गोल Notes Class 6 Hindi Malhar Chapter 2 | कक्षा 6 हिन्दी मल्हार अध्याय 2 गोल नोट्स

📅 Monday, 20 April 2026 📖 पढ़ रहे हैं...
गोल – NCERT Class 6 Hindi Malhar Chapter 2 Notes | मेजर ध्यानचंद | NCERTclasses.com
HomeClass 6HindiMalharगोल
📚 पाठ परिचय
कक्षा6
विषयहिन्दी
पुस्तकमल्हार
अध्याय2
पाठगोल
विधासंस्मरण (Memoir)
लेखकमेजर ध्यानचंद
जन्म-मृत्यु1905–1979
प्रकाशकNCERT
संस्करणReprint 2026-27
भाषाहिन्दी

गोल

NCERT कक्षा 6 हिन्दी · मल्हार · अध्याय 2 · सम्पूर्ण नोट्स (हिन्दी माध्यम) · NCERT Official PDF · Reprint 2026-27

अध्याय कवरेज — 100% सम्पूर्ण

गोल NCERT कक्षा 6 हिन्दी पाठ्यपुस्तक मल्हार का दूसरा अध्याय है। यह मेजर ध्यानचंद (1905–1979) द्वारा लिखित आत्मकथा 'गोल' का एक अंश है। यह एक संस्मरण (Memoir) है जिसमें मेजर ध्यानचंद ने अपने हॉकी जीवन की रोचक घटनाएँ, सफलता के रहस्य और खेल भावना का वर्णन किया है। यह पाठ बच्चों को लगन, टीम भावना और सच्ची खेल भावना की सीख देता है।

परीक्षा हेतु: इस पाठ से 'मेरी समझ से' MCQ, शब्दार्थ, 'पंक्तियों पर चर्चा' और 'शब्द-युग्म' संबंधी प्रश्न पूछे जाते हैं।

1. लेखक परिचय — मेजर ध्यानचंद

🏓
मेजर ध्यानचंद
जन्म: 29 अगस्त, 1905 (प्रयाग/इलाहाबाद) · मृत्यु: 3 दिसम्बर, 1979
मेजर ध्यानचंद को 'हॉकी का जादूगर' कहा जाता है। वे भारतीय हॉकी के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी और विश्व के महानतम हॉकी खिलाड़ियों में से एक माने जाते हैं। उनका जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। बाद में वे झाँसी में रहने लगे। 16 वर्ष की आयु में सेना में भर्ती हुए और वहाँ से उनकी हॉकी यात्रा आरंभ हुई। उनके जन्मदिन 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है।
🏅 3 ओलंपिक स्वर्ण पदक 🎓 हॉकी का जादूगर 🎉 राष्ट्रीय खेल दिवस (29 अगस्त) 🏆 मेजर ध्यानचंद खेल रत्न

जीवन-वृत्त एक नजर में

वर्ष/घटनाविवरण
1905प्रयाग (इलाहाबाद) में जन्म, बाद में झाँसी में बसे
1921 (16 वर्ष)'फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट' में साधारण सिपाही के रूप में भर्ती
1928एम्स्टर्डम ओलंपिक — भारत को स्वर्ण पदक दिलाया
1932लॉस एंजिलिस ओलंपिक — भारत को स्वर्ण पदक दिलाया
1933पंजाब रेजिमेंट की ओर से खेलते समय एक मैच में 6 गोल (पाठ में वर्णित)
1936बर्लिन ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के कप्तान; स्वर्ण पदक; 'हॉकी का जादूगर' उपाधि व्यापक रूप से प्रसिद्ध हुई
1979दिल्ली में निधन
2021सर्वोच्च खेल पुरस्कार का नाम 'मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार' किया गया

2. पाठ परिचय एवं संस्मरण विधा

संस्मरण क्या होता है?

