कक्षा 12 भौतिक विज्ञान (कोड 40) – अर्धवार्षिक मॉडल पेपर 2026-27
सैद्धांतिक प्रश्नपत्र: 56 अंक | लेखक: NCERTClasses टीम
सामान्य निर्देश
- सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। जहाँ 'अथवा' दिया है, वहाँ केवल एक विकल्प हल करें।
- प्रश्न के सामने कोष्ठक में अंक तथा छोटे टैग में अध्याय संख्या (अ.) दी गई है। खंड-क: 14 अंक (प्रश्न 1 व 2, प्रत्येक भाग 1 अंक); खंड-ख: 4 प्रश्न × 2; खंड-ग: 4 प्रश्न × 3; खंड-घ: 3 प्रश्न × 4 तथा 2 प्रश्न × 5।
- आवश्यकतानुसार नियतांक: e = 1.6×10⁻¹⁹ C, 1/4πε₀ = 9×10⁹ N m² C⁻², c = 3×10⁸ m/s, 1 eV = 1.6×10⁻¹⁹ J। अन्य नियतांक प्रश्न में दिए गए हैं।
- सभी गणनात्मक प्रश्नों में सूत्र, प्रतिस्थापन तथा मात्रक अवश्य लिखिए।
खंड-क : वस्तुनिष्ठ प्रश्न (14 अंक)
- किसी बंद पृष्ठ के भीतर कुल आवेश 8.85 μC है। (ε₀ = 8.85×10⁻¹² C²N⁻¹m⁻²) पृष्ठ से निर्गत कुल वैद्युत फ्लक्स (N m² C⁻¹) है:
(क) 1×10⁶ (ख) 1×10⁻⁶ (ग) 8.85×10⁶ (घ) शून्य [1]अ.1 - तीन समान संधारित्र, प्रत्येक 6 μF, श्रेणीक्रम में जोड़े गए हैं। तुल्य धारिता है:
(क) 18 μF (ख) 6 μF (ग) 0.5 μF (घ) 2 μF [1]अ.2 - ताप बढ़ाने पर किसी धात्विक चालक की प्रतिरोधकता:
(क) घटती है (ख) बढ़ती है (ग) नियत रहती है (घ) पहले घटती है, फिर बढ़ती है [1]अ.3 - चुंबकीय क्षेत्र B के समांतर गतिमान आवेशित कण पर चुंबकीय बल होता है:
(क) qvB (ख) qvB/2 (ग) शून्य (घ) mv²/r [1]अ.4 - प्रतिचुंबकीय पदार्थ की चुंबकीय प्रवृत्ति (χ) होती है:
(क) बड़ी तथा धनात्मक (ख) छोटी तथा ऋणात्मक (ग) छोटी तथा धनात्मक (घ) शून्य [1]अ.5 - किसी वैद्युतचुंबकीय तरंग में विद्युत क्षेत्र का आयाम E₀ = 300 V/m है। (c = 3×10⁸ m/s) चुंबकीय क्षेत्र का आयाम B₀ है:
(क) 3×10⁻⁶ T (ख) 1×10⁻⁶ T (ग) 9×10¹⁰ T (घ) 1×10⁻⁸ T [1]अ.8 - फोकस दूरी 25 cm वाले उत्तल लेंस की क्षमता है:
(क) +4 D (ख) +0.25 D (ग) +2.5 D (घ) +25 D [1]अ.9 - प्रकाश का ध्रुवण यह सिद्ध करता है कि प्रकाश तरंगें हैं:
(क) अनुदैर्ध्य (ख) स्थिर (ग) अनुप्रस्थ (घ) केवल यांत्रिक [1]अ.10 - 620 nm तरंगदैर्घ्य के फोटॉन की ऊर्जा है: (hc = 1240 eV·nm)
(क) 2.0 eV (ख) 0.5 eV (ग) 1.0 eV (घ) 3.1 eV [1]अ.11 - हाइड्रोजन परमाणु की n = 2 कक्षा में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा है:
(क) −13.6 eV (ख) −6.8 eV (ग) −1.51 eV (घ) −3.4 eV [1]अ.12
