हार की जीत NCERT कक्षा 6 हिन्दी पाठ्यपुस्तक मल्हार का चौथा अध्याय है। यह हिन्दी के प्रसिद्ध लेखक सुदर्शन (बदरीनाथ भट्ट, 1896–1983) की एक प्रसिद्ध कहानी है। इस कहानी में विश्वास की शक्ति और मानवीय संवेदना का अद्भुत चित्रण है। बाबा भारती के एक निःस्वार्थ कार्य से डाकू खड्गसिंह का हृदय-परिवर्तन होता है। कहानी यह सिद्ध करती है कि अच्छाई और विश्वास की कभी हार नहीं होती — यही हार की जीत है।
📌 परीक्षा हेतु: इस पाठ से 'मेरी समझ से' MCQ, पंक्तियों पर चर्चा, मुहावरे, 'मन के भाव', दिनचर्या और विशेषण संबंधी प्रश्न पूछे जाते हैं।
1. लेखक परिचय — सुदर्शन
✍
सुदर्शन (बदरीनाथ भट्ट)
जन्म: 1896 · मृत्यु: 1983 · हिन्दी के प्रसिद्ध कहानीकार
सुदर्शन का वास्तविक नाम बदरीनाथ भट्ट था। वे हिन्दी के प्रसिद्ध कहानीकार, कवि, नाटककार और उपन्यासकार थे। उन्होंने अपनी पहली कहानी तब लिखी थी जब वे स्वयं छठी कक्षा में पढ़ते थे — यानी आप ही की उम्र में! उन्होंने कहानियों के अतिरिक्त कविताएँ, लेख, नाटक और उपन्यास भी लिखे। इसके अलावा उन्होंने अनेक फिल्मों की पटकथा और गीत भी लिखे। 'हार की जीत' हिन्दी की सर्वश्रेष्ठ कहानियों में गिनी जाती है।
✍ कहानीकार🌤 कवि🎬 फिल्म पटकथा लेखक🎜 6वीं कक्षा में पहली कहानी
💡 NCERT का विशेष उल्लेख: "सुदर्शन ने पहली कहानी तब लिखी थी जब ये आप ही की तरह छठी कक्षा में पढ़ते थे।" — यह प्रेरणादायक तथ्य NCERT ने लेखक-परिचय में विशेष रूप से उल्लेख किया है।
2. कहानी का सारांश
🏈 भाग 1 — बाबा भारती और सुलतान
बाबा भारती एक साधु थे जो गाँव के बाहर मंदिर में रहते थे। उन्होंने सांसारिक सब-कुछ त्याग दिया था — रुपया, माल, असबाब, जमीन और नगर का जीवन — सब छोड़ दिया था। परंतु एक चीज थी जिसके बिना वे नहीं रह सकते थे — उनका अद्भुत घोड़ा सुलतान। सुलतान बड़ा सुंदर और बलवान था। सारे इलाके में उसके जोड़ का घोड़ा न था। बाबा उसे अपने हाथ से खरहरा करते, दाना खिलाते और उसकी चाल देखकर प्रसन्न होते। कहते — "ऐसे चलता है जैसे मोर घटा को देखकर नाच रहा हो।"
🏈 भाग 2 — खड्गसिंह का आगमन और चालाकी
खड्गसिंह उस इलाके का प्रसिद्ध डाकू था — जिसका नाम सुनकर लोग काँपते थे। सुलतान की कीर्ति उसके कानों तक भी पहुँची। एक दिन वह बाबा भारती के पास आया। सुलतान को देखकर उसका मन ललच गया। उसने बाबा से कहा, "बाबाजी, मैं यह घोड़ा आपके पास न रहने दूँगा।"
कुछ महीने बाद, एक संध्या को खड्गसिंह ने अपाहिज का वेश बनाया और राह में लेटकर बाबा को रोका। बाबा ने दया में घोड़े से उतरकर उसे सवार किया। अवसर पाते ही खड्गसिंह तनकर बैठ गया और सुलतान को दौड़ाने लगा। बाबा की भय, विस्मय और निराशा से मिली चीख निकल गई।
🏈 भाग 3 — बाबा की अनोखी प्रार्थना
बाबा ने पूरे बल से पुकारा — "ज़रा ठहर जाओ।" खड्गसिंह रुका। बाबा ने कहा, "यह घोड़ा तुम्हारा हो चुका है, मैं वापस नहीं माँगूँगा। परंतु एक प्रार्थना है — इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करना। क्योंकि लोगों को पता चला तो वे किसी गरीब पर विश्वास न करेंगे। दुनिया से विश्वास उठ जाएगा।"
खड्गसिंह हैरान था। उसे घोड़े की चिंता नहीं — बाबा चिंतित थे कि लोग गरीबों पर भरोसा करना बंद कर देंगे!
