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महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री (Important Links)
1. प्रश्न-पत्र: RBSE Class 9 Social Science Model Paper 2025-26 (PDF)
2. उत्तर तालिका: Class 9 SST Model Paper Answer Key & Solutions
नोट: बेहतर तैयारी के लिए मॉडल पेपर हल करने के बाद उत्तर कुंजी से मिलान अवश्य करें।
ANSWER KEY
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर
कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान (विषय कोड : 08) — मॉडल पेपर | सत्र 2025-26
🗝️ उत्तर तालिका — अंकन योजना सहित
27
इतिहास
27
भूगोल
27
राजनीति विज्ञान
19
अर्थशास्त्र
📚 इतिहास (History) — उत्तर तालिका 27 अंक
MCQ उत्तर — प्र. 1–6 6 अंक
| प्र. | विषय | उत्तर | सही विकल्प |
|---|---|---|---|
| 1 | फ्रांसीसी क्रांति का वर्ष | ब | 1789 |
| 2 | तीसरे वर्ग में कौन | स | किसान, दस्तकार, व्यापारी |
| 3 | बोल्शेविक क्रांति का वर्ष | स | 1917 |
| 4 | बोल्शेविक पार्टी नेतृत्व | ब | लेनिन |
| 5 | वाइमर गणराज्य — देश | स | जर्मनी |
| 6 | होलोकॉस्ट किसके विरुद्ध | ब | यहूदियों के |
लघु एवं दीर्घ उत्तर — प्र. 7–12 21 अंक
प्र. 7 — फ्रांसीसी क्रांति के कारण (कोई तीन) 3 अंक
(i) सामाजिक असमानता : फ्रांसीसी समाज तीन वर्गों में बँटा था — पादरी, कुलीन वर्ग और आम जनता। पहले दो वर्ग विशेषाधिकार प्राप्त थे जबकि तीसरा वर्ग कर और शोषण से दबा था।
(ii) आर्थिक संकट : फ्रांस भारी कर्ज में था। अकाल और महंगाई से आम जनता तबाह थी। करों का बोझ केवल गरीब वर्ग पर था।
(iii) प्रबोधन विचारों का प्रभाव : वॉल्टेयर, रूसो और मोंटेस्क्यू जैसे विचारकों ने समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के विचार फैलाए जिससे जनता में क्रांतिकारी चेतना जागी।
📝 1 अंक प्रत्येक कारण। कोई भी तीन सही कारण स्वीकार्य। अमेरिकी क्रांति का प्रभाव / राजा की निरंकुशता भी मान्य।
प्र. 8 — 1905 की रूसी क्रांति 3 अंक
कारण :
• रूस में जार की निरंकुशता — जनता को कोई राजनीतिक अधिकार नहीं।
• 1904-05 के रूस-जापान युद्ध में रूस की पराजय से जनता में क्षोभ।
• औद्योगिक मजदूरों की दयनीय स्थिति — लम्बे कार्य-घंटे, कम वेतन।
• रूस में जार की निरंकुशता — जनता को कोई राजनीतिक अधिकार नहीं।
• 1904-05 के रूस-जापान युद्ध में रूस की पराजय से जनता में क्षोभ।
• औद्योगिक मजदूरों की दयनीय स्थिति — लम्बे कार्य-घंटे, कम वेतन।
परिणाम :
• जार को 'अक्टूबर घोषणापत्र' जारी करना पड़ा।
• ड्यूमा (संसद) की स्थापना का आश्वासन मिला।
• 1905 की क्रांति ने 1917 की क्रांति की नींव रखी।
• जार को 'अक्टूबर घोषणापत्र' जारी करना पड़ा।
• ड्यूमा (संसद) की स्थापना का आश्वासन मिला।
• 1905 की क्रांति ने 1917 की क्रांति की नींव रखी।
— अथवा —
समाजवाद का उदय :
समाजवाद : वह विचारधारा जिसमें उत्पादन के साधनों पर निजी स्वामित्व की बजाय सामाजिक/राज्य स्वामित्व हो। आर्थिक समानता इसका मूल सिद्धांत है।
यूरोप में उदय के कारण : औद्योगिक क्रांति से मजदूर वर्ग का शोषण → मार्क्स और एंगेल्स के विचारों का प्रसार → ट्रेड यूनियनों का गठन → राजनीतिक दलों का उभार।
