रासायनिक गतिकी (Chemical Kinetics)
रसायन विज्ञान में यह तथ्य सर्वविदित है कि अनेक अभिक्रियाएँ ऊष्मागतिकीय रूप से संभव होने के बावजूद वास्तविक परिस्थितियों में अत्यंत धीमी गति से होती हैं, जबकि कुछ अन्य अभिक्रियाएँ अत्यंत तीव्र गति से पूर्ण हो जाती हैं। इन दोनों स्थितियों के बीच के अंतर को समझना ही रासायनिक गतिकी का मूल उद्देश्य है।
रासायनिक गतिकी अभिक्रियाओं की संभाव्यता का नहीं, बल्कि उनकी गति, उस गति को नियंत्रित करने वाले कारकों, तथा अभिक्रिया के सूक्ष्म स्तर पर होने वाली घटनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन करती है।
अभिक्रिया की दर का अर्थ
किसी रासायनिक अभिक्रिया की दर उस गति का माप है जिससे अभिकारक उपभोग होते हैं या उत्पाद बनते हैं। व्यावहारिक रूप से यह दर समय के साथ सांद्रता में होने वाले परिवर्तन से व्यक्त की जाती है।
यदि किसी अभिक्रिया में अभिकारक A से उत्पाद B बन रहा हो, तो अभिक्रिया की दर को निम्न प्रकार व्यक्त किया जा सकता है:
Rate ∝ − d[A]/dt या Rate ∝ d[B]/dt
ऋणात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि अभिकारक की सांद्रता समय के साथ घटती है।
औसत दर एवं क्षणिक दर
जब किसी निश्चित समयांतराल में सांद्रता में कुल परिवर्तन को उसी समयांतराल से विभाजित किया जाता है, तो प्राप्त मान को औसत दर कहा जाता है।
Average Rate = Δ[Concentration] / Δt
इसके विपरीत, किसी विशेष क्षण पर अभिक्रिया की वास्तविक गति को क्षणिक दर कहते हैं। यह दर सांद्रता–समय ग्राफ पर किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्शरेखा की ढाल द्वारा प्राप्त होती है।
वास्तविक रासायनिक प्रणालियों के अध्ययन में क्षणिक दर का महत्व अधिक होता है, क्योंकि अभिक्रिया की गति समय के साथ निरंतर परिवर्तित होती रहती है।
अभिक्रिया की दर को प्रभावित करने वाले कारक
किसी रासायनिक अभिक्रिया की गति केवल अभिकारकों की उपस्थिति पर निर्भर नहीं करती, बल्कि अनेक भौतिक एवं रासायनिक कारकों से प्रभावित होती है।
- अभिकारकों की रासायनिक प्रकृति
- अभिकारकों की सांद्रता
- तापमान
- उत्प्रेरक की उपस्थिति
- सतह क्षेत्रफल (विशेषतः विषम अभिक्रियाओं में)
इन सभी कारकों का प्रभाव अणुओं के बीच होने वाली टक्करों की संख्या, उनकी ऊर्जा, तथा उनके अभिविन्यास पर पड़ता है।
सांद्रता पर दर की निर्भरता एवं दर समीकरण
प्रयोगों द्वारा यह स्थापित किया गया है कि अधिकांश अभिक्रियाओं की दर अभिकारकों की सांद्रता पर निर्भर करती है। इस निर्भरता को दर समीकरण द्वारा व्यक्त किया जाता है।
Rate = k [A]m [B]n
यहाँ k को दर स्थिरांक कहते हैं, जो किसी निश्चित तापमान पर अभिक्रिया की अंतर्निहित गति का माप है। घातांक m और n प्रयोगात्मक रूप से निर्धारित किए जाते हैं।
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि दर समीकरण का रूप अभिक्रिया के संतुलित समीकरण से सीधे नहीं निकाला जा सकता।
दर स्थिरांक का भौतिक अर्थ
दर स्थिरांक k उस दर का मान दर्शाता है जब सभी अभिकारकों की सांद्रता एक इकाई के बराबर हो। इसका मात्रक अभिक्रिया के क्रम पर निर्भर करता है।
