"श्री रामप्रसाद 'बिस्मिल' बड़े होनहार नौजवान थे। ग़जब के शायर थे। देखने में भी बहुत सुंदर थे। योग्य बहुत थे। जानने वाले कहते हैं कि यदि किसी और जगह या किसी और देश या किसी और समय पैदा हुए होते तो सेनाध्यक्ष बनते।"
— भगत सिंह (रामप्रसाद बिस्मिल के बारे में)
मेरी माँ NCERT कक्षा 6 हिन्दी पाठ्यपुस्तक मल्हार का छठा अध्याय है। यह रामप्रसाद 'बिस्मिल' (1897–1927) की प्रसिद्ध आत्मकथा 'निज जीवन की एक छटा' का एक अंश है। बिस्मिल ने यह आत्मकथा जेल में चोरी-छिपे लिखी थी। इस पाठ में उन्होंने अपनी माँ के अद्वितीय योगदान, त्याग और प्रेम का वर्णन किया है। साथ ही माँ को लिखा उनका अंतिम पत्र भी है — जो फाँसी से पहले लिखा गया था।
📌 परीक्षा हेतु: इस पाठ से 'मेरी समझ से' MCQ, पंक्तियों पर चर्चा, मिलकर करें मिलान, सोच-विचार और आत्मकथा विधा संबंधी प्रश्न पूछे जाते हैं।
1. लेखक परिचय — रामप्रसाद 'बिस्मिल'
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रामप्रसाद 'बिस्मिल'
जन्म: 11 जून, 1897 (शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश) · फाँसी: 19 दिसम्बर, 1927 (गोरखपुर जेल)
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अनेक क्रांतिकारी वीरों ने अपना बलिदान दिया। 'सरफरोशी की तमन्ना' जैसा तराना लिखने वाले रामप्रसाद 'बिस्मिल' उन्हीं क्रांतिकारियों में से एक थे। मात्र तीस वर्ष की आयु में अंग्रेज़ सरकार द्वारा उन्हें फाँसी पर लटका दिया गया। असाधारण प्रतिभा के धनी बिस्मिल एक अच्छे कवि और लेखक भी थे। उन्होंने जेल में चोरी-छिपे अपनी आत्मकथा 'निज जीवन की एक छटा' लिखी।
💡 NCERT विशेष तथ्य: बिस्मिल की आत्मकथा ने अंग्रेज़ों के होश उड़ा दिए। लोगों में अंग्रेज़ों के विरुद्ध क्रोध और बढ़ गया। इस आत्मकथा के कारण अंग्रेज़ — बिस्मिल को फाँसी देने के बाद भी उन्हें हरा न सके।
2. पाठ का सारांश
🎖 भाग 1 — माँ की प्रेरणा और साहस
बिस्मिल लखनऊ कांग्रेस में जाना चाहते थे। दादीजी और पिताजी का विरोध था — पर माताजी ने खर्च दे दिया। सेवा-समिति में भी बिस्मिल के काम से पिताजी नाखुश थे, पर माताजी उनका उत्साह भंग नहीं होने देती थीं — इसके लिए उन्हें स्वयं पिताजी की डाँट-फटकार सहनी पड़ती थी। बिस्मिल लिखते हैं — "वास्तव में, मेरी माताजी देवी हैं। मुझमें जो कुछ जीवन तथा साहस आया, वह मेरी माताजी की कृपाओं का ही परिणाम है।"
🎖 भाग 2 — माताजी की शिक्षा और उदारता
माताजी ग्यारह वर्ष की उम्र में ब्याह कर शाहजहाँपुर आई थीं — नितांत अशिक्षित। दादीजी ने गृहकार्य सिखाया। बिस्मिल के जन्म के पाँच-सात वर्ष बाद उन्होंने स्वयं हिन्दी पढ़ना आरंभ किया। सखी-सहेलियों से अक्षर-बोध किया। घर का काम कर चुकने के बाद जो समय मिलता, उसमें पढ़ना-लिखना करतीं। परिश्रम के बल पर देवनागरी पुस्तकों का अध्ययन करने लगीं। बिस्मिल की बहनों को छोटी आयु में माताजी ही शिक्षा देती थीं।