प्र. 9 — हिटलर के उदय के कारण (कोई तीन) 3 अंक
(i) वर्साय की संधि की कड़वाहट : प्रथम विश्वयुद्ध में पराजय के बाद जर्मनी पर थोपी गई अपमानजनक संधि — भारी क्षतिपूर्ति, भू-भाग की हानि। जर्मन जनता में गहरा असंतोष था।
(ii) आर्थिक महामंदी (1929) : वैश्विक मंदी से जर्मनी में भारी बेरोजगारी और गरीबी। लोगों ने हिटलर को उद्धारकर्ता माना।
(iii) वाइमर गणराज्य की विफलता : कमजोर लोकतंत्र, राजनीतिक अस्थिरता, कम्युनिस्टों का भय — इन सबने नात्सी पार्टी को लोकप्रिय बनाया। हिटलर ने राष्ट्रवाद और नस्ली श्रेष्ठता का प्रचार किया।
प्र. 10 — नात्सीवाद और प्रचार कला (दीर्घ) 5 अंक
नात्सीवाद की विचारधारा — मुख्य बिंदु (3 अंक) :
• आर्य श्रेष्ठता : हिटलर का मानना था कि आर्य (Aryan) नस्ल श्रेष्ठ है और यहूदी, रोमा आदि हीन हैं।
• नस्लवादी राज्य की स्थापना : जर्मनी को एक शुद्ध नस्लीय राज्य बनाने का लक्ष्य। यहूदियों को सभी अधिकारों से वंचित किया।
• लेबेन्सराउम (Lebensraum) : जर्मन लोगों के लिए अधिक भूमि पाने की नीति — आक्रामक विस्तारवाद।
• फ्यूहरर की अवधारणा : हिटलर को सर्वोच्च नेता मानना — लोकतंत्र का विनाश, एक दल, एक नेता।
प्रचार की कला (2 अंक) :
• रेडियो, पोस्टर, फिल्मों का उपयोग — नात्सी विचारों को जन-जन तक पहुँचाना।
• यहूदी-विरोधी भावना भड़काना — उन्हें जर्मनी की सभी समस्याओं का जिम्मेदार बताना।
• युवाओं को नात्सी विचारधारा में ढालना — Hitler Youth जैसे संगठन।
📝 विचारधारा (3) + प्रचार (2) = 5 अंक। होलोकॉस्ट का उल्लेख = अतिरिक्त मान्य।
— अथवा —
अक्टूबर 1917 की रूसी क्रांति :
कारण : प्रथम विश्वयुद्ध में रूस की बुरी स्थिति, अनाज की कमी, अनंतिम सरकार की विफलता, बोल्शेविकों का 'शांति, भूमि, रोटी' का नारा।
घटनाएँ : लेनिन की वापसी → बोल्शेविकों ने अनंतिम सरकार को उखाड़ फेंका → सोवियत सरकार की स्थापना → जर्मनी से शांति संधि।
परिणाम : भूमि का समाजीकरण, उद्योगों का राष्ट्रीयकरण, समाजवादी सोवियत संघ की स्थापना, विश्व भर के मजदूर आंदोलनों पर प्रभाव।
प्र. 11 — वन समाज और उपनिवेशवाद 4 अंक
उपनिवेशवाद का प्रभाव : अंग्रेजों ने वनों को 'सरकारी संपत्ति' घोषित किया। पशुओं को चराने, लकड़ी काटने और शिकार पर रोक लगाई। आदिवासी किसान जो पहले वनों पर निर्भर थे, वे बेघर और बेरोजगार हो गए।
बस्तर का वन विद्रोह : 1910 में छत्तीसगढ़ के बस्तर में आदिवासियों ने वन कानूनों के विरुद्ध विद्रोह किया। उनका नेतृत्व गुण्डाधुर ने किया। उन्होंने बाज़ार, स्कूल, कचेरियाँ लूटीं। अंग्रेजों ने कठोरता से दमन किया।
📝 उपनिवेशवाद का प्रभाव (2) + बस्तर विद्रोह (2) = 4 अंक।
— अथवा —
जावा के जंगल और डच वैज्ञानिक वानिकी :
जावा में डच औपनिवेशिक शासन ने वैज्ञानिक वानिकी लागू की — केवल व्यावसायिक लकड़ी (सागौन) उगाना। स्थानीय लकड़हारों को मजदूर बनाया। सामिन आंदोलन — लोगों ने डच कानूनों का शांतिपूर्ण प्रतिरोध किया। युद्ध और वन विनाश — जापान ने अपनी जरूरतों के लिए वन काट डाले।
