मैया मैं नहिं माखन खायो Class 6 Hindi Malhar Chapter 9 Notes | Surdas NCERT

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मैया मैं नहिं माखन खायो Class 6 Hindi Malhar Chapter 9 Notes | Surdas NCERT
🎖 पाठ परिचय
कक्षा6
पुस्तकमल्हार
अध्याय9
पाठमैया मैं नहिं माखन खायो
विधापद (Devotional Verse)
कविसूरदास
जन्म15वीं शताब्दी
मृत्यु16वीं शताब्दी
भाषाब्रजभाषा
रसवात्सल्य रस
स्रोतसूरसागर
विषयकृष्ण-यशोदा संवाद
NCERT PDFfhml109.pdf

मैया मैं नहिं माखन खायो

NCERT कक्षा 6 हिन्दी · मल्हार · अध्याय 9 · सम्पूर्ण नोट्स · सूरदास · ब्रजभाषा पद

अध्याय कवरेज — 100% सम्पूर्ण

मैया मैं नहिं माखन खायो NCERT कक्षा 6 हिन्दी मल्हार का नौवाँ अध्याय है। यह सूरदास (15वीं–16वीं शताब्दी) का प्रसिद्ध पद है जो सूरसागर से लिया गया है। ब्रजभाषा में रचित इस पद में बालकृष्ण चार चतुर तर्क देकर माखन चुराने से इनकार करते हैं। अंत में माँ यशोदा मुस्कुराकर कृष्ण को हृदय से लगा लेती हैं — यही वात्सल्य रस की पराकाष्ठा है।

🎖 परीक्षा हेतु: मेरी समझ से MCQ, मिलकर करें मिलान (8 items), पंक्ति से पंक्ति (6 items), समय का माप और वर्ण-परिवर्तन से प्रश्न पूछे जाते हैं।

1. कवि से परिचय — सूरदास

🎖
सूरदास
जन्म: 15वीं शताब्दी  |  मृत्यु: 16वीं शताब्दी  |  महाकवि  |  ब्रजभाषा
सूरदास द्वारा रचित यह पद। माना जाता है कि उनका जन्म 15वीं शताब्दी में हुआ था। सूरदास ने अपना अधिकांश जीवन मथुरा, गोवर्धन सहित ब्रज के क्षेत्रों में श्रीकृष्ण के गुणगान में भजन गाते हुए बिताया। उनकी रचनाएँ ब्रजभाषा में उपलब्ध हैं। उनकी अधिकतर कविताओं में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का मनोहारी वर्णन है। ये कविताएँ अत्यंत लोकप्रिय हैं और देशभर में प्रेम से गायी जाती हैं। अपनी उत्कृष्ट रचनाओं के लिए वे महाकवि सूरदास कहलाते हैं। उनकी मृत्यु 16वीं शताब्दी में हुई थी।
🎖 भक्तिकाल महाकवि 📚 सूरसागर 🐱 ब्रज क्षेत्र ❤ वात्सल्य रस 🎵 बाल-लीला चितेरे

2. मूल पद — जैसा NCERT में है

मैया मैं नहिं माखन खायो। भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो। चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥
मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो। ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो॥
तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो। जिय तेरे कछु भेद उपजि हैं, जानि परायो जायो॥
ये ले अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो। सूरदास तब बिहसिँ जसोदा, लै उर कंठ लगायो॥
— सूरदास (सूरसागर से)  |  NCERT PDF p.94

