Class 11 Political Science Short Notes 2026
कक्षा 11 राजनीति विज्ञान — Chapter-wise लघु नोट्स
Part A: भारत का संविधान — सिद्धान्त और व्यवहार (50 अंक)
Part B: राजनीतिक सिद्धान्त (50 अंक)
📅 अपडेट: मार्च 2026 | BSER, अजमेर पाठ्यक्रम 2025-26 के अनुसार
📋 विषय-सूची (Table of Contents)
| भाग | पुस्तक | अध्याय | अंक |
|---|---|---|---|
| Part A | भारत का संविधान: सिद्धान्त और व्यवहार (NCERT) | 10 | 50 |
| Part B | राजनीतिक सिद्धान्त (NCERT) | 8 | 50 |
| कुल | समय: 3:15 घंटे | 100 | ||
- संविधान की आवश्यकता: नियमों का लिखित दस्तावेज जो सरकार की सत्ता को सीमित करे।
- संविधान की सत्ता: सर्वोच्च कानून — सभी कानून व नीतियाँ इसके अनुरूप।
- भारतीय संविधान का निर्माण: संविधान सभा — नवम्बर 1946 से नवम्बर 1949 (2 वर्ष 11 माह 18 दिन)।
- संविधान सभा का कामकाज: डॉ. राजेन्द्र प्रसाद (अध्यक्ष), डॉ. आम्बेडकर (मसौदा समिति अध्यक्ष)।
- राष्ट्रीय आंदोलन की विरासत: स्वतंत्रता संग्राम के मूल्य संविधान में समाहित।
- संस्थागत व्यवस्थाएँ: उद्देशिका (Preamble), मूल प्रस्ताव, विभिन्न देशों के संविधान से प्रावधान।
- अधिकारों का महत्त्व: लोकतंत्र में व्यक्ति की गरिमा और विकास के लिए आवश्यक।
- 6 मौलिक अधिकार: समानता, स्वतंत्रता, शोषण के विरुद्ध, धर्म की स्वतंत्रता, शिक्षा व संस्कृति, संवैधानिक उपचार।
- दक्षिण अफ्रीका का अधिकार पत्र (Bill of Rights): तुलनात्मक अध्ययन।
- NHRC: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग — गठन, कार्य।
- राज्य के नीति निदेशक तत्त्व (DPSP): न्यायालय में प्रवर्तनीय नहीं लेकिन शासन के लिए आवश्यक।
- मौलिक अधिकार बनाम DPSP: संघर्ष और सामंजस्य।
- सम्पत्ति का अधिकार: 44वें संशोधन (1978) से मौलिक अधिकार नहीं — कानूनी अधिकार।
- चुनाव और लोकतंत्र: चुनाव — लोकतंत्र की आत्मा।
- भारत में चुनाव प्रणाली: FPTP (First Past the Post) — सरल बहुमत प्रणाली।
- राज्यसभा में चुनाव: अप्रत्यक्ष निर्वाचन, एकल संक्रमणीय मत।
- आरक्षण: SC/ST के लिए निर्वाचन क्षेत्रों का आरक्षण।
- स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव: ECI की भूमिका।
- स्वतंत्र निर्वाचन आयोग: विशेष बहुमत से हटाने का प्रावधान।
- चुनाव सुधार: EVM, नोटा, मतदाता जागरूकता।
- कार्यपालिका के प्रकार: राजनीतिक व स्थायी (नौकरशाही)।
- संसदीय कार्यपालिका: राष्ट्रपति — संवैधानिक प्रमुख, सीमित शक्तियाँ।
- राष्ट्रपति की शक्ति और स्थिति: विधायी, कार्यकारी, न्यायिक, आपातकालीन शक्तियाँ।
- प्रधानमंत्री: वास्तविक कार्यकारी प्रमुख — नीति निर्माण, मंत्रिमण्डल का नेतृत्व।
- मंत्री परिषद: सामूहिक जिम्मेदारी, लोकसभा के प्रति उत्तरदायी।
- स्थायी कार्यपालिका (नौकरशाही): IAS, IPS — नीति क्रियान्वयन।
- संसद की आवश्यकता: लोकतंत्र में प्रतिनिधि संस्था।
- द्विसदनात्मक संसद: लोक सभा (Lower House) + राज्य सभा (Upper House)।
- संसद के कार्य: कानून निर्माण, बजट, कार्यपालिका पर नियंत्रण, बहस।
- राज्यसभा vs लोकसभा: शक्तियों की तुलना — धन विधेयक में लोकसभा सर्वोच्च।
- कानून निर्माण प्रक्रिया: साधारण विधेयक, धन विधेयक, संविधान संशोधन।
- संसदीय समितियाँ: PAC, Estimates Committee।
- संसद का स्वयं नियंत्रण: प्रश्नकाल, शून्यकाल, अविश्वास प्रस्ताव।
