| कक्षा | 6 |
| विषय | हिन्दी |
| पुस्तक | मल्हार |
| अध्याय | 2 |
| पाठ | गोल |
| विधा | संस्मरण (Memoir) |
| लेखक | मेजर ध्यानचंद |
| जन्म-मृत्यु | 1905–1979 |
| प्रकाशक | NCERT |
| संस्करण | Reprint 2026-27 |
| भाषा | हिन्दी |
गोल
NCERT कक्षा 6 हिन्दी · मल्हार · अध्याय 2 · सम्पूर्ण नोट्स (हिन्दी माध्यम) · NCERT Official PDF · Reprint 2026-27
गोल NCERT कक्षा 6 हिन्दी पाठ्यपुस्तक मल्हार का दूसरा अध्याय है। यह मेजर ध्यानचंद (1905–1979) द्वारा लिखित आत्मकथा 'गोल' का एक अंश है। यह एक संस्मरण (Memoir) है जिसमें मेजर ध्यानचंद ने अपने हॉकी जीवन की रोचक घटनाएँ, सफलता के रहस्य और खेल भावना का वर्णन किया है। यह पाठ बच्चों को लगन, टीम भावना और सच्ची खेल भावना की सीख देता है।
1. लेखक परिचय — मेजर ध्यानचंद
जीवन-वृत्त एक नजर में
| वर्ष/घटना | विवरण |
|---|---|
| 1905 | प्रयाग (इलाहाबाद) में जन्म, बाद में झाँसी में बसे |
| 1921 (16 वर्ष) | 'फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट' में साधारण सिपाही के रूप में भर्ती |
| 1928 | एम्स्टर्डम ओलंपिक — भारत को स्वर्ण पदक दिलाया |
| 1932 | लॉस एंजिलिस ओलंपिक — भारत को स्वर्ण पदक दिलाया |
| 1933 | पंजाब रेजिमेंट की ओर से खेलते समय एक मैच में 6 गोल (पाठ में वर्णित) |
| 1936 | बर्लिन ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के कप्तान; स्वर्ण पदक; 'हॉकी का जादूगर' उपाधि व्यापक रूप से प्रसिद्ध हुई |
| 1979 | दिल्ली में निधन |
| 2021 | सर्वोच्च खेल पुरस्कार का नाम 'मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार' किया गया |
2. पाठ परिचय एवं संस्मरण विधा
संस्मरण क्या होता है?
इस संस्मरण की विशेषताएँ
| विशेषता | उदाहरण / स्पष्टीकरण |
|---|---|
| प्रथम पुरुष ('मैं') | "उन दिनों मैं पंजाब रेजिमेंट की ओर से खेला करता था।" |
| वास्तविक घटनाएँ | 1933 का मैच, 6 गोल, बर्लिन ओलंपिक — सब सच्ची घटनाएँ |
| आत्मीय भाषा | लेखक पाठक से सीधे बात करता है — "तो देखा आपने मेरा बदला लेने का ढंग?" |
| प्रेरणादायक संदेश | लगन, साधना और खेल भावना — सफलता के मंत्र |
| सरल शब्द | क्लिष्ट शब्द नहीं — आम बोलचाल की भाषा |
'गोल' शब्द के अनेक अर्थ हैं — गोल गेंद, गोल आकार आदि। लेकिन यहाँ 'गोल' का अर्थ है हॉकी में किया जाने वाला गोल (Score)। ध्यानचंद की पूरी आत्मकथा का नाम ही 'गोल' है — यह नाम यह बताता है कि उन्हें खेल से कितना प्रेम था।
3. पाठ का सारांश
भाग 1 — एक यादगार मैच और बदला लेने का अनोखा ढंग
सन् 1933 की घटना है। मेजर ध्यानचंद उस समय पंजाब रेजिमेंट की ओर से हॉकी खेलते थे। एक दिन 'पंजाब रेजिमेंट' और 'सैंपर्स एंड माइनर्स टीम' के बीच मुकाबला हो रहा था। माइनर्स टीम के खिलाड़ी बार-बार ध्यानचंद से गेंद छीनने की कोशिश करते, पर सफल न होते। क्रोध में एक खिलाड़ी ने हॉकी स्टिक उनके सिर पर मार दी। उन्हें मैदान से बाहर ले जाया गया।
थोड़ी देर बाद ध्यानचंद पट्टी बाँधकर फिर मैदान में आए और उस खिलाड़ी की पीठ पर हाथ रखकर कहा — "तुम चिंता मत करो, इसका बदला मैं जरूर लूँगा।" यह सुनकर वह खिलाड़ी घबरा गया और हर पल ध्यानचंद को देखने लगा। ध्यानचंद ने एक के बाद एक झटपट 6 गोल कर दिए। खेल खत्म होने पर उन्होंने उस खिलाड़ी की पीठ थपथपाई और कहा — "दोस्त, खेल में इतना गुस्सा अच्छा नहीं। मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है।" यह ध्यानचंद की सच्ची खेल भावना का परिचय था।