🏈 भाग 4 — खड्गसिंह का हृदय-परिवर्तन
बाबा के शब्द खड्गसिंह के कानों में गूँजते रहे। सोचता रहा — "कैसे ऊँचे विचार हैं, कैसा पवित्र भाव है! उन्हें इतना प्रेम था, रात-रात भर जागे, पर आज उनके मुख पर दुख की रेखा तक नहीं।"
उसी रात के अँधेरे में खड्गसिंह सुलतान को वापस लेकर मंदिर पहुँचा। चुपचाप उसे अस्तबल में बाँध दिया। उसकी आँखों में पश्चाताप के आँसू थे।
सुबह बाबा भारती जब अस्तबल की ओर बढ़े — सुलतान की हिनहिनाहट सुनकर दौड़े और घोड़े के गले से लिपटकर रोने लगे। कहा — "अब कोई गरीबों की सहायता से मुँह न मोड़ेगा।"
जहाँ बाबा भारती के आँसू गिरे — उसी जगह खड्गसिंह भी खड़े होकर रोया था। दोनों के आँसुओं का उस भूमि की मिट्टी पर परस्पर मेल हो गया।
🏅 'हार की जीत' शीर्षक का अर्थ:
겉으로देखें तो बाबा भारती 'हारे' — सुलतान छिन गया। पर वास्तव में जीते — उनकी मानवीयता और विश्वास की शक्ति ने डाकू का हृदय बदल दिया। खड्गसिंह की बाहुबल से जीत असल में नैतिक हार थी। और बाबा की भौतिक हार असल में आत्मिक जीत थी। इसीलिए — हार की जीत।
3. घटनाक्रम (Plot Timeline)
1
सुलतान की कीर्ति
बाबा भारती का घोड़ा सुलतान पूरे इलाके में प्रसिद्ध। बाबा उससे अत्यधिक प्रेम करते थे।
2
खड्गसिंह का आगमन
डाकू खड्गसिंह सुलतान को देखने आया। घोड़े की चाल देखकर उसका मन ललचाया। चेतावनी दी — "यह घोड़ा आपके पास न रहने दूँगा।"
3
बाबा की रखवाली
बाबा डर गए। रात-रात भर अस्तबल की रखवाली। महीनों बाद कुछ असावधान हो गए।
4
अपाहिज की चाल
खड्गसिंह ने अपाहिज का वेश बनाया। बाबा ने दया में घोड़े से उतारकर उसे सवार किया। खड्गसिंह ने घोड़ा छीन लिया।
5
बाबा की अनोखी प्रार्थना
घोड़ा वापस नहीं माँगा। केवल विनती — "इसे प्रकट न करना, नहीं तो लोग गरीबों पर विश्वास करना बंद कर देंगे।"
6
खड्गसिंह का पश्चाताप
बाबा के शब्दों ने हृदय छू लिया। रात को चुपचाप सुलतान को वापस लाकर बाँध दिया। पश्चाताप के आँसू।
7
मिलन — दोनों के आँसुओं का मेल
बाबा भारती ने सुलतान को पाया। प्रसन्नता में रोए। उसी भूमि पर खड्गसिंह भी रोया था — दोनों के आँसुओं का परस्पर मेल।
विशेषता: सारे इलाके में जोड़ का घोड़ा नहीं। चाल देखकर मन मोह ले। स्वामी के कदमों की चाप पहचानता था।
5. कठिन शब्दार्थ
शब्द
अर्थ
खरहरा करना
घोड़े के शरीर को साफ करना — खुरचनी से मैल उतारना
असबाब
सामान, घरेलू वस्तुएँ, साज-सामान
घृणा
नफ़रत, विरक्ति, अरुचि
भ्रांति
भ्रम, गलतफहमी; यहाँ — दृढ़ विश्वास
लट्टू होना
किसी पर मुग्ध हो जाना, दीवाना हो जाना
