कक्षा 12 रसायन विज्ञान (कोड 41) – अर्धवार्षिक मॉडल पेपर 2026-27
सैद्धांतिक प्रश्नपत्र: 56 अंक | लेखक: NCERTClasses टीम
प्रायोगिक कार्य (30 अंक) तथा सत्रीय कार्य (14 अंक) अलग से हैं; यह पेपर केवल सैद्धांतिक भाग (56 अंक) का है।
सामान्य निर्देश
- सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। जहाँ 'अथवा' दिया है, वहाँ केवल एक विकल्प हल करें।
- खंड-क (14 अंक): प्रश्न 1 से 3, प्रत्येक उप-प्रश्न 1 अंक। खंड-ख (10 अंक): प्रश्न 4 से 8, प्रत्येक 2 अंक। खंड-ग (15 अंक): प्रश्न 9 से 13, प्रत्येक 3 अंक। खंड-घ (17 अंक): प्रश्न 14 से 16 प्रत्येक 4 अंक तथा प्रश्न 17 पाँच अंक।
- आवश्यक नियतांक व लघुगणक मान प्रश्न में ही दिए गए हैं। गणनाओं में पद-दर-पद हल दिखाइए। कैलकुलेटर का प्रयोग वर्जित है।
- प्रश्न के आगे छोटे टैग में इकाई दी गई है (जैसे इ-3 = इकाई 3)।
खंड-क : वस्तुनिष्ठ प्रश्न (14 अंक)
- निम्नलिखित में से कौन-सा सांद्रता-पद ताप परिवर्तन से अप्रभावित रहता है? (क) मोलरता (ख) आयतन-आयतन प्रतिशत (ग) ग्राम प्रति लीटर (घ) मोलालता [1]इ-1
- तनु करने पर किसी प्रबल विद्युत अपघट्य के जलीय विलयन की चालकता (κ) तथा मोलर चालकता (Λm) में क्रमशः क्या परिवर्तन होता है? (क) κ बढ़ती है, Λm घटती है (ख) κ घटती है, Λm बढ़ती है (ग) दोनों बढ़ती हैं (घ) दोनों घटती हैं [1]इ-2
- किसी अभिक्रिया का वेग-समीकरण वेग = k[A]2 है। k की इकाई है: (क) s−1 (ख) mol L−1 s−1 (ग) L mol−1 s−1 (घ) mol2 L−2 s−1 [1]इ-3
- निम्नलिखित में से कौन-सा आयन जलीय विलयन में रंगहीन होगा? (क) Ti3+ (ख) Cu+ (ग) V3+ (घ) Cr3+ [1]इ-4
- [Ni(CO)4] की ज्यामिति तथा केंद्रीय परमाणु का संकरण है: (क) वर्ग समतल, dsp2 (ख) चतुष्फलकीय, sp3 (ग) अष्टफलकीय, d2sp3 (घ) वर्ग समतल, sp3 [1]इ-5
- SN2 अभिक्रिया के प्रति सर्वाधिक क्रियाशील यौगिक है: (क) CH3Br (ख) (CH3)3CBr (ग) (CH3)2CHBr (घ) CH3CH2Br [1]इ-6
- निम्नलिखित में से किसका क्वथनांक सर्वाधिक है? (क) ब्यूटेन (ख) ऐथॉक्सीऐथेन (ग) ब्यूटेन-1-ऑल (घ) ब्यूटेनैल [1]इ-7
- निम्नलिखित में से सबसे प्रबल अम्ल है: (क) CH3COOH (ख) ClCH2COOH (ग) Cl2CHCOOH (घ) CH3CH2COOH [1]इ-8
- A: क्लोरोबेंज़ीन में C–Cl बंध की लंबाई CH3–Cl से कम होती है। R: क्लोरोबेंज़ीन में C–Cl बंध वाला कार्बन sp3 संकरित होता है। [1]इ-6
- A: ऐनिलीन फ्रीडेल–क्राफ्ट्स ऐल्किलन अभिक्रिया नहीं देती। R: ऐनिलीन का ऐमीनो समूह निर्जल AlCl3 से लवण बनाता है, जिससे N धनावेशित हो जाता है और वलय निष्क्रिय हो जाता है। [1]इ-9
- A: DNA में थाइमीन के स्थान पर RNA में यूरेसिल पाया जाता है। R: RNA में शर्करा इकाई राइबोस होती है। [1]इ-10
- बेंज़ोइक अम्ल के नाइट्रीकरण से मुख्यतः ______ -नाइट्रोबेंज़ोइक अम्ल बनता है। [1]इ-8
