कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 5 जैव प्रक्रम | सचित्र नोट्स, पाँच बोर्ड चित्र एवं प्रश्न उत्तर

📅 Wednesday, 23 September 2026 📖 पढ़ रहे हैं...

कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 5 — जैव प्रक्रम

NCERT / RBSE पाठ्यक्रम 2026–27 · करके सीखिए — अपना शरीर ही प्रयोगशाला · पाँच बोर्ड-चित्र बनाना सीखिए

लेखक: सुरेंद्र सिंह चौहान — पूर्व शिक्षा अधिकारी, राजस्थान। शिक्षण, प्रशिक्षण एवं प्रशासन में 34 वर्ष (1991–2025) का अनुभव।
आधार: माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान का कक्षा 10 विज्ञान पाठ्यक्रम 2026–27 तथा एन.सी.ई.आर.टी. की निर्धारित पाठ्यपुस्तक।
तैयारी: पाठ्यपुस्तक के आधार पर संकलित, AI सहायता से व्यवस्थित, और लेखक द्वारा समीक्षित। सभी आरेख मौलिक हैं।
अभी इसी क्षण आपका हृदय धड़क रहा है, फेफड़े हवा भर रहे हैं, आँतें भोजन पचा रही हैं, गुर्दे रक्त छान रहे हैं — और आपने एक भी आदेश नहीं दिया।

पत्थर और पेड़ दोनों चुपचाप खड़े हैं, पर एक जीवित है। पहचान क्या है?

इस अध्याय में आप अपनी नाड़ी गिनेंगे, साँस रोककर देखेंगे, और CO₂ का प्रमाण स्वयं पाएँगे।
एक नज़र में  ·  अध्याय 5 — जैव प्रक्रम (Life Processes)  ·  अंक भार 8 — प्रकाश के साथ पूरे विज्ञान का सबसे भारी अध्याय  ·  विषय कोड 07  ·  यह अध्याय चित्रों पर टिका है — पाँच नामांकित चित्र अनिवार्य
⏱ केवल 5 मिनट हैं? यह पढ़ लीजिए
  1. जैव प्रक्रम = पोषण, श्वसन, वहन, उत्सर्जन — अनुरक्षण के कार्य
  2. प्रकाश संश्लेषण: 6CO2 + 6H2O प्रकाश, क्लोरोफिल→ C6H12O6 + 6O2
  3. रंध्र — गैस-विनिमय व वाष्पोत्सर्जन; द्वार कोशिकाओं में जल भरने पर खुलते
  4. पाचन: मुख (लार-ऐमिलेस) → आमाशय (HCl, पेप्सिन) → क्षुद्रांत्र (पित्त, अग्न्याशयी रस), दीर्घरोम से अवशोषण
  5. श्वसन: वायवीय → CO2 + जल + अधिक ऊर्जा; अवायवीय → यीस्ट में एथेनॉल, पेशियों में लैक्टिक अम्ल (ऐंठन)
  6. चार कक्ष; बायाँ निलय सबसे मोटा; दोहरा परिसंचरण — रुधिर एक चक्र में दो बार हृदय से
  7. पादप: जाइलम — जल (वाष्पोत्सर्जन खिंचाव) · फ्लोएम — भोजन (स्थानांतरण)
  8. नेफ्रॉन वृक्क की क्रियात्मक इकाई; छनन → वरणात्मक पुनरवशोषण → मूत्र
कैसे पढ़ें — हर अवधारणा में पहले आप सोचेंगे या करेंगे, फिर व्याख्या:
🔍 जिज्ञासा 🧪 करके देखिए 📖 समझिए 🔗 लागू कीजिए ✅ जाँचिए
"जाँचिए" में तीन स्तर — 1 2 3 — अंत में अपनी सीढ़ी गिनिए।

नींव की जाँच — कक्षा 9 से

यह अध्याय उन्हीं को हराता है जिनकी कक्षा 9 की नींव कमज़ोर है। तीन से कम सही हों तो नीचे का पुनरीक्षण अवश्य पढ़िए।

  1. विसरण किसे कहते हैं?
  2. परासरण विसरण से कैसे भिन्न है?
  3. कोशिका झिल्ली का एक कार्य लिखिए।
  4. हरितलवक किस कोशिकांग को कहते हैं और उसमें कौन-सा वर्णक है?
  5. एंज़ाइम क्या करते हैं?
उत्तर एवं 4 पंक्ति का पुनरीक्षण

1. कणों का अधिक सांद्रता से कम की ओर स्वतः फैलना।   2. परासरण में यह गति केवल जल की, और अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर।   3. चुनती है कि क्या भीतर आए, क्या बाहर जाए।   4. क्लोरोप्लास्ट; वर्णक क्लोरोफिल।   5. जैव-उत्प्रेरक — दर बढ़ाते हैं, स्वयं नहीं बदलते।

पूरा अध्याय इन्हीं पर खड़ा है: गैसें विसरण से, जल परासरण से, पाचन एंज़ाइमों से, प्रकाश संश्लेषण क्लोरोफिल से।

1. जैव प्रक्रम क्या हैं

🔍 जिज्ञासा

एक पत्थर और एक सोता हुआ बच्चा — दोनों हिल नहीं रहे। फिर जीवित कौन है, और आप कैसे कहेंगे?

🧪 करके देखिए

एक मिनट बिलकुल स्थिर बैठिए — कुछ मत हिलाइए। अब लिखिए कि इस एक मिनट में आपके शरीर के भीतर कौन-कौन से काम चलते रहे।

क्या लिखा आपने?