कीर्ति
यश, प्रसिद्धि, नाम
अधीर
व्याकुल, बेचैन, जो धैर्य न रख सके
अस्तबल
घोड़ों को रखने का स्थान (Stable)
बाँका घोड़ा
बेमिसाल, टेढ़ा-तिरछा चलने वाला सुंदर घोड़ा
हलचल
खलबली, बेचैनी
बाहुबल
भुजाओं की शक्ति, शारीरिक बल
बेरहमी
निर्दयता, क्रूरता
प्रतिक्षण
हर पल, हर क्षण
असावधान
जो सावधान न रहे; लापरवाह
मिथ्या
झूठा, निराधार, असत्य
सहसा
अचानक, एकाएक
कंगला
बहुत गरीब, असहाय
अपाहिज
शारीरिक रूप से अशक्त व्यक्ति, विकलांग
दुखियारा
बहुत दुखी व्यक्ति, कष्टपीड़ित
तनकर बैठना
सीधे होकर दृढ़ता से बैठना
विस्मय
आश्चर्य, हैरानी
निराशा
हताशा, उम्मीद टूटना
प्रकट करना
बताना, प्रकाशित करना, ज़ाहिर करना
पश्चाताप
पछतावा, किए हुए बुरे काम पर दुख
सन्नाटा
पूरी तरह चुप्पी, शान्ति
हिनहिनाना
घोड़े का बोलना (sound a horse makes)
न्योछावर करना
समर्पित करना, कुर्बान करना
परस्पर मेल
आपस में मिलना, एकत्व
6. पाठ के प्रश्नोत्तर (NCERT)
(क) मेरी समझ से — सही उत्तर
प्र. 1 — सुलतान के छीने जाने का बाबा भारती पर क्या प्रभाव हुआ?
सही उत्तर: बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया।
स्पष्टीकरण: जब बाबा ने खड्गसिंह से केवल यह प्रार्थना की कि घटना को किसी से प्रकट न करना — तो इससे स्पष्ट है कि वे अब घोड़े या चोरी की चिंता नहीं करते। उनके मन से चोरी का भय जाता रहा। अन्य विकल्प — "गरीबों की सहायता बंद करना" या "द्वार बंद करना" — सही नहीं क्योंकि बाबा ने उलटे गरीबों की मदद जारी रखने की बात कही।
प्र. 2 — "बाबा भारती भी मनुष्य ही थे।" इस कथन के समर्थन में लेखक ने कौन-सा तर्क दिया है?
सही उत्तर: बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा दूसरों से सुनने के लिए व्याकुल थे।
स्पष्टीकरण: पाठ में है — "अपनी चीज़ की प्रशंसा दूसरे के मुख से सुनने के लिए उनका हृदय भी अधीर हो गया।" — यह मानवीय स्वभाव है। त्यागी-साधु होने के बावजूद बाबा में यह स्वाभाविक इच्छा थी। इसीलिए उन्होंने घोड़ा बाहर लाकर दिखाया। यही उनकी 'मनुष्यता' है।
(ख) शीर्षक
(क) सुदर्शन ने इस कहानी का नाम 'हार की जीत' क्यों रखा?
सुदर्शन ने यह नाम रखा क्योंकि यह कहानी दर्शाती है कि भौतिक हार के पीछे नैतिक जीत छिपी होती है।
बाबा भारती हारे — सुलतान छिन गया। लेकिन उनके उच्च विचारों ने डाकू का हृदय परिवर्तित कर दिया। घोड़ा वापस आया, गरीबों में विश्वास बचा रहा — यह जीत थी। इसलिए — हार की जीत।
(ख) यदि आप इस कहानी को अन्य नाम देते, तो क्या देते?
