कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 12 — विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव
NCERT / RBSE पाठ्यक्रम 2026–27 · करके सीखिए · चार सचित्र आरेख शामिल
प्रस्तुति: NCERTClasses टीम — पाठ्यपुस्तक विशेषज्ञों एवं अनुभवी शिक्षकों द्वारा तैयार।
आधार: NCERT कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यपुस्तक, अध्याय 12 एवं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान का पाठ्यक्रम 2026–27।
प्रकाशित: 24 सितंबर 2026 · अंतिम अद्यतन: 24 सितंबर 2026
1820 में हैंस क्रिश्चियन ओर्स्टेड एक क्लास पढ़ा रहे थे, जब उन्होंने संयोग से देखा — पास रखे तार में धारा प्रवाहित करते ही, थोड़ी दूर रखी कम्पास सुई हिल गई। बिजली और चुंबकत्व, जो सदियों से अलग-अलग विषय माने जाते थे, अचानक आपस में जुड़ गए।
यही खोज आज हर विद्युत मोटर, पंखे, और बिजली के तार में लगे फ़्यूज़ के पीछे काम करती है।
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ उत्तरी ध्रुव से निकलकर दक्षिणी ध्रुव में मिलती हैं, कभी काटतीं नहीं।
- दक्षिणहस्त अंगुष्ठ नियम — सीधे तार के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बताता है।
- वृत्ताकार पाश के केंद्र पर क्षेत्र रेखाएँ सीधी हो जाती हैं।
- परिनालिका का क्षेत्र छड़ चुंबक जैसा — भीतर एकसमान।
- फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम — धारावाही चालक पर बल की दिशा (मोटर सिद्धांत)।
- घरेलू परिपथ — फ़्यूज़/MCB व अर्थ तार सुरक्षा के लिए।
कैसे पढ़ें — पहले सोचिए या ख़ुद करके देखिए, फिर व्याख्या पढ़िए:
🔍 जिज्ञासा · 🧪 करके देखिए · 📖 समझिए · 🔗 जोड़िए · ✅ जाँचिए
"जाँचिए" तीन स्तरों में है — 1, 2, 3।
विषय-सूची
- आधार जाँच
- चुंबकीय क्षेत्र और क्षेत्र रेखाएँ
- सीधे चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्र
- वृत्ताकार पाश के कारण चुंबकीय क्षेत्र
- परिनालिका और विद्युत चुम्बक
- चालक पर बल — फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम
- घरेलू विद्युत परिपथ
- आपकी सीढ़ी
- अंकन योजना
- सामान्य ग़लतियाँ
- अंतिम परीक्षण
- शब्दावली
- अभिभावक व शिक्षक के लिए
- NCERT से आगे
आधार जाँच
- चुंबक के कितने ध्रुव होते हैं?
- समान ध्रुव पास लाने पर क्या होता है?
- ओम के नियम का सूत्र क्या है? (अध्याय 11)
उत्तर
1. दो — उत्तरी व दक्षिणी। 2. प्रतिकर्षण (दूर हटते हैं)। 3. V=IR। इसी अध्याय में देखेंगे कि जब यही धारा किसी तार में बहे, तो वह ख़ुद एक चुंबक जैसा व्यवहार क्यों करने लगती है।
1. चुंबकीय क्षेत्र और क्षेत्र रेखाएँ
🔍 जिज्ञासा — कम्पास सुई हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में ही क्यों ठहरती है?
🧪 करके देखिए — एक छड़ चुंबक को काग़ज़ के नीचे रखिए, ऊपर लोहे का बुरादा छिड़किए और हल्के से थपथपाइए। पहले सोचिए — बुरादा बेतरतीब बिखरेगा, या कोई पैटर्न बनाएगा?