संस्मरण (Memoir) की परिभाषा
संस्मरण वह गद्य-रचना है जिसमें लेखक अपने जीवन की वास्तविक घटनाओं, अनुभवों और यादों को पाठक के साथ साझा करता है। इसमें लेखक प्रथम पुरुष ('मैं') में लिखता है। इसकी भाषा सरल, सजीव और आत्मीय होती है — जैसे कोई सच्चे मन से अपनी बात कह रहा हो।

इस संस्मरण की विशेषताएँ

विशेषताउदाहरण / स्पष्टीकरण
प्रथम पुरुष ('मैं')"उन दिनों मैं पंजाब रेजिमेंट की ओर से खेला करता था।"
वास्तविक घटनाएँ1933 का मैच, 6 गोल, बर्लिन ओलंपिक — सब सच्ची घटनाएँ
आत्मीय भाषालेखक पाठक से सीधे बात करता है — "तो देखा आपने मेरा बदला लेने का ढंग?"
प्रेरणादायक संदेशलगन, साधना और खेल भावना — सफलता के मंत्र
सरल शब्दक्लिष्ट शब्द नहीं — आम बोलचाल की भाषा
पाठ का नाम 'गोल' क्यों?
'गोल' शब्द के अनेक अर्थ हैं — गोल गेंद, गोल आकार आदि। लेकिन यहाँ 'गोल' का अर्थ है हॉकी में किया जाने वाला गोल (Score)। ध्यानचंद की पूरी आत्मकथा का नाम ही 'गोल' है — यह नाम यह बताता है कि उन्हें खेल से कितना प्रेम था।

3. पाठ का सारांश

भाग 1 — एक यादगार मैच और बदला लेने का अनोखा ढंग

सन् 1933 की घटना है। मेजर ध्यानचंद उस समय पंजाब रेजिमेंट की ओर से हॉकी खेलते थे। एक दिन 'पंजाब रेजिमेंट' और 'सैंपर्स एंड माइनर्स टीम' के बीच मुकाबला हो रहा था। माइनर्स टीम के खिलाड़ी बार-बार ध्यानचंद से गेंद छीनने की कोशिश करते, पर सफल न होते। क्रोध में एक खिलाड़ी ने हॉकी स्टिक उनके सिर पर मार दी। उन्हें मैदान से बाहर ले जाया गया।

थोड़ी देर बाद ध्यानचंद पट्टी बाँधकर फिर मैदान में आए और उस खिलाड़ी की पीठ पर हाथ रखकर कहा — "तुम चिंता मत करो, इसका बदला मैं जरूर लूँगा।" यह सुनकर वह खिलाड़ी घबरा गया और हर पल ध्यानचंद को देखने लगा। ध्यानचंद ने एक के बाद एक झटपट 6 गोल कर दिए। खेल खत्म होने पर उन्होंने उस खिलाड़ी की पीठ थपथपाई और कहा — "दोस्त, खेल में इतना गुस्सा अच्छा नहीं। मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है।" यह ध्यानचंद की सच्ची खेल भावना का परिचय था।

"बुरा काम करने वाला आदमी हर समय इस बात से डरता रहता है कि उसके साथ भी बुराई की जाएगी।"
— मेजर ध्यानचंद

भाग 2 — जीवन परिचय और सफलता का रहस्य

मेजर ध्यानचंद बताते हैं कि उनका जन्म सन् 1905 में प्रयाग में एक साधारण परिवार में हुआ। बाद में वे झाँसी आकर बस गए। 16 वर्ष की उम्र में 'फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट' में साधारण सिपाही के रूप में भर्ती हुए। प्रारंभ में उनकी हॉकी में कोई दिलचस्पी नहीं थी। सूबेदार मेजर तिवारी के बार-बार कहने पर उन्होंने हॉकी खेलना शुरू किया।

जैसे-जैसे उनके खेल में निखार आता गया, वैसे-वैसे तरक्की भी मिलती गई। सन् 1936 के बर्लिन ओलंपिक में उन्हें कप्तान बनाया गया। वहाँ उनके खेल से प्रभावित होकर लोगों ने उन्हें 'हॉकी का जादूगर' कहना शुरू किया। उनकी सफलता का रहस्य था — लगन, साधना और खेल भावना।