संभावित नाम और कारण:
1. "विश्वास की शक्ति" — क्योंकि बाबा का गरीबों पर विश्वास बनाए रखना ही कहानी का केंद्र है।
2. "सुलतान की वापसी" — क्योंकि कहानी सुलतान के इर्द-गिर्द घूमती है।
3. "एक साधु की जीत" — क्योंकि बाबा की आत्मिक श्रेष्ठता की विजय होती है।
4. "दयालुता का चमत्कार" — क्योंकि दया से डाकू का हृदय बदल गया।
(ग) बाबा भारती ने डाकू खड्गसिंह से कौन-सा वचन लिया?
बाबा ने वचन लिया कि — "इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करना।"
कारण: बाबा को डर था कि यदि लोगों को पता चला कि उन्होंने गरीब समझकर डाकू को सवार कराया तो लोग किसी भी गरीब पर विश्वास नहीं करेंगे। दुनिया से विश्वास उठ जाएगा।
7. पंक्तियों पर चर्चा
"भगवत-भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता।"
भाव: बाबा भारती के लिए भगवत-भजन सर्वोच्च था। उसके बाद जो भी समय शेष बचता — वह सब घोड़े की सेवा में जाता था। 'अर्पण' शब्द यह दर्शाता है कि वे सुलतान की सेवा को भी एक भक्ति-कार्य की तरह मानते थे। यह उनके सुलतान के प्रति गहरे प्रेम और समर्पण को दर्शाता है।
"बाबा ने घोड़ा दिखाया घमंड से, खड्गसिंह ने घोड़ा देखा आश्चर्य से।"
भाव: यह वाक्य दोनों पात्रों की मनःस्थिति एक साथ दर्शाता है। बाबा को अपने घोड़े पर गर्व था — इसलिए घमंड से दिखाया। खड्गसिंह ने इतना सुंदर घोड़ा पहले कभी नहीं देखा था — इसलिए आश्चर्य से देखा। यह वाक्य कहानी का महत्वपूर्ण मोड़ है — यहीं से घोड़े की चाह खड्गसिंह के मन में बैठती है।
"वह डाकू था और जो वस्तु उसे पसंद आ जाए उस पर वह अपना अधिकार समझता था।"
भाव: यह खड्गसिंह के चरित्र की परिभाषा है। डाकू का स्वभाव — जो पसंद आए, वह छीन लो। इच्छाशक्ति पर नैतिकता नहीं, केवल बाहुबल। यही वह सोच है जो उसे बाद में पश्चाताप तक ले जाती है।
"बाबा भारती ने निकट जाकर उसकी ओर ऐसी आँखों से देखा जैसे बकरा कसाई की ओर देखता है।"
भाव: यह उपमा बाबा की असहायता और निराशा को व्यक्त करती है। बकरा कसाई के सामने असहाय होता है — मृत्यु निश्चित जानता है, फिर भी विरोध न कर पाए। ठीक उसी तरह बाबा जानते थे कि घोड़ा गया — डाकू के पास जाने की सामर्थ्य नहीं। पर फिर भी उन्होंने घोड़ा नहीं माँगा — केवल विश्वास बनाए रखने की प्रार्थना की।
"दोनों के आँसुओं का उस भूमि की मिट्टी पर परस्पर मेल हो गया।"
(क) किस-किस के आँसुओं का मेल?
बाबा भारती के आँसू (हर्ष और कृतज्ञता के — सुलतान वापस आया) और खड्गसिंह के आँसू (पश्चाताप के — उसी जगह खड़े होकर रोया था)।
(ख) दोनों के आँसुओं में क्या अंतर?
