कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 9 — प्रकाश: परावर्तन तथा अपवर्तन
NCERT / RBSE पाठ्यक्रम 2026–27 · करके सीखिए · तीन सचित्र आरेख शामिल
प्रस्तुति: NCERTClasses टीम — पाठ्यपुस्तक विशेषज्ञों एवं अनुभवी शिक्षकों द्वारा तैयार।
आधार: NCERT कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यपुस्तक, अध्याय 9 एवं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान का पाठ्यक्रम 2026–27।
तैयार: पाठ्यपुस्तक से संकलित, AI सहायता से व्यवस्थित, लेखक द्वारा समीक्षित। सभी आरेख मौलिक हैं।
प्रकाशित: 24 सितंबर 2026 · अंतिम अद्यतन: 24 सितंबर 2026
चम्मच के अंदर वाली सतह में अपना चेहरा देखिए — पास लाने पर सीधा और बड़ा, दूर ले जाने पर उल्टा दिख सकता है। अब उसी चम्मच को पलटकर बाहर वाली सतह में देखिए — हमेशा सीधा, पर छोटा दिखेगा। एक ही चम्मच, दूरी बदलते ही अलग-अलग प्रतिबिम्ब — क्यों?
और गिलास में रखी पेंसिल पानी में जाकर मुड़ी हुई क्यों दिखती है, जबकि पेंसिल तो सीधी ही है?
- अवतल दर्पण (अंदर मुड़ा) — अभिसारी, प्रतिबिम्ब वस्तु की स्थिति पर निर्भर। उत्तल दर्पण (बाहर उभरा) — अपसारी, हमेशा छोटा-सीधा-आभासी प्रतिबिम्ब।
- दर्पण सूत्र: 1/v + 1/u = 1/f · आवर्धन: m = −v/u = h'/h
- नई कार्तीय चिन्ह परिपाटी — दूरियाँ ध्रुव से मापें; प्रकाश की दिशा में धनात्मक, विपरीत में ऋणात्मक।
- अपवर्तन — माध्यम बदलने पर प्रकाश की दिशा मुड़ना, क्योंकि चाल बदलती है। अपवर्तनांक n यही बताता है।
- उत्तल लेंस (बीच मोटा) — अभिसारी। अवतल लेंस (बीच पतला) — अपसारी।
- लेंस सूत्र: 1/v − 1/u = 1/f · क्षमता: P = 1/f (मीटर में), मात्रक डायोप्टर (D)।
कैसे पढ़ें — पहले सोचिए या ख़ुद करके देखिए, फिर व्याख्या पढ़िए:
🔍 जिज्ञासा · 🧪 करके देखिए · 📖 समझिए · 🔗 जोड़िए · ✅ जाँचिए
"जाँचिए" तीन स्तरों में है — 1, 2, 3।
विषय-सूची
- आधार जाँच
- गोलीय दर्पण — प्रकार व प्रतिबिम्ब
- किरण आरेख कैसे बनाएँ
- चिन्ह परिपाटी
- दर्पण सूत्र व आवर्धन
- अपवर्तन — दिशा क्यों बदलती है
- अपवर्तनांक
- गोलीय लेंस — प्रकार व प्रतिबिम्ब
- लेंस सूत्र, आवर्धन व क्षमता
- आपकी सीढ़ी
- अंकन योजना
- सामान्य ग़लतियाँ
- अंतिम परीक्षण
- शब्दावली
- अभिभावक व शिक्षक के लिए
- NCERT से आगे
आधार जाँच
- परावर्तन का नियम क्या है? (कक्षा 8-9 से)
- समतल दर्पण में बना प्रतिबिम्ब कैसा होता है?
- फ़ोकस दूरी किसे कहते हैं?
उत्तर
1. आपतन कोण = परावर्तन कोण, और आपतित किरण, परावर्तित किरण व अभिलंब एक ही तल में होते हैं। 2. आभासी, सीधा, वस्तु के बराबर आकार का, दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर। 3. ध्रुव से मुख्य फ़ोकस तक की दूरी। इस अध्याय में यही अवधारणाएँ गोलीय सतहों (दर्पण, लेंस) पर लागू होंगी।
1. गोलीय दर्पण — प्रकार व प्रतिबिम्ब
🔍 जिज्ञासा — डॉक्टर के सिर पर बँधा गोल दर्पण, कार का साइड मिरर, और टॉर्च के पीछे वाला परावर्तक — तीनों गोलीय दर्पण हैं, पर तीनों का काम अलग क्यों है?