प्र. 12 — चरवाहों पर उपनिवेशवाद का प्रभाव 4 अंक
उपनिवेशवाद के प्रभाव :
• चरागाह भूमि को 'बेकार भूमि' घोषित कर कृषि भूमि में बदला।
• वन कानूनों से चरवाहों को वनों में प्रवेश प्रतिबंधित किया।
• सीमाओं को बंद करने से मौसमी प्रवास रुका।
• पशुओं की संख्या पर कर लगाया।
• चरागाह भूमि को 'बेकार भूमि' घोषित कर कृषि भूमि में बदला।
• वन कानूनों से चरवाहों को वनों में प्रवेश प्रतिबंधित किया।
• सीमाओं को बंद करने से मौसमी प्रवास रुका।
• पशुओं की संख्या पर कर लगाया।
अफ्रीका के चरवाहे : मासाई जैसे चरवाहों की सर्वोत्तम चरागाह भूमि श्वेत किसानों को दे दी गई। चरागाहों का सूखना, सीमाओं का बंद होना और अकाल से मवेशी मरे। पारंपरिक जीवन-पद्धति नष्ट हुई।
— अथवा —
भारत में चरवाहों की आवाजाही :
• पर्वतीय क्षेत्र : गर्मियों में उच्च पर्वतीय चरागाहों में जाते हैं, सर्दियों में मैदानों में उतरते हैं।
• मैदानी और रेगिस्तानी क्षेत्र : बारिश के मौसम में एक स्थान से दूसरे स्थान जाते हैं।
उदाहरण : गुज्जर-बकरवाल (जम्मू-कश्मीर), धनगर (महाराष्ट्र), राइका (राजस्थान)।
• मैदानी और रेगिस्तानी क्षेत्र : बारिश के मौसम में एक स्थान से दूसरे स्थान जाते हैं।
उदाहरण : गुज्जर-बकरवाल (जम्मू-कश्मीर), धनगर (महाराष्ट्र), राइका (राजस्थान)।
🗺️ भूगोल (Geography) — उत्तर तालिका 27 अंक
MCQ उत्तर — प्र. 13–18 6 अंक
| प्र. | विषय | उत्तर | सही विकल्प |
|---|---|---|---|
| 13 | भारत की मानक याम्योत्तर रेखा | अ | 82°30' पूर्व (इलाहाबाद से गुज़रती है) |
| 14 | गंगा नदी का उद्गम | ब | गंगोत्री हिमनद (उत्तराखंड) |
| 15 | सबसे बड़ी मीठे पानी की झील | स | वूलर झील (जम्मू-कश्मीर) |
| 16 | मानसून की दिशा | ब | दक्षिण-पश्चिम |
| 17 | सुन्दरवन मैंग्रोव | ब | पश्चिम बंगाल |
| 18 | जनगणना कितने वर्ष में | स | 10 वर्ष |
लघु एवं दीर्घ उत्तर — प्र. 19–24 21 अंक
प्र. 19 — भारत की भौगोलिक स्थिति 3 अंक
स्थिति : भारत उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। अक्षांशीय विस्तार : 8°4' उत्तर से 37°6' उत्तर। देशांतरीय विस्तार : 68°7' पूर्व से 97°25' पूर्व। कर्क रेखा (23°30' उत्तर) भारत के मध्य से होकर गुज़रती है।
आकार : क्षेत्रफल = 32.8 लाख वर्ग किमी (विश्व में 7वाँ स्थान)। उत्तर से दक्षिण = 3214 किमी। पूर्व से पश्चिम = 2933 किमी।
पड़ोसी देश : पाकिस्तान (पश्चिम), चीन, नेपाल, भूटान (उत्तर), म्यांमार, बांग्लादेश (पूर्व), श्रीलंका (दक्षिण-समुद्र पार)।
प्र. 20 — हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियाँ 3 अंक
| विशेषता | हिमालयी नदियाँ | प्रायद्वीपीय नदियाँ |
|---|---|---|
| उद्गम | हिमनदों और झरनों से | पठारों और पहाड़ियों से |
| स्वभाव | सदानीरा (बारहमासी) | अधिकांश मौसमी |
| बेसिन | बड़े और गहरे — मैदान बनाती हैं | छोटे और उथले |
| प्रवाह दिशा | पश्चिम से पूर्व (बंगाल की खाड़ी) | पूर्व व पश्चिम दोनों ओर |
| उदाहरण | गंगा, यमुना, सिंधु, ब्रह्मपुत्र | नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी |
प्र. 21 — जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक और मानसून 4 अंक
