कक्षा 10 विज्ञान शब्दकोश भाग 2 (प्रकाश और नेत्र): चित्र, हिन्दी-English शब्द और परीक्षा संकेत
चित्र, शब्द और अर्थ, एक ही पन्ने पर
अध्याय 9-10 · 29 शब्द · 4 चित्र
यह कक्षा 10 विज्ञान शब्दकोश का भाग 2 है। इसमें अध्याय 9 (प्रकाश) और अध्याय 10 (मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार) के शब्द हिन्दी और English में एक ही पंक्ति में हैं। हर अध्याय की शुरुआत चित्र से होती है, फिर शब्द-कार्ड आते हैं। रसायन के अध्याय भाग 1 में हैं।
- पहले चित्र देखें: हर अध्याय की शुरुआत में चित्र और "एक मिनट में समझें" है।
- फिर शब्द-कार्ड: खोज बॉक्स में हिन्दी या English में शब्द लिखें।
- याद-मोड: अर्थ धुंधला हो जाता है। पहले खुद बोलें, फिर कार्ड छूकर जाँचें।
चमकीली सतह से टकराकर प्रकाश का उसी माध्यम में वापस लौटना।
💡 नियम: आपतन कोण = परावर्तन कोण। आपतित किरण, अभिलंब और परावर्तित किरण एक ही तल में होती हैं।
ऐसा दर्पण जिसकी परावर्तक सतह किसी खोखले गोले का भाग हो। यह अवतल या उत्तल होता है।
💡 अवतल दर्पण अभिसारी और उत्तल दर्पण अपसारी कहलाता है।
ध्रुव दर्पण का मध्य बिंदु है। वक्रता केंद्र उस गोले का केंद्र है जिसका दर्पण भाग है, और वक्रता त्रिज्या उस गोले की त्रिज्या।
💡 मुख्य अक्ष ध्रुव और वक्रता केंद्र से गुज़रने वाली सीधी रेखा है।
मुख्य अक्ष के समानांतर किरणें परावर्तन के बाद जिस बिंदु पर मिलती (या मिलती प्रतीत होती) हैं, वह मुख्य फोकस है। ध्रुव से उसकी दूरी फोकस दूरी है।
💡 गोलीय दर्पण में R = 2f, यानी f = R/2।
दूरियों और ऊँचाइयों पर धन-ऋण चिह्न लगाने का नियम। सारी दूरियाँ ध्रुव से मापते हैं।
💡 अवतल दर्पण की f ऋणात्मक और उत्तल की धनात्मक होती है। मुख्य अक्ष के ऊपर की ऊँचाई धनात्मक, नीचे की ऋणात्मक।
1/v + 1/u = 1/f, जहाँ u वस्तु-दूरी, v प्रतिबिंब-दूरी। आवर्धन m = h′/h = −v/u।
💡 m ऋणात्मक हो तो प्रतिबिंब वास्तविक है, धनात्मक हो तो आभासी।
वास्तविक प्रतिबिंब पर्दे पर प्राप्त होता है। आभासी प्रतिबिंब पर्दे पर नहीं आता, किरणें केवल मिलती प्रतीत होती हैं।
💡 वास्तविक प्रतिबिंब प्रायः उलटा और आभासी सीधा होता है।
अवतल दर्पण: टॉर्च, सर्चलाइट, वाहन के अग्रदीप, शेविंग दर्पण और दंत विशेषज्ञ। उत्तल दर्पण: वाहन के पश्च-दर्शी दर्पण।
💡 उत्तल दर्पण सदैव सीधा, छोटा प्रतिबिंब देता है और उसका दृष्टि-क्षेत्र बड़ा होता है।
प्रकाश का एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे में जाते समय अपनी दिशा बदलना।
💡 विरल से सघन माध्यम में जाने पर किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है, सघन से विरल में अभिलंब से दूर।
(i) आपतित किरण, अपवर्तित किरण और अभिलंब एक ही तल में होते हैं। (ii) sin i / sin r एक नियतांक है।
💡 यह नियतांक दिए गए माध्यम-युग्म का अपवर्तनांक है।
माध्यम में प्रकाश की चाल कितनी घटती है, इसकी माप: n = c/v।
💡 निर्वात में प्रकाश की चाल लगभग 3 × 108 m/s है।
दो गोलीय सतहों से घिरा पारदर्शी पदार्थ लेंस है: उत्तल (अभिसारी) या अवतल (अपसारी)। मध्य बिंदु प्रकाशिक केंद्र है।