हृदय धड़का, साँस चली, भोजन पचा, रक्त बहा, गुर्दों ने छाना, कोशिकाओं ने मरम्मत की। बाहर से पूर्ण स्थिरता, भीतर अनवरत कार्य। यही उत्तर है।

📖 समझिए

दिखने वाली गति आवश्यक नहीं — पर आण्विक स्तर पर गति सदैव चलती है। संरचनाएँ लगातार टूटती हैं, अतः मरम्मत निरंतर चाहिए। इसे अनुरक्षण कार्य कहते हैं, और इसे करने वाले प्रक्रम जैव प्रक्रम।

प्रक्रमक्या करता है
पोषणबाहर से भोजन लेकर ऊर्जा और कच्चा माल जुटाना
श्वसनभोजन को तोड़कर ऊर्जा मुक्त करना
वहनभोजन, ऑक्सीजन और अपशिष्ट को एक स्थान से दूसरे तक पहुँचाना
उत्सर्जनहानिकारक अपशिष्ट शरीर से बाहर निकालना
🔗 लागू कीजिए

इसीलिए बहुकोशिकीय जीवों को विशेष अंग चाहिए — उनकी भीतरी कोशिकाएँ बाहर के सीधे संपर्क में नहीं, अतः केवल विसरण से काम नहीं चलता।

✅ जाँचिए

स्तर 1 चार जैव प्रक्रमों के नाम लिखिए।

उत्तर

पोषण, श्वसन, वहन, उत्सर्जन।

स्तर 2 अनुरक्षण कार्य किसे कहते हैं और वह क्यों आवश्यक है?

उत्तर

शरीर की टूट-फूट की मरम्मत करने वाले कार्य। आण्विक गति के कारण संरचनाएँ निरंतर बिगड़ती रहती हैं, इसलिए मरम्मत रुके तो जीव जीवित नहीं रह सकता।

स्तर 3 अमीबा को हृदय और फेफड़ों की आवश्यकता क्यों नहीं पड़ती, जबकि मनुष्य को पड़ती है?

उत्तर

अमीबा का पूरा शरीर बाहरी वातावरण के संपर्क में है, अतः गैसें और भोजन सीधे विसरण से आ-जा सकते हैं। मनुष्य में भीतरी कोशिकाएँ बाहर से बहुत दूर हैं — विसरण अपर्याप्त, इसलिए वहन-तंत्र चाहिए।

2. स्वपोषी पोषण — प्रकाश संश्लेषण

🔍 जिज्ञासा

पेड़ का वज़न कहाँ से आता है? मिट्टी से — तो गमले की मिट्टी घटती क्यों नहीं?

🧪 करके देखिए — NCERT क्रियाकलाप

गमले के पौधे को तीन दिन अँधेरे में रखिए। फिर एक पत्ती का आधा भाग काले कागज़ से ढककर धूप में रखिए। छह घंटे बाद पत्ती को ऐल्कोहॉल में उबालकर हरा रंग हटाइए और आयोडीन डालिए। अनुमान लगाइए — कौन-सा भाग नीला-काला होगा?

क्या होता है?

केवल खुला भाग नीला-काला होता है — वहीं स्टार्च बना। ढका भाग वैसा ही रहता है। यही प्रकाश संश्लेषण का प्रमाण है: प्रकाश के बिना स्टार्च नहीं बनता।

सावधानी: ऐल्कोहॉल ज्वलनशील है — उसे सीधी आँच पर न रखें, जल-ऊष्मक (पानी के बर्तन में रखकर) ही गरम करें, और यह चरण शिक्षक या बड़ों की देखरेख में ही करें।
📖 समझिए

जो जीव सरल अकार्बनिक पदार्थों से अपना भोजन स्वयं बना लेते हैं, वे स्वपोषी कहलाते हैं।

6CO2 + 6H2O  सूर्य का प्रकाश, क्लोरोफिल→  C6H12O6 + 6O2

प्रकाश संश्लेषण की तीन घटनाएँ:

  1. क्लोरोफिल द्वारा प्रकाश ऊर्जा का अवशोषण
  2. प्रकाश ऊर्जा का रासायनिक ऊर्जा में रूपांतरण तथा जल का हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन में अपघटन
  3. कार्बन डाइऑक्साइड का कार्बोहाइड्रेट में अपचयन
ये तीनों घटनाएँ एक साथ होना आवश्यक नहीं — क्रम से भी हो सकती हैं। बोर्ड में यह वाक्य अलग से पूछा जाता है।
रंध्र का नामांकित चित्र — दो द्वार कोशिकाएँ, रंध्र छिद्र, हरितलवक; CO2 का प्रवेश तथा ऑक्सीजन व जलवाष्प का निकलना, कक्षा 10 विज्ञान जैव प्रक्रम
चित्र 1 — रंध्र। दोनों द्वार कोशिकाएँ फूलने पर छिद्र खुलता है — यहाँ खुलते-बंद होते देख सकते हैं।

गैसों का अधिकांश आदान-प्रदान पत्ती के सूक्ष्म छिद्रों — रंध्र — से होता है। इन्हीं से जल वाष्प बनकर निकलता है, जिसे वाष्पोत्सर्जन कहते हैं। CO2 की आवश्यकता न हो तो रंध्र बंद हो जाते हैं — यह द्वार कोशिकाओं में जल भरने-निकलने से होता है।

पौधे जड़ों से मिट्टी में घुले नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, लोहा, मैग्नीशियम जैसे तत्व भी लेते हैं।

🔗 लागू कीजिए

उत्तर: पेड़ का अधिकांश भार हवा की CO2 और जल से बने कार्बोहाइड्रेट का है। मिट्टी से केवल जल और थोड़े खनिज आते हैं — इसीलिए गमले की मिट्टी नहीं घटती।

✅ जाँचिए

स्तर 1 प्रकाश संश्लेषण में निकलने वाली गैस कौन-सी है?

