कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 11 — विद्युत
NCERT / RBSE पाठ्यक्रम 2026–27 · करके सीखिए · चार सचित्र आरेख व छह हल किए उदाहरण शामिल
प्रस्तुति: NCERTClasses टीम — पाठ्यपुस्तक विशेषज्ञों एवं अनुभवी शिक्षकों द्वारा तैयार।
आधार: NCERT कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यपुस्तक, अध्याय 11 एवं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान का पाठ्यक्रम 2026–27।
प्रकाशित: 24 सितंबर 2026 · अंतिम अद्यतन: 24 सितंबर 2026
घर में बल्ब जलाने के लिए स्विच दबाते ही रोशनी तुरंत आ जाती है — पर तार के अंदर इलेक्ट्रॉन असल में बहुत धीरे चलते हैं (एक मीटर तार में घंटों लग सकते हैं)। फिर रोशनी इतनी जल्दी कैसे आ जाती है?
और बिजली का बिल "यूनिट" में क्यों आता है — यह यूनिट असल में है क्या?
- धारा: I = Q/t (एम्पियर) · विभवांतर: V = W/Q (वोल्ट)
- ओम का नियम: V = IR — स्थिर ताप पर।
- प्रतिरोध: R = ρL/A — लंबाई से सीधा, अनुप्रस्थ काट से उल्टा अनुपात।
- श्रेणीक्रम: R = R₁+R₂+R₃ (धारा समान)। पार्श्वक्रम: 1/R = 1/R₁+1/R₂+1/R₃ (विभवांतर समान, कुल प्रतिरोध सबसे छोटे से भी कम)।
- तापीय प्रभाव (जूल का नियम): H = I²Rt
- विद्युत शक्ति: P = VI = I²R = V²/R · व्यावसायिक ऊर्जा इकाई: kWh (यूनिट)
कैसे पढ़ें — पहले सोचिए या ख़ुद करके देखिए, फिर व्याख्या पढ़िए:
🔍 जिज्ञासा · 🧪 करके देखिए · 📖 समझिए · 🔗 जोड़िए · ✅ जाँचिए
"जाँचिए" तीन स्तरों में है — 1, 2, 3।
विषय-सूची
- आधार जाँच
- विद्युत धारा और आवेश
- विद्युत विभव और विभवांतर
- परिपथ आरेख
- ओम का नियम
- प्रतिरोध के कारक — प्रतिरोधकता
- श्रेणीक्रम संयोजन
- पार्श्वक्रम संयोजन
- तापीय प्रभाव — जूल का नियम
- विद्युत शक्ति और ऊर्जा
- घरेलू विद्युत सुरक्षा
- आपकी सीढ़ी
- अंकन योजना
- सामान्य ग़लतियाँ
- अंतिम परीक्षण
- शब्दावली
- अभिभावक व शिक्षक के लिए
- NCERT से आगे
आधार जाँच
- परमाणु में इलेक्ट्रॉन पर कैसा आवेश होता है?
- धातु और अधातु में से कौन विद्युत का अच्छा चालक है?
- 1 किलोवाट कितने वाट के बराबर है?
उत्तर
1. ऋणात्मक। 2. धातु। 3. 1000 वाट। इसी अध्याय में यह समझेंगे कि आवेश का प्रवाह ही विद्युत धारा है, और शक्ति व ऊर्जा की सही गणना कैसे होती है।
1. विद्युत धारा और आवेश
🔍 जिज्ञासा — तार में इलेक्ट्रॉन धीरे-धीरे रेंगते हैं, फिर भी स्विच दबाते ही बल्ब तुरंत जल उठता है — कैसे?
