कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 7 — जीव जनन कैसे करते हैं?
NCERT / RBSE पाठ्यक्रम 2026–27 · करके सीखिए · पाँच सचित्र आरेख शामिल
लेखक: सुरेंद्र सिंह चौहान — पूर्व शिक्षा अधिकारी, राजस्थान। 1991–2025, 34 वर्ष शिक्षण, प्रशिक्षण एवं प्रशासन में।
आधार: NCERT कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यपुस्तक, अध्याय 7 एवं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान का पाठ्यक्रम 2026–27।
तैयार: पाठ्यपुस्तक से संकलित, AI सहायता से व्यवस्थित, लेखक द्वारा समीक्षित। सभी आरेख मौलिक हैं।
प्रकाशित: 24 सितंबर 2026 · अंतिम अद्यतन: 24 सितंबर 2026
अमीबा को दो टुकड़ों में बाँट दीजिए — कुछ ही देर में दोनों टुकड़े अलग-अलग जीवित अमीबा बन जाते हैं। पर मनुष्य को आधा काट दीजिए — वह मर जाएगा।
यह फ़र्क़ क्यों? और आख़िर जनन ज़रूरी ही क्यों है — जीव तो जीवित रहने के लिए भोजन, श्वसन, उत्सर्जन सब कर ही रहा है?
- जनन का मूल काम है DNA की प्रतिलिपि (copy) बनाना — पर हर प्रतिलिपि में थोड़ी विविधता (variation) रहती है।
- अलैंगिक जनन — एक ही जनक से संतान बनती है: विखंडन, मुकुलन, बीजाणु, पुनर्जनन, कायिक प्रवर्धन।
- पुष्प का काम — पुंकेसर नर भाग (पराग बनाता है), स्त्रीकेसर मादा भाग (अंडाशय, बीजांड)।
- परागण — स्वपरागण (उसी फूल में) या पर-परागण (दूसरे फूल में, हवा/कीट/जल द्वारा)।
- निषेचन के बाद अंडाशय फल बनता है, बीजांड बीज बनता है।
- पुरुष जनन तंत्र — वृषण शुक्राणु बनाते हैं; स्त्री जनन तंत्र — अंडाशय अंडाणु बनाता है, गर्भाशय भ्रूण को पालता है।
- रजोधर्म (menstruation) — हर 28 दिन में गर्भाशय की भीतरी परत झड़ना, अगर निषेचन न हो।
- जनन स्वास्थ्य में गर्भनिरोधक और यौन संचारित रोग दोनों को समझना ज़रूरी है।
कैसे पढ़ें — पहले सोचिए या ख़ुद करके देखिए, फिर समझाइश आएगी:
🔍 जिज्ञासा · 🧪 करके देखिए · 📖 समझिए · 🔗 जोड़िए · ✅ जाँचिए
"जाँचिए" तीन स्तरों में है — 1, 2, 3।
विषय-सूची
- आधार जाँच
- जनन क्यों ज़रूरी
- अलैंगिक जनन
- पौधों में लैंगिक जनन
- मानव जनन तंत्र — पुरुष
- मानव जनन तंत्र — स्त्री
- जनन स्वास्थ्य
- आपकी सीढ़ी
- आरेख कैसे बनाएँ
- अंकन योजना
- सामान्य ग़लतियाँ
- अंतिम परीक्षण
- शब्दावली
- अभिभावक व शिक्षक के लिए
- NCERT से आगे
आधार जाँच
- कोशिका विभाजन क्या है? (कक्षा 9)
- DNA किस कोशिकांग में पाया जाता है?
- क्या हर जीव संतान पैदा करने के लिए दो जीवों की ज़रूरत रखता है?
उत्तर
1. एक कोशिका का दो या अधिक कोशिकाओं में बँटना। 2. केंद्रक (nucleus) में। 3. नहीं। कई जीव अकेले ही संतान बना लेते हैं — जैसे अमीबा, यीस्ट। इसी अध्याय में यह फ़र्क़ साफ़ होगा।
1. जनन क्यों ज़रूरी है
🔍 जिज्ञासा — शरीर के भीतर हज़ारों रासायनिक क्रियाएँ लगातार होती रहती हैं। फिर जनन को अलग से "जीवन प्रक्रिया" क्यों माना जाता है — यह तो व्यक्तिगत जीव के जीने के लिए ज़रूरी भी नहीं?