💡 प्रकाशिक केंद्र से गुज़रने वाली किरण बिना विचलित हुए निकल जाती है।
1/v − 1/u = 1/f, और आवर्धन m = h′/h = v/u।
💡 दर्पण सूत्र में दोनों पद जुड़ते हैं (+), लेंस सूत्र में घटते हैं (−)।
फोकस दूरी की व्युत्क्रम: P = 1/f (f मीटर में)। SI मात्रक डाइऑप्टर (D)।
💡 उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक और अवतल की ऋणात्मक होती है।
समतल दर्पण में प्रतिबिंब सदैव आभासी और सीधा बनता है। उसका आकार वस्तु के बराबर होता है और वह दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है, जितनी दूरी पर वस्तु सामने रखी है।
💡 प्रतिबिंब पार्श्व-परिवर्तित होता है: आपका दायाँ हाथ प्रतिबिंब में बाएँ हाथ जैसा दिखता है।
वह माध्यम जिसका अपवर्तनांक अधिक हो और जो प्रकाश को अधिक मोड़े।
💡 प्रकाशिक घनत्व और द्रव्यमान-घनत्व एक नहीं हैं: किरोसिन जल से प्रकाशिक सघन है, पर द्रव्यमान-घनत्व में जल से हल्का है।
स्लैब में प्रकाश दो बार मुड़ता है: हवा से काँच में अभिलंब की ओर, काँच से हवा में अभिलंब से दूर। दोनों बार मुड़ने का परिमाण समान और विपरीत होता है।
💡 इसलिए निर्गत किरण आपतित किरण के समांतर निकलती है, पर थोड़ा पार्श्विक विस्थापन हो जाता है।
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | आकार | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | फोकस F पर | अत्यधिक छोटा, बिंदु-आकार | वास्तविक, उलटा |
| C से परे | F और C के बीच | छोटा | वास्तविक, उलटा |
| C पर | C पर | समान आकार | वास्तविक, उलटा |
| C और F के बीच | C से परे | बड़ा (विवर्धित) | वास्तविक, उलटा |
| F पर | अनंत पर | प्रतिबिंब प्राप्त नहीं होता | — |
| P और F के बीच | दर्पण के पीछे | बड़ा (विवर्धित) | आभासी, सीधा |
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | आकार | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | फोकस F₂ पर | अत्यधिक छोटा, बिंदु-आकार | वास्तविक, उलटा |
| 2F₁ से परे | F₂ और 2F₂ के बीच | छोटा | वास्तविक, उलटा |
| 2F₁ पर | 2F₂ पर | समान आकार | वास्तविक, उलटा |
| F₁ और 2F₁ के बीच | 2F₂ से परे | बड़ा (विवर्धित) | वास्तविक, उलटा |
| F₁ पर | अनंत पर | प्रतिबिंब प्राप्त नहीं होता | — |
| F₁ और O के बीच | वस्तु की ही ओर | बड़ा (विवर्धित) | आभासी, सीधा |
कॉर्निया से प्रकाश भीतर आता है, अभिनेत्र लेंस रेटिना पर वास्तविक, उलटा प्रतिबिंब बनाता है और दृक् तंत्रिका संकेत मस्तिष्क को भेजती है।
💡 आँख में अधिकांश अपवर्तन कॉर्निया की बाहरी सतह पर होता है।
पुतली आँख में जाने वाले प्रकाश की मात्रा तय करती है और परितारिका उसका आकार नियंत्रित करती है।
💡 तेज़ प्रकाश में पुतली सिकुड़ती है, मंद प्रकाश में फैलती है।
पक्ष्माभी पेशियों से अभिनेत्र लेंस (आँख के लेंस) की फोकस दूरी बदलकर निकट और दूर की वस्तुएँ देखने की क्षमता।
💡 निकट की वस्तु देखते समय लेंस मोटा होता है।
निकट बिंदु: स्पष्ट देखने की न्यूनतम दूरी। दूर बिंदु: वह दूरतम बिंदु जहाँ तक आँख स्पष्ट देख सके।