3. कठिन शब्दार्थ — ब्रजभाषा → हिन्दी

ब्रज शब्दखड़ी बोलीविस्तृत अर्थ
मैयामाँमाता के लिए प्यार का संबोधन
नहिं / नहिनहींइनकार; 'नहिं' = ब्रज, 'नहीं' = खड़ी बोली
माखनमक्खनदूध-दही मथने से निकला मक्खन (Butter)
भोर भयोसुबह हुईप्रातःकाल हुआ, सवेरा हुआ
गैयन के पाछेगायों के पीछेगाएँ चराने साथ
मधुबन / मधबनमधुबनमथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन
मोहि पठायोमुझे भेजामुझे भेज दिया गया
पहरपहरसमय की इकाई — एक पहर = 3 घंटे। एक दिन = 8 पहर
बंसीवटबंसीवटएक वट वृक्ष — कृष्ण इसी पर चढ़कर बाँसुरी से गायों को बुलाते थे
भटक्योभटकाइधर-उधर घूमा, भ्रमण किया
साँझ परेशाम होने परसंध्याकाल में, शाम को
बहियनबाँहों सेभुजाएँ, हाथ-बाँह
छोटोछोटाब्रज में 'ओ' प्रत्यय — 'छोटा' का रूप
छीको / छीकेछींकागोल पात्र के आकार का रस्सियों का जाल जो छत से लटकाया जाता है ताकि दूध-दही को जानवर न पा सकें
केहि बिधिकिस प्रकारकैसे, किस तरह
पायोपायाप्राप्त किया, पहुँचा
ग्वाल-बालग्वाल-बालगाय पालने वालों के बच्चे, श्रीकृष्ण के संगी साथी
बैर परेशत्रु बने हैंईर्ष्या करते हैं, दुश्मन बन गए हैं
बरबसजबरदस्तीहठपूर्वक, बिना कारण
मुख लपटायोमुँह पर लगायामला, लगाया, पोता (झूठा फँसाने के लिए)
भोरीभोलीसरल मन की; 'ल'→'र' वर्ण-परिवर्तन — 'भोली'→'भोरी'
पतियायोविश्वास कियासच मान लिया, भरोसा कर लिया
जियमन मेंहृदय में, जी में
कछु भेद उपजिकुछ शंका उत्पन्न हुईसंदेह पैदा हुआ, भेद-भाव जागा
परायो / परायो जायोपरायाअपना न समझना; 'पराया' का ब्रज रूप
लकुटि कमरियालाठी और कंबललाठी और छोटा कंबल (कमली) — मान्यता है कृष्ण इन्हें लेकर गाय चराने जाते थे
बहुतहिं नाच नचायोबहुत नचायाबहुत परेशान किया, ताने मारे
तब बिहसिँतब मुस्कुराईंउस समय हँसीं — 'बिहसि' = मुसकाई, हँसी
जसोदायशोदाश्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था
लै उर कंठ लगायोहृदय से लगायागले लगाया, छाती से भींच लिया

4. पंक्ति-वार भावार्थ

मुख्य पंक्ति (टेक)

मैया मैं नहिं माखन खायो।
भावार्थ
"माँ! मैंने माखन नहीं खाया।" — यह पद की टेक पंक्ति है। बालकृष्ण माँ यशोदा से सीधे इनकार करते हैं। सरल-सा वाक्य पर कितनी मासूमियत भरी है!

तर्क 1 — मैं मधुबन में था

भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।
चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥
भावार्थ
सुबह होते ही मुझे गाएँ चराने मधुबन भेज दिया। चार पहर (12 घंटे) बंसीवट पर भटकता रहा और शाम को ही घर आया। तर्क: मैं घर पर था ही नहीं।

तर्क 2 — हाथ छोटे हैं, ग्वालों ने लगाया

मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।
ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो॥
भावार्थ
मेरी बाँहें छोटी हैं — छींके तक कैसे पहुँचूँ? ग्वाल-बाल मुझसे जलते हैं — उन्होंने जबरदस्ती मेरे मुँह पर माखन लगाया।

तर्क 3 — माँ भोली है, मुझे पराया मानती है

तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।
जिय तेरे कछु भेद उपजि हैं, जानि परायो जायो॥
भावार्थ
माँ तुम भोली हो — दूसरों की बातों में आ गई हो। तुम्हारे मन में मेरे लिए भेद पैदा हो गया है — मुझे पराया समझने लगी हो। (भावनात्मक आरोप — कृष्ण की चातुरी)

अंत — लाठी-कंबल लो, और यशोदा का प्यार

ये ले अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो।
सूरदास तब बिहसिँ जसोदा, लै उर कंठ लगायो॥
भावार्थ
"यह लो अपनी लाठी-कंबल — तुमने बहुत नचाया है।" — नाराजगी का नाटक।
सूरदास: यह सब सुनकर यशोदा उस समय मुस्कुराईं और कृष्ण को हृदय से गले लगा लिया। — यही वात्सल्य रस की पराकाष्ठा है।

5. पद का सारांश

इस पद में बालकृष्ण माँ यशोदा को चार तर्क देकर माखन चुराने से इनकार करते हैं — (1) मैं सुबह से शाम मधुबन में था, (2) मेरे हाथ छोटे हैं, छींके तक नहीं पहुँच सकता, (3) ग्वाल-बालों ने झूठा फँसाया, (4) माँ भोली है, दूसरों की सुनती है। अंत में नाराजगी दिखाकर लाठी-कंबल वापस करने की बात करते हैं। यशोदा जी बच्चे की मासूम बातों पर मुस्कुराकर उन्हें गले लगा लेती हैं।

6. मेरी समझ से (NCERT)

प्र.1 — मैं माखन कैसे खा सकता हूँ? श्रीकृष्ण ने क्या तर्क दिया?
★ सही: मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?

