बचपन (Bachpan)
बचपन कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तक 'वसंत भाग-1' (NCERT 2025-26) का दूसरा पाठ है। यह एक संस्मरण (Reminiscence) है जिसमें लेखिका कृष्णा सोबती ने अपने बचपन की एक विशेष घटना का वर्णन किया है।
| विषय | हिंदी |
|---|---|
| कक्षा | 6 |
| लेखिका | कृष्णा सोबती |
| विधा | संस्मरण |
| स्थान | शिमला (Shimla) |
| मुख्य घटना | चश्मे का मज़ाक और चॉकलेट |
| NCERT Status | Updated 2025-26 |
1. परिचय एवं लेखिका
कृष्णा सोबती (1925–2019) प्रसिद्ध हिंदी लेखिका थीं। उन्हें 2017 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 'बचपन' पाठ में उन्होंने शिमला में बिताए अपने बचपन की एक संवेदनशील घटना को याद किया है।
2. विषय-वस्तु का विश्लेषण
शिमला रिज (Shimla Ridge) की सैर
लेखिका अपने पिताजी के साथ शिमला रिज पर सैर करने जाती थीं। रास्ते में एक कंफ़ेक्शनरी (Confectionery) की दुकान पड़ती थी। पिताजी वहाँ से उन्हें चॉकलेट खरीदकर देते थे। यह उनके लिए खुशी का क्षण था।
चश्मे वाली घटना (The Spectacles Incident)
लेखिका चश्मा लगाती थीं। उनके चचेरे भाई ने उनका मज़ाक उड़ाया। उसने एक गीत गाया: "आँख पर चश्मा लगाया, मुस्कुराहट ओंठों पर लाया..."। यह मज़ाक बालिका के मन को ठेस पहुँचाता है। वह इसे सहन नहीं कर पाती। वह रोती है और भागकर अपने पिताजी के पास जाती है।
पिताजी उसकी सहानुभूति करते हैं और फिर से उसे चॉकलेट देकर सांत्वना देते हैं। यह घटना बच्चे की संवेदनशीलता और पिता के स्नेह को दर्शाती है।
3. साहित्यिक तथ्य सारणी
| तत्व (Element) | विवरण | पाठ में महत्व |
|---|---|---|
| स्थान | शिमला रिज (Shimla Ridge) | घटना का स्थान। |
| वस्तु | चॉकलेट (Chocolate) | खुशी और सांत्वना का प्रतीक। |
| विरोधी | चचेरा भाई | मज़ाक करने वाला। |
| संवेदना | बालिका का रोना | बाल मन की संवेदनशीलता। |
4. दृश्य अवधारणा (Visual Aid)
5. व्याकरण: सर्वनाम (Pronoun)
पाठ में प्रयुक्त सर्वनामों का विश्लेषण:
| वाक्य | सर्वनाम | प्रकार |
|---|---|---|
| वह शिमला गई। | वह | पुरुषवाचक |
| पिताजी ने उसे चॉकलेट दी। | उसे | पुरुषवाचक (कर्म कारक) |
| उन्होंने कहा। | उन्होंने | पुरुषवाचक (सम्मानसूचक) |
6. इंटरैक्टिव क्विज़ (Interactive Quiz)
निर्देश: सही विकल्प चुनें और "उत्तर देखें" पर क्लिक करें।
निष्कर्ष
'बचपन' पाठ हमें सिखाता है कि बच्चों का मन बहुत संवेदनशील होता है। बड़ों को उनकी भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। कृष्णा सोबती ने साबित किया है कि बचपन की छोटी-सी घटना भी जीवन भर याद रहती है।


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