चार कारक :
1. अक्षांश : कर्क रेखा के उत्तर में महाद्वीपीय जलवायु, दक्षिण में उष्णकटिबंधीय।
2. ऊँचाई : पहाड़ी क्षेत्रों में ठंडी जलवायु — जैसे शिमला, दार्जिलिंग।
3. समुद्र से दूरी : तटीय क्षेत्रों में सम जलवायु; भीतरी भागों में विषम।
4. वायुदाब और पवन : मानसूनी पवनें ग्रीष्म में नमी लाती हैं और शीत में शुष्क रहती हैं।
1. अक्षांश : कर्क रेखा के उत्तर में महाद्वीपीय जलवायु, दक्षिण में उष्णकटिबंधीय।
2. ऊँचाई : पहाड़ी क्षेत्रों में ठंडी जलवायु — जैसे शिमला, दार्जिलिंग।
3. समुद्र से दूरी : तटीय क्षेत्रों में सम जलवायु; भीतरी भागों में विषम।
4. वायुदाब और पवन : मानसूनी पवनें ग्रीष्म में नमी लाती हैं और शीत में शुष्क रहती हैं।
मानसून — एकता का परिचायक : संपूर्ण भारत मानसून पर निर्भर है — किसान वर्षा के इंतजार में; त्योहार, फसल-चक्र, जल स्रोत सब मानसून से जुड़े हैं। मानसून हिमालय से कन्याकुमारी तक पूरे देश को एकता के सूत्र में बाँधता है।
प्र. 22 — प्राकृतिक वनस्पति के प्रकार 4 अंक
| वन प्रकार | वर्षा | क्षेत्र | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| उष्ण कटिबंधीय सदाबहार | >200 cm | पश्चिमी घाट, अंडमान | महोगनी, रबड़ |
| उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती | 75-200 cm | मध्य और दक्षिण भारत | सागौन, शीशम |
| कंटीले वन और झाड़ियाँ | <70 cm | राजस्थान, गुजरात | बबूल, खजूर |
| पर्वतीय वन | हिमालय | जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड | देवदार, स्प्रूस |
| मैंग्रोव वन | डेल्टा क्षेत्र | सुंदरवन, महानदी | सुंदरी वृक्ष |
18 जैव-आरक्षित क्षेत्रों का महत्त्व : जैव-विविधता के हॉटस्पॉट की रक्षा करते हैं। लुप्तप्राय प्रजातियों को आश्रय देते हैं। पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखते हैं। उदाहरण : नंदादेवी, नीलगिरि, सुंदरवन।
प्र. 23 — मानचित्र उत्तर 5 अंक
| # | मानचित्र पर दर्शाई जाने वाली वस्तु | स्थान / विवरण | अंक |
|---|---|---|---|
| (i) | गंगा नदी | उत्तराखंड से बंगाल की खाड़ी तक — उत्तर भारत | 1 |
| (ii) | नर्मदा नदी | मध्य प्रदेश — पश्चिम दिशा में अरब सागर में गिरती है | 1 |
| (iii) | थार मरुस्थल | राजस्थान — पाकिस्तान सीमा के पास | 1 |
| (iv) | सुन्दरवन | पश्चिम बंगाल — गंगा डेल्टा क्षेत्र | 1 |
| (v) | मालाबार तटीय मैदान | केरल तट — अरब सागर के किनारे | 1 |
| (vi) | वूलर झील | जम्मू-कश्मीर — भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील | (अतिरिक्त) |
📝 कोई भी 5 सही स्थान = 5 अंक। नाम और स्थान दोनों सही होने पर 1 अंक प्रत्येक।
प्र. 24 — जनसंख्या वृद्धि 2 अंक
जनसंख्या वृद्धि के कारण : मृत्यु दर में कमी (बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ), उच्च जन्म दर, स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार।
परिवर्तन की प्रक्रियाएँ : (i) जन्म दर (Crude Birth Rate), (ii) मृत्यु दर (Crude Death Rate), (iii) प्रवासन (Migration) — ये तीनों मिलकर जनसंख्या परिवर्तन को निर्धारित करते हैं।
