कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 5 — जैव प्रक्रम
NCERT / RBSE पाठ्यक्रम 2026–27 · करके सीखिए — अपना शरीर ही प्रयोगशाला · पाँच बोर्ड-चित्र बनाना सीखिए
आधार: माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान का कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यक्रम 2026–27 तथा एन.सी.ई.आर.टी. की निर्धारित पाठ्यपुस्तक।
तैयारी: पाठ्यपुस्तक के आधार पर संकलित, AI सहायता से व्यवस्थित, और लेखक द्वारा समीक्षित। सभी आरेख मौलिक हैं।
पत्थर और पेड़ दोनों चुपचाप खड़े हैं, पर एक जीवित है। पहचान क्या है?
इस अध्याय में आप अपनी नाड़ी गिनेंगे, साँस रोककर देखेंगे, और CO₂ का प्रमाण स्वयं पाएँगे।
- जैव प्रक्रम = पोषण, श्वसन, वहन, उत्सर्जन — अनुरक्षण के कार्य
- प्रकाश संश्लेषण: 6CO2 + 6H2O प्रकाश, क्लोरोफिल→ C6H12O6 + 6O2
- रंध्र — गैस-विनिमय व वाष्पोत्सर्जन; द्वार कोशिकाओं में जल भरने पर खुलते
- पाचन: मुख (लार-ऐमिलेस) → आमाशय (HCl, पेप्सिन) → क्षुद्रांत्र (पित्त, अग्न्याशयी रस), दीर्घरोम से अवशोषण
- श्वसन: वायवीय → CO2 + जल + अधिक ऊर्जा; अवायवीय → यीस्ट में एथेनॉल, पेशियों में लैक्टिक अम्ल (ऐंठन)
- चार कक्ष; बायाँ निलय सबसे मोटा; दोहरा परिसंचरण — रुधिर एक चक्र में दो बार हृदय से
- पादप: जाइलम — जल (वाष्पोत्सर्जन खिंचाव) · फ्लोएम — भोजन (स्थानांतरण)
- नेफ्रॉन वृक्क की क्रियात्मक इकाई; छनन → वरणात्मक पुनरवशोषण → मूत्र
🔍 जिज्ञासा 🧪 करके देखिए 📖 समझिए 🔗 लागू कीजिए ✅ जाँचिए
"जाँचिए" में तीन स्तर — 1 2 3 — अंत में अपनी सीढ़ी गिनिए।
नींव की जाँच — कक्षा 9 से
यह अध्याय उन्हीं को हराता है जिनकी कक्षा 9 की नींव कमज़ोर है। तीन से कम सही हों तो नीचे का पुनरीक्षण अवश्य पढ़िए।
- विसरण किसे कहते हैं?
- परासरण विसरण से कैसे भिन्न है?
- कोशिका झिल्ली का एक कार्य लिखिए।
- हरितलवक किस कोशिकांग को कहते हैं और उसमें कौन-सा वर्णक है?
- एंज़ाइम क्या करते हैं?
1. जैव प्रक्रम क्या हैं
🔍 जिज्ञासाएक पत्थर और एक सोता हुआ बच्चा — दोनों हिल नहीं रहे। फिर जीवित कौन है, और आप कैसे कहेंगे?
🧪 करके देखिएएक मिनट बिलकुल स्थिर बैठिए — कुछ मत हिलाइए। अब लिखिए कि इस एक मिनट में आपके शरीर के भीतर कौन-कौन से काम चलते रहे।
📖 समझिएदिखने वाली गति आवश्यक नहीं — पर आण्विक स्तर पर गति सदैव चलती है। संरचनाएँ लगातार टूटती हैं, अतः मरम्मत निरंतर चाहिए। इसे अनुरक्षण कार्य कहते हैं, और इसे करने वाले प्रक्रम जैव प्रक्रम।
| प्रक्रम | क्या करता है |
|---|---|
| पोषण | बाहर से भोजन लेकर ऊर्जा और कच्चा माल जुटाना |
| श्वसन | भोजन को तोड़कर ऊर्जा मुक्त करना |
| वहन | भोजन, ऑक्सीजन और अपशिष्ट को एक स्थान से दूसरे तक पहुँचाना |
| उत्सर्जन | हानिकारक अपशिष्ट शरीर से बाहर निकालना |
इसीलिए बहुकोशिकीय जीवों को विशेष अंग चाहिए — उनकी भीतरी कोशिकाएँ बाहर के सीधे संपर्क में नहीं, अतः केवल विसरण से काम नहीं चलता।
✅ जाँचिएस्तर 1 चार जैव प्रक्रमों के नाम लिखिए।
स्तर 2 अनुरक्षण कार्य किसे कहते हैं और वह क्यों आवश्यक है?