तापमान बढ़ने पर दर स्थिरांक का मान बढ़ता है, जो यह संकेत देता है कि अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा में वृद्धि हुई है।
अभिक्रिया का क्रम (Order of a Reaction)
किसी रासायनिक अभिक्रिया का क्रम दर समीकरण में अभिकारकों की सांद्रताओं पर लगे घातांकों का योग होता है। यह परिभाषा अभिक्रिया के गणितीय व्यवहार पर आधारित होती है, न कि केवल उसके रासायनिक समीकरण पर।
यदि किसी अभिक्रिया के लिए दर समीकरण इस प्रकार हो:
Rate = k [A]m[B]n
तो अभिक्रिया का क्रम (m + n) होगा। यह मान केवल प्रयोगात्मक विधियों से निर्धारित किया जा सकता है।
यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि अभिक्रिया का क्रम शून्य, पूर्णांक या भिन्नात्मक कोई भी मान ग्रहण कर सकता है।
शून्य क्रम अभिक्रिया (Zero Order Reaction)
शून्य क्रम की अभिक्रिया में अभिक्रिया की दर अभिकारक की सांद्रता से पूर्णतः स्वतंत्र होती है। इस प्रकार की अभिक्रियाएँ अक्सर विषम उत्प्रेरण या सतह-नियंत्रित प्रक्रियाओं में देखी जाती हैं।
गणितीय रूप से, शून्य क्रम अभिक्रिया के लिए:
Rate = k
समाकलन करने पर शून्य क्रम का समाकलित दर समीकरण प्राप्त होता है:
[A] = [A]0 − kt
यह समीकरण स्पष्ट करता है कि सांद्रता समय के साथ रैखिक रूप से घटती है। [A] बनाम t का ग्राफ सीधी रेखा होता है, जिसकी ढाल −k के बराबर होती है।
प्रथम क्रम अभिक्रिया (First Order Reaction)
प्रथम क्रम की अभिक्रिया वह होती है जिसमें अभिक्रिया की दर केवल एक अभिकारक की सांद्रता पर निर्भर करती है। इस प्रकार की अभिक्रियाएँ प्राकृतिक एवं जैविक प्रणालियों में बहुत सामान्य हैं।
प्रथम क्रम अभिक्रिया का दर समीकरण:
Rate = k[A]
समाकलन के पश्चात प्राप्त समीकरण:
ln([A]0/[A]) = kt
इस समीकरण से स्पष्ट है कि ln[A] बनाम t का ग्राफ एक सीधी रेखा होता है, जिसकी ढाल k के बराबर होती है।
रेडियोधर्मी क्षय, दवाओं का अपघटन, और अनेक गैसीय अभिक्रियाएँ प्रथम क्रम गतिकी का अनुसरण करती हैं।
अर्धायु (Half-Life of a Reaction)
अर्धायु वह समय है जिसमें किसी अभिक्रिया में अभिकारक की प्रारंभिक सांद्रता का आधा भाग उपभोग हो जाता है।
प्रथम क्रम अभिक्रिया के लिए अर्धायु का मान प्रारंभिक सांद्रता से स्वतंत्र होता है, जो इसे अन्य क्रमों की अभिक्रियाओं से विशिष्ट बनाता है।
t1/2 = 0.693 / k
यह गुण रेडियोधर्मी तत्वों की आयु निर्धारण और औषधीय स्थायित्व के अध्ययन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है।
आणविकता (Molecularity of a Reaction)
आणविकता किसी प्राथमिक (elementary) अभिक्रिया चरण में भाग लेने वाले अणुओं की संख्या को दर्शाती है। यह अवधारणा अभिक्रिया की यांत्रिकी से सीधे संबंधित होती है।
आणविकता के संबंध में निम्न तथ्य विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं:
- आणविकता सदैव धनात्मक पूर्णांक होती है
- आणविकता कभी शून्य या भिन्न नहीं हो सकती
- यह केवल प्राथमिक चरण के लिए परिभाषित होती है