बाबा के आँसू — खुशी और प्रसन्नता के (सुलतान मिला, गरीबों में विश्वास बचा)।
खड्गसिंह के आँसू — पश्चाताप के (अपनी गलती का अहसास, बाबा की महानता से हृदय-परिवर्तन)।
तात्पर्य: इस वाक्य में कहानी का मूल सन्देश है — अच्छाई और बुराई, विश्वास और विश्वासघात — दोनों के आँसू एक ही धरती पर मिले। मानवता के धरातल पर सब समान हैं।
8. मुहावरे — अर्थ एवं प्रयोग
📌 NCERT से: कहानी में आए मुहावरे — लट्टू होना, हृदय पर साँप लोटना, फूले न समाना, मुँह मोड़ लेना, मुख खिल जाना, न्योछावर कर देना।
लट्टू होना
अर्थ: किसी पर मुग्ध/दीवाना हो जाना
पाठ से: "वे उसकी चाल पर लट्टू थे।" नया वाक्य: मैं उस जादूगर के खेल पर लट्टू हो गया।
हृदय पर साँप लोटना
अर्थ: ईर्ष्या या जलन से बहुत दुख होना
पाठ से: "उसकी चाल देखकर खड्गसिंह के हृदय पर साँप लोट गया।" नया वाक्य: भाई की तरक्की देखकर उसके हृदय पर साँप लोट गया।
फूले न समाना
अर्थ: अत्यधिक प्रसन्न होना, खुशी से पागल होना
पाठ से: "मन में फूले न समाते थे।" नया वाक्य: परीक्षा में प्रथम आने पर वह फूले न समाई।
मुँह मोड़ लेना
अर्थ: किसी से संबंध तोड़ना, उपेक्षा करना
पाठ से: "सुलतान की ओर से इस तरह मुँह मोड़ लिया जैसे उनका उससे कभी कोई संबंध ही न रहा हो।" नया वाक्य: अपने काम में व्यस्त होकर उसने दोस्तों से मुँह मोड़ लिया।
मुख खिल जाना
अर्थ: खुशी से चेहरा प्रसन्न हो जाना
पाठ से: "इसे देखकर उनका मुख फूल की नाईं खिल जाता था।" नया वाक्य: माँ ने देखते ही उनका मुख खिल गया।
न्योछावर कर देना
अर्थ: किसी के लिए सब-कुछ समर्पित कर देना
संदर्भ: बाबा ने सब-कुछ त्यागा — जीवन भगवान को न्योछावर कर दिया। नया वाक्य: वीर जवान ने देश के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया।
9. व्याकरण — विशेषण (Adjectives)
📚 विशेषण की परिभाषा (NCERT)
"आपने जो शब्द लिखे हैं, वे किसी की विशेषता, गुण और प्रकृति के बारे में बताने के लिए उपयोग में लाए जाते हैं। ऐसे शब्दों को विशेषण कहते हैं।"
— NCERT मल्हार, पृ. 43
खड्गसिंह — सुलतान की चाल देखने के लिए; बाबा — प्रशंसा सुनने के लिए
डर
बाबा भारती — खड्गसिंह की चेतावनी के बाद; खड्गसिंह — बाबा की प्रतिक्रिया का
प्रसन्नता
बाबा भारती — सुलतान को देख-देखकर; सुलतान वापस पाने पर
करुणा
बाबा भारती — अपाहिज की आवाज सुनकर
निराशा
बाबा भारती — सुलतान छिनने के बाद; घोड़ा वापस मिलने की उम्मीद छोड़ते वक्त
10. झरोखे से — वह चली हवा (सुदर्शन)
वह चली हवा
वह चली हवा,वह चली हवा।ना तू देखेना मैं देखूँ
पर पत्तों ने तो देख लियावरना वे खुशी मनाते क्यों?वह चली हवा,वह चली हवा।
— सुदर्शन
इस कविता में क्या अच्छा लगा? (साझी समझ)
इस छोटी-सी कविता में सुदर्शन ने एक गहरी बात कही है — हवा को देखा नहीं जा सकता, पर उसका अनुभव होता है।
पत्तों का हिलना-डुलना बताता है कि हवा चली। यह कविता सिखाती है कि हर चीज की उपस्थिति प्रत्यक्ष दिखाई नहीं देती — कभी-कभी उसके प्रभाव से पहचानी जाती है।
'हार की जीत' कहानी से इसका संबंध — बाबा भारती की मानवता और उनके उच्च विचार भी हवा की तरह थे — दिखाई न दिए, पर खड्गसिंह के हृदय पर उनका प्रभाव हुआ — जैसे पत्ते हिले।
11. रचनात्मक गतिविधि — करके देखें
🎓 नोट: ये गतिविधियाँ NCERT के "पाठ से आगे", "दिनचर्या", "कहानी की रचना" और "सुलतान की कहानी" खंडों पर आधारित हैं।
🐎गतिविधि 1 — सुलतान की कहानी लिखेंNCERT पाठ से आगे
आधार (NCERT से): "मान लीजिए, यह कहानी सुलतान सुना रहा है। तब कहानी कैसे आगे बढ़ती?"
