कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 3 — धातु एवं अधातु
NCERT / RBSE पाठ्यक्रम 2026–27 · सचित्र नोट्स, बोर्ड में बनाने वाले चित्र, अंक योजना, राजस्थान की खदानें एवं स्व-परीक्षण
जबकि आपके घर का लोहे का गेट दो बरसात में जंग खा जाता है।
ऐसा क्यों? और लोहा आता कहाँ से है — मिट्टी में लोहा तो दिखता नहीं? इस अध्याय के अंत तक आप दोनों का उत्तर दे सकेंगे।
| अध्याय | 3 — धातु एवं अधातु |
| English | Metals and Non-metals |
| अंक भार | 5 अंक (कुल 80 में से) |
| चित्र-प्रश्न | इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना, विद्युत अपघटनी परिष्करण, जंग के प्रयोग |
| पुस्तक | विज्ञान, एन.सी.ई.आर.टी. |
- सक्रियता श्रेणी: K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > [H] > Cu > Hg > Ag > Au
- धातु + ऑक्सीजन → क्षारकीय ऑक्साइड; Al2O3, ZnO उभयधर्मी (अम्ल और क्षार दोनों से क्रिया)
- Na, K केरोसिन में रखते हैं — वायु में आग पकड़ लेते हैं
- आयनिक बंध = धातु इलेक्ट्रॉन देती है, अधातु लेती है (Na+Cl−)
- आयनिक यौगिक: उच्च गलनांक, जल में घुलनशील, गलित/विलयन में विद्युत चालक, ठोस में नहीं
- निष्कर्षण: ऊपर वाली धातु = विद्युत अपघटन · बीच वाली = भर्जन/निस्तापन + कार्बन · नीचे वाली = केवल गरम करना
- भर्जन = सल्फाइड + वायु में गरम · निस्तापन = कार्बोनेट + वायु रहित गरम
- परिष्करण: अशुद्ध धातु = ऐनोड, शुद्ध पत्ती = कैथोड
- जंग के लिए वायु और जल दोनों आवश्यक
1. पहले यह जाँचिए
- सोडियम (परमाणु क्रमांक 11) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
- अम्ल + धातु से कौन-सी गैस निकलती है? (अध्याय 2)
- Fe + CuSO4 में कौन किसे विस्थापित करता है? (अध्याय 1)
2. भौतिक गुण
| गुण | धातु | अधातु |
|---|---|---|
| चमक (धात्विक द्युति) | चमकीली | चमक नहीं — अपवाद आयोडीन |
| कठोरता | प्रायः कठोर — अपवाद Na, K (चाकू से कट जाते हैं) | प्रायः नरम — अपवाद हीरा (सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ) |
| आघातवर्ध्यता (पीटकर पतली चादर बनना) | हाँ — सोना और चाँदी सबसे अधिक | नहीं — भंगुर (टूट जाते हैं) |
| तन्यता (खींचकर तार बनना) | हाँ — 1 ग्राम सोने से लगभग 2 किमी लंबा तार | नहीं |
| ऊष्मा चालकता | अच्छी — चाँदी और ताँबा सर्वश्रेष्ठ; सीसा और पारा दुर्बल | दुर्बल |
| विद्युत चालकता | अच्छी | कुचालक — अपवाद ग्रेफाइट |
| ध्वानिक (टकराने पर आवाज़) | हाँ — इसीलिए मंदिर की घंटी धातु की | नहीं |
| अवस्था | ठोस — अपवाद पारा (द्रव) | ठोस या गैस — ब्रोमीन द्रव |