भाग 2 — जीवन परिचय और सफलता का रहस्य
मेजर ध्यानचंद बताते हैं कि उनका जन्म सन् 1905 में प्रयाग में एक साधारण परिवार में हुआ। बाद में वे झाँसी आकर बस गए। 16 वर्ष की उम्र में 'फर्स्ट ब्राह्मण रेजिमेंट' में साधारण सिपाही के रूप में भर्ती हुए। प्रारंभ में उनकी हॉकी में कोई दिलचस्पी नहीं थी। सूबेदार मेजर तिवारी के बार-बार कहने पर उन्होंने हॉकी खेलना शुरू किया।
जैसे-जैसे उनके खेल में निखार आता गया, वैसे-वैसे तरक्की भी मिलती गई। सन् 1936 के बर्लिन ओलंपिक में उन्हें कप्तान बनाया गया। वहाँ उनके खेल से प्रभावित होकर लोगों ने उन्हें 'हॉकी का जादूगर' कहना शुरू किया। उनकी सफलता का रहस्य था — लगन, साधना और खेल भावना।
ध्यानचंद कभी अकेले सारे गोल नहीं करते थे। उनकी कोशिश रहती थी कि गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दे देते ताकि उसे गोल करने का श्रेय मिले। खेलते समय वे हमेशा यह सोचते — "हार या जीत मेरी नहीं, बल्कि पूरे देश की है।"
4. कठिन शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| धक्का-मुक्की | एक-दूसरे को धकेलना, झगड़ा-झंझट |
| नोंक-झोंक | हल्की-हल्की लड़ाई-झगड़ा, छोटी-सी बहस |
| मुकाबला | प्रतियोगिता, एक-दूसरे से आगे निकलने का प्रयास |
| पट्टी बाँधकर | घाव पर पट्टी लगाकर (First Aid करके) |
| घबराना | डर जाना, व्याकुल हो जाना |
| थपथपाई | हल्के-हल्के थपथपाना — प्यार या हिम्मत देने के लिए पीठ थपथपाना |
| शर्मिंदा | लज्जित होना, शर्म आना |
| बदला | किसी बुरे काम का जवाब देना; प्रतिशोध |
| गुरु-मंत्र | गुरु द्वारा दिया गया जादुई मंत्र; यहाँ — सफलता का विशेष रहस्य |
| लगन | किसी कार्य के प्रति पूरी लग्न और एकाग्रता |
| साधना | किसी लक्ष्य को पाने के लिए कठिन और निरंतर अभ्यास |
| खेल भावना | खेल की सच्ची भावना — सबको साथ लेकर चलना, हार-जीत को सहज लेना |
| साधारण सिपाही | सेना में सबसे छोटा पद — Private Soldier |
| दिलचस्पी | रुचि, इच्छा, लगाव |
| सूबेदार मेजर | भारतीय सेना में सूबेदार से बड़ा पद; स्वतंत्रता से पहले का भारतीय सैन्य अधिकारी पद |
| छावनी | सैनिकों के रहने का क्षेत्र (Cantonment) |
| नौसिखिया | जो अभी-अभी सीखना शुरू करे; नया सीखने वाला |
| निखार | कला या कौशल में सुधार और निपुणता आना |
| तरक्की | उन्नति, आगे बढ़ना, पदोन्नति |
| लांस नायक | भारतीय सेना का एक पद (रैंक) — Private से ऊपर, Naik से नीचे |
| कप्तान (Captain) | खेल टीम का नेता (यहाँ — हॉकी टीम का कप्तान) |
| जादूगर | जादू करने वाला; यहाँ — असाधारण कौशल वाला खिलाड़ी |
| श्रेय | किसी कार्य का कारण बनने का सम्मान, यश |
| स्वर्ण पदक | Gold Medal — पहले स्थान के लिए मिलने वाला सर्वोच्च पुरस्कार |
| संस्मरण | यादों को लिखना; वह गद्य-रचना जिसमें लेखक अपने जीवन की घटनाएँ लिखता है |
| सैंपर्स एंड माइनर्स | अंग्रेजों के समय का एक हॉकी दल (टीम) |
5. पाठ के प्रश्नोत्तर (NCERT)
(क) मेरी समझ से — सही उत्तर
स्पष्टीकरण: ध्यानचंद ने हॉकी स्टिक से मारे जाने का बदला हॉकी स्टिक से नहीं, बल्कि 6 गोल करके लिया। इससे स्पष्ट होता है कि वे सच्ची खेल भावना जानते थे — कि खेल में जवाब खेल से ही दिया जाता है, हिंसा से नहीं।
स्पष्टीकरण: बर्लिन ओलंपिक 1936 में लोग उनके हॉकी खेलने के अद्भुत कौशल से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें 'हॉकी का जादूगर' कहा जाने लगा। यह उनकी तकनीक और निपुणता के कारण था।