🧪 करके देखिए — अपने परिवार में दादा-दादी, माता-पिता और अपने बीच किसी एक शारीरिक विशेषता (जैसे आँखों का रंग, क़द) की तुलना कीजिए। पहले सोचिए — क्या सब बिल्कुल एक जैसे हैं?
उत्तर — कभी नहीं। हर पीढ़ी में थोड़ा-थोड़ा फ़र्क़ रहता है — इसी को विविधता (variation) कहते हैं। रक्त वर्ग (blood group), ऊँचाई, त्वचा का रंग — ऐसी कई विशेषताएँ एक पीढ़ी से दूसरी तक हूबहू नहीं, थोड़े बदलाव के साथ जाती हैं।
📖 समझिए — जनन का मूल आधार है DNA की प्रतिलिपि बनाना। कोशिका के केंद्रक में मौजूद DNA अपनी प्रतिलिपि बनाता है, और उसी के आधार पर नई कोशिका/जीव बनता है। पर यह प्रतिलिपि बनाने की प्रक्रिया पूर्ण रूप से सटीक नहीं होती — हर बार थोड़ी विविधता आ जाती है।
यही विविधता किसी प्रजाति को बदलते पर्यावरण में टिके रहने की क्षमता देती है। अगर सारे जीव बिल्कुल एक जैसे हों, तो एक ही प्रतिकूल परिस्थिति (जैसे बीमारी) पूरी प्रजाति को ख़त्म कर सकती है। ठीक इसी सिद्धांत पर अध्याय 6 — नियंत्रण एवं समन्वय में पढ़ा गया तंत्रिका तंत्र भी काम करता है: दोनों अध्याय मिलकर बताते हैं कि जीव न केवल अपने भीतर सामंजस्य बनाए रखता है, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपनी प्रजाति को भी बनाए रखता है।
🔗 जोड़िए — इसीलिए जनन को व्यक्तिगत जीव की नहीं, बल्कि प्रजाति की निरंतरता (continuity of species) बनाए रखने वाली प्रक्रिया कहा जाता है।
✅ जाँचिए
स्तर 1 जनन की मूल इकाई क्या है? — उत्तर: DNA की प्रतिलिपि बनना।
स्तर 2 विविधता किसी प्रजाति के लिए फ़ायदेमंद क्यों है? — उत्तर: बदलते पर्यावरण में कुछ विविधताएँ जीवित रहने में मदद करती हैं, जिससे प्रजाति का अस्तित्व बना रहता है।
स्तर 3 अगर DNA की प्रतिलिपि हमेशा 100% सटीक बने, तो क्या होगा? — उत्तर: कोई विविधता नहीं आएगी, सारी संतानें जनक जैसी ही होंगी। पर्यावरण बदलने पर पूरी प्रजाति एक साथ ख़तरे में पड़ सकती है — इसलिए मामूली अशुद्धि (variation) असल में प्रजाति के लिए लाभदायक है।
2. अलैंगिक जनन
🔍 जिज्ञासा — एक अमीबा के पास न कोई साथी है, न कोई फूल, फिर भी उसकी संख्या बढ़ती रहती है। कैसे?
🧪 करके देखिए — घर में आलू का एक टुकड़ा (जिसमें "आँख"/कली हो) मिट्टी में गाड़ दीजिए और एक हफ़्ते तक पानी दीजिए। पहले सोचिए — क्या इससे नया पौधा बनेगा, और क्या उसे बीज की ज़रूरत पड़ेगी?