🧪 करके देखिए — एक चमकदार स्टील की कटोरी लीजिए। उसके अंदर वाली सतह में अपनी उँगली को पास लाकर, फिर धीरे-धीरे दूर ले जाकर देखिए। पहले सोचिए — क्या प्रतिबिम्ब हमेशा एक जैसा रहेगा, या दूरी के साथ बदलेगा?
क्या हुआ? बहुत पास लाने पर उँगली बड़ी, सीधी दिखी; दूर ले जाने पर वह उल्टी हो गई — और कहीं बीच में धुँधली भी हो गई होगी। यही अवतल दर्पण की ख़ासियत है — प्रतिबिम्ब वस्तु की दूरी पर निर्भर करता है।
चित्र 1 — मुख्य फोकस (F) से परे रखी वस्तु का, अवतल दर्पण से, वास्तविक, उल्टा और छोटा प्रतिबिम्ब C व F के बीच बनता है।
📖 समझिए — जो दर्पण अंदर की ओर मुड़ा होता है (कटोरी जैसा), उसे अवतल दर्पण कहते हैं — यह अभिसारी (converging) है, यानी समांतर किरणों को एक बिंदु (मुख्य फ़ोकस) पर मिलाता है। जो दर्पण बाहर की ओर उभरा होता है, उसे उत्तल दर्पण कहते हैं — यह अपसारी (diverging) है।
| वस्तु की स्थिति (अवतल दर्पण) | प्रतिबिम्ब |
|---|---|
| अनंत पर | F पर, बिंदु जैसा, वास्तविक, बहुत छोटा |
| C से परे | C व F के बीच, वास्तविक, उल्टा, छोटा |
| ठीक C पर | ठीक C पर, वास्तविक, उल्टा, वस्तु के बराबर |
| C व F के बीच | C से परे, वास्तविक, उल्टा, बड़ा |
| ठीक F पर | अनंत पर, वास्तविक, बहुत बड़ा |
| F व ध्रुव (P) के बीच | दर्पण के पीछे, आभासी, सीधा, बड़ा |
उत्तल दर्पण हमेशा सरल है — वस्तु चाहे जहाँ हो, प्रतिबिम्ब हमेशा दर्पण के पीछे, आभासी, सीधा और छोटा बनता है। इसीलिए इसे गाड़ियों के साइड मिरर में इस्तेमाल किया जाता है — देखने का क्षेत्र (field of view) बड़ा मिलता है।
🔗 जोड़िए — पहले सवाल का जवाब: कटोरी की अंदर वाली सतह अवतल है — पास लाने पर (F के अंदर) आभासी-बड़ा प्रतिबिम्ब बना, दूर ले जाने पर (F से परे) वास्तविक-उल्टा प्रतिबिम्ब बना। डॉक्टर का दर्पण भी अवतल होता है — पास रखी वस्तु (मरीज़ का अंग) का बड़ा प्रतिबिम्ब दिखाने के लिए।
✅ जाँचिए
स्तर 1 कौन-सा दर्पण अभिसारी है? — उत्तर: अवतल दर्पण।
स्तर 2 उत्तल दर्पण को गाड़ियों में क्यों लगाया जाता है? — उत्तर: यह हमेशा आभासी, सीधा, छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है, जिससे पीछे का बड़ा क्षेत्र एक साथ दिख जाता है — देखने का क्षेत्र बढ़ जाता है।
स्तर 3 अगर कोई वस्तु अवतल दर्पण के ठीक फ़ोकस (F) पर रखी हो, तो प्रतिबिम्ब कहाँ बनेगा और क्यों यह व्यावहारिक रूप से मुश्किल स्थिति है? — उत्तर: प्रतिबिम्ब अनंत पर बनेगा, बहुत बड़ा। यह मुश्किल इसलिए है क्योंकि परावर्तित किरणें एक-दूसरे के लगभग समांतर हो जाती हैं, कभी नहीं मिलतीं — व्यावहारिक रूप से एक स्पष्ट, सीमित प्रतिबिम्ब पकड़ना कठिन होता है। यही सिद्धांत टॉर्च और सर्चलाइट में उल्टा इस्तेमाल होता है — बल्ब को ठीक F पर रखकर समांतर किरण-पुंज बनाया जाता है।
2. किरण आरेख कैसे बनाएँ
📖 समझिए — प्रतिबिम्ब की सही स्थिति जानने के लिए, कम से कम दो किरणें खींचनी होती हैं, जिनके परावर्तन का रास्ता हमें पहले से पता है:
| किरण | नियम |
|---|---|
| मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली किरण | परावर्तन के बाद (अवतल में) मुख्य फ़ोकस से होकर गुज़रती है, या (उत्तल में) फ़ोकस से आती हुई प्रतीत होती है |
| मुख्य फ़ोकस से होकर आने वाली किरण | परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समांतर हो जाती है |
| वक्रता केंद्र (C) से होकर आने वाली किरण | परावर्तन के बाद उसी रास्ते वापस लौटती है (क्योंकि वह अभिलंब पर पड़ती है) |
| ध्रुव (P) पर पड़ने वाली किरण | परावर्तन के नियम अनुसार परावर्तित होती है (मुख्य अक्ष से बराबर कोण पर) |
🔗 जोड़िए — इनमें से कोई भी दो किरणें खींचकर उनका प्रतिच्छेदन बिंदु ही प्रतिबिम्ब का शीर्ष बताता है।
3. चिन्ह परिपाटी
📖 समझिए — सूत्रों में सही उत्तर पाने के लिए नई कार्तीय चिन्ह परिपाटी अपनाई जाती है:
- सभी दूरियाँ ध्रुव (P) से मापी जाती हैं।
- वस्तु हमेशा दर्पण के बाईं ओर रखी मानी जाती है — प्रकाश बाएँ से दाएँ चलता है।
- प्रकाश की दिशा में मापी गई दूरियाँ धनात्मक (+), विपरीत दिशा में ऋणात्मक (−)।
- मुख्य अक्ष के ऊपर मापी ऊँचाई धनात्मक, नीचे ऋणात्मक।
इसका सीधा असर: वस्तु दूरी (u) हमेशा ऋणात्मक होती है (क्योंकि वस्तु दर्पण के बाईं ओर है)। अवतल दर्पण की फ़ोकस दूरी (f) ऋणात्मक, उत्तल दर्पण की धनात्मक होती है।
✅ जाँचिए
स्तर 1 वस्तु दूरी (u) का चिन्ह हमेशा क्या होता है? — उत्तर: ऋणात्मक।
स्तर 2 अवतल दर्पण की फ़ोकस दूरी का चिन्ह क्या है, और क्यों? — उत्तर: ऋणात्मक — क्योंकि इसका फ़ोकस दर्पण के सामने (बाईं ओर, प्रकाश की दिशा के विपरीत) होता है।
4. दर्पण सूत्र व आवर्धन
📖 समझिए — वस्तु दूरी (u), प्रतिबिम्ब दूरी (v) और फ़ोकस दूरी (f) के बीच संबंध:
1/v + 1/u = 1/f
आवर्धन (magnification) बताता है प्रतिबिम्ब वस्तु से कितना बड़ा/छोटा और सीधा/उल्टा है:
m = h'/h = −v/u
जहाँ h' प्रतिबिम्ब की ऊँचाई, h वस्तु की ऊँचाई है। m धनात्मक हो तो प्रतिबिम्ब सीधा (और आभासी); m ऋणात्मक हो तो उल्टा (और वास्तविक)।
उदाहरण: एक अवतल दर्पण की फ़ोकस दूरी 15 cm है। 30 cm दूर रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब कहाँ बनेगा?
हल: f = −15 cm, u = −30 cm। सूत्र में रखें: 1/v = 1/f − 1/u = (1/−15) − (1/−30) = −1/15 + 1/30 = −1/30। तो v = −30 cm — प्रतिबिम्ब भी 30 cm पर, वास्तविक (क्योंकि v ऋणात्मक)। यह वस्तु ठीक वक्रता केंद्र (C = 2f = 30 cm) पर थी, इसलिए प्रतिबिम्ब भी वहीं, वस्तु के बराबर आकार का बना — ऊपर की तालिका से मेल खाता है।
✅ जाँचिए
स्तर 1 आवर्धन का सूत्र क्या है? — उत्तर: m = h'/h = −v/u।
स्तर 2 अगर m = +2 मिले, तो प्रतिबिम्ब कैसा है? — उत्तर: सीधा, आभासी, वस्तु से दोगुना बड़ा।
स्तर 3 एक उत्तल दर्पण (f = +20 cm) से 40 cm दूर रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब स्थान बताइए। — उत्तर: u = −40, f = +20। 1/v = 1/f − 1/u = 1/20 − (−1/40) = 1/20 + 1/40 = 3/40। v = 40/3 ≈ +13.3 cm — धनात्मक, यानी दर्पण के पीछे, आभासी — जैसा उत्तल दर्पण से हमेशा अपेक्षित है।
5. अपवर्तन — दिशा क्यों बदलती है
🔍 जिज्ञासा — पानी में झुकी पेंसिल असल में मुड़ी क्यों दिखती है?
