कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 3 धातु एवं अधातु | सचित्र नोट्स, बोर्ड चित्र एवं प्रश्न उत्तर

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कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 3 — धातु एवं अधातु

NCERT / RBSE पाठ्यक्रम 2026–27 · सचित्र नोट्स, बोर्ड में बनाने वाले चित्र, अंक योजना, राजस्थान की खदानें एवं स्व-परीक्षण

दिल्ली में कुतुब मीनार के पास लोहे का एक स्तंभ खड़ा है। उसे भारत के लोहारों ने 1600 वर्ष से भी पहले बनाया था — और आज तक उस पर जंग नहीं लगी।

जबकि आपके घर का लोहे का गेट दो बरसात में जंग खा जाता है।

ऐसा क्यों? और लोहा आता कहाँ से है — मिट्टी में लोहा तो दिखता नहीं? इस अध्याय के अंत तक आप दोनों का उत्तर दे सकेंगे।
एक नज़र में
अध्याय3 — धातु एवं अधातु
EnglishMetals and Non-metals
अंक भार5 अंक (कुल 80 में से)
चित्र-प्रश्नइलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना, विद्युत अपघटनी परिष्करण, जंग के प्रयोग
पुस्तकविज्ञान, एन.सी.ई.आर.टी.
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  1. सक्रियता श्रेणी: K > Na > Ca > Mg > Al > Zn > Fe > Pb > [H] > Cu > Hg > Ag > Au
  2. धातु + ऑक्सीजन → क्षारकीय ऑक्साइड; Al2O3, ZnO उभयधर्मी (अम्ल और क्षार दोनों से क्रिया)
  3. Na, K केरोसिन में रखते हैं — वायु में आग पकड़ लेते हैं
  4. आयनिक बंध = धातु इलेक्ट्रॉन देती है, अधातु लेती है (Na+Cl−)
  5. आयनिक यौगिक: उच्च गलनांक, जल में घुलनशील, गलित/विलयन में विद्युत चालक, ठोस में नहीं
  6. निष्कर्षण: ऊपर वाली धातु = विद्युत अपघटन · बीच वाली = भर्जन/निस्तापन + कार्बन · नीचे वाली = केवल गरम करना
  7. भर्जन = सल्फाइड + वायु में गरम · निस्तापन = कार्बोनेट + वायु रहित गरम
  8. परिष्करण: अशुद्ध धातु = ऐनोड, शुद्ध पत्ती = कैथोड
  9. जंग के लिए वायु और जल दोनों आवश्यक

1. पहले यह जाँचिए

  1. सोडियम (परमाणु क्रमांक 11) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
  2. अम्ल + धातु से कौन-सी गैस निकलती है? (अध्याय 2)
  3. Fe + CuSO4 में कौन किसे विस्थापित करता है? (अध्याय 1)
उत्तर देखें

1. 2, 8, 1 — अंतिम कोश में केवल एक इलेक्ट्रॉन।
2. हाइड्रोजन।
3. लोहा ताँबे को विस्थापित करता है, क्योंकि लोहा अधिक क्रियाशील है। यही बात आगे "सक्रियता श्रेणी" में व्यवस्थित होगी।

2. भौतिक गुण

गुणधातुअधातु
चमक (धात्विक द्युति)चमकीलीचमक नहीं — अपवाद आयोडीन
कठोरताप्रायः कठोर — अपवाद Na, K (चाकू से कट जाते हैं)प्रायः नरम — अपवाद हीरा (सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ)
आघातवर्ध्यता (पीटकर पतली चादर बनना)हाँ — सोना और चाँदी सबसे अधिकनहीं — भंगुर (टूट जाते हैं)
तन्यता (खींचकर तार बनना)हाँ — 1 ग्राम सोने से लगभग 2 किमी लंबा तारनहीं
ऊष्मा चालकताअच्छी — चाँदी और ताँबा सर्वश्रेष्ठ; सीसा और पारा दुर्बलदुर्बल
विद्युत चालकताअच्छीकुचालक — अपवाद ग्रेफाइट
ध्वानिक (टकराने पर आवाज़)हाँ — इसीलिए मंदिर की घंटी धातु कीनहीं
अवस्थाठोस — अपवाद पारा (द्रव)ठोस या गैस — ब्रोमीन द्रव
गलनांकप्रायः उच्च — अपवाद गैलियम, सीज़ियम (हथेली पर पिघल जाते हैं)प्रायः निम्न
अपवाद ही प्रश्न बनते हैं। ऊपर की तालिका में मोटे अक्षरों वाले सभी अपवाद — आयोडीन, Na-K, हीरा, पारा, ब्रोमीन, ग्रेफाइट, गैलियम — एक-अंक वाले प्रश्नों का खज़ाना हैं। इन्हें अलग से याद कर लीजिए।
रुकिए और सोचिए — बिजली के तार ताँबे के होते हैं, पर तार के ऊपर प्लास्टिक चढ़ा होता है। दोनों का कारण इसी तालिका में है। क्या है?
उत्तर

ताँबा विद्युत का अच्छा चालक और तन्य है — इसलिए तार। प्लास्टिक कुचालक है — इसलिए ऊपर, ताकि करंट हाथ में न आए।

3. धातुओं के रासायनिक गुण

(क) धातु + ऑक्सीजन → धातु ऑक्साइड

2Cu(s) + O2(g) Δ→ 2CuO(s)  — काला कॉपर ऑक्साइड
4Al(s) + 3O2(g) → 2Al2O3(s)