📖 समझिए — जब स्विच बंद होता है, तार में मौजूद सभी इलेक्ट्रॉन एक साथ हिलना शुरू कर देते हैं — जैसे एक लंबी, पहले से पानी से भरी पाइप के एक सिरे पर पानी डालते ही दूसरे सिरे से तुरंत पानी निकलने लगता है, भले ही कोई एक बूँद उतनी दूर न गई हो। यही वजह है कि बल्ब तुरंत जलता है, भले ही व्यक्तिगत इलेक्ट्रॉन धीरे चलें।
विद्युत धारा (I) किसी चालक के अनुप्रस्थ काट से प्रति सेकंड प्रवाहित आवेश है:
I = Q/t
मात्रक एम्पियर (A) है। आवेश (Q) का मात्रक कूलॉम (C) है, और यह हमेशा इलेक्ट्रॉन के आवेश का पूर्ण गुणज होता है:
Q = ne
जहाँ n इलेक्ट्रॉनों की संख्या है और e एक इलेक्ट्रॉन का आवेश (1.6 × 10⁻¹⁹ C) है।
ध्यान रहे — परिपथ आरेखों में धारा की दिशा हमेशा धनात्मक टर्मिनल से ऋणात्मक टर्मिनल की ओर (परंपरागत धारा) मानी जाती है, जबकि असल में इलेक्ट्रॉन इसके ठीक उल्टी दिशा में बहते हैं। यह भ्रम की सबसे बड़ी वजह है — परंपरागत धारा की दिशा ही परीक्षा में हमेशा इस्तेमाल होती है।
🔗 जोड़िए — 1 एम्पियर धारा का मतलब है हर सेकंड 1 कूलॉम आवेश का प्रवाह — यानी लगभग 6.25 × 10¹⁸ इलेक्ट्रॉन प्रति सेकंड।
✅ जाँचिए
स्तर 1 विद्युत धारा का मात्रक क्या है? — उत्तर: एम्पियर (A)।
स्तर 2 परंपरागत धारा और इलेक्ट्रॉन प्रवाह की दिशा में क्या संबंध है? — उत्तर: दोनों बिल्कुल विपरीत दिशा में होते हैं — परंपरागत धारा धनात्मक से ऋणात्मक टर्मिनल की ओर मानी जाती है, इलेक्ट्रॉन इसके उल्टे बहते हैं।
स्तर 3 किसी चालक से 5 मिनट में 300 C आवेश प्रवाहित होता है। धारा ज्ञात कीजिए। — उत्तर: t = 5×60 = 300 सेकंड। I = Q/t = 300/300 = 1 A।
2. विद्युत विभव और विभवांतर
📖 समझिए — आवेश अपने आप नहीं बहता — उसे बहाने के लिए एक "धक्का" चाहिए, जो विभवांतर (potential difference) देता है। किसी बिंदु पर इकाई धनात्मक आवेश को अनंत से लाने में किया गया कार्य विद्युत विभव कहलाता है। दो बिंदुओं के बीच विभव का अंतर विभवांतर है:
V = W/Q
मात्रक वोल्ट (V) है — 1 वोल्ट का मतलब है 1 कूलॉम आवेश को एक बिंदु से दूसरे तक ले जाने में 1 जूल कार्य करना पड़े।
🔗 जोड़िए — सेल/बैटरी यही विभवांतर बनाए रखती है, जो आवेश को लगातार धकेलती रहती है — जैसे पंप पानी को पाइप में धकेलता है।
✅ जाँचिए
स्तर 1 विभवांतर का मात्रक क्या है? — उत्तर: वोल्ट (V)।
स्तर 2 1 वोल्ट की परिभाषा दीजिए। — उत्तर: यदि 1 कूलॉम आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में 1 जूल कार्य करना पड़े, तो उन बिंदुओं के बीच विभवांतर 1 वोल्ट कहलाता है।
3. परिपथ आरेख
चित्र 1 — सरल परिपथ: अमीटर हमेशा श्रेणी में (सीधे धारा-पथ में), वोल्टमीटर हमेशा पार्श्व में (प्रतिरोधक के आर-पार) जोड़ा जाता है।
📖 समझिए — अमीटर धारा मापता है, इसलिए इसे हमेशा श्रेणी क्रम में जोड़ा जाता है (ताकि पूरी धारा उसी से गुज़रे)। वोल्टमीटर विभवांतर मापता है, इसलिए इसे हमेशा पार्श्व क्रम में जोड़ा जाता है (ताकि वह उस हिस्से के दोनों सिरों का विभव माप सके)। इसी वजह से अमीटर का प्रतिरोध बहुत कम और वोल्टमीटर का बहुत अधिक रखा जाता है — ताकि दोनों परिपथ के व्यवहार को कम से कम प्रभावित करें।
✅ जाँचिए
स्तर 1 अमीटर को परिपथ में कैसे जोड़ा जाता है? — उत्तर: श्रेणी क्रम में।
स्तर 2 वोल्टमीटर को किस क्रम में जोड़ा जाता है, और क्यों? — उत्तर: पार्श्व क्रम में, ताकि वह प्रतिरोधक के दोनों सिरों के बीच का विभवांतर सीधे माप सके।
4. ओम का नियम
🔍 जिज्ञासा — क्या किसी चालक में जितना विभवांतर बढ़ाएँगे, धारा उसी अनुपात में बढ़ती रहेगी, हमेशा?