| गलनांक | प्रायः उच्च — अपवाद गैलियम, सीज़ियम (हथेली पर पिघल जाते हैं) | प्रायः निम्न |
3. धातुओं के रासायनिक गुण
(क) धातु + ऑक्सीजन → धातु ऑक्साइड
4Al(s) + 3O2(g) → 2Al2O3(s)
अधिकांश धातु ऑक्साइड क्षारकीय होते हैं। पर कुछ ऑक्साइड अम्ल और क्षारक — दोनों से क्रिया करते हैं। ये उभयधर्मी ऑक्साइड कहलाते हैं (यानी दोनों तरह का स्वभाव रखने वाले)।
Al2O3 + 2NaOH → 2NaAlO2 + H2O — क्षारक से (सोडियम ऐलुमिनेट)
| धातु | ऑक्सीजन के साथ व्यवहार |
|---|---|
| K, Na | इतनी तीव्र क्रिया कि खुले में आग पकड़ लेती हैं — इसीलिए केरोसिन में डुबोकर रखते हैं |
| Mg, Al, Zn, Pb | सतह पर ऑक्साइड की पतली सुरक्षा परत बन जाती है, जो आगे क्रिया रोक देती है |
| Fe | टुकड़ा नहीं जलता, पर लौह चूर्ण लौ में डालें तो चमकीली चिंगारियाँ |
| Cu | जलता नहीं, पर गरम करने पर काली परत |
| Ag, Au | उच्च ताप पर भी क्रिया नहीं |
(ख) धातु + जल → धातु ऑक्साइड/हाइड्रॉक्साइड + हाइड्रोजन
Ca(s) + 2H2O(l) → Ca(OH)2(aq) + H2(g)
2Al(s) + 3H2O(g) → Al2O3(s) + 3H2(g) — भाप से
3Fe(s) + 4H2O(g) → Fe3O4(s) + 4H2(g) — भाप से
| धातु | जल के साथ |
|---|---|
| K, Na | ठंडे जल से ही तीव्र क्रिया; इतनी ऊष्मा कि H2 आग पकड़ लेती है |
| Ca | कम तीव्र; H2 के बुलबुले चिपकने से तैरने लगता है |
| Mg | गरम जल से क्रिया; यह भी तैरता है |
| Al, Fe, Zn | न ठंडे, न गरम जल से — केवल भाप से |
| Pb, Cu, Ag, Au | जल से कोई क्रिया नहीं |
(ग) धातु + तनु अम्ल → लवण + हाइड्रोजन
Mg(s) + 2HCl(aq) → MgCl2(aq) + H2(g)
(घ) धातु + दूसरी धातु का लवण
अधिक क्रियाशील धातु कम क्रियाशील को उसके लवण-विलयन से हटा देती है — यह अध्याय 1 की विस्थापन अभिक्रिया ही है। Fe + CuSO4 → FeSO4 + Cu
4. सक्रियता श्रेणी
धातुओं को उनकी क्रियाशीलता के घटते क्रम में लगाने पर जो सूची बनती है, उसे सक्रियता श्रेणी कहते हैं। पूरे अध्याय की चाबी यही है — ऊपर के सभी गुण और आगे का निष्कर्षण, सब इसी से तय होता है।
चित्र 1 — सक्रियता श्रेणी। रंग के तीन समूह ही आगे के तीन निष्कर्षण-मार्ग हैं।
पोटली सोने की कैसे मैं ऐसे ज़िद से आज लेकर हाथ, कॉपी मत सिखा गोपाल
पो-K सो-Na कै-Ca मै-Mg ऐ-Al ज़ि-Zn आ-Fe (आयरन) ले-Pb (लेड) हा-H कॉ-Cu (कॉपर) म-Hg (मर्करी) सि-Ag (सिल्वर) गो-Au (गोल्ड)
5. धातु और अधातु की अभिक्रिया — आयनिक बंध
उत्कृष्ट गैसें (He, Ne, Ar) क्रिया नहीं करतीं क्योंकि उनका बाहरी कोश पूरा भरा होता है। बाकी सभी तत्व भी यही स्थिर अवस्था पाना चाहते हैं — या तो इलेक्ट्रॉन देकर, या लेकर।