दादीजी और पिताजी के बार-बार विवाह के अनुरोध पर माताजी कहतीं — "शिक्षा पा चुकने के बाद ही विवाह करना उचित होगा।"
🎖 भाग 3 — सत्याचरण और माताजी का आदर्श
एक बार वकील ने बिस्मिल से पिताजी के हस्ताक्षर वकालतनामे पर करने को कहा। बिस्मिल ने तुरंत इनकार किया — "यह तो धर्मविरुद्ध होगा।" वकील के समझाने पर भी नहीं माने। माताजी के प्रोत्साहन ने उनमें यह दृढ़ता पैदा की थी।
माताजी का सबसे बड़ा आदर्श था — "किसी की प्राणहानि न हो। अपने शत्रु को भी कभी प्राणदंड न देना।" इस आदर्श की पूर्ति के लिए बिस्मिल को कभी-कभी मजबूरन अपनी प्रतिज्ञा भंग करनी पड़ी।
बिस्मिल कहते हैं — "यदि मुझे ऐसी माता न मिलतीं तो मैं भी अति साधारण मनुष्यों की भाँति संसार-चक्र में फँसकर जीवन निर्वाह करता।"
3. अंतिम पत्र — माँ को विदाई
जन्मदात्री जननी! इस जीवन में तो तुम्हारा ऋण उतारने का प्रयत्न करने का भी अवसर न मिला। इस जन्म में तो क्या यदि मैं अनेक जन्मों में भी सारे जीवन प्रयत्न करूँ तो भी तुमसे उऋण नहीं हो सकता।
केवल एक इच्छा है, वह यह कि एक बार श्रद्धापूर्वक तुम्हारे चरणों की सेवा करके अपने जीवन को सफल बना लेता। किंतु यह इच्छा पूर्ण होती नहीं दिखाई देती और तुम्हें मेरी मृत्यु की दुखभरी खबर सुनाई जाएगी।
माँ! मुझे विश्वास है कि तुम यह समझ कर धैर्य धारण करोगी कि तुम्हारा पुत्र भारत माता की सेवा में अपने जीवन को बलि-देवी की भेंट कर गया और उसने तुम्हारी कोख कलंकित न की।
जन्मदात्री! वर दो कि अंतिम समय भी मेरा हृदय किसी प्रकार विचलित न हो और तुम्हारे चरण कमलों को प्रणाम कर मैं परमात्मा का स्मरण करता हुआ शरीर त्याग करूँ।
— रामप्रसाद 'बिस्मिल' (फाँसी से पूर्व)
🔥 ऐतिहासिक महत्व: यह पत्र बिस्मिल ने फाँसी से पहले जेल में लिखा था। इसमें उनकी माँ के प्रति अपार कृतज्ञता है, साथ ही देश के लिए बलिदान की अटूट भावना। गुरु गोबिंद सिंह जी की धर्मपत्नी का उदाहरण देकर वे माँ से धैर्य रखने की प्रार्थना करते हैं।
4. कठिन शब्दार्थ
शब्द
अर्थ
आधिपत्य
अधिकार, कब्जा, शासन (Rule/Dominion)
उत्साह भंग
उत्साह/उमंग तोड़ना, हतोत्साहित करना
डाँट-फटकार
कड़ी डाँट, नाराजगी
दंड सहन
सज़ा झेलना
कृपा
दया, स्नेह, आशीर्वाद
अनुरोध
प्रार्थना, विनती
प्रोत्साहन
हिम्मत बढ़ाना, उत्साहित करना (Encouragement)
दृढ़ता
मजबूती, अटलपन, दृढ़ संकल्प
संकल्प
दृढ़ निश्चय, प्रतिज्ञा
दीवानी मुकदमा
संपत्ति संबंधी अदालती मामला (Civil Case)
वकालतनामा
वकील को मुकदमे की अनुमति देने वाला कागज
धर्मविरुद्ध
नैतिकता के विरुद्ध, अधर्म
कदापि
कभी नहीं, किसी भी हालत में नहीं
मुकदमा खारिज
अदालत में मामला बंद हो जाना
नितांत अशिक्षित
बिल्कुल भी पढ़ी-लिखी नहीं
ग्रामीण कन्या
गाँव की लड़की
अक्षर-बोध
अक्षरों का ज्ञान, अक्षर पहचानना सीखना
आर्यसमाज
महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित सुधारवादी संस्था
वार्तालाप
बातचीत, संवाद (Conversation)
उदार
खुले विचारों वाला, दयालु
मेजिनी
इटली के गुप्त राष्ट्रवादी दल का सेनापति — जिसने इटली को एकजुट किया
प्राणहानि
किसी की जान लेना
प्राणदंड
मृत्युदंड, फाँसी की सज़ा (Death Penalty)
प्रतिज्ञा भंग
अपना वचन या कसम तोड़ना
जन्मदात्री जननी
जन्म देने वाली माँ
उऋण
ऋण (कर्ज) से मुक्त — माँ का ऋण कभी नहीं चुक सकता
अवर्णनीय
जिसे शब्दों में न कहा जा सके (Indescribable)
देववाणी
दिव्य/पवित्र वाणी, माँ का उपदेश
सांत्वना
दुख में ढाढस देना, तसल्ली देना (Consolation)
धैर्य
धीरज, सब्र, संयम
कोख कलंकित
माँ की कोख को बदनाम करना — बिस्मिल कहते हैं वे ऐसा नहीं करेंगे
बलि-देवी
बलिदान की देवी को भेंट; यहाँ — देश के लिए स्वयं को न्योछावर करना
स्वाधीन
स्वतंत्र (Independent)
होनहार
प्रतिभावान, जो भविष्य में महान बने
सेनाध्यक्ष
सेना का प्रमुख, Commander-in-Chief
5. पाठ के प्रश्नोत्तर (NCERT)
(क) मेरी समझ से — सही उत्तर
प्र. 1 — 'किंतु यह इच्छा पूर्ण होती नहीं दिखाई देती।' बिस्मिल को अपनी किस इच्छा के पूर्ण न होने की आशंका थी?
सही उत्तर: अपनी माँ की जीवनपर्यंत सेवा करने की।
स्पष्टीकरण: पाठ में बिस्मिल ने लिखा है — "केवल एक इच्छा है, वह यह कि एक बार श्रद्धापूर्वक तुम्हारे चरणों की सेवा करके अपने जीवन को सफल बना लेता।" उन्हें पता था कि फाँसी होने वाली है — इसलिए यह इच्छा पूरी नहीं होगी। "भारत माता के साथ रहना" या "भोग-विलास" — ये गलत उत्तर हैं।
प्र. 2 — रामप्रसाद बिस्मिल की माँ का सबसे बड़ा आदर्श क्या था?
सही उत्तर: कभी किसी के प्राण न लेना।
स्पष्टीकरण: पाठ में स्पष्ट लिखा है — "माताजी का सबसे बड़ा आदर्श मेरे लिए यही था कि किसी की प्राणहानि न हो। उनका कहना था कि अपने शत्रु को भी कभी प्राणदंड न देना।" यह एक क्रांतिकारी के लिए अत्यंत कठिन आदर्श था।
(ख) सोच-विचार के लिए
1. बिस्मिल की माताजी जब ब्याह कर आईं तो उनकी आयु काफी कम थी। (क) उन्होंने स्वयं को परिवार के अनुकूल कैसे ढाला?
ग्यारह वर्ष की उम्र में शाहजहाँपुर आने के बाद दादीजी ने उन्हें गृहकार्य की शिक्षा दी। थोड़े दिनों में ही माताजी ने घर के सब काम-काज को समझ लिया और भोजनादि का ठीक-ठीक प्रबंध करने लगीं। वे बहुत जल्दी अपने परिवेश के अनुकूल हो गईं।
1. (ख) उन्होंने अपनी इच्छाशक्ति के बल पर स्वयं को कैसे शिक्षित किया?
माताजी ने मुहल्ले की शिक्षित सखी-सहेलियों से अक्षर-बोध किया। घर का काम निपटाकर जो समय बचता, उसमें पढ़ना-लिखना करतीं। किसी विद्यालय में न जाकर स्व-अध्ययन से ही थोड़े दिनों में देवनागरी पुस्तकों का अध्ययन करने लगीं। यह उनकी अदम्य इच्छाशक्ति का प्रमाण था।
2. बिस्मिल को साहसी बनाने में उनकी माताजी ने कैसे सहयोग दिया?