📖 समझिए — ओम का नियम कहता है: स्थिर ताप पर, किसी चालक में प्रवाहित धारा (I) उसके सिरों के बीच विभवांतर (V) के समानुपाती होती है:
V = IR
जहाँ R प्रतिरोध है, मात्रक ओम (Ω)। V को I के विरुद्ध आलेखित करने पर एक सीधी रेखा मिलती है, जो मूल बिंदु से गुज़रती है — रेखा का ढाल ही प्रतिरोध बताता है।
ध्यान रहे — सभी चालक ओम के नियम का पालन नहीं करते। डायोड जैसे कुछ उपकरणों का V-I आलेख सीधी रेखा नहीं होता — इन्हें अनओमीय (non-ohmic) कहा जाता है।
हल किया उदाहरण 1: किसी चालक से 2 A धारा प्रवाहित करने पर उसके सिरों के बीच 12 V विभवांतर मिलता है। प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
हल: R = V/I = 12/2 = 6 Ω।
✅ जाँचिए
स्तर 1 ओम के नियम का सूत्र लिखिए। — उत्तर: V = IR।
स्तर 2 V-I आलेख में रेखा का ढाल क्या दर्शाता है? — उत्तर: प्रतिरोध (R)।
स्तर 3 क्या डायोड ओम के नियम का पालन करता है? — उत्तर: नहीं — इसका V-I आलेख सीधी रेखा नहीं होता, इसलिए यह अनओमीय उपकरण है।
5. प्रतिरोध के कारक — प्रतिरोधकता
🔍 जिज्ञासा — दो तार एक ही पदार्थ के हों, पर एक पतला-लंबा और दूसरा मोटा-छोटा हो — किसका प्रतिरोध ज़्यादा होगा?
📖 समझिए — किसी चालक का प्रतिरोध चार बातों पर निर्भर करता है:
R = ρL/A
| कारक | प्रभाव |
|---|---|
| लंबाई (L) | सीधा अनुपात — लंबा तार, ज़्यादा प्रतिरोध |
| अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल (A) | उल्टा अनुपात — मोटा तार, कम प्रतिरोध |
| पदार्थ की प्रकृति (ρ) | हर पदार्थ की अपनी प्रतिरोधकता — धातुओं की कम, मिश्र धातुओं की ज़्यादा |
| ताप | अधिकांश धातुओं में ताप बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है |
प्रतिरोधकता (ρ) पदार्थ का अपना गुण है — तार की लंबाई-मोटाई बदलने से यह नहीं बदलता।
| पदार्थ | प्रतिरोधकता (लगभग, Ω·m) | उपयोग |
|---|---|---|
| चाँदी | 1.6 × 10⁻⁸ | सबसे कम प्रतिरोधकता, महँगी |
| ताँबा | 1.7 × 10⁻⁸ | घरेलू तार |
| नाइक्रोम (मिश्र धातु) | ~100 × 10⁻⁸ | हीटर, इस्तरी — जानबूझकर ज़्यादा प्रतिरोधकता |
| टंगस्टन | ~56 × 10⁻⁸ | बल्ब का फ़िलामेंट — उच्च गलनांक भी चाहिए |
🔗 जोड़िए — हीटर व इस्तरी में नाइक्रोम जैसी मिश्र धातु इसलिए उपयोग होती है क्योंकि इसकी प्रतिरोधकता ज़्यादा है (ज़्यादा ऊष्मा) और यह आसानी से ऑक्सीकृत नहीं होती उच्च ताप पर भी।
हल किया उदाहरण 2: एक तार को खींचकर उसकी लंबाई दोगुनी कर दी जाए (आयतन स्थिर रहे), तो नया प्रतिरोध पुराने से कितना गुना होगा?