चित्र 2 — सोडियम अपना एकमात्र बाहरी इलेक्ट्रॉन क्लोरीन को दे देता है। Na+ (2,8) और Cl− (2,8,8) — दोनों का बाहरी कोश पूरा।
इस प्रकार इलेक्ट्रॉन के पूर्ण स्थानांतरण से बने धनायन और ऋणायन आपस में प्रबल स्थिरवैद्युत बल से बँध जाते हैं। इसे आयनिक बंध (या वैद्युत संयोजी बंध) कहते हैं, और ऐसे यौगिक आयनिक यौगिक।
| तत्व | विन्यास | क्या करता है | बना आयन |
|---|---|---|---|
| Na (11) | 2, 8, 1 | 1 इलेक्ट्रॉन देता है | Na+ (2, 8) |
| Mg (12) | 2, 8, 2 | 2 इलेक्ट्रॉन देता है | Mg2+ (2, 8) |
| Cl (17) | 2, 8, 7 | 1 इलेक्ट्रॉन लेता है | Cl− (2, 8, 8) |
| O (8) | 2, 6 | 2 इलेक्ट्रॉन लेता है | O2− (2, 8) |
6. आयनिक यौगिकों के गुण
| गुण | कारण |
|---|---|
| ठोस और कठोर, पर भंगुर | धनायन और ऋणायन के बीच प्रबल आकर्षण |
| उच्च गलनांक व क्वथनांक | प्रबल अंतर-आयनिक आकर्षण तोड़ने में अधिक ऊर्जा लगती है |
| जल में घुलनशील | जल ध्रुवीय विलायक है |
| केरोसिन-पेट्रोल में अघुलनशील | ये अध्रुवीय विलायक हैं |
| गलित अवस्था या विलयन में विद्युत चालक | आयन गति कर सकते हैं |
| ठोस अवस्था में कुचालक | आयन अपने स्थान पर बँधे रहते हैं, चल नहीं सकते |
7. धातुओं की प्राप्ति
पृथ्वी की भूपर्पटी ही धातुओं का मुख्य स्रोत है। समुद्री जल में भी कुछ घुलनशील लवण होते हैं, जैसे सोडियम क्लोराइड और मैग्नीशियम क्लोराइड।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| खनिज | प्रकृति में पाए जाने वाले तत्व या यौगिक |
| अयस्क | वे खनिज जिनसे धातु लाभप्रद ढंग से निकाली जा सके। हर अयस्क खनिज है, पर हर खनिज अयस्क नहीं। |
| गैंग (आधात्री) | अयस्क के साथ निकलने वाली मिट्टी, बालू जैसी अशुद्धियाँ |
सक्रियता श्रेणी में सबसे नीचे की धातुएँ — सोना, चाँदी, प्लैटिनम — इतनी कम क्रियाशील हैं कि प्रकृति में मुक्त अवस्था में मिल जाती हैं। ऊपर की धातुएँ कभी स्वतंत्र नहीं मिलतीं — सदैव यौगिक के रूप में।
8. राजस्थान की खदानें — यह अध्याय आपके आँगन में है
अयस्क और निष्कर्षण की बात किताबी लग सकती है। पर राजस्थान के विद्यार्थी के लिए यह उसके ज़िले की बात है। देश का सबसे बड़ा सीसा-जस्ता भंडार राजस्थान में है।
| स्थान | ज़िला | धातु |
|---|---|---|
| जावर | उदयपुर | सीसा-जस्ता — विश्व के सबसे पुराने खनन क्षेत्रों में |
| रामपुरा-आगूचा | भीलवाड़ा | जस्ता-सीसा — विश्व की सबसे बड़ी जस्ता खदानों में |
| राजपुरा-दरीबा | राजसमंद | जस्ता-सीसा-चाँदी |
