पहली बूँद NCERT कक्षा 6 हिन्दी पाठ्यपुस्तक मल्हार का तीसरा अध्याय है। यह बाल-साहित्यकार गोपालकृष्ण कौल (1923–2007) द्वारा रचित एक प्रकृति-कविता है। कविता में वर्षा (पावस) के प्रथम दिवस का मनोरम चित्रण है। कवि ने बताया है कि कैसे वर्षा की पहली बूँद धरती पर गिरने से प्रकृति में नया जीवन जाग उठता है — धरती हरी हो जाती है, अंकुर फूटते हैं, और सम्पूर्ण सृष्टि आनंद से भर जाती है।
परीक्षा हेतु: इस कविता से 'मेरी समझ से' MCQ, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, शब्द पहेली और 'शब्द एक अर्थ अनेक' से प्रश्न पूछे जाते हैं।
1. कवि परिचय — गोपालकृष्ण कौल
✍
गोपालकृष्ण कौल
जन्म: 1923 · मृत्यु: 2007 · बाल-साहित्यकार
गोपालकृष्ण कौल हिन्दी के प्रसिद्ध बाल-साहित्यकार थे। उन्होंने बच्चों के लिए देश-प्रेम, प्रकृति और जीव-जंतुओं से जुड़ी बहुत-सी मनोरम कविताएँ लिखी हैं। उनकी कविताओं में बच्चों के मन को छूने वाले सरल और चित्रात्मक शब्दों का प्रयोग होता है। वे प्रकृति के हर दृश्य को एक नई दृष्टि से देखते थे। NCERT ने उनकी कविताएँ कई पाठ्यपुस्तकों में संकलित की हैं।
उनकी एक प्रसिद्ध पंक्ति: "देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें।"
(अन्य कविता 'हम कुछ सीखें' से) — यह देशभक्ति और कर्तव्य-भावना का सुंदर संदेश है।
2. मूल कविता — पहली बूँद
वह पावस का प्रथम दिवस जब,पहली बूँद धरा पर आई।अंकुर फूट पड़ा धरती से,नव-जीवन की ले अँगड़ाई।
धरती के सूखे अधरों पर,गिरी बूँद अमृत-सी आकर।वसुंधरा की रोमावलि-सी,हरी दूब पुलकी-मुसकाई।
पहली बूँद धरा पर आई।।
आसमान में उड़ता सागर,लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर।बजा नगाड़े जगा रहे हैं,बादल धरती की तरुणाई।
पहली बूँद धरा पर आई।।
नीले नयनों-सा यह अंबर,काली पुतली-से ये जलधर।करुणा-विगलित अश्रु बहाकर,धरती की चिर-प्यास बुझाई।
बूढ़ी धरती शस्य-श्यामलाबनने को फिर से ललचाई।
पहली बूँद धरा पर आई।।
— गोपालकृष्ण कौल
3. कठिन शब्दार्थ
शब्द
अर्थ
पावस
वर्षा ऋतु (Monsoon Season); बारिश का मौसम
प्रथम दिवस
पहला दिन; वर्षा का पहला दिन
धरा
धरती, भूमि, पृथ्वी
अंकुर
बीज से निकलने वाली नई कोंपल (seedling); नई शुरुआत का प्रतीक
नव-जीवन
नया जीवन; पुनः जीवित हो उठना
अँगड़ाई
नींद से उठकर शरीर फैलाना; यहाँ — नए जीवन के जागने का भाव
सूखे अधर
प्यासे होंठ; यहाँ — बारिश के लिए तरसती हुई धरती
अमृत-सी
अमृत के समान; अत्यंत पवित्र और जीवनदायी
वसुंधरा
पृथ्वी का एक और नाम; वसुंधरा = वसु (धन) को धारण करने वाली
रोमावलि
रोम = शरीर के रोएँ; रोमावलि = रोमों की पंक्ति; यहाँ — खुशी से खड़े हो जाना (रोमांच)
हरी दूब
मखमल-सी मुलायम छोटी हरी घास (Doob grass)
पुलकी
खुशी से रोमांचित होना; पुलक = रोमांच
मुसकाई