- स्वतंत्र न्यायपालिका की आवश्यकता: मौलिक अधिकारों की रक्षा, संविधान की व्याख्या।
- न्यायाधीशों की नियुक्ति: राष्ट्रपति — कॉलेजियम प्रणाली।
- न्यायाधीशों को पद से हटाना: Impeachment — विशेष बहुमत।
- न्यायपालिका की संरचना: सर्वोच्च न्यायालय → उच्च न्यायालय → जिला न्यायालय।
- सर्वोच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार: मूल, अपीलीय, परामर्शदात्री।
- न्यायिक पुनर्विलोकन: असंवैधानिक कानूनों को रद्द करने की शक्ति।
- न्यायपालिका और संसद: शक्ति संतुलन, विधिक सेवा दिवस 2018।
- संघवाद: केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन।
- भारतीय संविधान में संघवाद: Union + States — एकात्मक प्रवृत्ति के साथ।
- सशक्त केंद्रीय सरकार: अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र के पास।
- भारतीय संघीय व्यवस्था में तनाव: राज्यपाल की भूमिका, केंद्र-राज्य विवाद।
- विशिष्ट प्रावधान: J&K (अनुच्छेद 370 — अब निरस्त), पूर्वोत्तर राज्य।
- स्थानीय सरकार की आवश्यकता: जमीनी स्तर पर लोकतंत्र, स्थानीय समस्याओं का समाधान।
- भारत में विकास: 1992 से पहले की स्थिति, 73वाँ व 74वाँ संशोधन।
- 73वाँ संशोधन (1992): पंचायती राज — ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद।
- 74वाँ संशोधन (1992): नगरीय निकाय — नगर पंचायत, नगर परिषद, नगर निगम।
- राज्य चुनाव आयुक्त: स्थानीय चुनावों की जिम्मेदारी।
- राज्य वित्त आयोग: वित्तीय शक्तियों का हस्तांतरण।
- संशोधन की प्रक्रिया: अनुच्छेद 368 — तीन प्रकार के संशोधन।
- संशोधनों की अधिकता के कारण: सामाजिक परिवर्तन, न्यायिक व्याख्या।
- संशोधनों की विषय वस्तु: मौलिक अधिकार, DPSP, चुनाव।
- संविधान का मूल ढाँचा: केशवानंद भारती मामला (1973) — मूल संरचना सिद्धान्त।
- न्यायपालिका का योगदान: संविधान की व्याख्या और विकास।
- जीवंत दस्तावेज: समय के साथ परिवर्तन की क्षमता।
- संविधान का दर्शन: स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व, न्याय के मूल्य।
- लोकतांत्रिक बदलाव का साधन: संविधान — क्रांति नहीं, विकास।
- संविधान सभा की आवश्यकता: विविधता में एकता।
- प्रक्रियागत उपलब्धियाँ: लोकतंत्र की स्थापना, स्थिरता।
- आलोचनाएँ: पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं, आयातित संविधान।
- राजनीति की अवधारणा: सत्ता, संघर्ष, सहयोग — तीन आयाम।
- राजनीतिक सिद्धान्त की विषय वस्तु: स्वतंत्रता, समानता, न्याय, अधिकार।
- व्यवहार में उतारना: सिद्धान्त को नीति में कैसे लागू करें।
- अध्ययन की आवश्यकता: लोकतांत्रिक जीवन को बेहतर बनाना।
- स्वतंत्रता का आदर्श: स्वयं निर्णय लेने की क्षमता — Autonomy।
- स्वतंत्रता क्या है? प्रतिबंधों का अभाव + आत्म-विकास की संभावना।
- प्रतिबंधों की आवश्यकता: हानि सिद्धान्त (Harm Principle) — J.S. Mill।
- सकारात्मक स्वतंत्रता: कुछ करने की शक्ति — शिक्षा, स्वास्थ्य।
- नकारात्मक स्वतंत्रता: हस्तक्षेप का अभाव।
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: लोकतंत्र में महत्त्व और सीमाएँ।
- समानता का महत्त्व: लोकतंत्र और न्याय की आधारशिला।
- समानता की अवधारणा: प्राकृतिक असमानताएँ vs सामाजिक असमानताएँ।
- तीन आयाम: राजनीतिक समानता, सामाजिक समानता, आर्थिक समानता।