| खेतड़ी | झुंझुनूं | ताँबा — साथ में उप-उत्पाद के रूप में सोना भी |
सबसे महत्त्वपूर्ण बात: राजस्थान में जस्ते का मुख्य अयस्क जिंक ब्लेंड (ZnS) है — एक सल्फाइड अयस्क। और अगले खंड में NCERT जस्ता निकालने का जो उदाहरण देता है, वह ठीक यही अयस्क है। यानी जब आप भर्जन का समीकरण लिखेंगे, तो वह भीलवाड़ा-उदयपुर की खदानों का रसायन होगा।
9. धातुओं का निष्कर्षण
अयस्क से शुद्ध धातु निकालने के तीन चरण हैं — समृद्धीकरण (गैंग हटाना), अपचयन (धातु निकालना), और परिष्करण (शुद्ध करना)। बीच वाला चरण धातु की सक्रियता पर निर्भर है।
चित्र 3 — धातु की सक्रियता तय करती है कि उसे किस मार्ग से निकाला जाएगा। चित्र 1 के तीन रंग यहाँ तीन मार्ग बन गए।
(क) कम क्रियाशील धातुएँ — केवल गरम करके
2HgO(s) Δ→ 2Hg(l) + O2(g)
2Cu2S + 3O2 Δ→ 2Cu2O + 2SO2
2Cu2O + Cu2S Δ→ 6Cu + SO2
(ख) मध्यम क्रियाशील धातुएँ — पहले ऑक्साइड, फिर अपचयन
कार्बन से ऑक्साइड को अपचयित करना आसान है, इसलिए पहले अयस्क को ऑक्साइड में बदला जाता है:
| विधि | किस अयस्क पर | कैसे |
|---|---|---|
| भर्जन | सल्फाइड | अधिक वायु में तेज़ गरम करना |
| निस्तापन | कार्बोनेट | सीमित वायु में तेज़ गरम करना |
निस्तापन: ZnCO3(s) Δ→ ZnO(s) + CO2(g)
अपचयन: ZnO(s) + C(s) → Zn(s) + CO(g)
Fe2O3(s) + 2Al(s) → 2Fe(l) + Al2O3(s) + ऊष्मा
इतनी ऊष्मा निकलती है कि लोहा पिघली अवस्था में बनता है। इसका उपयोग रेल की पटरियों और मशीनों की टूटी दरारों को जोड़ने में होता है।
(ग) अधिक क्रियाशील धातुएँ — विद्युत अपघटन
Na, Mg, Ca, Al कार्बन से अधिक क्रियाशील हैं, इसलिए कार्बन इन्हें अपचयित नहीं कर सकता। इन्हें इनके गलित क्लोराइड के विद्युत अपघटन से निकालते हैं:
ऐनोड पर: 2Cl− → Cl2 + 2e−
ऐलुमिनियम इसी प्रकार ऐलुमिनियम ऑक्साइड के विद्युत अपघटनी अपचयन से प्राप्त होता है।
10. धातुओं का परिष्करण
निष्कर्षण से मिली धातु में अभी भी अशुद्धियाँ रहती हैं। ताँबा, जस्ता, टिन, निकल, चाँदी, सोना आदि का परिष्करण प्रायः विद्युत अपघटनी विधि से होता है।
चित्र 4 — अशुद्ध ताँबा ऐनोड से घुलता है, शुद्ध ताँबा कैथोड पर जमता है। विलेय अशुद्धियाँ विलयन में रहती हैं, अविलेय नीचे ऐनोड पंक बनकर बैठ जाती हैं।
| भाग | क्या होता है | याद रखने का तरीका |
|---|---|---|
| ऐनोड (+) | अशुद्ध धातु — घुलकर विलयन में जाती है | अ से अशुद्ध, अ से अनोड |
| कैथोड (−) | शुद्ध धातु की पतली पट्टी — इस पर शुद्ध धातु जमती है | कैथोड मोटा होता जाता है |
| विद्युत अपघट्य | उसी धातु के लवण का विलयन | ताँबे के लिए CuSO4 |