यहाँ यह स्पष्ट अंतर समझना आवश्यक है कि जहाँ क्रम प्रयोगात्मक अवधारणा है, वहीं आणविकता सैद्धांतिक एवं यांत्रिक अवधारणा है।
तापमान का अभिक्रिया की दर पर प्रभाव
यह एक सर्वमान्य तथ्य है कि तापमान बढ़ाने पर अधिकांश रासायनिक अभिक्रियाओं की दर तेजी से बढ़ जाती है। इस प्रभाव का कारण अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा में वृद्धि है, जिससे प्रभावी टक्करों की संख्या बढ़ जाती है।
जब किसी प्रणाली का तापमान बढ़ाया जाता है, तो केवल अणुओं की गति ही नहीं बढ़ती, बल्कि अधिक अणु सक्रियण ऊर्जा से अधिक ऊर्जा प्राप्त कर लेते हैं।
सामान्यतः यह देखा जाता है कि 10°C तापमान वृद्धि पर अभिक्रिया की दर लगभग 2 से 3 गुना बढ़ जाती है, हालाँकि यह मान अभिक्रिया की प्रकृति पर निर्भर करता है।
Arrhenius समीकरण
तापमान और दर स्थिरांक के बीच मात्रात्मक संबंध को स्वीडिश वैज्ञानिक Arrhenius ने गणितीय रूप में प्रस्तुत किया, जिसे आज Arrhenius समीकरण के नाम से जाना जाता है।
k = A e−Ea / RT
इस समीकरण में:
- k — दर स्थिरांक
- A — आवृत्ति गुणांक (frequency factor)
- Ea — सक्रियण ऊर्जा
- R — गैस नियतांक
- T — केल्विन तापमान
Arrhenius समीकरण यह स्पष्ट करता है कि दर स्थिरांक का मान तापमान बढ़ने पर घातीय रूप से बढ़ता है, न कि रैखिक रूप से।
Arrhenius समीकरण का ग्राफीय रूप
यदि Arrhenius समीकरण का लघुगणकीय रूप लिया जाए, तो यह निम्न रूप में परिवर्तित हो जाता है:
ln k = ln A − (Ea / R)(1/T)
इस समीकरण के अनुसार ln k बनाम 1/T का ग्राफ एक सीधी रेखा होता है, जिसकी ढाल −Ea/R के बराबर होती है।
इस ग्राफ की सहायता से सक्रियण ऊर्जा का मान प्रयोगात्मक रूप से ज्ञात किया जाता है।
सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy)
सक्रियण ऊर्जा वह न्यूनतम ऊर्जा है जो अभिकारक अणुओं को प्रभावी टक्कर के लिए आवश्यक होती है।
यदि अणुओं के पास सक्रियण ऊर्जा से कम ऊर्जा हो, तो टक्कर होने पर भी अभिक्रिया नहीं होती।
सक्रियण ऊर्जा की अवधारणा यह स्पष्ट करती है कि क्यों कुछ अभिक्रियाएँ सामान्य तापमान पर बहुत धीमी होती हैं।
टक्कर सिद्धांत (Collision Theory)
टक्कर सिद्धांत के अनुसार किसी रासायनिक अभिक्रिया के लिए केवल अणुओं की टक्कर पर्याप्त नहीं होती। अभिक्रिया तभी संभव होती है जब टक्कर:
- पर्याप्त ऊर्जा के साथ हो
- उचित अभिविन्यास (orientation) में हो
जो टक्कर इन दोनों शर्तों को पूरा करती है, उसे प्रभावी टक्कर कहा जाता है।
टक्कर सिद्धांत अभिक्रिया की दर को अणुओं के स्तर पर समझने का आधार प्रदान करता है।
उत्प्रेरक का प्रभाव (Effect of Catalyst)
उत्प्रेरक वह पदार्थ है जो स्वयं स्थायी रूप से परिवर्तित हुए बिना अभिक्रिया की दर को बढ़ा देता है।
उत्प्रेरक एक वैकल्पिक अभिक्रिया मार्ग प्रदान करता है जिसकी सक्रियण ऊर्जा कम होती है। फलस्वरूप, अधिक संख्या में अणु प्रभावी टक्कर कर पाते हैं।
यह महत्वपूर्ण है कि उत्प्रेरक अभिक्रिया की ऊष्मागतिकीय स्थिति या संतुलन स्थिरांक को नहीं बदलता, केवल संतुलन प्राप्त करने की गति को बढ़ाता है।