- प्राथमिक ऐमीन को CHCl3 व ऐल्कोहॉली KOH के साथ गर्म करने पर अप्रिय गंध वाला ______ बनता है। [1]इ-9
- प्रोटीन की ______ संरचना पॉलीपेप्टाइड शृंखला में ऐमीनो अम्लों के अनुक्रम को दर्शाती है। [1]इ-10
खंड-ख : लघु उत्तरीय प्रश्न (प्रत्येक 2 अंक)
अथवा H2–O2 ईंधन सेल में ऐनोड तथा कैथोड पर होने वाली अभिक्रियाएँ लिखिए (क्षारीय माध्यम)।
अथवा प्रथम कोटि की अभिक्रिया के अर्द्ध-आयु काल (t½) का व्यंजक लिखिए तथा बताइए कि वह अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर क्यों नहीं करता।
अथवा विलियमसन संश्लेषण द्वारा ऐथॉक्सीऐथेन बनाने की अभिक्रिया का समीकरण लिखिए तथा इसमें प्रयुक्त ऐल्किल हैलाइड के प्रकार पर टिप्पणी कीजिए।
खंड-ग : दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-I (प्रत्येक 3 अंक)
अथवा 1.8 g ग्लूकोज़ (मोलर द्रव्यमान 180 g mol−1) को जल में घोलकर 250 mL विलयन बनाया गया। 300 K पर इसका परासरण दाब ज्ञात कीजिए। (R = 0.0821 L atm K−1 mol−1)
अथवा कोलराउश नियम से CH3COOH की Λ°m ज्ञात कीजिए, दिया है: Λ°m(CH3COONa) = 91, Λ°m(HCl) = 426, Λ°m(NaCl) = 126 S cm2 mol−1। यदि 0.1 M CH3COOH विलयन की चालकता 7.82 × 10−4 S cm−1 हो तो उसकी Λm तथा वियोजन की मात्रा (α) ज्ञात कीजिए।
अथवा किसी अभिक्रिया का वेग स्थिरांक 300 K पर 1.0 × 10−3 s−1 तथा 310 K पर 2.0 × 10−3 s−1 है। सक्रियण ऊर्जा Ea की गणना कीजिए। (R = 8.314 J K−1 mol−1, log 2 = 0.3010)
अथवा (क) फ़ीनॉल की NaOH से अभिक्रिया का समीकरण लिखिए। (ख) फ़ीनॉल ऐथेनॉल से अधिक अम्लीय क्यों है? समझाइए।
अथवा (क) ऐसीटैमाइड से हॉफमान ब्रोमामाइड अभिक्रिया द्वारा मेथिलऐमीन बनाने का समीकरण लिखिए। (ख) ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन बनाने के लिए गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण उपयुक्त क्यों नहीं है?
खंड-घ : दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-II (4 व 5 अंक)
अथवा लैंथेनॉयड संकुचन क्या है? इसका कारण लिखिए तथा इसके दो परिणाम बताइए।
अथवा संयोजकता आबंध सिद्धांत के आधार पर [Ni(CN)4]2− तथा [NiCl4]2− की ज्यामिति, संकरण तथा चुंबकीय व्यवहार लिखिए। (Ni का परमाणु क्रमांक 28)
अथवा (क) SN1 तथा SN2 अभिक्रियाओं में कोई दो अंतर लिखिए। (ख) क्लोरोबेंज़ीन ऐल्किल क्लोराइड की तुलना में नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन के प्रति कम क्रियाशील क्यों है? दो कारण दीजिए।
अथवा (क) ऐसीटैल्डिहाइड की HCN से अभिक्रिया का समीकरण तथा उत्पाद का IUPAC नाम लिखिए। (ख) टॉलूईन से बेंज़ोइक अम्ल कैसे बनाएँगे? (ग) कार्बोक्सिलिक अम्ल फ़ीनॉल से अधिक अम्लीय क्यों होते हैं? दो कारण दीजिए।
अंक-विभाजन सारणी
| इकाई | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| इकाई 1 विलयन | 1(i), 4, 9 | 6 |