क्या हुआ? बुरादा घुमावदार रेखाओं में सज गया — ध्रुवों के पास सघन, दूर जाकर विरल। यही चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं को "देखने" का तरीक़ा है।
चित्र 4 — छड़ चुंबक की क्षेत्र रेखाएँ बाहर उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक, फिर भीतर दक्षिण से उत्तर तक — एक बंद पाश बनाती हुई।
📖 समझिए — चुंबक के चारों ओर वह क्षेत्र जहाँ उसका प्रभाव महसूस होता है, चुंबकीय क्षेत्र कहलाता है, जिसका मात्रक टेस्ला (T) है। इसे क्षेत्र रेखाओं से दर्शाया जाता है:
- रेखाएँ चुंबक के बाहर उत्तरी ध्रुव से निकलकर दक्षिणी ध्रुव में मिलती हैं (चुंबक के भीतर दक्षिण से उत्तर की ओर, इस तरह बंद पाश बनता है)।
- दो क्षेत्र रेखाएँ कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं — काटें तो उस बिंदु पर कम्पास सुई को एक साथ दो दिशाएँ दिखानी पड़तीं, जो असंभव है।
- रेखाएँ जहाँ सघन हों, वहाँ क्षेत्र प्रबल होता है।
🔗 जोड़िए — पृथ्वी ख़ुद एक विशाल चुंबक जैसी है, इसीलिए स्वतंत्र रूप से लटका कम्पास हमेशा लगभग उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है।
✅ जाँचिए
स्तर 1 क्षेत्र रेखाएँ किस ध्रुव से निकलती हैं? — उत्तर: उत्तरी ध्रुव से।
स्तर 2 दो क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को क्यों नहीं काटतीं? — उत्तर: क्योंकि काटने वाले बिंदु पर कम्पास सुई एक साथ दो अलग दिशाओं में इशारा करती, जो संभव नहीं।
2. सीधे चालक के कारण चुंबकीय क्षेत्र
🔍 जिज्ञासा — ओर्स्टेड के प्रयोग में तार में धारा बहते ही पास की कम्पास सुई क्यों हिल गई, जबकि तार में कोई चुंबक तो था ही नहीं?
चित्र 1 — सीधे तार के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ संकेंद्री वृत्तों में बनती हैं; दक्षिणहस्त अंगुष्ठ नियम दिशा बताता है।
📖 समझिए — कोई भी धारावाही चालक अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है — यही ओर्स्टेड की खोज थी। सीधे तार के चारों ओर यह क्षेत्र संकेंद्री वृत्तों के रूप में बनता है, तार के जितना पास उतना सघन।
दिशा जानने के लिए दक्षिणहस्त अंगुष्ठ नियम (मैक्सवेल का नियम) उपयोग होता है — दाएँ हाथ से चालक को इस तरह पकड़ें कि अंगूठा धारा की दिशा में हो; तब मुड़ी हुई उँगलियाँ चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा बताती हैं।
🔗 जोड़िए — क्षेत्र की प्रबलता धारा जितनी अधिक और तार से दूरी जितनी कम, उतनी ही ज़्यादा होती है।
हल किया उदाहरण 1: एक सीधा तार उत्तर से दक्षिण दिशा में रखा है, जिसमें धारा उत्तर से दक्षिण की ओर बह रही है। तार के ठीक ऊपर रखी कम्पास सुई किस दिशा में मुड़ेगी?
हल: दक्षिणहस्त अंगुष्ठ नियम लगाएँ — अंगूठा धारा की दिशा (उत्तर से दक्षिण) में रखें। तार के ऊपर की स्थिति में, मुड़ी उँगलियाँ वहाँ पश्चिम की ओर इशारा करेंगी। तो कम्पास सुई का उत्तरी सिरा पश्चिम की ओर मुड़ जाएगा (यह ओर्स्टेड के मूल प्रयोग जैसा ही परिणाम है)।
✅ जाँचिए
स्तर 1 सीधे तार के चारों ओर क्षेत्र रेखाएँ किस आकार की होती हैं? — उत्तर: संकेंद्री वृत्त।
स्तर 2 दक्षिणहस्त अंगुष्ठ नियम में अंगूठा किस दिशा दिखाता है? — उत्तर: धारा की दिशा।
स्तर 3 अगर तार में धारा की दिशा उल्टी कर दी जाए, तो चुंबकीय क्षेत्र की दिशा का क्या होगा? — उत्तर: क्षेत्र की दिशा भी बिल्कुल उल्टी हो जाएगी — दक्षिणहस्त नियम फिर से लगाने पर मुड़ी उँगलियाँ अब पहले से विपरीत दिशा दिखाएँगी।
3. वृत्ताकार पाश के कारण चुंबकीय क्षेत्र
🔍 जिज्ञासा — अगर सीधा तार गोल मोड़ दिया जाए, तो क्षेत्र रेखाओं का पैटर्न कैसे बदलेगा?
