जलाते चलो NCERT कक्षा 6 हिन्दी पाठ्यपुस्तक मल्हार का सातवाँ अध्याय है। यह द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी (1916–1998) की एक प्रेरणादायक कविता है। कविता में दीपक भलाई/ज्ञान का प्रतीक है और तिमिर बुराई/निराशा का। संदेश है — निरंतर भलाई करते रहो, कभी न कभी अँधेरा जरूर दूर होगा।
📌 परीक्षा हेतु: 'मेरी समझ से' MCQ, मिलकर करें मिलान, पंक्तियों पर चर्चा, प्रतीक, सोच-विचार, सा/सी/से व्याकरण और 'शब्दों के रूप' से प्रश्न पूछे जाते हैं।
1. कवि परिचय — द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
✍
द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
जन्म: 1916 · मृत्यु: 1998 · हिन्दी बाल-साहित्यकार
द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी हिन्दी के प्रसिद्ध कवि थे। बाल साहित्य के चर्चित रचनाकारों में उनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उन्होंने बच्चों के लिए बहुत-सी रचनाएँ लिखीं। उनके द्वारा लिखित 'हम सब सुमन एक उपवन के' जैसे गीत आज भी बहुत लोकप्रिय हैं।
🎐 बाल-साहित्यकार🎵 हम सब सुमन एक उपवन के🔥 जलाते चलो
2. मूल कविता — जलाते चलो
जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भरकभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा।
भले शक्ति विज्ञान में है निहित वहकि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी,मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही मेंघिरी आ रही है अमावस निशा-सी।बिना स्नेह विद्युत-दिये जल रहे जोबुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा।।
जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर कीचुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी,तिमिर की सरित पार करने तुम्हीं नेबना दीप की नाव तैयार की थी।बहाते चलो नाव तुम वह निरंतरकभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा।।
युगों से तुम्हीं ने तिमिर की शिला परदिये अनगिनत हैं निरंतर जलाए,समय साक्षी है कि जलते हुए दीपअनगिन तुम्हारे पवन ने बुझाए।मगर बुझ स्वयं ज्योति जो दे गए वेउसी से तिमिर को उजेला मिलेगा।।
दिये और तूफ़ान की यह कहानीचली आ रही और चलती रहेगी,जली जो प्रथम बार लौ दीप कीस्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी।रहेगा धरा पर दिया एक भी यदिकभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।।
— द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
3. कठिन शब्दार्थ
शब्द
अर्थ
दिये
दीपक; यहाँ — भलाई और प्रेम के कार्यों का प्रतीक
स्नेह
प्रेम + तेल — दोनों अर्थ; दीपक में तेल + मानवीय प्रेम
धरा
पृथ्वी, धरती
निहित
छिपा हुआ, समाहित
अमावस
अमावस्या — वह रात जब चंद्रमा दिखाई नहीं देता; प्रतीक — अंधकार
पूर्णिमा
जब चंद्रमा पूरा दिखे; प्रतीक — प्रकाश और खुशी
दिवस
दिन (Day)
निशा
रात; प्रतीक — बुराई, अज्ञान, निराशा
विद्युत-दिये
बिजली के दीपक — बल्ब; यहाँ — बिना प्रेम की प्रगति
पथ
रास्ता, मार्ग
तिमिर
अँधेरा; प्रतीक — बुराई, अज्ञान, संकट
प्रथम
पहला, सर्वप्रथम
सरित
नदी (River)
निरंतर
लगातार, बिना रुके
किनारा
तट, छोर, अंत
युगों से