🧪 करके देखिए — एक गिलास पानी में एक पेंसिल तिरछी डालिए और बगल से देखिए। पहले सोचिए — क्या पेंसिल सच में मुड़ जाती है, या यह सिर्फ़ आँखों का धोखा है?
📖 समझिए — जब प्रकाश एक माध्यम (जैसे हवा) से दूसरे माध्यम (जैसे पानी या काँच) में तिरछा प्रवेश करता है, तो माध्यम बदलने पर उसकी चाल बदल जाती है, और इसी कारण उसकी दिशा मुड़ जाती है — इसे अपवर्तन कहते हैं। पेंसिल सच में नहीं मुड़ती — पानी से आपकी आँख तक आने वाली किरणें मुड़ती हैं, इसलिए दिमाग़ को ग़लत जगह से आती हुई लगती हैं।
चित्र 2 — हवा से काँच में जाते समय किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है; काँच से बाहर निकलते समय वापस उतने ही कोण से मुड़कर मूल दिशा के समांतर हो जाती है, पर थोड़ी खिसकी हुई (पार्श्व विस्थापन)।
🔗 जोड़िए — ध्यान दें: निर्गत किरण मूल आपतित किरण के समांतर होती है, बस थोड़ी खिसकी होती है — यह इसलिए क्योंकि स्लैब की दोनों सतहें आपस में समांतर हैं।
✅ जाँचिए
स्तर 1 अपवर्तन किस कारण होता है? — उत्तर: माध्यम बदलने पर प्रकाश की चाल बदलने के कारण।
स्तर 2 आयताकार स्लैब से गुज़रने के बाद निर्गत किरण की दिशा मूल किरण से कैसे संबंधित है? — उत्तर: वह मूल किरण के समांतर होती है, बस पार्श्व रूप से थोड़ी विस्थापित।
6. अपवर्तनांक
📖 समझिए — हर माध्यम प्रकाश को अलग गति से गुज़रने देता है। किसी माध्यम का अपवर्तनांक (n) बताता है कि प्रकाश निर्वात/हवा की तुलना में उस माध्यम में कितना धीमा चलता है:
n = निर्वात में प्रकाश की चाल (c) / माध्यम में प्रकाश की चाल (v)
जितना ज़्यादा अपवर्तनांक, उतना सघन माध्यम, उतनी ज़्यादा किरण मुड़ती है। हीरे का अपवर्तनांक पानी से कहीं ज़्यादा है — इसीलिए हीरे में प्रकाश बहुत ज़्यादा मुड़ता और चमकता है।
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स्तर 1 अपवर्तनांक अधिक होने का क्या मतलब है? — उत्तर: उस माध्यम में प्रकाश की चाल कम होती है, और वह प्रकाशिक रूप से सघन होता है।
7. गोलीय लेंस — प्रकार व प्रतिबिम्ब
🔍 जिज्ञासा — आवर्धक काँच (magnifying glass) छोटी चीज़ों को बड़ा क्यों दिखाता है, जबकि चश्मे का कोई लेंस उसी चीज़ को छोटा दिखा सकता है?
🧪 करके देखिए — अगर घर में कोई आवर्धक लेंस या चश्मा हो, तो उससे किताब के अक्षर देखिए, पास और दूर ले जाकर। पहले सोचिए — क्या लेंस का आकार (बीच में मोटा या पतला) इससे कोई संबंध रखता है?