📖 समझिए — वृत्ताकार पाश के हर बिंदु पर संकेंद्री वृत्त तो बनते ही हैं (जैसे सीधे तार में), पर पाश के केंद्र के पास ये सभी वृत्त इतने बड़े हो जाते हैं कि लगभग सीधी, समांतर रेखाओं जैसे दिखते हैं। पाश जितने मोड़ (फेरे), क्षेत्र उतना ही प्रबल — क्योंकि हर फेरे का अपना योगदान जुड़ता जाता है।
🔗 जोड़िए — यही सिद्धांत आगे परिनालिका (अगला भाग) की नींव है — कई पाश एक के बाद एक लपेटने से क्षेत्र कई गुना बढ़ जाता है।
✅ जाँचिए
स्तर 1 वृत्ताकार पाश के केंद्र पर क्षेत्र रेखाएँ कैसी दिखती हैं? — उत्तर: लगभग सीधी, समांतर रेखाएँ।
स्तर 2 फेरों की संख्या बढ़ाने से क्षेत्र पर क्या असर पड़ता है? — उत्तर: क्षेत्र प्रबल होता है — हर फेरा अपना योगदान जोड़ता है।
4. परिनालिका और विद्युत चुम्बक
चित्र 2 — परिनालिका का क्षेत्र ठीक छड़ चुंबक जैसा — एक सिरा उत्तरी ध्रुव, दूसरा दक्षिणी ध्रुव जैसा व्यवहार करता है, भीतर क्षेत्र एकसमान।
📖 समझिए — बेलनाकार आकार में लिपटे तार के कई फेरों को परिनालिका (solenoid) कहते हैं। इसमें धारा प्रवाहित करने पर बना चुंबकीय क्षेत्र हूबहू एक छड़ चुंबक जैसा होता है — एक सिरा उत्तरी ध्रुव जैसा, दूसरा दक्षिणी ध्रुव जैसा व्यवहार करता है। भीतर की क्षेत्र रेखाएँ सीधी व समांतर होती हैं, यानी वहाँ क्षेत्र एकसमान (uniform) होता है।
विद्युत चुम्बक — परिनालिका के भीतर नरम लोहे की क्रोड (core) रख दी जाए, तो चुंबकीय क्षेत्र बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है — यही विद्युत चुम्बक है। ख़ासियत यह है कि यह सिर्फ़ तभी तक चुंबक रहता है जब तक धारा प्रवाहित हो रही हो — धारा बंद होते ही चुंबकत्व लगभग ख़त्म हो जाता है।
🔗 जोड़िए — यही ख़ासियत विद्युत चुम्बक को स्थायी चुंबक से कहीं ज़्यादा उपयोगी बनाती है — क्रेन में लोहे का भारी सामान उठाने-गिराने के लिए, या विद्युत घंटी में, बस धारा चालू-बंद करके चुंबकत्व को नियंत्रित किया जा सकता है।
✅ जाँचिए
स्तर 1 परिनालिका के भीतर क्षेत्र कैसा होता है? — उत्तर: एकसमान (सीधी, समांतर रेखाएँ)।
स्तर 2 विद्युत चुम्बक में नरम लोहे की क्रोड क्यों रखी जाती है? — उत्तर: ताकि चुंबकीय क्षेत्र बहुत बढ़ जाए।
स्तर 3 क्रेन में सामान उठाने के लिए स्थायी चुंबक की जगह विद्युत चुम्बक क्यों उपयोग होता है? — उत्तर: क्योंकि विद्युत चुम्बक का चुंबकत्व धारा से नियंत्रित होता है — धारा चालू करके भारी लोहा उठाया जा सकता है, और धारा बंद करते ही तुरंत छोड़ा जा सकता है। स्थायी चुंबक से यह नियंत्रण संभव नहीं।
5. चालक पर बल — फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम
🔍 जिज्ञासा — अब तक देखा कि धारा चुंबकीय क्षेत्र बनाती है। क्या उल्टा भी होता है — क्या चुंबकीय क्षेत्र किसी धारावाही तार को धकेल सकता है?