ध्यानचंद कभी अकेले सारे गोल नहीं करते थे। उनकी कोशिश रहती थी कि गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दे देते ताकि उसे गोल करने का श्रेय मिले। खेलते समय वे हमेशा यह सोचते — "हार या जीत मेरी नहीं, बल्कि पूरे देश की है।"

4. कठिन शब्दार्थ

शब्दअर्थ
धक्का-मुक्कीएक-दूसरे को धकेलना, झगड़ा-झंझट
नोंक-झोंकहल्की-हल्की लड़ाई-झगड़ा, छोटी-सी बहस
मुकाबलाप्रतियोगिता, एक-दूसरे से आगे निकलने का प्रयास
पट्टी बाँधकरघाव पर पट्टी लगाकर (First Aid करके)
घबरानाडर जाना, व्याकुल हो जाना
थपथपाईहल्के-हल्के थपथपाना — प्यार या हिम्मत देने के लिए पीठ थपथपाना
शर्मिंदालज्जित होना, शर्म आना
बदलाकिसी बुरे काम का जवाब देना; प्रतिशोध
गुरु-मंत्रगुरु द्वारा दिया गया जादुई मंत्र; यहाँ — सफलता का विशेष रहस्य
लगनकिसी कार्य के प्रति पूरी लग्न और एकाग्रता
साधनाकिसी लक्ष्य को पाने के लिए कठिन और निरंतर अभ्यास
खेल भावनाखेल की सच्ची भावना — सबको साथ लेकर चलना, हार-जीत को सहज लेना
साधारण सिपाहीसेना में सबसे छोटा पद — Private Soldier
दिलचस्पीरुचि, इच्छा, लगाव
सूबेदार मेजरभारतीय सेना में सूबेदार से बड़ा पद; स्वतंत्रता से पहले का भारतीय सैन्य अधिकारी पद
छावनीसैनिकों के रहने का क्षेत्र (Cantonment)
नौसिखियाजो अभी-अभी सीखना शुरू करे; नया सीखने वाला
निखारकला या कौशल में सुधार और निपुणता आना
तरक्कीउन्नति, आगे बढ़ना, पदोन्नति
लांस नायकभारतीय सेना का एक पद (रैंक) — Private से ऊपर, Naik से नीचे
कप्तान (Captain)खेल टीम का नेता (यहाँ — हॉकी टीम का कप्तान)
जादूगरजादू करने वाला; यहाँ — असाधारण कौशल वाला खिलाड़ी
श्रेयकिसी कार्य का कारण बनने का सम्मान, यश
स्वर्ण पदकGold Medal — पहले स्थान के लिए मिलने वाला सर्वोच्च पुरस्कार
संस्मरणयादों को लिखना; वह गद्य-रचना जिसमें लेखक अपने जीवन की घटनाएँ लिखता है
सैंपर्स एंड माइनर्सअंग्रेजों के समय का एक हॉकी दल (टीम)

5. पाठ के प्रश्नोत्तर (NCERT)

(क) मेरी समझ से — सही उत्तर

प्र. 1 — "दोस्त, खेल में इतना गुस्सा अच्छा नहीं। मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है..." — मेजर ध्यानचंद की इस बात से उनके बारे में क्या पता चलता है?
सही उत्तर: वे जानते थे कि खेल को सही भावना से खेलना चाहिए।

स्पष्टीकरण: ध्यानचंद ने हॉकी स्टिक से मारे जाने का बदला हॉकी स्टिक से नहीं, बल्कि 6 गोल करके लिया। इससे स्पष्ट होता है कि वे सच्ची खेल भावना जानते थे — कि खेल में जवाब खेल से ही दिया जाता है, हिंसा से नहीं।
प्र. 2 — लोगों ने मेजर ध्यानचंद को 'हॉकी का जादूगर' कहना क्यों शुरू किया?
सही उत्तर: उनके हॉकी खेलने के विशेष कौशल के कारण।

