कक्षा 10 हिंदी अर्धवार्षिक मॉडल पेपर 2026-27 (80 अंक) उत्तर-कुंजी सहित | RBSE

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कक्षा 10 हिंदी (कोड 01) – अर्धवार्षिक मॉडल पेपर 2026-27

लेखक: NCERTClasses टीम

यह अभ्यास हेतु मॉडल पेपर है, बोर्ड का आधिकारिक प्रश्नपत्र नहीं। पैटर्न राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सत्र 2026-27 के सिलेबस पर आधारित।
समय: 3 घंटे 15 मिनटपूर्णांक: 80

सामान्य निर्देश

  1. सभी प्रश्न अनिवार्य हैं; आंतरिक विकल्प वाले प्रश्नों में केवल एक विकल्प हल करें।
  2. प्रश्न के सामने कोष्ठक में उसके अंक दिए गए हैं।
  3. खंड-क (अपठित) 12, खंड-ख (रचना एवं व्याकरण) 24, खंड-ग (पाठ्यपुस्तक) 44 अंक।
  4. उत्तर शुद्ध, स्पष्ट एवं निर्धारित शब्द-सीमा में लिखें।

खंड-क : अपठित बोध (12 अंक)

प्रश्न 1. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए: अपठित गद्यांश
जल प्रकृति का अनमोल उपहार है। धरती का तीन-चौथाई भाग पानी से ढका है, फिर भी पीने योग्य जल बहुत कम है। बढ़ती जनसंख्या, उद्योगों और खेती में अधिक उपयोग से भूजल का स्तर निरंतर गिर रहा है। नदियाँ प्रदूषित हो रही हैं और अनेक क्षेत्रों में लोगों को मीलों दूर से पानी लाना पड़ता है। यदि हम आज वर्षा-जल का संचयन करें, टपकते नल ठीक कराएँ और पानी का दुरुपयोग रोकें, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए जल बचा सकते हैं। जल-संरक्षण केवल सरकार का नहीं, प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
  1. गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक लिखिए। [1]
  2. धरती का कितना भाग पानी से ढका है? [1]
  3. भूजल का स्तर गिरने के दो कारण लिखिए। [1]
  4. जल बचाने के दो उपाय बताइए। [1]
  5. 'प्रदूषित' शब्द का विलोम लिखिए। [1]
  6. गद्यांश के अनुसार जल-संरक्षण किसका कर्तव्य है? [1]
प्रश्न 2. निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए: अपठित काव्यांश
काँटों से घबराकर राही, पथ में रुक जाना न कभी,
श्रम की बूँदों से सिंचित हो, खिल उठती है धरती सभी।
जो थककर बैठ गए पथ में, उनको मंज़िल कब मिलती है,
चलने वालों के आगे ही, हर बाधा आकर झुकती है।
  1. प्रथम दो पंक्तियों का भावार्थ अपने शब्दों में लिखिए। [2]
  2. कवि राही को क्या प्रेरणा देता है? [1]
  3. 'श्रम की बूँदों' से कवि का क्या आशय है? [1]
  4. 'हर बाधा आकर झुकती है' पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। [1]
  5. काव्यांश का उपयुक्त शीर्षक दीजिए। [1]

खंड-ख : रचना एवं व्यावहारिक व्याकरण (24 अंक)