चित्र 3 — फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम: पहली उँगली क्षेत्र, दूसरी उँगली धारा, अँगूठा बल — तीनों परस्पर लंबवत।
📖 समझिए — हाँ! जब कोई धारावाही चालक चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक यांत्रिक बल लगता है — यही विद्युत मोटर का आधार है। इस बल की दिशा जानने के लिए फ्लेमिंग का वाम हस्त नियम उपयोग होता है:
बाएँ हाथ की पहली उँगली, दूसरी उँगली और अँगूठा — तीनों परस्पर लंबवत फैलाएँ
| उँगली | दिशा दर्शाती है |
|---|---|
| पहली उँगली (तर्जनी) | चुंबकीय क्षेत्र (Field) |
| दूसरी उँगली (मध्यमा) | धारा (Current) |
| अँगूठा (Thumb) | बल/गति (Motion) |
याद रखने की तरक़ीब: FBI क्रम से — Fore-finger=Field, seCond finger=Current, thUmb=Force — हिंदी में "क्ष-धा-ब" (क्षेत्र-धारा-बल) क्रम से तर्जनी-मध्यमा-अँगूठा।
🔗 जोड़िए — बल की दिशा हमेशा धारा और क्षेत्र दोनों के लंबवत होती है — इसी वजह से जब मोटर में यह बल लगातार सही दिशा में बदला जाता है, तो कुंडली लगातार घूमती रहती है — यही विद्युत मोटर का मूल सिद्धांत है, जो पंखे से लेकर मिक्सर तक हर जगह काम करता है।
हल किया उदाहरण 2: एक चालक में धारा उत्तर से दक्षिण की ओर बह रही है, और चुंबकीय क्षेत्र पश्चिम से पूर्व की ओर है। चालक पर लगने वाले बल की दिशा ज्ञात कीजिए।
हल: बाएँ हाथ की तर्जनी को क्षेत्र की दिशा (पश्चिम से पूर्व) में और मध्यमा को धारा की दिशा (उत्तर से दक्षिण) में रखें — तीनों परस्पर लंबवत रखने पर अँगूठा ऊपर की ओर (ऊर्ध्वाधर) इशारा करेगा। तो चालक पर बल ऊपर की दिशा में लगेगा — यही बल चालक को ऊपर धकेलता है।
विद्युत घंटी — यह भी विद्युत चुम्बक का एक रोज़मर्रा उपयोग है: बटन दबाते ही परिनालिका चुम्बकित होकर हथौड़ी को खींचती है, वह घंटी से टकराती है, इसी टक्कर में सम्पर्क टूट जाता है, चुम्बकत्व ख़त्म होता है, हथौड़ी वापस आती है — और यह चक्र बहुत तेज़ी से दोहरता रहता है, जब तक बटन दबा रहे।
✅ जाँचिए
स्तर 1 फ्लेमिंग के वाम हस्त नियम में अँगूठा क्या दर्शाता है? — उत्तर: बल (गति) की दिशा।
स्तर 2 यह नियम किस उपकरण के सिद्धांत का आधार है? — उत्तर: विद्युत मोटर।
स्तर 3 यदि धारा की दिशा उल्टी कर दी जाए, पर क्षेत्र वही रहे, तो बल की दिशा का क्या होगा? — उत्तर: बल की दिशा भी उल्टी हो जाएगी — यही कारण है कि मोटर में कुंडली की धारा को हर आधे चक्कर में बदला जाता है (स्प्लिट-रिंग व्यवस्था से), ताकि बल हमेशा घुमाने वाली दिशा में ही लगे।
6. घरेलू विद्युत परिपथ
📖 समझिए — भारत में घरेलू आपूर्ति सामान्यतः 220 V पर होती है, और तीन तारों से आती है:
| तार | रंग (सामान्यतः) | काम |
|---|---|---|
| धनात्मक/लाइव तार | लाल/भूरा | विभवांतर लाता है |
| उदासीन तार | काला/नीला | परिपथ पूरा करता है |
| अर्थ (भू-सम्पर्क) तार | हरा | उपकरण के धातु ढाँचे को ज़मीन से जोड़ता है — बिजली के झटके से बचाव |
