लगाया
ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो॥
तर्क 3 — माँ भोली है, मुझे पराया मानती है
जिय तेरे कछु भेद उपजि हैं, जानि परायो जायो॥
अंत — लाठी-कंबल लो, और यशोदा का प्यार
सूरदास तब बिहसिँ जसोदा, लै उर कंठ लगायो॥
सूरदास: यह सब सुनकर यशोदा उस समय मुस्कुराईं और कृष्ण को हृदय से गले लगा लिया। — यही वात्सल्य रस की पराकाष्ठा है।
5. पद का सारांश
इस पद में बालकृष्ण माँ यशोदा को चार तर्क देकर माखन चुराने से इनकार करते हैं — (1) मैं सुबह से शाम मधुबन में था, (2) मेरे हाथ छोटे हैं, छींके तक नहीं पहुँच सकता, (3) ग्वाल-बालों ने झूठा फँसाया, (4) माँ भोली है, दूसरों की सुनती है। अंत में नाराजगी दिखाकर लाठी-कंबल वापस करने की बात करते हैं। यशोदा जी बच्चे की मासूम बातों पर मुस्कुराकर उन्हें गले लगा लेती हैं।
6. मेरी समझ से (NCERT)
स्पष्टीकरण: "मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।" — मैं छोटा बच्चा हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं ऊपर टँगे छींके तक कैसे पहुँचूँ? यही कृष्ण का मुख्य तर्क है।
स्पष्टीकरण: यद्यपि कृष्ण इनकार कर रहे हैं, किंतु पद में कहा है "बरबस मुख लपटायो" — मुँह पर माखन लगा था, जो इस बात का प्रमाण है कि वे माखन खा रहे थे।
7. मिलकर करें मिलान — सही उत्तर (NCERT p.97)
8. पंक्तियों पर चर्चा (NCERT)
भाव: कृष्ण का तर्क है कि वे घर पर थे ही नहीं। सुबह से ही बाहर थे। 'मोहि' = मुझे; 'पठायो' = भेजा। मधुबन = मथुरा के पास यमुना किनारे का वन जहाँ कृष्ण गाएँ चराते थे।
गहरा भाव: 'तब' = उस समय (सब सुनकर); 'बिहसिँ' = मुस्कुराईं। यशोदा जानती थीं सच क्या है — फिर भी माँ का वात्सल्य जीत गया। यह पद का भावनात्मक चरमोत्कर्ष है।
9. सोच-विचार के लिए (NCERT)
2. छोटे बच्चे: मैं बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, छींके तक नहीं पहुँच सकता।
3. निर्दोष: ग्वाल-बालों ने जबरदस्ती मुँह पर माखन लगाया।
4. भावनात्मक: माँ मुझे पराया समझ रही है; मुझे घर छोड़ना होगा।
5. लाठी-कंबल: गाय चराने के लिए लाठी और कंबल लेकर जाता था।
1. यशोदा जानती थीं कृष्ण ने माखन खाया — पर बच्चे की मासूम और चतुर बातें सुनकर क्रोध नहीं आया।
2. वात्सल्य रस: माँ का प्रेम तर्क नहीं देखता — बस बच्चे की मासूमियत देखता है।
3. 'तब बिहसिँ' = तब भी मुस्कुराईं — यानी सब जानते हुए भी गले लगाया।
4. संदेश: माँ का प्रेम अजेय है — बच्चे की हर शरारत उसे और प्यारी लगती है।
10. कविता की रचना — तुक (NCERT)
इस पूरे पद में प्रत्येक पंक्ति के अंतिम शब्द का तुक मिलता है:
खायो — पठायो — आयो — पायो — लपटायो — पतियायो — जायो — नचायो — लगायो
सभी अंत में 'यो' आता है। यह तुकबंदी पद को गेय (संगीतमय) बनाती है।
1. अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम 'सूरदास' दिया है — यह भक्त कवियों की परंपरा है।
2. प्रत्येक जोड़ी पंक्तियों के बाद दोहरे दंड (॥) से समाप्ति।
3. ब्रजभाषा की मधुरता।
4. टेक पंक्ति — "मैया मैं नहिं माखन खायो" — पद की मूल भावना।
11. अनुमान या कल्पना से (NCERT)
2. माँ को पता चल गया था — कृष्ण डर गए।
3. सजा या डाँट से बचने के लिए तर्क देना जरूरी था।
4. बाल-चातुरी: कृष्ण स्वभाव से चतुर थे — बहाने बनाना उनका खेल था।
5. शायद माँ का ध्यान भटकाना चाहते थे।
2. यशोदा ने माखन का एक और पात्र दिया होगा।
3. कृष्ण की आँखें भर आई होंगी — माँ का प्यार महसूस हुआ।
4. घर में खुशी का माहौल बना होगा — ग्वाल-बाल भी हँस रहे होंगे।
5. बंसी की मधुर ध्वनि गूँज उठी होगी।
12. शब्दों के रूप (NCERT)
(क) ब्रजभाषा → खड़ी बोली
| ब्रज शब्द (पद से) | खड़ी बोली रूप | अर्थ |
|---|---|---|