प्रश्न 3. दिए गए संकेत-बिंदुओं के आधार पर किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबंध लिखिए। [6] निबंध
  1. डिजिटल भारत और हमारा जीवन – (भूमिका, डिजिटल सेवाएँ, लाभ, चुनौतियाँ, उपसंहार)
  2. पर्यावरण संरक्षण : हमारा दायित्व – (प्रदूषण के रूप, कारण, उपाय, हमारी भूमिका, उपसंहार)
  3. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) : वरदान या चुनौती – (परिचय, उपयोग, लाभ, खतरे, संतुलित दृष्टि)
प्रश्न 4. किसी एक पत्र को लिखिए: [4] पत्र-लेखन
  1. (औपचारिक) नगर परिषद् के आयुक्त को अपने मोहल्ले में कचरा-उठाव की अनियमितता दूर कराने हेतु पत्र लिखिए।
  2. (अनौपचारिक) अपने मित्र को विद्यालय के वार्षिकोत्सव में आने का निमंत्रण-पत्र लिखिए।
प्रश्न 5. संक्षिप्तीकरण एवं पल्लवन
  1. निम्नलिखित अनुच्छेद का लगभग एक-तिहाई शब्दों में संक्षिप्तीकरण कीजिए: [2]
    समय सबसे बड़ा धन है। बीता हुआ समय लौटकर नहीं आता, इसलिए जो व्यक्ति समय का सदुपयोग करता है वही जीवन में सफल होता है। विद्यार्थियों के लिए तो समय का महत्त्व और भी अधिक है, क्योंकि यही अवस्था भविष्य की नींव रखती है। आलस्य और टालमटोल की आदत समय को नष्ट कर देती है तथा मनुष्य को पछतावे के अतिरिक्त कुछ नहीं देती। अतः हर काम समय पर करना ही बुद्धिमानी है।
  2. 'परिश्रम सफलता की कुंजी है' – इस भाव का पल्लवन कीजिए। [2]
प्रश्न 6. रेखांकित (मोटे) शब्दों का पद-भेद (भेद सहित) लिखिए: पद-भेद
  1. सबने उसकी ईमानदारी की प्रशंसा की। [1]
  2. मैं अपना काम स्वयं करता हूँ। [1]
  3. वहाँ चार विद्यार्थी बैठे हैं। [1]
  4. ज़ोर से हवा चली और पेड़ गिर गया। [1]
प्रश्न 7. उपसर्ग-प्रत्यय
  1. 'निर्बल' और 'सुगंध' शब्दों में से उपसर्ग अलग कीजिए। [1]
  2. 'लिखावट' और 'मानवता' शब्दों में से प्रत्यय अलग कीजिए। [1]
प्रश्न 8. संधि-समास
  1. 'विद्यालय' का संधि-विच्छेद कर संधि का नाम लिखिए। [1]
  2. 'यथाशक्ति' का समास-विग्रह कर समास का नाम लिखिए। [1]
प्रश्न 9. पाठ्यपुस्तक ('जॉर्ज पंचम की नाक', 'नेताजी का चश्मा') में आए मुहावरों का अर्थ लिखकर वाक्य-प्रयोग कीजिए: मुहावरे-लोकोक्तियाँ
  1. नाक कटना [1]
  2. आँखें भर आना [1]

खंड-ग : पाठ्यपुस्तक – क्षितिज भाग-2 एवं कृतिका भाग-2 (44 अंक)