क्या करें:
कहानी को सुलतान के नजरिए से लिखें।
प्रारंभ करें — "मेरा नाम सुलतान है। मैं एक घोड़ा हूँ..."
6–10 वाक्य लिखें। अपनी भावनाएँ — जब छिना, जब वापस लाया।
💡 प्रारंभिक पंक्तियाँ (संकेत):
"मेरा नाम सुलतान है। मैं एक घोड़ा हूँ। मेरे मालिक बाबा भारती मुझसे बहुत प्रेम करते थे। उस दिन जब वह अपाहिज मुझ पर सवार हुआ और दौड़ाने लगा, मैं समझ गया यह छल है। पर बाबाजी को क्या हुआ होगा — सोचकर मेरा मन भारी हो गया..."
⏰गतिविधि 2 — बाबा भारती की दिनचर्या लिखेंNCERT दिनचर्या
क्या करें: कहानी के आधार पर बाबा भारती की पूरी दिनचर्या लिखें।
समय
गतिविधि (कहानी-आधारित)
चौथा पहर (ब्रह्ममुहूर्त)
ठंडे जल से स्नान
प्रातःकाल
भगवत-भजन
दिन में
सुलतान की सेवा — खरहरा, दाना
संध्या समय
सुलतान पर सवार होकर 8-10 मील का चक्कर
रात को
भजन / अस्तबल की रखवाली
अब अपनी दिनचर्या भी उसी प्रकार लिखें और तुलना करें।
🖼गतिविधि 3 — शब्द-चित्र पूरा करेंNCERT कैसे-कैसे पात्र
NCERT का सूर्य-चित्र पूरा करें: तीनों पात्रों के लिए 4-4 और विशेषण लिखें।
पात्र
NCERT दिया
आप 4 और लिखें
बाबा भारती
दयालु
_______, _______, _______, _______
खड्गसिंह
बाहुबली
_______, _______, _______, _______
सुलतान
सुंदर
_______, _______, _______, _______
💬गतिविधि 4 — संवाद-लेखनकहानी की रचना
क्या करें: रात को जब खड्गसिंह सुलतान को वापस करने आया — उस समय वह मन ही मन क्या सोच रहा था? उसका आत्म-संवाद (6–8 वाक्य) लिखें।
💡 संकेत: "आज मैं एक अजीब काम करने जा रहा हूँ। सारी जिंदगी छीनता रहा — आज पहली बार लौटा रहा हूँ। बाबाजी के शब्द कानों में गूँजते हैं — 'दुनिया से विश्वास उठ जाएगा।' मैं... मैं क्या हूँ? एक डाकू? पर आज मेरा हृदय..."
12. MCQ — परीक्षा उपयोगी प्रश्न
1. 'हार की जीत' कहानी के लेखक कौन हैं?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
अ
प्रेमचंद
ब
सुदर्शन (बदरीनाथ भट्ट)
स
यशपाल
द
फणीश्वरनाथ रेणु
सही उत्तर: (ब) सुदर्शन (1896–1983), वास्तविक नाम: बदरीनाथ भट्ट
2. बाबा भारती ने घोड़े का नाम क्या रखा था?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
अ
शाहजहाँ
ब
सुलतान
स
अकबर
द
रामदुलारे
सही उत्तर: (ब) सुलतान — "बाबा भारती उसे सुलतान कह कर पुकारते।"
3. खड्गसिंह ने घोड़ा छीनने के लिए क्या वेश बनाया?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
अ
साधु का
ब
फकीर का
स
अपाहिज का
द
बच्चे का
सही उत्तर: (स) अपाहिज — वृक्ष की छाया में पड़कर कराहने का नाटक किया।
4. बाबा भारती ने खड्गसिंह से घोड़े के बदले में क्या माँगा?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
अ
घोड़ा वापस करने की प्रार्थना
ब
मुआवजा माँगा
स
घटना किसी को न बताने का वचन
द
डाकू जीवन छोड़ने की शर्त
सही उत्तर: (स) ताकि लोग गरीबों पर विश्वास करना न छोड़ें।
5. "हृदय पर साँप लोट गया" — इस मुहावरे का अर्थ क्या है?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
अ
बहुत खुश होना