अभिकथन-कारण प्रश्नों हेतु विकल्प: (क) A व R दोनों सत्य हैं तथा R, A की सही व्याख्या है। (ख) A व R दोनों सत्य हैं, परंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है। (ग) A सत्य है, R असत्य है। (घ) A असत्य है, R सत्य है।
- अभिकथन (A): सभी नाभिकों का घनत्व लगभग समान होता है। कारण (R): नाभिक की त्रिज्या R = R₀A1/3 होती है, अतः नाभिक का आयतन द्रव्यमान संख्या A के समानुपाती है। [1]अ.13
- रिक्त स्थान भरिए: किसी रेडियोऐक्टिव पदार्थ की अर्द्ध-आयु 20 मिनट है; 60 मिनट बाद आरंभिक नाभिकों का ______ भाग शेष रहेगा। [1]अ.13
- अभिकथन (A): अग्र अभिनत में p-n संधि डायोड से धारा प्रवाहित होती है। कारण (R): सिलिकॉन का ऊर्जा अंतराल लगभग 1.1 eV होता है। [1]अ.14
- रिक्त स्थान भरिए: वैद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम में रेडियो तरंगों की तुलना में X-किरणों की आवृत्ति ______ होती है। [1]अ.8
खंड-ख : 2 अंक के प्रश्न (4 × 2 = 8 अंक)
अथवा समविभव पृष्ठ किसे कहते हैं? इसके कोई दो गुण लिखिए।
अथवा अपवाह वेग (drift velocity) की परिभाषा लिखिए तथा चालक में धारा I और अपवाह वेग vd का संबंध लिखिए (n = मुक्त इलेक्ट्रॉन घनत्व, A = अनुप्रस्थ काट)।
अथवा विद्युत चुंबक के क्रोड (core) के लिए नर्म लोहा क्यों उपयुक्त है? दो कारण दीजिए।
अथवा पूर्ण आंतरिक परावर्तन की दो शर्तें लिखिए तथा 1.5 अपवर्तनांक वाले काँच के लिए (हवा के सापेक्ष) क्रांतिक कोण ज्ञात कीजिए। (sin 41.8° ≈ 0.667)
खंड-ग : 3 अंक के प्रश्न (4 × 3 = 12 अंक)
अथवा गाउस के नियम की सहायता से अनंत समतल आवेशित चादर (पृष्ठ आवेश घनत्व σ) के कारण वैद्युत क्षेत्र का सूत्र शब्दों में चरणबद्ध व्युत्पन्न कीजिए।
अथवा किसी प्रिज्म का कोण A = 60° है तथा न्यूनतम विचलन कोण 30° है। प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक ज्ञात कीजिए। (सूत्र 1, प्रतिस्थापन 1, परिणाम 1; sin 45° = 1/√2, sin 30° = 1/2)
अथवा 100 V विभवांतर से त्वरित इलेक्ट्रॉन की दे-ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए। (h = 6.63×10⁻³⁴ J s, me = 9.1×10⁻³¹ kg, e = 1.6×10⁻¹⁹ C) (सूत्र 1, संवेग 1, तरंगदैर्घ्य 1)
अथवा रदरफ़ोर्ड के α-कण प्रकीर्णन प्रयोग के तीन प्रमुख प्रेक्षण लिखिए तथा प्रत्येक से निकलने वाला निष्कर्ष बताइए।
खंड-घ : दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (3 × 4 + 2 × 5 = 22 अंक)