| ऐनोड पंक | अविलेय अशुद्धियाँ ऐनोड के नीचे बैठ जाती हैं | इसमें प्रायः चाँदी-सोना भी मिलता है |
11. संक्षारण और उससे बचाव
अध्याय 1 में आपने देखा कि लोहे पर भूरी जंग, चाँदी पर काली और ताँबे पर हरी परत जमती है। यहाँ प्रश्न है — जंग लगने के लिए क्या-क्या ज़रूरी है? इसका उत्तर तीन परखनलियों वाला प्रसिद्ध प्रयोग देता है (चित्र खंड 12 में)।
| परखनली | क्या है | परिणाम |
|---|---|---|
| A | कील + साधारण जल (वायु भी है) | जंग लगी |
| B | कील + उबला हुआ जल + ऊपर तेल की परत (वायु नहीं) | जंग नहीं |
| C | कील + निर्जल कैल्सियम क्लोराइड (नमी नहीं) | जंग नहीं |
बचाव के उपाय
- पेंट, तेल या ग्रीस लगाना
- यशदलेपन — लोहे पर जस्ते की परत (फिर राजस्थान का जस्ता काम आया)
- क्रोमियम लेपन, ऐनोडीकरण
- मिश्रातु बनाना
मिश्रातु
दो या अधिक धातुओं (अथवा धातु और अधातु) का समांगी मिश्रण मिश्रातु कहलाता है। मिश्रातु बनाने से धातु के गुण सुधर जाते हैं।
| मिश्रातु | घटक | विशेषता |
|---|---|---|
| स्टेनलेस स्टील | लोहा + निकल + क्रोमियम | कठोर, जंग नहीं लगती |
| पीतल | ताँबा + जस्ता | बर्तन, सजावट |
| काँसा | ताँबा + टिन | मूर्तियाँ, पदक |
| सोल्डर | सीसा + टिन | निम्न गलनांक — विद्युत तार जोड़ने में |
| अमलगम | पारा + कोई अन्य धातु | पारे वाला कोई भी मिश्रातु |
भारत के प्राचीन लोहारों ने ऐसी विधि से लोहा तैयार किया जिससे उस पर जंग नहीं लगी — और वह 1600 वर्ष से अधिक समय से खड़ा है। यह प्राचीन भारतीय धातुकर्म की उत्कृष्टता का प्रमाण है। आपके घर का गेट साधारण लोहे का है, बिना किसी सुरक्षा के — वायु और वर्षा का जल मिलते ही जंग शुरू।
12. बोर्ड में बनाने वाले चित्र
इस अध्याय से चित्र वाले प्रश्न लगभग तय आते हैं। चित्र देखना और चित्र बनाना — दो अलग कौशल हैं। नीचे हर चित्र के साथ बनाने के चरण दिए हैं। कागज़-पेंसिल लेकर साथ-साथ बनाइए।
चित्र A — MgCl2 की इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना
चित्र A — Mg के दो बाहरी इलेक्ट्रॉन दो क्लोरीन परमाणुओं में एक-एक चले जाते हैं।
- बाएँ Mg लिखिए, उसके पास दो बिंदु (बाहरी इलेक्ट्रॉन)।
- दाएँ दो Cl लिखिए, हर एक के चारों ओर सात इलेक्ट्रॉन। ऊपर चित्र में ये हरे रंग से अलग दिखाए हैं — पर परीक्षा की कॉपी में रंग नहीं होता, इसलिए इन्हें क्रॉस (×) से बनाइए और Mg के इलेक्ट्रॉन को बिंदु (•) से।
- Mg के प्रत्येक बिंदु से एक Cl की ओर मुड़ा हुआ तीर खींचिए।
- तीर के बाद उत्पाद लिखिए: [Mg]2+ 2[:Cl:]− — कोष्ठक और आवेश लिखना न भूलें, आधा अंक इसी का है।