माताजी ने निम्नलिखित प्रकार से सहयोग दिया:
1. उत्साह बनाए रखा: पिताजी की डाँट के बावजूद बिस्मिल का उत्साह भंग नहीं होने दिया। 2. स्वतंत्रता दी: कांग्रेस जाने के लिए खर्च दिया — पिताजी के विरोध के बावजूद। 3. दृढ़ता सिखाई: उनके प्रोत्साहन और सद्व्यवहार ने बिस्मिल में वह दृढ़ता पैदा की कि किसी संकट में भी उन्होंने संकल्प नहीं त्यागा। 4. सत्य का संस्कार: नैतिकता और सच्चाई की शिक्षा दी।
3. कई दशक पहले बिस्मिल की माँ शिक्षा के महत्व को कैसे समझती थीं?
वह समय था जब लड़कियों की शिक्षा सामान्य नहीं थी। फिर भी माताजी ने:
1. स्वयं पढ़ना सीखा — बिस्मिल के जन्म के 5-7 साल बाद, बिना किसी विद्यालय के।
2. बेटियों को पढ़ाया — "मेरी बहनों को छोटी आयु में माताजी ही शिक्षा दिया करती थीं।"
3. विवाह रोका: दादीजी-पिताजी के विवाह के अनुरोध पर कहती — "शिक्षा पा चुकने के बाद ही विवाह करना उचित होगा।"
यह सब उनकी शिक्षा के प्रति गहरी समझ का प्रमाण है।
4. हम कैसे कह सकते हैं कि बिस्मिल की माँ स्वतंत्र और उदार विचारों वाली थीं?
निम्नलिखित तथ्यों से यह स्पष्ट होता है:
1. पिताजी-दादीजी के विरोध में भी बिस्मिल को कांग्रेस जाने दिया। 2. सेवा-समिति में बिस्मिल के काम का समर्थन किया। 3. विवाह की उम्र में शिक्षा को प्राथमिकता दी। 4. बिस्मिल के आर्यसमाज में प्रवेश के बाद उनके विचार और उदार हो गए। 5. क्रांतिकारी जीवन में भी उन्होंने मेजिनी की माँ की तरह साथ दिया।
6. पंक्तियों पर चर्चा
(क) "यदि मुझे ऐसी माता न मिलतीं, तो मैं भी अति साधारण मनुष्यों की भाँति संसार-चक्र में फँसकर जीवन निर्वाह करता।"
भाव: बिस्मिल कहते हैं कि उनकी असाधारणता का कारण उनकी माँ हैं। यदि ऐसी प्रेरणादायी, साहसी और उदार माँ न मिलती — तो वे भी एक सामान्य जीवन जीते, गृहस्थी में लगे रहते। माँ ने उनमें देशभक्ति, साहस और दृढ़ता का संस्कार दिया। यह वाक्य माँ के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता है।
(ख) "उनके इस आदर्श की पूर्ति करने के लिए मुझे मज़बूरन दो-एक बार अपनी प्रतिज्ञा भंग भी करनी पड़ी थी।"
भाव: माताजी का आदर्श था — "किसी की प्राणहानि न हो।" बिस्मिल एक क्रांतिकारी थे — उन्होंने शत्रुओं से न लड़ने की प्रतिज्ञा भी की होगी। परंतु माँ के आदर्श (प्राणहानि न हो) की रक्षा करने के लिए उन्हें अपनी क्रांतिकारी प्रतिज्ञाएँ तोड़नी पड़ीं। यह दर्शाता है कि माँ का प्रभाव उनके क्रांतिकारी जीवन से भी गहरा था।
7. मिलकर करें मिलान — उत्तर
शब्द (स्तंभ 1)
1. देवनागरी
2. आर्यसमाज
3. मेजिनी
4. गोबिंद सिंह
सही अर्थ/संदर्भ (स्तंभ 2)
1 → 4: भारत की एक भाषा-लिपि जिसमें हिन्दी, संस्कृत, मराठी आदि लिखी जाती हैं।
2 → 3: महर्षि दयानंद द्वारा स्थापित एक संस्था।
3 → 2: इटली के गुप्त राष्ट्रवादी दल का सेनापति; इटली का मसीहा जिसने लोगों को एक सूत्र में बाँधा।
4 → 1: सिखों के दसवें और अंतिम गुरु थे। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की।
सही मिलान: देवनागरी → 4 (भाषा-लिपि) | आर्यसमाज → 3 (दयानंद की संस्था) | मेजिनी → 2 (इटली) | गोबिंद सिंह → 1 (सिखों के दसवें गुरु)
8. आत्मकथा विधा — परिचय
आत्मकथा किसे कहते हैं?