चित्र 3 — 2F1 से परे रखी वस्तु का, उत्तल लेंस से, वास्तविक, उल्टा और छोटा प्रतिबिम्ब F2 व 2F2 के बीच बनता है।
📖 समझिए — जो लेंस बीच में मोटा, किनारों पर पतला होता है, उसे उत्तल लेंस (convex lens) कहते हैं — यह अभिसारी है। जो बीच में पतला, किनारों पर मोटा होता है, वह अवतल लेंस (concave lens) है — अपसारी।
| वस्तु की स्थिति (उत्तल लेंस) | प्रतिबिम्ब |
|---|---|
| अनंत पर | F2 पर, वास्तविक, बहुत छोटा |
| 2F1 से परे | F2 व 2F2 के बीच, वास्तविक, उल्टा, छोटा |
| ठीक 2F1 पर | ठीक 2F2 पर, वास्तविक, उल्टा, बराबर आकार |
| F1 व 2F1 के बीच | 2F2 से परे, वास्तविक, उल्टा, बड़ा |
| ठीक F1 पर | अनंत पर, वास्तविक, बहुत बड़ा |
| F1 व प्रकाशिक केंद्र (O) के बीच | वस्तु की ओर ही, आभासी, सीधा, बड़ा — यही आवर्धक लेंस का सिद्धांत है |
अवतल लेंस हमेशा सरल है — वस्तु चाहे जहाँ हो, प्रतिबिम्ब हमेशा आभासी, सीधा और छोटा बनता है, वस्तु की ओर ही।
🔗 जोड़िए — पहले सवाल का जवाब: आवर्धक काँच में वस्तु को F1 के अंदर रखा जाता है — तभी बड़ा, आभासी प्रतिबिम्ब बनता है। चश्मे के लेंस की स्थिति अलग है — वहाँ लक्ष्य वस्तु को बड़ा दिखाना नहीं, बल्कि आँख के अंदर प्रतिबिम्ब को सही जगह (रेटिना पर) लाना है, इसलिए ज़रूरत के हिसाब से उत्तल या अवतल — दोनों तरह के लेंस चश्मे में इस्तेमाल होते हैं।
✅ जाँचिए
स्तर 1 कौन-सा लेंस हमेशा छोटा, आभासी प्रतिबिम्ब बनाता है? — उत्तर: अवतल लेंस।
स्तर 2 आवर्धक काँच के रूप में उत्तल लेंस का उपयोग करने के लिए वस्तु कहाँ रखनी चाहिए? — उत्तर: मुख्य फ़ोकस (F1) और प्रकाशिक केंद्र के बीच।
स्तर 3 क्या दो उत्तल लेंस एक साथ रखकर हमेशा एक बड़ा उत्तल लेंस जैसा व्यवहार मिलेगा? — उत्तर: सामान्यतः हाँ, संयुक्त फ़ोकस दूरी बदलेगी (क्षमताएँ जुड़ती हैं, अगले भाग में देखेंगे), पर सटीक व्यवहार दोनों लेंसों की फ़ोकस दूरी और उनके बीच की दूरी पर निर्भर करता है — यह NCERT स्तर से आगे का विषय है।
8. लेंस सूत्र, आवर्धन व क्षमता
📖 समझिए — लेंस के लिए भी चिन्ह परिपाटी वही है (प्रकाशिक केंद्र से दूरियाँ, प्रकाश की दिशा में धनात्मक)। पर लेंस सूत्र दर्पण सूत्र से थोड़ा अलग है:
1/v − 1/u = 1/f
आवर्धन: m = h'/h = v/u (दर्पण जैसे ऋण चिन्ह नहीं है यहाँ)
लेंस की क्षमता (Power) बताती है वह प्रकाश को कितनी तेज़ी से मोड़ती/अभिसरित करती है:
P = 1/f (f मीटर में)
मात्रक डायोप्टर (D) है। उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक, अवतल लेंस की ऋणात्मक होती है। जितनी कम फ़ोकस दूरी, उतनी ज़्यादा क्षमता — यानी उतना ज़्यादा प्रकाश मोड़ने की ताक़त।
उदाहरण: एक उत्तल लेंस की फ़ोकस दूरी 25 cm है। इसकी क्षमता ज्ञात कीजिए।
हल: f = 25 cm = 0.25 m। P = 1/f = 1/0.25 = +4 D।