ऊर्जा प्रोफ़ाइल आरेख (Energy Profile Diagram)
किसी रासायनिक अभिक्रिया के दौरान ऊर्जा में होने वाले परिवर्तन को ग्राफ के माध्यम से दर्शाने के लिए ऊर्जा प्रोफ़ाइल आरेख का प्रयोग किया जाता है। इस ग्राफ में ऊर्ध्व अक्ष पर ऊर्जा तथा क्षैतिज अक्ष पर अभिक्रिया की प्रगति दर्शाई जाती है।
ऊर्जा प्रोफ़ाइल में अभिकारकों की ऊर्जा, उत्पादों की ऊर्जा तथा उनके बीच स्थित उच्चतम बिंदु संक्रमण अवस्था (Transition State) को दर्शाता है।
ऊर्जा प्रोफ़ाइल आरेख से यह स्पष्ट होता है कि सक्रियण ऊर्जा अभिकारकों की ऊर्जा और संक्रमण अवस्था की ऊर्जा के बीच का अंतर है।
उत्प्रेरक की उपस्थिति में इस ग्राफ की ऊँचाई कम हो जाती है, जिसका अर्थ है कि अभिक्रिया के लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
समानांतर एवं क्रमिक अभिक्रियाएँ
अनेक रासायनिक अभिक्रियाएँ एकल चरण में न होकर एक से अधिक चरणों में सम्पन्न होती हैं। ऐसी अभिक्रियाओं को क्रमिक अभिक्रियाएँ कहा जाता है।
यदि किसी अभिकारक से एक साथ दो या अधिक स्वतंत्र अभिक्रियाएँ संभव हों, तो उन्हें समानांतर अभिक्रियाएँ कहा जाता है।
क्रमिक अभिक्रियाओं में सबसे धीमा चरण पूरी अभिक्रिया की दर को नियंत्रित करता है। इसे दर-निर्धारक चरण कहा जाता है।
दर नियम का यांत्रिक आधार
दर नियम केवल प्रयोगात्मक परिणाम नहीं है, बल्कि यह अभिक्रिया की यांत्रिकी (mechanism) से गहराई से जुड़ा होता है।
प्राथमिक (elementary) अभिक्रियाओं में दर नियम सीधे अणुओं की टक्कर संख्या पर निर्भर करता है, जबकि जटिल अभिक्रियाओं में दर नियम दर-निर्धारक चरण से निर्धारित होता है।
इस कारण किसी जटिल अभिक्रिया के लिए समग्र रासायनिक समीकरण से सीधे दर नियम निकालना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होता।
औद्योगिक एवं दैनिक जीवन में Chemical Kinetics
Chemical Kinetics के सिद्धांत केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं हैं, बल्कि औद्योगिक प्रक्रियाओं और दैनिक जीवन में इनका अत्यंत व्यापक उपयोग है।
- खाद उद्योग में अमोनिया का निर्माण तापमान, दाब एवं उत्प्रेरक के सटीक नियंत्रण पर आधारित है।
- औषधि निर्माण में दवाओं की शेल्फ लाइफ उनकी अपघटन दर पर निर्भर करती है।
- खाद्य पदार्थों के खराब होने की गति रासायनिक अभिक्रियाओं की दर से नियंत्रित होती है।
- जंग लगना, ईंधन का दहन, तथा जैविक अपघटन Chemical Kinetics के प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।
परीक्षा दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बिंदु
- Order और Molecularity में अंतर स्पष्ट रखें
- First order reactions की half-life स्वतंत्र होती है
- Arrhenius ग्राफ से सक्रियण ऊर्जा ज्ञात की जाती है
- उत्प्रेरक संतुलन स्थिरांक नहीं बदलता
- दर नियम प्रयोगात्मक रूप से निर्धारित होता है
काल्पनिक प्रश्न–उत्तर ⭐ (Signature Section)
प्रश्न: यदि तापमान बढ़ाने पर दर बढ़ती है, तो सभी अभिक्रियाएँ कमरे के तापमान पर ही क्यों नहीं होतीं?