स्तर 3 अमीबा को हृदय और फेफड़ों की आवश्यकता क्यों नहीं पड़ती, जबकि मनुष्य को पड़ती है?
2. स्वपोषी पोषण — प्रकाश संश्लेषण
🔍 जिज्ञासापेड़ का वज़न कहाँ से आता है? मिट्टी से — तो गमले की मिट्टी घटती क्यों नहीं?
🧪 करके देखिए — NCERT क्रियाकलापगमले के पौधे को तीन दिन अँधेरे में रखिए। फिर एक पत्ती का आधा भाग काले कागज़ से ढककर धूप में रखिए। छह घंटे बाद पत्ती को ऐल्कोहॉल में उबालकर हरा रंग हटाइए और आयोडीन डालिए। अनुमान लगाइए — कौन-सा भाग नीला-काला होगा?
जो जीव सरल अकार्बनिक पदार्थों से अपना भोजन स्वयं बना लेते हैं, वे स्वपोषी कहलाते हैं।
प्रकाश संश्लेषण की तीन घटनाएँ:
- क्लोरोफिल द्वारा प्रकाश ऊर्जा का अवशोषण
- प्रकाश ऊर्जा का रासायनिक ऊर्जा में रूपांतरण तथा जल का हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन में अपघटन
- कार्बन डाइऑक्साइड का कार्बोहाइड्रेट में अपचयन
गैसों का अधिकांश आदान-प्रदान पत्ती के सूक्ष्म छिद्रों — रंध्र — से होता है। इन्हीं से जल वाष्प बनकर निकलता है, जिसे वाष्पोत्सर्जन कहते हैं। CO2 की आवश्यकता न हो तो रंध्र बंद हो जाते हैं — यह द्वार कोशिकाओं में जल भरने-निकलने से होता है।
पौधे जड़ों से मिट्टी में घुले नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, लोहा, मैग्नीशियम जैसे तत्व भी लेते हैं।
🔗 लागू कीजिएउत्तर: पेड़ का अधिकांश भार हवा की CO2 और जल से बने कार्बोहाइड्रेट का है। मिट्टी से केवल जल और थोड़े खनिज आते हैं — इसीलिए गमले की मिट्टी नहीं घटती।
✅ जाँचिएस्तर 1 प्रकाश संश्लेषण में निकलने वाली गैस कौन-सी है?
स्तर 2 रंध्र बंद क्यों हो जाते हैं? इससे पौधे को क्या लाभ है?
स्तर 3 प्रयोग में पौधे को पहले तीन दिन अँधेरे में क्यों रखा जाता है? यदि यह चरण छोड़ दें तो क्या होगा?
3. विषमपोषी पोषण
🔍 जिज्ञासाअमरबेल हरी नहीं होती, फिर भी जीवित रहती है। ब्रेड पर फफूँद बिना मुँह के खाती है। ये करते क्या हैं?
🧪 करके देखिएब्रेड का एक टुकड़ा हल्का गीला करके दो दिन ढककर रखिए। अनुमान लगाइए — फफूँद उग आई, पर ब्रेड का आकार क्या हुआ?
📖 समझिए| प्रकार | तरीका | उदाहरण |
|---|---|---|
| मृतजीवी | मृत एवं सड़े कार्बनिक पदार्थ को बाहर ही घोलकर सोखना | कवक, यीस्ट, मशरूम |
| परजीवी | दूसरे जीव के शरीर से पोषण लेना, प्रायः उसे हानि पहुँचाकर | अमरबेल, जूँ, फीताकृमि |
| प्राणीसमपोषी | संपूर्ण भोज्य पदार्थ को भीतर लेकर शरीर के अंदर पचाना | अमीबा, मनुष्य |
अमीबा में पोषण: कूटपाद से भोजन को घेरकर खाद्य रिक्तिका बनती है; वहीं जटिल पदार्थ सरल में टूटते, अवशोषित होते हैं और शेष बाहर निकल जाता है। पैरामीशियम में भोजन एक निश्चित स्थान से लिया जाता है, जहाँ पक्ष्माभ उसे धकेलते हैं।
🔗 लागू कीजिएएक पंक्ति में: मृतजीवी बाहर पचाकर सोखता है, परजीवी दूसरे का बना-बनाया लेता है, प्राणीसमपोषी भीतर ले जाकर पचाता है।
✅ जाँचिएस्तर 1 अमरबेल किस प्रकार का पोषण करती है?