उत्तर

ऑक्सीजन।

स्तर 2 रंध्र बंद क्यों हो जाते हैं? इससे पौधे को क्या लाभ है?

उत्तर

द्वार कोशिकाओं से जल निकलने पर वे सिकुड़ जाती हैं और छिद्र बंद हो जाता है। लाभ — जल की हानि रुकती है, विशेषकर जब CO2 की आवश्यकता न हो।

स्तर 3 प्रयोग में पौधे को पहले तीन दिन अँधेरे में क्यों रखा जाता है? यदि यह चरण छोड़ दें तो क्या होगा?

उत्तर

ताकि पहले से जमा स्टार्च समाप्त हो जाए। यह चरण छोड़ने पर ढका भाग भी पुराने स्टार्च से नीला-काला आ सकता है और प्रयोग कुछ सिद्ध नहीं करेगा — यही इसका नियंत्रण है।

3. विषमपोषी पोषण

🔍 जिज्ञासा

अमरबेल हरी नहीं होती, फिर भी जीवित रहती है। ब्रेड पर फफूँद बिना मुँह के खाती है। ये करते क्या हैं?

🧪 करके देखिए

ब्रेड का एक टुकड़ा हल्का गीला करके दो दिन ढककर रखिए। अनुमान लगाइए — फफूँद उग आई, पर ब्रेड का आकार क्या हुआ?

क्या दिखा?

ब्रेड गलने-सी लगती है। फफूँद ने अपने बाहर ही एंज़ाइम छोड़कर ब्रेड को घोल लिया, फिर घुला हुआ भोजन सोख लिया — बिना मुँह के।

📖 समझिए
प्रकारतरीकाउदाहरण
मृतजीवीमृत एवं सड़े कार्बनिक पदार्थ को बाहर ही घोलकर सोखनाकवक, यीस्ट, मशरूम
परजीवीदूसरे जीव के शरीर से पोषण लेना, प्रायः उसे हानि पहुँचाकरअमरबेल, जूँ, फीताकृमि
प्राणीसमपोषीसंपूर्ण भोज्य पदार्थ को भीतर लेकर शरीर के अंदर पचानाअमीबा, मनुष्य

अमीबा में पोषण: कूटपाद से भोजन को घेरकर खाद्य रिक्तिका बनती है; वहीं जटिल पदार्थ सरल में टूटते, अवशोषित होते हैं और शेष बाहर निकल जाता है। पैरामीशियम में भोजन एक निश्चित स्थान से लिया जाता है, जहाँ पक्ष्माभ उसे धकेलते हैं।

🔗 लागू कीजिए

एक पंक्ति में: मृतजीवी बाहर पचाकर सोखता है, परजीवी दूसरे का बना-बनाया लेता है, प्राणीसमपोषी भीतर ले जाकर पचाता है।

✅ जाँचिए

स्तर 1 अमरबेल किस प्रकार का पोषण करती है?

उत्तर

परजीवी।

स्तर 2 अमीबा में भोजन ग्रहण से त्याग तक की प्रक्रिया लिखिए।

उत्तर

कूटपाद से भोजन को घेरना → खाद्य रिक्तिका बनना → उसमें एंज़ाइमों द्वारा जटिल पदार्थों का सरल में टूटना → अवशोषण → बचा हुआ भाग सतह से बाहर।

स्तर 3 कवक और अमीबा — दोनों विषमपोषी हैं। फिर भी कवक को खाद्य रिक्तिका की आवश्यकता क्यों नहीं पड़ती?

उत्तर

कवक पाचन शरीर के बाहर करता है — एंज़ाइम छोड़कर भोजन वहीं घोलता और सोख लेता है। अमीबा भोजन भीतर लेता है, इसलिए उसे भीतर एक थैली — खाद्य रिक्तिका — चाहिए।

4. मनुष्य में पोषण

🔍 जिज्ञासा

रोटी का एक टुकड़ा मुँह में देर तक चबाते रहिए — बिना कुछ मिलाए वह मीठा क्यों लगने लगता है?

🧪 करके देखिए — अभी, इसी समय

रोटी का एक कौर एक मिनट चबाते रहिए, निगलिए मत। स्वाद में क्या बदला?

क्यों हुआ?

लार में लार-ऐमिलेस एंज़ाइम होता है, जो स्टार्च को शर्करा में तोड़ देता है। शर्करा मीठी होती है — यानी पाचन मुँह में ही शुरू हो चुका है।