क्या हुआ? बिना बीज के ही नया पौधा निकल आया — क्योंकि आलू की कली से सीधे पौधा बन गया। इसे कायिक प्रवर्धन कहते हैं।
चित्र 1 — द्विखंडन में एक कोशिका बराबर दो भागों में बँटती है; मुकुलन में एक छोटी कली (bud) निकलकर अलग जीव बन जाती है।
📖 समझिए — जिस जनन में सिर्फ़ एक जनक से संतान बनती है, उसे अलैंगिक जनन कहते हैं। संतान जनक की लगभग हूबहू प्रतिलिपि होती है।
| विधि | प्रक्रिया | उदाहरण |
|---|---|---|
| द्विखंडन | एक कोशिका बराबर दो भागों में बँट जाती है | अमीबा, पैरामीशियम |
| मुकुलन | जनक शरीर पर एक कली (bud) बनती है, फिर अलग हो जाती है | यीस्ट, हाइड्रा |
| बीजाणु निर्माण | हज़ारों सूक्ष्म बीजाणु बनते हैं, अनुकूल परिस्थिति में नया जीव बनाते हैं | राइज़ोपस (ब्रेड मोल्ड) |
| पुनर्जनन | शरीर का कटा हुआ टुकड़ा पूरा नया जीव बन जाता है | प्लेनेरिया (चपटा कृमि) |
| खंडन | शरीर अपने आप कई टुकड़ों में टूटकर हर टुकड़ा नया जीव बनाता है | स्पाइरोगायरा (शैवाल) |
| कायिक प्रवर्धन | जड़, तना या पत्ती के हिस्से से सीधे नया पौधा बनना | आलू, गुलाब की कलम, ब्रायोफिलम की पत्ती |
🔗 जोड़िए — किसानों को कायिक प्रवर्धन से फ़ायदा है — जिस पौधे में फल/फूल अच्छे हों, उसकी हूबहू प्रतिलिपि सस्ते में और जल्दी उगाई जा सकती है, बिना बीज का इंतज़ार किए।
✅ जाँचिए
स्तर 1 हाइड्रा में जनन की कौन-सी विधि होती है? — उत्तर: मुकुलन।
स्तर 2 कायिक प्रवर्धन और बीज से उगने में क्या अंतर है? — उत्तर: कायिक प्रवर्धन में जड़/तना/पत्ती से सीधे हूबहू पौधा बनता है (अलैंगिक), जबकि बीज लैंगिक जनन का परिणाम है और उसमें विविधता होती है।
स्तर 3 बाग़वान गुलाब की एक बेहतरीन क़िस्म को बीज से नहीं, कलम (cutting) से क्यों उगाते हैं? — उत्तर: बीज से उगे पौधे में लैंगिक जनन के कारण विविधता आ सकती है — गुण बदल सकते हैं। कलम (कायिक प्रवर्धन) अलैंगिक है, इसलिए नया पौधा जनक जैसा ही होगा — वही रंग, वही सुगंध सुनिश्चित रहती है।
3. पौधों में लैंगिक जनन
🔍 जिज्ञासा — फूल इतने रंगीन और सुगंधित क्यों होते हैं — क्या यह सिर्फ़ सुंदरता के लिए है?
🧪 करके देखिए — कोई भी बड़ा फूल (जैसे गुड़हल/हिबिस्कस) लीजिए और उसकी बीच की लंबी नली जैसी संरचना (स्त्रीकेसर) और उसके चारों ओर धागे जैसी संरचनाएँ (पुंकेसर) पहचानिए। पहले सोचिए — कौन नर भाग है, कौन मादा?
