रहीम के दोहे NCERT कक्षा 6 हिन्दी पाठ्यपुस्तक मल्हार का पाँचवाँ अध्याय है। इसमें भक्तिकाल के प्रसिद्ध कवि अब्दुर्रहीम खानखाना (रहीम) के 7 दोहे संकलित हैं। ये दोहे नीति, प्रेम, मित्रता, वाणी, परोपकार और जीवन-दर्शन पर आधारित हैं। रहीम की भाषा सरल, उनके विचार गहरे और उनके उदाहरण प्रकृति से लिए गए हैं — यही उनके दोहों की विशेषता है।
📌 परीक्षा हेतु: इस पाठ से 'मेरी समझ से' MCQ, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, शब्द-संपदा और 'शब्द एक अर्थ अनेक' से प्रश्न पूछे जाते हैं। सभी 7 दोहों का भावार्थ याद रखें।
दोहों का त्वरित सारांश
दोहा 1 — सई-तलवार
हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व है
दोहा 2 — तरुवर-सरवर
सज्जन दूसरों के लिए संपत्ति संचित करते हैं — परोपकार
दोहा 3 — धागा प्रेम
प्रेम का धागा नाजुक — एक बार टूटा तो गाँठ पड़ जाती है
दोहा 4 — पानी राखिये
पानी = मान/सम्मान — बिन सम्मान सब व्यर्थ
दोहा 5 — बिपदाहू भली
विपत्ति में सच्चे-झूठे मित्र की पहचान होती है
दोहा 6 — जिह्वा बावरी
वाणी संयमित रखें — जीभ बोलती है, माथा भुगतता है
दोहा 7 — संपति सगे
सुख में सब साथ देते हैं — दुख में सच्चे मित्र की परीक्षा
1. कवि परिचय — रहीम
✍
अब्दुर्रहीम खानखाना (रहीम)
जन्म: लगभग 16वीं शताब्दी · मृत्यु: 17वीं शताब्दी · भक्तिकाल
रहीम भक्तिकाल के एक प्रसिद्ध कवि थे। उनका जन्म लगभग 16वीं शताब्दी में हुआ और मृत्यु 17वीं शताब्दी में। उन्होंने नीति, भक्ति और प्रेम संबंधी रचनाएँ कीं। वे अवधी और ब्रजभाषा दोनों में कविताएँ लिखते थे। रहीम रामायण, महाभारत आदि प्रसिद्ध ग्रंथों के अच्छे जानकार थे। आज भी आम जन-जीवन में उनके दोहे बहुत लोकप्रिय हैं।
📜 भक्तिकाल कवि📚 नीति, भक्ति, प्रेम🗣 अवधी-ब्रजभाषा🌟 आज भी लोकप्रिय
💡 दोहा क्या होता है?
दोहा एक मात्रिक छंद है जिसमें दो पंक्तियाँ होती हैं। प्रत्येक पंक्ति में दो भाग होते हैं। पहले भाग (विषम चरण) में 13 मात्राएँ और दूसरे भाग (सम चरण) में 11 मात्राएँ होती हैं। दोहे में कम शब्दों में गहरी बात कही जाती है।
2. सातों दोहे — मूल पाठ एवं भावार्थ
दोहा 1
रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि।जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि।।
★ विषय: महत्व — छोटे का भी महत्व
📖 भावार्थ
रहीम कहते हैं — बड़ों को देखकर छोटों को महत्वहीन मत समझो। जहाँ सुई (सूई) का काम है वहाँ तलवार क्या करेगी? अर्थात् हर छोटी-बड़ी वस्तु और व्यक्ति का अपना महत्व होता है। सुई जोड़ने का काम करती है, तलवार काटने का। न कोई बड़ा, न कोई छोटा — सबकी अपनी उपयोगिता है। हाथी हो या चींटी, सभी का अपना स्थान है।
दोहा 2
तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान।कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान।।
🌿 विषय: परोपकार — परहित के लिए संचय
📖 भावार्थ
रहीम कहते हैं — पेड़ अपना फल खुद नहीं खाते और तालाब अपना जल स्वयं नहीं पीते। ठीक उसी तरह सज्जन पुरुष भी दूसरों के काम के लिए ही संपत्ति संचित करते हैं। यह दोहा प्रकृति के माध्यम से परोपकार का संदेश देता है। जो दूसरों के लिए जीता है — वही सच्चा सज्जन है।
दोहा 3