प्रश्न 10. किसी एक गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए: [3] क्षितिज : गद्य-व्याख्या
  1. 'लखनवी अंदाज़' – वह अंश जहाँ लेखक कहता है कि जब खीरे की गंध और स्वाद की कल्पना से पेट भर सकता है, तो बिना विचार-घटना-पात्र के कहानी भी लिखी जा सकती है।
  2. 'नौबतखाने में इबादत' – वह अंश जहाँ बिस्मिल्ला खाँ खुदा से 'सच्चे सुर' की नेमत माँगते हैं, जिससे सुनने वालों की आँखों से अनुराग के आँसू निकल आएँ।
प्रश्न 11. किसी एक काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए: [3] क्षितिज : पद्य-व्याख्या
  1. सूरदास के पद की पंक्ति "ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी" और उसके आगे के दो चरण (गोपियों का उद्धव पर व्यंग्य)।
  2. "छाया मत छूना मन, होगा दुख दूना" से आरंभ होने वाला पद-खंड।
प्रश्न 12. गद्य-पाठों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर (प्रत्येक 40-50 शब्दों में) दीजिए: क्षितिज : गद्य विषयवस्तु
  1. 'नेताजी का चश्मा' – सरकंडे का चश्मा देखकर हालदार साहब की आँखें क्यों भर आईं? [2]
  2. 'बालगोबिन भगत' – भगत को 'साधु' क्यों कहा जा सकता है, जबकि वे गृहस्थ थे? [2]
  3. 'लखनवी अंदाज़' – नवाब साहब ने खीरे के साथ क्या-क्या किया? इसमें किस बात पर व्यंग्य है? [2]
  4. 'मानवीय करुणा की दिव्य चमक' – फादर कामिल बुल्के की किन विशेषताओं के कारण उन्हें 'देवदारु' जैसा कहा गया है? [2]
  5. 'स्त्री-शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन' – लेखक ने स्त्री-शिक्षा के विरोधियों के तर्कों का खंडन कैसे किया? [2]
  6. (अथवा) 'संस्कृति' – सभ्यता और संस्कृति में क्या अंतर है? अथवा 'एक कहानी यह भी' – लेखिका के व्यक्तित्व-निर्माण में शीला अग्रवाल की क्या भूमिका थी? [2]
प्रश्न 13. काव्य-पाठों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर (प्रत्येक 40-50 शब्दों में) दीजिए: क्षितिज : पद्य विषयवस्तु
  1. 'राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद' – परशुराम के क्रोध पर राम और लक्ष्मण की प्रतिक्रियाओं की तुलना कीजिए। [2]
  2. 'सूरदास के पद' – गोपियों ने उद्धव को 'बड़भागी' कहकर क्या व्यंग्य किया है? [2]
  3. 'आत्मकथ्य' – कवि आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहता है? [2]
  4. 'उत्साह' – कवि बादल से गरजने का आह्वान क्यों करता है? [2]
  5. 'यह दंतुरित मुसकान' – बच्चे की मुसकान का कवि पर क्या प्रभाव पड़ता है? [2]
  6. 'कन्यादान' – माँ ने विदा होती बेटी को क्या सीख दी? और 'आग' तथा 'वस्त्र-आभूषण' के संदर्भ में उसका क्या आशय है? [2]
प्रश्न 14. निम्नलिखित में से किसी एक रचनाकार का जीवन-परिचय (जन्म-स्थान/काल, प्रमुख रचनाएँ, साहित्यिक विशेषता) दीजिए: (क) तुलसीदास (ख) जयशंकर प्रसाद (ग) मन्नू भंडारी [3] जीवन-परिचय
प्रश्न 15. कृतिका भाग-2 पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दीजिए: कृतिका भाग-2
  1. 'माता का आँचल' – संकट आने पर भोलानाथ पिता के बजाय माँ की शरण में क्यों गया? (60-70 शब्द) [3]
  2. 'जॉर्ज पंचम की नाक' – लेखक ने इस कहानी में किन-किन प्रवृत्तियों पर व्यंग्य किया है? (60-70 शब्द) [3]
  3. 'साना-साना हाथ जोड़ि' में लेखिका ने सैनिकों के जीवन के बारे में क्या सोचा? अथवा 'एहि ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा' – दुलारी और टुन्नू के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए। [3]
  4. 'मैं क्यों लिखता हूँ' – लेखक के अनुसार लेखन की भीतरी और बाहरी विवशता से क्या तात्पर्य है? [2]

अंक-विभाजन सारणी

खंडइकाईप्रश्नअंक
कअपठित गद्यांश16
अपठित काव्यांश26
ख (रचना)निबंध (विकल्प सहित)36
पत्र-लेखन (विकल्प सहित)44
संक्षिप्तीकरण एवं पल्लवन54
ख (व्याकरण)पद-भेद64
उपसर्ग-प्रत्यय72
संधि-समास82
मुहावरे-लोकोक्तियाँ92
ग (क्षितिज-2)गद्यांश सप्रसंग व्याख्या103
पद्यांश सप्रसंग व्याख्या113
गद्य विषयवस्तु1212
पद्य विषयवस्तु1312
जीवन-परिचय143
क्षितिज उप-योग33
ग (कृतिका-2)विषयवस्तु1511
कुल योग (12 + 14 + 10 + 33 + 11)80

उत्तर-कुंजी एवं अंक-योजना

(मूल्यांकन में शब्दशः मिलान आवश्यक नहीं; समान भाव वाले सही उत्तर पर पूर्ण अंक दें।)

प्रश्न 1 (प्रत्येक 1)

(i) जल-संरक्षण / जल है तो कल है (कोई उपयुक्त शीर्षक)। (ii) तीन-चौथाई। (iii) बढ़ती जनसंख्या; उद्योगों व खेती में अधिक उपयोग। (iv) वर्षा-जल संचयन; टपकते नल ठीक कराना / पानी का दुरुपयोग रोकना। (v) शुद्ध / स्वच्छ। (vi) प्रत्येक नागरिक का (केवल सरकार का नहीं)।