बहुत लंबे समय से; युग = सत्ययुग/त्रेता/द्वापर/कलियुग
शिला
पत्थर, चट्टान
अनगिनत/अनगिन
अनगिनती, बहुत अधिक (Countless)
साक्षी
गवाह, देखने वाला
पवन
हवा; प्रतीक — बाधाएँ, प्रतिकूल शक्तियाँ
ज्योति
लौ, प्रकाश; प्रतीक — प्रेरणा, अच्छाई
उजेला
उजाला, प्रकाश, रोशनी
तूफ़ान
आँधी; प्रतीक — संकट, विपत्ति, बाधाएँ
लौ
दीपक की ज्वाला, शिखा (Flame)
स्वर्ण-सी
सोने जैसी — सुनहरी, मूल्यवान
सवेरा
सुबह, भोर; प्रतीक — आशा, सुख, सफलता
युग
काल-खंड; चार युग — सत्ययुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग
💡 शब्दों के रूप (NCERT): 'अमावस' = 'अमावस्या', 'दिया' = 'दीपक', 'उजेला' = 'उजाला', 'अनगिन' = 'अनगिनत' — एक ही शब्द के अलग-अलग रूप।
4. पद्यांश-वार भावार्थ
टेक पंक्तियाँ — मुख्य संदेश
जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर / कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा।
🔥 भावार्थ
प्रेम से भर-भरकर भलाई के दीपक जलाते रहो। एक न एक दिन इस धरती का अँधेरा अवश्य मिटेगा। 'स्नेह' का दोहरा अर्थ — तेल (दीप का ईंधन) + प्रेम (भलाई की भावना)। यह कविता की टेक पंक्ति है।
पद्यांश 1 — विज्ञान और स्नेह
भले शक्ति विज्ञान में है निहित वह / कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी, / मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में / घिरी आ रही है अमावस निशा-सी। / बिना स्नेह विद्युत-दिये जल रहे जो / बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा।।
🔥 भावार्थ
विज्ञान में शक्ति है कि अमावस को पूर्णिमा जैसा बना दे — यानी बिजली से हर जगह रोशनी। पर आश्चर्य है कि दिन में भी दुनिया पर अमावस जैसा अँधेरा (अज्ञान-बुराई) छाया है। बिना प्रेम-भावना के जो बिजली के दीपक जल रहे हैं — उन्हें बुझाओ। संदेश: केवल विज्ञान की प्रगति नहीं — मानवीय प्रेम जरूरी है।
पद्यांश 2 — दीप की नाव
जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की / चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी, / तिमिर की सरित पार करने तुम्हीं ने / बना दीप की नाव तैयार की थी। / बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर / कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा।।
🔥 भावार्थ
तुमने ही पहली बार अँधेरे को चुनौती दी थी। अँधेरे की नदी पार करने के लिए तुमने दीपक की नाव बनाई — अर्थात् मनुष्य ने अपने बुद्धि-बल से रास्ता निकाला। अब भी उसी नाव को निरंतर चलाते रहो — एक न एक दिन अँधेरे का किनारा (अंत) मिलेगा।
पद्यांश 3 — पवन और ज्योति
युगों से तुम्हीं ने तिमिर की शिला पर / दिये अनगिनत हैं निरंतर जलाए, / समय साक्षी है कि जलते हुए दीप / अनगिन तुम्हारे पवन ने बुझाए। / मगर बुझ स्वयं ज्योति जो दे गए वे / उसी से तिमिर को उजेला मिलेगा।।
🔥 भावार्थ
युगों से मनुष्य ने अँधेरे की चट्टान पर अनगिनत दीप जलाए — बाधाओं (पवन) ने उन्हें बुझाया भी। पर जो दीप खुद बुझ गए — उनकी ज्योति दूसरों को रोशनी देती रही। महापुरुषों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाता।
पद्यांश 4 — सुनहरी लौ और सवेरा