स्पष्टीकरण: बर्लिन ओलंपिक 1936 में लोग उनके हॉकी खेलने के अद्भुत कौशल से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें 'हॉकी का जादूगर' कहा जाने लगा। यह उनकी तकनीक और निपुणता के कारण था।

(ख) सोच-विचार के लिए

प्र. 3 — ध्यानचंद की सफलता का क्या रहस्य था?
मेजर ध्यानचंद ने स्वयं बताया कि उनके पास सफलता का कोई विशेष 'गुरु-मंत्र' नहीं था। उनकी सफलता के तीन रहस्य थे:

1. लगन — किसी भी कार्य को पूरे मन से करना।
2. साधना — निरंतर और कठिन अभ्यास करना।
3. खेल भावना — टीम के साथ मिलकर खेलना, साथी को श्रेय देना, हार-जीत को देश की जीत-हार मानना।
प्र. 4 — किन बातों से ऐसा लगता है कि ध्यानचंद स्वयं से पहले दूसरों को रखते थे?
निम्नलिखित बातों से यह स्पष्ट होता है:

(i) गोल देना: "मेरी तो हमेशा यह कोशिश रहती कि मैं गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दे देता ताकि उसे गोल करने का श्रेय मिल जाए।"
(ii) देश के लिए खेलना: "हार या जीत मेरी नहीं, बल्कि पूरे देश की है।"
(iii) बदला खेल से: बदला लेने में भी उन्होंने अपनी अहंकार की जगह टीम की जीत को प्राथमिकता दी।

(ग) शब्द-अर्थ मिलान — उत्तर

शब्दसही अर्थ/संदर्भ
1. लांस नायकभारतीय सेना का एक पद (रैंक)
2. बर्लिन ओलंपिकवर्ष 1936 में जर्मनी के बर्लिन शहर में आयोजित ओलंपिक — 49 देशों ने भाग लिया
3. पंजाब रेजिमेंटस्वतंत्रता से पहले अंग्रेजों की भारतीय सेना का एक दल
4. सैंपर्स एंड माइनर्स टीमअंग्रेजों के समय का एक हॉकी दल
5. सूबेदारस्वतंत्रता से पहले सूबेदार भारतीय सैन्य अधिकारियों का दूसरा सबसे बड़ा पद था
6. छावनीसैनिकों के रहने का क्षेत्र (Cantonment)

6. पंक्तियों पर चर्चा

(क) "बुरा काम करने वाला आदमी हर समय इस बात से डरता रहता है कि उसके साथ भी बुराई की जाएगी।"
भाव: जो व्यक्ति दूसरों के साथ बुरा करता है वह हमेशा डर में जीता है — यही उसकी सबसे बड़ी सजा है। ध्यानचंद ने यह माइनर्स टीम के उस खिलाड़ी के संदर्भ में कहा जिसने उनके सिर पर हॉकी मारी थी। वह खिलाड़ी पूरे मैच में डरता रहा कि ध्यानचंद उससे बदला लेंगे। यह एक जीवन-मूल्य की बात है।
(ख) "मेरी तो हमेशा यह कोशिश रहती कि मैं गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दे दूँता कि उसे गोल करने का श्रेय मिल जाए।"
भाव: ध्यानचंद में अहंकार नहीं था। वे चाहते थे कि श्रेय उन्हें नहीं, बल्कि उनके साथी को मिले। यही उनकी सच्ची टीम भावना थी जिसने उन्हें विश्व के दिलों में जगह दिलाई। यह पंक्ति यह भी बताती है कि सफलता टीम की होती है, अकेले की नहीं।

