| कक्षा | 6 |
| विषय | सामाजिक विज्ञान |
| अध्याय | 3 |
| विषय (क) | भारत एवं विश्व: भूभाग एवं उनके निवासी |
| NCERT PDF | fees103.pdf |
| संस्करण | Reprint 2026-27 |
| स्थलरूप | 3 (पर्वत, पठार, मैदान) |
| एवरेस्ट ऊँचाई | 8848 मीटर |
स्थलरूप एवं जीवन
NCERT Class 6 · सामाजिक विज्ञान · अध्याय 3 · सम्पूर्ण नोट्स (हिन्दी माध्यम)
स्थलरूप एवं जीवन (Landforms and Life) NCERT कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान का तीसरा अध्याय है। यह अध्याय 1 — पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति और अध्याय 2 — महासागर एवं महाद्वीप की अगली कड़ी है। इस अध्याय में हम पृथ्वी की सतह पर पाए जाने वाले तीन मुख्य स्थलरूपों — पर्वत, पठार और मैदान — तथा उनसे जुड़े जीवन, संस्कृति और चुनौतियों को समझेंगे।
1. स्थलरूप — परिचय
स्थलरूप (Landform) पृथ्वी की सतह का एक भौतिक स्वरूप है। ये लाखों वर्षों में बनते हैं और पर्यावरण तथा जीवन से इनका गहरा संबंध है।
| स्थलरूप | हिन्दी | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| Mountains | पर्वत | ऊँचे, खड़ी ढलान, संकरे शिखर |
| Plateaus | पठार | उठी हुई, चपटी सतह, सीधी या ढलवाँ किनारे |
| Plains | मैदान | सपाट, समुद्र तल से 300 मी. से कम ऊँचाई |
2. पर्वत (Mountains)
पर्वत वे स्थलरूप हैं जो आस-पास की भूमि से अधिक ऊँचे होते हैं। इन्हें चौड़े आधार, खड़ी ढलान और संकरे शिखर से पहचाना जाता है।
- कुछ पर्वत अधिक ऊँचाई के कारण सदा हिम से ढके रहते हैं
- तुंगता (Altitude) — समुद्र तल से किसी वस्तु की ऊँचाई
- ग्रीष्म ऋतु में कम तुंगता पर हिम पिघलकर नदियों में बदलती है
- अधिक ऊँचाई पर हिम कभी नहीं पिघलती — स्थायी हिमाच्छादन
- पहाड़ी (Hill) — कम ऊँचाई वाले स्थान, कम खड़ी चढ़ाई, गोल शीर्ष
- विश्व के अधिकांश पर्वत पर्वत शृंखलाओं के रूप में हैं
प्रमुख पर्वत शृंखलाएँ
| पर्वत शृंखला | महाद्वीप | विशेषता |
|---|---|---|
| हिमालय | एशिया | विश्व की सबसे ऊँची पर्वत शृंखला; एवरेस्ट, कंचनजुंगा |
| आल्प्स | यूरोप | ब्लांक गिरिशृंग — आल्प्स की सबसे ऊँची चोटी |
| एंडीज | दक्षिणी अमेरिका | अकोंकागुआ — एंडीज की सबसे ऊँची चोटी |
| रॉकीज | उत्तरी अमेरिका | उत्तरी अमेरिका का पश्चिमी भाग |
| अरावली | भारत (एशिया) | विश्व की प्राचीनतम पर्वत शृंखलाओं में से एक |
| पश्चिमी घाट | भारत | अनाईमुडी — दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी |
3. विश्व की प्रमुख चोटियाँ
| क्र. | गिरिशृंग (Peak) | ऊँचाई | पर्वत शृंखला | देश/महाद्वीप |
|---|---|---|---|---|
| 1 | एवरेस्ट गिरिशृंग | 8848 मी. | हिमालय | नेपाल-तिब्बत सीमा — विश्व का सबसे ऊँचा |
| 2 | कंचनजुंगा गिरिशृंग | 8586 मी. | हिमालय | भारत (सिक्किम) — नेपाल सीमा |
| 3 | अकोंकागुआ गिरिशृंग | 6962 मी. | एंडीज | दक्षिणी अमेरिका — एंडीज की सबसे ऊँची |