चित्र 2 — पुंकेसर नर भाग है (परागकोश में पराग बनता है); स्त्रीकेसर मादा भाग है (वर्तिकाग्र, वर्तिका, अंडाशय, बीजांड)।
📖 समझिए — पुंकेसर (stamen) नर भाग है — इसके परागकोश (anther) में पराग (pollen) बनते हैं। स्त्रीकेसर (pistil) मादा भाग है — इसके ऊपर वर्तिकाग्र (stigma), बीच में वर्तिका (style), और नीचे अंडाशय (ovary) होता है जिसमें बीजांड (ovule) होते हैं। जिस पुष्प में दोनों — पुंकेसर व स्त्रीकेसर — मौजूद हों, उसे उभयलिंगी पुष्प कहते हैं (जैसे गुड़हल); जिसमें केवल एक हो, उसे एकलिंगी पुष्प कहते हैं (जैसे पपीता, तरबूज़)।
परागण (pollination) — पराग का परागकोश से वर्तिकाग्र तक पहुँचना।
| प्रकार | अर्थ |
|---|---|
| स्वपरागण | उसी फूल के पराग उसी फूल के वर्तिकाग्र पर पहुँचें |
| पर-परागण | एक फूल के पराग दूसरे फूल के वर्तिकाग्र पर पहुँचें — हवा, कीट या पानी के ज़रिए |
निषेचन (fertilisation) — वर्तिकाग्र पर पहुँचा पराग एक नली बनाकर बीजांड तक पहुँचता है और वहाँ के अंड कोशिका से मिलकर युग्मनज (zygote) बनाता है। इसके बाद:
बीजांड → बीज · अंडाशय → फल
🔗 जोड़िए — अब पहला सवाल हल: फूल का रंग और सुगंध कीटों को आकर्षित करने के लिए है, ताकि पर-परागण हो सके — जो स्वपरागण से ज़्यादा विविधता लाता है। इसी विविधता के महत्व को पहले भाग में विस्तार से समझा गया था।
✅ जाँचिए
स्तर 1 निषेचन के बाद बीजांड किसमें बदलता है? — उत्तर: बीज में।
स्तर 2 स्वपरागण और पर-परागण में क्या अंतर है? — उत्तर: स्वपरागण में उसी फूल के पराग उसी पर पहुँचते हैं; पर-परागण में एक फूल के पराग दूसरे फूल तक पहुँचते हैं, अक्सर हवा, कीट या पानी की मदद से।
स्तर 3 पर-परागण, स्वपरागण से जैविक रूप से बेहतर क्यों माना जाता है? — उत्तर: पर-परागण में दो अलग पौधों का आनुवंशिक मिश्रण होता है, जिससे संतान में ज़्यादा विविधता आती है — यह बदलते पर्यावरण में प्रजाति के टिके रहने की संभावना बढ़ाती है, जैसा सेक्शन 1 में पढ़ा।
4. मानव जनन तंत्र — पुरुष
🔍 जिज्ञासा — किशोरावस्था में शरीर में अचानक कई बदलाव क्यों आते हैं — आवाज़ भारी होना, दाढ़ी-मूँछ आना?
📖 समझिए — यह बदलाव वृषण (testis) से बनने वाले हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन के कारण होते हैं। वृषण उदरगुहा के बाहर वृषणकोश (scrotum) में स्थित होते हैं — शरीर के तापमान से थोड़ा कम तापमान पर, क्योंकि शुक्राणु बनाने के लिए यह ज़रूरी है। यह किशोरावस्था में हार्मोन-नियंत्रित बदलाव उसी सिद्धांत की याद दिलाता है जो अध्याय 6 में एड्रेनलिन और थायरॉक्सिन के लिए पढ़ा गया था — एक हार्मोन, कई अंगों पर असर।
| भाग | काम |
|---|---|
| वृषण | शुक्राणु और टेस्टोस्टेरॉन बनाना |
| वास डिफेरेंस (शुक्रवाहिका) | शुक्राणुओं को मूत्रमार्ग तक ले जाना |
| शुक्राशय व प्रोस्टेट ग्रंथि | शुक्राणुओं के लिए तरल पदार्थ बनाना, जो उन्हें पोषण और गति देता है |
| मूत्रमार्ग | मूत्र और वीर्य दोनों के लिए साझा मार्ग |
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स्तर 1 वृषणकोश शरीर के बाहर क्यों स्थित है? — उत्तर: शुक्राणु बनाने के लिए शरीर के सामान्य तापमान से थोड़ा कम तापमान चाहिए।
स्तर 2 टेस्टोस्टेरॉन का काम क्या है? — उत्तर: किशोरावस्था में शारीरिक बदलाव (आवाज़ भारी होना, दाढ़ी-मूँछ) लाना और शुक्राणु निर्माण में सहायता करना।
5. मानव जनन तंत्र — स्त्री
🔍 जिज्ञासा — लड़कियों में हर महीने एक निश्चित चक्र (menstrual cycle) क्यों चलता है?