ब
ईर्ष्या से जलना / बहुत दुख होना
स
डर जाना
द
बेहोश हो जाना
सही उत्तर: (ब) ईर्ष्या से दुख होना — सुलतान की चाल देखकर खड्गसिंह को ऐसा लगा।
6. खड्गसिंह ने सुलतान वापस क्यों किया?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
अ
पुलिस के डर से
ब
घोड़ा बीमार पड़ गया
स
बाबा के उच्च विचारों से हृदय-परिवर्तन
द
बाबा ने घेर लिया
सही उत्तर: (स) बाबा के शब्द कि "दुनिया से विश्वास उठ जाएगा" — यही सुनकर उसका हृदय पिघल गया।
7. सुदर्शन ने अपनी पहली कहानी कब लिखी?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
अ
12वीं कक्षा में
ब
छठी कक्षा में
स
कॉलेज में
द
सेवानिवृत्ति के बाद
सही उत्तर: (ब) छठी कक्षा में — "आप ही की तरह छठी कक्षा में पढ़ते थे।" (NCERT)
8. 'हार की जीत' कहानी का मुख्य संदेश क्या है?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
अ
डाकुओं से सावधान रहो
ब
अपनी चीज़ों की रखवाली करो
स
विश्वास और मानवता की कभी हार नहीं होती
द
घोड़े पालना अच्छी बात नहीं
सही उत्तर: (स) बाबा भारती के उच्च विचारों ने डाकू का हृदय बदल दिया — यही हार की असली जीत है।
13. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
'हार की जीत' किस कक्षा और पुस्तक में है? +
NCERT कक्षा 6 हिन्दी पाठ्यपुस्तक मल्हार का अध्याय 4 है। Reprint 2026-27 में संकलित।
सुदर्शन का वास्तविक नाम क्या था? +
सुदर्शन का वास्तविक नाम बदरीनाथ भट्ट था। जन्म: 1896, मृत्यु: 1983। उन्होंने पहली कहानी छठी कक्षा में लिखी थी।
बाबा भारती ने घोड़ा वापस क्यों नहीं माँगा? +
बाबा को घोड़े की नहीं, लोगों के विश्वास की चिंता थी। उन्हें डर था कि यह घटना जानकर लोग गरीब पर भरोसा करना बंद कर देंगे। इसीलिए घोड़ा नहीं माँगा — केवल चुप रहने की प्रार्थना की।
"हार की जीत" शीर्षक का क्या अर्थ है? +
बाबा ने घोड़ा खोया — यह भौतिक हार थी। पर उनके उच्च विचारों से डाकू का हृदय-परिवर्तन हुआ, घोड़ा वापस आया, और गरीबों में विश्वास बचा — यह नैतिक जीत थी। हार के अंदर जीत छिपी थी।
खड्गसिंह का चरित्र-परिवर्तन कैसे हुआ? +
बाबा भारती ने घोड़ा वापस माँगने की बजाय — "दुनिया से विश्वास उठ जाएगा" कहा। यह सुनकर खड्गसिंह सोचता रहा। बाबा के निःस्वार्थ, उच्च विचारों ने उसे भीतर से तोड़ दिया। वह रात को चुपचाप सुलतान को वापस कर पश्चाताप के आँसू बहाया।
मुहावरा 'लट्टू होना' का अर्थ और वाक्य? +
अर्थ: किसी पर मुग्ध/दीवाना हो जाना। पाठ से: "वे उसकी चाल पर लट्टू थे।" (बाबा भारती सुलतान की चाल पर मुग्ध थे।) नया वाक्य: बच्चे उस जादूगर के खेल पर लट्टू हो गए।
'दोनों के आँसुओं का मेल' का क्या महत्व है? +
यह कहानी का सबसे भावुक और महत्वपूर्ण वाक्य है। बाबा के खुशी के आँसू और खड्गसिंह के पश्चाताप के आँसू — उसी भूमि पर एक साथ गिरे। यह प्रतीकात्मक है — मानवता सभी को एक करती है। अच्छाई और बुराई दोनों के बीच — एक मानवीय धरातल होता है।
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