| 4 | किलिमंजारो गिरिशृंग | 5895 मी. | पृथक पर्वत | पूर्वी अफ्रीका — किसी शृंखला से नहीं |
| 5 | ब्लांक गिरिशृंग | 4807 मी. | आल्प्स | पश्चिमी यूरोप — आल्प्स की सबसे ऊँची |
| 6 | अनाईमुडी गिरिशृंग | 2695 मी. | पश्चिमी घाट | केरल, भारत — दक्षिण भारत की सबसे ऊँची |
- तिब्बती नाम: चोमोलुंगमा — अर्थ: "जगत जननी"
- नेपाली नाम: सागरमाथा — अर्थ: "आकाश की देवी"
- तिब्बती लोग इसे देवी मानकर पूजते हैं
- हिमालय में नई (युवा) पर्वत शृंखलाएँ हैं — नुकीली चोटियाँ
- भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं के कारण हिमालय की ऊँचाई में परिवर्तन आज भी जारी है
- अरावली पुरानी पर्वत शृंखला है — अपरदन से गोल आकार
पर्वतीय वनस्पति
| ऊँचाई | वनस्पति | विशेषता |
|---|---|---|
| कम | पर्णपाती वन, कृषि | विविध पेड़-पौधे |
| मध्यम | शंकुधारी वन (Coniferous) | पाइन (चीड़), फर, स्प्रूस, देवदार — शंकु के आकार, नोकदार पत्तियाँ |
| अधिक | घास, मॉस (काई), लाइकेन | पेड़ नहीं उग सकते; मॉस = फूलों और जड़ों से रहित छोटा हरा पौधा |
| सर्वाधिक | हिम (Snow) | स्थायी हिमाच्छादन |
पर्वतीय जीव-जंतु
पर्वतों में घने वन, बहती नदियाँ, झीलें, घास के मैदान और कंदराएँ अनेक जीवों को आश्रय देते हैं:
गोल्डन ईगल (सुनहरा गरुड़), पेरेग्रिन फाल्कन (घुमंतू बाज), कैनेडियन लिंक्स, हिम तेंदुआ, आइबेक्स (जंगली भेड़), हिमालयन तहर, पर्वतीय खरगोश, याक, ग्रे फॉक्स, ब्लैक बियर
4. पर्वतीय जीवन
4.1 कृषि
पर्वतीय भूभाग ऊबड़-खाबड़ होने से कुछ ही घाटियों में कृषि संभव है। ढलानों पर वेदिका कृषि (Terrace / Step Farming) — ढलान को काटकर सीढ़ीनुमा खेत बनाना — प्रचलित है।
4.2 पर्यटन एवं चुनौतियाँ
- पर्यटन — आय का महत्वपूर्ण साधन; स्वच्छ हवा, मनोरम दृश्य
- साहसिक खेल — स्कीइंग, हाइकिंग, पर्वतारोहण, पैराग्लाइडिंग, राफ्टिंग
- तीर्थयात्रा — पवित्र स्थल; अनेक शताब्दियों से परंपरा
- पशुपालन — कृषि से अधिक महत्व
| चुनौती | विवरण |
|---|---|
| भूस्खलन | पर्वतीय भूखंड का अकस्मात टूटकर गिरना |
| हिमस्खलन (Avalanche) | पर्वत से अकस्मात हिम का गिरना |
| आकस्मिक बाढ़ | अचानक आने वाली बाढ़ — अक्सर बादल फटने या तीव्र वर्षा से |
| बादल फटना | अचानक प्रचंड वर्षा होना |
| भारी हिमपात | संचार और परिवहन ठप |
| अनियंत्रित पर्यटन | पर्यावरण पर दबाव; संतुलन कठिन |
4.3 प्रेरणादायक भारतीय पर्वतारोही
- 1984 — एवरेस्ट गिरिशृंग पर चढ़ने वाली प्रथम भारतीय महिला
- बहुत कम आयु में पर्वतारोहण शुरू; अनेक महिला अभियानों का नेतृत्व
- सम्मान: पद्मश्री (1984) एवं पद्मभूषण (2019)
- 22 वर्ष की आयु में दुर्घटना में एक पैर गँवाया
- बछेंद्री पाल के प्रोत्साहन से 2013 में एवरेस्ट पर चढ़ाई की
- इसके बाद अंटार्कटिका के विंसन गिरिशृंग सहित सभी महाद्वीपों की सबसे ऊँची चोटियाँ फतह कीं
- सम्मान: पद्मश्री (2015)