अधिकांश धातु ऑक्साइड क्षारकीय होते हैं। पर कुछ ऑक्साइड अम्ल और क्षारक — दोनों से क्रिया करते हैं। ये उभयधर्मी ऑक्साइड कहलाते हैं (यानी दोनों तरह का स्वभाव रखने वाले)।

Al2O3 + 6HCl → 2AlCl3 + 3H2O  — अम्ल से
Al2O3 + 2NaOH → 2NaAlO2 + H2O  — क्षारक से (सोडियम ऐलुमिनेट)
धातुऑक्सीजन के साथ व्यवहार
K, Naइतनी तीव्र क्रिया कि खुले में आग पकड़ लेती हैं — इसीलिए केरोसिन में डुबोकर रखते हैं
Mg, Al, Zn, Pbसतह पर ऑक्साइड की पतली सुरक्षा परत बन जाती है, जो आगे क्रिया रोक देती है
Feटुकड़ा नहीं जलता, पर लौह चूर्ण लौ में डालें तो चमकीली चिंगारियाँ
Cuजलता नहीं, पर गरम करने पर काली परत
Ag, Auउच्च ताप पर भी क्रिया नहीं
ऐनोडीकरण: ऐलुमिनियम पर जान-बूझकर मोटी ऑक्साइड परत चढ़ाई जाती है, ताकि वह संक्षारण से बचे। प्रेशर कुकर और खिड़कियों की चौखट इसीलिए चमकदार रहती हैं।

(ख) धातु + जल → धातु ऑक्साइड/हाइड्रॉक्साइड + हाइड्रोजन

2Na(s) + 2H2O(l) → 2NaOH(aq) + H2(g) + ऊष्मा
Ca(s) + 2H2O(l) → Ca(OH)2(aq) + H2(g)
2Al(s) + 3H2O(g) → Al2O3(s) + 3H2(g)  — भाप से
3Fe(s) + 4H2O(g) → Fe3O4(s) + 4H2(g)  — भाप से
धातुजल के साथ
K, Naठंडे जल से ही तीव्र क्रिया; इतनी ऊष्मा कि H2 आग पकड़ लेती है
Caकम तीव्र; H2 के बुलबुले चिपकने से तैरने लगता है
Mgगरम जल से क्रिया; यह भी तैरता है
Al, Fe, Znन ठंडे, न गरम जल से — केवल भाप से
Pb, Cu, Ag, Auजल से कोई क्रिया नहीं

(ग) धातु + तनु अम्ल → लवण + हाइड्रोजन

Fe(s) + 2HCl(aq) → FeCl2(aq) + H2(g)
Mg(s) + 2HCl(aq) → MgCl2(aq) + H2(g)
बोर्ड का प्रिय अपवाद: धातु को नाइट्रिक अम्ल (HNO3) में डालने पर प्रायः हाइड्रोजन नहीं निकलती। कारण — HNO3 प्रबल ऑक्सीकारक है और बनी हुई H2 को जल में बदल देता है। केवल Mg और Mn अति तनु HNO3 से H2 देते हैं।

(घ) धातु + दूसरी धातु का लवण

अधिक क्रियाशील धातु कम क्रियाशील को उसके लवण-विलयन से हटा देती है — यह अध्याय 1 की विस्थापन अभिक्रिया ही है। Fe + CuSO4 → FeSO4 + Cu

4. सक्रियता श्रेणी

धातुओं को उनकी क्रियाशीलता के घटते क्रम में लगाने पर जो सूची बनती है, उसे सक्रियता श्रेणी कहते हैं। पूरे अध्याय की चाबी यही है — ऊपर के सभी गुण और आगे का निष्कर्षण, सब इसी से तय होता है।

सक्रियता श्रेणी — ऊपर सबसे अधिक क्रियाशील K — पोटैशियम Na — सोडियम Ca — कैल्सियम Mg — मैग्नीशियम Al — ऐलुमिनियम Zn — जस्ता Fe — लोहा Pb — सीसा [ H ] — हाइड्रोजन Cu — ताँबा Hg — पारा Ag — चाँदी Au — सोना क्रियाशीलता घटती है ऊपर वाली धातुएँ ठंडे जल, अम्ल, वायु से तीव्र क्रिया प्रकृति में कभी स्वतंत्र नहीं मिलतीं निष्कर्षण: विद्युत अपघटन बीच वाली धातुएँ भाप और अम्ल से क्रिया निष्कर्षण: कार्बन से अपचयन H से नीचे वाली धातुएँ तनु अम्ल से H₂ नहीं देतीं सोना-चाँदी मुक्त अवस्था में मिलते हैं निष्कर्षण: केवल गरम करना

चित्र 1 — सक्रियता श्रेणी। रंग के तीन समूह ही आगे के तीन निष्कर्षण-मार्ग हैं।

याद रखने का सूत्र — हर शब्द का पहला अक्षर एक धातु:

पोटली सोने की कैसे मैं ऐसे ज़िद से आज लेकर हाथ, कॉपी मत सिखा गोपाल

पो-K  सो-Na  कै-Ca  मै-Mg  ऐ-Al  ज़ि-Zn  आ-Fe (आयरन)  ले-Pb (लेड)  हा-H  कॉ-Cu (कॉपर)  म-Hg (मर्करी)  सि-Ag (सिल्वर)  गो-Au (गोल्ड)
रुकिए और सोचिए — ताँबे के बर्तन में दही क्यों नहीं जमाते, जबकि दही अम्लीय है और ताँबा तो H से नीचे है?
उत्तर