अथवा दो लंबे समांतर धारावाही तारों (धाराएँ I₁, I₂; दूरी d) के बीच प्रति इकाई लंबाई बल का सूत्र चरणबद्ध व्युत्पन्न कीजिए तथा इसके आधार पर एक ऐम्पियर की परिभाषा लिखिए।
अथवा एकसमान चुंबकीय क्षेत्र B (तल के लंबवत) में U-आकार के चालक पर लंबाई l की छड़ को चाल v से खिसकाने पर गतिकीय emf का व्यंजक फ्लक्स-परिवर्तन से व्युत्पन्न कीजिए (3); l = 0.5 m, v = 4 m/s, B = 0.2 T के लिए emf का मान लिखिए (1)।
अथवा एकल झिरी विवर्तन में झिरी की चौड़ाई 0.2 mm, तरंगदैर्घ्य 500 nm तथा पर्दे की दूरी 1.0 m है। (क) निम्निष्ठ की शर्त लिखिए (1) (ख) प्रथम निम्निष्ठ की कोणीय स्थिति (1) (ग) केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई (1) (घ) झिरी की चौड़ाई आधी करने पर केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई (1)।
अथवा (क) श्रेणी LCR परिपथ में VR, VL, VC की धारा के सापेक्ष कला शब्दों में बताकर प्रतिबाधा Z तथा कला-कोण φ के सूत्र व्युत्पन्न कीजिए (3)। (ख) अनुनाद की शर्त, अनुनाद आवृत्ति का सूत्र तथा अनुनाद पर Z और धारा की स्थिति लिखिए (2)।
अथवा (क) n-प्रकार तथा p-प्रकार अर्धचालक कैसे बनाए जाते हैं? अपमिश्रक के एक-एक उदाहरण तथा बहुसंख्यक आवेश वाहक बताइए (3)। (ख) किसी n-प्रकार के सिलिकॉन में ne = 4.5×10²² m⁻³ तथा नैज वाहक घनत्व ni = 1.5×10¹⁶ m⁻³ है; होल घनत्व nh ज्ञात कीजिए (nenh = ni²) (2)।
अंक-विभाजन सारणी
| अध्याय | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1. वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र | 1(i), 7 | 4 |
| 2. स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता | 1(ii), 3 | 3 |
| 3. विद्युत धारा | 1(iii), 4 | 3 |
| 4. गतिमान आवेश और चुंबकत्व | 1(iv)+11 | 5 |
| 5. चुंबकत्व एवं द्रव्य | 1(v)+5 | 3 |
| 6. वैद्युतचुंबकीय प्रेरण | 12 | 4 |
| 7. प्रत्यावर्ती धारा | 14 | 5 |
| 8. वैद्युतचुंबकीय तरंगें | 1(vi)+2(iv) | 2 |
| 9. किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र | 1(vii)+6+8 | 6 |
| 10. तरंग प्रकाशिकी | 1(viii)+13 | 5 |
| 11. विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति | 1(ix)+9 | 4 |
| 12. परमाणु | 1(x)+10 | 4 |
| 13. नाभिक | 2(i)+2(ii) | 2 |
| 14. अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी: पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ | 2(iii)+15 | 6 |
| कुल योग | 56 | |
उत्तर-कुंजी एवं अंक-योजना