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय।टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।।
❤ विषय: प्रेम — रिश्तों की नाजुकता
📖 भावार्थ
रहीम कहते हैं — प्रेम के धागे को झटककर मत तोड़ो। क्योंकि यह धागा एक बार टूट जाए तो फिर जुड़ता नहीं — और अगर किसी तरह जुड़ भी जाए तो गाँठ पड़ जाती है। अर्थात् प्रेम और रिश्ते बहुत नाजुक होते हैं — एक बार टूटने पर फिर पहले जैसे नहीं होते। रिश्तों को सँजोकर रखना चाहिए।
📝 लोक-प्रचलित पाठांतर: इस दोहे में 'मिले' के स्थान पर 'जुड़े' और 'छिटकाय' के स्थान पर 'चटकाय' भी प्रचलित है — "रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय। टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय।।" — यह लोक-भाषा का स्वाभाविक परिवर्तन है।
दोहा 4
रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून।पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून।।
💧 विषय: सम्मान — पानी के तीन अर्थ
📖 भावार्थ
रहीम कहते हैं — पानी रखो — क्योंकि बिना पानी के सब सूना (व्यर्थ) है। पानी जाने पर तीन चीजें नहीं बचतीं — मोती, मनुष्य और आटा (चून)।
यहाँ 'पानी' के तीन अर्थ हैं:
मोती का पानी = चमक (बिना चमक के मोती व्यर्थ)
मनुष्य का पानी = मान/सम्मान (बिना सम्मान के मनुष्य व्यर्थ)
आटे का पानी = जल (बिना जल के आटा सूखा रहता है)
मुख्य संदेश: मनुष्य को अपना मान-सम्मान सदा बचाकर रखना चाहिए।
दोहा 5
रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय।हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय।।
⚠ विषय: विपत्ति — सच्चे मित्र की पहचान
📖 भावार्थ
रहीम कहते हैं — थोड़े दिन की विपत्ति भी भली होती है। क्योंकि विपत्ति में ही पता चलता है कि इस संसार में कौन मित्र है और कौन शत्रु। हित (भला चाहने वाले) और अनहित (बुरा चाहने वाले) — दोनों की पहचान विपत्ति में ही होती है। इसीलिए कहते हैं — 'दुख में सुमिरन सब करे' — दुख ही सच्चाई दिखाता है।
रहीम कहते हैं — जीभ (जिह्वा) बड़ी पागल (बावरी) है। यह स्वर्ग और पाताल — सब कह देती है (मुँहफट बातें करती है)। जीभ तो बोलकर मुँह के अंदर चली जाती है, पर सिर (कपाल/माथा) जूती खाता है। अर्थात् — जो बोलता है वह बच जाता है, पर उसकी बात का नुकसान दूसरों को उठाना पड़ता है। इसलिए सोच-समझकर बोलना चाहिए।
दोहा 7
कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत।बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत।।
👥 विषय: सच्ची मित्रता — विपत्ति की कसौटी
📖 भावार्थ
रहीम कहते हैं — संपत्ति (सुख) के समय में सगे-सम्बन्धी बहुत प्रकार से मित्रता दिखाते हैं। पर जो विपत्ति की कसौटी पर खरे उतरें, वही सच्चे मित्र हैं। जैसे सोने को आग में तपाकर परखते हैं — उसी प्रकार मित्रता की परीक्षा विपत्ति में होती है। सुख में सब साथ देते हैं, दुख में साथ देने वाला ही सच्चा मित्र है।
स्पष्टीकरण: जीभ बोल देती है और मुँह के अंदर चली जाती है — पर नतीजा सिर को भुगतना पड़ता है। इसीलिए बोलने से पहले सोचना जरूरी है। "मधुर वाणी" या "सदा सच" — ये अन्य गुण हैं पर इस दोहे का मुख्य भाव "सोच-समझकर बोलना" है।
प्र. 2 — "रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि।।" इस दोहे का भाव क्या है?