अर्थ तार क्यों ज़रूरी है? अगर किसी ख़राबी से उपकरण के धातु के बाहरी हिस्से में करंट आ जाए, तो अर्थ तार उसे सुरक्षित रूप से ज़मीन में बहा देता है — इससे उपकरण छूने वाले व्यक्ति को झटका नहीं लगता। (अध्याय 11 में पढ़े शॉर्ट-सर्किट व ओवरलोडिंग से बचाव के लिए फ़्यूज़/MCB भी इसी परिपथ का हिस्सा हैं।)
🔗 जोड़िए — घर के सभी उपकरण पार्श्वक्रम में जुड़े होते हैं (अध्याय 11 याद कीजिए) ताकि हर उपकरण को पूरी 220 V मिले और एक उपकरण बंद होने से बाक़ी प्रभावित न हों।
| बिंदु | फ़्यूज़ | MCB |
|---|---|---|
| काम करने का तरीक़ा | ज़्यादा धारा से पतला तार पिघल जाता है (अध्याय 11 — तापीय प्रभाव) | ज़्यादा धारा से एक विद्युत-चुंबकीय स्विच अपने-आप "ट्रिप" हो जाता है |
| दोबारा उपयोग | एक बार पिघलने पर तार बदलना पड़ता है | कारण ठीक करने के बाद बटन दबाकर दोबारा चालू कर सकते हैं |
| आधुनिक घरों में | कम उपयोग होता है | आजकल अधिकतर घरों में यही लगाया जाता है |
✅ जाँचिए
स्तर 1 अर्थ तार का रंग सामान्यतः क्या होता है? — उत्तर: हरा।
स्तर 2 अर्थ तार का मुख्य काम क्या है? — उत्तर: उपकरण के धातु ढाँचे में आई किसी भी करंट-लीक को सुरक्षित रूप से ज़मीन में भेजकर बिजली के झटके से बचाना।
आपकी सीढ़ी
| स्तर | कुल | इतने सही होने पर | आप हैं |
|---|---|---|---|
| स्तर 1 | 11 | 9+ | परिचित |
| स्तर 2 | 11 | 8+ | दक्ष — बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार |
| स्तर 3 | 5 | 3+ | कुशल |
अंकन योजना
(एक विशिष्ट परीक्षक के दृष्टिकोण का उदाहरण — यह आधिकारिक योजना नहीं है।)
प्रश्न (5 अंक): परिनालिका का चुंबकीय क्षेत्र छड़ चुंबक जैसा क्यों होता है? नामांकित चित्र सहित समझाइए। साथ ही विद्युत चुम्बक और स्थायी चुंबक में एक अंतर बताइए।
परिनालिका की परिभाषा। 1 अंक
नामांकित चित्र — क्षेत्र रेखाएँ, ध्रुव। 2 अंक
छड़ चुंबक से तुलना का कारण। 1 अंक
विद्युत चुम्बक व स्थायी चुंबक में अंतर। 1 अंक
सामान्य ग़लतियाँ
| सामान्य ग़लती | सही तथ्य |
|---|---|
| "क्षेत्र रेखाएँ चुंबक के अंदर भी दक्षिण से उत्तर जाती हैं, यह सब जगह लागू है" | बाहर उत्तर से दक्षिण; भीतर दक्षिण से उत्तर — दोनों मिलकर बंद पाश बनाती हैं। |
| दक्षिणहस्त नियम और फ्लेमिंग नियम को मिला देना | दक्षिणहस्त नियम — क्षेत्र की दिशा जानने के लिए (धारा से)। फ्लेमिंग वाम हस्त — बल की दिशा जानने के लिए (क्षेत्र व धारा दोनों से)। |
| "परिनालिका के बाहर भी क्षेत्र एकसमान होता है" | एकसमान क्षेत्र सिर्फ़ भीतर होता है; बाहर यह छड़ चुंबक जैसा ही असमान रहता है। |
| "विद्युत चुम्बक स्थायी रूप से चुंबक बना रहता है" | नहीं — धारा बंद होते ही उसका चुंबकत्व लगभग समाप्त हो जाता है। |
| फ्लेमिंग वाम व दक्षिण हस्त नियम को गड्डमड्ड करना | वाम हस्त — मोटर (बल ज्ञात करना)। दक्षिण हस्त (फ्लेमिंग की, कक्षा 10 पाठ्यक्रम से बाहर) — जनित्र से संबंधित। |
अंतिम परीक्षण — मिश्रित
9+ सही = अध्याय में महारत।
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कहाँ से निकलती हैं?