प्रश्न 2

(i) [2] राही को काँटों/कठिनाइयों से घबराकर रुकना नहीं चाहिए (1); परिश्रम से धरती हरी-भरी होती है अर्थात् श्रम से सफलता मिलती है (1)। (ii) [1] निरंतर चलते रहने, कठिनाइयों में न रुकने की। (iii) [1] परिश्रम/पसीना। (iv) [1] लगातार प्रयत्न करने वाले के सामने कठिनाइयाँ हार जाती हैं। (v) [1] 'चलना ही जीवन है' / 'श्रम का महत्त्व'।

प्रश्न 3 (6)

भूमिका/परिचय 1 + विषय-विस्तार (संकेत-बिंदुओं का क्रमबद्ध विकास) 3 + भाषा-शुद्धता व शैली 1 + उपसंहार 1। लगभग 300 शब्द; संकेत-बिंदु छोड़ने पर आनुपातिक कटौती।

प्रश्न 4 (4)

प्रारूप (प्रेषक/पता/दिनांक, संबोधन, अभिवादन, समापन-नाम; औपचारिक में विषय-पंक्ति भी) 1 + विषयवस्तु 2 (औपचारिक: समस्या, असुविधा, शीघ्र कार्रवाई का अनुरोध; अनौपचारिक: निमंत्रण का दिन-समय-स्थान, कार्यक्रम, आग्रह) + भाषा 1।

प्रश्न 5

(क) [2] मूल भाव: समय अमूल्य है और लौटता नहीं (½); सदुपयोग से सफलता (½); विद्यार्थियों हेतु अधिक महत्त्व (½); आलस्य हानिकारक, काम समय पर करें (½)। 20-25 शब्दों का संक्षेप; सीमा से अधिक पर 1 अंक कटे। (ख) [2] भाव का विस्तार (1): परिश्रम से भाग्य बदलता है, उदाहरण (किसान, विद्यार्थी, वैज्ञानिक), आलसी की असफलता; भाषा-प्रवाह (1)।

प्रश्न 6 (प्रत्येक 1 – सही पद-भेद पर)

(i) भाववाचक संज्ञा। (ii) निजवाचक सर्वनाम। (iii) संख्यावाचक (निश्चित) विशेषण। (iv) समुच्चयबोधक (योजक) अव्यय।

प्रश्न 7

(क) निर्बल में 'निर्' (निर् + बल); सुगंध में 'सु' (सु + गंध)। (ख) लिखावट में 'आवट' (लिख + आवट); मानवता में 'ता' (मानव + ता)। (प्रत्येक सही जोड़ी पर ½ अंक)

प्रश्न 8

(क) विद्यालय = विद्या + आलय; दीर्घ स्वर संधि (आ + आ = आ)। (ख) यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार (शक्ति के अनुरूप); अव्ययीभाव समास। (विग्रह ½ + नाम ½)

प्रश्न 9

(क) नाक कटना = प्रतिष्ठा/इज़्ज़त चली जाना; वाक्य: बेटे की चोरी से पिता की नाक कट गई। (ख) आँखें भर आना = भावुक होकर आँसू आ जाना; वाक्य: विदाई के समय माँ की आँखें भर आईं। (अर्थ ½ + सही वाक्य ½)

प्रश्न 10 (3: संदर्भ-प्रसंग 1 + व्याख्या 2)

(क) संदर्भ: 'लखनवी अंदाज़', लेखक यशपाल। प्रसंग: नवाब साहब द्वारा खीरे को सूँघकर फेंकने के बाद लेखक की टिप्पणी। व्याख्या: जैसे नवाब ने खीरे का रसास्वादन केवल गंध-कल्पना से माना, वैसे 'नई कहानी' के लेखक बिना घटना, पात्र, विचार के कहानी का दावा करते हैं; दिखावे की नवाबी संस्कृति और कृत्रिम लेखन पर व्यंग्य। (ख) संदर्भ: 'नौबतखाने में इबादत', लेखक यतींद्र मिश्र। प्रसंग: बिस्मिल्ला खाँ की ईश्वर से प्रार्थना। व्याख्या: वे 85 वर्ष की आयु में भी 'सच्चे सुर' की साधना व प्रार्थना करते हैं; सच्चा सुर वह जो श्रोता को भावविभोर कर दे; कला के प्रति विनम्र साधना व निरंतर सीखने की ललक।