हल: आयतन स्थिर रहने पर लंबाई दोगुनी होने से अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल आधा हो जाता है। R = ρL/A में L को 2L और A को A/2 रखें: R' = ρ(2L)/(A/2) = 4 × (ρL/A) = 4R — नया प्रतिरोध पुराने से चार गुना होगा।
✅ जाँचिए
स्तर 1 प्रतिरोध लंबाई के साथ कैसे बदलता है? — उत्तर: सीधा अनुपात — लंबाई बढ़ने पर प्रतिरोध बढ़ता है।
स्तर 2 हीटर के तार के लिए नाइक्रोम क्यों चुना जाता है? — उत्तर: इसकी प्रतिरोधकता अधिक है (ज़्यादा ऊष्मा उत्पन्न होती है) और यह उच्च ताप पर आसानी से ऑक्सीकृत नहीं होती।
स्तर 3 यदि किसी तार को खींचकर लंबाई तिगुनी कर दी जाए (आयतन स्थिर), तो प्रतिरोध कितना गुना होगा? — उत्तर: A नया = A/3। R' = ρ(3L)/(A/3) = 9R — नौ गुना।
6. श्रेणीक्रम संयोजन
चित्र 2 — श्रेणीक्रम में सभी प्रतिरोधकों से एक ही धारा गुज़रती है; कुल प्रतिरोध सभी का योग है।
📖 समझिए — जब प्रतिरोधक एक के बाद एक, एक ही रास्ते में जुड़े हों, तो यह श्रेणीक्रम है। ख़ासियतें:
- सभी से एक ही धारा (I) गुज़रती है।
- कुल विभवांतर, हर प्रतिरोधक के विभवांतर का योग है: V = V₁+V₂+V₃
- तुल्य प्रतिरोध: R = R₁+R₂+R₃ — हमेशा सबसे बड़े प्रतिरोधक से भी अधिक
हल किया उदाहरण 3: 2 Ω, 3 Ω और 5 Ω के तीन प्रतिरोधक श्रेणीक्रम में 10 V बैटरी से जोड़े गए हैं। धारा ज्ञात कीजिए।
हल: R = 2+3+5 = 10 Ω। I = V/R = 10/10 = 1 A।
🔗 जोड़िए — पुरानी सजावटी लड़ियाँ (fairy lights) अक्सर श्रेणीक्रम में होती हैं — इसीलिए एक बल्ब फ़्यूज़ होते ही पूरी लड़ी बुझ जाती है, क्योंकि धारा का एकमात्र रास्ता टूट जाता है।
✅ जाँचिए
स्तर 1 श्रेणीक्रम में तुल्य प्रतिरोध का सूत्र क्या है? — उत्तर: R = R₁+R₂+R₃।
स्तर 2 श्रेणीक्रम में सभी प्रतिरोधकों से क्या समान रहता है? — उत्तर: धारा (I)।
7. पार्श्वक्रम संयोजन
चित्र 3 — पार्श्वक्रम में सभी प्रतिरोधकों पर एक ही विभवांतर रहता है; हर एक अलग शाखा में धारा बँट जाती है।
📖 समझिए — जब प्रतिरोधक अलग-अलग शाखाओं में, दोनों सिरों पर एक साथ जुड़े हों, तो यह पार्श्वक्रम है। ख़ासियतें:
- सभी पर एक ही विभवांतर (V) रहता है — जैसे घर की हर डिवाइस को पूरे 220 V मिलते हैं।
- कुल धारा, हर शाखा की धारा का योग है: I = I₁+I₂+I₃
- तुल्य प्रतिरोध: 1/R = 1/R₁ + 1/R₂ + 1/R₃ — हमेशा सबसे छोटे प्रतिरोधक से भी कम
हल किया उदाहरण 4: 2 Ω और 3 Ω के दो प्रतिरोधक पार्श्वक्रम में जोड़े गए हैं। तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
हल: 1/R = 1/2 + 1/3 = 3/6 + 2/6 = 5/6। याद रखें — यहीं सबसे ज़्यादा ग़लती होती है: उत्तर 5/6 नहीं है, यह 1/R है! इसे उल्टा करना ज़रूरी है: R = 6/5 = 1.2 Ω।
🔗 जोड़िए — घर की वायरिंग हमेशा पार्श्वक्रम में होती है — इसीलिए एक कमरे का बल्ब फ़्यूज़ होने पर बाक़ी घर के उपकरण चलते रहते हैं, और हर उपकरण को पूरी 220 V मिलती है, चाहे कितने भी उपकरण एक साथ चल रहे हों।
✅ जाँचिए
स्तर 1 पार्श्वक्रम में सभी प्रतिरोधकों पर क्या समान रहता है? — उत्तर: विभवांतर (V)।
स्तर 2 घर की वायरिंग श्रेणीक्रम में क्यों नहीं होती? — उत्तर: श्रेणीक्रम में एक उपकरण बंद/ख़राब होते ही सभी उपकरण बंद हो जाएँगे, और हर उपकरण को पूरी वोल्टेज नहीं मिलेगी — पार्श्वक्रम में हर उपकरण स्वतंत्र रूप से चलता है, पूरी वोल्टेज के साथ।
स्तर 3 एक ही प्रतिरोध R के 5 प्रतिरोधक पार्श्वक्रम में जोड़े जाएँ, तो तुल्य प्रतिरोध क्या होगा? — उत्तर: 1/R_तुल्य = 1/R + 1/R + 1/R + 1/R + 1/R = 5/R। इसे उल्टा करें: R_तुल्य = R/5।
8. तापीय प्रभाव — जूल का नियम
🔍 जिज्ञासा — इस्तरी और हीटर में तार गरम होकर चमकने लगता है, पर घर के तारों में ऐसा नहीं होता — दोनों में एक ही धारा बहने पर भी यह फ़र्क़ क्यों?