उत्तर: क्योंकि अनेक अभिक्रियाओं की सक्रियण ऊर्जा सामान्य तापमान पर उपलब्ध औसत ऊर्जा से अधिक होती है, जिससे प्रभावी टक्करों की संख्या अत्यंत कम हो जाती है।
प्रश्न: क्या किसी अभिक्रिया की Molecularity शून्य हो सकती है?
उत्तर: नहीं। Molecularity सदैव धनात्मक पूर्णांक होती है, जबकि order शून्य भी हो सकता है।
संक्षिप्त नोट्स (Quick Revision)
- दर = अभिकारकों की सांद्रता पर निर्भरता
- सक्रियण ऊर्जा = न्यूनतम आवश्यक ऊर्जा
- Arrhenius समीकरण तापमान का प्रभाव दर्शाता है
- उत्प्रेरक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करता है
- दर-निर्धारक चरण पूरी अभिक्रिया नियंत्रित करता है
यह अध्ययन सामग्री NCERT एवं RBSE पाठ्यक्रम पर आधारित है और केवल शैक्षणिक उद्देश्य से तैयार की गई है। परीक्षा में प्रश्नों का स्वरूप बोर्ड द्वारा परिवर्तित किया जा सकता है।
Collision Theory of Chemical Reactions
Collision Theory के अनुसार किसी भी रासायनिक अभिक्रिया के घटित होने के लिए अभिकारक कणों के बीच प्रभावी टक्कर (Effective Collision) होना आवश्यक है।
सभी टक्कर प्रभावी नहीं होतीं। केवल वही टक्कर प्रभावी मानी जाती है जिसमें पर्याप्त ऊर्जा और उचित अभिविन्यास (Proper Orientation) उपस्थित हो।
यदि टक्कर के समय कणों की ऊर्जा सक्रियण ऊर्जा से कम है, तो टक्कर के बाद अभिकारक पुनः अलग हो जाते हैं और कोई उत्पाद नहीं बनता।
प्रभावी टक्कर की शर्तें
- टक्कर की ऊर्जा ≥ सक्रियण ऊर्जा
- अणुओं का सही ज्यामितीय अभिविन्यास
- टक्कर की आवृत्ति पर्याप्त हो
इसी कारण उच्च तापमान पर अभिक्रिया दर बढ़ जाती है, क्योंकि उच्च ऊर्जा वाले कणों का अनुपात बढ़ जाता है।
Activation Energy का भौतिक अर्थ
सक्रियण ऊर्जा वह न्यूनतम ऊर्जा है जो अभिकारकों को संक्रमण अवस्था तक पहुँचने के लिए आवश्यक होती है।
यह ऊर्जा बंधन तोड़ने, इलेक्ट्रॉन पुनर्व्यवस्था और अस्थायी अस्थिर संरचना निर्माण में प्रयुक्त होती है।
कम सक्रियण ऊर्जा वाली अभिक्रियाएँ सामान्य तापमान पर भी तेज़ी से होती हैं, जबकि अधिक सक्रियण ऊर्जा वाली अभिक्रियाओं के लिए ताप या उत्प्रेरक आवश्यक होता है।
उत्प्रेरक का गतिकीय विश्लेषण
उत्प्रेरक अभिक्रिया की गति बढ़ाता है, लेकिन न तो स्वयं स्थायी रूप से उपभोग होता है और न ही अभिक्रिया के संतुलन को बदलता है।
गतिकीय दृष्टि से उत्प्रेरक एक वैकल्पिक अभिक्रिया पथ प्रदान करता है जिसमें सक्रियण ऊर्जा कम होती है।
इसी कारण उत्प्रेरक की उपस्थिति में अभिक्रिया अधिक तेजी से पूर्ण होती है, भले ही अभिकारक और उत्पाद वही रहते हों।
Chemical Kinetics और Chemical Equilibrium का संबंध
Chemical Kinetics अभिक्रिया की गति का अध्ययन करता है, जबकि Chemical Equilibrium अभिक्रिया की सीमा (extent) का अध्ययन करता है।
