RBSE Class 12 Hindi Shabd Shakti (शब्द शक्ति): Definition, Types & Examples | Complete Guide

📅 Saturday, 10 January 2026 📖 3-5 min read
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Marwari Mission 100

शब्द शक्ति (Word Power): परिभाषा, भेद और उदाहरण

हिंदी व्याकरण | कक्षा 12 अनिवार्य हिंदी | विस्तृत अध्ययन

📚 मारवाड़ी मिशन 100 - अध्ययन शृंखला:
  1. पाठ्यक्रम और ब्लूप्रिंट 2026
  2. पत्र एवं प्रारूप लेखन (Drafting Guide)
  3. भाषा, व्याकरण और लिपि (Deep Dive)
  4. Current: शब्द शक्ति (The Power of Words)
शब्द शक्ति (Shabd Shakti)
Word Power Concept

अन्य नाम: शब्द-वृत्ति, व्यापार

मूल स्रोत: काव्यशास्त्र (काव्यप्रकाश, साहित्य दर्पण)

मुख्य भेद: 3 (अभिधा, लक्षणा, व्यंजना)

RBSE अंक: 2 अंक

प्रमुख आचार्य: मम्मट, विश्वनाथ

शब्द शक्ति (Word Power) हिंदी व्याकरण और काव्यशास्त्र का वह आधारस्तंभ है, जो हमें शब्दों के 'अंतर्निहित' अर्थ तक पहुँचाता है। सामान्यतः हम जो शब्द सुनते हैं, उसका अर्थ हमेशा सीधा नहीं होता। संदर्भ (Context) और वक्ता के आशय के अनुसार शब्द का अर्थ बदल जाता है। इसी अर्थ-परिवर्तन की शक्ति को 'शब्द शक्ति' कहते हैं।

आचार्य मम्मट के अनुसार:
"व्यापारो ह्यभिधाद्यो मम्मटादिभिरिष्यते।"
अर्थात, शब्द के अर्थ को बताने वाले व्यापार को शब्द शक्ति कहते हैं।

1. शब्द और अर्थ का संबंध: एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण

भारतीय काव्यशास्त्र में शब्द को तीन कोटियों में बाँटा गया है। प्रत्येक शब्द का एक विशेष अर्थ होता है और उस अर्थ को प्रकट करने वाली एक विशेष शक्ति होती है।

शब्द का प्रकार अर्थ का नाम शक्ति का नाम सरल व्याख्या
वाचक (Vachak) वाच्यार्थ / मुख्यार्थ अभिधा (Abhidha) डिक्शनरी वाला सीधा अर्थ।
लक्षक (Lakshak) लक्ष्यार्थ लक्षणा (Lakshana) लक्षणों के आधार पर लिया गया अर्थ।
व्यंजक (Vyanjak) व्यंग्यार्थ व्यंजना (Vyanjana) छुपा हुआ या ध्वनित होने वाला अर्थ।

2. अभिधा शब्द शक्ति (Abhidha)

शब्द को सुनते या पढ़ते ही जो प्रचलित, लोक-प्रसिद्ध और सीधा अर्थ समझ में आता है, उसे 'वाच्यार्थ' कहते हैं और जिस शक्ति से यह अर्थ निकलता है, उसे अभिधा कहते हैं।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल इसे "उत्तम काव्य" मानते हैं क्योंकि यह भ्रम पैदा नहीं करती।

उदाहरण:
  • "गाय घास चर रही है।" (यहाँ गाय का मतलब एक विशेष पशु ही है।)
  • "मोहन पुस्तक पढ़ रहा है।"
  • "गुलाब का फूल सुंदर है।"

इन वाक्यों में शब्दों का वही अर्थ है जो हम बचपन से जानते हैं। कोई टेढ़ा-मेढ़ा अर्थ नहीं है।

अभिधा के तीन शब्द-भेद:

  1. रूढ़ (Roodh): जिनके टुकड़े करने पर अर्थ न निकले। (जैसे- 'पेड़', 'घर')
  2. यौगिक (Yaugik): दो शब्दों के योग से बने शब्द। (जैसे- 'विद्यालय', 'पाठशाला')
  3. योगरूढ़ (Yogroodh): जो यौगिक होकर भी किसी एक विशेष अर्थ में रूढ़ हो गए हों। (जैसे- 'पंकज' = कीचड़ में जन्मा, अर्थात कमल। 'दशानन' = रावण)

3. लक्षणा शब्द शक्ति (Lakshana)

जब शब्द के मुख्य अर्थ (वाच्यार्थ) में बाधा उत्पन्न हो, और मुख्य अर्थ से संबंधित कोई अन्य अर्थ (लक्ष्यार्थ) ग्रहण किया जाए, वहाँ लक्षणा शब्द शक्ति होती है।

लक्षणा के लिए 3 शर्तें अनिवार्य हैं (Three Conditions):
  1. मुख्यार्थ बाधा: सीधा अर्थ न जमे (Impossible meaning).
  2. मुख्यार्थ योग: मुख्य अर्थ और नए अर्थ में कोई संबंध हो।
  3. रूढ़ि या प्रयोजन: नया अर्थ लेने का कोई कारण (Logic) हो।
उदाहरण 1: "मोहन गधा है।"
विश्लेषण: मोहन इंसान है, वह जानवर (गधा) नहीं हो सकता (बाधा)। यहाँ 'गधा' का अर्थ है 'मूर्ख' (लक्षणों की समानता)।