📖 समझिए
मानव पाचन तंत्र का नामांकित चित्र — मुखगुहा, ग्रसिका, आमाशय, यकृत, पित्ताशय, अग्न्याशय, क्षुद्रांत्र, बृहदांत्र तथा गुदा, कक्षा 10 विज्ञान जैव प्रक्रम
चित्र 2 — आहारनाल। भोजन का मार्ग ऊपर से नीचे; यकृत और अग्न्याशय नलिकाओं से रस भेजते हैं।
अंगक्या होता है
मुखगुहादाँत भोजन को महीन करते हैं; लार-ऐमिलेस स्टार्च को शर्करा में तोड़ता है; लार भोजन को फिसलनदार बनाती है
ग्रसिकाक्रमाकुंचन गति से भोजन आमाशय तक
आमाशयHCl — माध्यम अम्लीय करता है तथा जीवाणु मारता है · पेप्सिन — प्रोटीन पचाता है · श्लेष्मा — आमाशय को अपने ही अम्ल से बचाता है
क्षुद्रांत्रसबसे लंबा भाग; यहीं पाचन पूर्ण होता है और अवशोषण होता है
यकृतपित्त बनाता है — अम्लीय भोजन को क्षारीय करता है तथा वसा का इमल्सीकरण करता है
अग्न्याशयट्रिप्सिन — प्रोटीन · लाइपेज — इमल्सीकृत वसा
बृहदांत्रजल का अवशोषण; शेष अपशिष्ट गुदा से बाहर
दीर्घरोम। क्षुद्रांत्र की भीतरी सतह पर अंगुली जैसे असंख्य उभार — ये सतही क्षेत्रफल बहुत बढ़ा देते हैं और इनमें रुधिर वाहिकाएँ होती हैं, जिनसे पचा भोजन सीधे रुधिर में जाता है।
वसा का पाचन — दो चरण, दोनों लिखिए: पहले पित्त बड़ी वसा-बूँदों को छोटी बूँदों में तोड़ता है (इमल्सीकरण), फिर लाइपेज उन्हें पचाता है। केवल लाइपेज लिखने पर आधा अंक कटता है।
🔗 लागू कीजिए

इसीलिए खाना चबाकर खाने को कहा जाता है — सतही क्षेत्रफल बढ़ता है और लार-ऐमिलेस को काम का अवसर मिलता है।

✅ जाँचिए

स्तर 1 आमाशय में कौन-सा अम्ल स्रावित होता है?

उत्तर

हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl)।

स्तर 2 पित्त के दो कार्य लिखिए।

उत्तर

(1) आमाशय से आए अम्लीय भोजन को क्षारीय बनाना, ताकि अग्न्याशयी एंज़ाइम काम कर सकें। (2) वसा का इमल्सीकरण — बड़ी बूँदों को छोटी बूँदों में तोड़ना।

स्तर 3 आमाशय की भित्ति स्वयं प्रोटीन की बनी है और वहाँ पेप्सिन प्रोटीन पचाता है। फिर आमाशय स्वयं क्यों नहीं पच जाता?

उत्तर

भीतरी सतह से निकला श्लेष्मा सुरक्षा परत बनाकर भित्ति को अम्ल और पेप्सिन दोनों से बचाता है। यह परत कमज़ोर पड़ने पर ही अल्सर जैसी स्थिति बनती है।

5. श्वसन

🔍 जिज्ञासा

दौड़ने के बाद पिंडली में ऐंठन क्यों होती है — और आराम करते ही वह चली क्यों जाती है?

🧪 करके देखिए — तीन छोटे प्रयोग
(क) साँस रोकिए। घड़ी देखकर समय नापिए। फिर 20 उठक-बैठक करके दोबारा — इस बार कम समय क्यों?

(ख) दर्पण पर साँस। ठंडे काँच पर साँस छोड़िए — धुँधलापन किसका है?

(ग) चूने के पानी में साँस। नली से धीरे-धीरे साँस छोड़िए। क्या हुआ?
तीनों के उत्तर

(क) परिश्रम के बाद पेशियों को अधिक ऑक्सीजन चाहिए, इसलिए साँस की माँग बढ़ जाती है। (ख) श्वसन में जल बनता है, वही वाष्प के रूप में निकला। (ग) चूने का पानी दूधिया हो गया — आपके निःश्वास में CO2 है (अध्याय 2 वाली पहचान)।

सावधानी: साँस रोकने का प्रयोग बैठकर करें, और कभी भी जबरदस्ती न करें। चूने का पानी पीना नहीं है — केवल उसमें साँस छोड़नी है।
📖 समझिए

श्वसन में ग्लूकोज़ टूटकर ऊर्जा मुक्त करता है। पहला चरण सबमें समान — ग्लूकोज़ (6 कार्बन) कोशिकाद्रव्य में टूटकर पाइरूवेट (3 कार्बन) बनता है। आगे दो रास्ते:

अवायवीय — ऑक्सीजन के बिनावायवीय — ऑक्सीजन के साथ
यीस्ट में: पाइरूवेट → एथेनॉल + CO2 + ऊर्जा  (किण्वन)माइटोकॉन्ड्रिया में: पाइरूवेट → CO2 + जल + ऊर्जा
हमारी पेशियों में: पाइरूवेट → लैक्टिक अम्ल + ऊर्जाऊर्जा कहीं अधिक मिलती है
ऐंठन का उत्तर: तेज़ दौड़ में ऑक्सीजन कम पड़ती है, पेशियाँ अवायवीय रास्ता अपनाती हैं और लैक्टिक अम्ल जमा हो जाता है। आराम से ऑक्सीजन पहुँचती है, अम्ल हटता है, ऐंठन समाप्त।
कूपिका का नामांकित चित्र — श्वसनी, कूपिकाएँ तथा रुधिर केशिका; ऑक्सीजन का रुधिर में जाना और कार्बन डाइऑक्साइड का बाहर आना, कक्षा 10 विज्ञान श्वसन
चित्र 5 — कूपिका और उसे घेरती रुधिर केशिका। यहीं O₂ रुधिर में जाती है और CO₂ बाहर आती है।