मुस्कुराई; यहाँ — हरी दूब का खिल उठना
उड़ता सागर
बादलों के लिए प्रयुक्त — बादल समुद्र का जल उड़ाकर आकाश में ले जाते हैं
स्वर्णिम पर
सोने जैसे पंख; यहाँ — बिजली की चमकती लकीरें बादल के पंखों जैसी
नगाड़े बजाना
नगाड़ा = एक भारतीय ताल-वाद्य; यहाँ — बादलों की गर्जना
तरुणाई
यौवन, जवानी; यहाँ — धरती की युवा-शक्ति को जगाना
नयनों-सा अंबर
आँखों जैसा आकाश; नीला आकाश = नीली आँखें
अंबर
आकाश, आसमान
काली पुतली
आँख की पुतली; यहाँ — काले बादल = नीली आँखों की काली पुतलियाँ
जलधर
जल को धारण करने वाला = बादल; समुद्र भी जलधर है
करुणा-विगलित
करुणा से पिघला हुआ; दया से द्रवित हो जाना
अश्रु
आँसू (Tears)
चिर-प्यास
बहुत पुरानी प्यास; चिर = पुराना, लंबे समय से
बुझाई
प्यास बुझाना = तृप्त करना, राहत देना
शस्य-श्यामला
फसलों से हरी-भरी धरती; शस्य = फसल, श्यामला = हरी-काली
ललचाई
इच्छा करना; यहाँ — बूढ़ी धरती फिर से हरी-भरी होना चाहती है
बूढ़ी धरती
गर्मी में सूखी, बंजर धरती — जो बूढ़ी दिखती है
4. पद्यांश-वार भावार्थ
पद्यांश 1 — वर्षा का प्रथम दिन
वह पावस का प्रथम दिवस जब,
पहली बूँद धरा पर आई।
अंकुर फूट पड़ा धरती से,
नव-जीवन की ले अँगड़ाई।
भावार्थ
कवि वर्षा ऋतु (पावस) के पहले दिन का वर्णन करते हैं। जिस दिन बारिश की पहली बूँद धरती पर गिरी, उसी क्षण धरती में से अंकुर फूट पड़ा। यह अंकुर — नए जीवन की अंगड़ाई लेता हुआ — मानो सोकर जाग उठा हो। पहली बूँद नई जिंदगी की शुरुआत का प्रतीक है। बारिश से पहले सूखी-बंजर धरती में नया जीवन जागता है — यह प्रकृति का सबसे अद्भुत चमत्कार है।
पद्यांश 2 — अमृत जैसी बूँद और हरी दूब
धरती के सूखे अधरों पर,
गिरी बूँद अमृत-सी आकर।
वसुंधरा की रोमावलि-सी,
हरी दूब पुलकी-मुसकाई।
भावार्थ
धरती के सूखे होंठों पर बारिश की बूँद अमृत की तरह गिरी। यह बूँद धरती की लंबी प्यास बुझाने वाली है। वसुंधरा (पृथ्वी) के रोएँ खड़े हो गए — जैसे खुशी में रोमांच होता है। वह रोमांच हरी दूब (घास) के रूप में दिखा — दूब खुशी से पुलकित होकर मुस्कुराने लगी। मानवीकरण का सुंदर प्रयोग है — धरती को एक जीवित इंसान की तरह दर्शाया गया है।
पद्यांश 3 — उड़ता सागर और नगाड़े
आसमान में उड़ता सागर,
लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर।
बजा नगाड़े जगा रहे हैं,
बादल धरती की तरुणाई।
भावार्थ
बादलों के लिए कवि ने कहा — आसमान में समुद्र का जल उड़ रहा है (बादल = उड़ता सागर)। बिजली की चमकती लकीरें बादलों के सुनहरे पंखों जैसी लग रही हैं। बादल नगाड़े की तरह गरज रहे हैं और धरती की युवा-शक्ति को जगा रहे हैं। यह पद्यांश बारिश के आने से पहले के दृश्य — बिजली, गर्जना और बादलों का वर्णन करता है।