ताँबा तनु अम्ल से H2 नहीं देता — यह सही है। पर दही का अम्ल समय के साथ ताँबे पर जमी ऑक्साइड और कार्बोनेट परत से क्रिया कर विषैले ताँबे के यौगिक बना सकता है। इसलिए दही, अचार जैसे अम्लीय पदार्थ पीतल-ताँबे में नहीं रखे जाते।

5. धातु और अधातु की अभिक्रिया — आयनिक बंध

उत्कृष्ट गैसें (He, Ne, Ar) क्रिया नहीं करतीं क्योंकि उनका बाहरी कोश पूरा भरा होता है। बाकी सभी तत्व भी यही स्थिर अवस्था पाना चाहते हैं — या तो इलेक्ट्रॉन देकर, या लेकर।

सोडियम क्लोराइड का बनना — इलेक्ट्रॉन का स्थानांतरण Na Na (2, 8, 1) Cl Cl (2, 8, 7) एक इलेक्ट्रॉन गया → Na⁺ Cl⁻

चित्र 2 — सोडियम अपना एकमात्र बाहरी इलेक्ट्रॉन क्लोरीन को दे देता है। Na+ (2,8) और Cl− (2,8,8) — दोनों का बाहरी कोश पूरा।

इस प्रकार इलेक्ट्रॉन के पूर्ण स्थानांतरण से बने धनायन और ऋणायन आपस में प्रबल स्थिरवैद्युत बल से बँध जाते हैं। इसे आयनिक बंध (या वैद्युत संयोजी बंध) कहते हैं, और ऐसे यौगिक आयनिक यौगिक।

तत्वविन्यासक्या करता हैबना आयन
Na (11)2, 8, 11 इलेक्ट्रॉन देता हैNa+ (2, 8)
Mg (12)2, 8, 22 इलेक्ट्रॉन देता हैMg2+ (2, 8)
Cl (17)2, 8, 71 इलेक्ट्रॉन लेता हैCl− (2, 8, 8)
O (8)2, 62 इलेक्ट्रॉन लेता हैO2− (2, 8)
MgCl2 में दो क्लोरीन क्यों? क्योंकि Mg को दो इलेक्ट्रॉन देने हैं, और एक क्लोरीन केवल एक ले सकता है। इसलिए दो क्लोरीन चाहिए। इसका चित्र बनाना खंड 12 में सीखेंगे — बोर्ड में यही आता है।

6. आयनिक यौगिकों के गुण

गुणकारण
ठोस और कठोर, पर भंगुरधनायन और ऋणायन के बीच प्रबल आकर्षण
उच्च गलनांक व क्वथनांकप्रबल अंतर-आयनिक आकर्षण तोड़ने में अधिक ऊर्जा लगती है
जल में घुलनशीलजल ध्रुवीय विलायक है
केरोसिन-पेट्रोल में अघुलनशीलये अध्रुवीय विलायक हैं
गलित अवस्था या विलयन में विद्युत चालकआयन गति कर सकते हैं
ठोस अवस्था में कुचालकआयन अपने स्थान पर बँधे रहते हैं, चल नहीं सकते
रुकिए और सोचिए — नमक का डला बिजली नहीं चलाता, पर नमक का घोल चलाता है। एक ही पदार्थ — अंतर क्यों?
उत्तर

ठोस नमक में Na+ और Cl− आयन अपनी जगह जकड़े रहते हैं, चल नहीं सकते। पानी में घुलते ही आयन स्वतंत्र हो जाते हैं और आवेश ले जा सकते हैं। विद्युत धारा = आवेश का बहना। चलने वाले आवेश नहीं, तो धारा नहीं।

7. धातुओं की प्राप्ति

पृथ्वी की भूपर्पटी ही धातुओं का मुख्य स्रोत है। समुद्री जल में भी कुछ घुलनशील लवण होते हैं, जैसे सोडियम क्लोराइड और मैग्नीशियम क्लोराइड।

शब्दअर्थ
खनिजप्रकृति में पाए जाने वाले तत्व या यौगिक
अयस्कवे खनिज जिनसे धातु लाभप्रद ढंग से निकाली जा सके। हर अयस्क खनिज है, पर हर खनिज अयस्क नहीं।
गैंग (आधात्री)अयस्क के साथ निकलने वाली मिट्टी, बालू जैसी अशुद्धियाँ

सक्रियता श्रेणी में सबसे नीचे की धातुएँ — सोना, चाँदी, प्लैटिनम — इतनी कम क्रियाशील हैं कि प्रकृति में मुक्त अवस्था में मिल जाती हैं। ऊपर की धातुएँ कभी स्वतंत्र नहीं मिलतीं — सदैव यौगिक के रूप में।

8. राजस्थान की खदानें — यह अध्याय आपके आँगन में है

अयस्क और निष्कर्षण की बात किताबी लग सकती है। पर राजस्थान के विद्यार्थी के लिए यह उसके ज़िले की बात है। देश का सबसे बड़ा सीसा-जस्ता भंडार राजस्थान में है।

स्थानज़िलाधातु
जावरउदयपुरसीसा-जस्ता — विश्व के सबसे पुराने खनन क्षेत्रों में
रामपुरा-आगूचाभीलवाड़ाजस्ता-सीसा — विश्व की सबसे बड़ी जस्ता खदानों में
राजपुरा-दरीबाराजसमंदजस्ता-सीसा-चाँदी
खेतड़ीझुंझुनूंताँबा — साथ में उप-उत्पाद के रूप में सोना भी