स्पष्टीकरण: "मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।" — मैं छोटा बच्चा हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं ऊपर टँगे छींके तक कैसे पहुँचूँ? यही कृष्ण का मुख्य तर्क है।
प्र.2 — श्रीकृष्ण माँ के आने से पहले क्या कर रहे थे?
★ सही: माखन खा रहे थे।

स्पष्टीकरण: यद्यपि कृष्ण इनकार कर रहे हैं, किंतु पद में कहा है "बरबस मुख लपटायो" — मुँह पर माखन लगा था, जो इस बात का प्रमाण है कि वे माखन खा रहे थे।

7. मिलकर करें मिलान — सही उत्तर (NCERT p.97)

शब्द (स्तंभ 1)
1. जसोदा
2. पहर
3. लकुटि कमरिया
4. बंसीवट
5. मधुबन
6. छीको
7. माता
8. ग्वाल-बाल
अर्थ या संदर्भ (सही जोड़)
1→4: यशोदा — श्रीकृष्ण की माँ जिन्होंने कृष्ण को पाला था।
2→1: समय मापने की इकाई — तीन घंटे का एक पहर; एक दिन में आठ पहर।
3→8: लाठी और छोटा कंबल (कमली) — कृष्ण इन्हें लेकर गाय चराने जाते थे।
4→2: एक वट वृक्ष — कृष्ण इस पर चढ़कर बाँसुरी से गायों को एकत्रित करते।
5→7: मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन।
6→3: गोल पात्र आकार का रस्सियों का जाल — दूध-दही रखने हेतु ऊँचाई पर लटकाया जाता है।
7→5: जन्म देने वाली, उत्पन्न करने वाली, जननी, माँ।
8→6: गाय पालने वालों के बच्चे — श्रीकृष्ण के संगी साथी।
सही मिलान: जसोदा→4  |  पहर→1  |  लकुटि-कमरिया→8  |  बंसीवट→2  |  मधुबन→7  |  छीको→3  |  माता→5  |  ग्वाल-बाल→6

8. पंक्तियों पर चर्चा (NCERT)

(क) "भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।"
अर्थ: सुबह होते ही मुझे गायों के पीछे-पीछे मधुबन भेज दिया गया।

भाव: कृष्ण का तर्क है कि वे घर पर थे ही नहीं। सुबह से ही बाहर थे। 'मोहि' = मुझे; 'पठायो' = भेजा। मधुबन = मथुरा के पास यमुना किनारे का वन जहाँ कृष्ण गाएँ चराते थे।
(ख) "सूरदास तब बिहसिँ जसोदा, लै उर कंठ लगायो।"
अर्थ: सूरदास कहते हैं — यह सब सुनकर भी यशोदा उस समय मुस्कुराईं और कृष्ण को हृदय से गले लगा लिया।

गहरा भाव: 'तब' = उस समय (सब सुनकर); 'बिहसिँ' = मुस्कुराईं। यशोदा जानती थीं सच क्या है — फिर भी माँ का वात्सल्य जीत गया। यह पद का भावनात्मक चरमोत्कर्ष है।

9. सोच-विचार के लिए (NCERT)