चित्र 3 — अंडाशय हर महीने एक अंडाणु छोड़ता है, जो डिंबवाहिनी से होकर गर्भाशय तक जाता है।
📖 समझिए — अंडाशय जन्म से ही हज़ारों अपरिपक्व अंडाणु लिए होता है। किशोरावस्था से हर महीने एक अंडाशय एक अंडाणु छोड़ता है, जो डिंबवाहिनी (fallopian tube) से होकर गर्भाशय की ओर बढ़ता है। गर्भाशय की भीतरी परत इस दौरान मोटी और रक्त-समृद्ध हो जाती है — भ्रूण को पालने की तैयारी में।
अगर रास्ते में अंडाणु का निषेचन शुक्राणु से हो जाए, तो युग्मनज गर्भाशय की दीवार से चिपककर बढ़ना शुरू करता है — यही गर्भावस्था है। अगर निषेचन नहीं होता, तो गर्भाशय की मोटी परत टूटकर रक्त के साथ बाहर निकल जाती है — इसे रजोधर्म (menstruation) कहते हैं, जो लगभग हर 28 दिन में दोहराता है।
🔗 जोड़िए — रजोधर्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर के स्वस्थ रूप से काम करने का संकेत है — हर महीने गर्भावस्था के लिए तैयारी और, यदि ज़रूरत न हो, तो सफ़ाई का प्राकृतिक चक्र।
✅ जाँचिए
स्तर 1 निषेचन कहाँ होता है? — उत्तर: डिंबवाहिनी में।
स्तर 2 रजोधर्म क्यों होता है? — उत्तर: जब अंडाणु का निषेचन नहीं होता, तो गर्भाशय की मोटी हुई भीतरी परत की ज़रूरत नहीं रहती, इसलिए वह टूटकर रक्त सहित बाहर निकल जाती है।
स्तर 3 गर्भाशय की भीतरी परत हर महीने मोटी क्यों होती है, भले ही ज़्यादातर बार निषेचन न हो? — उत्तर: शरीर हर चक्र में यह पहले से तय नहीं कर सकता कि निषेचन होगा या नहीं, इसलिए वह हर बार भ्रूण को पालने लायक़ तैयारी करता है — निषेचन न होने पर वह परत ज़रूरी नहीं रहती, इसलिए झड़ जाती है।
6. जनन स्वास्थ्य
📖 समझिए — जनसंख्या नियंत्रण और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए गर्भनिरोधक विधियाँ उपयोग होती हैं:
| प्रकार | उदाहरण |
|---|---|
| अवरोधक विधि | कंडोम — शुक्राणु और अंडाणु को मिलने से रोकता है |
| रासायनिक/हार्मोनल विधि | गोलियाँ — हार्मोन संतुलन बदलकर अंडाणु न बनने देना |
| शल्य विधि | नसबंदी — शुक्रवाहिका या डिंबवाहिनी को स्थायी रूप से रोकना |
कंडोम का एक अतिरिक्त फ़ायदा — यह यौन संचारित रोगों (STDs) जैसे HIV-AIDS से भी बचाव करता है, जो बाक़ी विधियाँ नहीं करतीं।
स्वास्थ्य सूचना: यह पाठ केवल शैक्षिक जानकारी है। गर्भनिरोधक, यौन स्वास्थ्य या किसी भी लक्षण से जुड़े सवाल के लिए योग्य डॉक्टर से सलाह लें।
✅ जाँचिए
स्तर 1 कौन-सी गर्भनिरोधक विधि STDs से भी बचाती है? — उत्तर: कंडोम।
स्तर 2 नसबंदी और गोली में क्या अंतर है? — उत्तर: नसबंदी शल्य चिकित्सा से शुक्रवाहिका/डिंबवाहिनी को स्थायी रूप से रोकती है; गोली हार्मोन संतुलन बदलकर अस्थायी रूप से अंडाणु बनने से रोकती है।