उदाहरण 2: "राजस्थान जाग उठा।"
विश्लेषण: राजस्थान (भू-भाग) नहीं जाग सकता। यहाँ अर्थ है- 'राजस्थान के लोग'।

उदाहरण 3: "लाल पगड़ी आ रही है।"
विश्लेषण: केवल पगड़ी चलकर नहीं आ सकती। अर्थ- 'सिपाही'।

लक्षणा के प्रमुख भेद (Types of Lakshana):

  • रूढा लक्षणा (Roodha): जब परंपरा या मुहावरों के कारण अर्थ बदलता है। (जैसे- "वह हवा से बातें कर रहा है।")
  • प्रयोजनवती लक्षणा: जब किसी विशेष उद्देश्य (Purpose) के लिए लाक्षणिक शब्द का प्रयोग हो। (जैसे- "गंगा पर घर है।" - इसका उद्देश्य 'गंगा जैसी पवित्रता और शीतलता' बताना है।)

4. व्यंजना शब्द शक्ति (Vyanjana)

जब न तो मुख्य अर्थ (अभिधा) लागू हो और न ही लाक्षणिक अर्थ (लक्षणा), बल्कि संदर्भ के अनुसार एक तीसरा ही चमत्कारी अर्थ निकले, तो वहाँ व्यंजना शक्ति होती है। इसे 'ध्वनि' भी कहते हैं।

विशेषता: इसका अर्थ हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकता है।

उदाहरण: "संध्या हो गई।" (It is evening)
इस एक वाक्य के अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग अर्थ (व्यंग्यार्थ) हैं:
  • पुजारी के लिए: पूजा का समय हो गया।
  • चरवाहे के लिए: गायों को घर ले जाने का समय।
  • गृहणी के लिए: चूल्हा जलाने का समय।
  • चोर के लिए: चोरी की तैयारी का समय।

व्यंजना के भेद:

शाब्दी व्यंजना (Word based) आर्थी व्यंजना (Meaning based)
जब व्यंग्यार्थ किसी विशेष शब्द पर निर्भर हो। शब्द बदल देने (पर्यायवाची रख देने) पर चमत्कार खत्म हो जाता है। (श्लेष अलंकार के उदाहरण) जब व्यंग्यार्थ शब्द पर नहीं, बल्कि अर्थ और संदर्भ पर निर्भर हो। शब्द बदलने पर भी अर्थ बना रहता है।
उदा: "पानी गये न ऊबरे, मोती मानुष चून।" (यहाँ 'पानी' हटा देने पर अर्थ खत्म हो जाएगा।) उदा: "संध्या हो गई।" (इसे "शाम हो गई" कहें तो भी वही भाव निकलेगा।)

5. तुलनात्मक अध्ययन (Comparative Study)

परीक्षा में विद्यार्थी अक्सर लक्षणा और व्यंजना में भ्रमित होते हैं। यह टेबल रामबाण है:

आधार अभिधा लक्षणा व्यंजना
अर्थ की प्रकृति सरल, स्पष्ट, डिक्शनरी वाला। टेढ़ा, लक्षणों पर आधारित। संदर्भ आधारित, छुपा हुआ।
बाधा (Obstacle) कोई बाधा नहीं होती। मुख्य अर्थ में बाधा आती है। बाधा हो भी सकती है, नहीं भी।
समझने का तरीका सुनते ही समझ आ जाता है। बुद्धि/तर्क लगाना पड़ता है। कल्पना और परिस्थिति देखनी पड़ती है।
उदाहरण (Key) शेर जंगल में रहता है। शिवाजी 'शेर' हैं (बहादुर)। (कायर से कहना)- अरे! तुम तो शेर हो। (व्यंग्य)

6. परीक्षा उपयोगी प्रश्न (Question Bank)

प्रश्न 1: "घर गंगा में है।" - इसमें कौन सी शब्द शक्ति है?
उत्तर: लक्षणा (प्रयोजनवती)। क्योंकि घर पानी के बीच नहीं हो सकता, इसका अर्थ है गंगा के किनारे और गंगा जैसी पवित्रता वाला घर।

प्रश्न 2: अभिधा और लक्षणा में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर: अभिधा में मुख्यार्थ ग्रहण किया जाता है और कोई बाधा नहीं होती, जबकि लक्षणा में मुख्यार्थ में बाधा होने पर उससे संबंधित अन्य अर्थ ग्रहण किया जाता है।

प्रश्न 3: "चिरजीवौ जोरी जुरै, क्यों न सनेह गंभीर। को घटि ये वृषभानुजा, वे हलधर के बीर।।" - दोहे में कौन सी शक्ति है?
उत्तर: शाब्दी व्यंजना। (यहाँ 'वृषभानुजा' और 'हलधर' के श्लेषार्थ के कारण चमत्कार है।)

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