(क) पद में श्रीकृष्ण ने अपने बारे में क्या-क्या बताया?
1. सुबह से शाम: भोर को मधुबन गया, चार पहर बंसीवट पर रहा, साँझ को घर आया।
2. छोटे बच्चे: मैं बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, छींके तक नहीं पहुँच सकता।
3. निर्दोष: ग्वाल-बालों ने जबरदस्ती मुँह पर माखन लगाया।
4. भावनात्मक: माँ मुझे पराया समझ रही है; मुझे घर छोड़ना होगा।
5. लाठी-कंबल: गाय चराने के लिए लाठी और कंबल लेकर जाता था।
(ख) यशोदा माता ने श्रीकृष्ण को हँसते हुए गले से क्यों लगा लिया?
कारण:
1. यशोदा जानती थीं कृष्ण ने माखन खाया — पर बच्चे की मासूम और चतुर बातें सुनकर क्रोध नहीं आया।
2. वात्सल्य रस: माँ का प्रेम तर्क नहीं देखता — बस बच्चे की मासूमियत देखता है।
3. 'तब बिहसिँ' = तब भी मुस्कुराईं — यानी सब जानते हुए भी गले लगाया।
4. संदेश: माँ का प्रेम अजेय है — बच्चे की हर शरारत उसे और प्यारी लगती है।

10. कविता की रचना — तुक (NCERT)

इस पद में 'तुक' क्या है?
NCERT से: 'पठायो' और 'आयो' — दोनों की अंतिम ध्वनि 'यो' एक जैसी है। इस विशेषता को 'तुक' कहते हैं।

इस पूरे पद में प्रत्येक पंक्ति के अंतिम शब्द का तुक मिलता है:
खायो — पठायो — आयो — पायो — लपटायो — पतियायो — जायो — नचायो — लगायो

सभी अंत में 'यो' आता है। यह तुकबंदी पद को गेय (संगीतमय) बनाती है।
🎖 पद की अन्य विशेषताएँ:
1. अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम 'सूरदास' दिया है — यह भक्त कवियों की परंपरा है।
2. प्रत्येक जोड़ी पंक्तियों के बाद दोहरे दंड (॥) से समाप्ति।
3. ब्रजभाषा की मधुरता।
4. टेक पंक्ति — "मैया मैं नहिं माखन खायो" — पद की मूल भावना।

11. अनुमान या कल्पना से (NCERT)

(क) श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा को तर्क क्यों दे रहे होंगे?
1. उनके मुँह पर माखन लगा था — सबूत उनके खिलाफ था।
2. माँ को पता चल गया था — कृष्ण डर गए।
3. सजा या डाँट से बचने के लिए तर्क देना जरूरी था।
4. बाल-चातुरी: कृष्ण स्वभाव से चतुर थे — बहाने बनाना उनका खेल था।
5. शायद माँ का ध्यान भटकाना चाहते थे।
(ख) जब माता यशोदा ने कृष्ण को गले से लगा लिया, तब क्या हुआ होगा?
1. कृष्ण ने शायद फिर से माखन माँगा होगा!
2. यशोदा ने माखन का एक और पात्र दिया होगा।
3. कृष्ण की आँखें भर आई होंगी — माँ का प्यार महसूस हुआ।
4. घर में खुशी का माहौल बना होगा — ग्वाल-बाल भी हँस रहे होंगे।
5. बंसी की मधुर ध्वनि गूँज उठी होगी।

12. शब्दों के रूप (NCERT)

(क) ब्रजभाषा → खड़ी बोली

'पाछे' = 'पीछे' — इसी तरह इन ब्रज शब्दों को खड़ी बोली में लिखिए:
ब्रज शब्द (पद से)खड़ी बोली रूपअर्थ
परेपड़े / होने परसाँझ परे = साँझ होने पर
छोटोछोटा'ओ' → 'आ' परिवर्तन
बिधिविधि / तरीका'ब' → 'व' परिवर्तन
भोरीभोलीवर्ण-परिवर्तन: 'ल' → 'र'
कछुकुछस्वर परिवर्तन
लैले (लेकर)क्रिया का संक्षिप्त रूप
नहिंनहीं'ं' → 'ीं' परिवर्तन

(ख) शब्दों का अर्थ मिलान (NCERT p.99)

स्तंभ 1 (शब्द)
1. उपजि
2. जानि
3. जायो
4. जिय
5. पठायो
6. पतियायो
7. बहियन
8. बिधि
9. बिहसिँ
10. भटक्यो
11. लपटायो
स्तंभ 2 (अर्थ) — सही जोड़
1→2: उपजना, उत्पन्न होना
2→3: जानकर, समझकर
3→8: जन्मा
4→7: मन, जी
5→11: भेज दिया
6→4: विश्वास किया, सच माना
7→5: बाँह, हाथ, भुजा
8→6: प्रकार, भाँति, रीति
9→1: मुसकाई, हँसी
10→10: इधर-उधर घूमा या भटका
11→9: मला, लगाया, पोता
सही जोड़: उपजि→2 | जानि→3 | जायो→8 | जिय→7 | पठायो→11 | पतियायो→4 | बहियन→5 | बिधि→6 | बिहसिँ→1 | भटक्यो→10 | लपटायो→9