- समानता को बढ़ावा देना: नारीवाद, विभेदक बर्ताव द्वारा समानता।
- सकारात्मक कार्यवाही (Affirmative Action): आरक्षण — SC/ST/OBC।
- न्याय का अर्थ: समान लोगों के प्रति समान बर्ताव।
- समानुपातिक न्याय: योगदान के अनुसार वितरण।
- विशेष जरूरतों का खयाल: कमजोर वर्गों को अतिरिक्त सहायता।
- न्यायपूर्ण बंटवारा: संसाधनों का समतामूलक वितरण।
- जॉन रॉल्स का न्याय सिद्धान्त: "Veil of Ignorance" — अज्ञानता के पर्दे से न्याय।
- सामाजिक न्याय का अनुसरण: नीतियों में न्याय के सिद्धान्त।
- अधिकारों का उदगम: प्राकृतिक अधिकार, कानूनी अधिकार, नैतिक अधिकार।
- कानूनी अधिकार और राज्य सत्ता: राज्य ही अधिकारों का स्रोत।
- अधिकारों के प्रकार: नागरिक, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक।
- अधिकार और जिम्मेदारियाँ: अधिकार और कर्तव्य साथ-साथ।
- नागरिकता: एक परिचय: राज्य का पूर्ण और समान सदस्य।
- सम्पूर्ण और समान सदस्यता: सभी नागरिकों को समान अधिकार।
- समान अधिकार: राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक नागरिकता।
- नागरिक और राष्ट्र: राष्ट्र-राज्य में नागरिकता।
- सार्वभौमिक नागरिकता: प्रवासन और नागरिकता की चुनौतियाँ।
- विश्व नागरिकता: वैश्वीकरण के दौर में नई अवधारणा।
- राष्ट्रवाद का परिचय: साझे विश्वास, इतिहास, भूक्षेत्र, राजनीतिक आदर्श।
- साझी राजनीतिक पहचान: एक राष्ट्र की भावना।
- राष्ट्र और राष्ट्रवाद: राष्ट्र क्या है? राष्ट्र-राज्य।
- राष्ट्रीय आत्म निर्णय: Self-Determination — औपनिवेशिक मुक्ति।
- राष्ट्रीय और बहुलवाद: विविधता में राष्ट्रीय एकता।
- धर्म निरपेक्षता का अर्थ: धर्म और राज्य का पृथक्करण।
- धर्मों के बीच वर्चस्व: Inter-Religious Domination से मुक्ति।
- धर्म के अंदर वर्चस्व: Intra-Religious Domination से मुक्ति।
- धर्म निरपेक्ष राज्य: कोई राजधर्म नहीं।
- पश्चिमी मॉडल: धर्म और राज्य में कठोर पृथक्करण।
- भारतीय मॉडल: सभी धर्मों को समान सम्मान, राज्य का सीमित हस्तक्षेप।
- भारतीय धर्मनिरपेक्षता की आलोचनाएँ: तुष्टीकरण, समान नागरिक संहिता।
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
RBSE Class 11 राजनीति विज्ञान में कुल कितने अंक हैं?
कुल 100 अंक — Part A: भारत का संविधान (50 अंक, 10 अध्याय) और Part B: राजनीतिक सिद्धान्त (50 अंक, 8 अध्याय)। परीक्षा समय 3:15 घंटे।
Part A का सबसे महत्त्वपूर्ण अध्याय कौन-सा है?
भारतीय संविधान में अधिकार (6 अंक) सर्वाधिक वेटेज वाला है। संविधान निर्माण, न्यायपालिका और संघवाद भी बहुत महत्त्वपूर्ण हैं।
Part B में कौन-से 2 अध्याय सर्वाधिक अंकों वाले हैं?
राजनीतिक सिद्धान्त: एक परिचय (7 अंक) और धर्म निरपेक्षता (7 अंक) — दोनों में अवधारणाएँ और भारतीय संदर्भ ध्यान से पढ़ें।
जॉन रॉल्स का सिद्धान्त क्या है?
जॉन रॉल्स ने "Veil of Ignorance" (अज्ञानता का पर्दा) सिद्धान्त दिया — यदि हम नहीं जानते हमारी समाज में क्या स्थिति होगी, तो हम सबसे न्यायपूर्ण व्यवस्था चुनेंगे। यह वितरणात्मक न्याय का आधार है।
भारतीय धर्मनिरपेक्षता पश्चिमी से कैसे अलग है?
पश्चिमी मॉडल में धर्म और राज्य का कठोर पृथक्करण है। भारतीय मॉडल में राज्य सभी धर्मों को समान सम्मान देता है और धार्मिक सुधार के लिए सीमित हस्तक्षेप कर सकता है।
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