सही उत्तर: हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व होता है।
स्पष्टीकरण: दोहे में कहा गया है कि सुई वहाँ काम आती है जहाँ तलवार नहीं आ सकती। इसलिए किसी को भी छोटा समझकर नकारना ठीक नहीं। सभी की अपनी उपयोगिता है। "तलवार सुई से बड़ी" — यह गलत निष्कर्ष है।
(ख) पंक्तियों पर चर्चा
(क) "रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय। हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय।।" — अर्थ लिखिए।
भावार्थ: रहीम कहते हैं — थोड़े दिनों की विपत्ति (मुसीबत) भी भली होती है। क्योंकि इस विपत्ति में ही पता चल जाता है कि इस संसार में कौन हमारा हित (भला) चाहता है और कौन अहित (बुरा) चाहता है। दुख ही सच्चाई का दर्पण है।
(ख) "रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल। आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल।।" — अर्थ लिखिए।
भावार्थ: जीभ बड़ी पागल है — वह स्वर्ग-पाताल (सब कुछ) कह देती है। वह तो बोलकर मुँह के अंदर चली जाती है — लेकिन उसकी मनमानी बातों की सज़ा माथे को जूता खाकर भुगतनी पड़ती है। अर्थात् वाणी पर नियंत्रण रखें।
(ग) सोच-विचार के लिए
(क) "रहिमन धागा प्रेम का..." — इस दोहे में 'मिले' के स्थान पर 'जुड़े' और 'छिटकाय' के स्थान पर 'चटकाय' क्यों प्रचलित है?
यह लोक-भाषा और क्षेत्रीय बोली का प्रभाव है। अलग-अलग क्षेत्रों में एक ही भाव को अलग-अलग शब्दों में कहा जाता है। जैसे 'छिटकाय' और 'चटकाय' — दोनों का अर्थ झटके से तोड़ना है, पर उच्चारण में भिन्नता है। इसी प्रकार 'मिले' और 'जुड़े' — दोनों का अर्थ मिलना है। दोहा जब पीढ़ी-दर-पीढ़ी मुँह से मुँह चलता है तो शब्द बदलते रहते हैं — यही लोक-काव्य की विशेषता है।
(ख) इस दोहे में प्रेम के उदाहरण में धागे का प्रयोग ही क्यों किया गया? क्या आप कोई अन्य उदाहरण सुझा सकते हैं?
धागे का प्रयोग क्यों: धागा बहुत नाजुक होता है — एक झटके में टूट जाता है और फिर जुड़ता नहीं। अगर जुड़ भी जाए तो गाँठ पड़ जाती है। ठीक ऐसा ही प्रेम-रिश्ते के साथ होता है। इसलिए धागा सटीक उपमा है।
अन्य उदाहरण सुझाव:
1. काँच — काँच टूटने पर फिर नहीं जुड़ता।
2. मिट्टी का घड़ा — एक बार टूटा तो फिर नहीं बनता।
3. दर्पण — टूटे शीशे में छवि नहीं दिखती।
"तरुवर फल नहिं खात हैं..." — इस दोहे में प्रकृति के माध्यम से कौन-सा मानवीय गुण बताया गया है?
इस दोहे में परोपकार (Selflessness) का गुण बताया गया है। पेड़ अपना फल नहीं खाता, तालाब अपना जल नहीं पीता — ये दोनों दूसरों के लिए ही हैं। ठीक इसी प्रकार सज्जन व्यक्ति भी दूसरों के काम के लिए ही धन संचित करते हैं।
प्रकृति से और क्या सीख सकते हैं:
— सूर्य सबको समान रूप से प्रकाश देता है → समानता का भाव
— नदी बहती रहती है, रुकती नहीं → निरंतर कर्म
— बादल पानी लेकर वापस बरसाते हैं → देकर वापस करना
5. मिलकर करें मिलान — उत्तर
स्तंभ 1 — दोहा
1. रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।।
2. कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत। बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत।।
3. तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान। कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान।।
स्तंभ 2 — सही भाव (उत्तर)
1 → 3: प्रेम या रिश्तों को सहेजकर रखना चाहिए।