13. वर्ण-परिवर्तन (NCERT)

NCERT: 'भोरी' का अर्थ है 'भोली'। यहाँ 'ल' और 'र' वर्ण परस्पर बदल गए हैं। इस पद में ऐसे कुछ और शब्दों में भी 'ल' या 'ड़' और 'र' में वर्ण-परिवर्तन हुआ है।
ब्रज रूप (पद में)मूल खड़ी बोलीवर्ण-परिवर्तन
भोरीभोली'ल' → 'र'
परे (पड़े)पड़े'ड़' → 'र'
बिहसिँ (बिहँसि)विहँसी / हँसी'ल' अनुपस्थित + 'ब'→'व'
पाछेपीछे'छ' का अपरिवर्तित रूप, स्वर परिवर्तन
💡 नियम: ब्रजभाषा में 'ल' का 'र' बनना और 'ड़' का 'र' बनना बहुत सामान्य है। यह भाषा की क्षेत्रीय विशेषता है।

14. पंक्ति से पंक्ति — भावार्थ मिलान (NCERT p.100)

स्तंभ 1 — पंक्तियाँ
1. भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।
2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो।
3. मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।
4. ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो।
5. तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।
6. जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो।
स्तंभ 2 — भावार्थ (सही जोड़)
1→4: सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया।
2→5: चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया।
3→1: मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छींके तक कैसे पहुँच सकता हूँ?
4→6: ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया।
5→3: माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में आ गई हो।
6→2: तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया।
सही मिलान: 1→4  |  2→5  |  3→1  |  4→6  |  5→3  |  6→2

15. पाठ से आगे — आपकी बात

यहाँ कृष्ण माँ के सामने सिद्ध कर रहे हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया। क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ है?
NCERT निर्देश: उस घटना के बारे में बताइए जब आपको किसी के सामने सिद्ध करना पड़ा कि यह काम आपने नहीं किया — कब, किसके सामने, और आपने कौन-कौन से तर्क दिए?

Sample उत्तर: एक बार कक्षा में खिड़की का काँच टूटा। सबने मुझ पर आरोप लगाया। मैंने सिद्ध किया — मैं उस समय कक्षा में था ही नहीं, मैदान में था। मेरे मित्र गवाह थे। शिक्षक ने मान लिया।

16. घर की वस्तुएँ — छीका और अन्य

NCERT: 'छीका' घर की एक ऐसी वस्तु है जिसे सैकड़ों-वर्ष से भारत में उपयोग में लाया जा रहा है।
पारंपरिक वस्तुआधुनिक नामउपयोग
छींकाहैंगिंग बास्केट / रस्सी जालदूध-दही को ऊँचाई पर रखना ताकि जानवर न पहुँचें
मटका / घड़ामिट्टी का बर्तनपानी ठंडा रखना, दही जमाना
सिलबट्टाग्राइंडरमसाला पीसना
चौकी (पाट)छोटा लकड़ी का तख्ताबैठना, पूजा में उपयोग
लोहे की सिलाई मशीनसिलाई मशीनकपड़े सिलना
खाट (चारपाई)पारंपरिक बिस्तरसोना, आराम करना
कनस्तरटिन का डिब्बाअनाज, मसाले रखना
छाज (सूप)बाँस की टोकरीअनाज छानना

17. समय का माप (NCERT)

"चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥"
(क) 'पहर' और 'साँझ' जैसे समय बताने वाले और शब्द कौन-से हैं?
NCERT संकेत: कल, ऋतु, वर्ष, अब, पखवाड़ा, दशक, वेला, अवधि आदि।

अन्य उदाहरण: भोर, सवेरा, प्रभात, दोपहर, अपराह्न, साँझ, संध्या, रात्रि, मध्यरात्रि, क्षण, पल, घड़ी, दिन, सप्ताह, माह, वर्ष, युग, सदी, शताब्दी
(ख) श्रीकृष्ण के अनुसार वे कितने घंटे गाय चराते थे?
चार पहर = 4 × 3 घंटे = 12 घंटे।