आपकी सीढ़ी
| स्तर | कुल | इतने सही होने पर | आप हैं |
|---|---|---|---|
| स्तर 1 | 6 | 5+ | परिचित |
| स्तर 2 | 6 | 4+ | दक्ष — बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार |
| स्तर 3 | 3 | 2+ | कुशल |
आरेख कैसे बनाएँ
1. द्विखंडन/मुकुलन (चित्र 1) — एक गोल कोशिका, बीच में केंद्रक बँटता हुआ दिखाएँ, फिर दो बराबर गोले अलग होते हुए। मुकुलन के लिए एक बड़े गोले से एक छोटा गोला जुड़ा हुआ दिखाएँ। लेबल: केंद्रक, कोशिका भित्ति, नई संतति कोशिका।
2. पुष्प संरचना (चित्र 2) — तने के ऊपर पंखुड़ियाँ, बीच में एक लंबी नली (स्त्रीकेसर — ऊपर वर्तिकाग्र, बीच वर्तिका, नीचे अंडाशय गोल आकार में बीजांड के साथ), किनारे धागेनुमा पुंकेसर जिनके सिरे पर परागकोश। लेबल अनिवार्य: पुंकेसर, परागकोश, वर्तिकाग्र, वर्तिका, अंडाशय, बीजांड। सामान्य ग़लती: पुंकेसर और स्त्रीकेसर की अदला-बदली — याद रखें, पुंकेसर हमेशा बाहर, कई संख्या में; स्त्रीकेसर बीच में, अकेला।
3. स्त्री जनन तंत्र (चित्र 3) — दो अंडाशय ऊपर-दाएँ-बाएँ, उनसे जुड़ी दो नलियाँ (डिंबवाहिनी) बीच में एक थैलीनुमा गर्भाशय तक आती हुई, नीचे योनि। लेबल: अंडाशय, डिंबवाहिनी, गर्भाशय, योनि।
अंकन योजना
(एक विशिष्ट परीक्षक के दृष्टिकोण का उदाहरण — यह आधिकारिक योजना नहीं है।)
प्रश्न (5 अंक): पुष्प की अनुदैर्ध्य काट का नामांकित चित्र बनाइए तथा परागण एवं निषेचन की प्रक्रिया समझाइए।
नामांकित चित्र — पुंकेसर, स्त्रीकेसर, अंडाशय, बीजांड। 2 अंक
परागण की परिभाषा एवं प्रकार। 1 अंक
निषेचन की प्रक्रिया। 1 अंक
बीज व फल कैसे बनते हैं। 1 अंक
सामान्य ग़लतियाँ
| सामान्य ग़लती | सही तथ्य |
|---|---|
| "परागण और निषेचन एक ही चीज़ हैं" | परागण पराग का वर्तिकाग्र तक पहुँचना है; निषेचन बाद में बीजांड के भीतर होता है। |
| "स्वपरागण ही सबसे अच्छा तरीक़ा है" | पर-परागण ज़्यादा विविधता लाता है, इसलिए जैविक रूप से बेहतर माना जाता है। |
| "रजोधर्म एक बीमारी है" | यह एक स्वाभाविक मासिक चक्र है, बीमारी नहीं। |
| "सभी गर्भनिरोधक विधियाँ STDs से बचाती हैं" | केवल कंडोम STDs से भी बचाव करता है। |
| "अंडाशय और बीजांड एक ही चीज़ हैं" | अंडाशय एक अंग है (फल बनता है); बीजांड उसके भीतर की संरचना है (बीज बनता है)। |
अंतिम परीक्षण — मिश्रित
7+ सही = अध्याय में महारत।
- अमीबा में जनन की विधि का नाम बताइए।
- पुष्प के नर भाग का नाम क्या है?
- निषेचन के बाद अंडाशय किसमें बदलता है?