दिये और तूफ़ान की यह कहानी / चली आ रही और चलती रहेगी, / जली जो प्रथम बार लौ दीप की / स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी। / रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि / कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।।
🔥 भावार्थ
भलाई और बाधा का संघर्ष सदा से है और चलता रहेगा। पहली बार जो भलाई की लौ जली — वह स्वर्ण-सी अमर है। महा-संदेश — "रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि, कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।" — एक भी भला इंसान हो तो अंधकार का अंत अवश्य होगा।
5. कविता का सारांश
पद्यांश
मुख्य भाव
टेक
प्रेम से दीप जलाते रहो — अँधेरा मिटेगा
पद्यांश 1
विज्ञान की प्रगति बिना प्रेम के व्यर्थ है
पद्यांश 2
मनुष्य ने पहले अँधेरे को चुनौती दी — वही करते रहो
पद्यांश 3
बुझे दीप भी रोशनी देते हैं — बलिदान व्यर्थ नहीं
पद्यांश 4
एक भी भला इंसान हो तो सवेरा जरूर आएगा
6. प्रतीक-योजना — दीप vs तिमिर
📌 NCERT से: 'निशा' और 'सवेरा' केवल रात और सुबह नहीं। निशा = अँधेरा (बुराई); सवेरा = उजाला (आशा)।
🌘 तिमिर/निशा (अँधेरे के प्रतीक)
अज्ञान, मूर्खता
बुराई, अनैतिकता
निराशा, हताशा
अन्याय, अत्याचार
अमावस (कविता में)
🔥 दीप/सवेरा (प्रकाश के प्रतीक)
ज्ञान, शिक्षा
अच्छाई, नैतिकता
आशा, उत्साह
न्याय, सत्य, भलाई
पूर्णिमा (कविता में)
कविता का शब्द
प्रतीकात्मक अर्थ
दिये/स्नेह
भलाई + मानवीय प्रेम — जिसके बिना भलाई नहीं
तिमिर/निशा
बुराई, अज्ञान, निराशा, संकट
पवन/तूफ़ान
बाधाएँ, विरोध, प्रतिकूल परिस्थितियाँ
सवेरा
आशा, समस्याओं का अंत, सुख
नाव
संघर्ष का साधन — कठिनाइयाँ पार करने का जरिया
विद्युत-दिये
बिना प्रेम की प्रगति — जो सच्चा मार्ग नहीं देती
स्वर्ण-सी लौ
मानवता की अमर आत्मा — सदा जलती रहती है
7. पाठ के प्रश्नोत्तर (NCERT)
(क) मेरी समझ से
प्र.1 — कविता में मुख्य रूप से कौन-सी बात कही गई है?
सही उत्तर: भलाई के कार्य करते रहना।
कविता में दीपक भलाई और परोपकार का प्रतीक है। टेक पंक्ति — "जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर" — यही मुख्य भाव है। बाकी विकल्प शाब्दिक/आंशिक अर्थ हैं।
प्र.2 — "जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की..." — यह वाक्य किससे कहा गया है?
सही उत्तर: मनुष्यों से।
कवि ने मनुष्य-जाति को संबोधित करते हुए कहा — 'तुम्हीं ने' = मनुष्यों ने पहली बार अँधेरे को चुनौती दी थी।
(ख) सोच-विचार के लिए
(क) कविता में अँधेरे के लिए किन वस्तुओं के उदाहरण दिए गए हैं?
1. अमावस — "घिरी आ रही है अमावस निशा-सी" 2. निशा — रात का अँधेरा 3. तिमिर की शिला — अंधकार की चट्टान 4. तिमिर की सरित — अंधकार की नदी 5. दिवस में अमावस — दिन में छाया नैतिक अंधकार
(ख) इसमें क्या आशा की गई है? यह आशा क्यों की गई है?
तीन बार आशा व्यक्त: 1. "कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा।" 2. "कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा।" 3. "कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।"
क्यों: मनुष्य ने युगों से अँधेरे से लड़ाई की है। भलाई की लौ कभी पूरी नहीं बुझती — वह आगे जलती रहती है।
(ग) कविता में किसे जलाने और किसे बुझाने की बात कही गई है?