NCERT से: "एक पहर = तीन घंटे" और "एक दिवस में आठ पहर होते हैं।"
कृष्ण ने चार पहर गाय चराई = 12 घंटे — सुबह से शाम तक।
(ग) शाम को 6 बजे लौटे तो सुबह कितने बजे गए होंगे?
शाम 6 बजे − 12 घंटे = सुबह 6 बजे।

गणना: 4 पहर × 3 घंटे = 12 घंटे। 6 PM − 12 hours = 6 AM (सुबह 6 बजे) घर से निकले।
(घ) 'दोपहर' = दो पहर का समय ≈ 12 बजे। दिन के पहले पहर का प्रारंभ कब?
पहले पहर का प्रारंभ ≈ सुबह 6 बजे।

व्याख्या:
दोपहर = दूसरे पहर की समाप्ति = 12 बजे
तो: दूसरा पहर = 9 AM − 12 PM
पहला पहर = 6 AM − 9 AM
पहले पहर का प्रारंभ = सुबह 6 बजे

18. हम सब विशेष हैं (NCERT)

महाकवि सूरदास दृष्टिबाधित थे — उनकी विशेष क्षमता क्या थी?
NCERT से: "महाकवि सूरदास दृष्टिबाधित थे। उनकी विशेष क्षमता थी उनकी कल्पना शक्ति और कविता रचने की कुशलता।"

आँखें न होने के बावजूद सूरदास ने कृष्ण की बाल-लीलाओं का इतना सजीव और सुंदर चित्रण किया जो आज भी अनुपम है। यह उनकी भक्ति और कल्पना शक्ति का प्रमाण है।
NCERT संदेश: हम सभी में कुछ न कुछ ऐसा होता है जो हमें सबसे विशेष और सबसे भिन्न बनाता है। अपनी, अपने परिजन, शिक्षक और मित्र की विशेष क्षमता लिखिए।

19. आज की पहेली — दूध से बनने वाली वस्तुएँ (NCERT)

NCERT: दूध से मक्खन ही नहीं बल्कि और भी बहुत कुछ बनाया जाता है। शब्द-पहेली पूरी कीजिए।
दूध से बनने वाली वस्तुएँकैसे बनती है
खोया (मावा)दूध को तेज आँच पर लगातार उबालने से
दहीदूध में जामन (कल्चर) मिलाकर
मक्खनदही को मथने से
लस्सीदही को पानी में फेंटने से
पनीरदूध में खट्टा मिलाकर फाड़ने से
छाछदही मथने के बाद बचा तरल पदार्थ
मिठाईखोये से — बर्फी, पेड़ा, लड्डू आदि
घीमक्खन को गर्म करने से
श्रीखंडदही को छानकर, केसर-इलायची मिलाकर
आइसक्रीमदूध-क्रीम को जमाकर
🏋 दूध से घी बनाने की प्रक्रिया (NCERT):
गाय का दूध → उबालें → ठंडा करें → दही जमाएँ → मथें → मक्खन निकलें → गर्म करें → छानें → घी तैयार!

20. खोजबीन के लिए (NCERT)

NCERT: सूरदास द्वारा रचित कुछ अन्य रचनाएँ खोजें व पढ़ें।
रचना/गीतविषयमहत्व
मैया मोहि दाऊ बहुत खिझायोकृष्ण की बाल-लीलाकृष्ण बलराम की शिकायत करते हैं
अरु हलधर सों भिरत मोहिबाल-लीलाकृष्ण-बलराम का खेल
हम तो भए बावरेभक्ति पदकृष्ण-प्रेम की मस्ती
नैनों के डारे दृग बाणभक्ति पदकृष्ण की आँखों का वर्णन
सूरसागर के अन्य पदकृष्ण लीला के 10 काण्डहजारों पद — बाल लीला, गोपी प्रेम