- दो क्षेत्र रेखाएँ क्यों नहीं काटतीं?
- सीधे तार के चारों ओर क्षेत्र रेखाओं का आकार क्या होता है?
- दक्षिणहस्त अंगुष्ठ नियम में अंगूठा क्या दर्शाता है?
- परिनालिका के भीतर क्षेत्र कैसा होता है?
- विद्युत चुम्बक में नरम लोहे की क्रोड क्यों रखी जाती है?
- फ्लेमिंग के वाम हस्त नियम में अँगूठा क्या दर्शाता है?
- यह नियम किस उपकरण के सिद्धांत का आधार है?
- घर में अर्थ तार का रंग क्या होता है?
- (अध्याय 11) पार्श्वक्रम में तुल्य प्रतिरोध हमेशा कैसा होता है?
- (अध्याय 10) निकट दृष्टि दोष में कौन-सा लेंस लगता है?
उत्तर — 1. उत्तरी ध्रुव से | 2. एक बिंदु पर दो दिशाएँ असंभव | 3. संकेंद्री वृत्त | 4. धारा की दिशा | 5. एकसमान (सीधी, समांतर रेखाएँ) | 6. ताकि चुंबकीय क्षेत्र बहुत बढ़ जाए | 7. बल/गति की दिशा | 8. विद्युत मोटर | 9. हरा | 10. सबसे छोटे प्रतिरोधक से भी कम | 11. अवतल लेंस
शब्दावली
| हिंदी | English | हिंदी | English |
|---|---|---|---|
| चुंबकीय क्षेत्र | Magnetic field | विद्युत चुम्बक | Electromagnet |
| क्षेत्र रेखाएँ | Field lines | फ्लेमिंग वाम हस्त नियम | Fleming's left-hand rule |
| दक्षिणहस्त अंगुष्ठ नियम | Right-hand thumb rule | विद्युत मोटर | Electric motor |
| वृत्ताकार पाश | Circular loop | अर्थ तार | Earth wire |
| परिनालिका | Solenoid | MCB | Miniature Circuit Breaker |
अभिभावक व शिक्षक के लिए
5 मिनट जाँच: दक्षिणहस्त नियम व फ्लेमिंग नियम दोनों करवाकर देखें — कौन क्षेत्र के लिए, कौन बल के लिए। परिनालिका छड़ चुंबक जैसी क्यों है? घर में अर्थ तार क्यों ज़रूरी है?
घर पर करने योग्य: छड़ चुंबक + काग़ज़ + लोहे का बुरादा — क्षेत्र रेखाएँ ख़ुद "देखना", पूरी तरह सुरक्षित प्रयोग।
NCERT से आगे — जिज्ञासु पाठकों के लिए
यह भाग RBSE/NCERT कक्षा 10 पाठ्यक्रम से आगे का है और बोर्ड परीक्षा के लिए ज़रूरी नहीं है, केवल सरकारी और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विश्वविद्यालय स्रोतों पर आधारित है।
अमीटर के भीतर भी यही सिद्धांत काम करता है
अध्याय 11 में अमीटर को सिर्फ़ "धारा मापने वाला उपकरण" कहकर छोड़ दिया गया था। असल में परंपरागत (काँटे वाले) अमीटर के भीतर एक छोटी कुंडली होती है, जो एक स्थायी चुंबक के क्षेत्र में लटकी रहती है — जैसे ही धारा गुज़रती है, ठीक इसी अध्याय के "चालक पर बल" सिद्धांत के अनुसार कुंडली पर बल लगता है, और वह उतना ही घूमती है जितनी धारा तेज़ हो। यह घूमना ही सुई की गति में बदलकर मापन दिखाता है — गैल्वेनोमीटर नाम के इस उपकरण पर आधारित अमीटर व वोल्टमीटर, दोनों इसी अध्याय के सिद्धांत का प्रत्यक्ष उपयोग हैं।
ओर्स्टेड की "संयोग" वाली खोज
हैंस क्रिश्चियन ओर्स्टेड की 1820 की खोज असल में एक क्लास के दौरान संयोगवश हुई थी — वे तार गरम करने का प्रयोग दिखा रहे थे, जब पास रखी कम्पास सुई हिल गई। इतिहासकारों के अनुसार यह विज्ञान के इतिहास की उन गिनी-चुनी खोजों में से है जो पूरी तरह योजनाबद्ध प्रयोग से नहीं, बल्कि एक सतर्क वैज्ञानिक की सजग निगाह से हुई — इसी खोज ने आगे चलकर विद्युत-चुंबकत्व (electromagnetism) नामक पूरे नए क्षेत्र की नींव रखी।