जलाना: "जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर" — प्रेम और भलाई के दीप जलाते रहो। बुझाना: "बिना स्नेह विद्युत-दिये... बुझाओ इन्हें" — बिना मानवीय संवेदना की प्रगति बुझाओ।
(ग) पंक्तियों पर चर्चा
"दिये और तूफ़ान की यह कहानी... रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि, कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।।" — अर्थ लिखिए।
भलाई (दीप) और बाधाओं (तूफान) का संघर्ष सदा से चला आ रहा है। पहली बार जो भलाई की लौ जली वह अमर है — आज भी जल रही है। महासंदेश: यदि एक भी भला इंसान पृथ्वी पर रहा तो बुराई का अंत जरूर होगा। आशा कभी मत छोड़ो।
8. मिलकर करें मिलान — उत्तर
(क) शब्द और अर्थ मिलान (NCERT p. 62-63)
NCERT: कविता में से चुनकर कुछ शब्द दिए गए हैं — इन्हें सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए।
शब्द (स्तंभ 1)
1. अमावस
2. पूर्णिमा
3. विद्युत-दिये
4. युग
सही अर्थ/संदर्भ (उत्तर)
1→4: अमावस्या — जिस रात आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता।
2→1: पूर्णमासी — वह तिथि जिस रात चंद्रमा पूरा दिखाई देता है।
3→2: बिजली से जलने वाले दीपक — बल्ब आदि उपकरण।
4→3: समय, काल — युग संख्या में चार: सत्ययुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग।
सही मिलान: अमावस→4 | पूर्णिमा→1 | विद्युत-दिये→2 | युग→3
(ख) पंक्तियाँ मिलान — समान भाव (NCERT p.65)
स्तंभ 1
1. कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा।
2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर।
3. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी।
4. बिना स्नेह विद्युत-दिये जल रहे जो बुझाओ इन्हें...
स्तंभ 2 (सही जोड़)
1→3: विश्व की समस्याओं से एक न एक दिन छुटकारा अवश्य मिलेगा।
2→4: दूसरों के सुख-चैन के लिए प्रयास करते रहिए।
3→2: विश्व में सुख-शांति क्यों कम होती जा रही है?
4→1: विश्व की भलाई का ध्यान रखे बिना प्रगति से कोई लाभ नहीं।
पंक्तियाँ मिलान: 1→3 | 2→4 | 3→2 | 4→1
9. अनुमान या कल्पना से (NCERT)
(क) "दिये और तूफ़ान की यह कहानी चली आ रही और चलती रहेगी" — दीपक और तूफान की यह कौन-सी कहानी है जो सदा से चली आ रही है?
भाव: दीपक = भलाई/सत्य; तूफान = बुराई/बाधाएँ। यह है — अच्छाई और बुराई का शाश्वत संघर्ष।
यह कहानी हर युग में चलती रही है — सत्ययुग में असुर और देवताओं का संघर्ष रामायण में राम और रावण महाभारत में पांडव और कौरव स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारी और अंग्रेज़ आज में अज्ञान/भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष
यह कहानी चलती रहेगी — क्योंकि भलाई की लौ कभी नहीं बुझती।
(ख) "जली जो प्रथम बार लौ दीप की, स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी" — दीपक की यह सोने जैसी लौ क्या हो सकती है जो अनगिनत सालों से जल रही है?