स्तर 2 अमीबा में भोजन ग्रहण से त्याग तक की प्रक्रिया लिखिए।
स्तर 3 कवक और अमीबा — दोनों विषमपोषी हैं। फिर भी कवक को खाद्य रिक्तिका की आवश्यकता क्यों नहीं पड़ती?
4. मनुष्य में पोषण
🔍 जिज्ञासारोटी का एक टुकड़ा मुँह में देर तक चबाते रहिए — बिना कुछ मिलाए वह मीठा क्यों लगने लगता है?
🧪 करके देखिए — अभी, इसी समयरोटी का एक कौर एक मिनट चबाते रहिए, निगलिए मत। स्वाद में क्या बदला?
📖 समझिए| अंग | क्या होता है |
|---|---|
| मुखगुहा | दाँत भोजन को महीन करते हैं; लार-ऐमिलेस स्टार्च को शर्करा में तोड़ता है; लार भोजन को फिसलनदार बनाती है |
| ग्रसिका | क्रमाकुंचन गति से भोजन आमाशय तक |
| आमाशय | HCl — माध्यम अम्लीय करता है तथा जीवाणु मारता है · पेप्सिन — प्रोटीन पचाता है · श्लेष्मा — आमाशय को अपने ही अम्ल से बचाता है |
| क्षुद्रांत्र | सबसे लंबा भाग; यहीं पाचन पूर्ण होता है और अवशोषण होता है |
| यकृत | पित्त बनाता है — अम्लीय भोजन को क्षारीय करता है तथा वसा का इमल्सीकरण करता है |
| अग्न्याशय | ट्रिप्सिन — प्रोटीन · लाइपेज — इमल्सीकृत वसा |
| बृहदांत्र | जल का अवशोषण; शेष अपशिष्ट गुदा से बाहर |
इसीलिए खाना चबाकर खाने को कहा जाता है — सतही क्षेत्रफल बढ़ता है और लार-ऐमिलेस को काम का अवसर मिलता है।
✅ जाँचिएस्तर 1 आमाशय में कौन-सा अम्ल स्रावित होता है?
स्तर 2 पित्त के दो कार्य लिखिए।
स्तर 3 आमाशय की भित्ति स्वयं प्रोटीन की बनी है और वहाँ पेप्सिन प्रोटीन पचाता है। फिर आमाशय स्वयं क्यों नहीं पच जाता?
5. श्वसन
🔍 जिज्ञासादौड़ने के बाद पिंडली में ऐंठन क्यों होती है — और आराम करते ही वह चली क्यों जाती है?
🧪 करके देखिए — तीन छोटे प्रयोग(ख) दर्पण पर साँस। ठंडे काँच पर साँस छोड़िए — धुँधलापन किसका है?
(ग) चूने के पानी में साँस। नली से धीरे-धीरे साँस छोड़िए। क्या हुआ?
श्वसन में ग्लूकोज़ टूटकर ऊर्जा मुक्त करता है। पहला चरण सबमें समान — ग्लूकोज़ (6 कार्बन) कोशिकाद्रव्य में टूटकर पाइरूवेट (3 कार्बन) बनता है। आगे दो रास्ते:
| अवायवीय — ऑक्सीजन के बिना | वायवीय — ऑक्सीजन के साथ |
|---|---|
| यीस्ट में: पाइरूवेट → एथेनॉल + CO2 + ऊर्जा (किण्वन) | माइटोकॉन्ड्रिया में: पाइरूवेट → CO2 + जल + ऊर्जा |
| हमारी पेशियों में: पाइरूवेट → लैक्टिक अम्ल + ऊर्जा | ऊर्जा कहीं अधिक मिलती है |
वायु नासाद्वार से भीतर जाती है, जहाँ बाल और श्लेष्मा उसे छानते हैं; फिर श्वासनली, श्वसनी और श्वसनिकाओं से होते हुए कूपिकाओं तक। कूपिकाओं की भित्ति पतली होती है और उन पर रुधिर केशिकाओं का जाल — यहीं गैसों का विनिमय होता है।
ऑक्सीजन को हीमोग्लोबिन ढोता है, जिसकी ऑक्सीजन से बंधुता अधिक है। CO2 जल में अधिक घुलनशील है, इसलिए मुख्यतः घुली अवस्था में लौटती है।
जलीय जीव: मछलियाँ जल में घुली ऑक्सीजन लेती हैं; जल में ऑक्सीजन कम होने से उनकी श्वसन दर तेज़ होती है।
🔗 लागू कीजिएकूपिकाएँ इतनी अधिक हैं कि कुल सतह विशाल हो जाती है, और विसरण जितनी सतह पाए उतना तेज़। पूरा शरीर एक ही नियम पर बना है — जहाँ आदान-प्रदान करना हो, वहाँ सतह बढ़ाओ: दीर्घरोम में भी, कूपिका में भी।
✅ जाँचिएस्तर 1 ग्लूकोज़ के टूटने से बनने वाला तीन-कार्बन अणु कौन-सा है?
