Class 10 Hindi Kshitij Chapter 3: देव सवैया और कवित्त Dev Savaiya Kavitt Notes 2026 | भावार्थ अलंकार रीतिकाल | NCERT

📅 Saturday, 10 January 2026 📖 3-5 min read

📜 Class 10 Hindi Kshitij Chapter 3
देव - सवैया और कवित्त
Dev - Savaiya aur Kavitt

Complete Notes 2026 | भावार्थ + अलंकार + रीतिकाल

NCERT Hindi Kshitij | CBSE Board Exam 2026

📚 Marwari Mission 100 Series

📚 इस पाठ में क्या है?

  • कवि: देव (Deven)
  • काल: रीतिकाल
  • भाषा: ब्रजभाषा
  • छंद: सवैया और कवित्त
  • विषय: श्रृंगार रस, प्रकृति वर्णन, Krishna
  • अलंकार: उपमा, रूपक, अतिशयोक्ति

🔗 Related: Chapter 2: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद - भक्तिकाल से रीतिकाल तक

1. कवि परिचय - देव

📜 महाकवि देव

जीवन परिचय:

विवरण जानकारी
पूरा नाम देवदत्त द्विवेदी (देव)
जन्म 1673 ई. (इटावा, उत्तर प्रदेश)
मृत्यु 1767 ई.
काल रीतिकाल
भाषा ब्रजभाषा
उपाधि रीतिकाल का सर्वश्रेष्ठ कवि

प्रमुख रचनाएं:

  • भावविलास
  • भवानीविलास
  • रसविलास
  • काव्यरसायन
  • शब्दरसायन

काव्य की विशेषताएं:

  • अलंकार प्रयोग: उपमा, रूपक, अतिशयोक्ति में निपुण
  • श्रृंगार रस: संयोग और वियोग दोनों
  • प्रकृति चित्रण: सुंदर वर्णन
  • भाषा: मधुर ब्रजभाषा
  • छंद: सवैया, कवित्त में पारंगत

2. रीतिकाल का परिचय

📖 रीतिकाल क्या है?

📌 समय और विशेषताएं:

विवरण जानकारी
समय 1650-1850 ई. (लगभग)
अन्य नाम श्रृंगार काल
मुख्य विषय काव्य के रीति-नियम, श्रृंगार रस
आश्रय राजदरबार

⭐ रीतिकाल की मुख्य विशेषताएं:

1️⃣ श्रृंगार रस प्रधान

नायक-नायिका का वर्णन

2️⃣ अलंकार योजना

काव्य सौंदर्य के लिए

3️⃣ ब्रजभाषा

मधुर और कोमल

4️⃣ प्रकृति चित्रण

उद्दीपन रूप में

👥 प्रमुख कवि:

  • केशवदास - रीतिकाल के आचार्य
  • बिहारी - बिहारी सतसई
  • देव - अलंकार और श्रृंगार में निपुण
  • घनानंद - रीतिमुक्त धारा

3. सवैया और कवित्त में अंतर

📝 दो महत्वपूर्ण छंद

Feature सवैया कवित्त
परिभाषा 31 वर्णों वाला छंद 31 वर्णों वाला छंद
चरण 4 चरण 4 चरण
गण विधान 7 भगण + 2 गुरु 16 + 15 मात्राएं
प्रयोग श्रृंगार, वीर रस प्रकृति वर्णन, श्रृंगार
लय गति और प्रवाह मधुर और सरल

💡 याद रखने की ट्रिक:

दोनों ही 31 वर्णों के होते हैं और 4 चरण होते हैं। अंतर मुख्य रूप से गण विधान और लय में है।

4. संपूर्ण पाठ (सवैया और कवित्त)

📜 देव की रचनाएं

सवैया 1:

पाँयनि नूपुर मंजु बजै, कटि किंकिनि कै धुनि की मधुराई।
साँवरे अंग लसै पट पीत, हिये हुलसै बनमाल सुहाई॥
माथे किरीट बड़े दृग चंचल, मंद हँसी मुखचंद जुन्हाई।
जै जग मंदिर दीपक सुंदर, श्रीब्रजदूलह 'देव' सहाई॥