आत्मकथा = आत्म + कथा = अपनी कथा।
वह गद्य-रचना जिसमें लेखक अपने जीवन की वास्तविक घटनाओं, अनुभवों और विचारों को प्रथम पुरुष ('मैं') में लिखता है। इसमें लेखक ही नायक होता है।
विशेषता
इस पाठ से उदाहरण
प्रथम पुरुष ('मैं')
"मेरी माताजी देवी हैं।" / "मुझमें जो जीवन आया..."
वास्तविक घटनाएँ
लखनऊ कांग्रेस, वकील-प्रसंग, जेल में आत्मकथा लिखना
व्यक्तिगत भावनाएँ
माँ के प्रति कृतज्ञता, फाँसी की पूर्व-भावना
ऐतिहासिक प्रसंग
भगत सिंह का कथन, मेजिनी, गुरु गोबिंद सिंह
प्रेरणादायक संदेश
देशभक्ति, माँ का ऋण, सत्याचरण
संस्मरण vs आत्मकथा: संस्मरण — जीवन की किसी एक विशेष घटना या व्यक्ति की यादें (Ch 2 'गोल' भी संस्मरण था) आत्मकथा — पूरे जीवन की कथा, प्रथम पुरुष में, सत्य घटनाएँ
यह पाठ आत्मकथा का अंश है — 'निज जीवन की एक छटा' से लिया गया।
9. व्याकरण — संयुक्त शब्द-प्रयोग (संक्षेपीकरण)
NCERT का स्पष्टीकरण — 'अक्षर-बोध' और 'पढ़ना-लिखना'
"माताजी उनसे अक्षर-बोध करतीं" — यहाँ 'अक्षर-बोध' = अक्षर का बोध/ज्ञान। "जो कुछ समय मिल जाता, उसमें पढ़ना-लिखना करतीं" — यहाँ 'पढ़ना-लिखना' = पढ़ना और लिखना।
हम लेखन में शब्दों को मिलाकर छोटा बना लेते हैं — इससे समय, स्याही, कागज़ की बचत होती है। इसे संक्षेपीकरण कहते हैं।
पाठ से संयुक्त शब्द (NCERT अभ्यास)
डाँट-फटकार
डाँटना और फटकारना = कड़ी डाँट
पढ़ना-लिखना
पढ़ना और लिखना = साक्षरता
अक्षर-बोध
अक्षर का ज्ञान = पढ़ना सीखना
काम-काज
काम और काज = दैनिक कार्य
पालन-पोषण
पालना और पोषण करना = परवरिश
सखी-सहेली
सखी और सहेली = महिला मित्र
भोग-विलास
भोग और विलास = विलासितापूर्ण जीवन
देश-सेवा
देश की सेवा = राष्ट्रसेवा
बचते-बचाते
खुद बचते हुए दूसरों को भी बचाते
जन्म-जन्मांतर
इस जन्म से अगले जन्म तक = हमेशा
10. वर्ग पहेली — 12 विशेषण (पाठ से)
NCERT अभ्यास: वर्ग पहेली में पाठ से 12 विशेषण दिए गए हैं — उन्हें पाठ में रेखांकित कीजिए।
1
मंगलमयी
2
प्रत्येक
3
छोटी
4
साधारण
5
ग्यारह
6
खूब
7
दुखभरी
8
बड़ा
9
महान
10
स्वाधीन
11
नोछो
12
धागा
💡 याद रखें: विशेषण वे शब्द हैं जो संज्ञा की विशेषता, गुण या प्रकृति बताते हैं। जैसे — 'मंगलमयी मूर्ति' में 'मंगलमयी' विशेषण है।
11. झरोखे से — ऐ मातृभूमि!
ऐ मातृभूमि!