NCERT का विशेष उल्लेख: "आसमान में उड़ता सागर" का सामान्य अर्थ असंभव लगता है — पर भावार्थ यह है कि समुद्र का जल बिजलियों के सुनहरे पंख लगाकर आकाश में उड़ रहा है। ऐसे काव्य-प्रयोग कविता को आनंददायक बनाते हैं।
पद्यांश 4-5 — नीली आँखें और बूढ़ी धरती
नीले नयनों-सा यह अंबर,
काली पुतली-से ये जलधर।
करुणा-विगलित अश्रु बहाकर,
धरती की चिर-प्यास बुझाई।
बूढ़ी धरती शस्य-श्यामला
बनने को फिर से ललचाई।
भावार्थ
कवि कहते हैं — नीला आकाश जैसे किसी की नीली आँखें हों। और आकाश में उड़ते काले बादल — उन नीली आँखों की काली पुतलियाँ हों। ये बादल करुणा से पिघलकर (दयावश) आँसू बहाते हैं — और वे आँसू ही बारिश की बूँदें हैं। उन्होंने धरती की बहुत पुरानी (चिर) प्यास बुझाई।
इतने दिनों से बंजर और सूखी (बूढ़ी) धरती अब एक बार फिर से फसलों से हरी-भरी (शस्य-श्यामला) बनने की इच्छा करने लगी है। यह पद्यांश बारिश की करुणा और धरती की पुनः जीवित होने की चाहत का वर्णन करता है।
5. कविता का सारांश
पहली बूँद कविता में गोपालकृष्ण कौल ने वर्षा ऋतु के प्रथम दिन का अत्यंत सजीव और मनमोहक चित्रण किया है। कविता चार चरणों में आगे बढ़ती है:
चरण
भाव
मुख्य पंक्ति
1. बूँद का आगमन
पहली बूँद धरती पर गिरी — अंकुर फूटा
नव-जीवन की ले अँगड़ाई
2. धरती का रोमांच
अमृत जैसी बूँद से धरती पुलकित
हरी दूब पुलकी-मुसकाई
3. बादलों का आगमन
बिजली-नगाड़े से धरती की जवानी जागी
बादल धरती की तरुणाई
4. धरती की प्यास बुझी
करुणावश बादलों ने आँसू बहाए = बारिश
बूढ़ी धरती शस्य-श्यामला बनने को ललचाई
मुख्य संदेश: वर्षा की एक छोटी-सी बूँद में जीवन की अपार शक्ति है। प्रकृति का हर तत्व — बादल, बिजली, बारिश — एक साथ मिलकर धरती को नई जिंदगी देते हैं। यह कविता प्रकृति के प्रति प्रेम और जीवन की उम्मीद का संदेश देती है।
6. सरल साहित्यिक सौन्दर्य — काव्य-विशेषताएँ
विशेषता
विवरण
छन्द
गेय छन्द — लय में गाई जा सकती है; टेक पंक्ति बार-बार
भाषा
सरल, चित्रात्मक हिन्दी — तत्सम शब्दों का सुंदर प्रयोग
भाव / मनोदशा
प्रकृति-सौन्दर्य, जीवन-संचार, नवजीवन का उल्लास — वर्षा और धरती का मिलन
टेक
"पहली बूँद धरा पर आई" — बार-बार आती है; भावना को गहरा बनाती है
📌 ध्यान दें: NCERT पाठ्यपुस्तक ने इस कविता में formal अलंकार-सूची नहीं दी है। नीचे दिए उदाहरण भाव-सौन्दर्य समझने में सहायक हैं — ये संभावित काव्य-विशेषताएँ हैं।
मानवीकरण
"हरी दूब पुलकी-मुसकाई"
दूब (घास) को खुश होकर मुस्कुराते हुए दिखाया — निर्जीव को सजीव भाव
उपमा
"अमृत-सी आकर"
बूँद की तुलना अमृत से; '-सी' उपमावाचक शब्द
काव्य-कल्पना
"उड़ता सागर"
बादलों के लिए अनूठी कल्पना — समुद्र का जल आकाश में उड़ रहा है (NCERT ने इसे विशेष रूप से उल्लिखित किया)
उपमा
"नीले नयनों-सा अंबर"
'-सा' होने से उपमा; आकाश की तुलना नीली आँखों से
चित्रात्मकता
"स्वर्णिम पर" (बिजली)