| इकाई 2 वैद्युतरसायन | 1(ii), 5, 10 | 6 |
| इकाई 3 रासायनिक बलगतिकी | 1(iii), 6, 11 | 6 |
| इकाई 4 d- एवं f-ब्लॉक के तत्त्व | 1(iv), 14 | 5 |
| इकाई 5 उपसहसंयोजन यौगिक | 1(v), 15 | 5 |
| इकाई 6 हैलोऐल्केन तथा हैलोऐरीन | 1(vi), 2(i), 16 | 6 |
| इकाई 7 ऐल्कोहॉल, फ़ीनॉल एवं ईथर | 1(vii), 7, 12 | 6 |
| इकाई 8 ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल | 1(viii), 3(i), 17 | 7 |
| इकाई 9 ऐमीन | 2(ii), 3(ii), 13 | 5 |
| इकाई 10 जैव-अणु | 2(iii), 3(iii), 8 | 4 |
| कुल योग | 56 | |
उत्तर-कुंजी एवं अंक-योजना
(समान भाव वाले सही उत्तर पर पूर्ण अंक दें; शब्दशः मिलान आवश्यक नहीं। विकल्प वाले प्रश्नों में दोनों विकल्पों का हल दिया गया है।)
प्रश्न 1 (प्रत्येक 1)
(i) घ – मोलालता (द्रव्यमान पर आधारित, आयतन पर नहीं)। (ii) ख – तनुकरण से प्रति इकाई आयतन आयन घटते हैं, अतः κ घटती है; आयनों के बीच अंतरा-आयनिक आकर्षण घटने से Λm बढ़ती है। (iii) ग – k = वेग/[A]2 = mol L−1 s−1 / mol2 L−2 = L mol−1 s−1। (iv) ख – Cu+ (3d10) में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं, अतः रंगहीन। (v) ख – Ni(0) 3d10, CO प्रबल क्षेत्र लिगैंड, चतुष्फलकीय, sp3। (vi) क – CH3Br में स्थैतिक अवरोध न्यूनतम। (vii) ग – ब्यूटेन-1-ऑल (अंतरा-अणुक H-बंध)। (viii) ग – दो Cl परमाणुओं का प्रबल −I प्रभाव कार्बोक्सिलेट आयन को सर्वाधिक स्थायी करता है।
प्रश्न 2 व 3 (प्रत्येक 1)
2. (i) ग – C–Cl बंध में आंशिक द्वि-बंध लक्षण (अनुनाद) तथा कार्बन का sp2 संकरण; R असत्य है। (ii) क – दोनों सत्य, R सही व्याख्या। (iii) ख – दोनों कथन सत्य हैं, पर शर्करा (राइबोस/2-डीऑक्सीराइबोस) का अंतर क्षारक (यूरेसिल/थाइमीन) के अंतर की व्याख्या नहीं करता।
3. (i) मेटा (−COOH मेटा-निर्देशी है)। (ii) आइसोसायनाइड (कार्बिलऐमीन)। (iii) प्राथमिक।
प्रश्न 4 (2)
उदाहरण: ऐथेनॉल + ऐसीटोन (या CS2 + ऐसीटोन) (½)। ΔmixH > 0 (धनात्मक) तथा ΔmixV > 0 (धनात्मक) (½ + ½)। कारण: विजातीय अणुओं के बीच आकर्षण बल शुद्ध घटकों के सजातीय आकर्षण से दुर्बल होते हैं, अतः अणु सरलता से वाष्पित होते हैं, वाष्प दाब राउल्ट नियम से अधिक (½)।
प्रश्न 5 (2)
ऐनोड: Fe(s) → Fe2+(aq) + 2e− (1)। कैथोड: O2(g) + 4H+(aq) + 4e− → 2H2O(l) (1)। अथवा: ऐनोड: 2H2(g) + 4OH−(aq) → 4H2O(l) + 4e− (1); कैथोड: O2(g) + 2H2O(l) + 4e− → 4OH−(aq) (1)।
प्रश्न 6 (2)
कोटि: प्रयोग द्वारा निर्धारित, शून्य/भिन्नात्मक/पूर्णांक हो सकती है; वेग-समीकरण में घातों का योग (1)। आणविकता: सैद्धांतिक, केवल पूर्ण संख्या (1, 2, 3), प्रारंभिक पद के लिए अभिक्रिया में भाग लेने वाले अणुओं की संख्या; जटिल अभिक्रिया की आणविकता नहीं होती (1)। (कोई दो अंतर, 1 + 1)। अथवा: t½ = 0.693/k (1)। अर्द्ध-आयु में [R] = [R]0/2 रखने पर [R]0 कट जाता है, अतः t½ केवल k पर निर्भर (1)।