फैराडे ने उल्टी दिशा में भी यही रिश्ता खोजा
यह अध्याय बताता है कि धारा चुंबकीय क्षेत्र बनाती है। कुछ साल बाद, अंग्रेज़ वैज्ञानिक माइकल फैराडे ने दिखाया कि इसका उल्टा भी सच है — बदलता हुआ चुंबकीय क्षेत्र भी तार में धारा उत्पन्न कर सकता है। यही सिद्धांत आज के हर विद्युत जनित्र (generator) — यानी बिजलीघरों में टरबाइन से बिजली बनाने — का आधार है। कक्षा 10 का यह अध्याय और अगली कक्षाओं में पढ़ा जाने वाला विद्युतचुंबकीय प्रेरण, दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
चुंबकीय उत्तोलन (Maglev) रेलगाड़ियाँ
जापान व चीन जैसे देशों में चलने वाली मैगलेव रेलगाड़ियाँ शक्तिशाली विद्युत चुम्बकों का उपयोग करके पटरी से बिना छुए ही हवा में तैरती हैं और आगे बढ़ती हैं — इसी अध्याय में पढ़े गए "धारावाही चालक पर चुंबकीय बल" सिद्धांत का एक अत्यंत उन्नत, बड़े पैमाने का उपयोग। ये रेलगाड़ियाँ 500 किमी/घंटा से भी अधिक गति तक पहुँच सकती हैं, क्योंकि पटरी से घर्षण लगभग शून्य होता है।
MRI मशीन — चिकित्सा में विशाल विद्युत चुम्बक
अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली MRI (Magnetic Resonance Imaging) मशीन के केंद्र में एक अत्यंत शक्तिशाली विद्युत चुम्बक होता है — सामान्यतः पृथ्वी के अपने चुंबकीय क्षेत्र से हज़ारों गुना प्रबल। यह शरीर के भीतर के ऊतकों की विस्तृत तस्वीर बनाने में मदद करता है, बिना किसी हानिकारक विकिरण के — इसी अध्याय में पढ़े गए मूल सिद्धांत का चिकित्सा क्षेत्र में एक जीवनरक्षक उपयोग।
भारत में विद्युत मोटर व उपकरण निर्माण
भारी उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत भारत में विद्युत मोटर, पंखे व जनित्र बनाने वाला एक बड़ा घरेलू उद्योग है — हर पंखा, हर मिक्सर, हर पंप जो घर में चलता है, ठीक इसी अध्याय में पढ़े फ्लेमिंग के वाम हस्त नियम पर आधारित है।
स्रोत
- ncert.nic.in — NCERT, भारत सरकार
- ePathshala — शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार
- mohfw.gov.in — स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार (MRI संदर्भ हेतु)
नोट: इन स्रोतों से कोई भी अंश सीधे नहीं लिया गया है; ऊपर के सभी कथन लेखक के अपने शब्दों में सामान्य शैक्षिक समझ के लिए लिखे गए हैं।
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संबंधित सामग्री
- अध्याय 11 — विद्युत
- अध्याय 10 — मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार
- कक्षा 10 विज्ञान मेगा टेस्ट — 200 MCQs
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर के कक्षा 10 विज्ञान (कोड 07) पाठ्यक्रम 2026–2027 पर आधारित — अध्याय 12, अंक भार 6। पाठ्यपुस्तक: विज्ञान, NCERT। सभी आरेख मौलिक हैं।

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