🔗 जोड़िए — डॉक्टर जब चश्मे का नंबर "+2" या "−1.5" बताते हैं, वह असल में लेंस की क्षमता डायोप्टर में होती है — धनात्मक मतलब उत्तल लेंस (दूर-दृष्टि दोष के लिए), ऋणात्मक मतलब अवतल लेंस (निकट-दृष्टि दोष के लिए)।
✅ जाँचिए
स्तर 1 लेंस की क्षमता का मात्रक क्या है? — उत्तर: डायोप्टर (D)।
स्तर 2 −25 cm फ़ोकस दूरी वाले लेंस की क्षमता क्या होगी, और यह किस प्रकार का लेंस है? — उत्तर: P = 1/(−0.25) = −4 D — ऋणात्मक क्षमता, यानी अवतल लेंस।
स्तर 3 +2 D क्षमता वाले लेंस की फ़ोकस दूरी कितनी होगी? — उत्तर: f = 1/P = 1/2 = 0.5 m = 50 cm — धनात्मक, अर्थात उत्तल लेंस, फ़ोकस दूरी 50 cm।
आपकी सीढ़ी
| स्तर | कुल | इतने सही होने पर | आप हैं |
|---|---|---|---|
| स्तर 1 | 10 | 8+ | परिचित |
| स्तर 2 | 10 | 7+ | दक्ष — बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार |
| स्तर 3 | 4 | 3+ | कुशल |
अंकन योजना
(एक विशिष्ट परीक्षक के दृष्टिकोण का उदाहरण — यह आधिकारिक योजना नहीं है।)
प्रश्न (5 अंक): 20 cm फ़ोकस दूरी वाले उत्तल लेंस से 30 cm दूर रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब स्थान, प्रकृति व आवर्धन ज्ञात कीजिए तथा किरण आरेख बनाइए।
सूत्र में सही मान रखना (u, f का चिन्ह सही)। 1 अंक
v का सही परिकलन। 1 अंक
आवर्धन का परिकलन व प्रतिबिम्ब की प्रकृति बताना। 1 अंक
सही नामांकित किरण आरेख। 2 अंक
सामान्य ग़लतियाँ
| सामान्य ग़लती | सही तथ्य |
|---|---|
| "अवतल दर्पण हमेशा बड़ा प्रतिबिम्ब बनाता है" | वस्तु की स्थिति पर निर्भर — F से परे रखने पर प्रतिबिम्ब छोटा भी बन सकता है। |
| "वस्तु दूरी (u) धनात्मक ले लेना" | नई कार्तीय परिपाटी में u हमेशा ऋणात्मक होती है (वस्तु बाईं ओर)। |
| "दर्पण और लेंस सूत्र एक जैसे हैं" | दर्पण: 1/v + 1/u = 1/f. लेंस: 1/v − 1/u = 1/f — चिन्ह अलग है। |
| "ज़्यादा अपवर्तनांक मतलब ज़्यादा तेज़ प्रकाश" | उल्टा — ज़्यादा अपवर्तनांक मतलब उस माध्यम में प्रकाश धीमा चलता है। |
| "उत्तल लेंस कभी छोटा प्रतिबिम्ब नहीं बनाता" | बनाता है — जब वस्तु 2F1 से परे हो, प्रतिबिम्ब वस्तु से छोटा बनता है। |
अंतिम परीक्षण — मिश्रित
8+ सही = अध्याय में महारत।
- कौन-सा दर्पण हमेशा आभासी, छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है?
- दर्पण सूत्र लिखिए।
- नई कार्तीय परिपाटी में वस्तु दूरी का चिन्ह क्या होता है?
- अपवर्तन का मुख्य कारण क्या है?
- अपवर्तनांक अधिक होने का क्या अर्थ है?
- कौन-सा लेंस अपसारी है?
- लेंस सूत्र लिखिए।
- लेंस की क्षमता का मात्रक क्या है?
- (अध्याय 8) मेंडल के एकसंकर संकरण का F2 अनुपात क्या है?
- (अध्याय 6) रिफ्लेक्स आर्क में निर्णय कहाँ होता है?