भाव: यह अमर लौ है — मानवता, करुणा, प्रेम और सत्य की भावना।
सोने जैसी लौ इसलिए — क्योंकि सोना अग्नि में तपकर और शुद्ध हो जाता है, टिकाऊ रहता है।
इस लौ को जलाए रखा — राम, बुद्ध, महावीर, कबीर, गांधी, बिस्मिल, भगत सिंह जैसे महापुरुषों ने। उनका बलिदान ही यह स्वर्ण-लौ है — जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रहती है।
10. शब्दों के रूप (NCERT अभ्यास)
NCERT: 'अमावस' का अर्थ 'अमावस्या' है — दोनों का अर्थ समान पर लिखने-बोलने में अंतर। ऐसे ही कुछ शब्द कविता से खोजकर लिखिए।
कविता का शब्द
मिलता-जुलता / पूर्ण रूप
प्रयोग में अंतर
दिया
दीपक
दिया = बोलचाल; दीपक = औपचारिक/काव्य
उजेला
उजाला
उजेला = लोकभाषा; उजाला = प्रचलित
अनगिन
अनगिनत
अनगिन = काव्य में; अनगिनत = सामान्य
अमावस
अमावस्या
अमावस = लोकभाषा; अमावस्या = शास्त्रीय
तिमिर
अँधेरा / अंधकार
तिमिर = संस्कृत/काव्य; अँधेरा = बोलचाल
सरित
नदी
सरित = संस्कृत/काव्य; नदी = बोलचाल
💡 नियम: कविता में अक्सर शब्दों के लोकभाषा रूप या तत्सम रूप प्रयोग किए जाते हैं — इससे लय बनती है और काव्य-सौंदर्य बढ़ता है।
11. व्याकरण — सा/सी/से का प्रयोग
NCERT — 'सा/सी/से' किसलिए प्रयोग होता है?
समानता दिखाने के लिए। जब 'सा/सी/से' समानता दिखाए तो इनसे पहले योजक चिह्न (-) लगाया जाता है।
पुल्लिंग → सा | स्त्रीलिंग → सी | बहुवचन → से
कविता से: "अमावस निशा-सी" | "अमावस बने पूर्णिमा-सी" | "लौ स्वर्ण-सी जल रही"
पंक्ति से पंक्ति — वाक्य रूप (NCERT अभ्यास)
कविता की पंक्ति
वाक्य रूप
बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर।
तुम वह नाव निरंतर बहाते चलो।
जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर।
ये दिये स्नेह भर-भरकर जलाते चलो।
बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा।
इन्हें बुझाओ, इस प्रकार पथ नहीं मिल सकेगा।
मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी।
मगर आज विश्व पर दिन में ही अमावस जैसी रात क्यों घिर रही है?
अर्थ की बात — 'चलो' vs 'रहो'
"जलाते चलो" में 'चलो' की जगह 'रहो' रखें तो क्या अंतर?
'चलो' — गति, निरंतर आगे बढ़ते हुए दीप जलाना। गतिशीलता का भाव। 'रहो' — स्थिर रहकर दीप जलाना। स्थिरता का भाव।
'चलो' से कविता में निरंतर आगे बढ़ने और न रुकने की भावना आती है — जो अधिक प्रभावशाली है।
सही शब्द चुनिए (NCERT अभ्यास)
पंक्ति
सही शब्द
क्यों?
बहाते चलो ___ तुम वह निरंतर / कभी तो तिमिर का ___ मिलेगा।
नाव / किनारा
कविता के मूल शब्द; किनारा सबसे काव्यात्मक
रहेगा ___ पर दिया एक भी यदि / कभी तो निशा को ___ मिलेगा।
धरा / सवेरा
धरा = काव्य-भाषा; सवेरा = आशा का कोमल भाव
जला दीप पहला तुम्हीं ने ___ की / चुनौती ___ बार स्वीकार की थी।
तिमिर / प्रथम
कविता के मूल शब्द; प्रथम सबसे प्रभावशाली
12. अमावस्या और पूर्णिमा — विज्ञान
अमावस्या और पूर्णिमा क्यों होती है?
चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है। उसका अपना प्रकाश नहीं — सूर्य के प्रकाश से चमकता है।
पूर्णिमा: चंद्रमा का पूरा प्रकाशित भाग दिखे। अमावस्या: चंद्रमा दिखाई नहीं देता।
शुक्ल पक्ष: अमावस्या से पूर्णिमा तक — कलाएँ बढ़ती हैं। 'शुक्ल' = उजला। कृष्ण पक्ष: पूर्णिमा से अमावस्या तक — कलाएँ घटती हैं। 'कृष्ण' = काला।
तिथिपत्र जनवरी 2023 — प्रश्नोत्तर
NCERT प्रश्न
उत्तर
(क) महीने में कुल दिन?