(सही विधि से प्राप्त सही उत्तर पर पूर्ण अंक दें; अंकगणितीय त्रुटि पर उचित कटौती करें।)
प्रश्न 1 (प्रत्येक 1)
(i) क – 1×10⁶ (Φ = q/ε₀ = 8.85×10⁻⁶ / 8.85×10⁻¹²)। (ii) घ – 2 μF (1/C = 3/6)। (iii) ख – बढ़ती है। (iv) ग – शून्य (F = qvB sinθ, θ = 0°)। (v) ख – छोटी तथा ऋणात्मक। (vi) ख – 1×10⁻⁶ T (B₀ = E₀/c)। (vii) क – +4 D (P = 1/f(m) = 1/0.25)। (viii) ग – अनुप्रस्थ। (ix) क – 2.0 eV (1240/620)। (x) घ – −3.4 eV (−13.6/2²)।
प्रश्न 2 (प्रत्येक 1)
(i) (क) — दोनों सत्य; R से घनत्व A पर निर्भर नहीं रहता (V ∝ A, m ∝ A)। (ii) 1/8 (60/20 = 3 अर्द्ध-आयु; (1/2)³) (iii) (ख) — दोनों सत्य, पर R, A की व्याख्या नहीं करता। (iv) अधिक (X-किरणों की तरंगदैर्घ्य बहुत कम, आवृत्ति बहुत अधिक)
प्रश्न 3 (2)
(क) C = ε₀A/d = 8.85×10⁻¹² × 10⁻² / 5×10⁻⁴ = 1.77×10⁻¹⁰ F (177 pF) (1)। (ख) U = ½CV² = ½ × 1.77×10⁻¹⁰ × 100² = 8.85×10⁻⁷ J (1)। अथवा: वह पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिंदु पर विभव समान हो (1); गुण – उस पर विभव-कार्य शून्य/आवेश को चलाने में कार्य नहीं; वैद्युत क्षेत्र सदैव उसके लंबवत; दो समविभव पृष्ठ कभी नहीं काटते; क्षेत्र उच्च से निम्न विभव की ओर (कोई दो, ½ + ½)।
प्रश्न 4 (2)
I = ε/(R + r) = 1.5/(4.5 + 0.5) = 0.3 A (1); V = ε − Ir = 1.5 − 0.3×0.5 = 1.35 V (1) (V = IR = 0.3×4.5 = 1.35 V)। अथवा: चालक में विद्युत क्षेत्र के प्रभाव से मुक्त इलेक्ट्रॉनों का औसत वेग (अपवाह वेग) (1); I = n e A vd (1)।
प्रश्न 5 (2)
प्रतिचुंबकीय – बिस्मथ/ताँबा/जल/सीसा, χ छोटी ऋणात्मक; अनुचुंबकीय – ऐलुमिनियम/सोडियम/कैल्शियम, χ छोटी धनात्मक; लौहचुंबकीय – लोहा/कोबाल्ट/निकल, χ बड़ी धनात्मक (तीनों सही 2; दो सही 1)। अथवा: कम धारणशीलता (retentivity) – धारा बंद होने पर चुंबकत्व शीघ्र समाप्त (1); कम निग्राहिता तथा उच्च पारगम्यता – आसानी से चुंबकित/विचुंबकित, कम हिस्टेरेसिस हानि (1)।
प्रश्न 6 (2)
u = −30, f = +20: 1/v = 1/f + 1/u = 1/20 − 1/30 = 1/60 ⇒ v = +60 cm (लेंस के दूसरी ओर, वास्तविक) (1); m = v/u = 60/(−30) = −2 (उलटा, दुगुना आकार) (1)। अथवा: प्रकाश सघन से विरल माध्यम में चले (½); आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक हो (½); sin ic = 1/μ = 2/3 = 0.667 ⇒ ic ≈ 41.8° (1)।
प्रश्न 7 (3)