21. MCQ — परीक्षा उपयोगी प्रश्न

1. इस पद के कवि कौन हैं?
विकल्प देखें ▼
तुलसीदास
सूरदास
कबीरदास
मीराबाई
सही: (ब) सूरदास — 15वीं-16वीं शताब्दी, ब्रजभाषा, सूरसागर
2. एक पहर में कितने घंटे होते हैं?
विकल्प देखें ▼
2 घंटे
3 घंटे
4 घंटे
6 घंटे
सही: (ब) तीन घंटे। एक दिन = 8 पहर = 24 घंटे — NCERT मिलान से
3. 'छींका' का सही अर्थ कौन-सा है?
विकल्प देखें ▼
लकड़ी की टोकरी
गोल पात्र आकार का रस्सियों का जाल जो ऊँचाई पर लटकाया जाता है
माखन रखने की मटकी
छोटा दरवाजा
सही: (ब) NCERT मिलान p.97 से — छीको→3: रस्सियों का जाल, ऊँचाई से लटकाया
4. 'बिहसिँ' का अर्थ क्या है?
विकल्प देखें ▼
रोकर
मुसकाई, हँसी
क्रोध से
चुपचाप
सही: (ब) बिहसिँ = मुसकाई, हँसी — NCERT शब्द मिलान p.99 से
5. 'भोरी' किस शब्द का ब्रज रूप है?
विकल्प देखें ▼
भोली
भूरी
भोर
भारी
सही: (अ) वर्ण-परिवर्तन: 'ल' → 'र' — भोली → भोरी — NCERT वर्ण-परिवर्तन से
6. पंक्ति "चार पहर बंसीवट भटक्यो" में कृष्ण कितने घंटे बाहर रहे?
विकल्प देखें ▼
8 घंटे
12 घंटे
6 घंटे
4 घंटे
सही: (ब) 4 पहर × 3 घंटे = 12 घंटे
7. 'बंसीवट' क्या है?
विकल्प देखें ▼
कृष्ण की बाँसुरी
एक वट वृक्ष जहाँ कृष्ण बाँसुरी बजाते थे
मधुबन का मंदिर
कृष्ण का घर
सही: (ब) NCERT मिलान: बंसीवट→2: कृष्ण इस पर चढ़कर बाँसुरी से गायों को बुलाते थे
8. पद में 'लकुटि कमरिया' से क्या अभिप्राय है?
विकल्प देखें ▼
माखन का बर्तन
लाठी और छोटा कंबल — कृष्ण गाय चराने ये लेकर जाते थे
खेलने के सामान
कृष्ण का मुकुट
सही: (ब) NCERT मिलान: लकुटि कमरिया→8: लाठी और छोटा कंबल

22. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

'मैया मैं नहिं माखन खायो' किस कक्षा में है? +
NCERT कक्षा 6 हिन्दी पाठ्यपुस्तक मल्हार का अध्याय 9। सूरदास रचित ब्रजभाषा पद।
सूरदास कौन थे? +
सूरदास भक्तिकाल के महाकवि हैं। 15वीं शताब्दी में जन्म, 16वीं में मृत्यु। मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में जीवन बिताया। सूरसागर उनका महाग्रंथ है। दृष्टिबाधित होने के बावजूद कृष्ण बाल-लीलाओं के अद्वितीय चितेरे।
एक पहर में कितने घंटे होते हैं? +
एक पहर = तीन घंटे। एक दिन में आठ पहर = 24 घंटे। चार पहर = 12 घंटे — कृष्ण इतनी देर गाय चराते थे।
पद में 'तुक' क्या है? +
प्रत्येक पंक्ति के अंत में 'यो' की ध्वनि — खायो, पठायो, आयो, पायो, लपटायो, पतियायो, जायो, नचायो, लगायो। यह तुकबंदी पद को गेय बनाती है।
वर्ण-परिवर्तन किसे कहते हैं? +
ब्रजभाषा में 'ल' और 'र' परस्पर बदल जाते हैं — जैसे 'भोली' → 'भोरी', 'पड़े' → 'परे'। इसे वर्ण-परिवर्तन कहते हैं।
यशोदा ने कृष्ण को क्यों गले लगाया? +
यशोदा जानती थीं कृष्ण ने माखन खाया है — फिर भी बच्चे की मासूम बातें सुनकर मुस्कुराकर गले लगा लिया। यही वात्सल्य रस है — माँ का प्रेम तर्क से नहीं, भावना से चलता है।

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📌 अस्वीकरण: यह स्वतंत्र शैक्षिक नोट्स हैं। सामग्री NCERT पाठ्यपुस्तक मल्हार तथा सूरदास के सूरसागर पर आधारित। NCERTclasses.com NCERT/CBSE से सम्बद्ध नहीं। स्रोत: ncert.nic.in

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