दोनों विषय स्वतंत्र प्रतीत होते हैं, लेकिन वास्तव में वे गहराई से जुड़े हुए हैं।
उत्प्रेरक संतुलन प्राप्त करने की गति बढ़ाता है, लेकिन संतुलन स्थिरांक का मान नहीं बदलता।
उच्च स्तरीय वैचारिक प्रश्न (Board + Competitive)
प्रश्न: यदि किसी अभिक्रिया का order शून्य है, तो क्या वह बिना अभिकारक के हो सकती है?
उत्तर: नहीं। शून्य order का अर्थ है कि दर अभिकारक की सांद्रता से स्वतंत्र है, लेकिन अभिकारक का अस्तित्व फिर भी आवश्यक होता है।
प्रश्न: दो अभिक्रियाओं की सक्रियण ऊर्जा समान हो, तो क्या उनकी दर समान होगी?
उत्तर: आवश्यक नहीं। दर पर frequency factor, अभिविन्यास और अणुओं की प्रकृति भी प्रभाव डालते हैं।
इस अध्याय से जुड़े प्रमुख वैज्ञानिक
- Svante Arrhenius – तापमान एवं दर का गणितीय संबंध
- Maxwell & Boltzmann – ऊर्जा वितरण सिद्धांत
- Ostwald – उत्प्रेरण का वैज्ञानिक विश्लेषण
इन वैज्ञानिकों के कार्यों ने Chemical Kinetics को केवल प्रयोगात्मक विज्ञान न रहकर सैद्धांतिक आधार प्रदान किया।
समेकित दृष्टिकोण (One-Chapter Closure)
Chemical Kinetics रसायन विज्ञान की वह शाखा है जो यह स्पष्ट करती है कि क्यों कुछ अभिक्रियाएँ तत्काल होती हैं, जबकि कुछ को घंटों, दिनों या वर्षों का समय लगता है।
यह अध्याय औद्योगिक उत्पादन, जैव-रसायन, औषधि विज्ञान और पर्यावरण रसायन की नींव तैयार करता है।
इस अध्याय की पूर्ण समझ विद्यार्थी को केवल परीक्षा में ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान में भी मजबूत आधार प्रदान करती है।
Chemical Kinetics : औद्योगिक एवं व्यावहारिक महत्त्व
Chemical Kinetics का अध्ययन केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह औद्योगिक उत्पादन, औषधि निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यावरण संरक्षण और जैव-रसायन जैसे क्षेत्रों में प्रत्यक्ष रूप से उपयोगी है।
उद्योगों में अभिक्रिया की गति को नियंत्रित करना लागत, उत्पादन क्षमता और सुरक्षा तीनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
- उत्पादन समय घटाने के लिए उत्प्रेरकों का प्रयोग
- अनावश्यक उप-उत्पाद रोकने हेतु तापमान नियंत्रण
- सुरक्षित अभिक्रिया दर के लिए दाब एवं सांद्रता संतुलन
Environmental एवं Biological Relevance
वातावरण में होने वाली अनेक रासायनिक अभिक्रियाएँ गतिकीय नियमों का पालन करती हैं।
ओज़ोन क्षय, वायु प्रदूषण, ग्रीनहाउस गैसों की अभिक्रियाएँ तथा जल शुद्धिकरण प्रक्रियाएँ सभी Chemical Kinetics पर आधारित हैं।
जैविक प्रणालियों में एंज़ाइम उत्प्रेरक की भाँति कार्य करते हैं और बहुत कम तापमान पर भी अत्यंत तीव्र अभिक्रियाएँ संभव बनाते हैं।
Visual Learning Section (Conceptual Diagrams – Textual Explanation)
ऊर्जा प्रोफाइल आरेख:
ऊर्जा प्रोफाइल आरेख में y-अक्ष पर ऊर्जा और x-अक्ष पर अभिक्रिया प्रगति को दर्शाया जाता है।
अभिकारकों की ऊर्जा से ऊपर संक्रमण अवस्था का शिखर सक्रियण ऊर्जा को दर्शाता है। उत्प्रेरक की उपस्थिति में यह शिखर अपेक्षाकृत नीचे होता है।
Maxwell–Boltzmann Distribution:
यह वितरण विभिन्न ऊर्जाओं वाले कणों का अनुपात दर्शाता है। उच्च तापमान पर वक्र दाईं ओर खिसक जाता है, जिससे सक्रियण ऊर्जा से अधिक ऊर्जा वाले कणों की संख्या बढ़ती है।
परीक्षा-दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु
- Order और Molecularity कभी समान नहीं माने जाते
- Half-life केवल first order reactions के लिए सांद्रता से स्वतंत्र होती है
- Arrhenius समीकरण से सक्रियण ऊर्जा की गणना की जाती है
- उत्प्रेरक दर बढ़ाता है, संतुलन स्थिरांक नहीं
संक्षिप्त पुनरावृत्ति (Short Notes Section)
- Rate Law: प्रयोगात्मक रूप से निर्धारित समीकरण
- Order: दर समीकरण में घातों का योग
- Molecularity: मूलभूत चरण में भाग लेने वाले कण
- Half-life: अभिकारक की आधी मात्रा के क्षय का समय
- Activation Energy: न्यूनतम आवश्यक ऊर्जा
Interlinking : पहले प्रकाशित अध्याय
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह अध्ययन सामग्री राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) के नवीनतम पाठ्यक्रम पर आधारित है। इसका उद्देश्य शैक्षणिक सहायता प्रदान करना है। परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का स्वरूप बोर्ड के निर्णयानुसार परिवर्तित हो सकता है।
🔬 Chemical Kinetics : Conceptual Diagrams (SVG)
नीचे दिए गए SVG डायग्राम Chemical Kinetics के मुख्य concepts को दृश्य रूप में स्पष्ट करते हैं। ये diagrams परीक्षा में concept clarity और numerical understanding दोनों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
📈 Rate of Reaction (Concentration vs Time)
यह ग्राफ दर्शाता है कि जैसे-जैसे समय बढ़ता है, reactant की concentration घटती जाती है। ग्राफ की ढाल (slope) ही reaction की rate को दर्शाती है।
📊 Zero Order Reaction
Zero order reaction में reaction की rate reactant की concentration पर निर्भर नहीं करती, इसलिए concentration बनाम time ग्राफ एक सीधी रेखा होता है।
📉 First Order Reaction
First order reaction में rate reactant की concentration पर निर्भर करती है, जिससे ग्राफ exponential curve बनाता है।
⚡ Activation Energy & Catalyst Effect
Catalyst reaction की activation energy कम करता है, जिससे reaction तेज होती है, लेकिन overall energy change समान रहता है।
RBSE Class 12 Chemistry – Chemical Kinetics (Unit 3)
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