सबसे महत्त्वपूर्ण बात: राजस्थान में जस्ते का मुख्य अयस्क जिंक ब्लेंड (ZnS) है — एक सल्फाइड अयस्क। और अगले खंड में NCERT जस्ता निकालने का जो उदाहरण देता है, वह ठीक यही अयस्क है। यानी जब आप भर्जन का समीकरण लिखेंगे, तो वह भीलवाड़ा-उदयपुर की खदानों का रसायन होगा।

9. धातुओं का निष्कर्षण

अयस्क से शुद्ध धातु निकालने के तीन चरण हैं — समृद्धीकरण (गैंग हटाना), अपचयन (धातु निकालना), और परिष्करण (शुद्ध करना)। बीच वाला चरण धातु की सक्रियता पर निर्भर है।

अयस्क समृद्धीकरण — गैंग हटाना अधिक क्रियाशील K, Na, Ca, Mg, Al मध्यम क्रियाशील Zn, Fe, Pb कम क्रियाशील Hg, Cu गलित क्लोराइड का विद्युत अपघटन सल्फाइड → भर्जन कार्बोनेट → निस्तापन ऑक्साइड + कार्बन → धातु सल्फाइड को केवल वायु में गरम करना परिष्करण → शुद्ध धातु

चित्र 3 — धातु की सक्रियता तय करती है कि उसे किस मार्ग से निकाला जाएगा। चित्र 1 के तीन रंग यहाँ तीन मार्ग बन गए।

(क) कम क्रियाशील धातुएँ — केवल गरम करके

2HgS(s) + 3O2(g) Δ→ 2HgO(s) + 2SO2(g)
2HgO(s) Δ→ 2Hg(l) + O2(g)

2Cu2S + 3O2 Δ→ 2Cu2O + 2SO2
2Cu2O + Cu2S Δ→ 6Cu + SO2

(ख) मध्यम क्रियाशील धातुएँ — पहले ऑक्साइड, फिर अपचयन

कार्बन से ऑक्साइड को अपचयित करना आसान है, इसलिए पहले अयस्क को ऑक्साइड में बदला जाता है:

विधिकिस अयस्क परकैसे
भर्जनसल्फाइडअधिक वायु में तेज़ गरम करना
निस्तापनकार्बोनेटसीमित वायु में तेज़ गरम करना
भर्जन: 2ZnS(s) + 3O2(g) Δ→ 2ZnO(s) + 2SO2(g)  — यही राजस्थान का जिंक ब्लेंड है
निस्तापन: ZnCO3(s) Δ→ ZnO(s) + CO2(g)
अपचयन: ZnO(s) + C(s) → Zn(s) + CO(g)
थर्मिट अभिक्रिया — जब कार्बन की जगह अधिक क्रियाशील धातु अपचायक बने:
Fe2O3(s) + 2Al(s) → 2Fe(l) + Al2O3(s) + ऊष्मा

इतनी ऊष्मा निकलती है कि लोहा पिघली अवस्था में बनता है। इसका उपयोग रेल की पटरियों और मशीनों की टूटी दरारों को जोड़ने में होता है।

(ग) अधिक क्रियाशील धातुएँ — विद्युत अपघटन

Na, Mg, Ca, Al कार्बन से अधिक क्रियाशील हैं, इसलिए कार्बन इन्हें अपचयित नहीं कर सकता। इन्हें इनके गलित क्लोराइड के विद्युत अपघटन से निकालते हैं:

कैथोड पर: Na+ + e− → Na
ऐनोड पर: 2Cl− → Cl2 + 2e−

ऐलुमिनियम इसी प्रकार ऐलुमिनियम ऑक्साइड के विद्युत अपघटनी अपचयन से प्राप्त होता है।

10. धातुओं का परिष्करण

निष्कर्षण से मिली धातु में अभी भी अशुद्धियाँ रहती हैं। ताँबा, जस्ता, टिन, निकल, चाँदी, सोना आदि का परिष्करण प्रायः विद्युत अपघटनी विधि से होता है।

ताँबे का विद्युत अपघटनी परिष्करण बैटरी + − Cu²⁺ आयन → ऐनोड (+)अशुद्ध ताँबा कैथोड (−)शुद्ध ताँबेकी पतली पट्टी विद्युतअपघट्य:अम्लीय CuSO₄ ऐनोड पंक(अविलेय अशुद्धि)

चित्र 4 — अशुद्ध ताँबा ऐनोड से घुलता है, शुद्ध ताँबा कैथोड पर जमता है। विलेय अशुद्धियाँ विलयन में रहती हैं, अविलेय नीचे ऐनोड पंक बनकर बैठ जाती हैं।

भागक्या होता हैयाद रखने का तरीका
ऐनोड (+)अशुद्ध धातु — घुलकर विलयन में जाती हैअ से अशुद्ध, अ से अनोड
कैथोड (−)शुद्ध धातु की पतली पट्टी — इस पर शुद्ध धातु जमती हैकैथोड मोटा होता जाता है
विद्युत अपघट्यउसी धातु के लवण का विलयनताँबे के लिए CuSO4
ऐनोड पंकअविलेय अशुद्धियाँ ऐनोड के नीचे बैठ जाती हैंइसमें प्रायः चाँदी-सोना भी मिलता है

11. संक्षारण और उससे बचाव

अध्याय 1 में आपने देखा कि लोहे पर भूरी जंग, चाँदी पर काली और ताँबे पर हरी परत जमती है। यहाँ प्रश्न है — जंग लगने के लिए क्या-क्या ज़रूरी है? इसका उत्तर तीन परखनलियों वाला प्रसिद्ध प्रयोग देता है (चित्र खंड 12 में)।