7. व्याकरण — शब्द-युग्म एवं बात पर बल

शब्द-युग्म (Shabdayugma) — परिभाषा

शब्द-युग्म क्या होता है?
जब दो शब्दों को योजक-चिह्न () लगाकर जोड़ा जाता है, तो उसे शब्द-युग्म कहते हैं।
योजक = जोड़ने वाला (Hyphen)।
दो प्रकार होते हैं — (1) एक ही शब्द दो बार: जैसे-जैसे, वैसे-वैसे (2) भिन्न-भिन्न शब्द: धक्का-मुक्की, नोंक-झोंक

प्रकार 1 — एक ही शब्द दो बार (पाठ से)

जैसे-जैसे
एक ही शब्द
जिस अनुपात में, क्रमशः
वैसे-वैसे
एक ही शब्द
उसी अनुपात में, उसी क्रम से
बार-बार
एक ही शब्द
कई बार, बारंबार
एक-एक
एक ही शब्द
प्रत्येक, एक के बाद एक
अपनी-अपनी
एक ही शब्द
हर किसी की अलग-अलग

प्रकार 2 — भिन्न-भिन्न शब्द (पाठ से)

धक्का-मुक्की
भिन्न शब्द
एक-दूसरे को धकेलना
नोंक-झोंक
भिन्न शब्द
हल्की-सी लड़ाई, बहस
हार-जीत
भिन्न शब्द
हारना और जीतना
बच्चे-बूढ़े
भिन्न शब्द
बच्चे और बुजुर्ग, सभी आयु के लोग
एक-दूसरे
भिन्न शब्द
परस्पर, आपस में

योजक की सहायता से लिखिए (NCERT अभ्यास)

दिए शब्दयोजक से
अच्छा या बुराअच्छा-बुरा
छोटा या बड़ाछोटा-बड़ा
अमीर और गरीबअमीर-गरीब
उत्तर और दक्षिणउत्तर-दक्षिण
गुरु और शिष्यगुरु-शिष्य
अमृत या विषअमृत-विष

बात पर बल देना — 'ही', 'भी', 'तो' शब्द

अंतर समझिए
वाक्य 1: "मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है।"
वाक्य 2: "मैंने तो अपना बदला ले लिया है।"

पहले वाक्य में 'ही' बल देता है — अर्थात् बदला जरूर लिया। दूसरे वाक्य में यह जोर नहीं है।
बल-शब्दपाठ से वाक्यप्रभाव
ही"मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है।"निश्चितता का बोध — बदला जरूर हुआ
भी"खेल में भी यह सब चलता था।"समावेश — खेल में भी ऐसा होता था
तो"खेल में तो यह सब चलता ही है।"स्वाभाविकता — यह तो सामान्य बात है
ही"सारे गोल मैं ही करता था।"सीमा/जोर — केवल मैं ही नहीं

8. झरोखे से — डाँडी या गोथा

यह भील-भिलाला बच्चों का एक पारंपरिक स्वदेशी खेल है जो हॉकी से काफी मिलता-जुलता है।

🏓 डाँडी या गोथा — खेल नियम
1
खेल सामग्री: (1) बाँस के गुट्टे की गेंद — 'दुईत' (2) अंग्रेजी 'L' आकार की बाँस की डंडियाँ — 'गोथा' (3) राख से मैदान में सीमांकन और एक छोटा वृत्त
2
खिलाड़ी: दोनों दलों में कम से कम दो-दो खिलाड़ी होने चाहिए।
3
शुरुआत: टॉस करना। टॉस जीतने वाला दल पहले खेलेगा। गेंद को छोटे वृत्त में रखते हैं।
4
खेल: हमला करने वाला दल गेंद को पीटते हुए विरोधी दल के क्षेत्र में दूर तक ले जाने की कोशिश करता है। दोनों दल की 'डी' में एक-एक खिलाड़ी रहता है जो रेखा पार नहीं होने देता।
5
विशेष सुविधा: खिलाड़ी डाँडी के दोनों ओर से खेल सकते हैं — यह सुविधा हॉकी में नहीं होती।
6
दो महत्वपूर्ण नियम: (1) गेंद को शरीर से न छूना, न रोकना (2) गेंद को हवाई शॉट न मारना।
7
जीत का निर्णय: कोई गोलपोस्ट नहीं। जो दल विरोधी के क्षेत्र में अधिक से अधिक दबाव बनाए, वह विजयी।
8
त्योहार से जुड़ाव: यह खेल होली से कुछ दिन पहले खेला जाता है। होलिका दहन के दिन दुईत और गोथे आग में डाल दिए जाते हैं।