ऐ मातृभूमि! तेरी जय हो, सदा विजय हो।प्रत्येक भक्त तेरा, सुख-शांति-कांतिमय हो। अज्ञान की निशा में, दुख से भरी दिशा में;संसार के हृदय में, तेरी प्रभा उदय हो। तेरा प्रकोप सारे जग का महाप्रलय हो।तेरी प्रसन्नता ही आनंद का विषय हो। वह भक्ति दे कि 'बिस्मिल' सुख में तुझे न भूले,वह शक्ति दे कि दुख में कायर न यह हृदय हो।
— रामप्रसाद 'बिस्मिल'
इस कविता का मुख्य भाव क्या है? (साझी समझ)
इस कविता में बिस्मिल ने मातृभूमि (भारत माँ) से प्रार्थना की है:
1. तुम्हारी हमेशा जय हो, सभी भक्त सुखी-शांत रहें। 2. संसार में तुम्हारी ज्ञान-शक्ति का उदय हो। 3. मुझे ऐसी भक्ति दो कि सुख में तुम्हें न भूलूँ — और ऐसी शक्ति दो कि दुख में भी मेरा हृदय कायर न हो।
विशेषता: यह कविता 'मेरी माँ' पाठ के साथ एक अनूठा संदेश देती है — बिस्मिल के लिए 'माँ' और 'मातृभूमि' एक ही थीं। जन्म देने वाली माँ और भारत माँ — दोनों के लिए समान श्रद्धा।
12. रचनात्मक गतिविधि — करके देखें
📋गतिविधि 1 — अपनी माँ का परिचय लिखेंNCERT आपकी बात
NCERT से: अपनी माँ या अभिभावक से बातचीत करके उनके बारे में जानिए।
क्या पूछें:
प्रश्न
आपका उत्तर
आपका जन्म कहाँ हुआ था?
_________________
आपकी प्रिय पुस्तक का नाम?
_________________
बचपन की सबसे प्रिय याद?
_________________
आपका प्रिय गीत कौन सा है?
_________________
✍गतिविधि 2 — अपनी छोटी आत्मकथाआत्मकथा की रचना
क्या करें: बिस्मिल की आत्मकथा की तरह अपने जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना (6-8 वाक्य) लिखें।
💡 संकेत: "मेरे जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना..." — अपनी माँ, शिक्षक या मित्र के बारे में जो बात आपके मन में बस गई हो।
🌎गतिविधि 3 — 'माँ' अनेक भाषाओं मेंNCERT शब्दों की बात
NCERT से: "अन्य भाषाओं में माँ के लिए प्रयुक्त संबोधन और शब्द ढूँढ़िए।"
भाषा
'माँ' के लिए शब्द
हिन्दी
माँ, माता, मातृ, जननी, अम्मा
संस्कृत
माता, जननी, जन्मदात्री
English
Mother, Mum, Mom
तमिल
अम्मा
बंगाली
माँ
राजस्थानी
माँ, माई, बाई
समानता: 'म' या 'म्म' की ध्वनि — संसार की अधिकांश भाषाओं में 'माँ' के लिए 'म' वर्ण का प्रयोग होता है। यह शिशु की पहली ध्वनि से जुड़ा है।
13. MCQ — परीक्षा उपयोगी प्रश्न
1. 'मेरी माँ' पाठ के लेखक कौन हैं?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
अ
भगत सिंह
ब
रामप्रसाद 'बिस्मिल'
स
चंद्रशेखर आज़ाद
द
सुभाष चंद्र बोस
सही उत्तर: (ब) रामप्रसाद 'बिस्मिल' (1897–1927) — 'सरफरोशी की तमन्ना' के रचयिता
2. 'मेरी माँ' पाठ किस विधा में लिखा गया है?
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अ
कविता
ब
संस्मरण
स
आत्मकथा अंश
द
जीवनी
सही उत्तर: (स) आत्मकथा अंश — 'निज जीवन की एक छटा' से
3. बिस्मिल की माँ का सबसे बड़ा आदर्श क्या था?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
अ
देश की सेवा करें
ब
कभी किसी के प्राण न लेना
स
सदा सच बोलना
द
कभी किसी से छल न करना
सही उत्तर: (ब) "माताजी का सबसे बड़ा आदर्श... किसी की प्राणहानि न हो।" (NCERT से)
4. 'आर्यसमाज' की स्थापना किसने की थी?