परखनलीक्या हैपरिणाम
Aकील + साधारण जल (वायु भी है)जंग लगी
Bकील + उबला हुआ जल + ऊपर तेल की परत (वायु नहीं)जंग नहीं
Cकील + निर्जल कैल्सियम क्लोराइड (नमी नहीं)जंग नहीं
निष्कर्ष: जंग लगने के लिए वायु और जल — दोनों आवश्यक हैं। उबालने से जल में घुली वायु निकल जाती है, और तेल की परत नई वायु घुलने नहीं देती। कैल्सियम क्लोराइड नमी सोख लेता है।

बचाव के उपाय

  • पेंट, तेल या ग्रीस लगाना
  • यशदलेपन — लोहे पर जस्ते की परत (फिर राजस्थान का जस्ता काम आया)
  • क्रोमियम लेपन, ऐनोडीकरण
  • मिश्रातु बनाना

मिश्रातु

दो या अधिक धातुओं (अथवा धातु और अधातु) का समांगी मिश्रण मिश्रातु कहलाता है। मिश्रातु बनाने से धातु के गुण सुधर जाते हैं।

मिश्रातुघटकविशेषता
स्टेनलेस स्टीललोहा + निकल + क्रोमियमकठोर, जंग नहीं लगती
पीतलताँबा + जस्ताबर्तन, सजावट
काँसाताँबा + टिनमूर्तियाँ, पदक
सोल्डरसीसा + टिननिम्न गलनांक — विद्युत तार जोड़ने में
अमलगमपारा + कोई अन्य धातुपारे वाला कोई भी मिश्रातु
सोने का कैरेट: शुद्ध सोना 24 कैरेट होता है और बहुत नरम होता है। आभूषण के लिए प्रायः 22 कैरेट — यानी 22 भाग सोना और 2 भाग ताँबा या चाँदी — ताकि वह कठोर हो जाए।
अब कुतुब मीनार के स्तंभ का उत्तर

भारत के प्राचीन लोहारों ने ऐसी विधि से लोहा तैयार किया जिससे उस पर जंग नहीं लगी — और वह 1600 वर्ष से अधिक समय से खड़ा है। यह प्राचीन भारतीय धातुकर्म की उत्कृष्टता का प्रमाण है। आपके घर का गेट साधारण लोहे का है, बिना किसी सुरक्षा के — वायु और वर्षा का जल मिलते ही जंग शुरू।

12. बोर्ड में बनाने वाले चित्र

इस अध्याय से चित्र वाले प्रश्न लगभग तय आते हैं। चित्र देखना और चित्र बनाना — दो अलग कौशल हैं। नीचे हर चित्र के साथ बनाने के चरण दिए हैं। कागज़-पेंसिल लेकर साथ-साथ बनाइए।

चित्र A — MgCl2 की इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना

Mg Cl Cl → [Mg]²⁺ [:Cl:]⁻ [:Cl:]⁻ लाल बिंदु = Mg के इलेक्ट्रॉन · हरे बिंदु = Cl के इलेक्ट्रॉन

चित्र A — Mg के दो बाहरी इलेक्ट्रॉन दो क्लोरीन परमाणुओं में एक-एक चले जाते हैं।

ऐसे बनाइए — 4 चरण
  1. बाएँ Mg लिखिए, उसके पास दो बिंदु (बाहरी इलेक्ट्रॉन)।
  2. दाएँ दो Cl लिखिए, हर एक के चारों ओर सात इलेक्ट्रॉन। ऊपर चित्र में ये हरे रंग से अलग दिखाए हैं — पर परीक्षा की कॉपी में रंग नहीं होता, इसलिए इन्हें क्रॉस (×) से बनाइए और Mg के इलेक्ट्रॉन को बिंदु (•) से।
  3. Mg के प्रत्येक बिंदु से एक Cl की ओर मुड़ा हुआ तीर खींचिए।
  4. तीर के बाद उत्पाद लिखिए: [Mg]2+ 2[:Cl:]− — कोष्ठक और आवेश लिखना न भूलें, आधा अंक इसी का है।

चित्र B — विद्युत अपघटनी परिष्करण

इसका पूरा रंगीन चित्र ऊपर खंड 10, चित्र 4 में है।

ऐसे बनाइए — 5 चरण
  1. एक चौड़ा आयताकार बर्तन बनाइए, आधे से ऊपर तक विलयन की रेखा।
  2. बाएँ एक मोटी पट्टी — नामांकन: "ऐनोड (+), अशुद्ध ताँबा"।
  3. दाएँ एक पतली पट्टी — नामांकन: "कैथोड (−), शुद्ध ताँबा"।
  4. ऊपर बैटरी — ऐनोड धन (+) सिरे से, कैथोड ऋण (−) सिरे से।
  5. ऐनोड के नीचे ढेर — "ऐनोड पंक"; विलयन पर — "अम्लीय कॉपर सल्फेट विलयन"।
सबसे आम गलती: ऐनोड-कैथोड उलट देना। याद रखें — अशुद्ध = अनोड।

चित्र C — जंग लगने की शर्तें (तीन परखनली)

A B C जंग लगी कीलसाधारण जल तेल की परतउबला हुआ जल सूखी वायुनिर्जलCaCl₂ वायु + जल → जंग केवल जल → नहीं केवल वायु → नहीं