प्रश्न 7 (2)
C6H5OH + 3Br2 → 2,4,6-ट्राइब्रोमोफ़ीनॉल (C6H2Br3OH) + 3HBr (1); उत्पाद 2,4,6-ट्राइब्रोमोफ़ीनॉल, सफ़ेद अवक्षेप (1)। अथवा: C2H5ONa + C2H5Br → C2H5OC2H5 + NaBr (1); ऐल्किल हैलाइड प्राथमिक होना चाहिए, द्वितीयक/तृतीयक हैलाइड में विलोपन से ऐल्कीन बनती है (1)।
प्रश्न 8 (2)
ऐडेनीन–थाइमीन (A=T): 2 H-बंध (1)। ग्वानीन–साइटोसीन (G≡C): 3 H-बंध (1)।
प्रश्न 9 (3)
मोलैलिटी m = (5.85/58.5)/0.500 kg = 0.100/0.500 = 0.20 mol kg−1 (1)। ΔTf = i Kf m = 1.9 × 1.86 × 0.20 = 0.7068 ≈ 0.71 K (1)। हिमांक = 0 − 0.71 = −0.71 °C (1)।
अथवा: मोल = 1.8/180 = 0.01; C = 0.01/0.250 = 0.04 mol L−1 (1); π = CRT (1) = 0.04 × 0.0821 × 300 = 0.985 ≈ 0.99 atm (1)।
प्रश्न 10 (3)
Zn + Cu2+ → Zn2+ + Cu; E = E° − (0.0591/n) log([Zn2+]/[Cu2+]) (1)। E = 1.10 − (0.0591/2) log(0.01/1.0) = 1.10 − 0.02955 × (−2) = 1.10 + 0.0591 = 1.1591 ≈ 1.16 V (1)। ΔG = −nFE = −2 × 96500 × 1.1591 = −2.237 × 105 J ≈ −223.7 kJ mol−1 (1)।
अथवा: Λ°m(CH3COOH) = 91 + 426 − 126 = 391 S cm2 mol−1 (1)। Λm = κ × 1000/M = 7.82 × 10−4 × 1000/0.1 = 7.82 S cm2 mol−1 (1)। α = Λm/Λ°m = 7.82/391 = 0.02 (2%) (1)।
प्रश्न 11 (3)
k = (2.303/t) log([R]0/[R]) = (2.303/40) log(100/80) (1) = 0.05758 × 0.0969 = 5.58 × 10−3 min−1 (1)। t½ = 0.693/k = 0.693/(5.58 × 10−3) ≈ 124 मिनट (1)।
अथवा: log(k2/k1) = (Ea/2.303R)(T2−T1)/(T1T2) (1)। log 2 = 0.3010 = Ea × 10/(2.303 × 8.314 × 300 × 310) (1)। Ea = 2.303 × 8.314 × 0.3010 × 9300 ≈ 5.36 × 104 J mol−1 ≈ 53.6 kJ mol−1 (1)।
प्रश्न 12 (3)
(क) CH3CH2OH → (सांद्र H2SO4, 443 K) CH2=CH2 + H2O (1)। (ख) (CH3)2CHOH → (Cu, 573 K) (CH3)2C=O + H2 (1) [अथवा ऑक्सीकारक से]। (ग) C6H5OH + 3HNO3 (सांद्र) → 2,4,6-ट्राइनाइट्रोफ़ीनॉल (पिक्रिक अम्ल) + 3H2O (1)।
अथवा: (क) C6H5OH + NaOH → C6H5ONa + H2O (1)। (ख) फ़ीनॉक्साइड आयन अनुनाद से स्थायी (ऋण आवेश वलय पर विस्थानीकृत), जबकि ऐथॉक्साइड में +I प्रभाव से आवेश अस्थायी (1 + 1)।
प्रश्न 13 (3)
(क) C6H5NH2 + NaNO2 + 2HCl (273–278 K) → C6H5N2+Cl− + NaCl + 2H2O (1)। (ख) C6H5N2+Cl− → (Cu2Cl2/HCl) C6H5Cl + N2 (1)। (ग) C6H5N2+Cl− + C6H5OH → (क्षारीय माध्यम, pH 9–10) p-हाइड्रॉक्सीऐज़ोबेंज़ीन (नारंगी रंजक) + HCl (1)।
अथवा: (क) CH3CONH2 + Br2 + 4NaOH → CH3NH2 + Na2CO3 + 2NaBr + 2H2O (2)। (ख) ऐरिल हैलाइड नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन नहीं देते, अतः थैलिमाइड का आयन ऐरिल हैलाइड से अभिक्रिया नहीं करता (1)।
प्रश्न 14 (4)