वायु नासाद्वार से भीतर जाती है, जहाँ बाल और श्लेष्मा उसे छानते हैं; फिर श्वासनली, श्वसनी और श्वसनिकाओं से होते हुए कूपिकाओं तक। कूपिकाओं की भित्ति पतली होती है और उन पर रुधिर केशिकाओं का जाल — यहीं गैसों का विनिमय होता है।

ऑक्सीजन को हीमोग्लोबिन ढोता है, जिसकी ऑक्सीजन से बंधुता अधिक है। CO2 जल में अधिक घुलनशील है, इसलिए मुख्यतः घुली अवस्था में लौटती है।

जलीय जीव: मछलियाँ जल में घुली ऑक्सीजन लेती हैं; जल में ऑक्सीजन कम होने से उनकी श्वसन दर तेज़ होती है।

🔗 लागू कीजिए

कूपिकाएँ इतनी अधिक हैं कि कुल सतह विशाल हो जाती है, और विसरण जितनी सतह पाए उतना तेज़। पूरा शरीर एक ही नियम पर बना है — जहाँ आदान-प्रदान करना हो, वहाँ सतह बढ़ाओ: दीर्घरोम में भी, कूपिका में भी।

✅ जाँचिए

स्तर 1 ग्लूकोज़ के टूटने से बनने वाला तीन-कार्बन अणु कौन-सा है?

उत्तर

पाइरूवेट।

स्तर 2 वायवीय और अवायवीय श्वसन में तीन अंतर लिखिए।

उत्तर

(1) ऑक्सीजन — वायवीय में आवश्यक, अवायवीय में नहीं। (2) उत्पाद — वायवीय: CO2 व जल; अवायवीय: यीस्ट में एथेनॉल व CO2, पेशियों में लैक्टिक अम्ल। (3) ऊर्जा — वायवीय में अधिक।

स्तर 3 मछली को जल से बाहर निकालने पर वह मर जाती है, जबकि हवा में ऑक्सीजन जल से कहीं अधिक है। ऐसा क्यों?

उत्तर

क्लोम जल में घुली ऑक्सीजन के लिए बने हैं। वायु में इनकी पतली पर्तें चिपककर सूख जाती हैं, सतह घट जाती है और विनिमय रुक जाता है। समस्या ऑक्सीजन की कमी नहीं, उसे ग्रहण करने वाली संरचना की है।

6. वहन

🔍 जिज्ञासा

100 फुट ऊँचे पेड़ की सबसे ऊपरी पत्ती तक जल पहुँचता कैसे है? वहाँ कोई पंप तो नहीं लगा।

🧪 करके देखिए — अपनी नाड़ी
कलाई पर अंगूठे की ओर दो उँगलियाँ रखिए — धड़कन मिलेगी। एक मिनट गिनिए। फिर 20 उठक-बैठक करके तुरंत दोबारा गिनिए। पहले अनुमान लगाइए — बढ़ेगी या घटेगी, और क्यों?
क्या हुआ और क्यों

संख्या बढ़ गई। परिश्रम से पेशियों को अधिक ऑक्सीजन और ग्लूकोज़ चाहिए, इसलिए हृदय तेज़ी से पंप करने लगता है। आपने अभी-अभी वहन-तंत्र को काम करते हुए गिना है।

📖 समझिए
मानव हृदय का नामांकित चित्र — दायाँ अलिंद, दायाँ निलय, बायाँ अलिंद, बायाँ निलय, महाशिरा, फुफ्फुस धमनी, फुफ्फुस शिरा और महाधमनी, दोहरा परिसंचरण, कक्षा 10 विज्ञान
चित्र 3 — हृदय के चार कक्ष। बाईं ओर ऑक्सीजन-युक्त और दाईं ओर ऑक्सीजन-रहित रुधिर — पट (सेप्टम) उन्हें मिलने नहीं देता।

हृदय एक पंप है — चार कक्ष। ऊपर के दो अलिंद रुधिर लेते हैं, नीचे के दो निलय आगे भेजते हैं। निलय की भित्ति मोटी होती है, और बाएँ निलय की सबसे मोटी, क्योंकि उसे पूरे शरीर तक भेजना है।

दोहरा परिसंचरण: रुधिर एक चक्र में दो बार हृदय से गुज़रता है — एक बार फेफड़ों के लिए, एक बार शेष शरीर के लिए। इससे दोनों प्रकार का रुधिर नहीं मिलता और ऊर्जा कुशलता से मिलती है।

वाल्व रुधिर को उल्टी दिशा में लौटने नहीं देते।

वाहिकाकामपहचान
धमनीहृदय से अंगों की ओरभित्ति मोटी एवं लचीली — रुधिर तेज़ दाब से बहता है
शिराअंगों से हृदय की ओरभित्ति पतली; वाल्व होते हैं
केशिकापदार्थों का वास्तविक आदान-प्रदानएक कोशिका जितनी पतली भित्ति

लसीका — केशिकाओं से रिसा तरल; पचा हुआ वसा ढोता है और अतिरिक्त द्रव रुधिर में लौटाता है।

पादप में वहन

जाइलमफ्लोएम
क्या ढोता हैजल एवं खनिज लवणपत्तियों में बना भोजन
दिशाजड़ से ऊपर, एक ही दिशा मेंऊपर या नीचे — जहाँ आवश्यकता हो
चालक बलवाष्पोत्सर्जन खिंचाव — पत्तियों से जल उड़ने पर नीचे से खिंचाव बनता हैस्थानांतरण — ऊर्जा (ATP) खर्च करके, परासरण दाब से
🔗 लागू कीजिए

उत्तर: पंप नहीं, खिंचाव। दिन में वाष्पोत्सर्जन से जाइलम की पतली नलियों में जल का स्तंभ ऊपर खिंचता जाता है; रात में, जब वाष्पोत्सर्जन कम होता है, जड़ों का दाब मुख्य भूमिका निभाता है।

✅ जाँचिए

स्तर 1 हृदय के किस कक्ष की भित्ति सबसे मोटी होती है?