चित्र 4 — तापीय प्रभाव के व्यावहारिक उपयोग: नाइक्रोम तार वाला हीटर (जानबूझकर ज़्यादा ऊष्मा) और सुरक्षा फ़्यूज़ (जानबूझकर कम गलनांक)।
📖 समझिए — जब विद्युत धारा किसी प्रतिरोधक से गुज़रती है, तो कुछ विद्युत ऊर्जा ऊष्मा में बदल जाती है — इसे तापीय प्रभाव कहते हैं। जूल का नियम इसकी मात्रा बताता है:
H = I²Rt
जहाँ H ऊष्मा (जूल में), I धारा, R प्रतिरोध, t समय (सेकंड में) है। ध्यान दें — ऊष्मा धारा के वर्ग के समानुपाती है, इसलिए धारा दोगुनी होने पर ऊष्मा चार गुना हो जाती है।
| व्यावहारिक उपयोग | सिद्धांत |
|---|---|
| विद्युत हीटर, इस्तरी | नाइक्रोम जैसे उच्च-प्रतिरोधकता तार से जानबूझकर ज़्यादा ऊष्मा |
| बल्ब का फ़िलामेंट | टंगस्टन तार इतना गरम होता है कि चमकने (प्रकाश देने) लगे |
| फ़्यूज़ (सुरक्षा) | जानबूझकर कम गलनांक वाला पतला तार — तय सीमा से ज़्यादा धारा बहते ही पिघलकर परिपथ तोड़ देता है, आग या नुक़सान से बचाता है |
हल किया उदाहरण 5: 5 Ω प्रतिरोध वाले तार से 2 A धारा 10 मिनट तक प्रवाहित होती है। उत्पन्न ऊष्मा ज्ञात कीजिए।
हल: t = 10×60 = 600 सेकंड। H = I²Rt = (2)² × 5 × 600 = 4 × 5 × 600 = 12,000 जूल।
🔗 जोड़िए — घर की वायरिंग में मोटे, कम-प्रतिरोध वाले ताँबे के तार इसलिए उपयोग होते हैं ताकि साधारण उपयोग में तापीय प्रभाव नगण्य रहे — सिर्फ़ फ़्यूज़ में जानबूझकर पतला, कम-गलनांक तार रखा जाता है, ताकि वही सुरक्षा के लिए पिघले, घर के बाक़ी तार नहीं।
✅ जाँचिए
स्तर 1 जूल के नियम का सूत्र क्या है? — उत्तर: H = I²Rt।
स्तर 2 फ़्यूज़ तार में जानबूझकर क्या रखा जाता है? — उत्तर: कम गलनांक, ताकि तय सीमा से ज़्यादा धारा पर वह पिघलकर परिपथ तोड़ दे।
स्तर 3 अगर धारा तिगुनी कर दी जाए, तो उतने ही समय में उत्पन्न ऊष्मा कितनी गुना होगी? — उत्तर: ऊष्मा I² के समानुपाती है, इसलिए धारा तिगुनी होने पर ऊष्मा 9 गुना होगी।
9. विद्युत शक्ति और ऊर्जा
📖 समझिए — विद्युत शक्ति (P) बताती है कि कोई उपकरण कितनी तेज़ी से विद्युत ऊर्जा का उपयोग करता है:
P = VI = I²R = V²/R
मात्रक वाट (W) है। बड़े पैमाने पर विद्युत ऊर्जा मापने के लिए किलोवाट-घंटा (kWh) — यानी "यूनिट" — इस्तेमाल होती है, जो बिजली के बिल का आधार है:
ऊर्जा (kWh) = शक्ति (kW) × समय (घंटे)
हल किया उदाहरण 6 — बिजली का बिल: एक 1000 W का हीटर रोज़ 4 घंटे, एक महीने (30 दिन) चलता है। यदि प्रति यूनिट दर ₹7 हो, तो कुल ख़र्च ज्ञात कीजिए।
हल: शक्ति = 1000 W = 1 kW। रोज़ ऊर्जा खपत = 1 × 4 = 4 kWh (4 यूनिट)। महीने भर की खपत = 4 × 30 = 120 यूनिट। कुल ख़र्च = 120 × 7 = ₹840।
🔗 जोड़िए — यही गणना बताती है कि घर में सबसे ज़्यादा बिजली कौन-से उपकरण खाते हैं — ज़्यादा शक्ति (W) और ज़्यादा उपयोग-समय, दोनों मिलकर बिल बढ़ाते हैं। एक कम-शक्ति वाला LED बल्ब पूरे दिन चलने पर भी, कुछ घंटे चलने वाले हीटर से कहीं कम यूनिट खाता है।