स्तर 2 वायवीय और अवायवीय श्वसन में तीन अंतर लिखिए।
स्तर 3 मछली को जल से बाहर निकालने पर वह मर जाती है, जबकि हवा में ऑक्सीजन जल से कहीं अधिक है। ऐसा क्यों?
6. वहन
🔍 जिज्ञासा100 फुट ऊँचे पेड़ की सबसे ऊपरी पत्ती तक जल पहुँचता कैसे है? वहाँ कोई पंप तो नहीं लगा।
🧪 करके देखिए — अपनी नाड़ीहृदय एक पंप है — चार कक्ष। ऊपर के दो अलिंद रुधिर लेते हैं, नीचे के दो निलय आगे भेजते हैं। निलय की भित्ति मोटी होती है, और बाएँ निलय की सबसे मोटी, क्योंकि उसे पूरे शरीर तक भेजना है।
दोहरा परिसंचरण: रुधिर एक चक्र में दो बार हृदय से गुज़रता है — एक बार फेफड़ों के लिए, एक बार शेष शरीर के लिए। इससे दोनों प्रकार का रुधिर नहीं मिलता और ऊर्जा कुशलता से मिलती है।
वाल्व रुधिर को उल्टी दिशा में लौटने नहीं देते।
| वाहिका | काम | पहचान |
|---|---|---|
| धमनी | हृदय से अंगों की ओर | भित्ति मोटी एवं लचीली — रुधिर तेज़ दाब से बहता है |
| शिरा | अंगों से हृदय की ओर | भित्ति पतली; वाल्व होते हैं |
| केशिका | पदार्थों का वास्तविक आदान-प्रदान | एक कोशिका जितनी पतली भित्ति |
लसीका — केशिकाओं से रिसा तरल; पचा हुआ वसा ढोता है और अतिरिक्त द्रव रुधिर में लौटाता है।
पादप में वहन
| जाइलम | फ्लोएम | |
|---|---|---|
| क्या ढोता है | जल एवं खनिज लवण | पत्तियों में बना भोजन |
| दिशा | जड़ से ऊपर, एक ही दिशा में | ऊपर या नीचे — जहाँ आवश्यकता हो |
| चालक बल | वाष्पोत्सर्जन खिंचाव — पत्तियों से जल उड़ने पर नीचे से खिंचाव बनता है | स्थानांतरण — ऊर्जा (ATP) खर्च करके, परासरण दाब से |
उत्तर: पंप नहीं, खिंचाव। दिन में वाष्पोत्सर्जन से जाइलम की पतली नलियों में जल का स्तंभ ऊपर खिंचता जाता है; रात में, जब वाष्पोत्सर्जन कम होता है, जड़ों का दाब मुख्य भूमिका निभाता है।
✅ जाँचिएस्तर 1 हृदय के किस कक्ष की भित्ति सबसे मोटी होती है?
स्तर 2 धमनी और शिरा में दो अंतर लिखिए।
स्तर 3 यदि हृदय में पट (सेप्टम) न होता तो क्या होता? इससे किस प्रकार के जीवों को क्या लाभ या हानि है?
7. उत्सर्जन
🔍 जिज्ञासासर्दियों में मूत्र अधिक और गर्मियों में कम — जबकि आप पानी उतना ही पीते हैं। ऐसा क्यों?
🧪 करके देखिए — सोचने वाला प्रयोगचाय की छन्नी बड़ी चीज़ें रोकती है, तरल निकाल देती है। सोचिए — शरीर ऐसे ही रक्त छानता तो ग्लूकोज़ और उपयोगी लवण भी बह जाते। वह उन्हें बचाता कैसे होगा?