प्रश्न 11 (3: संदर्भ-प्रसंग 1 + व्याख्या 2)

(क) संदर्भ: सूरदास, 'सूरदास के पद' (भ्रमरगीत प्रसंग)। प्रसंग: गोपियाँ कृष्ण का योग-संदेश लाने वाले उद्धव पर व्यंग्य करती हैं। व्याख्या: तुम बड़े भाग्यशाली हो कि प्रेम-बंधन से मुक्त रहे; कमल-पत्ते और तेल की मटकी की तरह जल (प्रेम) में रहकर भी अछूते हो; तुमने प्रेम-नदी में पैर तक नहीं डुबोया। वाक्-चातुर्य और उलाहना। (ख) संदर्भ: 'छाया मत छूना', गिरिजाकुमार माथुर। प्रसंग: कवि मन को बीती सुखद स्मृतियों में उलझने से रोकता है। व्याख्या: अतीत की सुख-छाया को याद करने से वर्तमान का दुख दूना हो जाता है; यथार्थ का सामना करना ही सही मार्ग है।

प्रश्न 12 (प्रत्येक 2)

(क) कैप्टन की मृत्यु के बाद मूर्ति पर बच्चों द्वारा सरकंडे का चश्मा लगाना देखकर हालदार साहब भावुक हुए: नई पीढ़ी में देशभक्ति/सम्मान की भावना जीवित है, कैप्टन का प्रयास व्यर्थ नहीं गया (1+1)। (ख) कसौटियाँ: कभी झूठ नहीं बोलते, खरा व्यवहार, किसी की चीज़ नहीं छूते/माँगते, पैदावार पहले कबीरपंथी मठ में भेंट, प्रसाद रूप में घर लाते, कबीर के पद गाते — साधु के गुण (कोई चार बिंदु, 2)। (ग) खीरे को धोया, काटा, नमक-मिर्च लगाया, सूँघा, फाँकें खिड़की से फेंककर डकार ली (1)। व्यंग्य: दिखावटी नवाबी/झूठी शान और बिना सार की कहानी-लेखन पर (1)। (घ) लंबा कद, गोरा रंग, सफ़ेद दाढ़ी, नीली आँखें; सबके प्रति वात्सल्य; दुख में साथ देने वाले, छाया देने वाले (देवदारु की तरह), हिंदी-प्रेम; ऐसे लोग मानवीय करुणा की चमक (1+1)। (ङ) प्राचीन भारत में स्त्रियाँ पढ़ी-लिखी थीं (गार्गी आदि), तो शिक्षा अनर्थ का कारण नहीं (1); अनर्थ पुरुष भी करते हैं, तब पुरुष-शिक्षा बंद क्यों नहीं? दोष शिक्षा का नहीं, व्यक्ति का (1)। (च) संस्कृति: जो मनुष्य को नई खोज/कल्याण की ओर प्रेरित करने वाली मूल प्रेरणा (1); सभ्यता: उसका परिणाम, आविष्कार व भौतिक साधन (1)। अथवा शीला अग्रवाल ने लेखिका को साहित्य-पठन से जोड़ा, विचारों को दिशा दी, स्वतंत्रता-आंदोलन में सक्रिय किया और पिता के विरोध के बावजूद आत्मविश्वास दिया (1+1)।

प्रश्न 13 (प्रत्येक 2)