बिजली की चमक = सुनहरे पंख — सजीव दृश्य-चित्रण
पुनरावृत्ति (टेक)
"पहली बूँद धरा पर आई"
बार-बार आने से कविता में संगीतात्मकता और भाव-गहराई
7. पाठ के प्रश्नोत्तर (NCERT)
(क) मेरी समझ से — सही उत्तर
प्र. 1 — कविता में 'नव-जीवन की ले अँगड़ाई' किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
सही उत्तर: अंकुर
स्पष्टीकरण: "अंकुर फूट पड़ा धरती से, नव-जीवन की ले अँगड़ाई।" — धरती में पहली बूँद पड़ते ही बीज से अंकुर निकल पड़ा। यह अंकुर नए जीवन की अँगड़ाई ले रहा है। बादल, बूँद और पावस के लिए यह नहीं कहा गया।
प्र. 2 — 'नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर' में 'काली पुतली' है—
सही उत्तर: बादल
स्पष्टीकरण: आकाश = नीली आँखें; बादल = उन नीली आँखों की काली पुतलियाँ। यहाँ कवि ने आकाश-बादल का मानवीय चित्रण किया है। "जलधर" = जल धारण करने वाले = बादल।
(ख) मिलकर करें मिलान — उत्तर
कविता की पंक्तियाँ
1. आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर
2. बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई
3. नीले नयनों सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर
4. वसुंधरा की रोमावलि-सी, हरी दूब पुलकी-मुसकाई
भावार्थ (सही जोड़)
1. बादल — समुद्र का जल जो बिजली के पंखों से आकाश में उड़ता है
2. मेघ-गर्जना — बादलों की गड़गड़ाहट जो नगाड़े जैसी सुनाई देती है
"आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर, बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई।" — इन पंक्तियों का अर्थ लिखिए।
इन पंक्तियों में बादलों का अत्यंत सुंदर और काव्यात्मक वर्णन है:
उड़ता सागर = बादल (समुद्र का जल आकाश में उड़ रहा है) स्वर्णिम पर = बिजली की चमकती लकीरें बादलों के सुनहरे पंखों जैसी बजा नगाड़े = बादलों की गड़गड़ाहट, मेघ-गर्जना धरती की तरुणाई जगाना = धरती की युवा-शक्ति को पुनः जीवित करना
तात्पर्य: बादल बिजली की चमक और गरज के साथ आए और सूखी धरती को पुनः जीवित कर दिया।
"नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर। करुणा-विगलित अश्रु बहाकर, धरती की चिर-प्यास बुझाई।" — इन पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।
इन पंक्तियों में बादल-बारिश को एक करुणामय इंसान की आँखों से जोड़ा गया है:
नीला आकाश = किसी की नीली आँखें काले बादल = उन नीली आँखों की काली पुतलियाँ करुणा-विगलित अश्रु = दया से पिघलकर बहाए गए आँसू = बारिश की बूँदें चिर-प्यास बुझाई = धरती की लंबे समय से चली आ रही प्यास दूर की
तात्पर्य: आकाश में करुणा का साकार रूप है — बादल दयावश रोए और उनके आँसुओं (बारिश) ने धरती की बहुत पुरानी प्यास बुझाई।
(घ) सोच-विचार के लिए
बारिश की पहली बूँद से धरती का हर्ष कैसे प्रकट होता है?