सवैया 2:

डार द्रुम पलना बिछौना नव पल्लव के,
सुमन झिंगूला सोहै तन छबि भारी दै।
पवन झुलावै, केकी-कीर बतरावै 'देव',
कोकिल हलावै-हुलसावै कर तारी दै॥
पूरित पराग सों उटी कली कंवल की,
समेत प्रात हंसी की मनो हार पहिरै है।
तारा सो तरनि धरे पद्मिनी तारी ख्यार सी,
समीर सुहावनी चली, मंदमंद मारी दै॥

कवित्त 1:

फटिक सिला पर बैठि गुलाबी रंग के गोरे,
बसन नीले नीले नैनन के बीच गुलाबी।
अरुन अरुन नख, सिख अरुन बरुनी लाल,
फूल रतनार, सोभै रंग पियाबी॥
कटि किंकिनि धुनि स्यामल कजरारे नैन,
चंचल चितवनि चारु चपल अंग भारी दै।
'देव' सखी सों बोलिबे कहँ बीच ही रीझि रहे,
रूप सजीव छबीले छवि छाड़ै छबि छापी दै॥

5. शब्दार्थ (कठिन शब्द)

📖 शब्दों के अर्थ

शब्द अर्थ
पाँयनि पैरों में
नूपुर पायल
मंजु मधुर, सुंदर
कटि कमर
किंकिनि करधनी (कमर की घंटी)
साँवरे श्याम (काले)
पट पीत पीले वस्त्र
हिये हृदय में
बनमाल वनमाला (फूलों की माला)
किरीट मुकुट
दृग नेत्र, आंखें
मुखचंद मुख रूपी चंद्रमा
जुन्हाई चांदनी, ज्योत्स्ना
ब्रजदूलह ब्रज का दूल्हा (कृष्ण)
द्रुम वृक्ष, पेड़
पलना झूला
नव पल्लव नए पत्ते
झिंगूला पालने की रस्सी
केकी मोरनी
कोकिल कोयल
पराग फूलों का पराग
फटिक स्फटिक
बसन वस्त्र
चपल चंचल

6. भावार्थ (Detailed Explanation)

💭 सवैया और कवित्त का भावार्थ

सवैया 1 का भावार्थ:

"पाँयनि नूपुर मंजु बजै... ब्रजदूलह 'देव' सहाई॥"

भावार्थ:

कवि देव श्रीकृष्ण के सौंदर्य का वर्णन करते हैं। कृष्ण के पैरों में बजती हुई मधुर पायल की ध्वनि और कमर में बंधी करधनी की मधुर आवाज़ सुनाई देती है। उनके सांवले शरीर पर पीले वस्त्र शोभा दे रहे हैं और हृदय पर सुहावनी वनमाला (फूलों की माला) सुशोभित है।

सिर पर बड़ा मुकुट है, नेत्र चंचल हैं और चंद्रमा के समान मुख पर मंद मुस्कान की चांदनी फैली हुई है। संसार रूपी मंदिर में दीपक के समान सुंदर श्रीकृष्ण सबकी रक्षा करने वाले हैं।

मुख्य भाव: श्रीकृष्ण के अलौकिक सौंदर्य का वर्णन

सवैया 2 का भावार्थ:

"डार द्रुम पलना बिछौना नव पल्लव के... समीर सुहावनी चली, मंदमंद मारी दै॥"

भावार्थ:

यह प्रकृति का सुंदर चित्रण है। वृक्ष की डाली झूले के समान है, नए कोमल पत्ते बिछौने के समान हैं और फूल पालने की रस्सियों के समान शोभा दे रहे हैं। इस प्राकृतिक झूले में असीम सौंदर्य है।

पवन झूले को झुला रही है, मोरनी और तोते बातें कर रहे हैं, और कोयल मधुर स्वर में गा रही है। पराग से भरी कमल की कली ऐसी प्रतीत होती है मानो हंसिनी ने हार पहन रखा हो। तारों के समान सूर्य की किरणें कमल के तालाब पर पड़ रही हैं और मंदमंद सुहावनी हवा चल रही है।