| परे | पड़े / होने पर | साँझ परे = साँझ होने पर |
| छोटो | छोटा | 'ओ' → 'आ' परिवर्तन |
| बिधि | विधि / तरीका | 'ब' → 'व' परिवर्तन |
| भोरी | भोली | वर्ण-परिवर्तन: 'ल' → 'र' |
| कछु | कुछ | स्वर परिवर्तन |
| लै | ले (लेकर) | क्रिया का संक्षिप्त रूप |
| नहिं | नहीं | 'ं' → 'ीं' परिवर्तन |
(ख) शब्दों का अर्थ मिलान (NCERT p.99)
13. वर्ण-परिवर्तन (NCERT)
| ब्रज रूप (पद में) | मूल खड़ी बोली | वर्ण-परिवर्तन |
|---|---|---|
| भोरी | भोली | 'ल' → 'र' |
| परे (पड़े) | पड़े | 'ड़' → 'र' |
| बिहसिँ (बिहँसि) | विहँसी / हँसी | 'ल' अनुपस्थित + 'ब'→'व' |
| पाछे | पीछे | 'छ' का अपरिवर्तित रूप, स्वर परिवर्तन |
14. पंक्ति से पंक्ति — भावार्थ मिलान (NCERT p.100)
15. पाठ से आगे — आपकी बात
Sample उत्तर: एक बार कक्षा में खिड़की का काँच टूटा। सबने मुझ पर आरोप लगाया। मैंने सिद्ध किया — मैं उस समय कक्षा में था ही नहीं, मैदान में था। मेरे मित्र गवाह थे। शिक्षक ने मान लिया।
16. घर की वस्तुएँ — छीका और अन्य
| पारंपरिक वस्तु | आधुनिक नाम | उपयोग |
|---|---|---|
| छींका | हैंगिंग बास्केट / रस्सी जाल | दूध-दही को ऊँचाई पर रखना ताकि जानवर न पहुँचें |
| मटका / घड़ा | मिट्टी का बर्तन | पानी ठंडा रखना, दही जमाना |
| सिलबट्टा | ग्राइंडर | मसाला पीसना |
| चौकी (पाट) | छोटा लकड़ी का तख्ता | बैठना, पूजा में उपयोग |
| लोहे की सिलाई मशीन | सिलाई मशीन | कपड़े सिलना |
| खाट (चारपाई) | पारंपरिक बिस्तर | सोना, आराम करना |
| कनस्तर | टिन का डिब्बा | अनाज, मसाले रखना |
| छाज (सूप) | बाँस की टोकरी | अनाज छानना |
17. समय का माप (NCERT)
अन्य उदाहरण: भोर, सवेरा, प्रभात, दोपहर, अपराह्न, साँझ, संध्या, रात्रि, मध्यरात्रि, क्षण, पल, घड़ी, दिन, सप्ताह, माह, वर्ष, युग, सदी, शताब्दी
NCERT से: "एक पहर = तीन घंटे" और "एक दिवस में आठ पहर होते हैं।"
कृष्ण ने चार पहर गाय चराई = 12 घंटे — सुबह से शाम तक।
गणना: 4 पहर × 3 घंटे = 12 घंटे। 6 PM − 12 hours = 6 AM (सुबह 6 बजे) घर से निकले।
व्याख्या:
दोपहर = दूसरे पहर की समाप्ति = 12 बजे
तो: दूसरा पहर = 9 AM − 12 PM
पहला पहर = 6 AM − 9 AM
पहले पहर का प्रारंभ = सुबह 6 बजे
18. हम सब विशेष हैं (NCERT)
आँखें न होने के बावजूद सूरदास ने कृष्ण की बाल-लीलाओं का इतना सजीव और सुंदर चित्रण किया जो आज भी अनुपम है। यह उनकी भक्ति और कल्पना शक्ति का प्रमाण है।
19. आज की पहेली — दूध से बनने वाली वस्तुएँ (NCERT)
| दूध से बनने वाली वस्तुएँ | कैसे बनती है |
|---|---|
| खोया (मावा) | दूध को तेज आँच पर लगातार उबालने से |
| दही | दूध में जामन (कल्चर) मिलाकर |
| मक्खन | दही को मथने से |
| लस्सी | दही को पानी में फेंटने से |
| पनीर | दूध में खट्टा मिलाकर फाड़ने से |
| छाछ | दही मथने के बाद बचा तरल पदार्थ |
| मिठाई | खोये से — बर्फी, पेड़ा, लड्डू आदि |
| घी | मक्खन को गर्म करने से |
| श्रीखंड | दही को छानकर, केसर-इलायची मिलाकर |
| आइसक्रीम | दूध-क्रीम को जमाकर |
गाय का दूध → उबालें → ठंडा करें → दही जमाएँ → मथें → मक्खन निकलें → गर्म करें → छानें → घी तैयार!
20. खोजबीन के लिए (NCERT)
| रचना/गीत | विषय | महत्व |
|---|---|---|
| मैया मोहि दाऊ बहुत खिझायो | कृष्ण की बाल-लीला | कृष्ण बलराम की शिकायत करते हैं |
| अरु हलधर सों भिरत मोहि | बाल-लीला | कृष्ण-बलराम का खेल |
| हम तो भए बावरे | भक्ति पद | कृष्ण-प्रेम की मस्ती |
| नैनों के डारे दृग बाण | भक्ति पद | कृष्ण की आँखों का वर्णन |
| सूरसागर के अन्य पद | कृष्ण लीला के 10 काण्ड | हजारों पद — बाल लीला, गोपी प्रेम |


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