बारिश की पहली बूँद से धरती का हर्ष तीन प्रकार से प्रकट होता है:
1. अंकुर फूटना: धरती से अंकुर निकल पड़ता है — नई जिंदगी की शुरुआत। 2. दूब का पुलकित होना: हरी दूब रोमांचित होकर मुस्कुराने लगती है। 3. ललचाना: बूढ़ी धरती शस्य-श्यामला बनने की इच्छा करने लगती है।
ये सभी धरती की खुशी और नई उम्मीद के प्रतीक हैं।
कविता में आकाश और बादलों को किनके समान बताया गया है?
आकाश को नीली आँखों के समान बताया गया है — "नीले नयनों-सा यह अंबर।" बादलों को आँखों की काली पुतलियों के समान बताया गया है — "काली पुतली-से ये जलधर।"
यह एक अनूठी उपमा है — नीले आकाश में काले बादल ठीक उसी तरह दिखते हैं जैसे नीली आँखों में काली पुतलियाँ।
8. व्याकरण — शब्द एक अर्थ अनेक
कविता की रचना — काव्य-कल्पना का अर्थ
NCERT का विशेष खंड
"आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर" — इस पंक्ति का सामान्य (शाब्दिक) अर्थ असंभव है — समुद्र आकाश में नहीं उड़ता। परंतु भावार्थ यह है: समुद्र का जल बादल बनकर बिजलियों के सुनहरे पंख लगाकर आकाश में उड़ रहा है। ऐसे काव्य-प्रयोग न केवल कविता की सुंदरता बढ़ाते हैं बल्कि उसे आनंददायक भी बनाते हैं।
'फूट' शब्द — अनेक अर्थों में प्रयोग
कविता में "अंकुर फूट पड़ा धरती से" — यहाँ 'फूटना' का अर्थ है अंकुरण (germination)। परंतु 'फूट' शब्द अलग-अलग संदर्भों में अलग-अलग अर्थ देता है:
फूट डालना
अर्थ 1
भेद पैदा करना, आपस में लड़ाना। उदाहरण: अंग्रेजों की नीति थी फूट डालो और राज करो।
फूट-फूटकर रोना
अर्थ 2
बहुत जोर से रोना। उदाहरण: बच्चा फूट-फूटकर रो रहा था।
घड़ा फूटना
अर्थ 3
मिट्टी का बर्तन टूटना। उदाहरण: हाथ से छूटकर घड़ा फूट गया।
पसीना फूटना
अर्थ 4
पसीना आना। उदाहरण: गर्मी में पसीना फूट पड़ा।
अंकुर फूटना
अर्थ 5 (कविता)
बीज से नया पौधा निकलना (germination)। उदाहरण: पहली बूँद से अंकुर फूट पड़ा।
बोल फूटना
अर्थ 6
बच्चे का पहली बार बोलना। उदाहरण: आज बच्चे के बोल फूटे।
अनेक शब्दों के लिए एक शब्द — 'धर' से बने शब्द