हॉकी और डाँडी की तुलना

🏓 हॉकी
रबड़ या कॉर्क की गेंद
लकड़ी/फाइबर की हॉकी स्टिक
गोलपोस्ट होते हैं
स्टिक के एक ओर से ही खेलें
अंतर्राष्ट्रीय खेल
हरे मैदान पर
🏭 डाँडी/गोथा
बाँस के गुट्टे की गेंद (दुईत)
L-आकार की बाँस की डंडी (गोथा)
गोलपोस्ट नहीं होते
दोनों ओर से खेल सकते हैं
भील-भिलाला स्वदेशी खेल
राख से सीमांकित मैदान पर

9. पढ़ने के लिए — एक दौड़ ऐसी भी

सारांश
कई साल पहले ओलंपिक में दिव्यांग बच्चों की 100 मीटर दौड़ हो रही थी। नौ प्रतिभागी थे जिन्हें कोई-न-कोई शारीरिक विकलांगता थी। एक छोटा लड़का ठोकर खाकर गिर पड़ा। उसकी आवाज सुनकर बाकी सभी प्रतिभागी रुक गए और उसके पास आए। उसे उठाया, आँसू पोंछे, धूल साफ की। फिर सभी ने एक-दूसरे का हाथ पकड़ा और साथ मिलकर अंतिम रेखा तक पहुँचे। सभी को स्वर्ण पदक दिया गया।
इस कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
इस कहानी का संदेश है — सहयोग और मानवता जीत से बड़ी होती है। व्यक्तिगत जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि हम अपने साथियों को भी आगे बढ़ाएँ। ये दिव्यांग बच्चों ने दुनिया को सिखाया कि असली खेल भावना क्या होती है।
विषयगोल (ध्यानचंद)एक दौड़ ऐसी भी
मुख्य भावखेल भावना, लगन, साधनासहयोग, मानवता, मित्रता
समान संदेशजीत व्यक्तिगत नहीं — साथ मिलकर जीतना ही असली जीत है
विधासंस्मरणप्रेरक कथा

10. MCQ — परीक्षा उपयोगी प्रश्न

1. 'गोल' पाठ के लेखक कौन हैं?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
सुनील गावस्कर
मेजर ध्यानचंद
मिल्खा सिंह
पी.टी. उषा
सही उत्तर: (ब) मेजर ध्यानचंद (1905–1979) — 'हॉकी का जादूगर'
2. 'गोल' पाठ किस विधा में लिखा गया है?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
कहानी
कविता
संस्मरण (Memoir)
जीवनी
सही उत्तर: (स) संस्मरण — लेखक अपनी जीवन की वास्तविक यादें लिखता है
3. मेजर ध्यानचंद को 'हॉकी का जादूगर' कब कहा जाने लगा?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक में
1936 के बर्लिन ओलंपिक में
1932 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक में
1933 में एक मैच के बाद
सही उत्तर: (ब) 1936 के बर्लिन ओलंपिक में — जहाँ उनके कौशल से लोग मंत्रमुग्ध हो गए
4. ध्यानचंद ने सन् 1933 के मैच में कितने गोल किए थे?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
तीन
चार
छह (6)
दो
सही उत्तर: (स) 6 गोल — "मैंने एक के बाद एक झटपट छह गोल कर दिए"
5. 'डाँडी या गोथा' खेल में गेंद किस चीज की बनी होती है?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
रबड़ की
कपड़े की
बाँस के गुट्टे की ('दुईत')
प्लास्टिक की
सही उत्तर: (स) बाँस के गुट्टे की — जिसे 'दुईत' कहते हैं
6. मेजर ध्यानचंद का जन्म किस वर्ष और कहाँ हुआ?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
1907, झाँसी में
1905, प्रयाग (इलाहाबाद) में
1910, दिल्ली में
1900, मुंबई में
सही उत्तर: (ब) 1905, प्रयाग (इलाहाबाद) — बाद में झाँसी में बसे
7. 'शब्द-युग्म' में दो शब्दों के बीच कौन-सा चिह्न लगाया जाता है?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
अल्पविराम (,)
योजक-चिह्न (–) यानी Hyphen
पूर्णविराम (.)
विस्मयादिबोधक (!)
सही उत्तर: (ब) योजक-चिह्न (–) — जोड़ने वाला चिह्न
8. ध्यानचंद की सफलता के मुख्य तीन मंत्र कौन से थे?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
धन, शक्ति, यश
लगन, साधना और खेल भावना
क्रोध, बदला और हिम्मत
पैसा, समय और कोच
सही उत्तर: (ब) "लगन, साधना और खेल भावना ही सफलता के सबसे बड़े मंत्र हैं।"

11. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

'गोल' किस कक्षा और पाठ्यपुस्तक में है? +
NCERT कक्षा 6 हिन्दी पाठ्यपुस्तक मल्हार का अध्याय 2 है। यह Reprint 2026-27 में संकलित है।
मेजर ध्यानचंद का जन्मदिन 'राष्ट्रीय खेल दिवस' क्यों है? +
मेजर ध्यानचंद भारत के महानतम हॉकी खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। उनके जन्मदिन 29 अगस्त को भारत राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाता है।
संस्मरण और कहानी में क्या अंतर है? +
संस्मरण — लेखक की वास्तविक जीवन की घटनाएँ, प्रथम पुरुष ('मैं') में लिखी जाती हैं। कहानी — काल्पनिक या आंशिक काल्पनिक हो सकती है, पात्र लेखक से अलग हो सकते हैं।
'शब्द-युग्म' के दो प्रकार कौन से हैं? +
प्रकार 1: एक ही शब्द दो बार — जैसे-जैसे, वैसे-वैसे, बार-बार
प्रकार 2: भिन्न-भिन्न दो शब्द — धक्का-मुक्की, नोंक-झोंक, हार-जीत
ध्यानचंद ने बदला किस तरह लिया? +
किसी खिलाड़ी ने हॉकी स्टिक से उनके सिर पर मार दी। उन्होंने जवाब हॉकी से नहीं, बल्कि 6 गोल करके दिया। यह उनकी सच्ची खेल भावना और परिपक्वता का प्रमाण था।
'डाँडी' और 'गोथा' का अर्थ क्या है? +
दोनों का अर्थ एक ही है — खेलने की हाथ-लकड़ी। यह भील-भिलाला बच्चों का पारंपरिक स्वदेशी खेल है जो हॉकी से मिलता-जुलता है।
ध्यानचंद सेना में कब भर्ती हुए? +
वे 16 वर्ष की आयु में सेना में भर्ती हुए और वहीं से उनकी हॉकी यात्रा ने नया मोड़ लिया।

नोट्स शेयर करें

📌 अस्वीकरण: यह नोट्स केवल शैक्षिक उद्देश्य हेतु हैं। सामग्री NCERT पाठ्यपुस्तक मल्हार (Reprint 2026-27) पर आधारित है। © NCERT, नई दिल्ली। NCERTclasses.com, NCERT/CBSE/RBSE से सम्बद्ध नहीं है। स्रोत: ncert.nic.in

📤 शेयर करें:

💼

सरकारी नौकरी की तैयारी करें!

SSC, Railway, Bank, UPSC के लिए

Visit Now →

💬 टिप्पणियाँ

No comments:

Post a Comment