- वृषणकोश शरीर के बाहर क्यों स्थित है?
- रजोधर्म कब नहीं होता?
- कौन-सी गर्भनिरोधक विधि STDs से भी बचाती है?
- विविधता किसी प्रजाति के लिए क्यों फ़ायदेमंद है?
- (अध्याय 6) मानव मस्तिष्क का कौन-सा भाग श्वसन नियंत्रित करता है?
- (अध्याय 5) प्रकाश संश्लेषण के लिए कौन-सी तीन चीज़ें ज़रूरी हैं?
उत्तर — 1. द्विखंडन | 2. पुंकेसर | 3. फल में | 4. शुक्राणु बनाने के लिए कम तापमान चाहिए | 5. जब निषेचन हो जाए (गर्भावस्था के दौरान) | 6. कंडोम | 7. बदलते पर्यावरण में प्रजाति के टिके रहने की संभावना बढ़ाती है | 8. मेडुला | 9. कार्बन डाइऑक्साइड, पानी, सूर्य का प्रकाश
शब्दावली
| हिंदी | English | हिंदी | English |
|---|---|---|---|
| विविधता | Variation | वर्तिकाग्र | Stigma |
| द्विखंडन | Binary fission | निषेचन | Fertilisation |
| मुकुलन | Budding | युग्मनज | Zygote |
| कायिक प्रवर्धन | Vegetative propagation | वृषण | Testis |
| परागण | Pollination | अंडाशय (शरीर में) | Ovary |
| पुंकेसर | Stamen | रजोधर्म | Menstruation |
अभिभावक व शिक्षक के लिए
5 मिनट जाँच: अलैंगिक जनन की छह विधियाँ गिनाएँ। पुंकेसर और स्त्रीकेसर में फ़र्क़ बताएँ। रजोधर्म क्यों होता है? कौन-सी गर्भनिरोधक विधि STDs से बचाती है?
घर पर करने योग्य: आलू की कली से कायिक प्रवर्धन (एक हफ़्ता), और किसी बड़े फूल को काटकर पुंकेसर-स्त्रीकेसर पहचानना — दोनों सुरक्षित और आँखों से दिखने वाले प्रयोग हैं। अभ्यास पूरा करने के बाद कक्षा 10 विज्ञान मेगा टेस्ट (200 MCQs) से पुनरावृत्ति करवाई जा सकती है।
NCERT से आगे — जिज्ञासु पाठकों के लिए
यह भाग RBSE/NCERT कक्षा 10 पाठ्यक्रम से आगे का है और बोर्ड परीक्षा के लिए ज़रूरी नहीं है, केवल सरकारी और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विश्वविद्यालय स्रोतों पर आधारित है।
DNA प्रतिलिपि बनाते समय जो मामूली त्रुटियाँ होती हैं, उन्हें वैज्ञानिक भाषा में म्यूटेशन (उत्परिवर्तन) कहा जाता है। दुनिया भर की जेनेटिक्स प्रयोगशालाएँ — जिनमें भारत सरकार का जैव प्रौद्योगिकी विभाग भी शामिल है — इसी सिद्धांत पर फ़सलों की नई, अधिक उपज देने वाली किस्में विकसित करने का काम करती हैं। परागण को समझने का महत्व सिर्फ़ पाठ्यपुस्तक तक सीमित नहीं — मधुमक्खियों की घटती संख्या को दुनिया भर के कृषि विश्वविद्यालय एक गंभीर चिंता मानते हैं, क्योंकि अधिकांश खाद्य फ़सलें पर-परागण के लिए कीटों पर निर्भर करती हैं। मानव जनन तंत्र और जनन स्वास्थ्य से जुड़ी नीतियाँ भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा समय-समय पर अद्यतन की जाती हैं; अधिकृत जानकारी के लिए सरकारी स्वास्थ्य पोर्टल ही सबसे विश्वसनीय स्रोत हैं।
स्रोत
- ncert.nic.in — NCERT, भारत सरकार
- ePathshala — शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार
- mohfw.gov.in — स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार
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