🏛️ राजनीति विज्ञान — उत्तर तालिका 27 अंक
MCQ उत्तर — प्र. 25–30 6 अंक
| प्र. | विषय | उत्तर | सही विकल्प |
|---|---|---|---|
| 25 | "जनता का, जनता द्वारा..." | ब | अब्राहम लिंकन |
| 26 | संविधान सभा के अध्यक्ष | ब | डॉ. राजेन्द्र प्रसाद |
| 27 | संविधान लागू होने की तारीख | स | 26 जनवरी 1950 |
| 28 | लोकसभा चुनाव — अवधि | स | 5 वर्ष |
| 29 | चुनाव आयोग | ब | संवैधानिक निकाय |
| 30 | अनुच्छेद 32 | द | अनुच्छेद 32 — सांविधानिक उपचार |
लघु एवं दीर्घ उत्तर — प्र. 31–34 21 अंक
प्र. 31 — लोकतंत्र : परिभाषा और विशेषताएँ 3 अंक
परिभाषा : लोकतंत्र वह शासन व्यवस्था है जिसमें जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनती है और सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी होती है। — अब्राहम लिंकन : "जनता का, जनता द्वारा, जनता के लिए"
विशेषताएँ : चुनाव, मौलिक अधिकार, कानून का शासन, स्वतंत्र न्यायपालिका, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।
लोकतंत्र के पक्ष में तर्क :
1. जनता की भागीदारी सुनिश्चित होती है।
2. सरकार उत्तरदायी और जवाबदेह रहती है।
3. व्यक्ति की गरिमा और समानता का सम्मान होता है।
1. जनता की भागीदारी सुनिश्चित होती है।
2. सरकार उत्तरदायी और जवाबदेह रहती है।
3. व्यक्ति की गरिमा और समानता का सम्मान होता है।
प्र. 32 — संविधान की प्रस्तावना 3 अंक
प्रस्तावना : भारतीय संविधान की प्रस्तावना संविधान की आत्मा है। यह बताती है कि भारत एक सम्पूर्ण प्रभुत्वसम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य है।
मूल्य :
• न्याय — सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक
• स्वतंत्रता — विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास
• समानता — प्रतिष्ठा और अवसर की
• बंधुत्व — राष्ट्रीय एकता और अखंडता
• न्याय — सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक
• स्वतंत्रता — विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास
• समानता — प्रतिष्ठा और अवसर की
• बंधुत्व — राष्ट्रीय एकता और अखंडता
— अथवा —
दक्षिण अफ्रीका का संविधान :
1994 में रंगभेद (Apartheid) की समाप्ति के बाद नेल्सन मंडेला के नेतृत्व में ANC और श्वेत अल्पसंख्यक सरकार के बीच समझौते से लोकतांत्रिक संविधान बना। यह विश्व का सर्वश्रेष्ठ संविधान माना जाता है। संविधान की आवश्यकता : सरकार की शक्तियों को सीमित करना, नागरिक अधिकारों की रक्षा करना।
प्र. 33 — संसद की संरचना और लोकसभा-राज्यसभा अंतर 4 अंक
भारतीय संसद की संरचना : भारतीय संसद में तीन भाग हैं — (1) राष्ट्रपति, (2) लोकसभा (निम्न सदन), (3) राज्यसभा (उच्च सदन)।
| आधार | लोकसभा | राज्यसभा |
|---|---|---|
| गठन | जनता द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव | राज्य विधानसभाओं द्वारा अप्रत्यक्ष चुनाव |
| सदस्य संख्या | 543 निर्वाचित + 2 मनोनीत | 245 (233 निर्वाचित + 12 मनोनीत) |
| कार्यकाल | 5 वर्ष (भंग हो सकती है) | 6 वर्ष (स्थायी सदन, भंग नहीं) |