मुख्य भाव: प्रकृति का मनोहारी चित्रण

कवित्त 1 का भावार्थ:

"फटिक सिला पर बैठि गुलाबी रंग के गोरे... रूप सजीव छबीले छवि छाड़ै छबि छापी दै॥"

भावार्थ:

नायिका स्फटिक (क्रिस्टल) की शिला पर बैठी है। उसका रंग गुलाबी और गोरा है, नीले नेत्रों के बीच गुलाबी छटा है। नाखून लाल हैं, चोटी की सिखाएं लाल-भूरे रंग की हैं और फूल के आभूषण पीले रंग के शोभा दे रहे हैं।

कमर में किंकिणी (घंटी) बज रही है, नेत्र काले काजल से सजे हैं और चंचल चितवन अत्यंत मनोहर है। कवि देव कहते हैं कि जब वह सखी से बोलने के लिए मुंह खोलती है तो बीच में ही मोहित हो जाती है - मानो सजीव रूप ने अपनी छवि को चित्र में उतार दिया हो।

मुख्य भाव: नायिका के रूप-सौंदर्य का वर्णन

7. अलंकार विश्लेषण

🎨 प्रयुक्त अलंकार

1️⃣ उपमा अलंकार

जहां उपमेय की उपमान से तुलना की जाए

उदाहरण:

"मुखचंद जुन्हाई" - मुख की तुलना चंद्रमा से

"तारा सो तरनि" - सूर्य की किरणें तारों के समान

2️⃣ रूपक अलंकार

जहां उपमेय और उपमान में अभेद हो

उदाहरण:

"जग मंदिर दीपक सुंदर" - संसार मंदिर है, कृष्ण दीपक हैं

"मुखचंद" - मुख ही चंद्रमा है

3️⃣ उत्प्रेक्षा अलंकार

जहां उपमेय में उपमान की संभावना हो

उदाहरण:

"मनो हार पहिरै है" - मानो हार पहना हो

"छवि छाड़ै छबि छापी दै" - मानो छवि ने चित्र बनाया हो

4️⃣ अनुप्रास अलंकार

जहां वर्णों की आवृत्ति हो

उदाहरण:

"कटि किंकिनि" - क वर्ण की आवृत्ति

"चारु चपल" - च वर्ण की आवृत्ति

5️⃣ मानवीकरण अलंकार

जहां निर्जीव में सजीव का आरोप हो

उदाहरण:

"पवन झुलावै" - हवा झुला रही है

"केकी-कीर बतरावै" - पक्षी बातें कर रहे हैं

6️⃣ रूपकातिशयोक्ति अलंकार

जहां रूपक में अतिशयोक्ति हो

उदाहरण:

"जग मंदिर दीपक" - कृष्ण संसार रूपी मंदिर के दीपक (अति कथन)

8. महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

Q1. देव का जीवन परिचय दें।

उत्तर: देव (देवदत्त द्विवेदी) का जन्म 1673 ई. में इटावा, उत्तर प्रदेश में हुआ था। वे रीतिकाल के सर्वश्रेष्ठ कवि माने जाते हैं। उनकी मृत्यु 1767 ई. में हुई।

प्रमुख रचनाएं: भावविलास, भवानीविलास, रसविलास, काव्यरसायन

विशेषताएं: अलंकार प्रयोग में निपुण, श्रृंगार रस के कवि, मधुर ब्रजभाषा का प्रयोग

Q2. सवैया और कवित्त में क्या अंतर है?

उत्तर: सवैया और कवित्त दोनों ही 31 वर्णों के छंद हैं और दोनों में 4 चरण होते हैं। मुख्य अंतर गण विधान और लय में है।

  • सवैया: 7 भगण + 2 गुरु, वीर और श्रृंगार रस के लिए उपयुक्त
  • कवित्त: 16 + 15 मात्राओं का, प्रकृति वर्णन और श्रृंगार के लिए

Q3. पहले सवैये में कृष्ण के किन-किन अंगों का वर्णन है?