"भारत के उत्तरी भाग में देवता सदृश पूजनीय हिमालय नाम का पर्वतों का राजा है, जो पश्चिमी से लेकर पूर्वी समुद्र तक फैला हुआ है।"
— कालिदास, कुमारसंभव
'पश्चिमी से पूर्वी समुद्र तक' — अर्थात अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक हिमालय के विस्तार की काव्यात्मक अभिव्यक्ति।
5. पठार (Plateaus)
पठार आसपास की भूमि से उठा हुआ विस्तृत भूभाग होता है, जिसकी सतह अपेक्षाकृत समतल होती है और जिसके किनारे प्रायः ढलवाँ या कहीं-कहीं खड़े होते हैं।
- ऊँचाई: कुछ सौ मीटर से लेकर कई हजार मीटर तक
- पठारों में खनिजों का प्रचुर भंडार — इसीलिए "खनिजों का भंडार-गृह"
- पठारों में खनन मुख्य गतिविधि; विश्व की सबसे बड़ी खानें पठारों में
- चट्टानी मिट्टी होने से कम उपजाऊ — कृषि के लिए कम अनुकूल
- लावा पठार (ज्वालामुखीय उत्पत्ति वाले) अपेक्षाकृत अधिक उपजाऊ हो सकते हैं — काली मिट्टी
- पठारों में सुंदर जल प्रपात भी होते हैं
प्रमुख पठार — भारत एवं विश्व
| पठार | स्थान | विशेषता |
|---|---|---|
| तिब्बत का पठार | एशिया (चीन-तिब्बत) | विश्व का सबसे बड़ा और ऊँचा पठार; औसत ऊँचाई 4500 मी.; 'विश्व की छत'; लगभग 2500 किमी. लंबा |
| दक्कन का पठार | मध्य-दक्षिण भारत | विश्व के सबसे पुराने पठारों में एक; प्राचीन ज्वालामुखीय क्रियाओं से बना; काली मिट्टी |
| छोटा नागपुर पठार | झारखंड, भारत | लौह, कोयला, मैंगनीज के प्रचुर भंडार; हुंडरू जल प्रपात |
| पूर्वी अफ्रीका का पठार | अफ्रीका | सोने और हीरे के खनन के लिए प्रसिद्ध |
| चेरापूंजी पठार | मेघालय, भारत | नहकालीकाई जल प्रपात — लगभग 340 मीटर ऊँचाई से गिरता है |
- विक्टोरिया जल प्रपात — जंबेजी नदी, दक्षिण अफ्रीका
- हुंडरू जल प्रपात — सुवर्ण रेखा नदी, छोटा नागपुर पठार (झारखंड)
- जोग जल प्रपात — शरावती नदी, पश्चिमी घाट (कर्नाटक)
- नहकालीकाई जल प्रपात — चेरापूंजी पठार, मेघालय
6. मैदान (Plains)
मैदान ऐसी स्थलाकृति है जिसका विस्तृत सपाट अथवा हल्का तरंगित धरातल होता है। सामान्यतः इसकी ऊँचाई समुद्र तल से 300 मीटर से अधिक नहीं होती।
मैदान कैसे बनते हैं?
- पर्वत शृंखलाओं से नदियाँ निकलती हैं
- नदियाँ रेत, चट्टानों के कण और गाद (तलछट) एकत्र करती हैं
- नदियाँ इन तलछटों को समतल भूमि में लाकर जमा करती हैं
- मिट्टी उपजाऊ बनती है → सर्वश्रेष्ठ कृषि भूमि
मैदानी जीवन
- भारत की कुल जनसंख्या की एक-चौथाई से अधिक यहाँ रहती है
- मुख्य व्यवसाय: कृषि और मत्स्यपालन
- खाद्य फसलें: चावल, गेहूँ, मक्का, जौ, ज्वार, बाजरा, रागी
- रेशेदार फसलें: कपास, जूट, सन
- परंपरागत कृषि वर्षा पर निर्भर; आधुनिक कृषि में नहरें एवं पंप आधारित सिंचाई का उपयोग
- भूमिगत जलस्तर में गिरावट — भविष्य की गंभीर चुनौती
- मैदान में नौका-संचालन सुगम — ढलान हल्की होती है
- संगम स्थल — दो या अधिक नदियों के मिलने का स्थान; प्रायः पवित्र माना जाता है
- हिमालय से निकलने वाली भारतीय नदियों में सबसे बड़ी
- लंबाई: लगभग 2500 किमी.