| अध्यक्ष | स्पीकर (लोकसभाध्यक्ष) | उपराष्ट्रपति (सभापति) |
| धन विधेयक | केवल लोकसभा में पारित | केवल सुझाव दे सकती है |
प्र. 34 — मौलिक अधिकार और अनुच्छेद 32 5 अंक
मौलिक अधिकार — 6 प्रकार (3 अंक) :
| अधिकार | अनुच्छेद | विवरण |
|---|---|---|
| 1. समानता का अधिकार | 14–18 | कानून के समक्ष समानता, जाति/धर्म भेद नहीं |
| 2. स्वतंत्रता का अधिकार | 19–22 | वाक् स्वतंत्रता, आवागमन, व्यवसाय |
| 3. शोषण के विरुद्ध | 23–24 | बेगार प्रथा, बाल श्रम निषेध |
| 4. धार्मिक स्वतंत्रता | 25–28 | अपने धर्म को मानने और प्रचार का अधिकार |
| 5. सांस्कृतिक-शैक्षिक | 29–30 | अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा और संस्थाएँ रखने का अधिकार |
| 6. सांविधानिक उपचार | 32 | अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय में जाने का अधिकार |
अनुच्छेद 32 — 'संविधान की आत्मा' (2 अंक) :
डॉ. आंबेडकर ने इसे संविधान की आत्मा इसलिए कहा क्योंकि — यदि अन्य अधिकारों का उल्लंघन हो तो नागरिक सर्वोच्च न्यायालय में सीधे जा सकता है। हेबियस कॉर्पस, मांडेमस, सर्शियोरारी आदि रिट जारी करके न्यायालय अधिकारों की रक्षा करता है। बिना इस अधिकार के अन्य सभी अधिकार निर्जीव हो जाते हैं।
डॉ. आंबेडकर ने इसे संविधान की आत्मा इसलिए कहा क्योंकि — यदि अन्य अधिकारों का उल्लंघन हो तो नागरिक सर्वोच्च न्यायालय में सीधे जा सकता है। हेबियस कॉर्पस, मांडेमस, सर्शियोरारी आदि रिट जारी करके न्यायालय अधिकारों की रक्षा करता है। बिना इस अधिकार के अन्य सभी अधिकार निर्जीव हो जाते हैं।
— अथवा —
स्वतंत्र चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया :
महत्त्व : स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना। आचार संहिता लागू करना। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) का उपयोग। सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को रोकना।
चुनाव प्रक्रिया : मतदाता सूची → उम्मीदवार नामांकन → चुनाव अभियान → मतदान → मतगणना → परिणाम। आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए।
💹 अर्थशास्त्र (Economics) — उत्तर तालिका 19 अंक
MCQ उत्तर — प्र. 35–39 5 अंक
| प्र. | विषय | उत्तर | सही विकल्प |
|---|---|---|---|
| 35 | पालमपुर में भूमि स्वामित्व | स | उच्च जाति के किसानों के पास |
| 36 | मानव पूंजी निर्माण | ब | शिक्षा और स्वास्थ्य |
| 37 | निर्धनता रेखा का निर्धारण | ब | न्यूनतम कैलोरी ग्रहण पर |
| 38 | अनाज संग्रह का नाम | ब | बफर स्टॉक |
| 39 | PDS का उद्देश्य | ब | गरीब परिवारों को सस्ते दर पर खाद्यान्न देना |
लघु एवं दीर्घ उत्तर — प्र. 40–42 14 अंक
प्र. 40 — पालमपुर गांव में उत्पादन का संगठन 3 अंक
उत्पादन के संगठन के चार कारक : भूमि, श्रम, पूंजी और उद्यम — ये चार कारक उत्पादन में लगते हैं।
कृषि क्रियाएँ : पालमपुर में 75% परिवार कृषि पर निर्भर हैं। खरीफ (गेहूँ, चावल) और रबी (गेहूँ, सरसों) फसलें। उच्च जाति के किसानों के पास अधिक भूमि — भूमिहीन किसान बटाई पर खेती करते हैं।