उत्तर: पहले सवैये में कृष्ण के निम्न अंगों का वर्णन है:

  • पैर: मधुर बजती पायल
  • कमर: किंकिणी की मधुर ध्वनि
  • शरीर: सांवला रंग, पीले वस्त्र
  • हृदय: सुहावनी वनमाला
  • सिर: बड़ा मुकुट
  • नेत्र: चंचल
  • मुख: चंद्रमा के समान, मंद हंसी

Q4. दूसरे सवैये में प्रकृति का कैसा चित्रण है?

उत्तर: दूसरे सवैये में अत्यंत मनोहारी प्रकृति चित्रण है:

  • वृक्ष की डाली झूले के समान, नए पत्ते बिछौने के समान
  • फूल पालने की रस्सियों के समान सुशोभित
  • पवन झूले को झुला रही है
  • मोरनी, तोते बातें कर रहे हैं, कोयल गा रही है
  • कमल की कली हंसिनी के हार के समान
  • सुहावनी मंद हवा चल रही है

Q5. कवित्त में नायिका का कैसा वर्णन है?

उत्तर: कवित्त में नायिका के रूप-सौंदर्य का विस्तृत वर्णन है:

  • स्फटिक की शिला पर बैठी हुई
  • गुलाबी-गोरा रंग
  • नीले नेत्र, काले काजल से सजे
  • लाल नाखून, लाल-भूरी चोटी
  • पीले आभूषण
  • कमर में किंकिणी
  • चंचल और मनोहर चितवन
  • सजीव रूप जो चित्र के समान सुंदर

Q6. इन पदों में कौन-कौन से अलंकार हैं?

उत्तर: इन पदों में निम्न अलंकार हैं:

  1. उपमा अलंकार: "मुखचंद जुन्हाई", "तारा सो तरनि"
  2. रूपक अलंकार: "जग मंदिर दीपक", "मुखचंद"
  3. उत्प्रेक्षा अलंकार: "मनो हार पहिरै है"
  4. अनुप्रास अलंकार: "कटि किंकिनि", "चारु चपल"
  5. मानवीकरण अलंकार: "पवन झुलावै", "केकी-कीर बतरावै"

9. बोर्ड परीक्षा प्रश्न

📝 दीर्घ उत्तरीय (5 अंक)

Q1. देव के काव्य की विशेषताओं का वर्णन करें।

Q2. पहले सवैये में कृष्ण के सौंदर्य का वर्णन किस प्रकार किया गया है?

Q3. दूसरे सवैये में प्रकृति चित्रण की विशेषताएं लिखें।

Q4. कवित्त में नायिका के रूप-सौंदर्य का वर्णन अपने शब्दों में करें।

📝 लघु उत्तरीय (3 अंक)

Q1. सवैया और कवित्त में क्या अंतर है?

Q2. रीतिकाल की विशेषताएं बताएं।

Q3. "जग मंदिर दीपक सुंदर" में कौन सा अलंकार है?

Q4. देव का संक्षिप्त परिचय दें।

📝 संदर्भ-प्रसंग (5 अंक)

Q1. "पाँयनि नूपुर मंजु बजै, कटि किंकिनि कै धुनि की मधुराई।"
संदर्भ, प्रसंग, व्याख्या और काव्य सौंदर्य लिखें।

Q2. "डार द्रुम पलना बिछौना नव पल्लव के।"
संदर्भ, प्रसंग, व्याख्या और काव्य सौंदर्य लिखें।

💡 परीक्षा Tips:

  • शब्दार्थ याद रखें: कठिन शब्दों के अर्थ जरूर याद करें
  • भावार्थ अपने शब्दों में: रटने की बजाय समझें
  • अलंकार पहचान: सभी 6 अलंकार और उदाहरण याद रखें
  • देव का जीवन परिचय: संक्षिप्त में तैयार रखें
  • रीतिकाल विशेषताएं: 5-6 points ready रखें
  • सवैया vs कवित्त: अंतर स्पष्ट करें
  • संदर्भ-प्रसंग format: अच्छे से समझें

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