(क) Cr: [Ar] 3d5 4s1; Cu: [Ar] 3d10 4s1 (1 + 1)। (ख) Zn का d-उपकोश परमाणु व सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था (+2) दोनों में पूर्ण (3d10) है; संक्रमण तत्त्व वे हैं जिनके स्थायी आयन में आंशिक भरे d-कक्षक हों (1)। (ग) Mn2+: 3d5, n = 5; μ = √[n(n+2)] = √35 = 5.92 BM (1)।
अथवा: संकुचन: लैंथेनॉयड्स में परमाणु/आयनिक त्रिज्या में Ce से Lu तक क्रमिक कमी (1)। कारण: 4f इलेक्ट्रॉनों का नाभिकीय आवेश के प्रति दुर्बल परिरक्षण (1)। परिणाम (कोई दो, 1 + 1): 4d व 5d श्रेणी के तत्त्वों (Zr–Hf) की त्रिज्या लगभग समान; लैंथेनॉयड हाइड्रॉक्साइड की क्षारकता में कमी; इनका पृथक्करण कठिन।
प्रश्न 15 (4)
(क) पेन्टाऐम्मीननाइट्रिटो-N-कोबाल्ट(III) क्लोराइड (1)। (ख) ऑक्सीकरण संख्या +3, उपसहसंयोजन संख्या 6 (½ + ½)। (ग) 2 मोल AgCl (बाह्य मंडल के 2 Cl−) (1)। (घ) [Co(NH3)5(ONO)]Cl2 – पेन्टाऐम्मीननाइट्रिटो-O-कोबाल्ट(III) क्लोराइड (1)।
अथवा: [Ni(CN)4]2−: Ni2+ 3d8; प्रबल लिगैंड CN− से इलेक्ट्रॉन युग्मित, dsp2 संकरण, वर्ग समतल (1), प्रतिचुंबकीय (1)। [NiCl4]2−: दुर्बल लिगैंड Cl−, 3d8 में दो अयुग्मित इलेक्ट्रॉन, sp3 संकरण, चतुष्फलकीय (1), अनुचुंबकीय (1)।
प्रश्न 16 (4)
(क) CH3CH2CN (प्रोपेननाइट्राइल) (1)। (ख) CH3CH2CH2MgBr (ग्रिन्यार अभिकर्मक) (1)। (ग) CH3CH=CH2 (प्रोपीन) (1)। (घ) C6H5Cl (क्लोरोबेंज़ीन) + HCl (1)।
अथवा: (क) SN1: दो पदों में, कार्बोकैटायन मध्यवर्ती, 3° > 2° > 1° क्रम, रेसिमीकरण, वेग केवल हैलाइड पर निर्भर (प्रथम कोटि); SN2: एक पद, संक्रमण अवस्था, 1° > 2° > 3° क्रम, विन्यास का प्रतिलोमन, द्वितीय कोटि (कोई दो अंतर, 1 + 1)। (ख) C–Cl बंध में आंशिक द्वि-बंध लक्षण (अनुनाद); कार्बन sp2 संकरित (छोटा, प्रबल बंध); ऐरिल कैटायन अस्थायी; वलय के π-इलेक्ट्रॉन आक्रमणकारी नाभिकस्नेही को प्रतिकर्षित करते हैं (कोई दो, 1 + 1)।
प्रश्न 17 (5)
(क) टॉलेन अभिकर्मक ([Ag(NH3)2]+) के साथ गर्म करने पर ऐसीटैल्डिहाइड चाँदी का दर्पण देता है (1); ऐसीटोन कोई अभिक्रिया नहीं (1)। (ख) CH3COOH + C2H5OH ⇌ (सांद्र H2SO4) CH3COOC2H5 + H2O (1)। (ग) ऐल्डिहाइड में कार्बोनिल कार्बन से एक ही ऐल्किल (+I) समूह, कीटोन में दो; अतः ऐल्डिहाइड का कार्बन अधिक धनात्मक (1)। ऐल्डिहाइड में स्थैतिक अवरोध कम, कीटोन में दो बड़े ऐल्किल समूह (1)।
अथवा: (क) CH3CHO + HCN → CH3CH(OH)CN; 2-हाइड्रॉक्सीप्रोपेननाइट्राइल (1 + 1)। (ख) C6H5CH3 → (क्षारीय KMnO4, गर्म, फिर H3O+) C6H5COOH (1)। (ग) कार्बोक्सिलेट आयन में ऋण आवेश दो समतुल्य ऑक्सीजन पर विस्थानीकृत (दो समतुल्य अनुनाद संरचनाएँ) (1); फ़ीनॉक्साइड में आवेश कम विद्युतऋणात्मक कार्बन पर भी आता है तथा संरचनाएँ असमतुल्य हैं (1)।

No comments:
Post a Comment