गैर-कृषि क्रियाएँ : डेयरी, लघु व्यापार, परिवहन, हस्तशिल्प — ये छोटे पैमाने पर होती हैं। गैर-कृषि क्रियाएँ कम लोगों को रोजगार देती हैं।
प्र. 41 — लोग संसाधन के रूप में 3 अंक
अर्थ : देश की जनसंख्या यदि शिक्षित, स्वस्थ और दक्ष हो तो वह आर्थिक उत्पादन में महत्त्वपूर्ण योगदान देती है — इसी को 'मानव पूंजी' (Human Capital) कहते हैं।
शिक्षा का महत्त्व : कुशल कार्यबल तैयार होता है। उत्पादकता बढ़ती है। तकनीकी विकास संभव होता है। सामाजिक चेतना बढ़ती है।
स्वास्थ्य का महत्त्व : स्वस्थ व्यक्ति अधिक उत्पादक होता है। बीमारी से होने वाले कार्य-दिवसों की हानि कम होती है। दीर्घायु = अधिक वर्षों का आर्थिक योगदान।
— अथवा —
बेरोजगारी :
अर्थ : जब कोई व्यक्ति काम करने में सक्षम और इच्छुक हो पर उसे रोजगार न मिले।
प्रकार : (i) मौसमी — वर्ष के कुछ महीनों में, (ii) प्रच्छन्न — जरूरत से अधिक लोग काम करते हैं, (iii) शिक्षित बेरोजगारी।
कारण : तेज जनसंख्या वृद्धि, धीमा आर्थिक विकास, कृषि पर निर्भरता।
प्रकार : (i) मौसमी — वर्ष के कुछ महीनों में, (ii) प्रच्छन्न — जरूरत से अधिक लोग काम करते हैं, (iii) शिक्षित बेरोजगारी।
कारण : तेज जनसंख्या वृद्धि, धीमा आर्थिक विकास, कृषि पर निर्भरता।
प्र. 42 — निर्धनता : कारण और उपाय / खाद्य सुरक्षा 4 अंक
निर्धनता : वह स्थिति जब कोई व्यक्ति अपनी मूलभूत आवश्यकताएँ (भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य) पूरी नहीं कर पाता।
कारण :
• ऐतिहासिक शोषण (उपनिवेशवाद) | • असमान भू-वितरण
• अशिक्षा और अकुशलता | • सामाजिक भेदभाव
• बेरोजगारी | • तेज जनसंख्या वृद्धि
• ऐतिहासिक शोषण (उपनिवेशवाद) | • असमान भू-वितरण
• अशिक्षा और अकुशलता | • सामाजिक भेदभाव
• बेरोजगारी | • तेज जनसंख्या वृद्धि
निर्धनता-निरोधी उपाय :
• MNREGA (मनरेगा) — 100 दिन रोजगार गारंटी
• प्रधानमंत्री आवास योजना
• सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS)
• बैंक ऋण — मुद्रा योजना
• शिक्षा का प्रसार — सर्व शिक्षा अभियान
• MNREGA (मनरेगा) — 100 दिन रोजगार गारंटी
• प्रधानमंत्री आवास योजना
• सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS)
• बैंक ऋण — मुद्रा योजना
• शिक्षा का प्रसार — सर्व शिक्षा अभियान
— अथवा —
खाद्य सुरक्षा और PDS :
आवश्यकता : जनसंख्या वृद्धि, मौसमी उत्पादन, प्राकृतिक आपदाएँ, गरीब वर्ग की क्रय-शक्ति की कमी।
बफर स्टॉक : FCI (भारतीय खाद्य निगम) द्वारा गेहूँ और चावल का सरकारी भंडार। अकाल या कमी के समय वितरित किया जाता है।
PDS (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) : देशभर में 5 लाख से अधिक उचित मूल्य दुकानें (राशन की दुकानें)। BPL परिवारों को सस्ते दर पर अनाज — गेहूँ ₹2/kg, चावल ₹3/kg।
भूमिका : खाद्य सुरक्षा + मूल्य स्थिरता + गरीब कल्याण।
भूमिका : खाद्य सुरक्षा + मूल्य स्थिरता + गरीब कल्याण।
⚠️ यह उत्तर तालिका केवल शिक्षक / स्व-मूल्यांकन हेतु है।
कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान मॉडल पेपर | RBSE 2025-26 | ncertclasses.com | Print: Ctrl+P


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