कविता में जलधर आया है — जल + धर = जल को धारण करने वाला = बादल (और समुद्र भी)। 'धर' से अनेक शब्द बनते हैं:
शब्द
निर्माण
अर्थ
जलधर
जल + धर
जल को धारण करने वाला = बादल / समुद्र
पर्वतधर
पर्वत + धर
पर्वत को धारण करने वाला = पृथ्वी
गिरिधर
गिरि + धर
पर्वत को धारण करने वाला = श्रीकृष्ण (गोवर्धन उठाने वाले)
ध्वजधर
ध्वज + धर
ध्वज (झंडा) को धारण करने वाला
वसुधर
वसु + धर
धन-सम्पदा को धारण करने वाला = पृथ्वी
शक्तिधर
शक्ति + धर
शक्ति को धारण करने वाला
9. शब्द पहेली — उत्तर
🔎 शब्द-जाल — सभी उत्तर
न
य
न
ल
गा
द
ब
अं
ड़ा
अ
श्रु
ब
ज
ल
ध
र
प्रश्न
उत्तर
शब्द-जाल में
क. एक प्रकार का वाद्य यंत्र
नगाड़ा
गा + ड़ा (ऊर्ध्वाधर)
ख. आँख के लिए एक अन्य शब्द
नयन
न + य + न (क्षैतिज)
ग. जल को धारण करने वाला
जलधर
ज + ल + ध + र (ऊर्ध्वाधर)
घ. एक प्रकार की घास
दूब
द + ब (ऊर्ध्वाधर)
ङ. आँसू का समानार्थी
अश्रु
अ + श्रु (क्षैतिज)
च. आसमान का समानार्थी शब्द
अंबर
अं + ब + र (ऊर्ध्वाधर)
10. इन्हें भी जानें — नगाड़ा
🎹
नगाड़ा — भारत का पारंपरिक वाद्ययंत्र
कविता में नगाड़े का उल्लेख है — "बजा नगाड़े जगा रहे हैं।" नगाड़ा भारत का एक पारंपरिक ताल-वाद्य है।
बजाने का तरीका: इस पर चोट करके बजाया जाता है — जैसे ढोलक, डमरू, डफली। अवसर: लोक उत्सवों में विशेष रूप से; होली जैसे लोकपर्वों पर। विशेषता: नगाड़ों को जोड़े में भी बजाया जाता है — एक की ध्वनि पतली, दूसरे की मोटी।
चोट से बजाए जाने वाले वाद्ययंत्र
वाद्ययंत्र
विशेषता
प्रयोग
नगाड़ा
बड़ा, गहरी आवाज
लोक उत्सव, होली, शादी
ढोलक
दोनों तरफ से बजता है
शादी, त्योहार, लोक संगीत
डमरू
छोटा, शिव जी से जुड़ा
धार्मिक अवसर, नृत्य
डफली
एक तरफ चमड़ा, हल्की
भक्ति संगीत, कव्वाली
तबला
दो हिस्से, शास्त्रीय
शास्त्रीय संगीत, मुख्य ताल वाद्य
11. झरोखे से — एक बूँद (हरिऔध)
ज्यों निकल कर बादलों की गोद सेथी अभी एक बूँद कुछ आगे बढ़ी।सोचने फिर-फिर यही मन में लगी,आह! क्यों घर छोड़कर मैं यों बढ़ी।
— अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
सारांश एवं तुलना
इस कविता का मुख्य भाव क्या है?
