मानव पाचन तंत्र (Human Digestive System)
🇬🇧 English Medium Students: Click Here for English Versionमानव पाचन तंत्र (Digestive System) आहार नाल (Alimentary canal) और उससे जुड़ी ग्रंथियों का एक समूह है जो जटिल भोजन को सरल और अवशोषित करने योग्य पदार्थों में बदलता है। यह प्रक्रिया मुख से शुरू होकर गुदा (Anus) तक चलती है। एक वयस्क मनुष्य में आहार नाल की लंबाई लगभग 8 से 9 मीटर होती है।
पाचन तंत्र की संरचना (Structure)
आहार नाल एक लंबी मांसपेशीय नली है जिसके मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:
- मुख गुहा (Buccal Cavity): भोजन ग्रहण करने का स्थान।
- ग्रसिका (Oesophagus): यह नली भोजन को मुख से आमाशय तक ले जाती है।
- आमाशय (Stomach): अंग्रेजी के 'J' आकार का अंग, जहाँ भोजन का पाचन शुरू होता है।
- क्षुद्रांत्र (Small Intestine): आहार नाल का सबसे लंबा भाग, जहाँ पूर्ण पाचन होता है।
- बृहदांत्र (Large Intestine): यहाँ जल का अवशोषण होता है।
(नोट: आरेख पैमाने पर नहीं है; केवल वैचारिक समझ के लिए)
पाचन की प्रक्रिया (Process of Digestion)
1. मुख में पाचन (Digestion in Mouth)
पाचन की शुरुआत मुख से होती है। दांत भोजन को चबाकर छोटा करते हैं। लार ग्रंथियों (Salivary Glands) से 'लार' निकलती है, जिसमें लार एमाइलेज (Salivary Amylase) नामक एंजाइम होता है। यह एंजाइम मंड (Starch) को शर्करा (Maltose) में बदल देता है।
नोट: यह पाचन आंशिक होता है और आमाशय के अम्लीय माध्यम में रुक जाता है।
2. आमाशय में पाचन (Digestion in Stomach)
भोजन ग्रसिका से होता हुआ आमाशय में पहुँचता है। आमाशय की भित्ति में जठर ग्रंथियां (Gastric glands) होती हैं जो तीन चीजें स्रावित करती हैं:
- हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl): यह भोजन के माध्यम को अम्लीय (Acidic) बनाता है ताकि पेप्सिन एंजाइम कार्य कर सके। यह भोजन में आए जीवाणुओं को भी नष्ट करता है।
- पेप्सिन (Pepsin): यह एंजाइम प्रोटीन का पाचन करता है।
- श्लेष्मा (Mucus): यह आमाशय की आंतरिक परत को अम्ल के प्रभाव से बचाती है।
3. क्षुद्रांत्र में पाचन (Digestion in Small Intestine)
क्षुद्रांत्र (छोटी आंत) आहार नाल का सबसे लंबा भाग है। यहाँ कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा का पूर्ण पाचन होता है। इसे दो ग्रंथियों से स्राव प्राप्त होता है:
| ग्रंथि (Gland) | स्राव (Secretion) | कार्य (Function) |
|---|---|---|
| यकृत (Liver) | पित्त रस (Bile Juice) | यह अम्लीय भोजन को क्षारीय बनाता है और वसा का इमल्सीकरण (Emulsification) करता है। |
| अग्न्याशय (Pancreas) | अग्न्याशयिक रस |
इसमें तीन मुख्य एंजाइम होते हैं:
|
अवशोषण और बहिक्षेपण (Absorption & Egestion)
छोटी आंत की आंतरिक भित्ति पर अंगुली जैसे प्रवर्ध होते हैं जिन्हें दीर्घरोम (Villi) कहते हैं। दीर्घरोम (Villi) अवशोषण के लिए सतही क्षेत्रफल बढ़ाकर ग्लूकोज, अमीनो अम्ल और फैटी एसिड को रक्त में पहुँचाते हैं।
बिना पचा हुआ भोजन बृहदांत्र (Large Intestine) में भेज दिया जाता है, जहाँ दीर्घरोम इस पदार्थ से जल का अवशोषण कर लेते हैं। शेष अपशिष्ट पदार्थ गुदा (Anus) द्वारा शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
- पाचन की शुरुआत मुख में होती है।
- HCl जीवाणु नष्ट करता है और पेप्सिन को सक्रिय करता है।
- Villi अवशोषण हेतु सतही क्षेत्रफल बढ़ाते हैं।
- पित्त (Bile) कोई एंजाइम नहीं है, यह केवल वसा को तोड़ता (Emulsify) है।
अभ्यास प्रश्न (Chapter Assessment)
1. हमारे आमाशय में अम्ल (Acid) की क्या भूमिका है?
2. पाचक एंजाइमों (Digestive Enzymes) का क्या कार्य है?
3. पचे हुए भोजन को अवशोषित करने के लिए क्षुद्रांत्र (Small Intestine) में क्या रचना होती है?
Last Updated: January 2026
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