उत्तर — 1. उत्तल दर्पण | 2. 1/v + 1/u = 1/f | 3. ऋणात्मक | 4. माध्यम बदलने पर चाल बदलना | 5. माध्यम में प्रकाश धीमा चलता है, माध्यम सघन है | 6. अवतल लेंस | 7. 1/v − 1/u = 1/f | 8. डायोप्टर (D) | 9. 3:1 | 10. मेरुरज्जु (स्पाइनल कॉर्ड) में
शब्दावली
| हिंदी | English | हिंदी | English |
|---|---|---|---|
| अवतल दर्पण | Concave mirror | अपवर्तन | Refraction |
| उत्तल दर्पण | Convex mirror | अपवर्तनांक | Refractive index |
| मुख्य फ़ोकस | Principal focus | उत्तल लेंस | Convex lens |
| वक्रता केंद्र | Centre of curvature | अवतल लेंस | Concave lens |
| आवर्धन | Magnification | लेंस की क्षमता | Power of lens |
| चिन्ह परिपाटी | Sign convention | डायोप्टर | Dioptre |
अभिभावक व शिक्षक के लिए
5 मिनट जाँच: दर्पण व लेंस सूत्र दोनों लिखवाएँ (चिन्ह के फ़र्क़ पर ज़ोर दें)। कौन-सा दर्पण/लेंस हमेशा छोटा-आभासी प्रतिबिम्ब बनाता है? लेंस की क्षमता किसमें मापी जाती है?
घर पर करने योग्य: स्टील की कटोरी (अवतल दर्पण), चम्मच का बाहरी हिस्सा (उत्तल दर्पण), और पानी भरा गिलास (अपवर्तन) — तीनों से प्रयोग करना।
NCERT से आगे — जिज्ञासु पाठकों के लिए
यह भाग RBSE/NCERT कक्षा 10 पाठ्यक्रम से आगे का है और बोर्ड परीक्षा के लिए ज़रूरी नहीं है, केवल सरकारी और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विश्वविद्यालय स्रोतों पर आधारित है।
दूरबीन और सूक्ष्मदर्शी — इसी सिद्धांत का बड़ा रूप
खगोलीय दूरबीनें बड़े अवतल दर्पणों (परावर्ती दूरबीन) या बड़े उत्तल लेंसों (अपवर्ती दूरबीन) का उपयोग करती हैं — इसी अध्याय के सिद्धांतों को बहुत बड़े पैमाने पर लागू करके। भारत का प्रमुख खगोलीय अनुसंधान संस्थान भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) हनले, लद्दाख में एक बड़ी परावर्ती दूरबीन संचालित करता है, जो इसी अवतल-दर्पण सिद्धांत पर काम करती है।
न्यूटन का प्रिज्म प्रयोग
आइज़क न्यूटन ने 1666 के आसपास एक काँच के प्रिज्म से सूर्य के प्रकाश को गुज़ारकर दिखाया कि श्वेत प्रकाश असल में सात रंगों का मिश्रण है — यह अगले अध्याय (मानव नेत्र) में विस्तार से पढ़ा जाएगा, पर इसकी नींव इसी अध्याय के अपवर्तन सिद्धांत में है, क्योंकि हर रंग अलग-अलग कोण पर मुड़ता है।
फ़ाइबर ऑप्टिक्स — पूर्ण आंतरिक परावर्तन का आधुनिक उपयोग
जब प्रकाश किसी सघन माध्यम से विरल माध्यम में एक निश्चित कोण से अधिक तिरछा जाता है, तो वह अपवर्तित होने के बजाय पूरी तरह वापस परावर्तित हो जाता है — इसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं। यही सिद्धांत ऑप्टिकल फ़ाइबर केबल में काम करता है, जो आज भारत के अधिकांश हाई-स्पीड इंटरनेट और टेलीफ़ोन नेटवर्क की रीढ़ है — दूरसंचार विभाग, भारत सरकार, इसी तकनीक पर BharatNet जैसी योजनाएँ चलाता है।
स्रोत
- ncert.nic.in — NCERT, भारत सरकार
- ePathshala — शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार
- iiap.res.in — भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान
नोट: इन स्रोतों से कोई भी अंश सीधे नहीं लिया गया है; ऊपर के सभी कथन लेखक के अपने शब्दों में सामान्य शैक्षिक समझ के लिए लिखे गए हैं।
आगे पढ़ें
← पिछला: अध्याय 8 — आनुवंशिकता (4 अंक)
→ अगला: अध्याय 10 — मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार (4 अंक)
संबंधित सामग्री
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर के कक्षा 10 विज्ञान (कोड 07) पाठ्यक्रम 2026–2027 पर आधारित — अध्याय 9, अंक भार 8। पाठ्यपुस्तक: विज्ञान, NCERT। सभी आरेख मौलिक हैं।

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