✅ जाँचिए
स्तर 1 विद्युत ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक क्या है? — उत्तर: किलोवाट-घंटा (kWh), जिसे "यूनिट" कहा जाता है।
स्तर 2 2000 W का गीज़र 30 मिनट रोज़ चले, तो एक दिन में कितनी यूनिट ख़र्च होगी? — उत्तर: 2 kW × 0.5 घंटा = 1 यूनिट प्रतिदिन।
स्तर 3 100 W के 5 बल्ब रोज़ 6 घंटे और एक 1500 W का AC रोज़ 3 घंटे चले, तो महीने (30 दिन) की कुल यूनिट व लागत (₹7/यूनिट) ज्ञात कीजिए। — उत्तर: बल्ब: 5×100=500W=0.5kW; रोज़ 0.5×6=3 kWh। AC: 1.5kW; रोज़ 1.5×3=4.5 kWh। रोज़ कुल = 3+4.5 = 7.5 kWh। महीने में = 7.5×30 = 225 यूनिट। लागत = 225×7 = ₹1,575।
10. घरेलू विद्युत सुरक्षा — शॉर्ट-सर्किट और ओवरलोडिंग
📖 समझिए — घर की वायरिंग में दो आम ख़तरे होते हैं:
| ख़तरा | क्या होता है | नतीजा |
|---|---|---|
| शॉर्ट-सर्किट | जब धनात्मक व ऋणात्मक तार सीधे (बिना किसी उपकरण/प्रतिरोध के) आपस में छू जाएँ | प्रतिरोध लगभग शून्य हो जाने से धारा अचानक बहुत बढ़ जाती है, तेज़ ऊष्मा (H=I²Rt) पैदा होती है — आग लगने का ख़तरा |
| ओवरलोडिंग | जब एक ही पार्श्वक्रम लाइन में ज़रूरत से बहुत ज़्यादा उपकरण एक साथ चला दिए जाएँ | कुल धारा तार की सुरक्षित सीमा से आगे निकल जाती है, तार गरम होकर पिघल भी सकता है |
🔗 जोड़िए — यही वजह है कि हर घर की मुख्य लाइन में फ़्यूज़ या MCB (मिनिएचर सर्किट ब्रेकर) लगाया जाता है — दोनों ही स्थितियों में तय सीमा से ज़्यादा धारा बहते ही यह अपने-आप परिपथ तोड़ देता है, इससे पहले कि तार ख़तरनाक रूप से गरम हो जाए।
✅ जाँचिए
स्तर 1 शॉर्ट-सर्किट में धारा अचानक क्यों बढ़ जाती है? — उत्तर: क्योंकि तारों के सीधे छूने से प्रतिरोध लगभग शून्य हो जाता है, और V=IR के अनुसार कम प्रतिरोध पर धारा बहुत बढ़ जाती है।
स्तर 2 ओवरलोडिंग से बचने के लिए क्या लगाया जाता है? — उत्तर: फ़्यूज़ या MCB।
आपकी सीढ़ी
| स्तर | कुल | इतने सही होने पर | आप हैं |
|---|---|---|---|
| स्तर 1 | 13 | 10+ | परिचित |
| स्तर 2 | 13 | 9+ | दक्ष — बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार |
| स्तर 3 | 6 | 4+ | कुशल |
अंकन योजना
(एक विशिष्ट परीक्षक के दृष्टिकोण का उदाहरण — यह आधिकारिक योजना नहीं है।)
प्रश्न (5 अंक): 4 Ω, 6 Ω और 12 Ω के तीन प्रतिरोधक पार्श्वक्रम में 12 V बैटरी से जुड़े हैं। तुल्य प्रतिरोध, कुल धारा तथा प्रत्येक शाखा की धारा ज्ञात कीजिए।
सही सूत्र से 1/R निकालना। 1 अंक
सही ढंग से उल्टा करके R निकालना। 1 अंक
कुल धारा की गणना। 1 अंक
हर शाखा की धारा अलग-अलग निकालना। 2 अंक
सामान्य ग़लतियाँ
| सामान्य ग़लती | सही तथ्य |
|---|---|
| पार्श्वक्रम में 1/R निकालकर उसे ही उत्तर मान लेना | 1/R निकालने के बाद उसे उल्टा करना ज़रूरी है — R = 1/(1/R)। |