चित्र C — केवल परखनली A की कील पर जंग लगती है, जहाँ वायु और जल दोनों उपलब्ध हैं।

ऐसे बनाइए — 4 चरण
  1. तीन परखनलियाँ बराबर दूरी पर, ऊपर कॉर्क, और A, B, C लिखें।
  2. A में आधे तक जल; B में जल + ऊपर मोटी रेखा से तेल की परत; C में नीचे दानों जैसे बिंदु (CaCl2)।
  3. हर परखनली में बीच में एक कील। A की कील पर छोटे धब्बे — जंग दिखाने के लिए।
  4. हर परखनली के नीचे एक पंक्ति का निष्कर्ष लिखें। नामांकन के बिना चित्र के आधे अंक ही मिलते हैं।

13. अंक योजना — परीक्षक कैसे अंक देता है

नीचे एक चार-अंक प्रश्न का आदर्श उत्तर है। हर भाग के आगे लिखा है कि वह कितने अंक का माना जाता है। (यह परीक्षकों की सामान्य पद्धति पर आधारित उदाहरण है — बोर्ड की आधिकारिक अंक योजना नहीं।)

प्रश्न (4 अंक): ताँबे के विद्युत अपघटनी परिष्करण का नामांकित चित्र सहित वर्णन कीजिए।

उत्तर:

नामांकित चित्र — ऐनोड, कैथोड, विद्युत अपघट्य, ऐनोड पंक, बैटरी के सिरे। 2 अंक

अशुद्ध ताँबे को ऐनोड तथा शुद्ध ताँबे की पतली पट्टी को कैथोड बनाया जाता है। अम्लीय कॉपर सल्फेट विलयन विद्युत अपघट्य है। 1 अंक

धारा प्रवाहित करने पर ऐनोड से ताँबा घुलकर विलयन में जाता है और उतना ही शुद्ध ताँबा कैथोड पर जमा होता है। विलेय अशुद्धियाँ विलयन में तथा अविलेय अशुद्धियाँ ऐनोड के नीचे ऐनोड पंक के रूप में एकत्रित होती हैं। 1 अंक

इससे क्या सीखें? चार अंक में से आधे अंक चित्र के हैं। जो बच्चा चित्र छोड़ देता है, वह पूरा वर्णन लिखकर भी अधिकतम दो ही पाता है। और चित्र में भी नामांकन ही असली अंक है — सुंदरता नहीं।

14. समीकरण संग्रह

2Cu + O2 → 2CuO
4Al + 3O2 → 2Al2O3
Al2O3 + 6HCl → 2AlCl3 + 3H2O
Al2O3 + 2NaOH → 2NaAlO2 + H2O
2Na + 2H2O → 2NaOH + H2 + ऊष्मा
Ca + 2H2O → Ca(OH)2 + H2
2Al + 3H2O → Al2O3 + 3H2
3Fe + 4H2O → Fe3O4 + 4H2
Fe + 2HCl → FeCl2 + H2
2HgS + 3O2 → 2HgO + 2SO2  |  2HgO → 2Hg + O2
2Cu2S + 3O2 → 2Cu2O + 2SO2  |  2Cu2O + Cu2S → 6Cu + SO2
2ZnS + 3O2 → 2ZnO + 2SO2
ZnCO3 → ZnO + CO2
ZnO + C → Zn + CO
Fe2O3 + 2Al → 2Fe + Al2O3 + ऊष्मा

15. आम भ्रांतियाँ

जो अक्सर समझा जाता हैसही बात
"सभी धातुएँ कठोर होती हैं"सोडियम और पोटैशियम चाकू से कट जाते हैं।
"अधातुएँ बिजली नहीं चलातीं"ग्रेफाइट अधातु है और बिजली का अच्छा चालक है — इसीलिए सेल में इलेक्ट्रोड।
"खनिज और अयस्क एक ही हैं"अयस्क वही खनिज है जिससे धातु लाभप्रद ढंग से निकले।
"भर्जन और निस्तापन एक ही हैं"भर्जन — सल्फाइड, अधिक वायु में। निस्तापन — कार्बोनेट, सीमित वायु में।
"आयनिक यौगिक सदैव विद्युत चालक हैं"ठोस अवस्था में नहीं — केवल गलित या घुलित अवस्था में।
"जंग केवल पानी से लगती है"वायु और जल दोनों चाहिए — परखनली B इसका प्रमाण है।
"24 कैरेट के गहने सबसे अच्छे"24 कैरेट बहुत नरम होता है — गहने प्रायः 22 कैरेट के बनते हैं।

16. अंक क्यों कटते हैं

  1. चित्र बिना नामांकन। सुंदर चित्र पर शून्य, साधारण नामांकित चित्र पर पूरे अंक।
  2. ऐनोड-कैथोड उलट देना परिष्करण में।
  3. इलेक्ट्रॉन-बिंदु संरचना में आवेश और कोष्ठक छोड़ना — [Mg]2+ और [:Cl:]−।
  4. भर्जन-निस्तापन की परिभाषा में "वायु की मात्रा" न लिखना।
  5. उभयधर्मी ऑक्साइड के दोनों समीकरण न देना — अम्ल वाला भी, क्षार वाला भी।
  6. आयनिक यौगिक की चालकता में अवस्था न बताना — "ठोस में नहीं, गलित में हाँ"।
  7. अपवाद भूल जाना — Na-K नरम, पारा द्रव, ग्रेफाइट चालक, आयोडीन चमकीला।

17. प्रश्न — तीन स्तर

आधार

प्र.1 कमरे के ताप पर द्रव अवस्था वाली धातु का नाम?

उत्तर

पारा।

प्र.2 सोडियम को केरोसिन में क्यों रखते हैं?