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अ
विवेकानंद
ब
महर्षि दयानंद सरस्वती
स
राजा राम मोहन राय
द
गुरु नानक देव
सही उत्तर: (ब) महर्षि दयानंद सरस्वती — NCERT मिलान से
5. बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा कहाँ लिखी?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
अ
घर पर
ब
जेल में चोरी-छिपे
स
विदेश में रहकर
द
कांग्रेस अधिवेशन में
सही उत्तर: (ब) "जेल में रहते-रहते ही उन्होंने चोरी-छिपे अपनी आत्मकथा लिखी।" (NCERT)
6. बिस्मिल की आत्मकथा का नाम क्या था?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
अ
सरफरोशी की तमन्ना
ब
निज जीवन की एक छटा
स
मेरी माँ
द
भारत माता
सही उत्तर: (ब) 'निज जीवन की एक छटा' — जो जेल से बाहर भेजकर प्रकाशित करवाई गई
7. 'मेजिनी' कौन थे?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
अ
फ्रांस के राष्ट्रनायक
ब
इटली के गुप्त राष्ट्रवादी दल के सेनापति
स
रूस के क्रांतिकारी
द
अमेरिका के राष्ट्रपति
सही उत्तर: (ब) इटली का मसीहा — जिसने लोगों को एक सूत्र में बाँधा (NCERT मिलान से)
8. बिस्मिल ने वकालतनामे पर पिताजी के हस्ताक्षर क्यों नहीं किए?
विकल्प देखें और उत्तर जाँचें ▼
अ
डर के कारण
ब
वकील पसंद नहीं था
स
धर्मविरुद्ध होने के कारण — सत्याचरण की भावना से
द
पिताजी ने मना किया था
सही उत्तर: (स) "यह तो धर्मविरुद्ध होगा, इस प्रकार का पाप मैं कदापि नहीं कर सकता।"
14. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
'मेरी माँ' पाठ किस कक्षा में है? +
NCERT कक्षा 6 हिन्दी पाठ्यपुस्तक मल्हार का अध्याय 6 है। रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा 'निज जीवन की एक छटा' का अंश।
रामप्रसाद बिस्मिल को फाँसी क्यों हुई? +
बिस्मिल ने 1925 में काकोरी काण्ड में भाग लिया था — ट्रेन से अंग्रेज़ सरकार का खजाना लूटा। उन्हें और उनके साथियों को पकड़ लिया गया और 19 दिसम्बर, 1927 को गोरखपुर जेल में फाँसी दी गई।
आत्मकथा और जीवनी में क्या अंतर है? +
आत्मकथा — व्यक्ति स्वयं अपनी कहानी लिखता है, प्रथम पुरुष ('मैं') में। जीवनी — दूसरा व्यक्ति किसी के जीवन पर लिखता है, तृतीय पुरुष ('वे', 'उन्होंने') में।
बिस्मिल की माँ ने कितनी उम्र में पढ़ना सीखा? +
बिस्मिल के जन्म के पाँच-सात वर्ष बाद — यानी करीब 16-18 साल की उम्र में। उन्होंने सखी-सहेलियों से घर पर ही अक्षर-बोध किया और परिश्रम से देवनागरी पुस्तकें पढ़ने लगीं।
भगत सिंह ने बिस्मिल के बारे में क्या कहा था? +
भगत सिंह ने कहा — "श्री रामप्रसाद 'बिस्मिल' बड़े होनहार नौजवान थे। ग़जब के शायर थे। योग्य बहुत थे। यदि किसी और समय पैदा हुए होते तो सेनाध्यक्ष बनते।"
'निज जीवन की एक छटा' का क्या महत्व था? +
इस आत्मकथा ने अंग्रेज़ों के होश उड़ा दिए। लोगों में अंग्रेज़ों के विरुद्ध क्रोध और बढ़ा। यानी बिस्मिल को फाँसी देने के बाद भी अंग्रेज़ उन्हें हरा नहीं सके — यह आत्मकथा देश को प्रेरित करती रही।
📌 अस्वीकरण: यह स्वतंत्र शैक्षिक नोट्स हैं — केवल शैक्षिक उद्देश्य हेतु। सामग्री NCERT पाठ्यपुस्तक मल्हार तथा रामप्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा 'निज जीवन की एक छटा' पर आधारित है। NCERTclasses.com एक स्वतंत्र शैक्षिक वेबसाइट है जो NCERT, CBSE या RBSE से सम्बद्ध नहीं है। मूल पाठ्यपुस्तक का अध्ययन अवश्य करें। स्रोत: ncert.nic.in
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