| "इलेक्ट्रॉन धनात्मक से ऋणात्मक की ओर बहते हैं" | इलेक्ट्रॉन ऋणात्मक से धनात्मक की ओर बहते हैं; परंपरागत धारा की दिशा इसके उल्टी मानी जाती है। |
| "अमीटर पार्श्व में, वोल्टमीटर श्रेणी में जुड़ता है" | उल्टा — अमीटर श्रेणी में, वोल्टमीटर पार्श्व में। |
| समय को मिनट/घंटे में ही सूत्र में रख देना | H=I²Rt में समय हमेशा सेकंड में होना चाहिए। |
| "सभी चालक ओम के नियम का पालन करते हैं" | डायोड जैसे कुछ उपकरण अनओमीय होते हैं। |
अंतिम परीक्षण — मिश्रित
10+ सही = अध्याय में महारत।
- विद्युत धारा का सूत्र लिखिए।
- ओम के नियम का सूत्र क्या है?
- अमीटर को परिपथ में कैसे जोड़ा जाता है?
- प्रतिरोध लंबाई के साथ कैसे बदलता है?
- श्रेणीक्रम में तुल्य प्रतिरोध का सूत्र क्या है?
- पार्श्वक्रम में तुल्य प्रतिरोध हमेशा कैसा होता है?
- जूल के नियम का सूत्र लिखिए।
- विद्युत शक्ति का सूत्र लिखिए (तीन रूपों में)।
- बिजली के बिल की इकाई क्या है?
- फ़्यूज़ तार में क्या ख़ासियत होती है?
- (अध्याय 10) निकट दृष्टि दोष में कौन-सा लेंस लगता है?
- (अध्याय 9) लेंस सूत्र लिखिए।
उत्तर — 1. I=Q/t | 2. V=IR | 3. श्रेणी क्रम में | 4. सीधा अनुपात (बढ़ती है) | 5. R=R₁+R₂+R₃ | 6. सबसे छोटे प्रतिरोधक से भी कम | 7. H=I²Rt | 8. P=VI=I²R=V²/R | 9. किलोवाट-घंटा (kWh/यूनिट) | 10. कम गलनांक | 11. अवतल लेंस | 12. 1/v−1/u=1/f
शब्दावली
| हिंदी | English | हिंदी | English |
|---|---|---|---|
| विद्युत धारा | Electric current | श्रेणीक्रम | Series combination |
| विभवांतर | Potential difference | पार्श्वक्रम | Parallel combination |
| प्रतिरोध | Resistance | तापीय प्रभाव | Heating effect |
| प्रतिरोधकता | Resistivity | विद्युत शक्ति | Electric power |
| अमीटर | Ammeter | किलोवाट-घंटा | Kilowatt-hour |
| वोल्टमीटर | Voltmeter | फ़्यूज़ | Fuse |
अभिभावक व शिक्षक के लिए
5 मिनट जाँच: ओम का नियम, श्रेणी/पार्श्व के सूत्र, जूल का नियम — तीनों लिखवाएँ। घर की वायरिंग किस क्रम में होती है, और क्यों? बिजली का बिल कैसे calculate होता है, एक उदाहरण से पूछें।
घर पर करने योग्य: घर के 3-4 उपकरणों की watt rating (उन पर लिखी होती है) नोट करवाकर, उनका daily/monthly यूनिट ख़र्च ख़ुद calculate करवाएँ — यह असली जीवन से सीधा जुड़ाव बनाता है।
NCERT से आगे — जिज्ञासु पाठकों के लिए
यह भाग RBSE/NCERT कक्षा 10 पाठ्यक्रम से आगे का है और बोर्ड परीक्षा के लिए ज़रूरी नहीं है, केवल सरकारी और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विश्वविद्यालय स्रोतों पर आधारित है।
वोल्टा की पहली बैटरी
1800 में इतालवी वैज्ञानिक एलेस्सांद्रो वोल्टा ने चाँदी और जस्ते की परतों को नमक के घोल में भीगे कपड़े के साथ एक के ऊपर एक रखकर पहली स्थिर, निरंतर विद्युत धारा देने वाली "वोल्टाइक पाइल" बनाई — इतिहासकार इसे पहली असली बैटरी मानते हैं। इससे पहले वैज्ञानिकों के पास सिर्फ़ क्षणिक स्थैतिक विद्युत के झटके ही उपलब्ध थे — वोल्टा के आविष्कार ने पहली बार लगातार बहने वाली धारा पर प्रयोग करना संभव बनाया, ठीक वैसी ही धारा जिसे यह अध्याय पढ़ाता है। विभव (potential) का मात्रक "वोल्ट" उन्हीं के नाम पर है।