उत्तर

वायु में यह इतनी तीव्र क्रिया करता है कि आग पकड़ लेता है। केरोसिन इसे वायु और नमी से अलग रखता है।

प्र.3 पीतल के घटक लिखिए।

उत्तर

ताँबा और जस्ता।

बोर्ड

प्र.4 (2 अंक) उभयधर्मी ऑक्साइड क्या हैं? एक उदाहरण दोनों समीकरणों सहित दीजिए।

उत्तर

वे ऑक्साइड जो अम्ल और क्षारक दोनों से क्रिया कर लवण और जल देते हैं। उदाहरण — Al2O3:
Al2O3 + 6HCl → 2AlCl3 + 3H2O
Al2O3 + 2NaOH → 2NaAlO2 + H2O

प्र.5 (3 अंक) भर्जन और निस्तापन में अंतर समीकरण सहित लिखिए।

उत्तर

भर्जन — सल्फाइड अयस्क को अधिक वायु में तेज़ गरम करना:
2ZnS + 3O2 → 2ZnO + 2SO2

निस्तापन — कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में तेज़ गरम करना:
ZnCO3 → ZnO + CO2

प्र.6 (3 अंक) आयनिक यौगिकों के गलनांक उच्च क्यों होते हैं? ये ठोस अवस्था में विद्युत का चालन क्यों नहीं करते?

उत्तर

धनायन और ऋणायन के बीच प्रबल स्थिरवैद्युत आकर्षण होता है; इसे तोड़ने के लिए अधिक ऊर्जा चाहिए, इसलिए गलनांक उच्च।

ठोस अवस्था में आयन अपने स्थान पर बँधे रहते हैं, गति नहीं कर सकते। विद्युत चालन के लिए आवेशित कणों का गतिशील होना आवश्यक है — जो गलित या घुलित अवस्था में ही संभव है।

प्र.7 (4 अंक) ताँबे के विद्युत अपघटनी परिष्करण का नामांकित चित्र सहित वर्णन कीजिए।

उत्तर

इसका आदर्श उत्तर — अंक-विभाजन सहित — ऊपर खंड 13, अंक योजना में दिया गया है। चित्र खंड 10 और खंड 12 में।

चुनौती

प्र.8 भीलवाड़ा की खदान से जिंक ब्लेंड निकला। उससे शुद्ध जस्ता बनाने के सभी चरण क्रम से, समीकरणों सहित लिखिए।

उत्तर

1. समृद्धीकरण — अयस्क से मिट्टी-बालू (गैंग) हटाना।
2. भर्जन — सल्फाइड होने के कारण अधिक वायु में गरम करना:
   2ZnS + 3O2 → 2ZnO + 2SO2
3. अपचयन — कार्बन से:
   ZnO + C → Zn + CO
4. परिष्करण — विद्युत अपघटनी विधि से: अशुद्ध जस्ता ऐनोड, शुद्ध जस्ते की पट्टी कैथोड।

क्यों कार्बन, विद्युत अपघटन नहीं? क्योंकि जस्ता सक्रियता श्रेणी के मध्य में है — कार्बन उसे अपचयित करने में सक्षम है।

प्र.9 एक विद्यार्थी ने नीले कॉपर सल्फेट विलयन को लोहे की बाल्टी में रख दिया। अगली सुबह क्या दिखेगा और क्यों? यदि बाल्टी चाँदी की होती तो?

उत्तर

लोहा ताँबे से अधिक क्रियाशील है, इसलिए विस्थापन होगा: Fe + CuSO4 → FeSO4 + Cu। विलयन का नीला रंग हल्का होकर हरा हो जाएगा, और बाल्टी की भीतरी सतह पर लाल-भूरा ताँबा जमेगा। बाल्टी में छेद भी हो सकते हैं, क्योंकि लोहा घुल रहा है।

चाँदी ताँबे से कम क्रियाशील है — इसलिए कोई क्रिया नहीं होगी।

प्र.10 ऐलुमिनियम सक्रियता श्रेणी में लोहे से ऊपर है — यानी अधिक क्रियाशील। फिर ऐलुमिनियम के बर्तन पर जंग जैसा क्षय क्यों नहीं दिखता, जबकि लोहे पर दिखता है?

उत्तर

ऐलुमिनियम वायु से तुरंत क्रिया करके अपनी सतह पर Al2O3 की पतली, कसी हुई परत बना लेता है। यह परत नीचे की धातु तक वायु-जल को पहुँचने नहीं देती — स्वयं ही रक्षक बन जाती है।

लोहे की जंग भुरभुरी होती है, झड़ती रहती है, और नीचे की ताज़ा धातु फिर वायु के संपर्क में आती रहती है। इसलिए लोहा अंदर तक खोखला होता जाता है।

अधिक क्रियाशील होना और अधिक संक्षारित होना — दोनों एक बात नहीं।

18. स्व-परीक्षण — 15 प्रश्न

कागज़ पर उत्तर लिखिए, फिर नीचे खोलिए। 12 या अधिक सही = अध्याय तैयार।

  1. चमकीली अधातु का नाम?
  2. विद्युत की सुचालक अधातु?
  3. सबसे अधिक आघातवर्ध्य धातु?
  4. दो उभयधर्मी ऑक्साइड के नाम।
  5. कौन-सी धातु ठंडे जल में डालते ही तैरने लगती है?
  6. सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन के ठीक नीचे कौन?
  7. Na+ का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास?
  8. गैंग किसे कहते हैं?
  9. राजस्थान में ताँबे की प्रमुख खदान कहाँ है?
  10. कार्बोनेट अयस्क पर कौन-सी विधि लगती है?
  11. थर्मिट अभिक्रिया का एक उपयोग?
  12. परिष्करण में कैथोड किसका बनता है?
  13. जंग के लिए कौन-सी दो चीज़ें ज़रूरी?
  14. स्टेनलेस स्टील के घटक?
  15. 22 कैरेट सोने में कितने भाग सोना?
उत्तर देखें