- प्रमुख सहायक नदियाँ: यमुना, घाघरा; सोन दक्षिण से मिलती है
- अंग्रेजी में: Ganges
7. मरुस्थल (Deserts)
मरुस्थल पृथ्वी का एक अतिरिक्त स्थलरूप है। ये यदा-कदा वर्षा प्राप्त करने वाले शुष्क क्षेत्र हैं।
| प्रकार | मरुस्थल | स्थान | विशेषता |
|---|---|---|---|
| गर्म मरुस्थल | सहारा | अफ्रीका | विश्व का सबसे बड़ा गर्म मरुस्थल |
| गर्म मरुस्थल | थार | भारत (राजस्थान) | भारतीय उपमहाद्वीप का उत्तर-पश्चिम |
| ठंडा मरुस्थल | गोबी | एशिया (मंगोलिया-चीन) | ठंडा मरुस्थल |
| ठंडा मरुस्थल | अंटार्कटिका | दक्षिणी ध्रुव | कुछ विशेषज्ञ इसे भी मरुस्थल मानते हैं |
जीवन की कठिन परिस्थितियों के बावजूद लोगों ने मरुस्थल के अनुसार स्वयं को ढाल लिया है। भारत के थार मरुस्थल के समुदाय अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर — लोक गीत, किंवदंतियाँ और दंतकथाएँ — को सँजोकर रखते हैं। यह मानवीय लचीलेपन (Resilience) का उदाहरण है।
8. तमिल टिनै — 5 दृश्यभूमि (Tinai)
प्राचीन तमिल संगम कविता में पाँच टिनै (Tinai) दृश्यभूमियाँ वर्णित हैं। ये स्थलरूपों और मानव जीवन के गहरे संबंध को दर्शाती हैं।
| टिनै | दृश्यभूमि | मुख्य व्यवसाय |
|---|---|---|
| कुरिंजी | पर्वतीय क्षेत्र | आखेट और संग्रह |
| मुल्लाई | घास के मैदान और वन | पशुपालन |
| मरूदम | उपजाऊ कृषि के मैदान | कृषि |
| नेयदल | तटीय क्षेत्र | मत्स्यपालन और समुद्री यात्रा |
| पालै | शुष्क, मरुस्थल जैसे प्रदेश | घुमंतू और युद्धरत जीवन |
ये पाँच टिनै स्थलरूपों के अलग वर्गीकरण की बजाय विविधता वाले प्रदेशों के प्रति गहन जागरूकता और हमारे तथा पर्यावरण के बीच गहन संबंध को दर्शाती हैं। टिनै का उद्देश्य केवल नाम याद कराना नहीं, बल्कि जीवन और भू-दृश्य के रिश्ते को समझाना है।
9. सारांश — महत्वपूर्ण बिंदु
एवरेस्ट = 8848 मी.