(क) परशुराम क्रोधित, धनुष तोड़ने वाले को दंड की चेतावनी; राम विनम्र व शांत ('दास' कहकर); लक्ष्मण निर्भीक, व्यंग्य करते कि बचपन में बहुत धनुहियाँ तोड़ीं (1+1)। (ख) उद्धव प्रेम-बंधन से मुक्त हैं, कृष्ण के निकट रहकर भी अनुरागहीन; कमल-पत्ते व तेल की मटकी की तरह अछूते — अतः बड़भागी कहना व्यंग्य है (1+1)। (ग) जीवन की कमज़ोरियाँ व असफलताएँ; दूसरों द्वारा छल व अपनी भूलें खुलने का भय; जीवन साधारण है, कहने योग्य बड़ी बात नहीं; दूसरों की व्यथा न जगे (कोई दो बिंदु, 2)। (घ) बादल क्रांति/परिवर्तन के प्रतीक हैं; तप्त धरा को शीतलता, नया जीवन और उत्साह; कवि नवनिर्माण व क्रांति का आह्वान करता है (1+1)। (ङ) मृतक में भी जान डाल दे; कठोर हृदय पिघल जाए; कवि को शिशु की मुसकान में जीवन की कोमलता दिखती है, वह वात्सल्य से भर उठता है (1+1)। (च) माँ की सीख: आग रोटी सेंकने के लिए है, जलने के लिए नहीं (ससुराल में अन्याय सहने की नहीं, सतर्क रहने की); वस्त्र-आभूषण शब्दों के भ्रम की तरह बाँधने वाले बंधन हैं; लड़की होना पर कमज़ोर दिखाई न देना (1+1)।

प्रश्न 14 (3: जन्म 1 + रचनाएँ 1 + विशेषता 1)

(क) तुलसीदास: जन्म सं. 1589 (1532 ई.) राजापुर (बाँदा, उ.प्र.); रामचरितमानस, विनयपत्रिका, कवितावली, गीतावली, दोहावली; अवधी-ब्रज में भक्ति-काव्य, राम-भक्ति, समन्वय की भावना। (ख) जयशंकर प्रसाद: जन्म 1889 काशी (मृत्यु 1937); कामायनी, आँसू, लहर, झरना; नाटक – चंद्रगुप्त, स्कंदगुप्त, ध्रुवस्वामिनी; छायावाद के प्रमुख स्तंभ, राष्ट्रीय-सांस्कृतिक चेतना। (ग) मन्नू भंडारी: जन्म 1931 भानपुरा (मंदसौर, म.प्र.); आपका बंटी, महाभोज, यही सच है, 'एक कहानी यह भी' (आत्मकथ्य); नई कहानी की प्रमुख लेखिका, स्त्री-मन व मध्यवर्गीय जीवन का सजीव चित्रण।

प्रश्न 15

(क) [3] पिता भोलानाथ से बहुत स्नेह करते थे (साथ खेलना, पूजा, कुश्ती), पर साँप देखकर भयभीत बच्चा सहज सुरक्षा हेतु माँ की गोद में छिपा (1); माँ की ममता, वात्सल्य और सुरक्षा का भाव सर्वोपरि (1); पिता का स्नेह दुलार-मनोरंजन का, संकट में आश्रय माँ का आँचल (1)। (ख) [3] सरकारी तंत्र व नेताओं की चाटुकारिता और औपनिवेशिक मानसिकता (1); झूठी शान, नाक/प्रतिष्ठा के नाम पर धन-श्रम की बरबादी, मूर्तिकारों-अफ़सरों की अवसरवादिता (1); अंत में जीवित व्यक्ति की नाक लगा देना — मानव-मूल्यों की उपेक्षा पर तीखा व्यंग्य (1)। (ग) [3] सैनिक भीषण ठंड व कठिन परिस्थितियों में सीमा पर डटे रहते हैं (1); वे अपने सुख त्यागकर हमारी सुरक्षा करते हैं (1); लेखिका के मन में उनके प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता (1)। अथवा दुलारी: कजली-गायिका, स्वाभिमानी, ऊपर से कठोर पर भीतर से कोमल व संवेदनशील (1.5); टुन्नू: सुकुमार, कला-प्रेमी गायक, खादी-देशभक्त, दुलारी के प्रति मौन आदर-प्रेम (1.5)। (घ) [2] भीतरी विवशता: अनुभूति की वह पीड़ा जो लेखक को अपने-आप लिखने को बाध्य करती है (हिरोशिमा की त्रासदी का अनुभव) (1); बाहरी विवशता: संपादक की माँग, आर्थिक या अन्य दबाव; सच्चा लेखन भीतरी प्रेरणा से (1)।

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