31 दिन
(ख) पूर्णिमा और अमावस्या?
पूर्णिमा: 6 जनवरी शुक्रवार; अमावस्या: 21 जनवरी शनिवार
(ग) कृष्ण/शुक्ल सप्तमी में अंतर?
14 जनवरी और 28 जनवरी = 14 दिन
(घ) कृष्ण पक्ष में कुल दिन?
7 से 21 जनवरी = 15 दिन
(ङ) वसंत पंचमी?
26 जनवरी 2023 (गुरुवार) — शुक्ल पंचमी
13. आज की पहेली — 'पवन' के पर्यायवाची
NCERT: अक्षर-जाल में 'पवन' के अलग-अलग नाम छिपे हैं।
पवन
हवा, वायु
वायु
वायु देवता
हवा
NCERT ने घेरा बनाया
अनिल
हवा (संस्कृत)
मारुत
हवा (वैदिक)
समीर
शीतल हवा
बयार
मंद-मंद हवा
14. रचनात्मक गतिविधि
🎵 गतिविधि 1 — कविता लय में गाएँ (NCERT कविता की रचना)
NCERT से: इस कविता की प्रत्येक पंक्ति को गाने में लगभग समान समय लगता है — यही इसे गेय और प्रभावशाली बनाता है। पंक्तियाँ 2-4, 2-4 क्रम में हैं। शिक्षक के साथ मिलकर लय में गाएँ। हाथों से ताल दें।
Sample: 1. उसकी आँखें दीपक-सी चमकती हैं। 2. उसका मन आकाश-सा विशाल है। 3. माँ की ममता नदी-सी बहती है। 4. वीर जवान शेर-से साहसी होते हैं। 5. उसकी हँसी फूल-सी खिली थी।
🔥 गतिविधि 3 — मेरी भलाई की सूची (NCERT आपकी बात)
NCERT से: "यदि हर व्यक्ति दूसरों की भलाई के लिए कार्य करे तो पूरी दुनिया सुंदर बन जाएगी।" अपने दैनिक जीवन में दूसरों के लिए किए जाने वाले 5 कार्य लिखें — यही आपका 'दीप' है।
निरंतर भलाई करते रहो — निराश मत हो। यदि एक भी भला इंसान धरती पर रहा तो बुराई का अंत अवश्य होगा। "रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि, कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।"
'विद्युत-दिये बुझाओ' — इसका क्या अर्थ है? +
बिना मानवीय प्रेम और संवेदना के जो प्रगति हो रही है — वह सच्चा रास्ता नहीं देती। केवल विज्ञान और तकनीक काफी नहीं — मानवीय करुणा जरूरी है।
पूर्णिमा और अमावस्या में क्या अंतर है? +
पूर्णिमा = जिस रात चंद्रमा पूरा दिखे — शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि। अमावस्या = जिस रात चंद्रमा दिखाई नहीं देता — कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि।
कविता की विशेषता क्या है? (NCERT) +
1. प्रत्येक पंक्ति गाने में समान समय लगता है — गेय छंद। 2. पंक्तियाँ 2-4, 2-4 के क्रम में बाँटी गई हैं। 3. प्रतीकात्मक भाषा — दीप, तिमिर, पवन, नाव। 4. आशावादी स्वर — तीन बार "कभी तो..." आता है।
17. खोजबीन के लिए (NCERT)
NCERT से: कविता संबंधित कुछ रचनाएँ दी गई हैं — इन्हें QR कोड या इंटरनेट की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें।
रचना
कवि/विषय
संबंध
हम सब सुमन एक उपवन के
द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
इसी कवि का प्रसिद्ध एकता-गीत
बढ़े चलो
प्रेरणागीत
'जलाते चलो' जैसा — आगे बढ़ने का संदेश
रोज बदलता कैसे चाँद — भाग 1
विज्ञान
कविता में अमावस/पूर्णिमा से जुड़ा — चंद्रमा की कलाएँ
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