2 → 2: सच्चे मित्र विपत्ति या विपदा में भी साथ रहते हैं।
3 → 1: सज्जन परहित के लिए ही संपत्ति संचित करते हैं।
'पानी' के तीन अर्थ (NCERT से):
दोहा 4 में 'पानी' शब्द के तीन अर्थ हैं —
मोती का पानी = चमक |
मनुष्य का पानी = मान/सम्मान |
आटे (चून) का पानी = जल
NCERT अभ्यास — इन शब्दों के तीन-तीन अर्थ
कल
1.बीता हुआ दिन (yesterday)
2.आने वाला दिन (tomorrow)
3.मशीन का पुर्जा (Machine part)
पत्र
1.चिट्ठी, खत (Letter)
2.पत्ता, पर्ण (Leaf)
3.अखबार, समाचार पत्र
कर
1.हाथ (Hand)
2.टैक्स, लगान (Tax)
3.करना क्रिया का रूप (Do)
फल
1.खाने योग्य फल (Fruit)
2.परिणाम, नतीजा (Result)
3.लाभ, फायदा (Benefit)
शब्द-संपदा — मातृभाषा में समानार्थक
कविता में आए शब्द
आधुनिक हिन्दी अर्थ
संस्कृत मूल
तरुवर
वृक्ष, पेड़
तरु + वर (श्रेष्ठ वृक्ष)
बिपति
विपत्ति, मुसीबत
विपत्ति
छिटकाय
झटककर, झटके से
क्षिप्त
सुजान
सज्जन, चतुर, भला
सुजान = सु + जान
सरवर
सरोवर, तालाब
सरस् + वर
साँचे
सच्चे, खरे, असली
सत्य + च
कपाल
माथा, ललाट, खोपड़ी
कपाल
7. रचनात्मक गतिविधि — करके देखें
🎵गतिविधि 1 — दोहे गाएँ और रिकॉर्ड करें (सरगम)NCERT सरगम
NCERT से: "अब बारी है इन दोहों की रिकॉर्डिंग (ऑडियो या विजुअल) की।"
अपने पसंदीदा 2-3 रहीम दोहे चुनें।
उन्हें एक सुर में गाएँ — मोबाइल से रिकॉर्ड करें।
दोस्तों के साथ मिलकर अंत्याक्षरी खेलें — दोहों से।
✍गतिविधि 2 — अपने शब्दों में दोहे का भावNCERT आपकी बात
उदाहरण (NCERT से): "रहिमन देखि बड़ेन को..." दोहे का भाव — न कोई बड़ा है और न ही कोई छोटा। सुई जोड़ने का काम करती है जबकि तलवार काटने का।
आप करें: अपना पसंदीदा दोहा चुनें और उसका भाव 3-4 वाक्यों में अपने शब्दों में लिखें।
मेरा चुना दोहा
मेरे शब्दों में भाव
________________________
________________________
📜गतिविधि 3 — अपना दोहा बनाएँउन्नत रचना
दोहे की संरचना याद रखें:
पहला चरण — 13 मात्राएँ | दूसरा चरण — 11 मात्राएँ
विषय सुझाव:
मित्रताप्रकृतिपरिश्रममाँ
💡 Sample दोहा (परिश्रम पर): "मेहनत से जो न डरे, वो पाए सब मान।
बिन परिश्रम जग में कहीं, मिले न खान-पान।।"
8. आज की पहेली — उत्तर
पहेली
उत्तर
स्पष्टीकरण
"दो अक्षर का मेरा नाम, आता हूँ खाने के काम। उल्टा होकर नाच दिखाऊँ, मैं क्यों अपना नाम बताऊँ।"
🍵 खाना / दाल
उत्तर: दाल — दो अक्षर = दा + ल। खाने के काम आती है। उल्टा करें — 'लाद' (नाच = खुशी)।
"एक किले के दो ही द्वार, उनमें सैनिक लकड़ीदार। टकराएँ जब दीवारों से, जल उठे सारा संसार।"
🔥 माचिस
उत्तर: माचिस — एक किला = माचिस की डिब्बी, दो द्वार = दोनों तरफ के खाने, लकड़ीदार सैनिक = तीलियाँ, टकराने से जलती हैं।
9. MCQ — परीक्षा उपयोगी प्रश्न
1. 'रहीम के दोहे' के कवि का वास्तविक नाम क्या था?
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अ
बदरीनाथ भट्ट
ब
अब्दुर्रहीम खानखाना
स
कबीरदास
द
तुलसीदास
सही उत्तर: (ब) अब्दुर्रहीम खानखाना — भक्तिकाल के कवि
2. "रहिमन पानी राखिये..." दोहे में 'मनुष्य का पानी' से क्या अभिप्राय है?
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अ
पानी पीना
ब
मान / सम्मान
स
चमक
द
जल पीने की क्षमता
सही उत्तर: (ब) मनुष्य का पानी = मान/सम्मान — बिना सम्मान के मनुष्य व्यर्थ है
3. "तरुवर फल नहिं खात हैं..." दोहे में किस मानवीय गुण की बात है?