उत्तर

बायाँ निलय।

स्तर 2 धमनी और शिरा में दो अंतर लिखिए।

उत्तर

(1) धमनी हृदय से रुधिर ले जाती है, शिरा हृदय की ओर लाती है। (2) धमनी की भित्ति मोटी और लचीली होती है क्योंकि रुधिर अधिक दाब से बहता है; शिरा की भित्ति पतली होती है और उसमें वाल्व होते हैं।

स्तर 3 यदि हृदय में पट (सेप्टम) न होता तो क्या होता? इससे किस प्रकार के जीवों को क्या लाभ या हानि है?

उत्तर

दोनों प्रकार का रुधिर मिल जाता, शरीर तक कम ऑक्सीजन पहुँचती और ऊर्जा घट जाती। पक्षियों-स्तनधारियों को ताप स्थिर रखने हेतु निरंतर अधिक ऊर्जा चाहिए, इसलिए उनमें पूर्ण पट होता है। जो जीव वातावरण के अनुसार ताप बदल लेते हैं, उनमें यह पृथक्करण पूर्ण नहीं होता।

7. उत्सर्जन

🔍 जिज्ञासा

सर्दियों में मूत्र अधिक और गर्मियों में कम — जबकि आप पानी उतना ही पीते हैं। ऐसा क्यों?

🧪 करके देखिए — सोचने वाला प्रयोग

चाय की छन्नी बड़ी चीज़ें रोकती है, तरल निकाल देती है। सोचिए — शरीर ऐसे ही रक्त छानता तो ग्लूकोज़ और उपयोगी लवण भी बह जाते। वह उन्हें बचाता कैसे होगा?

उत्तर

शरीर दो चरणों में काम करता है — पहले सब छानता है, फिर उपयोगी पदार्थ वापस सोख लेता है। यही वरणात्मक पुनरवशोषण है; साधारण छन्नी यह नहीं कर सकती।

📖 समझिए
नेफ्रॉन का नामांकित चित्र — केशिकागुच्छ, बोमन संपुट, वृक्क नलिका, संग्रह वाहिनी तथा मूत्र का बनना, वरणात्मक पुनरवशोषण, कक्षा 10 विज्ञान उत्सर्जन
चित्र 4 — नेफ्रॉन। रुधिर केशिकागुच्छ में छनता है; उपयोगी पदार्थ नलिका से वापस सोख लिए जाते हैं, शेष मूत्र बनता है।

उपापचय से बने नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्ट बाहर निकालना उत्सर्जन है। मनुष्य में यह वृक्क करते हैं; प्रत्येक वृक्क में लाखों छननकारी इकाइयाँ — नेफ्रॉन।

  1. छनन — रुधिर केशिकागुच्छ में उच्च दाब से आता है और बोमन संपुट में छन जाता है।
  2. वरणात्मक पुनरवशोषण — वृक्क नलिका से गुज़रते समय ग्लूकोज़, अमीनो अम्ल, लवण और अधिकांश जल वापस रुधिर में सोख लिए जाते हैं।
  3. मूत्र — शेष तरल संग्रह वाहिनी से मूत्रवाहिनी, मूत्राशय होते हुए बाहर।
कितना जल वापस सोखा जाए — यह इस पर निर्भर करता है कि शरीर में कितना जल अतिरिक्त है और कितना अपशिष्ट निकालना है।

कृत्रिम वृक्क (अपोहन): रुधिर को मशीन की अर्धपारगम्य नलियों से गुज़ारा जाता है, जो अपशिष्ट सोख लेती हैं। इसमें पुनरवशोषण नहीं होता — इसीलिए यह असली वृक्क का पूर्ण विकल्प नहीं।

पादपों में उत्सर्जन: अतिरिक्त ऑक्सीजन तथा जल रंध्रों से; कुछ अपशिष्ट गोंद एवं रेज़िन के रूप में पुराने जाइलम में जमा; कुछ पत्तियाँ गिराकर; और कुछ आस-पास की मिट्टी में छोड़कर।

🔗 लागू कीजिए

उत्तर: गर्मियों में बहुत जल पसीने से निकल जाता है, इसलिए वृक्क अधिक जल वापस सोखते हैं और मूत्र कम व गाढ़ा बनता है। सर्दियों में पसीना कम, अतिरिक्त जल निकालना पड़ता है — मूत्र अधिक।

✅ जाँचिए

स्तर 1 वृक्क की क्रियात्मक इकाई का नाम?

उत्तर

नेफ्रॉन।

स्तर 2 वरणात्मक पुनरवशोषण क्या है? इसमें कौन-कौन से पदार्थ वापस सोखे जाते हैं?

उत्तर

छने हुए तरल में से उपयोगी पदार्थों को चुनकर वापस रुधिर में सोख लेना। ग्लूकोज़, अमीनो अम्ल, लवण तथा अधिकांश जल वापस सोख लिए जाते हैं।

स्तर 3 किसी व्यक्ति के मूत्र में ग्लूकोज़ मिला। नेफ्रॉन के किस चरण में गड़बड़ी हुई होगी, और क्यों?