📖 समझिएउपापचय से बने नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्ट बाहर निकालना उत्सर्जन है। मनुष्य में यह वृक्क करते हैं; प्रत्येक वृक्क में लाखों छननकारी इकाइयाँ — नेफ्रॉन।
- छनन — रुधिर केशिकागुच्छ में उच्च दाब से आता है और बोमन संपुट में छन जाता है।
- वरणात्मक पुनरवशोषण — वृक्क नलिका से गुज़रते समय ग्लूकोज़, अमीनो अम्ल, लवण और अधिकांश जल वापस रुधिर में सोख लिए जाते हैं।
- मूत्र — शेष तरल संग्रह वाहिनी से मूत्रवाहिनी, मूत्राशय होते हुए बाहर।
कृत्रिम वृक्क (अपोहन): रुधिर को मशीन की अर्धपारगम्य नलियों से गुज़ारा जाता है, जो अपशिष्ट सोख लेती हैं। इसमें पुनरवशोषण नहीं होता — इसीलिए यह असली वृक्क का पूर्ण विकल्प नहीं।
पादपों में उत्सर्जन: अतिरिक्त ऑक्सीजन तथा जल रंध्रों से; कुछ अपशिष्ट गोंद एवं रेज़िन के रूप में पुराने जाइलम में जमा; कुछ पत्तियाँ गिराकर; और कुछ आस-पास की मिट्टी में छोड़कर।
🔗 लागू कीजिएउत्तर: गर्मियों में बहुत जल पसीने से निकल जाता है, इसलिए वृक्क अधिक जल वापस सोखते हैं और मूत्र कम व गाढ़ा बनता है। सर्दियों में पसीना कम, अतिरिक्त जल निकालना पड़ता है — मूत्र अधिक।
✅ जाँचिएस्तर 1 वृक्क की क्रियात्मक इकाई का नाम?
स्तर 2 वरणात्मक पुनरवशोषण क्या है? इसमें कौन-कौन से पदार्थ वापस सोखे जाते हैं?
स्तर 3 किसी व्यक्ति के मूत्र में ग्लूकोज़ मिला। नेफ्रॉन के किस चरण में गड़बड़ी हुई होगी, और क्यों?
आपकी सीढ़ी — स्वयं आँकिए
| स्तर | कुल | यदि इतने सही | तो आप |
|---|---|---|---|
| स्तर 1 | 7 | 6+ | परिचित |
| स्तर 2 | 7 | 5+ | दक्ष — बोर्ड के लिए तैयार |
| स्तर 3 | 7 | 4+ | निपुण |
पाँच चित्र — ऐसे बनाइए
इस अध्याय में चित्र ही सबसे अधिक अंक दिलाते हैं। कागज़-पेंसिल लेकर साथ बनाइए। हर चित्र के साथ सबसे आम ग़लती भी दी है।
नामांकन: द्वार कोशिका, रंध्र छिद्र, हरितलवक।
आम ग़लती: दोनों कोशिकाओं को एक जैसा गोल बना देना — तब छिद्र ही नहीं बनता।
नामांकन: मुखगुहा, ग्रसिका, आमाशय, यकृत, पित्ताशय, अग्न्याशय, क्षुद्रांत्र, बृहदांत्र, गुदा।
आम ग़लती: यकृत और अग्न्याशय को आहारनाल के भीतर जोड़ देना — वे अलग ग्रंथियाँ हैं, केवल उनकी नलिकाएँ क्षुद्रांत्र में खुलती हैं।
नामांकन: दायाँ/बायाँ अलिंद, दायाँ/बायाँ निलय, महाशिरा, फुफ्फुस धमनी, फुफ्फुस शिरा, महाधमनी।
आम ग़लती: चित्र देखने वाले की बाईं ओर "बायाँ" लिख देना। दायाँ-बायाँ शरीर का होता है — इसलिए चित्र में बायाँ भाग आपकी दाईं ओर आएगा।
नामांकन: केशिकागुच्छ, बोमन संपुट, वृक्क नलिका, संग्रह वाहिनी, मूत्र।
आम ग़लती: आने और जाने वाली धमनिका में से एक भूल जाना — दोनों बनाइए।
नामांकन: श्वसनी/श्वसनिका, कूपिका, रुधिर केशिका, O2, CO2।
आम ग़लती: तीरों की दिशा उलट देना — O2 कूपिका से रुधिर में, CO2 रुधिर से कूपिका में।
अंक योजना — परीक्षक कैसे अंक देता है
(परीक्षकों की सामान्य पद्धति पर आधारित उदाहरण — बोर्ड की आधिकारिक योजना नहीं।)
प्रश्न (5 अंक): मानव हृदय का नामांकित चित्र बनाइए तथा दोहरे परिसंचरण को समझाइए।