चित्र B — विद्युत अपघटनी परिष्करण
इसका पूरा रंगीन चित्र ऊपर खंड 10, चित्र 4 में है।
- एक चौड़ा आयताकार बर्तन बनाइए, आधे से ऊपर तक विलयन की रेखा।
- बाएँ एक मोटी पट्टी — नामांकन: "ऐनोड (+), अशुद्ध ताँबा"।
- दाएँ एक पतली पट्टी — नामांकन: "कैथोड (−), शुद्ध ताँबा"।
- ऊपर बैटरी — ऐनोड धन (+) सिरे से, कैथोड ऋण (−) सिरे से।
- ऐनोड के नीचे ढेर — "ऐनोड पंक"; विलयन पर — "अम्लीय कॉपर सल्फेट विलयन"।
चित्र C — जंग लगने की शर्तें (तीन परखनली)
चित्र C — केवल परखनली A की कील पर जंग लगती है, जहाँ वायु और जल दोनों उपलब्ध हैं।
- तीन परखनलियाँ बराबर दूरी पर, ऊपर कॉर्क, और A, B, C लिखें।
- A में आधे तक जल; B में जल + ऊपर मोटी रेखा से तेल की परत; C में नीचे दानों जैसे बिंदु (CaCl2)।
- हर परखनली में बीच में एक कील। A की कील पर छोटे धब्बे — जंग दिखाने के लिए।
- हर परखनली के नीचे एक पंक्ति का निष्कर्ष लिखें। नामांकन के बिना चित्र के आधे अंक ही मिलते हैं।
13. अंक योजना — परीक्षक कैसे अंक देता है
नीचे एक चार-अंक प्रश्न का आदर्श उत्तर है। हर भाग के आगे लिखा है कि वह कितने अंक का माना जाता है। (यह परीक्षकों की सामान्य पद्धति पर आधारित उदाहरण है — बोर्ड की आधिकारिक अंक योजना नहीं।)
प्रश्न (4 अंक): ताँबे के विद्युत अपघटनी परिष्करण का नामांकित चित्र सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर:
नामांकित चित्र — ऐनोड, कैथोड, विद्युत अपघट्य, ऐनोड पंक, बैटरी के सिरे। 2 अंक
अशुद्ध ताँबे को ऐनोड तथा शुद्ध ताँबे की पतली पट्टी को कैथोड बनाया जाता है। अम्लीय कॉपर सल्फेट विलयन विद्युत अपघट्य है। 1 अंक
धारा प्रवाहित करने पर ऐनोड से ताँबा घुलकर विलयन में जाता है और उतना ही शुद्ध ताँबा कैथोड पर जमा होता है। विलेय अशुद्धियाँ विलयन में तथा अविलेय अशुद्धियाँ ऐनोड के नीचे ऐनोड पंक के रूप में एकत्रित होती हैं। 1 अंक
14. समीकरण संग्रह
4Al + 3O2 → 2Al2O3
Al2O3 + 6HCl → 2AlCl3 + 3H2O
Al2O3 + 2NaOH → 2NaAlO2 + H2O
2Na + 2H2O → 2NaOH + H2 + ऊष्मा
Ca + 2H2O → Ca(OH)2 + H2
2Al + 3H2O → Al2O3 + 3H2
3Fe + 4H2O → Fe3O4 + 4H2
Fe + 2HCl → FeCl2 + H2
2HgS + 3O2 → 2HgO + 2SO2 | 2HgO → 2Hg + O2
2Cu2S + 3O2 → 2Cu2O + 2SO2 | 2Cu2O + Cu2S → 6Cu + SO2
2ZnS + 3O2 → 2ZnO + 2SO2
ZnCO3 → ZnO + CO2
ZnO + C → Zn + CO
Fe2O3 + 2Al → 2Fe + Al2O3 + ऊष्मा
15. आम भ्रांतियाँ
| जो अक्सर समझा जाता है | सही बात |
|---|---|
| "सभी धातुएँ कठोर होती हैं" | सोडियम और पोटैशियम चाकू से कट जाते हैं। |