इस छोटी-सी कविता में बूँद की पश्चात्ताप और गृह-वियोग की भावना है। बादल रूपी 'घर' को छोड़कर धरती की ओर बढ़ी बूँद सोचती है — "मैं क्यों घर छोड़कर आगे बढ़ी?" यह भाव अलगाव और उदासी का है।
विषय
पहली बूँद (गोपालकृष्ण कौल)
एक बूँद (हरिऔध)
कवि
गोपालकृष्ण कौल
अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
बूँद का भाव
जीवनदायी — धरती को नया जीवन देती है
उदास — घर छोड़ने का पछतावा
मुख्य संदेश
वर्षा से नया जीवन, प्रकृति का उत्सव
जड़ों से जुड़े रहने का महत्व
समान तत्व
दोनों में बूँद को केंद्र बनाया — पर दोनों का दृष्टिकोण अलग
12. रचनात्मक गतिविधि — करके देखें
🎓 शिक्षक एवं अभिभावकों के लिए: NCERT पाठ के "पाठ से आगे", "सृजन" और "इंद्रधनुष बनाएँ" खंडों को ध्यान में रखकर ये गतिविधियाँ तैयार की गई हैं। ये Project Work, Portfolio और Creativity Assessment के लिए उपयुक्त हैं।
🌞गतिविधि 1 — इंद्रधनुष बनाएँ और कविता लिखेंNCERT सृजन
आधार (NCERT से): "बारिश की बूँदें कभी-कभी आकाश में बहुरंगी छटा बिखेरती हैं जिसे 'इंद्रधनुष' कहा जाता है।"
क्या करें:
एक सुंदर इंद्रधनुष का चित्र बनाएँ — सात रंगों में।
उसे एक प्यारा-सा नाम दें — जैसे "बूँद का उपहार" या "बारिश की मुस्कान।"
उस चित्र पर 4–6 पंक्तियों की एक छोटी-सी कविता लिखें।
💡 प्रेरणा के लिए:
"जब बारिश की बूँदें धूप से मिलती हैं,
तभी आसमान में सात रंग बिखरते हैं।
वह इंद्रधनुष — बूँद का पुरस्कार है,
प्रकृति का सबसे सुंदर उपहार है।"
🎞गतिविधि 2 — बारिश का संवाददाता बनेंNCERT समाचार माध्यम
आधार (NCERT से): "आप भी बन सकते हैं संवाददाता या लिख सकते हैं समाचार।"
क्या करें:
बारिश के दिन अपने आसपास जो दिखे — उसका आँखों देखा हाल लिखें (6–8 वाक्य)।
उसे एक समाचार की तरह प्रस्तुत करें — शीर्षक भी दें।
कक्षा में अपने समूह के साथ पढ़कर सुनाएँ।
📄 Sample शीर्षक: "आज पहली बारिश — शहर में हरियाली लौटी" | "किसानों के चेहरे पर मुस्कान"
🎹गतिविधि 3 — वाद्ययंत्र खोज परियोजनाNCERT खोजबीन
आधार (NCERT से): "आपके यहाँ उत्सवों में कौन-से वाद्ययंत्र बजाए जाते हैं? उनके बारे में जानकारी एकत्र करें।"
क्या करें:
अपने घर या पड़ोस में पूछें — त्योहारों पर कौन-सा वाद्ययंत्र बजता है?
उस वाद्ययंत्र का नाम, चित्र और 3–4 जानकारी की बातें लिखें।
अपनी लेखन-पुस्तिका में एक सुंदर पृष्ठ बनाएँ।
वाद्ययंत्र
बजाने का तरीका
त्योहार
नगाड़ा
चोट से
होली, शादी
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____
____
____
____
____
📷गतिविधि 4 — चित्र को नाम दें (सृजन)NCERT सृजन
आधार (NCERT से): "नाम देना भी सृजन है।"
क्या करें:
बारिश के बाद के किसी दृश्य का — जैसे रेत में उगा फूल, भीगी गली, छत पर पानी — मन में चित्र बनाएँ।
उस काल्पनिक चित्र को एक सुंदर नाम दें।
2–3 वाक्यों में बताएँ — आपने यह नाम क्यों चुना?
💡 उदाहरण:
चित्र: बारिश के बाद रेगिस्तान में एक फूल खिला हुआ है।
नाम: "प्यासी रेत की मुस्कान"
कारण: रेगिस्तान की धरती बहुत प्यासी थी, जब पहली बूँद मिली — तो फूल खिलकर मुस्कुरा दिया।
📖गतिविधि 5 — अपनी कविता लिखेंउन्नत रचना
प्रेरणा: आपने "पहली बूँद" पढ़ी। अब अपनी ऋतु पर एक छोटी कविता लिखें।
विषय सुझाव (कोई एक चुनें):
पहली बर्फपहली धूप (सर्दी के बाद)पहली हवा (गर्मी में)पहली ओस
कैसे लिखें:
4–8 पंक्तियाँ लिखें।
कम से कम एक बार प्रकृति की किसी चीज का मानवीकरण करें।
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