💡 सामान्य आँख का निकट बिंदु लगभग 25 cm और दूर बिंदु अनंत होता है।
निकट की वस्तु स्पष्ट, दूर की धुँधली दिखना। प्रतिबिंब रेटिना के सामने बनता है।
💡 सुधार: उपयुक्त क्षमता का अवतल लेंस।
दूर की वस्तु स्पष्ट, निकट की धुँधली दिखना। प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है।
💡 सुधार: उपयुक्त क्षमता का उत्तल लेंस।
आयु बढ़ने के साथ समंजन क्षमता घट जाने का दोष।
💡 सुधार प्रायः द्विफोकसी लेंस (Bi-focal lens) से होता है।
अधिक आयु में अभिनेत्र लेंस का दूधिया और धुँधला हो जाना।
💡 शल्य-चिकित्सा के बाद दृष्टि लौटना संभव है।
श्वेत प्रकाश का प्रिज़्म से गुज़रकर अपने सात वर्णों में बँट जाना।
💡 क्रम: बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल। लाल सबसे कम झुकता है।
वायुमंडल में वायु की बदलती सघनता के कारण प्रकाश का अपवर्तन।
💡 तारों का टिमटिमाना। सूर्य सूर्योदय से लगभग 2 मिनट पहले और सूर्यास्त के लगभग 2 मिनट बाद तक दिखता है।
कणों द्वारा प्रकाश का अलग-अलग दिशाओं में बिखरना। कोलॉइडी कणों से बिखरकर प्रकाश-पथ दिखना टिंडल प्रभाव है।
💡 उदाहरण: धुएँ भरे कमरे में रोशनी की किरण दिखना।
वायुमंडल के सूक्ष्म कण छोटी तरंगदैर्ध्य वाले नीले प्रकाश को अधिक बिखेरते हैं।
💡 सूर्योदय और सूर्यास्त पर सूर्य लाल दिखता है, क्योंकि प्रकाश को अधिक दूरी पार करनी पड़ती है और नीला बिखर जाता है।
इस नाम का शब्द नहीं मिला। दूसरा रूप या English में लिखकर देखें।
भ्रम की जोड़ियाँ: अंतर एक नज़र में
| जोड़ी | अंतर |
|---|---|
| दर्पण सूत्र / लेंस सूत्र | दर्पण: 1/v + 1/u = 1/f। लेंस: 1/v − 1/u = 1/f। |
| अवतल दर्पण / अवतल लेंस | अवतल दर्पण परावर्तन से किरणें जोड़ता (अभिसारी) है। अवतल लेंस अपवर्तन से किरणें फैलाता (अपसारी) है। |
| निकट-दृष्टि / दीर्घ-दृष्टि | निकट-दृष्टि: दूर की वस्तु धुँधली, सुधार अवतल लेंस। दीर्घ-दृष्टि: निकट की वस्तु धुँधली, सुधार उत्तल लेंस। |
शब्द पहचानो: 5 त्वरित प्रश्न
पहले खुद सोचिए, फिर प्रश्न पर छूकर उत्तर देखिए।
एक उत्तल लेंस की फोकस दूरी 50 cm है। उसकी क्षमता कितनी है?
P = 1/f = 1/0.5 = +2 D। (f को हमेशा मीटर में लेना है।)
निकट-दृष्टि दोष को किस लेंस से ठीक करते हैं?
उपयुक्त क्षमता के अवतल लेंस से।
अवतल दर्पण में वस्तु C पर रखी है। प्रतिबिंब कहाँ और कैसा बनेगा?
C पर, समान आकार का, वास्तविक और उलटा।
इसी विषय के और पन्ने
पाठ्यपुस्तक के अध्याय (NCERT हिन्दी PDF)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस शब्दकोश में कौन-से अध्याय हैं?
कक्षा 10 विज्ञान के अध्याय 9 और 10: प्रकाश – परावर्तन तथा अपवर्तन, और मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार। रसायन के शब्द भाग 1 में हैं और विद्युत व चुंबकत्व के शब्द भाग 3 में।
शब्द किस पुस्तक के अनुसार हैं?
NCERT की 2026-27 की हिन्दी पाठ्यपुस्तक के अनुसार। दूसरा प्रचलित नाम कोष्ठक में है। अर्थ और चित्र हमारे अपने हैं, इसलिए परिभाषा अपनी पुस्तक से मिलाकर याद करें।
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