(क) F = 9×10⁹ × 3×10⁻⁶ × 12×10⁻⁶ / (0.3)² = 3.6 N, प्रतिकर्षण (1)। (ख) बिंदु दोनों आवेशों के बीच होगा (समान आवेश) (½)। x दूरी पर 3/x² = 12/(0.3 − x)² ⇒ 0.3 − x = 2x (1) ⇒ x = 0.1 m = 10 cm (½)। अथवा: समतल के दोनों ओर समान दूरी पर बेलनाकार गाउसियन पृष्ठ; E समतल के लंबवत, अतः फ्लक्स केवल दोनों सिरों से = 2EA (1); परिबद्ध आवेश q = σA (1); गाउस नियम 2EA = σA/ε₀ ⇒ E = σ/2ε₀, दूरी से स्वतंत्र (1)।
प्रश्न 8 (3)
(क) अंतिम प्रतिबिंब अनंत पर बनता है (आँख तनावमुक्त); नेत्रिका की फोकस पर मध्यवर्ती प्रतिबिंब (1)। (ख) m = fo/fe = 150/6 = 25 (1)। (ग) L = fo + fe = 156 cm (1)। अथवा: μ = sin[(A + δm)/2] / sin(A/2) (1) = sin 45°/sin 30° (1) = (1/√2)/(1/2) = √2 ≈ 1.41 (1)।
प्रश्न 9 (3)
(क) E = 1240/400 = 3.1 eV (1)। (ख) Kmax = 3.1 − 2.0 = 1.1 eV; V₀ = 1.1 V (1)। (ग) λ₀ = 1240/2.0 = 620 nm (1)। अथवा: λ = h/p, p = √(2meV) (1); p = √(2 × 9.1×10⁻³¹ × 1.6×10⁻¹⁹ × 100) ≈ 5.4×10⁻²⁴ kg m/s (1); λ = 6.63×10⁻³⁴ / 5.4×10⁻²⁴ ≈ 1.23×10⁻¹⁰ m (0.123 nm) (1)।
प्रश्न 10 (3)
(क) E₃ = −13.6/9 = −1.51 eV; E₂ = −13.6/4 = −3.4 eV (1)। (ख) ΔE = −1.51 − (−3.4) = 1.89 eV (1)। (ग) λ = 1240/1.89 ≈ 656 nm (लगभग 6.56×10⁻⁷ m); बामर श्रेणी (दृश्य क्षेत्र, लाल रेखा) (1)। अथवा: (1) अधिकांश α-कण सीधे निकल गए ⇒ परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त है। (2) कुछ α-कण बड़े कोण पर विक्षेपित हुए ⇒ धनावेश तथा द्रव्यमान अति सूक्ष्म केंद्र (नाभिक) में केंद्रित। (3) बहुत थोड़े α-कण लगभग वापस लौटे ⇒ नाभिक भारी और धनावेशित है। (प्रत्येक प्रेक्षण-निष्कर्ष जोड़ी 1)
प्रश्न 11 (4)
(क) F = qvB = 1.6×10⁻¹⁹ × 2×10⁶ × 0.2 = 6.4×10⁻¹⁴ N (1)। (ख) r = mv/qB = 1.67×10⁻²⁷ × 2×10⁶ / (1.6×10⁻¹⁹ × 0.2) ≈ 0.104 m (1)। (ग) T = 2πm/qB ≈ 3.28×10⁻⁷ s (1)। (घ) f = 1/T ≈ 3.05×10⁶ Hz (≈ 3.05 MHz) (1)। अथवा: तार 1 से d पर B₁ = μ₀I₁/2πd, तार 2 के लंबवत (1); तार 2 की लंबाई L पर बल F = I₂LB₁ (1); F/L = μ₀I₁I₂/2πd (1); समान दिशा की धाराएँ आकर्षित, विपरीत प्रतिकर्षित करती हैं। 1 A: निर्वात में 1 m दूर दो अनंत लंबे समांतर तारों में समान धारा से प्रति मीटर 2×10⁻⁷ N बल हो (1)।
प्रश्न 12 (4)
(क) प्रेरित emf का परिमाण परिपथ से गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की दर के बराबर, ε = −N dΦ/dt (1)। (ख) ε = N A ΔB/Δt = 100 × 2×10⁻² × 0.4 / 0.2 = 4 V (1)। (ग) I = ε/R = 4/8 = 0.5 A (1)। (घ) q = I Δt = 0.5 × 0.2 = 0.1 C (1)। अथवा: क्षेत्रफल l·x, फ्लक्स Φ = Blx (1); ε = −dΦ/dt = −Bl dx/dt (1) ⇒ |ε| = Blv (1); ε = 0.2 × 0.5 × 4 = 0.4 V (1)।