उत्तर

वरणात्मक पुनरवशोषण में। ग्लूकोज़ तो सामान्यतः छनता ही है — दोष यह कि नलिका उसे पूरी तरह वापस नहीं सोख पाई।

ध्यान रहे: यह किसी रोग का संकेत हो सकता है, जिसकी पहचान केवल चिकित्सक करता है।

आपकी सीढ़ी — स्वयं आँकिए

स्तरकुलयदि इतने सहीतो आप
स्तर 176+परिचित
स्तर 275+दक्ष — बोर्ड के लिए तैयार
स्तर 374+निपुण
जहाँ अटके वहीं लौटिए — और दो-तीन दिन बाद वही प्रश्न फिर कीजिए।

पाँच चित्र — ऐसे बनाइए

इस अध्याय में चित्र ही सबसे अधिक अंक दिलाते हैं। कागज़-पेंसिल लेकर साथ बनाइए। हर चित्र के साथ सबसे आम ग़लती भी दी है।

1. रंध्र (चित्र 1) — आमने-सामने दो सेम के बीज जैसी घुमावदार कोशिकाएँ बनाइए; बीच की खाली जगह छिद्र है। भीतरी भित्ति मोटी, बाहरी पतली दिखाइए। कुछ छोटे गोले = हरितलवक।
नामांकन: द्वार कोशिका, रंध्र छिद्र, हरितलवक।
आम ग़लती: दोनों कोशिकाओं को एक जैसा गोल बना देना — तब छिद्र ही नहीं बनता।
2. पाचन तंत्र (चित्र 2) — ऊपर मुखगुहा, नीचे सीधी नली (ग्रसिका), फिर बाईं ओर झुका J आकार का आमाशय, बीच में लंबी कुंडलित नली (क्षुद्रांत्र), उसके चारों ओर उलटे U जैसा मोटा बृहदांत्र, अंत में गुदा। बाईं ओर यकृत और नीचे छोटा पित्ताशय, दाईं ओर अग्न्याशय — नलिकाएँ क्षुद्रांत्र की ओर।
नामांकन: मुखगुहा, ग्रसिका, आमाशय, यकृत, पित्ताशय, अग्न्याशय, क्षुद्रांत्र, बृहदांत्र, गुदा।
आम ग़लती: यकृत और अग्न्याशय को आहारनाल के भीतर जोड़ देना — वे अलग ग्रंथियाँ हैं, केवल उनकी नलिकाएँ क्षुद्रांत्र में खुलती हैं।
3. हृदय (चित्र 3) — चौड़े आयत में बीच खड़ी रेखा (पट), दोनों ओर आड़ी रेखा — चार कक्ष। ऊपर छोटे = अलिंद, नीचे बड़े = निलय; बाएँ निलय की भित्ति मोटी। ऊपर से चार वाहिकाएँ, तीर से दिशा।
नामांकन: दायाँ/बायाँ अलिंद, दायाँ/बायाँ निलय, महाशिरा, फुफ्फुस धमनी, फुफ्फुस शिरा, महाधमनी।
आम ग़लती: चित्र देखने वाले की बाईं ओर "बायाँ" लिख देना। दायाँ-बायाँ शरीर का होता है — इसलिए चित्र में बायाँ भाग आपकी दाईं ओर आएगा।
4. नेफ्रॉन (चित्र 4) — बाईं ओर प्याला (बोमन संपुट), भीतर उलझे धागे जैसा गुच्छा (केशिकागुच्छ); एक धमनिका आती, एक जाती। प्याले से लंबी मुड़ी-तुड़ी नली (वृक्क नलिका), जो सीधी मोटी नली (संग्रह वाहिनी) में मिले।
नामांकन: केशिकागुच्छ, बोमन संपुट, वृक्क नलिका, संग्रह वाहिनी, मूत्र।
आम ग़लती: आने और जाने वाली धमनिका में से एक भूल जाना — दोनों बनाइए।
5. कूपिका (चित्र 5) — नली (श्वसनिका) से अंगूर के गुच्छे जैसे थैले। एक थैले को बड़ा करके चारों ओर टूटी रेखा से केशिका-जाल, और दो तीर — O2 भीतर, CO2 बाहर।
नामांकन: श्वसनी/श्वसनिका, कूपिका, रुधिर केशिका, O2, CO2।
आम ग़लती: तीरों की दिशा उलट देना — O2 कूपिका से रुधिर में, CO2 रुधिर से कूपिका में।

अंक योजना — परीक्षक कैसे अंक देता है

(परीक्षकों की सामान्य पद्धति पर आधारित उदाहरण — बोर्ड की आधिकारिक योजना नहीं।)

प्रश्न (5 अंक): मानव हृदय का नामांकित चित्र बनाइए तथा दोहरे परिसंचरण को समझाइए।

चित्र — चार कक्ष, पट एवं चारों वाहिकाएँ। 2 अंक

नामांकन — सभी भाग सही नाम सहित। 1 अंक

दोहरे परिसंचरण की परिभाषा — रुधिर एक चक्र में दो बार हृदय से गुज़रता है। 1 अंक

लाभ — ऑक्सीजन-युक्त और ऑक्सीजन-रहित रुधिर नहीं मिलते, जिससे शरीर को अधिक ऊर्जा कुशलतापूर्वक मिलती है। 1 अंक

सीख: पाँच में से तीन अंक चित्र और नामांकन के हैं। चित्र छोड़ने वाला पूरा जानते हुए भी दो अंक ही पाता है।