| "अधातुएँ बिजली नहीं चलातीं" | ग्रेफाइट अधातु है और बिजली का अच्छा चालक है — इसीलिए सेल में इलेक्ट्रोड। |
| "खनिज और अयस्क एक ही हैं" | अयस्क वही खनिज है जिससे धातु लाभप्रद ढंग से निकले। |
| "भर्जन और निस्तापन एक ही हैं" | भर्जन — सल्फाइड, अधिक वायु में। निस्तापन — कार्बोनेट, सीमित वायु में। |
| "आयनिक यौगिक सदैव विद्युत चालक हैं" | ठोस अवस्था में नहीं — केवल गलित या घुलित अवस्था में। |
| "जंग केवल पानी से लगती है" | वायु और जल दोनों चाहिए — परखनली B इसका प्रमाण है। |
| "24 कैरेट के गहने सबसे अच्छे" | 24 कैरेट बहुत नरम होता है — गहने प्रायः 22 कैरेट के बनते हैं। |
16. अंक क्यों कटते हैं
- चित्र बिना नामांकन। सुंदर चित्र पर शून्य, साधारण नामांकित चित्र पर पूरे अंक।
- ऐनोड-कैथोड उलट देना परिष्करण में।
- इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना में आवेश और कोष्ठक छोड़ना — [Mg]2+ और [:Cl:]−।
- भर्जन-निस्तापन की परिभाषा में "वायु की मात्रा" न लिखना।
- उभयधर्मी ऑक्साइड के दोनों समीकरण न देना — अम्ल वाला भी, क्षार वाला भी।
- आयनिक यौगिक की चालकता में अवस्था न बताना — "ठोस में नहीं, गलित में हाँ"।
- अपवाद भूल जाना — Na-K नरम, पारा द्रव, ग्रेफाइट चालक, आयोडीन चमकीला।
17. प्रश्न — तीन स्तर
आधार
प्र.1 कमरे के ताप पर द्रव अवस्था वाली धातु का नाम?
प्र.2 सोडियम को केरोसिन में क्यों रखते हैं?
प्र.3 पीतल के घटक लिखिए।
बोर्ड
प्र.4 (2 अंक) उभयधर्मी ऑक्साइड क्या हैं? एक उदाहरण दोनों समीकरणों सहित दीजिए।
प्र.5 (3 अंक) भर्जन और निस्तापन में अंतर समीकरण सहित लिखिए।
प्र.6 (3 अंक) आयनिक यौगिकों के गलनांक उच्च क्यों होते हैं? ये ठोस अवस्था में विद्युत का चालन क्यों नहीं करते?
प्र.7 (4 अंक) ताँबे के विद्युत अपघटनी परिष्करण का नामांकित चित्र सहित वर्णन कीजिए।
चुनौती
प्र.8 भीलवाड़ा की खदान से जिंक ब्लेंड निकला। उससे शुद्ध जस्ता बनाने के सभी चरण क्रम से, समीकरणों सहित लिखिए।
प्र.9 एक विद्यार्थी ने नीले कॉपर सल्फेट विलयन को लोहे की बाल्टी में रख दिया। अगली सुबह क्या दिखेगा और क्यों? यदि बाल्टी चाँदी की होती तो?
प्र.10 ऐलुमिनियम सक्रियता श्रेणी में लोहे से ऊपर है — यानी अधिक क्रियाशील। फिर ऐलुमिनियम के बर्तन पर जंग जैसा क्षय क्यों नहीं दिखता, जबकि लोहे पर दिखता है?
18. स्व-परीक्षण — 15 प्रश्न
कागज़ पर उत्तर लिखिए, फिर नीचे खोलिए। 12 या अधिक सही = अध्याय तैयार।
- चमकीली अधातु का नाम?
- विद्युत की सुचालक अधातु?
- सबसे अधिक आघातवर्ध्य धातु?