ओम की खोज को शुरू में ठुकरा दिया गया था
जर्मन भौतिक विज्ञानी जॉर्ज साइमन ओम ने 1827 में अपना प्रसिद्ध नियम प्रकाशित किया, पर उस समय के जर्मन वैज्ञानिक समुदाय ने इसे बहुत ठंडी प्रतिक्रिया दी — कुछ इतिहासकारों के अनुसार इसे लगभग नकार ही दिया गया, जिससे निराश होकर ओम ने कुछ समय के लिए अकादमिक जगत ही छोड़ दिया। कई वर्षों बाद, जब ब्रिटेन और बाक़ी यूरोप में उनके काम को मान्यता मिली, तब जाकर उन्हें उचित श्रेय मिला — प्रतिरोध का मात्रक "ओम" आज उन्हीं के नाम पर है।
एडिसन बनाम टेस्ला — AC-DC की ऐतिहासिक लड़ाई
1880 के दशक में थॉमस एडिसन दिष्ट धारा (DC) के पक्ष में थे, जबकि निकोला टेस्ला व जॉर्ज वेस्टिंगहाउस प्रत्यावर्ती धारा (AC) को बढ़ावा दे रहे थे — इतिहास में इसे "करंट्स का युद्ध" कहा जाता है। AC की जीत हुई, क्योंकि ट्रांसफ़ॉर्मर से इसकी वोल्टेज आसानी से बदली जा सकती है, जिससे लंबी दूरी तक कम ऊर्जा-हानि के साथ बिजली भेजना संभव होता है — आज दुनिया भर के घरों और भारत के राष्ट्रीय ग्रिड में यही AC बिजली आती है।
भारत का राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड
भारत सरकार का केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (Central Electricity Authority) देश के लगभग पूरे हिस्से को जोड़ने वाले "वन नेशन, वन ग्रिड" नामक एकीकृत राष्ट्रीय ग्रिड की देखरेख करता है, जो बिजली उत्पादन से लेकर हर घर तक पहुँचने तक — ठीक इस अध्याय में पढ़े गए धारा, विभवांतर और प्रतिरोध के सिद्धांतों पर ही, बस बहुत बड़े पैमाने पर काम करता है।
स्मार्ट मीटर — बिजली के बिल का डिजिटल भविष्य
पारंपरिक बिजली मीटर महीने में एक बार पढ़े जाते थे, पर आधुनिक स्मार्ट मीटर हर घंटे (या उससे भी ज़्यादा बार) बिजली की खपत रिकॉर्ड करके सीधे बिजली कंपनी को भेज देते हैं — बिल्कुल इसी अध्याय में पढ़े गए P=VI सिद्धांत पर आधारित, बस स्वचालित रूप से लगातार मापते हुए। भारत सरकार का बिजली मंत्रालय देश भर में स्मार्ट मीटर लगाने का बड़ा अभियान चला रहा है, ताकि उपभोक्ता अपनी वास्तविक समय की खपत देख सकें और बिजली चोरी पर भी बेहतर निगरानी हो सके।
स्रोत
- ncert.nic.in — NCERT, भारत सरकार
- ePathshala — शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार
- cea.nic.in — केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, भारत सरकार
नोट: इन स्रोतों से कोई भी अंश सीधे नहीं लिया गया है; ऊपर के सभी कथन लेखक के अपने शब्दों में सामान्य शैक्षिक समझ के लिए लिखे गए हैं।
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