महत्वपूर्ण शब्दावली
- स्थलरूप (Landform)
- पृथ्वी की सतह का एक भौतिक स्वरूप — पर्वत, पठार, मैदान।
- तुंगता / Altitude
- समुद्र तल से किसी वस्तु की ऊँचाई।
- वर्षण (Precipitation)
- वायुमंडल से भूमि पर जल का गिरना — वर्षा, हिमपात, ओले।
- पर्वतीय वन (Montane Forest)
- पर्वतीय क्षेत्र में उगने वाले वनों का एक प्रकार।
- मॉस (Moss)
- फूलों और वास्तविक जड़ों से रहित छोटा हरा पौधा।
- लाइकेन (Lichen)
- पौधे के समान जीव जो चट्टानों, दीवारों या पेड़ों पर उगता है।
- वेदिका कृषि (Terrace Farming)
- ढलान की भूमि काटकर सीढ़ीनुमा खेत बनाकर कृषि।
- घाटी (Valley)
- पहाड़ों के बीच का निचला क्षेत्र जिसमें नदी या जलधारा बहती है।
- भूखंड (Terrain)
- भौतिक आकृतियों की दृष्टि से भूमि का एक खंड।
- तलछट (Sediment)
- नदियों द्वारा बहाकर लाई गई रेत, चट्टानों के कण और गाद।
- समुद्र तल (Sea Level)
- समुद्र की सतह का औसत स्तर।
- संगम स्थल (Confluence)
- दो या अधिक नदियों के मिलने का स्थान।
- भूस्खलन (Landslide)
- पर्वतीय भूखंड का एक बड़ा भाग अकस्मात टूटकर गिरना।
- हिमस्खलन / Avalanche
- पर्वत से अकस्मात हिम का गिरना।
- बादल फटना (Cloudburst)
- अचानक अत्यधिक वर्षा होना।
- लचीलापन / Resilience
- चुनौतियों और कठिनाइयों के अनुसार ढलने की क्षमता।
10. परीक्षा उपयोगी प्रश्न एवं उत्तर
सही (✓) / गलत (✗) — अभ्यास
| कथन | सही/गलत | कारण |
|---|---|---|
| हिमालय गोल शिखरों वाली नवीन पर्वत शृंखला है। | ✗ गलत | हिमालय में अधिकतर नुकीली चोटियाँ मिलती हैं; यह अपेक्षाकृत नवीन पर्वत शृंखला है। |
| पठार प्रायः एक ओर से उठे होते हैं। | ✗ गलत | पठार आसपास की भूमि से उठा हुआ विस्तृत भूभाग होता है। |
| पर्वत और पहाड़ियाँ एक ही प्रकार के स्थलरूप हैं। | ✗ गलत | पर्वत अधिक ऊँचे और खड़ी ढलान वाले होते हैं; पहाड़ियाँ कम ऊँची और अधिक गोलाकार होती हैं। |
| गंगा, यमुना की सहायक नदी है। | ✗ गलत | यमुना, गंगा की सहायक नदी है। |
| मरुस्थल का वनस्पति और प्राणि जगत विलक्षण होता है। | ✓ सही | शुष्क पर्यावरण के अनुकूल विशेष जीव-वनस्पति पाई जाती है। |
| हिम के पिघलने से नदियों में जल आता है। | ✓ सही | ग्रीष्म में हिम पिघलकर नदियों में बहती है। |
| मैदानों में नदियों द्वारा एकत्र तलछट भूमि को उपजाऊ बनाते हैं। | ✓ सही | यही मैदानों की उपजाऊता का प्रमुख कारण है। |
| सभी मरुस्थल गर्म होते हैं। | ✗ गलत | गोबी ठंडा मरुस्थल है; अंटार्कटिका को भी मरुस्थलीय दृष्टि से देखा जाता है। |
शब्दों के जोड़े बनाइए
| स्तंभ A | सही जोड़ |
|---|---|
| एवरेस्ट गिरिशृंग | पर्वतारोहण |
| राफ्टिंग | नदी |
| ऊँट | मरुस्थल |
| पठार | विश्व की छत |
| गंगा का मैदान | धान के खेत |
| किलिमंजारो | अफ्रीका |
| यमुना | सहायक नदी |
अध्याय का सार — आगे बढ़ने से पहले
- स्थलरूप तीन प्रकार के हैं — पर्वत, पठार और मैदान। इनकी भौतिक विशेषताएँ और पर्यावरण अलग-अलग होते हैं।
- ऐतिहासिक समय से लोगों के क्रियाकलाप उस स्थलरूप से जुड़े रहे हैं जिसमें वे रहते हैं।
- प्रत्येक स्थलरूप चुनौतियाँ और अवसर दोनों प्रस्तुत करता है।
- भारतीय संस्कृति विविध स्थलरूपों को अनेक रूपों में सम्मान देती रही है — पर्वत, नदी और मैदान सबका अपना महत्व है।
आधिकारिक स्रोत:
• NCERT Chapter 3 PDF — fees103.pdf
• NCERT कक्षा 6 सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक सूची
• ncert.nic.in
• DIKSHA Portal — diksha.gov.in
© 2026 NCERTclasses.com | शैक्षिक Fair Use के अंतर्गत।


No comments:
Post a Comment