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अ
साहस
ब
परोपकार (दूसरों के लिए जीना)
स
ईमानदारी
द
बचत
सही उत्तर: (ब) परोपकार — पेड़ और तालाब दूसरों के लिए हैं, सज्जन भी ऐसे ही होते हैं
4. "रहिमन धागा प्रेम का..." दोहे में 'गाँठ' किसका प्रतीक है?
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अ
मजबूती का
ब
टूटे रिश्ते में आई दूरी / कड़वाहट का
स
सुंदरता का
द
मोटाई का
सही उत्तर: (ब) रिश्ता जुड़ भी जाए तो पहले जैसा नहीं रहता — गाँठ = अविश्वास/कड़वाहट
5. "जिह्वा बावरी" में 'बावरी' शब्द का अर्थ है—
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अ
मीठी
ब
पागल, बेलगाम
स
चुप
द
सुंदर
सही उत्तर: (ब) बावरी = पागल — जिह्वा बिना सोचे बोल देती है
6. "बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत।।" — इसका अर्थ है—
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अ
विपत्ति में कसरत करनी चाहिए
ब
जो विपत्ति में साथ दे, वही सच्चा मित्र है
स
मित्र को कसौटी पर रखना चाहिए
द
सोना कसौटी पर कसते हैं
सही उत्तर: (ब) विपत्ति = कसौटी; जो इस पर खरा उतरे = सच्चा मित्र
7. रहीम ने किन दो भाषाओं में कविताएँ लिखीं?
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अ
संस्कृत और फारसी
ब
अवधी और ब्रजभाषा
स
हिन्दी और उर्दू
द
मैथिली और मराठी
सही उत्तर: (ब) अवधी और ब्रजभाषा — NCERT लेखक-परिचय से
8. 'सुजान' शब्द का अर्थ है—
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अ
मूर्ख व्यक्ति
ब
सज्जन, चतुर, भला व्यक्ति
स
धनवान
द
बलवान
सही उत्तर: (ब) सुजान = सज्जन, चतुर, परोपकारी व्यक्ति
10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
'रहीम के दोहे' किस कक्षा और पुस्तक में हैं? +
NCERT कक्षा 6 हिन्दी पाठ्यपुस्तक मल्हार का अध्याय 5 है। Reprint 2026-27 में संकलित। 7 दोहे हैं।
रहीम कौन थे? +
रहीम का पूरा नाम अब्दुर्रहीम खानखाना था। भक्तिकाल के प्रसिद्ध कवि — जन्म 16वीं, मृत्यु 17वीं शताब्दी। अवधी-ब्रजभाषा में नीति, भक्ति, प्रेम पर दोहे लिखे।
'पानी राखिये' दोहे में 'पानी' के तीन अर्थ कौन से हैं? +
1. मोती का पानी = चमक | 2. मनुष्य का पानी = मान/सम्मान | 3. आटे का पानी = जल। तीनों के बिना मोती, मनुष्य और आटा व्यर्थ हो जाते हैं।
दोहा छंद क्या होता है? +
दोहा एक मात्रिक छंद है — दो पंक्तियाँ। पहला चरण (विषम) = 13 मात्राएँ, दूसरा चरण (सम) = 11 मात्राएँ। कम शब्दों में गहरी बात — यही दोहे की विशेषता है।
"धागा प्रेम का" दोहे में धागा क्यों? +
धागा बहुत नाजुक होता है — एक झटके में टूट जाता है। टूटने पर जुड़ता नहीं — और अगर जुड़े तो गाँठ पड़ जाती है। ठीक इसी तरह प्रेम-रिश्ते नाजुक होते हैं। इसीलिए धागा सटीक उपमा है।
रहीम ने कितने दोहे लिखे? +
रहीम ने बहुत सारे दोहे लिखे हैं जो रहीम ग्रंथावली (संपादक: विद्यानिवास मिश्र) में संकलित हैं। NCERT मल्हार में उनके 7 दोहे चुनकर दिए गए हैं।
'कल' शब्द के तीन अर्थ क्या हैं? +
1. कल = बीता हुआ दिन (Yesterday) | 2. कल = आने वाला दिन (Tomorrow) | 3. कल = मशीन का पुर्जा (Machine part)
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