(ख) सोच-विचार के लिए
1. लगन — किसी भी कार्य को पूरे मन से करना।
2. साधना — निरंतर और कठिन अभ्यास करना।
3. खेल भावना — टीम के साथ मिलकर खेलना, साथी को श्रेय देना, हार-जीत को देश की जीत-हार मानना।
(i) गोल देना: "मेरी तो हमेशा यह कोशिश रहती कि मैं गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दे देता ताकि उसे गोल करने का श्रेय मिल जाए।"
(ii) देश के लिए खेलना: "हार या जीत मेरी नहीं, बल्कि पूरे देश की है।"
(iii) बदला खेल से: बदला लेने में भी उन्होंने अपनी अहंकार की जगह टीम की जीत को प्राथमिकता दी।
(ग) शब्द-अर्थ मिलान — उत्तर
| शब्द | सही अर्थ/संदर्भ |
|---|---|
| 1. लांस नायक | भारतीय सेना का एक पद (रैंक) |
| 2. बर्लिन ओलंपिक | वर्ष 1936 में जर्मनी के बर्लिन शहर में आयोजित ओलंपिक — 49 देशों ने भाग लिया |
| 3. पंजाब रेजिमेंट | स्वतंत्रता से पहले अंग्रेजों की भारतीय सेना का एक दल |
| 4. सैंपर्स एंड माइनर्स टीम | अंग्रेजों के समय का एक हॉकी दल |
| 5. सूबेदार | स्वतंत्रता से पहले सूबेदार भारतीय सैन्य अधिकारियों का दूसरा सबसे बड़ा पद था |
| 6. छावनी | सैनिकों के रहने का क्षेत्र (Cantonment) |
6. पंक्तियों पर चर्चा
7. व्याकरण — शब्द-युग्म एवं बात पर बल
शब्द-युग्म (Shabdayugma) — परिभाषा
योजक = जोड़ने वाला (Hyphen)।
दो प्रकार होते हैं — (1) एक ही शब्द दो बार: जैसे-जैसे, वैसे-वैसे (2) भिन्न-भिन्न शब्द: धक्का-मुक्की, नोंक-झोंक
प्रकार 1 — एक ही शब्द दो बार (पाठ से)
प्रकार 2 — भिन्न-भिन्न शब्द (पाठ से)
योजक की सहायता से लिखिए (NCERT अभ्यास)
| दिए शब्द | योजक से |
|---|---|
| अच्छा या बुरा | अच्छा-बुरा |
| छोटा या बड़ा | छोटा-बड़ा |
| अमीर और गरीब | अमीर-गरीब |
| उत्तर और दक्षिण | उत्तर-दक्षिण |
| गुरु और शिष्य | गुरु-शिष्य |
| अमृत या विष | अमृत-विष |
बात पर बल देना — 'ही', 'भी', 'तो' शब्द
वाक्य 2: "मैंने तो अपना बदला ले लिया है।"
पहले वाक्य में 'ही' बल देता है — अर्थात् बदला जरूर लिया। दूसरे वाक्य में यह जोर नहीं है।
| बल-शब्द | पाठ से वाक्य | प्रभाव |
|---|---|---|
| ही | "मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है।" | निश्चितता का बोध — बदला जरूर हुआ |
| भी | "खेल में भी यह सब चलता था।" | समावेश — खेल में भी ऐसा होता था |
| तो | "खेल में तो यह सब चलता ही है।" | स्वाभाविकता — यह तो सामान्य बात है |
| ही | "सारे गोल मैं ही करता था।" | सीमा/जोर — केवल मैं ही नहीं |
8. झरोखे से — डाँडी या गोथा
यह भील-भिलाला बच्चों का एक पारंपरिक स्वदेशी खेल है जो हॉकी से काफी मिलता-जुलता है।
हॉकी और डाँडी की तुलना
9. पढ़ने के लिए — एक दौड़ ऐसी भी
| विषय | गोल (ध्यानचंद) | एक दौड़ ऐसी भी |
|---|---|---|
| मुख्य भाव | खेल भावना, लगन, साधना | सहयोग, मानवता, मित्रता |
| समान संदेश | जीत व्यक्तिगत नहीं — साथ मिलकर जीतना ही असली जीत है | |
| विधा | संस्मरण | प्रेरक कथा |
10. MCQ — परीक्षा उपयोगी प्रश्न
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11. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
'गोल' किस कक्षा और पाठ्यपुस्तक में है?
मेजर ध्यानचंद का जन्मदिन 'राष्ट्रीय खेल दिवस' क्यों है?
संस्मरण और कहानी में क्या अंतर है?
'शब्द-युग्म' के दो प्रकार कौन से हैं?
प्रकार 2: भिन्न-भिन्न दो शब्द — धक्का-मुक्की, नोंक-झोंक, हार-जीत


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