भूल-सुधार तालिका

आम भूलसही बात
"पेड़ का भार मिट्टी से आता है"अधिकांश भार हवा की CO2 और जल से बने कार्बोहाइड्रेट का है।
"पाचन आमाशय में शुरू होता है"मुँह में ही — लार-ऐमिलेस से।
वसा-पाचन में केवल लाइपेज लिखनापहले पित्त से इमल्सीकरण, फिर लाइपेज — दोनों लिखिए।
"अवायवीय श्वसन में ऊर्जा नहीं मिलती"मिलती है, पर वायवीय की तुलना में कहीं कम।
"लैक्टिक अम्ल यीस्ट में बनता है"यीस्ट में एथेनॉल व CO2; लैक्टिक अम्ल हमारी पेशियों में।
"धमनी में सदैव शुद्ध रुधिर"फुफ्फुस धमनी ऑक्सीजन-रहित रुधिर ले जाती है — यही अपवाद पूछा जाता है।
"जाइलम भोजन ढोता है"जाइलम — जल एवं खनिज; फ्लोएम — भोजन।
"वृक्क सारा जल निकाल देते हैं"अधिकांश जल वापस सोख लिया जाता है — वरणात्मक पुनरवशोषण।

अंतिम परीक्षण — मिश्रित, पिछले अध्याय भी

8+ सही = अध्याय पक्का।

  1. प्रकाश संश्लेषण का संतुलित समीकरण लिखिए।
  2. रंध्र खुलते-बंद कैसे होते हैं?
  3. लार-ऐमिलेस किसे पचाता है?
  4. पेशियों में ऐंठन का कारण?
  5. हृदय के किस कक्ष की भित्ति सबसे मोटी और क्यों?
  6. कौन-सी धमनी ऑक्सीजन-रहित रुधिर ले जाती है?
  7. वाष्पोत्सर्जन खिंचाव क्या करता है?
  8. कृत्रिम वृक्क में कौन-सा चरण नहीं होता?
  9. (अध्याय 2) निःश्वास में CO2 कैसे सिद्ध करेंगे?
  10. (अध्याय 4) यीस्ट के अवायवीय श्वसन से बना एथेनॉल किस समजातीय श्रेणी का है?
उत्तर देखें

1. 6CO2 + 6H2O → C6H12O6 + 6O2 (प्रकाश, क्लोरोफिल)  |  2. द्वार कोशिकाओं में जल भरने पर खुलते, निकलने पर बंद  |  3. स्टार्च  |  4. ऑक्सीजन की कमी से बना लैक्टिक अम्ल  |  5. बायाँ निलय — पूरे शरीर में रुधिर भेजना पड़ता है  |  6. फुफ्फुस धमनी  |  7. जाइलम में जल को ऊपर खींचता है  |  8. वरणात्मक पुनरवशोषण  |  9. चूने के पानी में साँस छोड़ने पर वह दूधिया हो जाता है  |  10. ऐल्कोहॉल श्रेणी (प्रकार्यात्मक समूह –OH)

शब्दावली

हिंदीEnglishहिंदीEnglish
जैव प्रक्रमLife processesदीर्घरोमVilli
स्वपोषी / विषमपोषीAutotrophic / HeterotrophicकूपिकाAlveoli
रंध्र / द्वार कोशिकाStomata / Guard cellअलिंद / निलयAtrium / Ventricle
वाष्पोत्सर्जनTranspirationजाइलम / फ्लोएमXylem / Phloem
प्राणीसमपोषीHolozoicनेफ्रॉनNephron
क्रमाकुंचनPeristalsisवरणात्मक पुनरवशोषणSelective reabsorption

अभिभावक एवं शिक्षक के लिए

पाँच मिनट की जाँच: चार जैव प्रक्रम कौन-से? रोटी चबाने पर मीठी क्यों? ऐंठन क्यों? बायाँ निलय मोटा क्यों? नेफ्रॉन क्या करता है?

घर पर करवाइए: नाड़ी गिनना (उठक-बैठक से पहले और बाद) तथा चूने के पानी में साँस — दोनों सुरक्षित और जीवन भर याद रहने वाले।

चित्र अवश्य बनवाइए — केवल पढ़ लेने से वे नहीं आते।

आगे की जिज्ञासा

पाठ NCERT कक्षा 10 की सीमा में है। आगे जानने को केवल विश्वसनीय स्रोत:

  • ncert.nic.in — NCERT, भारत सरकार: मूल पाठ्यपुस्तक
  • ePathshala — शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार
  • PhET — University of Colorado Boulder: विज्ञान सिमुलेशन

वचन: पाठ में इन स्रोतों से कुछ नहीं मिलाया गया। ये केवल जिज्ञासा के लिए हैं, परीक्षा के लिए नहीं।

स्वास्थ्य संबंधी सूचना: यह पाठ केवल शैक्षिक है। शरीर से जुड़ी किसी भी समस्या, लक्षण या जाँच-परिणाम के लिए योग्य चिकित्सक से ही परामर्श लें — इस पृष्ठ की जानकारी को चिकित्सकीय सलाह न मानें।
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यह पाठ माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान, अजमेर के कक्षा 10 विज्ञान (कोड 07) पाठ्यक्रम सत्र 2026–2027 के अनुसार है — अध्याय 5 का निर्धारित अंक भार 8। निर्धारित पुस्तक — विज्ञान, एन.सी.ई.आर.टी.। सभी आरेख मौलिक। संरचना 5E शिक्षण मॉडल पर। परीक्षा से पूर्व आधिकारिक वेबसाइट से मिलान करें।
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