चित्र — चार कक्ष, पट एवं चारों वाहिकाएँ। 2 अंक
नामांकन — सभी भाग सही नाम सहित। 1 अंक
दोहरे परिसंचरण की परिभाषा — रुधिर एक चक्र में दो बार हृदय से गुज़रता है। 1 अंक
लाभ — ऑक्सीजन-युक्त और ऑक्सीजन-रहित रुधिर नहीं मिलते, जिससे शरीर को अधिक ऊर्जा कुशलतापूर्वक मिलती है। 1 अंक
भूल-सुधार तालिका
| आम भूल | सही बात |
|---|---|
| "पेड़ का भार मिट्टी से आता है" | अधिकांश भार हवा की CO2 और जल से बने कार्बोहाइड्रेट का है। |
| "पाचन आमाशय में शुरू होता है" | मुँह में ही — लार-ऐमिलेस से। |
| वसा-पाचन में केवल लाइपेज लिखना | पहले पित्त से इमल्सीकरण, फिर लाइपेज — दोनों लिखिए। |
| "अवायवीय श्वसन में ऊर्जा नहीं मिलती" | मिलती है, पर वायवीय की तुलना में कहीं कम। |
| "लैक्टिक अम्ल यीस्ट में बनता है" | यीस्ट में एथेनॉल व CO2; लैक्टिक अम्ल हमारी पेशियों में। |
| "धमनी में सदैव शुद्ध रुधिर" | फुफ्फुस धमनी ऑक्सीजन-रहित रुधिर ले जाती है — यही अपवाद पूछा जाता है। |
| "जाइलम भोजन ढोता है" | जाइलम — जल एवं खनिज; फ्लोएम — भोजन। |
| "वृक्क सारा जल निकाल देते हैं" | अधिकांश जल वापस सोख लिया जाता है — वरणात्मक पुनरवशोषण। |
अंतिम परीक्षण — मिश्रित, पिछले अध्याय भी
8+ सही = अध्याय पक्का।
- प्रकाश संश्लेषण का संतुलित समीकरण लिखिए।
- रंध्र खुलते-बंद कैसे होते हैं?
- लार-ऐमिलेस किसे पचाता है?
- पेशियों में ऐंठन का कारण?
- हृदय के किस कक्ष की भित्ति सबसे मोटी और क्यों?
- कौन-सी धमनी ऑक्सीजन-रहित रुधिर ले जाती है?
- वाष्पोत्सर्जन खिंचाव क्या करता है?
- कृत्रिम वृक्क में कौन-सा चरण नहीं होता?
- (अध्याय 2) निःश्वास में CO2 कैसे सिद्ध करेंगे?
- (अध्याय 4) यीस्ट के अवायवीय श्वसन से बना एथेनॉल किस समजातीय श्रेणी का है?
शब्दावली
| हिंदी | English | हिंदी | English |
|---|---|---|---|
| जैव प्रक्रम | Life processes | दीर्घरोम | Villi |
| स्वपोषी / विषमपोषी | Autotrophic / Heterotrophic | कूपिका | Alveoli |
| रंध्र / द्वार कोशिका | Stomata / Guard cell | अलिंद / निलय | Atrium / Ventricle |
| वाष्पोत्सर्जन | Transpiration | जाइलम / फ्लोएम | Xylem / Phloem |
| प्राणीसमपोषी | Holozoic | नेफ्रॉन | Nephron |
| क्रमाकुंचन | Peristalsis | वरणात्मक पुनरवशोषण | Selective reabsorption |
अभिभावक एवं शिक्षक के लिए
घर पर करवाइए: नाड़ी गिनना (उठक-बैठक से पहले और बाद) तथा चूने के पानी में साँस — दोनों सुरक्षित और जीवन भर याद रहने वाले।
चित्र अवश्य बनवाइए — केवल पढ़ लेने से वे नहीं आते।
आगे की जिज्ञासा
पाठ NCERT कक्षा 10 की सीमा में है। आगे जानने को केवल विश्वसनीय स्रोत:
- ncert.nic.in — NCERT, भारत सरकार: मूल पाठ्यपुस्तक
- ePathshala — शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार
- PhET — University of Colorado Boulder: विज्ञान सिमुलेशन
वचन: पाठ में इन स्रोतों से कुछ नहीं मिलाया गया। ये केवल जिज्ञासा के लिए हैं, परीक्षा के लिए नहीं।

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