1. आयोडीन  |  2. ग्रेफाइट  |  3. सोना  |  4. Al2O3 और ZnO  |  5. कैल्सियम  |  6. ताँबा (Cu)  |  7. 2, 8  |  8. अयस्क के साथ आने वाली मिट्टी-बालू जैसी अशुद्धि  |  9. खेतड़ी, झुंझुनूं  |  10. निस्तापन  |  11. रेल की पटरियाँ जोड़ना  |  12. शुद्ध धातु की पतली पट्टी  |  13. वायु और जल  |  14. लोहा, निकल, क्रोमियम  |  15. 22 भाग (24 में से)

19. शब्दावली

हिंदीEnglishहिंदीEnglish
आघातवर्ध्यताMalleabilityअयस्कOre
तन्यताDuctilityगैंगGangue
ध्वानिकSonorousभर्जनRoasting
उभयधर्मीAmphotericनिस्तापनCalcination
सक्रियता श्रेणीReactivity seriesपरिष्करणRefining
आयनिक बंधIonic bondऐनोड पंकAnode mud
धनायनCationमिश्रातुAlloy
ऋणायनAnionऐनोडीकरणAnodising

20. अभिभावक एवं शिक्षक के लिए

पाँच मिनट में जाँचिए। ये पाँच ठीक बता दे, तो अध्याय की रीढ़ बच्चे को आ गई।
  1. सक्रियता श्रेणी सुनाइए। (स्मृति-सूत्र पूछिए — "पोटली सोने की…")
  2. सोडियम केरोसिन में क्यों? (वायु में आग पकड़ता है)
  3. नमक का डला बिजली क्यों नहीं चलाता? (आयन बँधे हैं, चल नहीं सकते)
  4. जंग के लिए क्या-क्या चाहिए? (वायु और जल, दोनों)
  5. परिष्करण का चित्र बनाकर दिखाइए। (ऐनोड पर "अशुद्ध" लिखा है या नहीं — यही देखिए)
घर पर करवाइए: तीन गिलास, तीन कीलें — एक पानी में, एक उबले पानी पर तेल डालकर, एक सूखे डिब्बे में। एक सप्ताह बाद देखिए। यह पूरे अध्याय का सबसे यादगार प्रयोग बनेगा।

21. आगे की जिज्ञासा

ऊपर का पूरा पाठ NCERT कक्षा 10 की सीमा में है — परीक्षा के लिए इतना ही पर्याप्त है।

पर जिनके मन में प्रश्न उठें — "हमारे ज़िले की खदान में वास्तव में क्या निकलता है?", "धातुकर्म में इंजीनियर क्या करते हैं?" — उनके लिए नीचे केवल सरकारी तथा विश्वविद्यालय-स्तर के स्रोत हैं। ये परीक्षा में नहीं आएँगे।

स्रोतसंस्थावहाँ क्या मिलेगा
mines.rajasthan.gov.inखान एवं भूविज्ञान विभाग, राजस्थान सरकारराज्य के खनिज भंडार, ज़िलेवार खदानें
ncert.nic.inNCERT, भारत सरकारमूल पाठ्यपुस्तक की आधिकारिक PDF
ePathshalaशिक्षा मंत्रालय, भारत सरकारई-पुस्तकें एवं ऑडियो-वीडियो
RSC EducationRoyal Society of Chemistry, ब्रिटेनधातुओं पर प्रयोग एवं शिक्षक-सामग्री
Chemistry LibreTextsUniversity of California, Davisआयनिक बंध एवं धातुकर्म — कक्षा 11–12 स्तर

हमारा वचन: इस पृष्ठ का एक भी तथ्य इन स्रोतों से उठाकर पाठ्यक्रम में नहीं मिलाया गया है। राजस्थान की खदानों वाला खंड केवल यह दिखाने के लिए है कि NCERT का रसायन आपके आसपास घट रहा है — खदानों के नाम परीक्षा का भाग नहीं हैं।

सब आपस में जुड़ा है अध्याय 2 अम्ल-क्षारक अध्याय 3 धातु-अधातु (आप यहाँ) अध्याय 4 कार्बन एवं उसके यौगिक धातुएँ अम्ल से क्रिया करती हैं · कार्बन एक अधातु है, जो सहसंयोजी बंध बनाती है

चित्र — यहाँ आयनिक बंध सीखा (इलेक्ट्रॉन का लेन-देन)। अगले अध्याय में सहसंयोजी बंध आएगा (इलेक्ट्रॉन की साझेदारी)।

आगे पढ़ें
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→ अगला: अध्याय 4 — कार्बन एवं उसके यौगिक (7 अंक)
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यह पाठ माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर के कक्षा 10 विज्ञान (कोड 07) पाठ्यक्रम सत्र 2026–2027 के अनुसार है। निर्धारित पुस्तक — विज्ञान, एन.सी.ई.आर.टी.। सभी आरेख मौलिक हैं। राजस्थान की खदानों की जानकारी: खान एवं भूविज्ञान विभाग, राजस्थान सरकार। बोर्ड द्वारा पाठ्यक्रम में संशोधन संभव है — परीक्षा से पूर्व आधिकारिक वेबसाइट से मिलान कर लें।
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