प्रश्न 13 (4)
(क) β = λD/d = 600×10⁻⁹ × 1 / 0.5×10⁻³ = 1.2 mm (1)। (ख) y₃ = 3β = 3.6 mm (1)। (ग) द्वितीय अदीप्त: y = (2 − ½)β = 1.5β = 1.8 mm (1)। (घ) जल में λ′ = λ/μ ⇒ β′ = β/μ = 1.2 × 3/4 = 0.9 mm (1)। अथवा: (क) a sinθ = nλ (n = ±1, ±2, …) (1)। (ख) θ ≈ λ/a = 5×10⁻⁷ / 2×10⁻⁴ = 2.5×10⁻³ rad (1)। (ग) चौड़ाई = 2λD/a = 2 × 5×10⁻⁷ × 1 / 2×10⁻⁴ = 5 mm (1)। (घ) चौड़ाई a के व्युत्क्रमानुपाती ⇒ 10 mm (1)।
प्रश्न 14 (5)
(क) XL = ωL = 80 Ω; XC = 1/ωC = 40 Ω; Z = √(R² + (XL − XC)²) = √(30² + 40²) = 50 Ω (1)। (ख) Irms = V/Z = 100/50 = 2 A (1)। (ग) cosφ = R/Z = 30/50 = 0.6 (1)। (घ) P = V I cosφ = 100 × 2 × 0.6 = 120 W (= I²R) (1)। (ङ) अनुनाद हेतु ω²LC = 1 ⇒ C = 1/(ω²L) = 1/(10⁶ × 0.08) = 12.5 μF (1)। अथवा: (क) R पर VR धारा के साथ समकला; L पर VL धारा से 90° आगे; C पर VC धारा से 90° पीछे (1)। VL, VC परस्पर विपरीत; कुल V² = VR² + (VL − VC)² ⇒ Z = √(R² + (XL − XC)²) (1); tanφ = (XL − XC)/R (1)। (ख) XL = XC (1); ω₀ = 1/√(LC) (f₀ = 1/2π√(LC)); Z न्यूनतम = R, धारा अधिकतम, φ = 0 (1)।
प्रश्न 15 (5)
(क) n-क्षेत्र से इलेक्ट्रॉन p की ओर तथा p-क्षेत्र से होल n की ओर विसरित होकर पुनर्संयोजित होते हैं (1); संधि के पास गतिहीन धनात्मक (n-ओर) तथा ऋणात्मक (p-ओर) आयन रह जाते हैं – मुक्त वाहकों से रिक्त अवक्षय परत व आंतरिक वैद्युत क्षेत्र, जिससे रोध विभव बनकर आगे विसरण रोकता है (1)। (ख) अग्र अभिनत (p धन, n ऋण): बाह्य वोल्टता रोध विभव घटाती है, अवक्षय परत संकरी, वोल्टता नी-वोल्टता (Si ≈ 0.7 V) से अधिक होने पर धारा तेजी से (mA) बढ़ती है (1)। उत्क्रम अभिनत: रोध विभव व अवक्षय परत चौड़ी, अल्पसंख्यक वाहकों से अत्यल्प (μA) लगभग नियत धारा (1)। (ग) I = (5 − 0.7)/860 = 4.3/860 = 5×10⁻³ A = 5 mA (1)। अथवा: (क) शुद्ध Si/Ge में पंचसंयोजी (As, P, Sb) अशुद्धि मिलाने से n-प्रकार (दाता; बहुसंख्यक – इलेक्ट्रॉन) (1); त्रिसंयोजी (B, Al, In) मिलाने से p-प्रकार (ग्राही; बहुसंख्यक – होल) (1); दोनों उदाहरण/वाहक सही (1)। (ख) nh = ni²/ne = (1.5×10¹⁶)² / 4.5×10²² = 2.25×10³² / 4.5×10²² = 5×10⁹ m⁻³ (सूत्र 1, परिणाम 1)।

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