- दो उभयधर्मी ऑक्साइड के नाम।
- कौन-सी धातु ठंडे जल में डालते ही तैरने लगती है?
- सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन के ठीक नीचे कौन?
- Na+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास?
- गैंग किसे कहते हैं?
- राजस्थान में ताँबे की प्रमुख खदान कहाँ है?
- कार्बोनेट अयस्क पर कौन-सी विधि लगती है?
- थर्मिट अभिक्रिया का एक उपयोग?
- परिष्करण में कैथोड किसका बनता है?
- जंग के लिए कौन-सी दो चीज़ें ज़रूरी?
- स्टेनलेस स्टील के घटक?
- 22 कैरेट सोने में कितने भाग सोना?
19. शब्दावली
| हिंदी | English | हिंदी | English |
|---|---|---|---|
| आघातवर्ध्यता | Malleability | अयस्क | Ore |
| तन्यता | Ductility | गैंग | Gangue |
| ध्वानिक | Sonorous | भर्जन | Roasting |
| उभयधर्मी | Amphoteric | निस्तापन | Calcination |
| सक्रियता श्रेणी | Reactivity series | परिष्करण | Refining |
| आयनिक बंध | Ionic bond | ऐनोड पंक | Anode mud |
| धनायन | Cation | मिश्रातु | Alloy |
| ऋणायन | Anion | ऐनोडीकरण | Anodising |
20. अभिभावक एवं शिक्षक के लिए
- सक्रियता श्रेणी सुनाइए। (स्मृति-सूत्र पूछिए — "पोटली सोने की…")
- सोडियम केरोसिन में क्यों? (वायु में आग पकड़ता है)
- नमक का डला बिजली क्यों नहीं चलाता? (आयन बँधे हैं, चल नहीं सकते)
- जंग के लिए क्या-क्या चाहिए? (वायु और जल, दोनों)
- परिष्करण का चित्र बनाकर दिखाइए। (ऐनोड पर "अशुद्ध" लिखा है या नहीं — यही देखिए)
21. आगे की जिज्ञासा
ऊपर का पूरा पाठ NCERT कक्षा 10 की सीमा में है — परीक्षा के लिए इतना ही पर्याप्त है।
पर जिनके मन में प्रश्न उठें — "हमारे ज़िले की खदान में वास्तव में क्या निकलता है?", "धातुकर्म में इंजीनियर क्या करते हैं?" — उनके लिए नीचे केवल सरकारी तथा विश्वविद्यालय-स्तर के स्रोत हैं। ये परीक्षा में नहीं आएँगे।
| स्रोत | संस्था | वहाँ क्या मिलेगा |
|---|---|---|
| mines.rajasthan.gov.in | खान एवं भूविज्ञान विभाग, राजस्थान सरकार | राज्य के खनिज भंडार, ज़िलेवार खदानें |
| ncert.nic.in | NCERT, भारत सरकार | मूल पाठ्यपुस्तक की आधिकारिक PDF |
| ePathshala | शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार | ई-पुस्तकें एवं ऑडियो-वीडियो |
| RSC Education | Royal Society of Chemistry, ब्रिटेन | धातुओं पर प्रयोग एवं शिक्षक-सामग्री |
| Chemistry LibreTexts | University of California, Davis | आयनिक बंध एवं धातुकर्म — कक्षा 11–12 स्तर |
हमारा वचन: इस पृष्ठ का एक भी तथ्य इन स्रोतों से उठाकर पाठ्यक्रम में नहीं मिलाया गया है। राजस्थान की खदानों वाला खंड केवल यह दिखाने के लिए है कि NCERT का रसायन आपके आसपास घट रहा है — खदानों के नाम परीक्षा का भाग नहीं हैं।
चित्र — यहाँ आयनिक बंध सीखा (इलेक्ट्रॉन का लेन-देन)। अगले अध्याय में सहसंयोजी बंध आएगा (इलेक्ट्रॉन की साझेदारी)।

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